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पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का शुभारंभ: कारीगरों को मिला राष्ट्रीय मंच, ‘विरासत से विकास’ की सशक्त झलक

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केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने आज नई दिल्ली के दिल्‍ली हाट, आईएनए में पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एमएसएमई तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, इराक और रवांडा के राजदूत, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, कारीगर तथा अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जीतन राम मांझी ने पीएम विश्वकर्मा योजना की उपलब्धियों को रेखांकित किया और प्रदर्शनी के आयोजन के लिए मंत्रालय की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह योजना गांव स्तर के कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना देश के हर विश्वकर्मा को बाजार से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बना रही है।

राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में पीएम विश्वकर्मा पहल ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि 117 से अधिक कारीगरों की इस हाट में भागीदारी यह दर्शाती है कि योजना किस तरह गांवों के कारीगरों को वैश्विक अवसरों से जोड़ रही है। यह सफलता भारत सरकार और एमएसएमई मंत्रालय के सतत प्रयासों का परिणाम है।

एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने पीएम विश्वकर्मा को “विरासत से विकास” की भावना को साकार करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा अपनी पारंपरिक दक्षताओं को आगे बढ़ाते हुए देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहे हैं।

अपर सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने कहा कि विश्वकर्मा भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के इंजन हैं। उन्होंने योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों और कारीगरों के लिए सृजित नए विपणन अवसरों पर प्रकाश डाला।


कार्यक्रम के दौरान बिहार और राजस्थान की थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोकनृत्य भी आयोजित किए गए, जिन्होंने आयोजन में रंग और उत्साह भर दिया।

पीएम विश्वकर्मा हाट 2026 का आयोजन 18 से 31 जनवरी 2026 तक दिल्‍ली हाट में किया जा रहा है। यह प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 10:00 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। प्रदर्शनी में देशभर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आए 117 से अधिक कारीगर भाग ले रहे हैं। यहां हस्तनिर्मित उत्पाद, लाइव शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक अनुभव प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो “विश्वकर्मा का अभियान, विकसित भारत का निर्माण” की भावना को सजीव करते हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों को पहचान पत्र और प्रमाण पत्र, ₹500 प्रतिदिन का प्रशिक्षण भत्ता, ₹15,000 तक टूलकिट सहायता, ₹3 लाख तक का बिना गारंटी ऋण, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन तथा ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से विपणन सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।


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