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क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया ने डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता जताई

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क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025 (RODHS 2025) का उद्घाटन 19 नवंबर को नई दिल्ली में हुआ, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय विकास संगठन और हेल्थ-टेक नवप्रवर्तक एक साथ जुटे।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-SEARO) और यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन-दिवसीय सम्मेलन में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, मालदीव और अन्य देशों के नेता यह विचार-विमर्श कर रहे हैं कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), ओपन स्टैंडर्ड्स और जनरेटिव एआई जैसी तकनीकें यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) तथा क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को कैसे सशक्त बना सकती हैं।

उद्घाटन सत्र ने सहयोग, समानता और इंटरऑपरेबिलिटी को डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन के मुख्य स्तंभ बताते हुए एक मजबूत संदेश दिया।

NeGD के सीओओ रजनीश कुमार ने कहा,

“सहयोग केवल वांछनीय नहीं, बल्कि अत्यावश्यक है। स्वास्थ्य मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के बीच संयुक्त शासन मॉडल राष्ट्रीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए आवश्यक है। यह सहयोग Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM), CoWIN, आधार और UPI जैसे राष्ट्रीय तंत्रों की सुरक्षा और पारस्परिकता सुनिश्चित करेगा।”

WHO-SEARO के UHC/हेल्थ सिस्टम्स निदेशक मनोज झालानी ने कहा,

“यह सम्मेलन क्षेत्रभर में तकनीकी क्षमताओं को सशक्त बनाएगा और प्रतिभागियों को इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म लागू करने में सक्षम बनाएगा। विश्वास, स्थिरता और इंटरऑपरेबिलिटी, अपनाने और विस्तार की नींव हैं।”

UNICEF इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव अर्जन डी वैग्ट ने कहा,

“डिजिटल स्वास्थ्य को आगे बढ़ाते समय केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, परिवार और बच्चे पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। तकनीक हमें हर बच्चे—विशेषकर सबसे कमजोर बच्चों—तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने में मदद करेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि “डिजिटल स्वास्थ्य, यदि सोच-समझकर और समानता के साथ लागू किया जाए, तो स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक मजबूत और सुलभ बना सकता है।”

NHA के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा,

“आधार, UPI, CoWIN और ABDM जैसे भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यह दिखाते हैं कि स्केलेबल डिजिटल पब्लिक गुड्स समाज को कैसे लाभ पहुंचाते हैं। हमने NeGD के साथ मिलकर प्रदाताओं और राज्यों में सुरक्षित स्वास्थ्य डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है।”

स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने कहा,

“स्वास्थ्य परिणाम सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वच्छता, पोषण, जल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे कारकों पर भी निर्भर करते हैं। इसलिए मंत्रालयों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म का एकीकृत होना बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट 2019 और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 तकनीकी मानकों और इंटरऑपरेबिलिटी के माध्यम से UHC की नींव रखते हैं।”

प्रमुख सत्रों की प्रमुख बातें

प्लेनरी सत्र — “कैसे ओपन स्टैंडर्ड्स, फुल-स्टैक और DPI डिजिटल परिवर्तन में तेजी लाते हैं”

NeGD, NHA, UNICEF और WHO-SEARO के विशेषज्ञों ने कहा कि अब समय पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर समावेशी और बड़े पैमाने पर डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करने का है। वक्ताओं ने ओपन स्टैंडर्ड्स, फुल-स्टैक फ्रेमवर्क और DPI को न्यायसंगत विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

CoWIN और ABDM को भारत के DPI आधारित वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया। UNICEF ने बच्चों के अधिकारों और डेटा संरक्षण पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक दक्षिण में डिजिटल स्वास्थ्य का भविष्य ओपन, मानक-आधारित, बाल-केंद्रित और DPI-संचालित प्रणालियों पर निर्भर करेगा।

सत्र 2 — “फाउंडेशनल DPI और स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका”

WEF, UIDAI, NPCI, ONDC, NeGD और थाईलैंड, नेपाल, मालदीव के प्रतिनिधियों ने चर्चा की कि डिजिटल पहचान, भुगतान, डेटा एक्सचेंज और रजिस्ट्रियां मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों की आधारशिला हैं। निष्कर्ष था कि सफलता का आकलन केवल डिजिटल अपनाने से नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य परिणाम, लागत बचत और नागरिक सशक्तिकरण से होना चाहिए।

सत्र 3 — “FHIR की मूल बातें और सदस्य देशों के अनुभव”

HL7 इंडिया, CDAC पुणे, स्वास्थ एलायंस, बांग्लादेश DGHS और श्रीलंका स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों ने FHIR को वैश्विक डेटा विनिमय मानक बताया। लेकिन सफल उपयोग के लिए शासन सुधार, सहयोग, कार्यबल विकास और सतत निवेश जरूरी हैं।

सत्र 4 — “हेल्थ सेक्टर DPI – उपयोग मामलों और क्षेत्रीय दृष्टिकोण”

भारत, श्रीलंका और थाईलैंड के अनुभवों ने दिखाया कि विविध स्वास्थ्य प्रणालियों के बावजूद, सभी देशों का फोकस इंटरऑपरेबिलिटी, गोपनीयता, शासन और डेटा-आधारित नवाचार पर है।

सत्र 5 — “GenAI और डिजिटल स्वास्थ्य इंटरऑपरेबिलिटी में उभरते अभ्यास”

भारत, नेपाल, थाईलैंड और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चर्चा की कि जनरेटिव एआई डेटा विखंडन को कैसे कम कर सकता है और समानता आधारित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर सकता है। सभी विशेषज्ञ सहमत थे कि एआई की क्षमता तभी खुल सकती है जब इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत हो।

सत्र 6 — “स्वास्थ्य के लिए GenAI – प्रदर्शन और उपयोग मामले”

Ekacare, Google, NiramAI, Sunoh.AI और IIT दिल्ली के नेतृत्वकर्ताओं ने एआई-आधारित नवाचारों का लाइव प्रदर्शन किया—जैसे स्वचालित क्लिनिकल दस्तावेजीकरण, एआई डायग्नॉस्टिक्स, बहुभाषी रोगी सहभागिता और प्रारंभिक कैंसर पहचान तकनीकें।

पहला दिन — डिजिटल स्वास्थ्य के भविष्य के लिए मजबूत संदेश

RODHS 2025 के पहले दिन ने यह स्पष्ट किया कि दक्षिण-पूर्व एशिया डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है। नेताओं और विशेषज्ञों ने ओपन स्टैंडर्ड्स, इंटरऑपरेबिलिटी और डिजिटल समानता को UHC की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन ने यह भी रेखांकित किया कि स्केलेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जनरेटिव एआई लचीली और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।


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