Media24Media.com: हरित समुद्री भारत की ओर: मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047

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हरित समुद्री भारत की ओर: मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047

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मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)

  • मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 व्यापार, निवेश और रोजगार के लिए एक उत्प्रेरक है, जो भारत को आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ाता है।

  • अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत हरित शिपिंग और समुद्री विकास के लिए लगभग ₹80 लाख करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।

  • सागरमाला कार्यक्रम के तहत 2035 तक ₹5.8 लाख करोड़ की लागत वाली 840 परियोजनाएँ कार्यान्वयन में हैं।

परिचय

भारत में ग्रीन मैरीटाइम (हरित समुद्री विकास) की अवधारणा सुरक्षित, स्वच्छ और सतत बंदरगाह संचालन की आवश्यकता से विकसित हुई। जैसे-जैसे वैश्विक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण (HSE) मानकों का महत्व बढ़ा, भारतीय बंदरगाहों ने यह महसूस किया कि दक्षता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और श्रमिकों का कल्याण भी अनिवार्य है।

भारत की लंबी तटरेखा में मैंग्रोव, लैगून, प्रवाल भित्तियाँ और समुद्र तट शामिल हैं, जो जैव विविधता और समुद्री जीवन से समृद्ध हैं तथा लाखों तटीय समुदायों का आधार हैं। किंतु व्यापार और विकास के बढ़ते दबाव के कारण इन क्षेत्रों पर खतरा भी बढ़ा है। इसे संतुलित ढंग से प्रबंधित करने के लिए भारतीय बंदरगाहों को नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने, वायु और जल गुणवत्ता सुधारने, हरित आवरण बढ़ाने तथा अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो गया है।

मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) द्वारा तैयार मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 भारत के समुद्री क्षेत्र को सशक्त, स्वच्छ और सतत बनाने की रूपरेखा है। भविष्य का समुद्री परिवहन हरित हाइड्रोजन, अमोनिया, जैव-ईंधन और LNG जैसे स्वच्छ ईंधनों पर आधारित होगा। इस दिशा में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शून्य-उत्सर्जन ईंधनों की राह प्रशस्त कर रहा है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन

इस मिशन का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन कम करना और भारत को हरित हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाना है।

2030 तक लक्ष्य:

  • 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन

  • ₹8 लाख करोड़ का निवेश

  • 6 लाख रोजगार

  • ₹1 लाख करोड़ का जीवाश्म ईंधन आयात बचत

कांडला, पारादीप और तूतीकोरिन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047

मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 के तहत बंदरगाह, शिपिंग और अंतर्देशीय जलमार्गों में ₹3–3.5 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है।
मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 में लगभग ₹80 लाख करोड़ का निवेश प्रस्तावित है, जिसमें ग्रीन कॉरिडोर, ग्रीन हाइड्रोजन बंकरिंग, मेथनॉल चालित जहाज़ और 300 से अधिक कार्य योजनाएँ शामिल हैं।

भारत की ग्रीन पोर्ट पहलें

सौर ऊर्जा

  • छतों, अनुपयोगी भूमि और शांत जल क्षेत्रों में सोलर पैनल

  • फ्लोटिंग सोलर पीवी परियोजनाएँ

पवन ऊर्जा

  • ऑनशोर और ऑफशोर विंड फार्म

  • गुजरात, कच्छ और ओखा क्षेत्र में संभावनाएँ

अन्य नवीकरणीय ऊर्जा

  • ज्वारीय ऊर्जा (गुजरात)

  • वेव एनर्जी और सोलर थर्मल

प्रमुख योजनाएँ और पहल

  • हरित सागर ग्रीन पोर्ट गाइडलाइंस 2023

  • ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम (GTTP)

  • हरित नौका (ग्रीन वेसल) पहल

  • तटीय ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर

  • सागरमाला कार्यक्रम – ₹5.8 लाख करोड़ की 840 परियोजनाएँ

स्वच्छ बंदरगाह: उत्सर्जन में कमी

  • 2030 तक 50% पोर्ट वाहनों को स्वच्छ ईंधन पर लाने का लक्ष्य

  • शोर-टू-शिप पावर

  • पोर्ट उपकरणों का विद्युतीकरण

  • LNG बंकरिंग

  • धूल और वायु प्रदूषण नियंत्रण

  • 33% ग्रीन बेल्ट अनिवार्य

भारतीय पोर्ट्स विधेयक 2025

इंडियन पोर्ट्स बिल, 2025 आधुनिक वैश्विक हरित मानकों, आपदा तैयारी और दक्ष संचालन को अनिवार्य बनाता है।
FY 2024-25 में प्रमुख बंदरगाहों पर 855 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग के साथ भारत वैश्विक स्तर पर मजबूती से उभरा है।

वैश्विक साझेदारियाँ और संवाद

  • सागरमंथन

  • ग्रीन और डिजिटल मैरीटाइम कॉरिडोर

  • भारत-सिंगापुर ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर

  • ग्रीन शिपिंग कॉन्क्लेव, मुंबई

हरित शिपिंग और समुद्री प्रदूषण नियंत्रण

  • ऑयल स्पिल रिस्पॉन्स प्लान

  • सैटेलाइट आधारित निगरानी

  • पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा

निष्कर्ष

भारत एक नए समुद्री युग के द्वार पर खड़ा है—जहाँ आर्थिक विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। स्वच्छ बंदरगाह, कम-उत्सर्जन जहाज़, स्मार्ट अवसंरचना और समावेशी विकास के साथ भारत 2047 तक न केवल एक वैश्विक समुद्री शक्ति बनेगा, बल्कि महासागरों का जिम्मेदार संरक्षक भी सिद्ध होगा।


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