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वित्तीय सेवा विभाग ने 2025 में किए ऐतिहासिक सुधार, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में भारत ने रचा नया कीर्तिमान

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नई दिल्ली- वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने वर्ष 2025 में व्यापक और दूरगामी सुधारों के माध्यम से भारत के बैंकिंग, बीमा, पेंशन, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन तंत्र को नई मजबूती प्रदान की है। “आपकी पूँजी, आपका अधिकार” अभियान, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025, EASE 8.0 (EASE₹ise), क्रेडिट लाइन ऑन UPI और Hello! UPI जैसे नवाचारों ने वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

बैंकिंग क्षेत्र ऐतिहासिक मजबूती की ओर

सरकार के सुधारात्मक कदमों के परिणामस्वरूप बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सितंबर 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल एनपीए घटकर 2.05% और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का 2.30% रह गया है।
प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR) बढ़कर SCBs में 93% से अधिक और PSBs में लगभग 95% हो गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में SCBs ने ₹4.01 लाख करोड़ और PSBs ने ₹1.78 लाख करोड़ का अब तक का सर्वाधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया।

EASE सुधारों से बदली PSBs की तस्वीर

EASE एजेंडा के तहत डिजिटल बैंकिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, ग्राहक सेवा और फिनटेक सहयोग को बढ़ावा मिला। EASE₹ise के अंतर्गत जोखिम प्रबंधन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और उत्कृष्टता पर विशेष जोर दिया गया, जिससे PSBs को भविष्य के लिए तैयार किया गया।


डिजिटल भुगतान में भारत वैश्विक अग्रणी

DIGIDHAN मिशन के तहत डिजिटल लेन-देन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई।
वर्ष 2017-18 के 2,071 करोड़ लेन-देन से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 22,831 करोड़ हो गई।
UPI आज देश के कुल खुदरा डिजिटल भुगतानों का लगभग 81% संभाल रहा है और वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49% है।
Hello! UPI, UPI Lite X और क्रेडिट लाइन ऑन UPI ने वरिष्ठ नागरिकों, ग्रामीण क्षेत्रों और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान को सरल बनाया है।

वित्तीय समावेशन को नई गति

प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत 57 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹2.8 लाख करोड़ से अधिक जमा है।
मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, अटल पेंशन योजना और NPS वात्सल्य ने महिलाओं, युवाओं, किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है।

बीमा, NBFC और MSME को बढ़ावा

सबका बीमा, सबकी रक्षा अधिनियम 2025 के माध्यम से बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 100% कर दी गई है।
NBFCs और MSMEs के लिए नई क्रेडिट गारंटी योजनाओं से निवेश और रोजगार सृजन को बल मिला है।
SIDBI ने MSME क्लस्टरों में नए शाखा नेटवर्क का विस्तार किया है।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 में वित्तीय सेवा विभाग के सुधारों ने भारत की वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और समावेशी बनाया है। बैंकिंग स्थिरता, डिजिटल भुगतान में वैश्विक नेतृत्व और व्यापक वित्तीय समावेशन के साथ DFS ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।


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