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निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा: NCB और UltraTech Cement के बीच MoU हस्ताक्षरित

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 भारत के निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स (NCB) ने एक प्रमुख सीमेंट निर्माता कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह MoU आज एनसीबी, बल्लभगढ़ में एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह और अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के तकनीकी सेवाओं के प्रमुख इंजीनियर राहुल गोयल द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. एल. पी. सिंह ने कहा कि यह सहयोग निर्माण क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल के तहत अगले 3–5 वर्षों में बड़ी संख्या में पेशेवरों और श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह साझेदारी देशभर में संरचित प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रमों पर केंद्रित होगी, जिसका उद्देश्य सिविल इंजीनियरों, रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) पेशेवरों, ठेकेदारों, निर्माण श्रमिकों और राजमिस्त्रियों की क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण में सामग्री गुणवत्ता परीक्षण, कंक्रीट मिश्रण अनुपात, स्थायित्व और सतत निर्माण प्रथाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

इस पहल के अंतर्गत कार्यशालाएं, साइट डेमोंस्ट्रेशन, तकनीकी सेमिनार तथा संयंत्रों और RMC सुविधाओं के दौरे भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे व्यावहारिक समझ और तकनीकी कौशल को और मजबूत किया जा सके।

यह सहयोग भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं, विशेष रूप से ‘स्किल इंडिया मिशन’ के अनुरूप है और देश के बढ़ते बुनियादी ढांचे और आवास क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक कुशल कार्यबल के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

इंडिया स्किल 2025-26 में छत्तीसगढ़ को मिली ऐतिहासिक सफलता

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छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने ईस्ट ज़ोन प्रतियोगिता में जीते 12 पदक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई 

रायपुर- युवाओं की प्रतिभा, तकनीकी दक्षता एवं नवाचार क्षमता को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार का कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित इंडिया स्किल प्रतियोगिता 2025-26 में छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं ने ईस्ट ज़ोन रीजनल प्रतियोगिता में 12 पदक और 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस अर्जित कर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। यह प्रतियोगिता क्रमशः चार चरणों में जिला, राज्य, रीजनल एवं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को वर्ल्ड स्किल्स इंटरनेशनल के अंतर्गत भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त होगा। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। राज्य सरकार कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए आधुनिक प्रशिक्षण, नवाचार और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। यह सफलता सशक्त युवा, समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ईस्ट जोन की रीजनल प्रतियोगिता का समापन 02 मार्च 2026 को भुवनेश्वर में हुआ, जिसमें ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के 200 से अधिक प्रतिभागियों ने 59 कौशल श्रेणियों में भाग लिया। छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 12 पदक एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सम्मान अर्जित किए, जिनमें 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य पदक तथा 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं। 

डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया में सुनील कुमार पैतल ने स्वर्ण पदक, 3डी डिजिटल गेम आर्ट में खुशांक नायक, सीएनसी मिलिंग में पुष्कर सोनबर एवं सीएनसी टर्निंग में आत्माराम ने रजत पदक अर्जित कर राज्य को गौरवान्वित किया। इसी तरह सीएनसी मिलिंग में निखिल, इलेक्ट्रॉनिक्स में अभिषेक कुमार, प्लंबिंग एवं हीटिंग में रेशमान, वेब टेक्नोलॉजी में सतेंद्र कुमार ने कांस्य पदक जीतकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। इसी तरह रेन्यूबल एनर्जी में नोहर लाल पटेल, मेकेनिकल इंजीनियरिंग में ओम बंजारे, हेल्थ एंड सोशल केयर में अंतरा मुखर्जी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। 

उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रतियोगिता का सफल आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया। 19 कौशल ट्रेड्स में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 3327 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु चयनित हुए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 03 एवं 04 फरवरी 2026 को रायपुर, दुर्ग एवं रायगढ़ जिलों के प्रतिष्ठित संस्थानों में संपन्न हुई। व्यावहारिक मूल्यांकन के पश्चात 38 प्रतिभागियों का चयन रीजनल स्तर के लिए किया गया। रीजनल स्तर पर सफल प्रतिभागी अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य में पहली बार कौशल तिहार 2025 एवं मोबाइल आधारित एमसीक्यू परीक्षा जैसे नवाचारों के माध्यम से प्रतियोगिता का व्यापक एवं पारदर्शी संचालन किया गया।


विकसित छत्तीसगढ़’ की दिशा में बड़ा कदम- शिक्षा, कौशल और रोजगार पर मंथन के लिए ‘शिक्षा संवाद’

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डिजिटल नवाचार से उद्योग साझेदारी तक- ‘शिक्षा संवाद’ में उच्च शिक्षा के भविष्य की रूपरेखा तय

रायपुर- राज्य में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर समन्वय को लेकर आज  ‘शिक्षा संवाद’ का आयोजन रायपुर के स्थानीय होटल में किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की भागीदारी रही। उच्च शिक्षा विभाग और आईआईटी मद्रास और लिंकन युनिवर्सिटी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन,आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन, सीईओ इलेट्स  डॉ. रवि गुप्ता, डायरेक्टर आई.सी.एफ.ए.आई. सुधाकर राव,हाइ कमिश्नर ऑफ सैशेल्स एच. ई. हरिसोया लालटीआना सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति,रजिस्ट्रार, प्रोफेसर उपस्थित थे।

विकसित छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार का सेतु, थीम पर आधारित सत्र में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों के समायोजन और क्षेत्रीय विकास की प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा हुई। आयोजन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को उद्योग की जरूरतों से जोड़ते हुए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करना है।  विभिन्न सत्रों में नई शिक्षा नीति, कौशल उन्नयन, उद्योग-शिक्षा साझेदारी, स्टार्टअप अवसर और भविष्य की रोजगार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं की रोजगार क्षमता दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा। ‘शिक्षा संवाद’ को छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक और औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

‘शिक्षा संवाद’ के दूसरे चरण में उच्च शिक्षा को डिजिटल, उद्योगोन्मुख और शोध आधारित बनाने पर गहन मंथन हुआ। विभिन्न सत्रों में कुलपतियों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लेकर शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने के सुझाव प्रस्तुत किए।

डिजिटल इनोवेशन से बदलती उच्च शिक्षा

इस सत्र में डिजिटल कैंपस, एलएमएस एवं ब्लेंडेड लर्निंग मॉडल, एआई आधारित शिक्षण-मूल्यांकन, डेटा आधारित प्रशासन तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि तकनीक के समुचित उपयोग से पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।

रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए इंडस्ट्रीज-अकादमिक सहयोग

इस सत्र में उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, इंटर्नशिप एवं अप्रेंटिसशिप, सेक्टर स्किल काउंसिल की भूमिका और परिणाम आधारित शिक्षा पर विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच मजबूत तालमेल से युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर मिलेंगे।

ज्ञान अर्थव्यवस्था की ओर -शोध, नवाचार और उद्यमिता

अंतिम तकनीकी सत्र में शोध के वर्तमान परिदृश्य, नवाचार केंद्रों की स्थापना, स्टार्टअप प्रोत्साहन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शोध के व्यावसायीकरण पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शिक्षा संस्थानों में इनोवेशन कल्चर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘शिक्षा संवाद’ को राज्य में उच्च शिक्षा के आधुनिकीकरण, उद्योग सहयोग और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम का समापन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन और उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन के सार-संक्षेप के साथ हुआ। ‘शिक्षा संवाद 2026’ ने राज्य में भविष्य उन्मुख, नवाचार- प्रधान और उद्योग-संरेखित उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

“IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन: उत्तर-पूर्व के युवाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान का अवसर”

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गुवाहाटी (असम)- कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा मंत्री,जयंत चौधरी ने आज गुवाहाटी विश्वविद्यालय में IndiaSkills Regional Competition 2025–26 (North-East) का उद्घाटन किया। इस प्रतियोगिता में उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों के युवा 26 कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे।

यह पहली बार है जब भारत की प्रमुख कौशल प्रतियोगिता उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आयोजित की जा रही है, जिससे यहां के युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का एक बड़ा अवसर मिल रहा है। इस आयोजन में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने कार्यान्वयन भागीदार के रूप में सहयोग किया।

उद्घाटन समारोह में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नानी गोपाल महंता, असम सरकार के प्रमुख सचिव ग्यानेंद्र देव त्रिपाठी, तथा MSDE की संयुक्त सचिव हेना उस्मान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की उत्तर-पूर्व पर निरंतर ध्यान और नीति प्राथमिकता ने क्षेत्र के युवाओं में आत्मविश्वास और अवसरों की नई लहर पैदा की है। उन्होंने IndiaSkills को केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कौशल, अनुशासन और श्रम की गरिमा का उत्सव बताया।

जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि NEP 2020 के अनुरूप शिक्षा और कौशल विकास के बीच तालमेल बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे युवाओं की रोजगार क्षमता, उद्यमिता और आजीवन सीखने के अवसर बढ़ते हैं।

यह क्षेत्रीय प्रतियोगिता उत्तर-पूर्व में कौशल विकास के मजबूत ढांचे को दर्शाती है। इस प्रतियोगिता में 162 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं और इसमें तकनीकी, डिजिटल, परंपरागत और सेवा क्षेत्रों के विविध कौशल शामिल हैं, जैसे:

  • ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी

  • क्लाउड कंप्यूटिंग

  • मोबाइल ऐप डेवलपमेंट

  • वेब टेक्नोलॉजी

  • इलेक्ट्रॉनिक्स

  • CNC मिलिंग/टर्निंग

  • वेल्डिंग

  • फैशन टेक्नोलॉजी

  • बेकरी और पेस्ट्री

  • होटल रिसेप्शन

  • रेस्टोरेंट सर्विस

  • स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल

  • रिटेल सेल्स

  • विजुअल मर्चेंडाइजिंग

प्रतियोगिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती हुई देखी गई, विशेषकर तकनीकी क्षेत्रों में जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, CNC, वेल्डिंग आदि। यह संकेत है कि उत्तर-पूर्व में कौशल क्षेत्र में लिंग समानता और डिजिटल-तकनीकी क्षमता का विकास हो रहा है।

IndiaSkills प्रतियोगिता एक चरणबद्ध मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए आयोजित की जाती है—जिला स्तर, राज्य स्तर, क्षेत्रीय स्तर, और फिर राष्ट्रीय स्तर। क्षेत्रीय विजेता IndiaSkills National Competition में भाग लेंगे, और सफल प्रतियोगियों को WorldSkills Competition 2026 (शंघाई) में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा।


उत्तरी-पूर्व की प्रतिभा का राष्ट्रीय मंच: इंडिया स्किल्स 2025–26 का नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन गुवाहाटी में 19–22 जनवरी 2026 को

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भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा आयोजित इंडिया स्किल्स 2025–26 के नॉर्थ ईस्ट रीजनल कॉम्पटीशन का आयोजन 19 से 22 जनवरी 2026 तक गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम में किया जा रहा है। यह पहली बार है जब उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समर्पित रीजनल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी आठ राज्यों की प्रतिभाएँ 26 विभिन्न कौशल श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगी।

इस प्रतियोगिता का उद्घाटन 19 जनवरी 2026 को कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री, जयंत चौधरी द्वारा किया जाएगा। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) इस प्रतियोगिता का ज्ञान साझेदार और कार्यान्वयन एजेंसी है।

इंडिया स्किल्स, भारत की प्रमुख राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ कौशल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और वैश्विक मानकों के अनुसार उनकी तुलना करने का एक मंच है। इस वर्ष के इंडिया स्किल्स 2025–26 साइकिल में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3.65 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 63 कौशल श्रेणियों में पंजीकरण किया है।

नॉर्थ ईस्ट रीजनल प्रतियोगिता का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर लाना, भौगोलिक और लॉजिस्टिक बाधाओं को कम करना, तथा स्थानीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। इस प्रतियोगिता के विजेता इंडिया स्किल्स 2025–26 के राष्ट्रीय चरण में प्रवेश करेंगे और देश के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाली प्रतिभाओं की श्रृंखला को आगे बढ़ाएंगे।


जॉब-लिंक्ड कौशल विकास का नया मंच: एमएसडीई का जन शिक्षा संस्थान सम्मेलन पुणे में 19-20 जनवरी 2026 को

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केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार, 19-20 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र के Symbiosis Skill and Professional University के ऑडिटोरियम हॉल में दो दिवसीय जन शिक्षा संस्थान (JSS) ज़ोनल सम्मेलन एवं स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन व प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 152 जन शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि, MSDE, Directorate of Jan Shikshan Sansthan (DJSS), National Institute for Entrepreneurship and Small Business Development (NIESBUD) तथा अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल होंगे।

जन शिक्षा संस्थान (JSS) योजना: एक व्यापक परिचय

JSS योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे MSDE द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य गैर-शिक्षित, नव-शिक्षित, स्कूल ड्रॉपआउट और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को गैर-औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों पर जोर दिया जाता है।

वर्तमान में 26 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों में 294 JSS कार्यरत हैं, जो 51 NSQF-आधारित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन में योगदान देते हैं।

प्रमुख आंकड़े (31 दिसंबर 2025 तक)

  • कुल 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण

  • जिनमें 28.3 लाख महिलाएँ शामिल

  • प्रशिक्षण मुख्य रूप से डोर-टू-डोर स्तर पर सब-सेंटर्स के माध्यम से दिया जाता है

  • विशेष रूप से अभिलाक्षित जिले, आदिवासी क्षेत्र, वामपंथी प्रभावित क्षेत्र, सीमा और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय

पुणे सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्य विषय

यह सम्मेलन JSS के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • FY 2025–26 में भाग लेने वाले JSS की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा

  • नीति, दिशा-निर्देशों में सुधार और कार्यान्वयन चुनौतियों पर संरचित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन

  • JSS कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि: रोजगार कौशल, उद्यमिता, आजीविका, क्रेडिट लिंकिंग और वित्तीय प्रबंधन

  • AI और डिजिटल टूल्स सहित मांग-आधारित और उभरते कौशल क्षेत्रों की पहचान

  • आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का एक्सपोज़र विज़िट

  • JSS की बेहतरीन प्रथाओं और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन

समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा

20 जनवरी 2026 को आयोजित वैलिडेटरी सत्र में MSDE की वरिष्ठ अधिकारी देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) मुख्य भाषण देंगी। इस सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें और निष्कर्ष तैयार किए जाएंगे, जो JSS योजना को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

सरकारी दृष्टि के साथ समावेशी विकास

यह ज़ोनल सम्मेलन MSDE के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो समुदाय आधारित कौशल विकास को और प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण और व्यापक बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भारत सरकार की समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।


PM-SETU के तहत पुणे में उद्योग परामर्श बैठक: उन्नत आईटीआई के माध्यम से भविष्य-तैयार कार्यबल की दिशा में कदम

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री कौशल एवं रोज़गार परिवर्तन उन्नत आईटीआई (PM-SETU – Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना के कार्यान्वयन के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 को पुणे में एक प्रमुख उद्योग परामर्श बैठक का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विकसित भारत के विज़न के अनुरूप घोषित यह महत्वाकांक्षी पहल भविष्य के लिए तैयार, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परामर्श बैठक यशवंतराव चव्हाण अकादमी ऑफ़ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन (यशदा), पुणे में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा योजना के उद्योग-नेतृत्व वाले कार्यान्वयन ढांचे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

इस परामर्श में 50 से अधिक पात्र कंपनियाँ भाग लेंगी, जो निर्माण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल एवं गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगी। बैठक की अध्यक्षता देबाश्री मुखर्जी, सचिव, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा की जाएगी। उनके साथ मनीषा वर्मा, अपर मुख्य सचिव, कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग, महाराष्ट्र सरकार भी उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर वे क्षेत्र के आईटीआई एवं उद्योगों का भी दौरा करेंगी।

PM-SETU योजना के अंतर्गत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत 200 हब आईटीआई को उन्नत अवसंरचना और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जबकि 800 स्पोक आईटीआई जिलों में प्रशिक्षण की पहुँच को विस्तारित करेंगे। इस योजना में आईटीआई को सरकारी स्वामित्व लेकिन उद्योग-प्रबंधित संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मांग-आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और बेहतर प्लेसमेंट अवसर सुनिश्चित हो सकें। क्लस्टर आधारित साझेदारी के माध्यम से उद्योग, एंकर इंडस्ट्री के साथ मिलकर प्रशिक्षण और रोज़गार से जुड़ी मज़बूत कड़ियाँ स्थापित करेगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श बैठक इस बात पर प्रकाश डालेगी कि PM-SETU किस प्रकार उद्योग को केवल समय-समय पर सहभागिता तक सीमित न रखते हुए, कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर और संरचित भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है। क्लस्टर मॉडल के तहत उद्योग साझेदार संस्थागत शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकेंगे, प्रशिक्षण को वास्तविक श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे, पाठ्यक्रम एवं शिक्षण पद्धतियों में सुधार कर सकेंगे, प्रशिक्षकों के कौशल उन्नयन में सहयोग देंगे तथा अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट तंत्र को मज़बूत बनाएंगे। इससे भर्ती लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और उद्योग मानकों के अनुरूप जॉब-रेडी प्रतिभा की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

योजना के क्रियान्वयन की दिशा में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी प्रारंभिक कदम उठाए गए हैं। अब तक 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रारंभिक क्लस्टरों की पहचान कर ली है और 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य स्तरीय संचालन समितियों (State Steering Committees) को अधिसूचित कर दिया है।

परामर्श बैठक के दौरान, राज्य में व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार परिणामों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग एवं संस्थागत साझेदारियों को औपचारिक रूप देने हेतु समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया जाएगा। इनमें व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय (DVET), महाराष्ट्र सरकार और FIAT इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फ़ाउंडेशन, तथा DVET और SDN/वाधवानी के बीच साझेदारियाँ शामिल हैं।

PM-SETU भारत की कौशल यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रही है, जो सरकार और उद्योग के बीच सहयोग के स्वरूप को पुनर्परिभाषित करेगी। यह योजना उच्च गुणवत्ता वाले व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण, भविष्य-उन्मुख पाठ्यक्रमों के विकास और उभरते क्षेत्रों के लिए सशक्त प्रतिभा पाइपलाइन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संस्थागत शासन को सुदृढ़ कर, प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का आधुनिकीकरण कर तथा कौशल को श्रम बाज़ार की मांग से जोड़कर, यह पहल विकसित भारत के अवसरों के लिए देश के युवाओं को तैयार करने में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के लिए कौशल और रक्षा उद्योग सुधारों पर जोर दिया

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केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव ऑन डिफेंस, एयरोस्पेस और स्ट्रैटेजिक सेक्टर स्किल डेवलपमेंट के उद्घाटन अवसर पर कहा, “भारत अपने रक्षा और औद्योगिक यात्रा के निर्णायक क्षण में है, जहाँ आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुकी है।” उन्होंने पिछले दशक में भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूपांतरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर यह क्षेत्र आयात पर निर्भरता से हटकर एक सशक्त और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदल गया है, जिसमें डीफ़ेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs), निजी उद्योग, MSMEs और स्टार्टअप्स शामिल हैं।

रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और लगातार नीति सुधारों ने देश में स्वदेशी निर्माण में तेजी लाने में मदद की है, जिससे UAVs, सेंसर जैसी प्लेटफॉर्म्स से लेकर आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल जैसे जटिल सिस्टम का स्वदेशी डिज़ाइन और उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, रक्षा निर्यात 2025 में 23,162 करोड़ रुपये पार कर चुका है, जो 2014 की तुलना में लगभग 35 गुना वृद्धि है।

राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, अस्ट्रा BVR मिसाइल, धनुष आर्टिलरी गन और INS विक्रांत को उद्योग, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन के बीच बढ़ती सहक्रियाशीलता के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में बताया। उन्होंने दोहराया कि रक्षा में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ और तेजी से उन्नत तकनीकें भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौतियां और अभूतपूर्व अवसर दोनों प्रस्तुत करती हैं।

मानव संसाधन के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता केवल हार्डवेयर के स्वदेशीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा पर संप्रभुता भी शामिल है। उन्होंने भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रयासों का उल्लेख किया, जिसमें नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग मौजूदा क्षमताओं और भविष्य की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की Skilling and Employment through Technology Upgradation (PM-SETU) पहल का जिक्र करते हुए राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम अकादमी, उद्योग और रक्षा R&D के बीच अंतर को पाटने के लिए लॉन्च किया गया है। 5 वर्षों में कुल ₹60,000 करोड़ के निवेश के साथ, जिसमें 50% केंद्र सरकार का योगदान शामिल है, PM-SETU सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, डुअल अप्रेंटिसशिप, AI-सक्षम प्रशिक्षण उपकरण, और अग्निवीरों व पूर्व सैनिकों के लिए संरचित कौशल पथ स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों से अनुरोध किया कि वे प्रयोग और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के माध्यम से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाकर PM-SETU कार्यक्रम को सफल बनाएं, ताकि उद्योग-तैयार प्रतिभा का सृजन सुनिश्चित हो सके।

रक्षा सचिव ने पंजाब में रक्षा निर्माण के अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा पारिस्थितिकी नेटवर्क, MSME लिंक बढ़ाना, रक्षा R&D संस्थानों के साथ सहयोग, और समर्पित कौशल एवं परीक्षण अवसंरचना राज्य को रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में उभारने के लिए आवश्यक हैं।

अग्निवीरों की भूमिका पर जोर देते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अग्निपथ योजना ने एक ऐसा अनुशासित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा पूल तैयार किया है, जिसे राष्ट्रीय स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुसार रक्षा निर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।

यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार, Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Confederation of Indian Industry (CII) के सहयोग से आयोजित किया गया। रक्षा सचिव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने सरकार, उद्योग और अकादमी की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया कि भारत को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगी प्रयासों से पंजाब और उत्तर भारत रक्षा-प्रेरित विकास के प्रमुख चालक बन सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्योग के नेता, वरिष्ठ अधिकारी, अकादमिक प्रतिनिधि और सशस्त्र बल उपस्थित थे।

SECL और श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एमओयू, नवा रायपुर में बनेगा हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट सेंटर

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नवा रायपुर/बिलासपुर- छत्तीसगढ़ स्थित कोल सार्वजनिक उपक्रम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) योजना के तहत श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू के तहत नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ में एक हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना के लिए SECL द्वारा ₹35.04 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

कोलफील्ड क्षेत्रों के युवाओं को मिलेगा निःशुल्क रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण

प्रस्तावित संस्थान में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित युवाओं को निःशुल्क कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र होंगे—

  • नर्सिंग असिस्टेंट

  • मेडिकल टेक्नीशियन

  • एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और विशेष रूप से पिछड़े एवं वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है।

संस्थान परिसर में शैक्षणिक भवन, छात्रावास, स्टाफ आवास और अन्य सहायक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। SECL के परिचालन जिलों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, अगले 25 वर्षों तक प्रति वर्ष कम से कम 20 प्रतिशत सीटें SECL के कोलफील्ड जिलों के लिए आरक्षित रहेंगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

एमओयू पर हस्ताक्षर

यह एमओयू SECL के निदेशक (मानव संसाधन) बिरांची दास की उपस्थिति में संपन्न हुआ। समझौते पर SECL के महाप्रबंधक (CSR) सी. एम. वर्मा और सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी विवेक नारायण गौर ने हस्ताक्षर किए।

SECL–श्री सत्य साईं साझेदारी से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा विस्तार

SECL और श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट पहले से ही SECL की प्रमुख स्वास्थ्य पहल ‘SECL की धड़कन’ के अंतर्गत साझेदारी कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग (CHD) से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क जीवनरक्षक हृदय शल्य चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। अब तक इस योजना के अंतर्गत 180 से अधिक सफल सर्जरी की जा चुकी हैं, जिससे कोलफील्ड क्षेत्रों के गरीब और वंचित परिवारों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिली है।

कोल बेल्ट क्षेत्र में सामाजिक विकास का प्रमुख आधार SECL

SECL अपने कार्यक्षेत्रों में सामाजिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। कंपनी ने अब तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कल्याण से जुड़े CSR कार्यों पर ₹850 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं।

इस नई पहल के माध्यम से SECL ने समावेशी विकास, क्षमता निर्माण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है, साथ ही यह परियोजना स्वास्थ्य और मानव संसाधन विकास से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।


GI-टैग्ड जनजातीय कला को नई उड़ान: NESTS ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला और प्रदर्शनी का शुभारंभ किया

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नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा तीन दिवसीय “GI Tagged Tribal Art Workshop & Exhibition – Cultural Extravaganza” का आज नई दिल्ली में शुभारंभ किया गया। 24–26 नवंबर 2025 तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के 139 चयनित विद्यार्थी, 34 कला एवं संगीत शिक्षक, तथा 10 मास्टर आर्टिसन शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भारत की GI-टैग्ड जनजातीय कला परंपराओं को संरक्षित, संवर्धित और बढ़ावा देना है।

उद्घाटन समारोह

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात् स्वागत भाषण श्री विपिन कुमार, संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), NESTS ने दिया।
प्रो. अनिल कुमार, प्रमुख, जनपद संपदा, IGNCA ने विशिष्ट संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने जनजातीय कला रूपों के गहरे सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद

  • बिपिन रतूड़ी, संयुक्त आयुक्त (सिविल), NESTS,

  •  प्रशांत मीणा, अतिरिक्त आयुक्त, NESTS,का संबोधन हुआ।

मुख्य उद्घाटन भाषण अजीत कुमार श्रीवास्तव, आयुक्त, NESTS द्वारा दिया गया, जिन्होंने औपचारिक रूप से कार्यशाला को उद्घाटित किया।
अंत में डॉ. रश्मि चौधरी, सहायक आयुक्त (शैक्षणिक), NESTS ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

EMRS छात्रों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

उद्घाटन सत्र में EMRS विद्यार्थियों ने विभिन्न राज्यों की समृद्ध जनजातीय कला और संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए शानदार प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें शामिल थीं:

  • धीम्सा नृत्य (ओडिशा)

  • जौनसारी नृत्य (उत्तराखंड)

  • मिज़ो फोक डांस (मिज़ोरम)

  • फोक वोकल सोलो (दादरा एवं नगर हवेली)

  • देशभक्ति गीत (मध्य प्रदेश)

इन प्रस्तुतियों ने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

GI-टैग्ड कला रूपों में प्रशिक्षण

प्रसिद्ध GI विशेषज्ञ श्वेता मेनन (Truly Tribal) ने GI-टैग्ड कला के महत्व पर लाइव सत्र लेकर विद्यार्थियों को अवगत कराया। तीन दिवसीय कार्यशाला में विद्यार्थियों को निम्न पारंपरिक GI-मान्यता प्राप्त कला रूपों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

  • गोंड

  • वारली

  • मधुबनी

  • पिथोरा

  • चेरियल

  • रोगन

  • कलमकारी

  • पिछवाई

  • ऐपन

  • रंगवाली पिचौरा

  • कांगड़ा

  • बासौली

  • मैसूर पेंटिंग

  • बस्तर ढोकड़ा

  • कच्छी कढ़ाई

इन कला रूपों का प्रशिक्षण मास्टर आर्टिसन के मार्गदर्शन में दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप पहल

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण—कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने—से प्रेरित है।
इसके माध्यम से EMRS विद्यार्थी पारंपरिक कला में दक्ष होकर युवा जनजातीय कलाकार-उद्यमी के रूप में उभर सकते हैं, जिससे सांस्कृतिक गौरव और आजीविका के नए अवसर दोनों को बढ़ावा मिलता है।

जनजातीय बच्चों का सर्वांगीण सशक्तिकरण

EMRS विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, आत्मविश्वास और सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक कौशल की यह संयुक्त पहल जनजातीय युवाओं में अवसर, सम्मान और विकास की नई धारा स्थापित करती है।

जन सहभागिता

कार्यक्रम में

  • GI-टैग्ड छात्र कला प्रदर्शनी,

  • कला बिक्री,

  • और लाइव आर्ट वर्कशॉप
    का आयोजन किया जा रहा है।

यह प्रदर्शनी 24–26 नवंबर 2025 के दौरान प्रतिदिन सुबह 09:30 बजे से शाम 04:00 बजे तक आम जनता के लिए खुली है।
कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नागरिकों को भारतीय जनजातीय कला को देखने और समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया गया है।


ग्लोबल मंच पर भारत की नई छलांग: स्किल्स एशिया 2025 के लिए टीम इंडिया रवाना

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कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आज चीनी ताइपे में 27–29 नवंबर 2025 को होने वाली विश्व स्किल्स एशिया प्रतियोगिता (WSAC) 2025 में भाग लेने वाले भारतीय दल के विदा समारोह (Send-Off Ceremony) का आयोजन किया। यह पहली बार है जब भारत वर्ल्ड स्किल्स एशिया मंच पर हिस्सा ले रहा है, जो देश की वैश्विक कौशल यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कौशल विकास और उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्यमंत्री जयंती चौधरी, तथा MSDE की सचिव देबाश्री मुखर्जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में MSDE के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार ज्ञान भूषण और प्रसिद्ध अभिनेता सुदेश बेरी ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

इस वर्ष की इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में 38 कौशल वर्गों में 500+ प्रतियोगी लगभग 40 सदस्य और आमंत्रित देशों से हिस्सा ले रहे हैं। भारत का दल, जिसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के नेतृत्व में तैयार किया गया है, 23 प्रतियोगियों और 21 विशेषज्ञों के साथ 21 कौशल श्रेणियों में हिस्सा लेगा—एशिया के सर्वश्रेष्ठ युवा पेशेवरों के बीच भारत की कौशल क्षमता को प्रदर्शित करते हुए।

समारोह को संबोधित करते हुए, जयंती चौधरी ने कहा:

“वर्ल्ड स्किल्स एशिया में भाग लेने वाले युवा प्रतियोगी भारत की वैश्विक कौशल नेतृत्व क्षमता का प्रतीक हैं। हमें विश्वास है कि महीनों की कठोर प्रशिक्षण प्रक्रिया, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और सेक्टर स्किल काउंसिल्स, मंत्रालय व उद्योग साझेदारों का सहयोग उन्हें श्रेष्ठ प्रदर्शन में सक्षम बनाएगा। सरकार विश्व की कौशल राजधानी बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिभाओं को सशक्त बनाने हेतु प्रतिबद्ध है।”

भारतीय प्रतिभागी डिजिटल एवं आईटी तकनीक, मोबाइल रोबोटिक्स, मेक्ट्रॉनिक्स, CNC मिलिंग, वेब डेवलपमेंट, ऑटोमोटिव रिपेयर, फैशन टेक्नोलॉजी, ग्राफिक डिजाइन, ब्यूटी थैरेपी सहित कई नई और पारंपरिक उच्च-डिमांड कौशलों में दक्षता प्रदर्शित करेंगे।

इन प्रतियोगियों का चयन इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2024 के माध्यम से कई चरणों की कड़ी प्रक्रिया द्वारा किया गया, जिसे NSDC द्वारा आयोजित किया गया था। राष्ट्रीय पदक विजेताओं को विश्व स्तर की प्रतिष्ठित कौशल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है।

MSDE की सचिव, देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि विश्व स्किल्स एशिया में भारत की पहली भागीदारी कौशल विकास यात्रा का ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने से हमारे युवा प्रतियोगी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरने में सक्षम हुए हैं। उन्होंने बच्चों को श्रेष्ठ प्रदर्शन करने और देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

इन 23 प्रतिभागियों ने पिछले राष्ट्रीय मूल्यांकन दौरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था और पिछले पांच महीनों में उद्योग-आधारित गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण JK Cement, Toyota Kirloskar Motor, LTA Academy of Beauty, Mahindra University, Welcomgroup Graduate School of Hotel Administration, Iraj Evolution Design Company Ltd. जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में दिया गया।

विश्व स्किल्स इंडिया (NSDC) ने 21–24 नवंबर के दौरान टीम बिल्डिंग और तैयारी कार्यक्रम भी आयोजित किया, जिसमें साइकोमैट्रिक असेसमेंट, संचार कौशल, न्यूरोथैरेपी, माइंडफुलनेस, न्यूट्रीशन काउंसलिंग, आर्ट और म्यूजिक थैरेपी एवं ट्रैवल रेडीनेस सत्र शामिल थे, जिससे प्रतियोगियों में तकनीकी आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती विकसित हुई।

WSAC 2025 में भारत की भागीदारी स्किल इंडिया मिशन के तहत वैश्विक मानकों, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्किंग और विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें NSDC प्रशिक्षण, विशेषज्ञ सहभागिता और प्रतियोगी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


भारत में नर्सिंग शिक्षा और कार्यबल सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुभव साझा कार्यशाला का आयोजन

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने झाइपाइगो (Jhpiego) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से “भारत में नर्सिंग पारिस्थितिकी तंत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने” पर अनुभव साझा कार्यशाला का आयोजन नई दिल्ली में किया।

यह बहुदिवसीय कार्यशाला 12 नवम्बर 2025 से प्रारंभ हुई, जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, नर्सिंग क्षेत्र के नेता, शिक्षाविद् एवं विकास सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य भारत की नर्सिंग कार्यबल, शिक्षा प्रणाली और सुशासन तंत्र को मजबूत बनाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।

पहले दिन की प्रमुख बातें

पहले दिन नर्सिंग शिक्षा सुधार और कार्यबल सुदृढ़ीकरण पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि नर्सिंग शिक्षा की प्रक्रिया, संरचना और परिणामों में सुधार की आवश्यकता है ताकि भविष्य के लिए सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नर्सिंग कार्यबल तैयार किया जा सके।

दूसरे दिन की चर्चा

कार्यशाला के दूसरे दिन, राज्यों और संस्थानों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए। प्रस्तुतियों में कौशल आधारित पाठ्यक्रम, क्लिनिकल प्रशिक्षण हेतु सिमुलेशन लैब की स्थापना, मान्यता प्रणाली में राज्य स्तरीय सुधार, सतत् शिक्षा हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगठित नर्सिंग शिक्षा कार्यक्रमों के उदाहरण साझा किए गए।

विचार-विमर्श के दौरान नर्सिंग नेतृत्व, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की भूमिका पर भी चर्चा की गई। समूह सत्रों में राज्यों ने अपनी विशिष्ट चुनौतियों और स्थानीय समाधान साझा किए, जिससे सफल मॉडलों की पहचान और उनके विस्तार के लिए ठोस सिफारिशें तैयार की जा सकीं।

अधिकारियों के वक्तव्य

स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ. दीपिका खाखा ने मंत्रालय की समावेशी नीति निर्माण प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य, शिक्षाविदों, नियामक संस्थाओं और भागीदार संगठनों की सहभागिता से नीतियाँ अधिक प्रभावी बनती हैं।

अकांक्षा रंजन, उप सचिव (नर्सिंग एवं डेंटल), स्वास्थ्य मंत्रालय ने “एक दृष्टि, एक एजेंडा: राष्ट्रीय–राज्य सहयोग के माध्यम से नर्सिंग और मिडवाइफरी को सशक्त बनाना” विषय पर बोलते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय ही नीति को जमीनी स्तर पर सफल बनाने की कुंजी है।

डॉ. अमित अरुण शाह, देश निदेशक, झाइपाइगो ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा, नेतृत्व विकास और डिजिटल नवाचार नर्सिंग कार्यबल को उत्तरदायी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आवश्यक हैं।

डॉ. खंदैत, उप निदेशक एवं कंट्री लीड, गेट्स फाउंडेशन ने नर्सिंग क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना की और मंत्रालय, राज्यों एवं भागीदारों के सामूहिक प्रयासों को सराहा।

निष्कर्ष

यह कार्यशाला राज्यों और संस्थानों से प्राप्त अनुभवों को एकीकृत कर, सर्वोत्तम प्रथाओं को व्यापक रूप से अपनाने एवं लागू करने के लिए एक सशक्त, सक्षम और सशक्त नर्सिंग कार्यबल निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी।




डीजीटी और ऑटोडेस्क के बीच साझेदारी से डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को मिलेगी नई गति: आईटीआई और एनएसटीआई के प्रशिक्षकों को मिलेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण

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प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत, और ऑटोडेस्क ने आज एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर साझेदारी की घोषणा की, जिसका उद्देश्य भारत भर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के फैकल्टी और प्रशिक्षकों के बीच डिजिटल डिजाइन और ‘मेक’ कौशल को बढ़ावा देना है।

इस साझेदारी का उद्देश्य प्रशिक्षकों और शिक्षकों की डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करना, छात्रों में रोजगार कौशल को बढ़ाना और भारत के कार्यबल को आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग, विनिर्माण और निर्माण जैसे क्षेत्रों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

एमओयू का आदान-प्रदान नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में किया गया, जिसमें देबाश्री मुखर्जी, सचिव, एमएसडीई; सुनील कुमार गुप्ता, उप महानिदेशक, डीजीटी; और ऑटोडेस्क के शीर्ष अधिकारी एंड्रयू एनेग्नोस्ट (सीईओ), स्टीव ब्लम (सीओओ), हारेष खुबचंदानी, और कमोलिका गुप्ता पेरेस उपस्थित थे।

ऑटोडेस्क की ‘स्टेट ऑफ डिजाइन एंड मेक रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, भारत की 52% कंपनियों ने कहा है कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से संबंधित कौशल भविष्य में उनकी शीर्ष भर्ती प्राथमिकता होगी। इस साझेदारी के तहत, आने वाले तीन वर्षों में कौशल विकास को एआई, उद्योग नवाचार और नए कैरियर अवसरों के अनुरूप बनाया जाएगा। ऑटोडेस्क अपने पेशेवर सॉफ्टवेयर को देशभर के 14,500 से अधिक आईटीआई और 33 एनएसटीआई के शिक्षकों और छात्रों के लिए उपलब्ध कराएगा, जिससे प्रशिक्षक लाखों युवाओं को उन्नत डिजिटल डिजाइन और विनिर्माण कौशल सिखा सकें।

सचिव, एमएसडीई देबाश्री मुखर्जी ने कहा,

“ऑटोडेस्क के साथ यह साझेदारी एनएसटीआई और आईटीआई के प्रशिक्षकों की क्षमताओं को उन्नत डिजाइन तकनीकों से सशक्त बनाएगी। यह अकादमिक शिक्षा और उद्योग प्रथाओं के बीच की खाई को पाटने में मदद करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर कुशल और तकनीकी रूप से सशक्त प्रतिभा का केंद्र बन सके।”

ऑटोडेस्क के अध्यक्ष और सीईओ एंड्रयू एनेग्नोस्ट ने कहा,

“भारत को कुशल प्रतिभा के वैश्विक नेता के रूप में उभरते देखना गर्व की बात है। डीजीटी के साथ हमारी साझेदारी शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल उपकरणों और उद्योग से जुड़ी सीख प्रदान करने के लिए है। जैसे-जैसे एआई डिजाइन और विनिर्माण को बदल रहा है, वैसे-वैसे एआई-तैयार प्रतिभा की मांग भी बढ़ रही है। यह सहयोग भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करेगा।”

इस पहल के तहत संयुक्त रूप से शैक्षिक कार्यक्रमों, पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण गतिविधियों का विकास किया जाएगा, जिसमें ऑटोडेस्क की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग होगा।

यह सहयोग स्किल इंडिया मिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और व्यावसायिक प्रशिक्षण में डिजिटल डिजाइन तकनीक को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

About DGT (प्रशिक्षण महानिदेशालय)

डीजीटी, एमएसडीई के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय निकाय है, जो भारत में व्यावसायिक प्रशिक्षण की नीति, मानक और समन्वय का दायित्व संभालता है। देशभर में 14,500+ आईटीआई, 33 एनएसटीआई और आईटीओटी संस्थानों के माध्यम से यह 23 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
डीजीटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नई पीढ़ी के ट्रेड्स में प्रशिक्षण को भी प्रोत्साहित कर रहा है।

About Autodesk (ऑटोडेस्क)

ऑटोडेस्क विश्वभर के डिजाइनरों, इंजीनियरों और निर्माताओं को डिजाइन और मेक प्लेटफॉर्म के माध्यम से समर्थ बनाता है। यह सॉफ्टवेयर कंपनी शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर छात्रों और शिक्षकों को निःशुल्क पहुंच, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करती है।


दोहा में विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन में डॉ. मांडविया ने प्रस्तुत की भारत की गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा की प्रेरक यात्रा

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श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया दोहा, कतर में आयोजित द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, जहाँ उन्होंने उच्च स्तरीय गोलमेज सम्मेलन और पूर्ण सत्र में भारत की गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति को प्रस्तुत किया।

निति आयोग द्वारा आयोजित एक साइड इवेंट "गरीबी से बाहर निकलने के मार्ग: अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाने में भारत का अनुभव" में डॉ. मांडविया ने बताया कि भारत ने लगभग 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है और सामाजिक सुरक्षा कवरेज को 64% से अधिक आबादी तक विस्तारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास दृष्टि के केंद्र में महिलाएं और बच्चे हैं — देशभर में 11.8 करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन प्रदान किया जा रहा है और लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) त्रयी के माध्यम से भारत की डिजिटल क्रांति ने कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शी और समावेशी डिलीवरी सुनिश्चित की है। अब तक 1.4 करोड़ युवाओं को स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रशिक्षित किया गया है और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से 3.5 करोड़ नए औपचारिक रोजगार सृजित होंगे।

डॉ. मांडविया ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा आयोजित ग्लोबल कोएलिशन फॉर सोशल जस्टिस के स्पॉटलाइट सत्र में भी भाग लिया और भारत की सामाजिक न्याय और जिम्मेदार व्यवसाय आचरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि 2017 से 2023 के बीच भारत में 17 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित हुए, बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3.2% हुई और महिलाओं की कार्यबल भागीदारी लगभग दोगुनी हो गई है।

उन्होंने भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया जिसमें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के 7.8 करोड़ से अधिक सदस्य हैं और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) 15.8 करोड़ बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। वहीं ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से 31 करोड़ असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया है।

अपने द्विपक्षीय बैठकों में, डॉ. मांडविया ने विभिन्न देशों के मंत्रियों से मुलाकात की —

  • कतर की सामाजिक विकास एवं परिवार मंत्री बुथैना बिन्त अली अल जब्र अल नुआइमी से मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने सामाजिक सुरक्षा, पारिवारिक कल्याण और डिजिटल नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

  • रोमानिया के श्रम और सामाजिक एकजुटता मंत्री पेट्रे-फ्लोरिन मैनोले से मुलाकात में शिक्षा से रोजगार (E2E) पहल पर चर्चा हुई, जिससे कौशल विकास और श्रम गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा।

  • ILO महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. हॉन्ग्बो से बैठक में डॉ. मांडविया ने भारत-ILO साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा व्यक्त की और BRICS अध्यक्षता 2026 के दौरान तकनीकी सहयोग का स्वागत किया।

  • रूस के श्रम और सामाजिक संरक्षण मंत्री एंटन ओलेगोविच कोट्याकोव के साथ बैठक में दोनों पक्षों ने BRICS और G20 जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

  • यूरोपीय संघ की सामाजिक अधिकार एवं कौशल कार्यकारी उपाध्यक्ष रॉक्साना मिनज़ाटू से मुलाकात में डॉ. मांडविया ने भारत की रोजगार सृजन, महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा विस्तार की उपलब्धियों को साझा किया।

अंत में, डॉ. मांडविया ने कतर में भारतीय समुदाय से भी संवाद किया और 8 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की मेहनत, ईमानदारी और भारत-कतर साझेदारी में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, डिजिटल रूपांतरण, कौशल विकास और बुनियादी ढांचा सशक्तिकरण की जानकारी दी



भारत में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से “एक राष्ट्र – एक कृषि – एक टीम” के विजन को साकार करने की दिशा में प्रगति

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कृषि: भारत की अर्थव्यवस्था और विकास का आधार

भारत की लगभग आधी आबादी की आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देती है। उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उच्च शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से मानव क्षमता का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार को इस क्षेत्र के तीन प्रमुख स्तंभ माना गया है। ये तीनों स्तंभ मिलकर उस संस्थागत और वैज्ञानिक ढांचे को बनाते हैं जो 5 प्रतिशत कृषि विकास दर को बनाए रखने और “विकसित कृषि एवं समृद्ध किसान” — अर्थात “विकसित भारत” की मूल अवधारणा — को साकार करने के लिए आवश्यक है। इस दृष्टि को प्राप्त करने के लिए इन तीनों स्तंभों को “वन नेशन – वन एग्रीकल्चर – वन टीम” की भावना के तहत समन्वयित रूप से कार्य करना होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)

स्थापना और भूमिका:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की स्थापना वर्ष 1929 में की गई थी। यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक शीर्ष संस्था है, जो भारत में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशु विज्ञान के अनुसंधान और उच्च शिक्षा का समन्वय करती है।

विस्तृत नेटवर्क:

ICAR का नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान नेटवर्क में से एक है, जिसमें 113 राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान और 74 कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसने हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई और अब जलवायु-सहिष्णु, उच्च उत्पादक किस्मों एवं तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

प्रसार और गुणवत्ता:

ICAR देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है, जो किसानों तक नवीन तकनीक पहुंचाने का कार्य करते हैं। यह संस्थान ICAR मॉडल एक्ट (संशोधित 2023) और कृषि महाविद्यालयों की स्थापना हेतु न्यूनतम आवश्यकताओं के मानक जारी करता है तथा राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड के माध्यम से संस्थानों का मान्यता प्रदान करता है।

कृषि शिक्षा संस्थान

सरकारी संस्थान:

भारत में वर्तमान में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAUs), 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs) — (पूस, इंफाल, झांसी), 4 डीम्ड विश्वविद्यालय (IARI-नई दिल्ली, NDRI-कर्नाल, IVRI-इज़तनगर, CIFE-मुंबई), और 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं जिनमें कृषि संकाय शामिल हैं। इसके अलावा, 11 एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट्स (ATARI) केंद्र भी ICAR नेटवर्क का हिस्सा हैं।

निजी क्षेत्र की भूमिका:

राज्य सरकारों की अपनी नीतियों के तहत निजी कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रोत्साहन किया जाता है। ICAR इन संस्थानों को मान्यता प्रदान करता है। पिछले पाँच वर्षों में ICAR द्वारा मान्यता प्राप्त निजी कृषि कॉलेजों की संख्या 2020–21 में 5 से बढ़कर 2024–25 में 22 हो गई है।

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs)

  1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार):

    • अक्टूबर 2016 में राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (1970 में स्थापित) को CAU में परिवर्तित किया गया।

    • इसमें 8 घटक कॉलेज हैं — कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, सामुदायिक विज्ञान, मत्स्य, उद्यानिकी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, और खाद्य प्रौद्योगिकी।

    • विश्वविद्यालय के तीन परिसर पूसा (समस्तीपुर), ढोली (मुजफ्फरपुर) और पिपराकोठी (पूर्वी चंपारण) में हैं।

    • यह 18 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप लघु अवधि के प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा कार्यक्रम चलाता है।

  2. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल (मणिपुर):

    • 1993 में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित।

    • यह पूर्वोत्तर भारत के 7 राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड और त्रिपुरा — को सेवाएं प्रदान करता है।

    • इसके 13 घटक कॉलेज हैं और यह कृषि एवं संबद्ध विषयों में 10 स्नातक, 48 परास्नातक और 34 पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित करता है।

  3. रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश):

    • कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन संसद के अधिनियम (संख्या 10, 2014) द्वारा स्थापित।

    • विश्वविद्यालय कृषि, उद्यानिकी, पशु विज्ञान और कृषि अभियांत्रिकी में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करता है।

    • इसके कॉलेज झांसी (UP) और दतिया (MP) में स्थित हैं।

कृषि में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

तकनीकी नवाचार:

सरकार IoT और AI तकनीकों को अपनाकर कृषि के आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रही है। इनका उपयोग सटीक कृषि (precision farming), ड्रोन तकनीक, जलवायु-स्मार्ट ग्रीनहाउस, कीट निगरानी, और रिमोट सेंसिंग में किया जा रहा है।

इनोवेशन हब्स:

डीएसटी के राष्ट्रीय मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (NM-ICPS) के तहत 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब्स (TIHs) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 3 कृषि में IoT और AI अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैं।
उदाहरण के लिए —

  • IIT रोपड़ का एग्री/वॉटर TIH केसर उत्पादन हेतु IoT सेंसर पर कार्य कर रहा है।

  • IIT मुंबई “Internet of Everything” TIH चला रहा है।

  • IIT खड़गपुर का AI4ICPS हब AI/ML समाधानों पर केंद्रित है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर:

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने IoT उत्कृष्टता केंद्र बेंगलुरु, गुरुग्राम, गांधीनगर और विशाखापट्टनम में स्थापित किए हैं। विशाखापट्टनम का CoE कृषि-तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, निवेशक और अकादमिक जगत को जोड़ता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत “इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम” के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये स्टार्टअप AI, IoT, ब्लॉकचेन, फूड टेक्नोलॉजी, और वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

किसानों का कौशल विकास और प्रशिक्षण

सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और बाजार की मांगों के अनुरूप ढालने के लिए कौशल विकास को प्राथमिकता दी है।

मुख्य कार्यक्रम:

  • स्किल ट्रेनिंग ऑफ रूरल यूथ (STRY) — 2021–24 के बीच 51,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि यांत्रिकीकरण उप-मिशन (SMAM) — 2021–25 के दौरान 57,000 किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया।

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card) — जुलाई 2025 तक 25.17 करोड़ कार्ड जारी किए गए, 93,000+ प्रशिक्षण और 6.8 लाख प्रदर्शन आयोजित हुए।

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) — 2021–25 के बीच 76 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) — 2021–25 के दौरान 1.27 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण मिला।

  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs) — 10,000 से अधिक पंजीकृत, जो किसानों को व्यवसाय और विपणन कौशल में प्रशिक्षित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत का कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण तंत्र आज शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और कौशल विकास को एकीकृत रूप में जोड़ता है। ICAR, केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों ने एक मजबूत आधार बनाया है जिससे खेती अधिक उत्पादक, टिकाऊ और ज्ञान-आधारित बन रही है।

IoT, AI, और सटीक कृषि तकनीकों के उपयोग ने कृषि को आधुनिक और डेटा-आधारित दिशा में अग्रसर किया है। ATMA, STRY, और SMAM जैसी योजनाओं ने किसानों और ग्रामीण युवाओं को तकनीकी एवं उद्यमशीलता कौशल से सशक्त बनाया है।

इन पहलों के माध्यम से भारत न केवल आत्मनिर्भर खाद्य उत्पादन की दिशा में अग्रसर है, बल्कि एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की ओर भी बढ़ रहा है।

युवा-नेतृत्व वाले भारत की नींव रखना: मेरा युवा भारत (MY Bharat) – राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल

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युवा-नेतृत्व वाले भारत की नींव रखना

भारत अपने विकास यात्रा के एक निर्णायक चरण पर खड़ा है — जहाँ 35 वर्ष से कम आयु की जनसंख्या लगभग 65% है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य देश के सामने है। इस परिवर्तनकारी दौर में मेरा युवा भारत (MY Bharat) भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है — एक राष्ट्रीय मंच जो युवाओं को सशक्त बनाने और उनकी ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण की दिशा में सार्थक कार्रवाई में परिवर्तित करने के लिए समर्पित है।

31 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रीय एकता दिवस (सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती) के अवसर पर शुरू किया गया, MY Bharat तकनीक, सुशासन और जनभागीदारी का एक जीवंत संगम है। यह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है और युवाओं को स्वैच्छिक सेवा, अनुभवात्मक शिक्षा, नेतृत्व और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ने के लिए एक प्रौद्योगिकी-संचालित तंत्र प्रदान करता है।

इस मंच के माध्यम से युवा विभिन्न सरकारी विभागों, निजी संगठनों और नागरिक समाज भागीदारों की पहलों से जुड़ सकते हैं, और स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक समावेशन जैसे क्षेत्रों में वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान करने वाले प्रोजेक्ट्स में भाग ले सकते हैं। राष्ट्रीय युवा नीति के अनुरूप यह पहल मुख्य रूप से 15–29 वर्ष के युवाओं को लक्षित करती है, साथ ही 10–19 वर्ष के किशोरों को भी प्रारंभिक नागरिक भागीदारी और जागरूकता के लिए प्रोत्साहित करती है।

MY Bharat का दृष्टिकोण

2023 में MY Bharat की शुरुआत भारत के बदलते युवा परिदृश्य के अनुरूप की गई थी। पारंपरिक युवा कार्यक्रम अब उस पीढ़ी के लिए पर्याप्त नहीं थे जो तकनीक, गतिशीलता और वैश्विक दृष्टिकोण से प्रेरित है। आज का युवा ऐसे मंच चाहता है जो उसकी आकांक्षाओं को पहचान सके, उसकी आवाज़ को सशक्त बनाए और उसे सीखने व नेतृत्व के अवसरों से सीधे जोड़े।

MY Bharat इस अंतर को पाटते हुए एकीकृत, तकनीक-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) प्रदान करता है, जो ग्रामीण, शहरी और “रूरल-अर्बन” (Rurban) युवाओं को एक ही राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर लाता है। इसका “फिजिटल” (Physical + Digital) दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी युवा पीछे न रह जाए।

डिजिटल इकोसिस्टम

MY Bharat के केंद्र में एक सशक्त डिजिटल तंत्र है जो करोड़ों युवाओं को विकास और सेवा के अवसरों से जोड़ता है। डिजिटल इंडिया ढांचे के तहत निर्मित यह प्लेटफॉर्म समावेशी डिज़ाइन और अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ता है, जिससे देश का हर युवा—चाहे वह किसी महानगर में हो या किसी सुदूर गाँव में—स्वैच्छिक सेवा, नेतृत्व और सीखने के अवसरों तक पहुंच सके।

MY Bharat पोर्टल (mybharat.gov.in):

यह एक केंद्रीकृत डिजिटल गेटवे है जो युवाओं को पंजीकरण, डिजिटल आईडी, अवसर मिलान (opportunity matching) और रीयल-टाइम प्रभाव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है। अक्टूबर 2025 तक, इस प्लेटफॉर्म से 2 करोड़ से अधिक युवा और 1.20 लाख संगठन जुड़े हैं, जिससे एक जीवंत सहयोगी इकोसिस्टम तैयार हुआ है।

MY Bharat मोबाइल ऐप (लॉन्च – 1 अक्टूबर 2025):

युवा सहभागिता को मोबाइल-प्रथम और सुलभ बनाने के लिए MY Bharat मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। इस ऐप में बहुभाषी समर्थन, एआई चैटबॉट, वॉयस असिस्ट नेविगेशन और “स्मार्ट सीवी बिल्डर” जैसे फीचर शामिल हैं। लॉन्च के समय तक 1.81 करोड़ से अधिक युवा और 1.20 लाख संगठन इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे।

MY Bharat 2.0 मॉड्यूल्स:

  • नेशनल करियर सर्विस: युवाओं के लिए रोजगार और करियर लिंकिंग।

  • मेंटरशिप हब: उद्योग विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों से जुड़ाव।

  • अनुभवात्मक शिक्षा कार्यक्रम (ELPs): जिला और राज्य स्तर पर जिम्मेदारी निर्माण के अवसर।

  • फिट इंडिया एकीकरण: स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देना।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) साझेदारी

डिजिटल अंतराल को पाटने के लिए MY Bharat ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) नेटवर्क के साथ साझेदारी की है। देशभर के पाँच लाख से अधिक वीएलई (Village Level Entrepreneurs) ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में युवाओं की सहायता करते हैं ताकि वे आसानी से पंजीकरण कर सकें और अवसरों का लाभ उठा सकें।

युवा शक्ति की कहानियाँ – परिवर्तन के उदाहरण

  • विकसित भारत रन 2025: 91 देशों के 150 शहरों में आयोजित इस कार्यक्रम ने वैश्विक मंच पर भारतीय युवाओं की एकता और उद्देश्य को प्रदर्शित किया।

  • राष्ट्रीय ध्वज क्विज़: युवाओं को राष्ट्रध्वज के मूल्यों से जोड़ने वाली एक अनोखी पहल, जिसमें श्रेष्ठ प्रतिभागियों ने सियाचिन का दौरा किया।

  • नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत: जुलाई 2025 में वाराणसी से शुरू हुआ यह अभियान युवाओं द्वारा संचालित एक सामाजिक परिवर्तन आंदोलन बन गया।

  • विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD): 10 विषयगत क्षेत्रों में युवा नेताओं ने भारत के भविष्य के लिए अभिनव समाधान प्रस्तुत किए।

अब तक की यात्रा और आगे की दिशा

MY Bharat ने दो वर्षों से भी कम समय में भारत का सबसे बड़ा डिजिटल युवा मंच बनने की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति की है। यह 2 करोड़ से अधिक युवाओं और 1.20 लाख से अधिक संगठनों को जोड़ते हुए युवाओं को स्वैच्छिक सेवा, कौशल विकास और नेतृत्व के अवसर प्रदान कर रहा है।

30 जून 2025 को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (MeitY) के बीच हुए एमओयू ने MY Bharat 2.0 के विकास का मार्ग प्रशस्त किया — एक एआई-सक्षम, बहुभाषी मंच जो स्मार्ट सीवी बिल्डर, वॉयस असिस्ट नेविगेशन, मेंटरशिप नेटवर्क और अनुभवात्मक शिक्षण मॉड्यूल जैसे फीचर्स से लैस है।

आगे चलकर MY Bharat 2.0 करियर काउंसलिंग, एआई-आधारित कौशल मानचित्रण, उद्यमिता समर्थन और डिजिटल प्रमाणन जैसी सुविधाएँ जोड़ेगा। यह प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS), डिजिलॉकर, UMANG और डिजिटल इंडिया स्टैक से एकीकृत होकर युवाओं को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ेगा — जिससे MY Bharat वैश्विक दक्षिण (Global South) का सबसे बड़ा युवा डिजिटल नेटवर्क बन सके।

“युवा शक्ति से जनभागीदारी” — यही MY Bharat की आत्मा है, जो हर भारतीय युवा को परिवर्तन का सहभागी नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनाती है।

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