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BARC द्वारा विकिरण तकनीक से काला नमक धान सहित फसलों का सुधार: उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), जो परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की एक घटक इकाई है, उत्तर प्रदेश की स्थानीय सुगंधित धान की किस्म ‘काला नमक’ के सुधार के लिए विकिरण-प्रेरित उत्परिवर्तन प्रजनन (Radiation Induced Mutation Breeding) तकनीक का उपयोग कर रहा है। यह कार्य आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ANDUAT), कुमारगंज, अयोध्या के सहयोग से किया जा रहा है।

काला नमक धान के सुधार से संबंधित अनुसंधान एवं विकास कार्य में उत्तर प्रदेश के छह कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)—सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बस्ती, गोरखपुर (I एवं II) और बलरामपुर—शामिल हैं, जिससे प्रदेश के तराई क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के 10 क्षेत्रीय अनुकूली परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र (RATDS) को राज्य के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में विकिरण से विकसित धान की उन्नत किस्मों के परीक्षण हेतु चिन्हित किया गया है।

इसके साथ ही, गेहूं और भिंडी की विकिरण-आधारित सुधार परियोजनाएं रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RLBCAU), झांसी तथा ANDUAT, अयोध्या के सहयोग से संचालित की जा रही हैं। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR), कानपुर नियमित रूप से BARC द्वारा विकसित उत्परिवर्तित किस्मों का राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन कर रहा है। वर्तमान में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (BUAT), बांदा के सहयोग से उत्तर प्रदेश के लिए सरसों और गेहूं की उपज मूल्यांकन परीक्षाएं जारी हैं। वहीं, DAE/परमाणु विज्ञान अनुसंधान बोर्ड (BRNS) ने मसूर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु विकिरण-प्रेरित उत्परिवर्तन पर एक शोध परियोजना के लिए ICAR-IIPR, कानपुर को वित्तपोषण प्रदान किया है।

BARC द्वारा विकसित मूंगफली की किस्म TG-37A को चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मैनपुरी के सहयोग से उत्तर प्रदेश के लिए जारी किया गया है। वहीं, ट्रोम्बे अलसी किस्म TL-99, जो कम लिनोलेनिक अम्ल वाली भारत की पहली खाद्य तेल किस्म है तथा उच्च बीज एवं तेल उत्पादन क्षमता रखती है, को भी उत्तर प्रदेश में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है।

व्यावसायिक खेती के विभिन्न चरणों में बीजों को सामान्यतः न्यूक्लियस, ब्रीडर, फाउंडेशन और सर्टिफाइड बीज के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। ट्रोम्बे द्वारा विकसित फसल किस्मों के बीज विभिन्न राज्यों के किसानों को संबंधित कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। TL-99 के 10 किलोग्राम न्यूक्लियस बीज IIPR, कानपुर को बीज उत्पादन एवं प्रचार हेतु प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, BARC द्वारा विकसित मूंगफली की किस्मों के ब्रीडर बीज फाउंडेशन एवं सर्टिफाइड बीज उत्पादन के लिए विभिन्न एजेंसियों को उपलब्ध कराए गए हैं। उत्तर प्रदेश के सात जिलों में ट्रोम्बे मूंगफली के ब्रीडर बीज की आपूर्ति कर इसके विस्तार को बढ़ावा दिया गया है।

निजी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में तीन विकिरण प्रसंस्करण सुविधाएं पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं, जो मांग के आधार पर सेवाएं प्रदान कर रही हैं। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा चिकित्सा उत्पादों के निर्जीवीकरण हेतु ऐसी ही एक सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव प्रारंभिक अवस्था में है। फिलहाल विभाग के समक्ष कोई अन्य प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न संस्थानों के छात्र परमाणु कृषि के विभिन्न पहलुओं पर शोध परियोजनाओं के लिए BARC, मुंबई में कार्य कर रहे हैं। साझा शोध रुचियों के आधार पर BARC, उत्तर प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) करने की प्रक्रिया में भी है। इसके अतिरिक्त, DAE/BRNS द्वारा राज्य के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों में परमाणु कृषि से संबंधित शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ANDUAT, अयोध्या में छात्रों एवं शिक्षकों के लिए विकिरण तकनीकों के लाभकारी उपयोग पर व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही, इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के तत्वावधान में लखनऊ के चार प्रमुख संस्थानों में कृषि, खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा के क्षेत्र में परमाणु तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर जन-जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

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