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भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में 50,000 NQAS प्रमाणित सुविधाओं का मील का पत्थर पार किया

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भारत सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 31 दिसंबर 2025 तक, पूरे भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50,373 सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत प्रमाणित हो चुकी हैं। यह मानक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा स्थापित एक समग्र गुणवत्ता ढांचा है।

यह उपलब्धि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि देश ने NQAS प्रमाणन में 50,000 की संख्या पार कर ली है, और सरकार की गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित देखभाल के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह सभी नागरिकों, विशेषकर गरीब, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

NQAS की यात्रा 2015 में केवल 10 प्रमाणित स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ शुरू हुई थी, जो प्रारंभ में जिला अस्पतालों पर केंद्रित थी ताकि सुरक्षित, रोगी-केंद्रित और गुणवत्ता-निश्चित सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। समय के साथ, यह ढांचा उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), आयुष्मान आरोग्य मंदिर–PHC, AAM–UPHC और AAM–Sub Health Centre तक विस्तारित हुआ, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के सभी स्तरों में गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित किया जा सके। वर्चुअल असेसमेंट्स के परिचय ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में गुणवत्ता कवरेज को तेजी से बढ़ाया।

प्रमाणित सुविधाओं की संख्या दिसंबर 2023 में 6,506 से बढ़कर दिसंबर 2024 में 22,786 और दिसंबर 2025 में 50,373 हो गई—यह एक साल में असाधारण विस्तार को दर्शाता है। इसमें 48,663 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (SHC, PHC, UPHC) और 1,710 माध्यमिक देखभाल सुविधाएं (CHC, SDH, DH) शामिल हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के सभी स्तरों में गुणवत्ता की संस्थागत उपस्थिति को दर्शाता है।

भारत की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की दिशा, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 द्वारा निर्देशित है, का उद्देश्य गुणवत्ता, किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बिना वित्तीय बोझ के सुनिश्चित करना है। NQAS के इस तेज़ विस्तार में निरंतर क्षमता निर्माण, डिजिटल नवाचार, मूल्यांकनकर्ताओं की संख्या में वृद्धि और सतत गुणवत्ता सुधार प्रणाली जैसी बहुपक्षीय रणनीतियों को अपनाया गया।

50,000 NQAS प्रमाणन पार करना भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है कि देश एक सुदृढ़, आत्मनिर्भर और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रहा है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की भावना और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मार्गदर्शक सिद्धांतों को दर्शाती है, और यह पुष्टि करती है कि गुणवत्ता स्वास्थ्य देखभाल भारत के विकास का केंद्र है।

भारत सरकार NQAS प्रमाणन को बनाए रखने और और अधिक विस्तारित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि गुणवत्ता सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की एक अंतर्निहित और स्थायी विशेषता बन जाए। इसी दिशा में, देश ने मार्च 2026 तक कम से कम 50% सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का NQAS प्रमाणन हासिल करने का अंतरिम लक्ष्य निर्धारित किया है, जो बड़े पैमाने पर गुणवत्ता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित देखभाल को संस्थागत रूप देने की सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।


आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025 में दक्षिण-पूर्व एशिया ने डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता जताई

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क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025 (RODHS 2025) का उद्घाटन 19 नवंबर को नई दिल्ली में हुआ, जिसमें दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय विकास संगठन और हेल्थ-टेक नवप्रवर्तक एक साथ जुटे।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD), नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO-SEARO) और यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस तीन-दिवसीय सम्मेलन में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, मालदीव और अन्य देशों के नेता यह विचार-विमर्श कर रहे हैं कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), ओपन स्टैंडर्ड्स और जनरेटिव एआई जैसी तकनीकें यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) तथा क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को कैसे सशक्त बना सकती हैं।

उद्घाटन सत्र ने सहयोग, समानता और इंटरऑपरेबिलिटी को डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन के मुख्य स्तंभ बताते हुए एक मजबूत संदेश दिया।

NeGD के सीओओ रजनीश कुमार ने कहा,

“सहयोग केवल वांछनीय नहीं, बल्कि अत्यावश्यक है। स्वास्थ्य मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के बीच संयुक्त शासन मॉडल राष्ट्रीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए आवश्यक है। यह सहयोग Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM), CoWIN, आधार और UPI जैसे राष्ट्रीय तंत्रों की सुरक्षा और पारस्परिकता सुनिश्चित करेगा।”

WHO-SEARO के UHC/हेल्थ सिस्टम्स निदेशक मनोज झालानी ने कहा,

“यह सम्मेलन क्षेत्रभर में तकनीकी क्षमताओं को सशक्त बनाएगा और प्रतिभागियों को इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म लागू करने में सक्षम बनाएगा। विश्वास, स्थिरता और इंटरऑपरेबिलिटी, अपनाने और विस्तार की नींव हैं।”

UNICEF इंडिया के डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव अर्जन डी वैग्ट ने कहा,

“डिजिटल स्वास्थ्य को आगे बढ़ाते समय केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, परिवार और बच्चे पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। तकनीक हमें हर बच्चे—विशेषकर सबसे कमजोर बच्चों—तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने में मदद करेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि “डिजिटल स्वास्थ्य, यदि सोच-समझकर और समानता के साथ लागू किया जाए, तो स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक मजबूत और सुलभ बना सकता है।”

NHA के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा,

“आधार, UPI, CoWIN और ABDM जैसे भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यह दिखाते हैं कि स्केलेबल डिजिटल पब्लिक गुड्स समाज को कैसे लाभ पहुंचाते हैं। हमने NeGD के साथ मिलकर प्रदाताओं और राज्यों में सुरक्षित स्वास्थ्य डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है।”

स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने कहा,

“स्वास्थ्य परिणाम सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वच्छता, पोषण, जल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे कारकों पर भी निर्भर करते हैं। इसलिए मंत्रालयों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म का एकीकृत होना बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट 2019 और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 तकनीकी मानकों और इंटरऑपरेबिलिटी के माध्यम से UHC की नींव रखते हैं।”

प्रमुख सत्रों की प्रमुख बातें

प्लेनरी सत्र — “कैसे ओपन स्टैंडर्ड्स, फुल-स्टैक और DPI डिजिटल परिवर्तन में तेजी लाते हैं”

NeGD, NHA, UNICEF और WHO-SEARO के विशेषज्ञों ने कहा कि अब समय पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर समावेशी और बड़े पैमाने पर डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करने का है। वक्ताओं ने ओपन स्टैंडर्ड्स, फुल-स्टैक फ्रेमवर्क और DPI को न्यायसंगत विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

CoWIN और ABDM को भारत के DPI आधारित वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया गया। UNICEF ने बच्चों के अधिकारों और डेटा संरक्षण पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक दक्षिण में डिजिटल स्वास्थ्य का भविष्य ओपन, मानक-आधारित, बाल-केंद्रित और DPI-संचालित प्रणालियों पर निर्भर करेगा।

सत्र 2 — “फाउंडेशनल DPI और स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका”

WEF, UIDAI, NPCI, ONDC, NeGD और थाईलैंड, नेपाल, मालदीव के प्रतिनिधियों ने चर्चा की कि डिजिटल पहचान, भुगतान, डेटा एक्सचेंज और रजिस्ट्रियां मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों की आधारशिला हैं। निष्कर्ष था कि सफलता का आकलन केवल डिजिटल अपनाने से नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य परिणाम, लागत बचत और नागरिक सशक्तिकरण से होना चाहिए।

सत्र 3 — “FHIR की मूल बातें और सदस्य देशों के अनुभव”

HL7 इंडिया, CDAC पुणे, स्वास्थ एलायंस, बांग्लादेश DGHS और श्रीलंका स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों ने FHIR को वैश्विक डेटा विनिमय मानक बताया। लेकिन सफल उपयोग के लिए शासन सुधार, सहयोग, कार्यबल विकास और सतत निवेश जरूरी हैं।

सत्र 4 — “हेल्थ सेक्टर DPI – उपयोग मामलों और क्षेत्रीय दृष्टिकोण”

भारत, श्रीलंका और थाईलैंड के अनुभवों ने दिखाया कि विविध स्वास्थ्य प्रणालियों के बावजूद, सभी देशों का फोकस इंटरऑपरेबिलिटी, गोपनीयता, शासन और डेटा-आधारित नवाचार पर है।

सत्र 5 — “GenAI और डिजिटल स्वास्थ्य इंटरऑपरेबिलिटी में उभरते अभ्यास”

भारत, नेपाल, थाईलैंड और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चर्चा की कि जनरेटिव एआई डेटा विखंडन को कैसे कम कर सकता है और समानता आधारित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित कर सकता है। सभी विशेषज्ञ सहमत थे कि एआई की क्षमता तभी खुल सकती है जब इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत हो।

सत्र 6 — “स्वास्थ्य के लिए GenAI – प्रदर्शन और उपयोग मामले”

Ekacare, Google, NiramAI, Sunoh.AI और IIT दिल्ली के नेतृत्वकर्ताओं ने एआई-आधारित नवाचारों का लाइव प्रदर्शन किया—जैसे स्वचालित क्लिनिकल दस्तावेजीकरण, एआई डायग्नॉस्टिक्स, बहुभाषी रोगी सहभागिता और प्रारंभिक कैंसर पहचान तकनीकें।

पहला दिन — डिजिटल स्वास्थ्य के भविष्य के लिए मजबूत संदेश

RODHS 2025 के पहले दिन ने यह स्पष्ट किया कि दक्षिण-पूर्व एशिया डिजिटल स्वास्थ्य परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है। नेताओं और विशेषज्ञों ने ओपन स्टैंडर्ड्स, इंटरऑपरेबिलिटी और डिजिटल समानता को UHC की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन ने यह भी रेखांकित किया कि स्केलेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जनरेटिव एआई लचीली और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।


एएमआरआईटी फार्मेसी के 10 वर्ष पूरे: स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने किया समारोह का उद्घाटन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एएमआरआईटी (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी की 10वीं वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सस्ती दवाओं की उपलब्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सार्वजनिक क्षेत्र की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

2015 में स्थापना के बाद से, एएमआरआईटी फार्मेसियों ने जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं को 50% से 90% तक की छूट पर उपलब्ध कराकर मरीजों, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लोगों के इलाज की लागत को काफी कम किया है।

सभा को संबोधित करते हुए, नड्डा ने एएमआरआईटी के सफल संचालन के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को बधाई दी। उन्होंने याद किया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और न्यायपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया था। इसी दृष्टि के साथ जन औषधि और एएमआरआईटी जैसी पहल शुरू की गईं, ताकि दवाएं और चिकित्सा उपकरण कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि एएमआरआईटी आज एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें 255 से अधिक फार्मेसियाँ संचालित हैं, और इसे पूरे देश में 500 आउटलेट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि जहाँ आज हर एम्स में एएमआरआईटी फार्मेसी उपलब्ध है, अब लक्ष्य इसे हर मेडिकल कॉलेज और हर जिला अस्पताल तक पहुँचाना है ताकि किफायती दवाएं देश के हर नागरिक तक पहुंच सकें।

एएमआरआईटी फार्मेसी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रांडेड दवाओं पर 50% की औसत छूट से अब तक 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। लगभग ₹17,000 करोड़ की एमआरपी वाली दवाएं अब तक वितरित की गई हैं, जिससे मरीजों को लगभग ₹8,500 करोड़ की बचत हुई है।

उन्होंने एएमआरआईटी फार्मेसियों के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा के मार्गदर्शन में एएमआरआईटी की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और न्यायसंगत दवा पहुँचाना है।

उन्होंने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और एएमआरआईटी नेटवर्क की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि पूरा एचएलएल और एएमआरआईटी परिवार नेटवर्क के विस्तार, सिस्टम सुधारने और संचालन को और मजबूत करने के लिए “जोश, जूनून और जज़्बात” के साथ कार्य करता रहेगा।

धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए अनीता थम्पी ने स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और एचएलएल व एएमआरआईटी टीमों की प्रतिबद्धता की भी सराहना की, जिनकी मेहनत से सस्ती दवाएं लोगों तक पहुँची हैं।

इस अवसर पर नड्डा ने देशभर में 10 नई एएमआरआईटी फार्मेसियों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने AMRIT ITes – Eco Green Version 2.0 नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया, जो संचालन को अधिक पारदर्शी, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा।

कार्यक्रम के दौरान एएमआरआईटी के दस वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक जारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती दवाएं पहुँचाने के लिए मोबाइल फार्मेसी वैन का भी शुभारंभ किया गया। इसके अलावा, दवाओं की उपलब्धता, कीमत और नजदीकी एएमआरआईटी फार्मेसी की जानकारी देने के लिए एक 24×7 नेशनल कॉन्टैक्ट सेंटर का उद्घाटन किया गया।

पृष्ठभूमि

एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड, एएमआरआईटी का कार्यान्वयन एजेंसी, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न सार्वजनिक उपक्रम है। यह गर्भनिरोधक उत्पादों, अस्पताल उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों, डायग्नोस्टिक सेवाओं (हिंदलैब्स), खुदरा फार्मेसी (AMRIT), एचएलएल फार्मेसी, आईवियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, प्रोक्योरमेंट और कंसल्टेंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करती है। एचएलएल 7 अत्याधुनिक फैक्ट्रियों, 5 सहायक कंपनियों और एक कॉर्पोरेट आरएंडडी केंद्र का संचालन करता है, जो भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

भारत में नर्सिंग नीति और सुधारों को सशक्त बनाने हेतु तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ज्हपाइगो (Jhpiego) के सहयोग से भारत में नर्सिंग नीति प्राथमिकताओं और सर्वोत्तम प्रथाओं पर राष्ट्रीय परामर्श एवं अनुभव साझा करने पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य नर्सिंग और दाई (मिडवाइफरी) क्षेत्र में नीति संवाद को सशक्त बनाना और सुधारों को आगे बढ़ाना है।

इस परामर्श में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नियामकों, नर्सिंग शिक्षकों, व्यावसायिक संघों और विकास सहयोगियों सहित देशभर के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य चल रही पहलों की समीक्षा करना, नई चुनौतियों की पहचान करना और नर्सिंग प्रशासन, शिक्षा और कार्यबल प्रबंधन को भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप मजबूत करने के लिए नवोन्मेषी मॉडल साझा करना था।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि नर्स और दाइयां भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नर्सें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में हाल के सुधार, जैसे राष्ट्रीय नर्सिंग एवं मिडवाइफरी आयोग (NNMC) की स्थापना, क्षमता-आधारित पाठ्यक्रमों को अपनाना, और नियामक ढांचे का आधुनिकीकरण — नर्सिंग इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्यों से प्राप्त सर्वोत्तम प्रथाएं (Best Practices) राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक इनपुट के रूप में कार्य करेंगी और अन्य राज्यों को भी इन मॉडलों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि पूरे देश में नर्सिंग क्षेत्र में सुधार लाया जा सके।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. वी.के. पॉल ने मंत्रालय और WHO को इस महत्वपूर्ण परामर्श के आयोजन के लिए सराहा। उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली वैश्विक स्तर पर अपनी गुणवत्ता और नर्सिंग कार्यबल की प्रतिबद्धता के कारण सम्मानित है। उन्होंने नर्सिंग को भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बताते हुए नर्सों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सेवा के दौरान प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर भारत में WHO की प्रतिनिधि डॉ. पेडेन ने नर्सिंग और मिडवाइफरी क्षेत्र में भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व के सबसे बड़े नर्सिंग कार्यबल योगदानकर्ताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 2030 तक नर्सों की कमी में अपेक्षित कमी का श्रेय भारत की नीतियों और सुधारों को जाता है।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने नीति प्राथमिकताओं जैसे कार्यबल का समान वितरण, शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुनिश्चित करना, नेतृत्व विकास और नर्सिंग पेशेवरों के लिए करियर प्रगति के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।

तीन दिवसीय कार्यशाला में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा और राज्यों की प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनमें नर्सिंग शिक्षा, कार्यबल योजना और डिजिटल लर्निंग में नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रमाण-आधारित नीतिगत निर्णय लेना और राज्यों के बीच पारस्परिक सीख को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत में एक मजबूत, कुशल और सशक्त नर्सिंग कार्यबल सुनिश्चित किया जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की “स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स नर्सिंग रिपोर्ट” में वैश्विक नर्सिंग कार्यबल की प्रवृत्तियों और प्राथमिकताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है:

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