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NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन, स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने पर युवाओं को दिया फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश

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नई दिल्ली- भारत की स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने रविवार (2 अगस्त 2026) को NCC साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा देशभक्ति, अनुशासन, एकता और राष्ट्रीय सेवा जैसे NCC के मूल्यों को सुदृढ़ करना था।

साइक्लोथॉन को केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज एम.सी. मैरी कॉम, दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस तथा एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के तहत 79 एनसीसी कैडेटों ने स्वतंत्रता के 79 वर्षों का प्रतीकात्मक संदेश देते हुए 79 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी की। साइक्लोथॉन की शुरुआत मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम से हुई और राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए यात्रा का समापन भी वहीं हुआ।

"स्वच्छ भारत, हरित भारत, फिट इंडिया" थीम पर आयोजित इस साइक्लोथॉन के माध्यम से टीबी मुक्त भारत, स्वच्छ भारत अभियान, एक पेड़ मां के नाम और हर घर तिरंगा जैसे राष्ट्रीय अभियानों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। साथ ही लोगों को पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ परिवहन के रूप में साइकिल अपनाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण मंच भी बना। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और सामुदायिक सेवा की भावना अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव के दूत बनने का आह्वान किया गया।

NCC साइक्लोथॉन 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्वस्थ, हरित और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

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वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

250 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, बल्क वेस्ट जेनरेटरों की जवाबदेही और जीरो वेस्ट स्टेट के लक्ष्य पर दिया गया जोर

रायपुर- छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

क्षेत्रीय अधिकारी पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यशाला में राज्य सलाहकार मोनिका सिंह एवं पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा, केंद्रीय मंत्री ने जताई चिंता

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नई दिल्ली- केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में झारखंड के शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत धनराशि के कम व्यय पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मिशन के अंतर्गत उपयोग किए गए जल प्रबंधन, शौचालय एवं मूत्रालय निर्माण, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) तथा वेस्ट-टू-कम्पोस्ट परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी के कारणों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति तेज करने के लिए स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए गए, जिनकी निगरानी केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों द्वारा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में शुरू किए गए अर्बन चैलेंज फंड की भी जानकारी दी और राज्य सरकार से स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत अपने प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

झारखंड सरकार ने आश्वासन दिया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत सभी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के स्वच्छ और विकसित भारत के विजन को दोहराते हुए कहा कि सरकार झारखंड के शहरी क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर में स्वच्छता और जनजागरूकता की नई मिसाल, DBT के अभियान को मिली बड़ी सफलता

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नई दिल्ली- स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 1 मई से 15 मई 2026 तक देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का सफल आयोजन किया। इस दौरान नई दिल्ली स्थित विभागीय मुख्यालय के साथ-साथ सभी स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।

पखवाड़े की शुरुआत 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

पंद्रह दिनों तक चले इस अभियान में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता अभियान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा "वेस्ट टू वेल्थ" प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की कला को बढ़ावा दिया गया। जूट बैग वितरण और लकड़ी के पैकिंग मटेरियल से आकर्षक गमले तैयार करने जैसी गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

स्कूलों और समुदायों तक पहुंचा अभियान

स्वच्छता पखवाड़ा केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। आसपास के सरकारी स्कूलों में शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण का कार्य किया गया। विद्यार्थियों के बीच निबंध, कविता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

साथ ही प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन (Laboratory Waste Management) पर विशेष व्याख्यान आयोजित कर वैज्ञानिक संस्थानों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

जनभागीदारी और श्रमदान को मिला बढ़ावा

अभियान के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली कई गतिविधियां आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को मिला सम्मान

पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की गई। विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों के आधार पर तीन संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए चुना गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के विजेता संस्थान:

🥇 BRIC - National Institute of Animal Biotechnology (NIAB)

🥈 BRIC - National Agri-Food Biotechnology Institute (NABI)

🥉 BRIC - Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD)

इन संस्थानों को 2 जून 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया गया।

देश को दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश

DBT के इस अभियान ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय आंदोलन है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में यह पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

मुख्य बिंदु:

✅ 1 से 15 मई तक चला स्वच्छता पखवाड़ा 2026
✅ देशभर के DBT संस्थानों में व्यापक आयोजन
✅ वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
✅ स्कूलों में स्वच्छता और शिक्षा सुधार की पहल
✅ वेस्ट टू वेल्थ और प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष जोर
✅ NIAB, NABI और IBSD बने सर्वश्रेष्ठ संस्थान

भलस्वा डंपसाइट का निरीक्षण: मनोहर लाल खट्टर ने की कचरा निस्तारण कार्यों की समीक्षा, सितंबर तक पूर्ण सफाई के निर्देश

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दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट पर चल रहे पुराने कचरे के निस्तारण कार्य की समीक्षा के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आज स्थल का दौरा किया। यह उनकी दूसरी ऑन-साइट निरीक्षण यात्रा थी, जिसमें उन्होंने नगरपालिका निगम दिल्ली (MCD) द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।

DRAP पहल के तहत भलस्वा डंपसाइट का पुनर्विकास

यह डंपसाइट “डंपसाइट रेमेडिएशन एंड एक्शन प्लान (DRAP)” के तहत अपनाया गया है, जो आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत चलाया जा रहा एक राष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य देशभर के प्रमुख कचरा स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकास कर “लक्ष्य शून्य डंपसाइट” प्राप्त करना है।

 मनोहर लाल ने 15 सितंबर 2025 को इस डंपसाइट को औपचारिक रूप से अपनाने की घोषणा की थी और 17 सितंबर 2025 को “स्वच्छता ही सेवा” अभियान के तहत इसका स्थल निरीक्षण भी किया गया था।

कचरा निस्तारण में प्रगति

अधिकारियों ने बताया कि जून 2022 में यहां लगभग 73 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा मौजूद था। जुलाई 2022 से बायोमाइनिंग कार्य लगातार जारी है और प्रतिदिन लगभग 15 हजार मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है।

26 मई 2026 तक यहां बचे हुए पुराने और नए कचरे की मात्रा घटकर लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन रह गई है। अब तक लगभग 43 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त की जा चुकी है, जबकि कुल साइट का क्षेत्रफल लगभग 70 एकड़ है।

पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वच्छ भारत अभियान” के विजन के अनुरूप यहां वैज्ञानिक तरीकों से कचरा निस्तारण किया जा रहा है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं में सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

मंत्री के निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बायोमाइनिंग, पर्यावरण सुरक्षा, आग से बचाव, लीचेट प्रबंधन और आगे की कार्ययोजना की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए

  • सितंबर तक डंपसाइट का पूर्ण पुनर्विकास सुनिश्चित किया जाए

  • प्रतिदिन उत्पन्न नए कचरे का तुरंत निस्तारण हो

  • भविष्य में कोई नया पुराना कचरा जमा न होने दिया जाए

  • पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग जनहित और सामुदायिक कार्यों के लिए किया जाए

इस निरीक्षण में एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी मंत्री को दी।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: न्याय विभाग की स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत की पहल

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न्याय विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पखवाड़े के दौरान 02.04.2026 को सभी के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिससे कर्मचारियों को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।

09.04.2026 को विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और स्वच्छ जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

10.04.2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात नीरज वर्मा, सचिव (न्याय) के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को अपने आसपास भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

इसी दिन अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्वच्छता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

13.04.2026 को विभाग द्वारा iGOT Mission LiFE (Lifestyle for Environment) पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में सतत आदतों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस सत्र में ‘यूज़ एंड डिस्पोज़’ अर्थव्यवस्था के स्थान पर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को अपनाने और ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यस्थलों और समाज में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


न्याय विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी स्वच्छता एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल, अभियान और गतिविधियाँ जारी रखेगा।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत विधि कार्य विभाग ने चलाया जागरूकता अभियान

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स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग द्वारा स्वच्छता, स्वास्थ्य और जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

इस अभियान की शुरुआत शास्त्री भवन स्थित कॉन्फ्रेंस रूम में सामूहिक स्वच्छता शपथ और स्वच्छ भारत गीत के साथ हुई। 2 अप्रैल 2026 को विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।

कार्यालय परिसर में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसके माध्यम से कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ने और इसे सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

जागरूकता बढ़ाने के लिए सेल्फी बूथ की भी व्यवस्था की गई, जहां प्रतिभागियों ने स्वच्छता के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इसके अलावा रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आकर्षक चित्र प्रस्तुत किए गए।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कार्यस्थल और समाज में स्वच्छता बनाए रखने के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश मजबूत हुआ।

विधि कार्य विभाग ने स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वालों पर की जाए कड़ी कार्यवाही- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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निजी हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना: पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए - मुख्यमंत्री साय

केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए। 

मुख्यमंत्री साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए।

इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की।

बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया।

बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  मुख्य सचिव विकासशील, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम,  अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव एस. बसवराजू  सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘स्वच्छता पखवाड़ा 2026’ के तहत चलाया स्वच्छता और जागरूकता अभियान

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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 16 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा के तहत स्वच्छता और जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया। इस अभियान के माध्यम से विभाग ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

वर्ष 2026 विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा के क्रियान्वयन का लगातार 11वां वर्ष है। अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए DFPD से जुड़े सभी संगठनों और कार्यालयों को विस्तृत दिशा-निर्देशों के साथ गतिविधियों का कैलेंडर भेजा गया, ताकि अभियान में समन्वित और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

अभियान की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को उद्घाटन समारोह के साथ हुई, जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छता शपथ ली। यह शपथ खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार के नेतृत्व में दिलाई गई, जिसमें कार्यस्थलों और दैनिक जीवन में स्वच्छता के सर्वोत्तम तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया गया।

पखवाड़े के दौरान कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करना, प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना और वृक्षारोपण अभियान शामिल थे। विभाग के कार्यालयों में स्वच्छता के महत्व को दर्शाने वाले बैनर और पोस्टर भी लगाए गए।

DFPD के अंतर्गत आने वाले सभी संगठनों ने “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए दैनिक रूप से अभियान में भाग लिया। इस दौरान कार्यालय परिसरों की सफाई, अनावश्यक सामान हटाना, धूल-सफाई और सैनिटाइजेशन, कचरे का पृथक्करण तथा शौचालयों और अन्य साझा स्थानों की साफ-सफाई जैसे कार्य किए गए, जिससे कार्यस्थल को अधिक स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके।

अभियान के अंतर्गत सफाई मित्रों के योगदान को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वच्छता कर्मियों को उनके समर्पित कार्य के लिए धन्यवाद स्वरूप उपहार भेंट किए गए।

विभाग ने स्वच्छता के इस अभियान को निरंतर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

छटेरा मुनिबाबा आश्रम हाइक पर पहुंचे स्काउट गाइड के विद्यार्थी,नुक्कड़ नाटक कर दिया जनजागरण व स्वच्छता का संदेश

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आरंग- सोमवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा के स्काउट गाइड के छात्र छात्राएं प्रभारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल और गिधवा के शिक्षक डोमन डहरिया के मार्गदर्शन में सायकल से मुनि बाबा आश्रम छटेरा हाइक पर पहुंचे।वहां चौराहे पर पहुंचते ही बच्चों ने स्वच्छता व जन जागरूकता पर नारे,नुक्कड़ नाटक और मंदिर परिसर की साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया। शिक्षक महेन्द्र पटेल ने बताया स्काउट गाइड के छात्र छात्राओं को चार दलो में बांटा गया था।सभी दलों का,बिना बर्तन के अधिक से अधिक पकवान बनाने का प्रतिस्पर्धा रखा गया था। जिसमें सुभाष दल प्रथम,रानी लक्ष्मीबाई दल द्वितीय, रानी दुर्गावती दल तृतीय, तथा भगतसिंह दल चतुर्थ स्थान पर रहें।

इस हाइक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जनपद पंचायत आरंग उपाध्यक्ष रवींद्र रिंकु चन्द्राकार रहे। उन्होंने बच्चों व शिक्षको का उत्साह देखते हुए एक हजार रुपए नगद प्रदान किया। तथा विभिन्न प्रेरक प्रसंगो के माध्यम से प्रेरित करते हुए कहा वर्तमान में पुस्तकीय ज्ञान के साथ साथ अन्य गतिविधियों से भी बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा या तो जीत मिलती है या सीख मिलता है।हमें दोनों परिस्थितियों में कुछ न कुछ सीखने को जरूर मिलता है।उन्होंने बहुत ही कम समय में स्काउट गाइड के बच्चों द्वारा बिना बर्तन के करीब चालीस प्रकार के व्यंजनों को देख काफी प्रफूल्लित हुए।उन्होंने स्काउट गाइड प्रभारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, डोमन डहरिया सहित अन्य  शिक्षक दीनदयाल धीवर,डिलेश्वर प्रसाद साहू शिक्षिका संगीता पाटले द्वारा बच्चो को सहयोग व प्रेरित करने की जमकर सराहना करते हुए कहा आज समाज के लिए कार्य करने वाले बहुत ही कम लोग हैं। राष्ट्रीयता की भावना,सेवा,स्वच्छता, पर्यावरण व संस्कृति संरक्षण सहित जनजागरण की दिशा में इस प्रकार के रचनात्मक कार्य जनमानस के लिए प्रेरक है। बच्चों ने मार्च पास्ट और स्काउट गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। साथ ही आकर्षक मीनार की श्रृंखला बनाया जो आकर्षण का केंद्र रहा।इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्काउट गाइड के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।



लक्ष्य ज़ीरो डंपसाइट: स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों के कचरा ढेर खत्म करने की भारत की पहल

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) के माध्यम से “ज़ीरो डंपसाइट” का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • अब तक 61% से अधिक लेगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक रूप से निपटान किया जा चुका है।

  • शेष कचरे के लगभग 80% वाले 214 उच्च-प्रभावी डंपसाइट्स को प्राथमिकता दी गई है।

  • रेमेडिएटेड कचरे का उपयोग सड़क निर्माण, नीचले इलाकों की भराई, रिसाइक्लिंग और RDF (रिफ्यूज़-डिराइव्ड फ्यूल) के रूप में किया जा रहा है।

  • डंपसाइट हटने से स्वच्छ हवा, सुरक्षित भूजल, आग की घटनाओं में कमी और भूमि का पुनः उपयोग संभव होता है।

परिचय

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी कचरा प्रबंधन और स्वच्छता ढांचे को मजबूत किया गया है। इसी क्रम में अब ध्यान वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट डंपसाइट्स को समाप्त करने पर केंद्रित है।

इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने नवंबर 2025 में डंपसाइट रेमेडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (DRAP) शुरू किया, जिसका लक्ष्य अक्टूबर 2026 तक “लक्ष्य: ज़ीरो डंपसाइट” हासिल करना है।

लेगेसी डंपसाइट्स: वर्तमान स्थिति

देशभर में लगभग 2,479 डंपसाइट्स चिन्हित की गई हैं, जिनमें करीब 25 करोड़ मीट्रिक टन कचरा जमा है और जो लगभग 15,000 एकड़ भूमि पर फैली हुई हैं।
वर्तमान में 1,428 डंपसाइट्स पर कार्य प्रगति पर है और 62% से अधिक कचरे का निपटान हो चुका है।

साल 2025 में ही 26 राज्यों के 438 शहरों में 459 डंपसाइट्स पूरी तरह रेमेडिएट की गईं।

स्वच्छ भारत से ‘मिशन ज़ीरो’ तक

SBM-Urban 2.0 (2021) के तहत कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया। DRAP इसी का अगला चरण है, जो पुराने कचरा ढेर खत्म करने और नए डंपसाइट बनने से रोकने पर केंद्रित है।

DRAP का 5P फ्रेमवर्क

यह कार्यक्रम 5P मॉडल पर आधारित है:

  1. राजनीतिक नेतृत्व (Political Leadership) – वरिष्ठ नेताओं द्वारा डंपसाइट गोद लेना

  2. सार्वजनिक वित्त (Public Finance) – ₹550 प्रति टन तक केंद्रीय वित्तीय सहायता

  3. साझेदारी (Partnerships) – PSU, उद्योग, सीमेंट प्लांट, NGOs के साथ सहयोग

  4. जनभागीदारी (People’s Participation) – स्थानीय समुदाय और सफाई मित्रों की भागीदारी

  5. परियोजना प्रबंधन (Project Management) – तकनीक आधारित निगरानी और जवाबदेही

डंपसाइट से संसाधन तक: बायोमाइनिंग प्रक्रिया

बायोमाइनिंग के जरिए पुराने कचरे को वैज्ञानिक ढंग से अलग-अलग हिस्सों में बदला जाता है:

  • इनर्ट व मिट्टी जैसे पदार्थ – सड़क व भूमि भराई में उपयोग

  • C&D वेस्ट – ईंट, टाइल, पावर ब्लॉक निर्माण

  • RDF – सीमेंट व ऊर्जा संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में

  • रीसाइक्लेबल्स – प्लास्टिक, कागज़, धातु

  • बायोडिग्रेडेबल कचरा – खाद और ऊर्जा उत्पादन

  • केवल अप्रयोज्य अवशेष वैज्ञानिक लैंडफिल में

SBM-Urban 2.0 के तहत कचरा प्रोसेसिंग ढांचा

  • 2,900 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) कार्यरत

  • 2,800 कम्पोस्ट प्लांट

  • 131 बायोमीथनेशन प्लांट

  • 17 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

आगे की राह: स्वच्छ शहर, स्वस्थ जीवन

2026 तक ज़ीरो डंपसाइट का लक्ष्य न केवल शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाएगा, बल्कि

  • SDG-11 (सतत शहर)

  • SDG-12 (जिम्मेदार उपभोग)

  • SDG-13 (जलवायु कार्रवाई)
    को भी मजबूती देगा।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप स्वच्छ, टिकाऊ और संसाधन-कुशल शहरों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।


स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने 100% वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की उपलब्धि हासिल की

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लखनऊ में शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के उद्घाटन के साथ शहरी सततता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया है। अब लखनऊ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत 100% वैज्ञानिक रूप से नगर निगम कचरे (Municipal Solid Waste) का प्रोसेसिंग करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है। यह उपलब्धि लखनऊ को ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर का दर्जा देती है।

लखनऊ: बढ़ती शहरी चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों वाला एक तेज़ी से बढ़ता शहरी केंद्र है। इस तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और विकास के साथ कचरा प्रबंधन, पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। लखनऊ नगर निगम (LMC) ने इन चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और स्थायी शहरी विकास की रणनीतियों से किया है।

शिवारी प्लांट: तीसरा ताजा कचरा प्रोसेसिंग प्लांट

लखनऊ ने शिवारी में अपना तीसरा Fresh Waste Processing Plant शुरू किया है। इस प्लांट की क्षमता 700 टन प्रतिदिन है। इस प्लांट के साथ लखनऊ नगर निगम अब 2,100 टन प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे को वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस कर सकता है, जिससे खुले में कचरा डालने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

कचरा प्रबंधन का वैज्ञानिक मॉडल

लखनऊ शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसे संभालने के लिए LMC और Bhumi Green Energy ने तीनों प्लांट स्थापित किए हैं, जिनकी क्षमता प्रत्येक 700 टन/दिन है। कचरे को ऑर्गेनिक (55%) और इनऑर्गेनिक (45%) भागों में अलग किया जाता है।

  • ऑर्गेनिक कचरा → कम्पोस्ट और बायोगैस

  • इनऑर्गेनिक कचरा → रिसाइकलिंग / RDF (Refuse Derived Fuel)

  • RDF का उपयोग सीमेंट और पेपर उद्योगों में को-प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है।

लखनऊ की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण क्षमता 96.53% तक बढ़ चुकी है, और सोर्स सेग्रिगेशन (कचरा अलग करने) का स्तर 70% से अधिक है।

लगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निपटान

लखनऊ में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.86 लाख मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा चुका है। इससे RDF, C&D waste, bio-soil, coarse fractions जैसे उपयोगी उत्पाद प्राप्त हुए हैं, जिन्हें:

  • रिसाइकलिंग

  • को-प्रोसेसिंग

  • लैंडफिलिंग

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
    में उपयोग किया गया है।

RDF और अन्य उत्पादों का उपयोग

  • RDF: लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन उद्योगों में भेजा गया

  • Coarse fraction: 4.38 लाख MT

  • Bio-soil: 0.59 लाख MT

  • C&D Waste: 2.35 लाख MT

शिवारी साइट का रूपांतरण

शिवारी साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि को पुनः विकसित किया गया और इसे एक पूर्ण-कार्यात्मक ताजा कचरा उपचार सुविधा में बदला गया। यहाँ windrow pads, internal roads, sheds, weighbridges सहित सम्पूर्ण कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गई है।

आगे की योजना: Waste-to-Energy (WtE) प्लांट

LMC शिवारी में Waste-to-Energy (WtE) प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित 15 MW WtE प्लांट RDF को बिजली में बदलने में सक्षम होगा। यह प्लांट प्रतिदिन 1,000–1,200 टन RDF का उपयोग करेगा, जिससे RDF को दूर के सीमेंट कारखानों तक ले जाने की लागत और दूरी कम होगी।

लखनऊ का मॉडल: सर्कुलर इकोनॉमी की मिसाल

लखनऊ का कचरा प्रबंधन मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों पर आधारित है—
संसाधन पुनर्प्राप्ति, लगेसी वेस्ट न्यूनतम करना, और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना। यह मॉडल न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अन्य शहरों के लिए प्रेरणादायक है।


गडकरी ने बायो-बिटुमेन को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन भारत को विकसित भारत 2047 की दिशा में ले जाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके यह फसल जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करता है और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करता है। 15% मिश्रण के साथ, भारत लगभग ₹4,500 करोड़ विदेशी मुद्रा बचा सकता है और आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।

CSIR के “फार्म रिसिड्यू से रोड तक: बायो-बिटुमेन via पायरोलिसिस” तकनीकी हस्तांतरण समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा,

“आज भारत की सड़क अवसंरचना में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि हमारा देश दुनिया में पहला है, जो व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन कर रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने CSIR और इसके समर्पित वैज्ञानिकों को बधाई दी और इस अग्रणी उपलब्धि को हासिल करने में लगातार समर्थन देने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद भी किया।

गडकरी ने आगे कहा कि यह नवाचार किसानों को सशक्त बनाएगा, ग्रामीण आजीविका सृजित करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। बायो-बिटुमेन, उन्होंने कहा, वास्तव में मोदी सरकार की सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय जिम्मेदार वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।



जल शक्ति मंत्रालय ने ग्रामीण भारत में फेकल स्लज प्रबंधन पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ वर्चुअल बातचीत आयोजित की

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जल शक्ति मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिलों के साथ फेकल स्लज प्रबंधन (FSM) के विभिन्न मॉडल पर वर्चुअल बातचीत का आयोजन किया। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत लागू FSM पहलों के अनुभव साझा करने और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई।

इस बातचीत की अध्यक्षता माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, C. R. पाटिल ने की। इसके साथ ही राज्य मंत्री, V. सोमन्ना, पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना, और संयुक्त सचिव एवं SBM(G) मिशन निदेशक,ऐश्वर्या सिंह भी इस बातचीत में शामिल हुए। विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, स्व-सहायता समूह (SHG) सदस्य, पंचायत सदस्य, राज्य मिशन निदेशक और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअली जुड़े।

इस बातचीत का उद्देश्य देशभर के सफल और स्केलेबल FSM मॉडल साझा करना, राज्यों/जिलों में क्रॉस-लर्निंग को बढ़ावा देना और सुरक्षित स्वच्छता प्रणालियों के महत्व को उजागर करना था। इसमें ध्यान सिर्फ शौचालय निर्माण तक सीमित न रहते हुए पूरे स्वच्छता मूल्य श्रृंखला पर केंद्रित था।

प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए:

  • गुजरात, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, लद्दाख और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए।

  • इन मॉडलों में इन-सिटू ट्रीटमेंट मॉडल, सामुदायिक समाधान, SHG और पंचायत के माध्यम से FSTP का संचालन और रखरखाव, तथा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच FSM संबंध शामिल थे।

  • सुरक्षित संग्रहण, परिवहन, उपचार और पुन: उपयोग की गतिविधियों पर चर्चा हुई।

  • कई मॉडलों ने समुदाय स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर भी प्रदान किए।

एक उल्लेखनीय उदाहरण ओडिशा के खोर्दा जिले से आया, जहाँ ट्रांसजेंडर-नेतृत्व वाली SHG अपने FSTP का संचालन और रखरखाव कर रही है। यह पहल दिखाती है कि स्वच्छता सेवा वितरण समान और सतत हो सकती है, साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए गरिमापूर्ण रोजगार अवसर भी सृजित कर सकती है।

अन्य प्रमुख FSM मॉडल में शामिल हैं:

  • गुजरात के डांग जिले में दूरदराज़ के आदिवासी क्षेत्रों में ट्विन-पिट शौचालयों का बड़े पैमाने पर उपयोग।

  • सिक्किम के मंगान जिले में सिंगल-पिट से ट्विन-पिट शौचालयों का रिट्रोफिटिंग, जिससे दूर-दराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों में FSM अनुपालन सुनिश्चित हो।

  • मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के कालिबिल्लोद ग्राम पंचायत में भारत का पहला ग्रामीण FSTP, जहाँ उपचारित जल में मछली पालन और MRF के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

  • कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में क्लस्टर-आधारित FSTP मॉडल, जिसमें SHG का संचालन और रखरखाव में सक्रिय योगदान।

  • लद्दाख के लेह जिले में एकोसैन टॉयलेट्स का निर्माण चरम ठंड, रेगिस्तानी और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में।

  • त्रिपुरा के गोमती जिले में मोबाइल बायो-टॉयलेट्स का संचालन और रखरखाव SHG द्वारा किया जा रहा है, जो सार्वजनिक आयोजनों और मेलों के लिए उपयोगी है।

बातचीत में समुदाय के सदस्य भी शामिल थे, जिन्होंने सीधे अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों को स्थानीय भाषाओं में संवाद करने का अवसर दिया गया, जिससे अनुभव साझा करने में सहजता और उत्साह बढ़ा।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. पाटिल ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि ये नवाचारपूर्ण मॉडल न केवल स्वच्छ भारत में योगदान करते हैं, बल्कि आय और रोजगार के अवसर भी सृजित करते हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लागू किया गया, जो दिखाता है कि चुनौतियाँ स्थायी समाधान को प्रेरित करती हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि FSM ग्रामीण स्वच्छता का महत्वपूर्ण घटक है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण के लिए आवश्यक है, साथ ही संपूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समुदाय की भागीदारी, SHG, पंचायत और अन्य हितधारकों की संलग्नता, और संदर्भ-विशेष, आवश्यकता आधारित और उपयुक्त तकनीकों को अपनाना FSM समाधानों को व्यवहार्य, समावेशी और दीर्घकालिक बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, स्वच्छता के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है और गांधीजी के स्वच्छता और जन सहभागिता के संदेश को देश के हर कोने तक पहुँचाया है।

जल शक्ति मंत्रालय ने पुनः अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ग्रामीण भारत में FSM के तहत किए जा रहे कार्यों को सुदृढ़ करने, तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और नवाचार, समुदाय-नेतृत्व वाले एवं समावेशी मॉडलों के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समर्थन करता रहेगा।


“हमारा शौचालय, हमारा भविष्य” अभियान: स्वच्छता, स्वास्थ्य और गरिमा के लिए सामूहिक पहल

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19 नवंबर को शुरू हुआ “हमारा शौचालय, हमारा भविष्य” अभियान 10 दिसंबर – मानवाधिकार दिवस पर सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। यह तीन सप्ताह का अभियान केवल स्वास्थ्य, गरिमा और समाजिक समृद्धि के लिए स्वच्छता और सफाई के महत्व पर केंद्रित नहीं था, बल्कि ग्रामीण शौचालयों (IHHLs) और सामुदायिक शौचालय परिसरों (CSCs) के कार्यात्मक मूल्यांकन, मरम्मत, सौंदर्यीकरण और स्वीकृति पर भी जोर देता था। अभियान ने संचालन एवं रखरखाव (O&M) को मजबूत करने और मल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन एवं रेट्रोफिटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियां

  • 1 लाख से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (IHHLs) और 5,500 से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों (CSCs) की मरम्मत और सौंदर्यीकरण किया गया।

  • 49,000 से अधिक IEC/BCC कार्यक्रमों में 32.70 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। सबसे अधिक भागीदारी तमिलनाडु (4.86 लाख) और गुजरात (4.50 लाख) में रही।

  • फिकल स्लज प्रबंधन (FSM) और रेट्रोफिटिंग पर 10,800 से अधिक जागरूकता सत्रों में 6.43 लाख लोग शामिल हुए।

  • स्कूलों में 9,800 से अधिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 6.8 लाख लोग शामिल हुए।

  • 5,600 से अधिक चौपालें आयोजित की गईं।

  • 3,800 से अधिक वॉल पेंटिंग/वॉल आर्ट की गई।

समुदाय और भागीदारी

अभियान ने जन भागीदारी (Jan Bhagidari) के माध्यम से समुदायों, स्कूलों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और संस्थाओं में स्वच्छता को साझा जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया। अभियान ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण, रखरखाव और सामुदायिक जागरूकता को सुदृढ़ किया।

संचालन और प्रभाव

  • अभियान को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जल शक्ति मंत्रालय, जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आयोजित किया।

  • सोशल मीडिया पर #HumaraShauchalayHumaraBhavishaya ने 3.2K उल्लेख, 35K इंप्रेशन और 1 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई।

अभियान ने एक मजबूत आधार तैयार किया है और यह दर्शाता है कि भारत की संपूर्ण स्वच्छता (Sampoorna Swachhata) की यात्रा जारी है। सामूहिक प्रयास और जन भागीदारी आगे भी मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वच्छता स्टार्टअप कॉन्क्लेव में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का उद्घाटन

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भारत, जो अब दुनिया में तीसरे स्थान पर है और 100 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स का घर बन चुका है, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार के लिए एक शक्ति बन गया है। इस तेजी को आगे बढ़ाते हुए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने स्टार्टअप इनक्यूबेशन और इनोवेशन सेंटर (SIIC), IIT कानपुर के साथ साझेदारी में 24 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में स्वच्छता स्टार्टअप कॉन्क्लेव आयोजित किया, जहां स्वच्छता और कचरा प्रबंधन क्षेत्र के स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का शुभारंभ किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • राज्य मंत्री, MoHUA, टोकन साहू ने स्टार्टअप्स के दूसरे कोहोर्ट का उद्घाटन किया।

  • टोकन साहू ने बताया कि पिछले दशक में स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन (SBM-U) ने पारंपरिक कचरा प्रबंधन को अत्याधुनिक, तकनीक-संचालित समाधानों में बदल दिया है। स्टार्टअप्स के साथ जुड़कर युवा नवाचारकों को सशक्त बनाना, रोजगार सृजन और स्थायी शहरों के निर्माण में मदद कर रहा है।

  • मिशन ने स्थानीय स्तर पर विकसित, लागत-कुशल नवाचारों और व्यवसाय मॉडल को अपनाने पर जोर दिया है, और ‘वोकल फॉर लोकल’ व ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है।

  • स्वच्छता स्टार्टअप चैलेंज 2022 के पहले कोहोर्ट में 230+ आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें से 30 स्टार्टअप्स को तकनीकी और वित्तीय समर्थन के लिए चुना गया। इन स्टार्टअप्स ने 300+ लाख लीटर अपशिष्ट जल का उपचार, 63,000+ मीट्रिक टन कचरा प्रबंधित, 15,000 मीट्रिक टन सड़क कचरा साफ किया और 200 मीट्रिक टन जैविक कचरा प्रोसेस किया। इनकी कुल वैल्यू ₹500 करोड़ से अधिक है और 2,000 से अधिक रोजगार सृजित किए गए।

  • कोहोर्ट 2 में 32 स्टार्टअप्स शामिल हैं, जो सर्कुलर वेस्ट मैनेजमेंट, सेग्रिगेशन, डेस्लडिंग और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नवाचार कर रहे हैं। IIT कानपुर और शहरी स्थानीय निकायों के सहयोग से इन्हें मेंटरशिप, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मार्केट एक्सेस प्रदान किया जाएगा।

लक्ष्य:

MoHUA का लक्ष्य कचरा प्रबंधन स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना और एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां स्टार्टअप्स, निवेशक, शहरी स्थानीय निकाय और अन्य हितधारक आपस में जुड़ सकें। इस पहल के माध्यम से तकनीक-संचालित, स्वच्छ और टिकाऊ शहरी समाधानों को तेजी से अपनाया जा सकेगा।

यह कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन के तहत तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप सहभागिता को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पूरे देश में स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर शहरी वातावरण के निर्माण में योगदान देगा।

विश्व शौचालय दिवस 2025 पर ‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ अभियान का शुभारंभ

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जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने विश्व शौचालय दिवस 2025 पर राष्ट्रव्यापी अभियान ‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ लॉन्च किया।

‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ अभियान शौचालयों के महत्व और उनके उचित रखरखाव को दोहराता है, ताकि आज समुदायों को सुरक्षित स्वच्छता उपलब्ध कराई जा सके और स्वच्छ व स्वस्थ भविष्य का निर्माण किया जा सके। यह अभियान ग्रामीण शौचालयों—सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (CSCs) और व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (IHHLs)—की कार्यात्मक मूल्यांकन, मरम्मत और सौंदर्यीकरण पर जोर देता है। यह स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के उद्देश्यों के अनुरूप है।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य:

  • CSCs और IHHLs की कार्यक्षमता बढ़ाना और आवश्यक मरम्मत करना

  • सामुदायिक शौचालयों के मौजूदा O&M (संचालन एवं रखरखाव) तंत्र का मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण

  • समुदायों को अपने CSCs और IHHLs के सौंदर्यीकरण के लिए प्रोत्साहित करना

  • समुदाय और विशेषकर विद्यालयों में जागरूकता बढ़ाना, विशेष रूप से:

    • व्यक्ति, समुदाय और देश के लिए स्वच्छता और हाइजीन के महत्व पर

    • मल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन पर, जिसमें रेट्रोफिटिंग या सामुदायिक फीकल स्लज प्रबंधन व्यवस्था की ओर बढ़ना शामिल है

    • जलवायु-सहनीय (Climate Resilient) स्वच्छता और सेवा वितरण प्रोटोकॉल पर

  • ‘संपूर्ण स्वच्छता’ के लिए जन भागीदारी को मजबूत करना

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 2014 में लॉन्च होने के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता तक पहुंच सुनिश्चित करने और गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) बनाने में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसमें 2019 तक 11 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए। 2020 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II लॉन्च किया गया, जो ODF स्थिरता और ODF प्लस मॉडल गांव पर केंद्रित है। ‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ अभियान के दौरान राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बनाए गए जमीनी स्तर के तंत्र को और मजबूत करने के लिए कहा गया है।

अभियान को क्रॉस-सेक्टोरल और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु डिजाइन किया गया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर गतिविधियों के लिए जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सभी संबंधित विभागों की भागीदारी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।

राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे स्थानीय विशिष्ट व्यक्तियों/पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं/सेवानिवृत्त सैन्य और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों/वरिष्ठ नागरिकों/युवा समूहों (NSS, NYKS, NCC आदि) और स्कूल छात्रों को भी जागरूकता गतिविधियों में शामिल करें, ताकि शौचालय उपयोग और स्वच्छता को स्थायी बनाने में सहयोग मिल सके। स्वच्छता कर्मियों का सम्मान और पात्र लाभार्थियों को IHHL स्वीकृति पत्र प्रदान करना भी अभियान का हिस्सा है।

अभियान का समापन मानवाधिकार दिवस, 10 दिसंबर 2025 को होगा।


स्वच्छता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बाल दिवस पर किया गया सम्मानित

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आरंग- शुक्रवार को बाल दिवस के अवसर पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में आयोजित कार्यक्रम में स्वच्छता में अहम् भूमिका निभाने वाले छात्रों को उपहार भेंटकर पुरस्कृत किया गया। संस्था के शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया यहां के बच्चे स्वच्छता संबंधी विविध गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। सितंबर में स्वच्छता पखवाड़ा के तहत्  स्वच्छता संबंधी आयोजित निबंध लेखन, चित्रकारी, नारा लेखन,वाद विवाद, कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को विशेष रूप से उपहार भेंटकर पुरस्कृत किया गया। साथ ही स्वच्छता में विशेष रूप से रूचि लेने वाली कक्षा आठवीं के छात्रा कुमारी भूमिका धीवर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे सीआरपीएफ कैंप भिलाई के सहायक कमांडेंट प्रवीण मोरे ने बच्चों में स्वच्छता संबंधी आदतें व स्वच्छता संबधी शिक्षकों की सक्रियता की मुक्त कंठ से सराहना किये। साथ ही ग्राम के सरपंच देवशरण धीवर व एसएमसी अध्यक्ष हेमाराम परमार ने भी शाला में स्वच्छता गतिविधियां शिक्षको की सक्रियता की जमकर सराहना किए। वहीं शनिवार को यहां की शिक्षिका संगीता पाटले ने बच्चों को न्योता भोज कराई।जिसका बच्चों ने काफी आनंद उठाया।


गृह मंत्रालय ने स्पेशल कैंपेन 5.0 को सफलतापूर्वक पूरा किया, स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटान में बड़ी उपलब्धि

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गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक लंबित मामलों के निपटान हेतु स्पेशल कैंपेन 5.0 को सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छता के संस्थागतकरण और सरकारी कार्यों में लंबित मामलों को न्यूनतम करने’ के विज़न से प्रेरित इस अभियान का उद्देश्य मंत्रालय और उसके अंतर्गत आने वाले संगठनों में स्वच्छता बढ़ाना, कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करना और लंबित शिकायतों का समाधान करना था।

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में उन फील्ड और आउटस्टेशन कार्यालयों पर विशेष ध्यान दिया गया जो सीधे जनता से जुड़े हैं।

अभियान के प्रमुख परिणाम

  • प्रारंभ में 4,187 स्थानों की पहचान की गई थी, जिसे बढ़ाकर 7,678 किया गया।

  • 119 सांसद संदर्भ, 199 राज्य सरकार संदर्भ, 3,977 सार्वजनिक शिकायतें, और 718 अपीलों का निपटारा किया गया।

  • अभियान के दौरान 1,94,522 भौतिक फाइलों और 65,997 इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा की गई।

  • 95,186 वर्गफुट जगह खाली कराई गई।

  • कबाड़ निपटान से ₹3.45 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

  • अभियान को बढ़ावा देने हेतु सोशल मीडिया जागरूकता अभियान भी चलाया गया।

अभियान की निगरानी

गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने अभियान की निगरानी और समीक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई।
गृह मंत्रालय के सभी प्रभागों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और संबद्ध संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतिदिन की प्रगति DARPG द्वारा होस्ट किए गए SCPDM पोर्टल पर अपलोड की गई।

अभियान की समयरेखा

  • 15 सितंबर 2025: तैयारी चरण शुरू

  • 2 अक्टूबर–31 अक्टूबर 2025: क्रियान्वयन चरण — मंत्रालय और देशभर के कार्यालयों में आयोजित

अभियान का प्रभाव

अभियान ने:

  • कार्यालयों को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया

  • उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण की संस्कृति को मजबूत किया

  • CAPFs की सक्रिय भागीदारी ने अभियान में नई ऊर्जा जोड़ी

गृह मंत्रालय ने भविष्य में भी स्पेशल कैंपेन 5.0 की गति बनाए रखने, सेवाओं को अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के संकल्प को दोहराया है।

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