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अमित शाह ने PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन को बताया मील का पत्थर

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए संबोधन को ‘स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता’ के संकल्प से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह संबोधन भारत को सभी क्षेत्रों में अग्रणी राष्ट्र बनाने की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के निर्माण का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें नशामुक्त भारत, सुरक्षित भारत और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को प्रमुखता दी गई।

https://twitter.com/i/status/2088522144808677769

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और रेलवे परिवहन सहित कई क्षेत्रों में हुई अभूतपूर्व प्रगति को रेखांकित किया। साथ ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ‘सप्तधारा’ यानी सात शक्तियों के मंत्र को सामने रखा गया।

अमित शाह के अनुसार, युवाओं की क्षमता को दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री ने एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक युवाओं को AI कौशल प्रदान करने, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने और 2036 ओलंपिक के लिए टैलेंट हंट अभियान शुरू करने जैसी पहलों की घोषणा की।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने और आठ नई सेमीकंडक्टर इकाइयां स्थापित करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखे हैं।

अमित शाह ने कहा कि स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के संकल्प से ओत-प्रोत प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन भारत को सभी क्षेत्रों में अग्रणी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

लाल किले पर पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम्’

अमित शाह ने अपने एक अन्य पोस्ट में स्वतंत्रता आंदोलन के जोशीले उद्घोष ‘वंदे मातरम्’ का लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजना ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पल को देखना उनके लिए रोमांचकारी अनुभव था और इससे उनका पूरा अस्तित्व उत्साह से भर उठा।


लाल किले से बड़ा संदेश: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प, आत्मनिर्भरता और युवाशक्ति पर जोर

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नई दिल्ली- स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश के सामने 2047 तक विकसित भारत बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा। अपने संबोधन में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, विनिर्माण, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, युवाओं, कृषि, रक्षा और महिला सशक्तिकरण को देश की विकास यात्रा के प्रमुख आधार बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब छोटे सपनों के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। देश को बड़े सपने देखने होंगे और उन्हें मजबूत संकल्प व सामूहिक प्रयासों के जरिए पूरा करना होगा। उन्होंने 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का आह्वान किया।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

भाषण में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सेमीकंडक्टर निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दुनिया के लिए बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक भरोसेमंद केंद्र बनना होगा।

उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में ‘क्वालिटी, क्वालिटी, क्वालिटी’ को वैश्विक पहचान बनाने का मंत्र बताया और कहा कि भारतीय उत्पादों को लागत, गुणवत्ता और पैमाने के मामले में दुनिया के मानकों पर खरा उतरना होगा।

‘सप्त धारा’ से विकास की नई दिशा

देश के विकास के लिए प्रधानमंत्री ने ‘सप्त धारा’ का विजन सामने रखा। इसके तहत विनिर्माण शक्ति, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, तकनीक एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर को प्रमुख क्षेत्र बताया गया।

उन्होंने कहा कि इन सात शक्तियों को साथ लेकर आगे बढ़ने से भारत वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है।

युवाओं के लिए बड़े ऐलान

युवाओं को विकसित भारत की यात्रा का सबसे बड़ा लाभार्थी और प्रमुख शक्ति बताते हुए प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, AI, शिक्षा, कौशल और खेल के क्षेत्र में अवसर बढ़ाने की बात कही।

उन्होंने घोषणा की कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही युवाओं को शोध और नवाचार के लिए संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।

खेल और 2036 ओलंपिक की तैयारी

प्रधानमंत्री ने भारत में 2036 ओलंपिक आयोजित करने की इच्छा दोहराते हुए देश में खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए व्यापक टैलेंट-हंट अभियान की बात कही। 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजकर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।

महिला शक्ति को नई भूमिका

महिला सशक्तिकरण को विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए प्रधानमंत्री ने ‘लखपति दीदी’ अभियान का विस्तार करने की बात कही। उन्होंने 3 करोड़ नई लखपति दीदियां बनाने के लक्ष्य का उल्लेख किया।

साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की।

नशामुक्त भारत और सुरक्षा पर भी फोकस

युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 100 सप्ताह के नशामुक्त भारत अभियान का उल्लेख किया गया। वहीं नक्सलवाद, आधुनिक युद्ध, साइबर सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी प्रधानमंत्री ने देश को सतर्क रहने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि बदलते दौर में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, इसलिए भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ आधुनिक नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

2047 का लक्ष्य, सबकी भागीदारी जरूरी

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार का लक्ष्य नहीं है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग, किसानों, युवाओं, महिलाओं और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि सपनों को संकल्प में, संकल्प को क्षमता में और क्षमता को सफलता में बदला जाए। यही सामूहिक प्रयास 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति का छात्रों को संदेश: आत्मनिर्भर बनें, तकनीक अपनाएं और नशे से दूर रहें

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सोनीपत, हरियाणा- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, नई तकनीकों को अपनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने हरियाणा को ‘धर्म क्षेत्र’ बताते हुए महान किसान नेता दीनबंधु छोटूराम को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके प्रयासों ने किसानों और वंचित वर्गों के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव लाया। उनके द्वारा सहकारिता और भूमि सुधार पर दिया गया जोर आज भी देश की कृषि व्यवस्था की मजबूत नींव है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस दीक्षांत समारोह में लगभग 64% गोल्ड मेडल विजेता महिलाएं हैं और कुल छात्रों में उनकी हिस्सेदारी करीब 50% है। उन्होंने इसे हरियाणा में सामाजिक बदलाव और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की सफलता बताया।

आत्मनिर्भर भारत का विजन

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को दोहराते हुए कहा कि देश को नवाचार, स्वदेशी समाधान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।

कोविड काल में भारत की भूमिका

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल अपनी वैक्सीन विकसित की, बल्कि अपने नागरिकों को मुफ्त में उपलब्ध कराई और 100 से अधिक देशों को भी सहायता दी।

नई तकनीकों में अवसर

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की सलाह दी और कहा कि ये तकनीकें भविष्य को आकार देंगी।

नशे के खिलाफ सख्त चेतावनी

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने नशे के खतरे पर चिंता जताई और उनसे इसे पूरी तरह त्यागने तथा समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।

सफलता का असली मंत्र

उन्होंने कहा कि सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और धैर्य से तय होती है। कठिनाइयों का सामना करने वाले ही अंततः सफल होते हैं।

निष्कर्ष

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने छात्रों से देश के विकास में सक्रिय योगदान देने और मजबूत, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

23 मार्च 2026 को क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी

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नई दिल्ली- केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे 23 मार्च 2026 को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी (7th Tranche) की शुरुआत करेंगे।

देश के आर्थिक विकास और खनिज सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ते रुझान के कारण लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), टंगस्टन, वैनेडियम, टाइटेनियम जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनकी सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित भंडार वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

इन खनिजों के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 17 अगस्त 2023 को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन किया, जिसके तहत 24 खनिजों को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित किया गया। इस संशोधन से केंद्र सरकार को इन खनिजों के लिए माइनिंग लीज और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिला है। इन नीलामियों से होने वाली आय संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होती है।

अब तक खान मंत्रालय ने 6 चरणों में सफल नीलामी आयोजित की है, जिसमें 46 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इससे उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और भारत के खनिज क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 7वें चरण में विभिन्न राज्यों के 19 ब्लॉक्स नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे। इन ब्लॉक्स में ऐसे खनिज शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, उर्वरक और रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए हैं। मिनरल (ऑक्शन) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत नीलामी के बाद की प्रक्रियाओं जैसे परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ इंटेंट को सरल बनाया गया है। वहीं मिनरल (ऑक्शन) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की सुविधा दी गई है, जिससे बोलीदाताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।

यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी दो-चरणीय आरोही बोली प्रक्रिया (two-stage ascending forward auction) के माध्यम से होगी, जिसमें सबसे अधिक प्रतिशत बोली लगाने वाले को विजेता चुना जाएगा।


करमरी में ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का दिया संदेश

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आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर- आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले जिले मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी की ग्राम पंचायत करमरी में सोमवार को वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फ़ॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-  ग्रामीण) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर 'आत्मनिर्भर गांव - विकसित भारत' का संदेश दिया गया। इस दौरान योजना के प्रति उत्साह और सामुदायिक सहभागिता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।    

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्ययोजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को वीबी-जीराम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, वीबी-जी राम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और      

आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। 

कार्यक्रम में जिल पंचायत सीईओ भारती चंद्राकर,जनप्रतिनिधि दिलीप वर्मा, पंचायत प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर की प्रशंसा

करमरी के इस कार्यक्रम की प्रशंसा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट द्वारा करते हुए कार्यक्रम के फोटोग्राफ्स और वीडियो को भी शेयर किया गया है।


जॉब-लिंक्ड कौशल विकास का नया मंच: एमएसडीई का जन शिक्षा संस्थान सम्मेलन पुणे में 19-20 जनवरी 2026 को

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केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार, 19-20 जनवरी 2026 को पुणे, महाराष्ट्र के Symbiosis Skill and Professional University के ऑडिटोरियम हॉल में दो दिवसीय जन शिक्षा संस्थान (JSS) ज़ोनल सम्मेलन एवं स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन व प्रगति समीक्षा कार्यशाला का आयोजन करेगा।

इस सम्मेलन में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 152 जन शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि, MSDE, Directorate of Jan Shikshan Sansthan (DJSS), National Institute for Entrepreneurship and Small Business Development (NIESBUD) तथा अन्य महत्वपूर्ण हितधारक शामिल होंगे।

जन शिक्षा संस्थान (JSS) योजना: एक व्यापक परिचय

JSS योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे MSDE द्वारा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य गैर-शिक्षित, नव-शिक्षित, स्कूल ड्रॉपआउट और समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों को गैर-औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना में विशेष रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और अन्य वंचित समूहों पर जोर दिया जाता है।

वर्तमान में 26 राज्यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों में 294 JSS कार्यरत हैं, जो 51 NSQF-आधारित पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और स्थानीय स्तर पर आजीविका सृजन में योगदान देते हैं।

प्रमुख आंकड़े (31 दिसंबर 2025 तक)

  • कुल 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण

  • जिनमें 28.3 लाख महिलाएँ शामिल

  • प्रशिक्षण मुख्य रूप से डोर-टू-डोर स्तर पर सब-सेंटर्स के माध्यम से दिया जाता है

  • विशेष रूप से अभिलाक्षित जिले, आदिवासी क्षेत्र, वामपंथी प्रभावित क्षेत्र, सीमा और दूरदराज के इलाकों में सक्रिय

पुणे सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्य विषय

यह सम्मेलन JSS के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा। सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • FY 2025–26 में भाग लेने वाले JSS की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा

  • नीति, दिशा-निर्देशों में सुधार और कार्यान्वयन चुनौतियों पर संरचित स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन

  • JSS कार्यकर्ताओं की क्षमता वृद्धि: रोजगार कौशल, उद्यमिता, आजीविका, क्रेडिट लिंकिंग और वित्तीय प्रबंधन

  • AI और डिजिटल टूल्स सहित मांग-आधारित और उभरते कौशल क्षेत्रों की पहचान

  • आधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं का एक्सपोज़र विज़िट

  • JSS की बेहतरीन प्रथाओं और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन

समापन सत्र और भविष्य की रूपरेखा

20 जनवरी 2026 को आयोजित वैलिडेटरी सत्र में MSDE की वरिष्ठ अधिकारी देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) मुख्य भाषण देंगी। इस सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें और निष्कर्ष तैयार किए जाएंगे, जो JSS योजना को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

सरकारी दृष्टि के साथ समावेशी विकास

यह ज़ोनल सम्मेलन MSDE के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो समुदाय आधारित कौशल विकास को और प्रभावी, गुणवत्ता पूर्ण और व्यापक बनाने के लिए किया जा रहा है। यह भारत सरकार की समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।


डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के लिए कौशल और रक्षा उद्योग सुधारों पर जोर दिया

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केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 जनवरी 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित डिफेंस स्किलिंग कॉन्क्लेव ऑन डिफेंस, एयरोस्पेस और स्ट्रैटेजिक सेक्टर स्किल डेवलपमेंट के उद्घाटन अवसर पर कहा, “भारत अपने रक्षा और औद्योगिक यात्रा के निर्णायक क्षण में है, जहाँ आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुकी है।” उन्होंने पिछले दशक में भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूपांतरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर यह क्षेत्र आयात पर निर्भरता से हटकर एक सशक्त और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र में बदल गया है, जिसमें डीफ़ेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs), निजी उद्योग, MSMEs और स्टार्टअप्स शामिल हैं।

रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और लगातार नीति सुधारों ने देश में स्वदेशी निर्माण में तेजी लाने में मदद की है, जिससे UAVs, सेंसर जैसी प्लेटफॉर्म्स से लेकर आर्टिलरी गन, बख्तरबंद वाहन और मिसाइल जैसे जटिल सिस्टम का स्वदेशी डिज़ाइन और उत्पादन बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अब तक 462 कंपनियों को 788 औद्योगिक लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, रक्षा निर्यात 2025 में 23,162 करोड़ रुपये पार कर चुका है, जो 2014 की तुलना में लगभग 35 गुना वृद्धि है।

राजेश कुमार सिंह ने स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स जैसे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, अस्ट्रा BVR मिसाइल, धनुष आर्टिलरी गन और INS विक्रांत को उद्योग, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन के बीच बढ़ती सहक्रियाशीलता के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में बताया। उन्होंने दोहराया कि रक्षा में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ और तेजी से उन्नत तकनीकें भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौतियां और अभूतपूर्व अवसर दोनों प्रस्तुत करती हैं।

मानव संसाधन के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता केवल हार्डवेयर के स्वदेशीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कौशल, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा पर संप्रभुता भी शामिल है। उन्होंने भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रयासों का उल्लेख किया, जिसमें नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग मौजूदा क्षमताओं और भविष्य की कौशल आवश्यकताओं का मानचित्रण कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की Skilling and Employment through Technology Upgradation (PM-SETU) पहल का जिक्र करते हुए राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम अकादमी, उद्योग और रक्षा R&D के बीच अंतर को पाटने के लिए लॉन्च किया गया है। 5 वर्षों में कुल ₹60,000 करोड़ के निवेश के साथ, जिसमें 50% केंद्र सरकार का योगदान शामिल है, PM-SETU सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, डुअल अप्रेंटिसशिप, AI-सक्षम प्रशिक्षण उपकरण, और अग्निवीरों व पूर्व सैनिकों के लिए संरचित कौशल पथ स्थापित करने पर केंद्रित है। उन्होंने राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों से अनुरोध किया कि वे प्रयोग और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण के माध्यम से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाकर PM-SETU कार्यक्रम को सफल बनाएं, ताकि उद्योग-तैयार प्रतिभा का सृजन सुनिश्चित हो सके।

रक्षा सचिव ने पंजाब में रक्षा निर्माण के अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षा पारिस्थितिकी नेटवर्क, MSME लिंक बढ़ाना, रक्षा R&D संस्थानों के साथ सहयोग, और समर्पित कौशल एवं परीक्षण अवसंरचना राज्य को रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में उभारने के लिए आवश्यक हैं।

अग्निवीरों की भूमिका पर जोर देते हुए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अग्निपथ योजना ने एक ऐसा अनुशासित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा पूल तैयार किया है, जिसे राष्ट्रीय स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुसार रक्षा निर्माण और रणनीतिक क्षेत्रों में सहजता से एकीकृत किया जा सकता है।

यह कॉन्क्लेव पंजाब सरकार, Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Confederation of Indian Industry (CII) के सहयोग से आयोजित किया गया। रक्षा सचिव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव ने सरकार, उद्योग और अकादमी की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया कि भारत को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहयोगी प्रयासों से पंजाब और उत्तर भारत रक्षा-प्रेरित विकास के प्रमुख चालक बन सकते हैं।

कार्यक्रम में उद्योग के नेता, वरिष्ठ अधिकारी, अकादमिक प्रतिनिधि और सशस्त्र बल उपस्थित थे।

डॉ. सुकांत मजूमदार ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के माध्यम से ग्रामीण रोजगार और शिक्षा में सुधार का किया वर्णन

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केंद्रीय राज्य मंत्री, शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास, डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। इस अवसर पर डॉ. मजूमदार ने कहा कि विकसित भारत—रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB–G RAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत के परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक कानूनी वेतन रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाता है। यह अधिनियम सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विकास पहलों का समन्वय और सैचुरेशन-आधारित सेवाएं सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे ग्रामीण भारत का आधार समृद्ध, लचीला और आत्मनिर्भर बन सके।

उन्होंने आगे कहा कि संसद ने VB–G RAM G अधिनियम, 2025 पारित कर दिया है, जो भारत के ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे में निर्णायक सुधार को दर्शाता है। यह अधिनियम रोजगार को केवल एक कल्याणकारी हस्तक्षेप से निकालकर समग्र विकास का एकीकृत उपकरण बनाने पर केंद्रित है।

मंत्री ने जोर दिया कि यह कानून ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को मजबूत करेगा, शासन और जवाबदेही तंत्र को आधुनिक बनाएगा, और वेतन रोजगार को सतत और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ेगा, जिससे समृद्ध और लचीला ग्रामीण भारत सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान:

मंत्री ने बताया कि VB–G RAM G ढांचा ग्रामीण शिक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने वाले कार्यों को सीधे लागू करने में सक्षम है, जैसे कि शारीरिक सुविधाओं और बुनियादी सुविधाओं की लंबित आवश्यकताओं को पूरा करना। इसमें सरकारी स्कूलों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान, कंपाउंड दीवार, शौचालय और किचन शेड के निर्माण और रखरखाव की व्यवस्था शामिल है, जो सुरक्षित, कार्यात्मक और बाल-अनुकूल शिक्षा वातावरण सुनिश्चित करेंगे।

इसी प्रकार, आंगनवाड़ी भवनों और शौचालयों का निर्माण और रखरखाव प्रारंभिक बाल शिक्षा की नींव को मजबूत करेगा और सेवाओं की गरिमा, स्वच्छता और निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

डॉ. मजूमदार ने यह भी बताया कि ग्रामीण पुस्तकालय भवनों और प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्रों का समावेश औपचारिक शिक्षा से परे सीखने के अवसरों का विस्तार करता है, और ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और वयस्क शिक्षार्थियों को ज्ञान संसाधनों और व्यावसायिक मार्गों तक पहुँच प्रदान करता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि VB–G RAM G अधिनियम, 2025 के पारित होने से भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी का नया युग शुरू हुआ है। कानूनी रोजगार को 125 दिनों तक बढ़ाना, विकेंद्रीकृत और भागीदारीपूर्ण योजना लागू करना, जवाबदेही मजबूत करना, और सैचुरेशन-आधारित विकास संस्थागत करना, यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सशक्तिकरण, समावेशी विकास और समृद्ध, लचीला ग्रामीण भारत बनाने का रणनीतिक उपकरण बनाता है, जो विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

गडकरी ने बायो-बिटुमेन को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन भारत को विकसित भारत 2047 की दिशा में ले जाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके यह फसल जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करता है और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करता है। 15% मिश्रण के साथ, भारत लगभग ₹4,500 करोड़ विदेशी मुद्रा बचा सकता है और आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।

CSIR के “फार्म रिसिड्यू से रोड तक: बायो-बिटुमेन via पायरोलिसिस” तकनीकी हस्तांतरण समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा,

“आज भारत की सड़क अवसंरचना में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि हमारा देश दुनिया में पहला है, जो व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन कर रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने CSIR और इसके समर्पित वैज्ञानिकों को बधाई दी और इस अग्रणी उपलब्धि को हासिल करने में लगातार समर्थन देने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद भी किया।

गडकरी ने आगे कहा कि यह नवाचार किसानों को सशक्त बनाएगा, ग्रामीण आजीविका सृजित करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। बायो-बिटुमेन, उन्होंने कहा, वास्तव में मोदी सरकार की सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय जिम्मेदार वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।



ग्रामीण विकास मंत्रालय और डाक विभाग ने वित्तीय सेवाओं और बाजार पहुँच के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए

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सुदूर ग्रामीण विकास में समावेशी और सतत वृद्धि को तेजी देने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और डाक विभाग ने आज ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुँच को बढ़ाने के लिए सम्मिलन संस्थागत करने हेतु सहयोग समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी संघीय बजट 2025 के दृष्टिकोण को मूर्त रूप देती है, जिसमें भारत पोस्ट को ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में पुनःस्थापित करने पर जोर दिया गया है।

MoU पर 7 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए, जिनमें माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री,शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया की उपस्थिति रही। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, तथा कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने वर्चुअली भाग लिया। दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार Whole-of-Government दृष्टिकोण के तहत समन्वित प्रयासों से साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व दृष्टि और समग्र विकास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आजीविका सृजन, गरिमा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालयों और सशक्त ग्रामीण समुदायों के समन्वित प्रयासों से देश विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

अपने संबोधन में ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि भारत पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की अंतिम-मील डिलीवरी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित संस्थानों को प्रशिक्षण, इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट्स, पॉइंट-ऑफ़-सेल मशीन और प्रमाणन प्रदान किया जाएगा, जिससे वे विभिन्न वित्तीय सेवाओं और उत्पादों को सीधे घर-घर पहुंचा सकेंगे। इसमें डाकघर बचत योजनाएँ, सुकन्या समृद्धि योजना, नकद हस्तांतरण सेवाएँ सहित अन्य कई वित्तीय उत्पाद शामिल होंगे।

यह साझेदारी दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के ग्रामीण स्तर के संस्थागत नेटवर्क और भारत पोस्ट, IPPB और डाक सेवकों के व्यापक नेटवर्क को जोड़ती है। इस सम्मिलन से स्व-सहायता समूह (SHGs), महिला उद्यमियों, ग्रामीण उद्यमों और MSMEs को एकीकृत वित्तीय और लॉजिस्टिक सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

MoU के तहत:

  • DAY-NRLM ग्रामीण SHG परिवारों में भारत पोस्ट के बचत, जमा, बीमा और पेंशन उत्पादों को अपनाने को बढ़ावा देगा।

  • मिशन SHG महिलाओं को Business Correspondents (BC Sakhis) के रूप में पहचानकर उनका प्रशिक्षण, प्रमाणन और तैनाती सुनिश्चित करेगा।

  • भारत पोस्ट, IPPB के माध्यम से अंतःसंपर्क समर्थन प्रदान करेगा, जिसमें ऑनबोर्डिंग, तकनीकी मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, और कस्टमाइज्ड बीमा समाधान शामिल हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक अंतिम-मील पहुँच और गहरी होगी।

साझेदारी महिला-नेतृत्व वाले SHG उद्यमों के लिए नए बाजार अवसर भी खोलेगी, उन्हें भारत पोस्ट की लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से जोड़ा जाएगा। मिशन SHG और फेडरेशन-स्तरीय उद्यमों की पहचान और क्षमता निर्माण में सहायता करेगा, जबकि भारत पोस्ट लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और निर्यात सुविधा सेवाएँ प्रदान करेगा। इसके साथ ही SHG उत्पादों के प्रचार के लिए भारत पोस्ट नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा।

इस MoU से वित्तीय समावेशन में वृद्धि, बाजार तक पहुँच में सुधार और ग्रामीण महिलाओं एवं उद्यमियों के लिए सतत आजीविका के अवसर पैदा होंगे, जो समावेशी विकास और विकसित भारत के दृष्टिकोण में योगदान देंगे।


आईसीजीएस ‘समुद्र प्रताप’ का कमीशनिंग भारत की समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देता है: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) समुद्र प्रताप के कमीशनिंग को भारत की समुद्री यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक पोत का शामिल होना कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कमीशनिंग रक्षा और समुद्री क्षमताओं में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को और सशक्त करती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलती है, तटीय निगरानी को बढ़ावा मिलता है और भारत के विशाल समुद्री हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसके साथ ही यह पोत आधुनिक तकनीकों से युक्त है, जो पर्यावरण-अनुकूल संचालन सुनिश्चित करते हुए सतत विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा:

“भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) समुद्र प्रताप का कमीशनिंग कई कारणों से उल्लेखनीय है। यह आत्मनिर्भरता के हमारे दृष्टिकोण को मजबूती देता है, हमारी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करता है और सततता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, सहित अन्य पहलुओं के।




अमित शाह ने रतन टाटा की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, कहा– ईमानदारी और करुणा से भारतीय उद्योग को नई दिशा दी

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महान उद्योगपति और टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने रतन टाटा को ऐसा दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता बताया, जिन्होंने ईमानदारी, करुणा और राष्ट्रसेवा के मूल्यों के साथ भारतीय उद्योग जगत को वैश्विक पहचान दिलाई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में अमित शाह ने कहा—

“रतन टाटा जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि, जिन्होंने ईमानदारी और करुणा के साथ भारतीय उद्यमिता को नई पहचान दी। स्वदेशी उद्योग के निर्माण से लेकर निःस्वार्थ परोपकार तक, उन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्ची सफलता राष्ट्रसेवा में निहित होती है। उनकी विरासत आत्मनिर्भर भारत को प्रेरित करती रहेगी।”

भारतीय उद्योग को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाले नेतृत्वकर्ता

रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा समूह ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और टाटा पावर जैसे संस्थानों ने देश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देते हुए भारतीय उद्योग को आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ाया।

परोपकार और मानवता के प्रतीक

रतन टाटा केवल एक उद्योगपति ही नहीं, बल्कि मानवता और समाजसेवा के प्रतीक भी रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आपदा राहत और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान ने करोड़ों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया। टाटा ट्रस्ट्स के माध्यम से उन्होंने समाज के वंचित वर्गों तक विकास की रोशनी पहुंचाई।

युवाओं के लिए प्रेरणा

अमित शाह ने कहा कि रतन टाटा की जीवन यात्रा युवाओं के लिए एक आदर्श है, जो यह सिखाती है कि व्यवसाय में सफलता के साथ नैतिकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्र निर्माण में उद्योग जगत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणास्रोत विरासत

रतन टाटा की सोच और कार्यशैली आज भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है। उनका विश्वास था कि भारतीय कंपनियां नवाचार, गुणवत्ता और नैतिक मूल्यों के बल पर विश्व स्तर पर नेतृत्व कर सकती हैं।

राष्ट्र सदैव रतन टाटा जी के योगदान, मूल्यों और विरासत को कृतज्ञता के साथ स्मरण करता रहेगा।


डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने इंडिया पोस्ट के लिए सक्रिय और रणनीतिक व्यवसाय विस्तार का आह्वान किया

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केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने इंडिया पोस्ट को व्यवसाय वृद्धि के लिए सक्रिय और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने उच्च जीएसटी योगदान देने वाले व्यवसायों और संस्थाओं तक सक्रिय रूप से पहुँच बनाने पर जोर दिया। साथ ही, प्रत्येक पोस्टल सर्किल में डेडिकेटेड मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव टीम गठित करने की वकालत की, जो लीड्स, कन्वर्ज़न और राजस्व की दैनिक निगरानी करे। मंत्री ने सर्किल प्रमुखों से स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, उद्योगों की उपस्थिति और व्यावसायिक संभावनाओं के अनुरूप कस्टमाइज़्ड ग्रोथ स्ट्रैटेजी लागू करने का भी आग्रह किया।

डॉ. चंद्र शेखर प्रमुख पोस्टल सर्किलों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मासिक समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। ये बैठकें संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा निर्धारित त्रैमासिक निगरानी ढांचे के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं और अधिक बार निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वयं राज्य मंत्री द्वारा संचालित की जाती हैं। इन समीक्षाओं का उद्देश्य समस्याओं की शीघ्र पहचान, त्वरित सुधार और इंडिया पोस्ट के सेवा एवं प्रदर्शन लक्ष्यों की निरंतर पूर्ति सुनिश्चित करना है।

देश के सभी 24 पोस्टल सर्किलों को कवर करते हुए, चर्चाओं में परिचालन दक्षता, वित्तीय समावेशन, लॉजिस्टिक्स विस्तार और प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विज़न के अनुरूप हैं। इंडिया पोस्ट के व्यापक नेटवर्क को रेखांकित करते हुए, मंत्री ने संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग से डिलीवरी सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा बचत और बीमा कवरेज के विस्तार का आह्वान किया, ताकि देश की लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं को प्रभावी समर्थन मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मेल और पार्सल संचालन, बचत तथा बीमा—सभी प्रदर्शन संकेतकों में लोककल्याण और वित्तीय विवेक के बीच संतुलन रखा जाए।

राज्य मंत्री ने कर्नाटक सर्किल की जमीनी स्तर पर मजबूत प्रदर्शन और नए ग्राहकों व बाजारों के सफल अधिग्रहण के लिए सराहना की। उन्होंने पूर्वोत्तर सर्किल की भी प्रशंसा की, जहां 1.54 लाख नए बचत खाते खोले गए, PLI/RPLI के तहत ₹276 करोड़ का संकलन किया गया और एमएसएमई आउटरीच के लिए संरचित पहलें लागू की गईं।

डॉ. पेम्मासानी ने दोहराया कि डाक नेटवर्क के माध्यम से 1.4 अरब से अधिक नागरिकों की सेवा करना एक जिम्मेदारी के साथ-साथ अवसर भी है। उन्होंने कहा कि कुशल सेवाएं, डिजिटल अखंडता और वित्तीय विवेक—इंडिया पोस्ट को आत्मनिर्भर और भविष्य-तैयार संस्थान बनाने के मूल स्तंभ हैं।


PM SVANidhi योजना का पुनर्गठित स्वरूप: 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स के लिए समग्र विकास और वित्तीय सशक्तिकरण

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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 27 अगस्त 2025 को केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के पुनर्गठन और लेंडिंग अवधि को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाने को मंजूरी दी। इस योजना का कुल बजट ₹7,332 करोड़ है और इसका उद्देश्य 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभ पहुंचाना है, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी शामिल हैं।

योजना का उद्देश्य और महत्व

स्ट्रीट वेंडर्स किसी भी शहर की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वे आत्म-रोज़गार के माध्यम से रोज़मर्रा की वस्तुएँ और सेवाएँ नागरिकों तक पहुँचाते हैं। हालांकि, पहचान की कमी, सीमित वित्तीय पहुँच, शिक्षा और कौशल की कमी, उचित स्थानों का अभाव और सरकारी योजनाओं तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियाँ उनका सामना करती हैं। PM SVANidhi योजना का लक्ष्य इन्हीं चुनौतियों को दूर करना और स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है।

प्रमुख विशेषताएँ और लाभ

  • लोन संरचना: पहली किस्त ₹15,000, दूसरी किस्त ₹25,000 और तीसरी किस्त ₹50,000 तक।

  • डिजिटल क्रेडिट कार्ड: समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों के लिए UPI-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड।

  • कैशबैक प्रोत्साहन: डिजिटल लेन-देन पर अधिकतम ₹1,200 तक कैशबैक।

  • क्षेत्रीय विस्तार: योजना अब केवल सांविधिक शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि सेंसरस टाउन और पेरी-अर्बन क्षेत्रों में भी लागू।

कल्याण और क्षमता निर्माण

  • स्ट्रीट वेंडर्स को उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल कौशल और मार्केटिंग के प्रशिक्षण दिए जाएंगे।

  • स्ट्रीट फूड वेंडर्स के लिए FSSAI के साथ मिलकर स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण।

  • SVANidhi से समृद्धि (Svanidhi se Samriddhi): 8 सरकारी कल्याण योजनाओं से वेंडर्स और उनके परिवारों को जोड़ा गया। 47 लाख वेंडर्स का प्रोफाइल तैयार किया गया और 1.46 करोड़ योजनाएँ अब तक स्वीकृत।

क्रियान्वयन और साझेदारी

योजना का कार्यान्वयन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) तथा वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) के माध्यम से किया जाएगा। राज्यों, बैंकों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की सक्रिय भागीदारी से लाभार्थियों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

निष्कर्ष

PM SVANidhi योजना केवल वित्तीय स्थिरता प्रदान नहीं करती, बल्कि स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल कर, उन्हें आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। यह योजना स्ट्रीट वेंडर्स के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, जो समावेशी और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

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साल 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है।जिसका मुख्य उद्देश्य "सहकारिताएँ एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं" (Cooperatives Build a Better World) है, और यह वर्ष गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है l

भारत सरकार ने सहकारिता आंदोलन को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के हर ग्राम पंचायत तक सहकारी समितियों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को सहकारिता से लाभ मिल सके। सहकारिता के माध्यम से एक बेहतर और समृद्ध ग्रामीणों का निर्माण करना है।

छत्तीसगढ़ में सहकारिता का प्रसार

छत्तीसगढ में 6063 सहकारी समितियाँ कार्यरत

छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 11,650 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (पैक्स), 1,949 दुग्ध, 1,002 मत्स्य और 1,054 लघु वनोपज सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। 

760 नई समितियाँ गठित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर अब तक छत्तीसगढ़ में 310 मत्स्य, 297 दुग्ध और 153 लघु वनोपज समितियाँ नई गठित की जा चुकी हैं।

सहकारिता के माध्यम से रोजगार और सशक्तिकरण

राज्य गठन के समय केवल 1,333 सहकारी समितियाँ सक्रिय थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 2573 हो गई है। किसानों को ऋण, बीज, खाद, कीटनाशक और विपणन की सुविधा सुगमता से उपलब्ध हो रही है।

राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख समितियाँ भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कुल सदस्य अब 30.26 लाख हैं, जिनमें से 19.38 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं।

राज्य में सहकारी केंद्रीय बैंक की 345 शाखाएँ संचालित

कृषि ऋण और वित्तीय सुदृढ़ता

राज्य में 6 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक हैं, जिनकी 345 शाखाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें से 262 शाखाएँ कम्प्यूटरीकृत हैं। राज्य के 2058 पैक्स समितियों में प्रधानमंत्री किसान सेवा केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं।

किसानों के लिए 5 लाख रुपए तक ब्याज मुक्त आसान कृषि ऋण की सुविधा

राज्य सरकार और नाबार्ड के सहयोग से किसानों को सस्ती ब्याज दर पर अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को 5 लाख रुपए तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है।

पशुपालन, मत्स्य पालन और लघु उद्योगों के लिए भी 1% से 3% ब्याज दर पर ऋण सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में अब तक 15.56 लाख किसानों को 6,936 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता

राज्य में सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण का कार्य वर्ष 2022-23 से आरंभ हुआ। अब तक 2,028 समितियाँ ई-पैक्स मोड में परिवर्तित की जा चुकी हैं। डिजिटलीकरण से किसानों के खाते, ऋण विवरण और ब्याज गणना पारदर्शी और रियल टाइम हो गए हैं।

धान खरीद और किसानों को लाभ

वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार द्वारा 25 लाख किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इसके लिए 34,349 करोड़ रुपए की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे जमा की गई।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री किसान उन्नति योजना के तहत 11,928.59 करोड़ रुपए की राशि किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित की गई। कुल 46276 करोड़ रुपए किसानों के खाते में अंतरित किया गया।

धान खरीदी (खरीफ विपणन) वर्ष 2025-26 के  तहत दिनांक 12 दिसंबर 2025 तक 6.94 लाख किसानों से 35.43 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी समितियों के माध्यम से किया जा चुका है, जिसकी लगभग राशि  7201 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को खरीदी के 48 घंटे के अंदर भुगतान किया गया है।  इस वर्ष एग्रीस्टेग से पंजीकृत किसान से  धान खरीदी की जा रही है। एग्रीस्टेग पोर्टल के पंजीकृत किसानों को संख्या 26.86 लाख है।

एग्रीस्टेग पोर्टल के माध्यम से किसान आईडी (Farmer ID) के ज़रिए भूमि, फसल, बैंक, बीमा और योजनाओं से जुड़ी सभी जानकारी एक जगह होती है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, बिचौलियों को हटाया जा सके और डेटा-आधारित नीतियां बनाई जा सकें l

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में शुरू, राज्य में सहकारी आंदोलन और सामुदायिक सशक्तिकरण को मिला मंच

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असम सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित चौथा सहकारी मेला 2025 आज एईआई ग्राउंड, चांदमारी में उद्घाटित किया गया। यह तीन दिवसीय मेला 13 से 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य असम में सहकारी आंदोलन की ताकत, विविधता और संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।

उद्घाटन समारोह

मेलें का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री, सहकारिता, कृष्णपाल गुर्जर द्वारा किया गया, जिनके साथ असम के सहकारिता मंत्री,  जोगेन मोहन उपस्थित रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री का संबोधन

केंद्रीय राज्य मंत्री गुर्जर ने असम में सहकारी आंदोलन को राज्य की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का स्वाभाविक विस्तार बताया। उन्होंने क्षेत्र के महान संत महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और महापुरुष माधवदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी एकता, समानता और समाज सेवा की शिक्षाएँ सहकारी भावना की नींव हैं।

गुर्जर ने कहा कि प्रधानमंत्री की निर्णायक नेतृत्व क्षमता और केंद्रीय सहकारिता मंत्री के मार्गदर्शन के तहत “सहकार से समृद्धि” की राष्ट्रीय दृष्टि जीवंत वास्तविकता में बदल रही है। उन्होंने 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इसने भारत में एक समग्र, विश्वस्तरीय सहकारी प्रणाली के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा और स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रदान किया है।

गुर्जर ने असम में सुधारों की गति की भी प्रशंसा की, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और राज्य सहकारिता मंत्री जोगेन मोहन के सक्रिय नेतृत्व के कारण संभव बताया। इस पहल के तहत असम ने 100% प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण सुनिश्चित किया है, और 800 से अधिक PACS ने नए मॉडल बाइलॉज को अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रगति से युवा और महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है और 32 लाख से अधिक सदस्यों के लिए वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। असम राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें 2026 तक प्रत्येक गाँव में एक सहकारी संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

असम के सहकारिता मंत्री का संबोधन

जोगेन मोहन ने चौथे सहकारी मेले को जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना की, जिन्होंने स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदलकर आत्मनिर्भरता और संसाधनfulness का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है, जैसे आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन, महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता और युवाओं का सशक्तिकरण।

मेले की प्रमुख विशेषताएँ

  • इस मेले में 160 सहकारी समितियों ने भाग लिया, जो हेंडलूम, मछली पालन, डेयरी, कृषि और युवा एवं महिला नेतृत्व वाली उद्यमियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  • मेला स्थानीय उत्पादों, नवाचारों और सहकारी सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने का जीवंत मंच प्रदान करता है।

  • अगले दो दिनों तक मेला प्रदर्शनी, इंटरैक्शन और ज्ञान साझा करने के सत्रों के माध्यम से सहकारिता-आधारित विकास को बढ़ावा देगा।

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में सहकारी आंदोलन की ताकत और सामुदायिक सशक्तिकरण को उजागर करता है और राज्य में समृद्ध, आत्मनिर्भर और सहकारी नेतृत्व वाले भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का 50% हासिल किया, MNRE ने सौर निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

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भारत ने पहले ही अपने स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के तहत अपनी राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पांच साल पहले है।

31 अक्टूबर 2025 तक, गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित क्षमता लगभग 259 गीगावाट (GW) है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष (अक्टूबर 2025 तक) में 31.2 GW की नई क्षमता जुड़ी है।

कई जगह यह रिपोर्ट किया जा रहा है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने वित्तीय संस्थानों को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नए वित्त पोषण को रोकने का परामर्श जारी किया है, जिससे अत्यधिक अधिशक्ति (overcapacity) को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यह स्पष्ट किया जाता है कि MNRE ने किसी भी वित्तीय संस्था को नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत परियोजनाओं या नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण सुविधाओं के लिए वित्त पोषण रोकने का कोई परामर्श नहीं दिया है।

हालांकि, MNRE ने विभागीय वित्तीय सेवाओं और एनबीएफसी जैसे PFC, REC और IREDA को सौर पीवी (Solar PV) निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान घरेलू स्थापित उत्पादन क्षमताओं की स्थिति भेजी है, जिसमें सौर मॉड्यूल, अपस्ट्रीम स्तर जैसे सौर सेल, इंट, वेफर, पॉलीसिलिकॉन और सहायक उपकरण जैसे सौर ग्लास और एल्युमिनियम फ्रेम शामिल हैं। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं को प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय संतुलित और सूचित दृष्टिकोण अपनाने में मदद करना है, ताकि वे केवल सौर मॉड्यूल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि सौर पीवी निर्माण के अपस्ट्रीम स्तर और सहायक उपकरणों में भी अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकें।

भारत सरकार सौर पीवी निर्माण में आत्मनिर्भर बनने और देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्रमुख खिलाड़ी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रतिबद्धता को कई पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्त है, जिसमें उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI योजना और भारतीय निर्माताओं के लिए समान अवसर प्रदान करने के उपाय शामिल हैं।

इन पहलों के प्रभाव से सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में वृद्धि हुई है, जो 2014 में केवल 2.3 GW थी और आज MNRE की Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) में लगभग 122 GW तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि भारत के सौर पीवी निर्माण की सफलता और उद्योग, विभिन्न राज्य सरकारों और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती है।

यह कदम यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन घटाने में सार्थक योगदान देने के अपने लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। MNRE भविष्य में भी सौर निर्माण इकोसिस्टम को नीति समर्थन, अवसंरचना विकास और नवाचार के माध्यम से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय हितधारकों के साथ लगातार संवाद जारी रखेगा ताकि भारत की सौर ऊर्जा यात्रा समान, प्रतिस्पर्धी और भविष्य-तैयार बनी रहे।

चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 : राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सैन्य तैयारी पर गहन विमर्श

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चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आरंभ हुआ, जिसमें सैन्य नेतृत्व, वैश्विक रणनीतिक विशेषज्ञ, राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और युवा शोधकर्ता शामिल हुए। उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने, जबकि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मुख्य भाषण दिया।

यह संवाद भारतीय सेना और सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज़ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य केन्द्र "सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत" की राष्ट्रीय दृष्टि है। इसमें भारत की सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी क्षमताओं और बदलते वैश्विक वातावरण का विश्लेषण किया जा रहा है।

राष्ट्रपति का संबोधन

माननीय राष्ट्रपति ने भारतीय सेना की राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिरोध क्षमता नैतिक स्पष्टता और जिम्मेदार व्यवहार पर आधारित है, जो "वसुधैव कुटुंबकम्" की सभ्यतागत सोच को दर्शाती है।

उन्होंने साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव वॉरफेयर जैसे नए क्षेत्रों में तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार सैन्य बलों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सेना द्वारा किए जा रहे सुधारों, आधुनिकीकरण और युवाओं एवं महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों की भी प्रशंसा की।

सेना प्रमुख का वक्तव्य

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि 2023 से प्रारंभ हुआ यह संवाद अब एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने बताया कि वैश्विक परिदृश्य बहुध्रुवीय और अस्थिर होता जा रहा है, ऐसे में भारतीय सेना को निर्णायक और भविष्य के अनुरूप बने रहना होगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री के 5S दृष्टिकोण—सम्मान, संवाद, सहयोग, समृद्धि और सुरक्षा—का उल्लेख करते हुए सेना की परिवर्तन यात्रा के तीन चरण बताए:

  • HOP 2032 – त्वरित परिवर्तन

  • STEP 2037 – संरचनात्मक मजबूती

  • JUMP 2047 – एकीकृत, नेक्स्ट-जनरेशन फोर्स डिज़ाइन

उन्होंने चार मुख्य प्रेरक तत्वों की पहचान की—आत्मनिर्भरता, तेज तकनीकी नवाचार, रक्षा संरचनाओं का अनुकूलन, और सैन्य–उद्योग–अकादमिक साझेदारी।

रक्षा सचिव का वक्तव्य

राजेश कुमार सिंह ने कहा कि 2025 को रक्षा मंत्रालय ने "वर्ष 2025–रक्षा सुधारों का वर्ष” घोषित किया है। उन्होंने बताया कि पूंजीगत खरीद का 75% बजट अब घरेलू उद्योग के लिए आरक्षित है, जिससे रक्षा उत्पादन, नवाचार और निर्यात में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।

नीति आयोग के CEO का संबोधन

बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत को वैश्विक जनसांख्यिकीय, आर्थिक, तकनीकी और जलवायु परिवर्तनों के बीच रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने भारत की युवा जनसंख्या, मजबूत संस्थाओं और आत्मनिर्भर तकनीक को भविष्य के लिए निर्णायक बताया।

तकनीकी श्रेष्ठता पर प्रो. के. विजय राघवन के विचार

उन्होंने तीन-चरणीय तकनीकी निवेश मॉडल पर जोर दिया:

  • 0–3 वर्ष: स्टार्टअप, अकादमिक शोध और AI आधारित अपग्रेड के माध्यम से त्वरित क्षमता

  • 3–10 वर्ष: मूल्य श्रृंखलाओं पर नियंत्रण और निजी क्षेत्र को बढ़ावा

  • 10–30 वर्ष: मूल विज्ञान, बायोटेक, सामग्री विज्ञान और कॉग्निटिव वॉरफेयर में साहसिक निवेश

उन्होंने रक्षा तकनीकी परिषद गठन का सुझाव दिया।

पहले दिन की प्रमुख थीमैटिक सत्र

  1. ऑपरेशन सिंदूर: ए सोवरेन स्ट्रैटेजिक विक्ट्री

  2. बदलती स्थिति: रक्षा सुधारों की अनिवार्यता

  3. सिविल-मिलिट्री फ्यूज़न: परिवर्तन के प्रमुख चालक

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का विशेष संबोधन

उन्होंने कहा कि तकनीक ने भूगोल की सीमाओं को अप्रासंगिक बना दिया है और युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। AI, हाइपरसोनिक्स, रोबोटिक्स और सेंसर-आधारित युद्धक्षेत्र नई रणनीतिक वास्तविकताएँ हैं। उन्होंने मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए नई सैन्य सोच की आवश्यकता पर बल दिया।

दूसरा दिन

दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण होगा रक्षा मंत्री का विशेष सत्र, जिसमें वे भारत की रक्षा सुधार यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण पहलें जारी करेंगे।

निष्कर्ष

दो दिवसीय चाणक्य डिफेंस डायलॉग 2025 भारत की सुरक्षा संरचना, आत्मनिर्भरता, तकनीकी श्रेष्ठता और सैन्य आधुनिकीकरण का व्यापक खाका प्रस्तुत करेगा। यह भारतीय सेना की "सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत" के निर्माण में निर्णायक भूमिका को मजबूत करता है।

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