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लक्ष्य ज़ीरो डंपसाइट: स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों के कचरा ढेर खत्म करने की भारत की पहल

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) के माध्यम से “ज़ीरो डंपसाइट” का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • अब तक 61% से अधिक लेगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक रूप से निपटान किया जा चुका है।

  • शेष कचरे के लगभग 80% वाले 214 उच्च-प्रभावी डंपसाइट्स को प्राथमिकता दी गई है।

  • रेमेडिएटेड कचरे का उपयोग सड़क निर्माण, नीचले इलाकों की भराई, रिसाइक्लिंग और RDF (रिफ्यूज़-डिराइव्ड फ्यूल) के रूप में किया जा रहा है।

  • डंपसाइट हटने से स्वच्छ हवा, सुरक्षित भूजल, आग की घटनाओं में कमी और भूमि का पुनः उपयोग संभव होता है।

परिचय

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी कचरा प्रबंधन और स्वच्छता ढांचे को मजबूत किया गया है। इसी क्रम में अब ध्यान वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट डंपसाइट्स को समाप्त करने पर केंद्रित है।

इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने नवंबर 2025 में डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) शुरू किया, जिसका लक्ष्य अक्टूबर 2026 तक “लक्ष्य: ज़ीरो डंपसाइट” हासिल करना है।

लेगेसी डंपसाइट्स: वर्तमान स्थिति

देशभर में लगभग 2,479 डंपसाइट्स चिन्हित की गई हैं, जिनमें करीब 25 करोड़ मीट्रिक टन कचरा जमा है और जो लगभग 15,000 एकड़ भूमि पर फैली हुई हैं।
वर्तमान में 1,428 डंपसाइट्स पर कार्य प्रगति पर है और 62% से अधिक कचरे का निपटान हो चुका है।

साल 2025 में ही 26 राज्यों के 438 शहरों में 459 डंपसाइट्स पूरी तरह रेमेडिएट की गईं।

स्वच्छ भारत से ‘मिशन ज़ीरो’ तक

SBM-Urban 2.0 (2021) के तहत कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया। DRAP इसी का अगला चरण है, जो पुराने कचरा ढेर खत्म करने और नए डंपसाइट बनने से रोकने पर केंद्रित है।

DRAP का 5P फ्रेमवर्क

यह कार्यक्रम 5P मॉडल पर आधारित है:

  1. राजनीतिक नेतृत्व (Political Leadership) – वरिष्ठ नेताओं द्वारा डंपसाइट गोद लेना

  2. सार्वजनिक वित्त (Public Finance) – ₹550 प्रति टन तक केंद्रीय वित्तीय सहायता

  3. साझेदारी (Partnerships) – PSU, उद्योग, सीमेंट प्लांट, NGOs के साथ सहयोग

  4. जनभागीदारी (People’s Participation) – स्थानीय समुदाय और सफाई मित्रों की भागीदारी

  5. परियोजना प्रबंधन (Project Management) – तकनीक आधारित निगरानी और जवाबदेही

डंपसाइट से संसाधन तक: बायोमाइनिंग प्रक्रिया

बायोमाइनिंग के जरिए पुराने कचरे को वैज्ञानिक ढंग से अलग-अलग हिस्सों में बदला जाता है:

  • इनर्ट व मिट्टी जैसे पदार्थ – सड़क व भूमि भराई में उपयोग

  • C&D वेस्ट – ईंट, टाइल, पावर ब्लॉक निर्माण

  • RDF – सीमेंट व ऊर्जा संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में

  • रीसाइक्लेबल्स – प्लास्टिक, कागज़, धातु

  • बायोडिग्रेडेबल कचरा – खाद और ऊर्जा उत्पादन

  • केवल अप्रयोज्य अवशेष वैज्ञानिक लैंडफिल में

SBM-Urban 2.0 के तहत कचरा प्रोसेसिंग ढांचा

  • 2,900 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) कार्यरत

  • 2,800 कम्पोस्ट प्लांट

  • 131 बायोमीथनेशन प्लांट

  • 17 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

आगे की राह: स्वच्छ शहर, स्वस्थ जीवन

2026 तक ज़ीरो डंपसाइट का लक्ष्य न केवल शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाएगा, बल्कि

  • SDG-11 (सतत शहर)

  • SDG-12 (जिम्मेदार उपभोग)

  • SDG-13 (जलवायु कार्रवाई)
    को भी मजबूती देगा।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप स्वच्छ, टिकाऊ और संसाधन-कुशल शहरों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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