Media24Media.com: धान खरीदी अव्यवस्था पर कांग्रेस का काम रोको प्रस्ताव, सरकार को घेरा

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धान खरीदी अव्यवस्था पर कांग्रेस का काम रोको प्रस्ताव, सरकार को घेरा

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 CG Assembly Winter Session 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आज दूसरे दिन धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर सदन में तीखा टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने धान खरीदी की बदहाल व्यवस्था को लेकर काम रोको प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस ने सभी कार्य स्थगित कर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।


नेता प्रतिपक्ष ने सदन में आरोप लगाया कि किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल रहे हैं, पंजीयन प्रक्रिया जटिल बना दी गई है और कई जगहों पर खरीदी लगभग ठप है। उन्होंने कहा कि सूखत के नाम पर अतिरिक्त कटौती की जा रही है और बोरे निर्धारित वजन से कम हैं। धान का उठाव नहीं होने से किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

डॉ. महंत ने कहा कि पंजीयन में जानबूझकर जटिलताएं पैदा की गई हैं। गिरदावरी में भारी त्रुटियां हुई हैं और अब तक करीब 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। वन अधिकार पट्टा धारक किसानों का भी पंजीयन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को टोकन नहीं मिलने से वे मानसिक दबाव में हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को आसंदी ने स्वीकार कर लिया, जिसके बाद धान खरीदी पर चर्चा की अनुमति दी गई। चर्चा की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की। उन्होंने कहा कि सरकार धान खरीदना ही नहीं चाहती। किसानों का रकबा लगातार घट रहा है। नेटवर्क और टावर की कमी के कारण कई इलाकों में इंटरनेट नहीं चल पा रहा है, जिससे पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि किसान पूरे प्रदेश में भटक रहे हैं। उन्होंने महासमुंद जिले की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक किसान ने अत्यधिक दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीदी व्यवस्था को चौपट कर इसे निजी हाथों में सौंपना चाहती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। लाखों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित हैं और लाखों क्विंटल धान सहकारी समितियों में सड़ रहा है। धान का समय पर उठाव नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक माह में 35 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है, लेकिन अव्यवस्था के लिए पूरी सरकार जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने एफसीआई द्वारा पिछले वर्ष का चावल नहीं खरीदे जाने का मुद्दा भी उठाया।

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