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ठंडे परमाणुओं की रियल-टाइम और गैर-विनाशकारी माप के लिए नई तकनीक विकसित

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वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से ठंडे परमाणुओं (Cold Atoms) की स्थानीय घनत्व (Local Density) को वास्तविक समय (Real Time) में मापा जा सकता है, वह भी बिना उन्हें उल्लेखनीय रूप से प्रभावित किए। यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सेंसिंग जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां परमाणुओं और उनकी क्वांटम अवस्था की सटीक और त्वरित पहचान अनिवार्य होती है।

RDSNS एक गैर-आक्रामक (नॉन-इनवेसिव) मापन तकनीक है, जो हमें परमाणु बादल को उच्च समयिक और स्थानिक विभेदन (हाई टेम्पोरल व स्पैशियल रेज़ोल्यूशन) के साथ जांचने में सक्षम बनाती है।

परंपरागत कोल्ड एटम प्रयोगों में, लेज़र कूलिंग और ट्रैपिंग तकनीकों के माध्यम से परमाणुओं की गतिज ऊर्जा को लगभग परम शून्य तापमान तक कम किया जाता है। इस अवस्था में परमाणुओं के क्वांटम गुण अधिक स्पष्ट रूप से सामने आते हैं और इन्हें क्वांटम कंप्यूटर व क्वांटम सेंसर्स के संसाधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

हालांकि, इन परमाणुओं की क्वांटम अवस्था को मापने के लिए प्रचलित एब्जॉर्प्शन इमेजिंग और फ्लोरेसेंस इमेजिंग जैसी तकनीकों की अपनी सीमाएं हैं। घने परमाणु बादलों में एब्जॉर्प्शन इमेजिंग प्रभावी नहीं होती, जबकि फ्लोरेसेंस इमेजिंग में अधिक समय लगता है और दोनों ही विधियां अक्सर परमाणुओं की अवस्था को प्रभावित कर देती हैं।

RDSNS तकनीक से मिली बड़ी सफलता

इन्हीं चुनौतियों का समाधान करते हुए, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI)—जो कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान है—के वैज्ञानिकों ने रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) नामक एक नवीन तकनीक का प्रदर्शन किया है।

यह तकनीक स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी पर आधारित है, जिसमें परमाणुओं के स्पिन में होने वाले प्राकृतिक उतार-चढ़ाव को लेज़र प्रकाश के ध्रुवीकरण में आने वाले सूक्ष्म बदलावों के माध्यम से मापा जाता है। इसके साथ ही दो अतिरिक्त लेज़र बीम्स का उपयोग कर परमाणुओं को दो समीपवर्ती स्पिन अवस्थाओं के बीच कोहेरेंट रूप से संचालित किया जाता है।

इन रमन बीम्स के कारण संकेत (सिग्नल) में लगभग दस लाख गुना तक वृद्धि होती है। इस तकनीक में जांच का क्षेत्र मात्र 0.01 घन मिलीमीटर का होता है, जिसे 38 माइक्रोमीटर तक फोकस किए गए प्रोब लेज़र से हासिल किया गया। यह परमाणु बादल के एक अत्यंत छोटे हिस्से में मौजूद लगभग 10,000 परमाणुओं की सटीक स्थानीय घनत्व जानकारी प्रदान करता है, न कि केवल कुल परमाणु संख्या।

प्रयोग और परिणाम

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का उपयोग मैग्नेटो-ऑप्टिकल ट्रैप (MOT) में पोटैशियम परमाणुओं के अध्ययन के लिए किया। उन्होंने पाया कि परमाणु बादल का केंद्रीय घनत्व मात्र एक सेकंड में संतृप्त हो गया, जबकि फ्लोरेसेंस माप के अनुसार कुल परमाणु संख्या को स्थिर होने में लगभग दोगुना समय लगा।

यह अंतर दर्शाता है कि जहां फ्लोरेसेंस तकनीक वैश्विक परमाणु संख्या बताती है, वहीं RDSNS स्थानीय स्तर पर यह दिखाती है कि परमाणु कितनी सघनता से पैक हुए हैं।

QuMIX लैब की रिसर्च असिस्टेंट्स बर्नाडेट वर्षा एफ.जे. और भाग्यश्री दीपक बिडवाई के अनुसार,

“यह तकनीक गैर-विनाशकारी है, क्योंकि प्रोब लेज़र बहुत कम शक्ति पर और फ्रीक्वेंसी से काफी दूर संचालित होती है। माइक्रोसेकंड स्तर की माप में भी कुछ प्रतिशत की सटीकता हासिल की जा सकती है।”

अध्ययन की प्रमुख लेखिका और RRI की पीएचडी शोधार्थी सायरी ने कहा,

“रियल-टाइम और गैर-विनाशकारी इमेजिंग क्वांटम सेंसिंग और कंप्यूटिंग के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह सूक्ष्म घनत्व उतार-चढ़ाव को पकड़कर कई-कणीय (Many-body) गतिकी को उजागर करती है।”

क्वांटम तकनीकों के लिए व्यापक महत्व

RDSNS की वैधता जांचने के लिए, टीम ने इसके परिणामों की तुलना फ्लोरेसेंस इमेजिंग पर आधारित इनवर्स एबेल ट्रांसफॉर्म से की, जिसमें दोनों विधियों के बीच उल्लेखनीय समानता पाई गई। खास बात यह है कि जहां एबेल ट्रांसफॉर्म को अक्षीय सममिति की आवश्यकता होती है, वहीं RDSNS असममित और गतिशील परमाणु बादलों में भी प्रभावी ढंग से काम करती है।

इस तकनीक का महत्व ग्रैविमीटर, मैग्नेटोमीटर और अन्य उच्च-सटीकता वाले क्वांटम सेंसर्स के लिए अत्यधिक है, जहां परमाणु घनत्व की सटीक जानकारी आवश्यक होती है। माइक्रॉन स्तर पर बिना किसी हस्तक्षेप के माप संभव होने से डेंसिटी वेव प्रोपेगेशन, क्वांटम ट्रांसपोर्ट और नॉन-इक्विलिब्रियम डायनेमिक्स जैसे विषयों के अध्ययन के नए रास्ते खुलते हैं।

QuMIX लैब के प्रमुख प्रो. सप्तऋषि चौधुरी ने कहा,

“हमें उम्मीद है कि यह तकनीक कोल्ड एटम प्रयोगों में रियल-टाइम डायग्नॉस्टिक्स के लिए व्यापक रूप से उपयोगी होगी, विशेष रूप से न्यूट्रल एटम आधारित क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सिमुलेशन के क्षेत्र में।”

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत समर्थन

भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत समर्थित यह शोध RRI को क्वांटम मापन और सटीकता के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों की पंक्ति में खड़ा करता है। यह खोज इस बात को भी रेखांकित करती है कि वैज्ञानिक प्रगति हमेशा अधिक तीव्रता से देखने से नहीं, बल्कि अधिक कोमल और बुद्धिमत्तापूर्ण तरीकों से देखने से संभव होती है।


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