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राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन सभा 2025: “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” की दिशा में भारत का समग्र दृष्टिकोण

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भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री,जगत प्रकाश नड्डा, जिन्होंने वन हेल्थ पर कार्यकारी संचालन समिति की अध्यक्षता भी की है, ने आज भारत मंडपम कन्वेंशन हॉल से वीडियो संदेश के माध्यम से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन सभा 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग; डॉ. अजय के. सूद, अध्यक्ष, वैज्ञानिक संचालन समिति, वन हेल्थ एवं प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार; और डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग एवं महानिदेशक, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) भी उपस्थित थे।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम का थीम है: “Translating Knowledge to Practice – One Earth, One Health, One Future” (ज्ञान को व्यवहार में रूपांतरित करना – एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य)।

सभा के दौरान मुख्य बातें:

  • एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण:

    नड्डा ने कहा कि “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” केवल थीम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भविष्य की महामारियों के प्रति तैयार रहने का आधार है।

  • भारत की स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार प्रगति:

    उन्होंने भारत की दवा और चिकित्सा विज्ञान में वैश्विक भूमिका का उल्लेख किया, साथ ही कोविड-19 वैक्सीन विकास की उपलब्धियाँ जैसे Covaxin, Covishield, Corbevax और दुनिया की पहली नाक के माध्यम से दी जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन को सराहा। उन्होंने भारत की mRNA, DNA, वायरल वेक्टर और बायोसिमिलर जैसी अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों पर भी प्रकाश डाला।

  • नैदानिक और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली में प्रगति:

    भारत ने TrueNat, PathoDetect और CRISPR-आधारित परीक्षणों जैसे नवाचारों के माध्यम से नैदानिक सेवाओं को तेज़, सटीक और सुलभ बनाया है। INSACOG और CoWIN जैसी प्लेटफार्मों ने देश की जनसंख्या-स्तरीय डिजिटल स्वास्थ्य क्षमता को प्रदर्शित किया।
  • राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन:

    नड्डा ने इसे महामारी तैयारी की दिशा में भारत के महत्वपूर्ण कदमों में से एक बताया। यह मिशन मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, पृथ्वी विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और आपदा प्रबंधन समेत 16 केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों/विभागों को एकीकृत करता है।

  • मुख्य क्रियाएं और सुविधाएँ:

    • कसाईखानों, पक्षी अभयारण्यों, चिड़ियाघरों और शहरी अपशिष्ट जल प्रणालियों में एकीकृत निगरानी।

    • संयुक्त रोग प्रकोप जाँच और चिकित्सा उपायों का विकास।

    • राष्ट्रीय स्तर पर 23 BSL-3 और BSL-4 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क।

  • वन हेल्थ दृष्टिकोण के लाभ:

    • महामारी और रोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।

    • एकीकृत हस्तक्षेपों और स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार।

    • मानव, पशु, पौधों और पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण।

अन्य वक्ताओं की मुख्य बातें:

  • डॉ. वी. के. पॉल (नीति आयोग):

    उन्होंने कहा कि यह एक सच्चा जन आंदोलन है जो मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देगा। उन्होंने राज्यों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
  • डॉ. अजय के. सूद:

    उन्होंने हाल के वर्षों में मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पौधों और पर्यावरण प्रणालियों को एकीकृत करने के प्रयासों का उल्लेख किया। राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने अब 16 प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाकर इस समन्वित दृष्टिकोण को साकार किया है।

  • अन्य उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी:

    अनु नागर (संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग), डॉ. निवेदिता गुप्ता (विज्ञानी G और संचारी रोग प्रमुख, ICMR), केंद्रीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं साझेदार एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विशेष गतिविधि:

सभा के अवसर पर BSL-3 प्रयोगशाला नेटवर्क SOP Compendium का विमोचन भी किया गया, जिसका उद्देश्य प्रयोगशालाओं में मानकीकृत प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना है।


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