Media24Media.com: #HealthSecurity

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #HealthSecurity. Show all posts
Showing posts with label #HealthSecurity. Show all posts

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आधुनिक सैन्य अस्पताल सुविधाओं की रखी आधारशिला, स्वास्थ्य सुरक्षा पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अप्रैल 2026 को आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के 262वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में नेत्र, कैंसर और जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की आधारशिला रखी। इसके साथ ही बेस हॉस्पिटल में नई अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास की भी शुरुआत की गई।

नई परियोजनाओं के तहत बेस हॉस्पिटल में 998 बेड के साथ 100 अतिरिक्त इमरजेंसी बेड विकसित किए जाएंगे, जिससे सेना के जवानों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये नई सुविधाएं सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को और मजबूत करेंगी, खासकर:

  • उन्नत नेत्र चिकित्सा

  • कैंसर उपचार

  • जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी

उन्होंने भरोसा जताया कि आधुनिक तकनीक से लैस ये केंद्र सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।

रिसर्च और नवाचार पर जोर

राजनाथ सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में रिसर्च और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत को:

  • कैंसर की शुरुआती पहचान

  • व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalised Medicine)

  • हृदय रोगों की भविष्यवाणी

  • मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान

जैसे क्षेत्रों में और आगे बढ़ने की जरूरत है।

फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भरता जरूरी

उन्होंने कहा कि भारत दवाइयों का बड़ा निर्यातक है, लेकिन नई दवाओं के शोध में अभी आत्मनिर्भरता की जरूरत है। इसके लिए:

  • स्टार्टअप और MSME को बढ़ावा

  • क्लिनिकल रिसर्च मजबूत करना

  • वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाना

जरूरी है।

क्लिनिकल ट्रायल और डेटा सिस्टम पर फोकस

रक्षा मंत्री ने क्लिनिकल ट्रायल सिस्टम में सुधार की आवश्यकता बताई और कहा कि:

  • राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ डेटा पूल बनाया जाए

  • स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार हों

  • डॉक्टरों के अनुभव साझा किए जाएं

इससे इलाज और नीति निर्माण दोनों बेहतर होंगे।

स्वास्थ्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा

उन्होंने कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। जब सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा का भरोसा होता है, तो वे अपने मिशन को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा करते हैं।

सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों को सम्मान

इस अवसर पर:

  • कमांड हॉस्पिटल, पुणे को सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार

  • आईएनएचएस अश्विनी, मुंबई को दूसरा स्थान

दिया गया।

नई पुस्तक का विमोचन

रक्षा मंत्री ने ‘Precision Protocols in Early Neurodevelopmental Intervention’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया, जो बच्चों के न्यूरो विकास संबंधी रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

 निष्कर्ष

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी होना चाहिए। उन्होंने सैन्य चिकित्सा सेवाओं से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों, रिसर्च और बेहतर प्रबंधन के जरिए देश को एक मजबूत और स्वस्थ राष्ट्र बनाने में योगदान दें।

इन्फ्लुएंजा तैयारी और प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने हेतु नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘इन्फ्लुएंजा चिंतन शिविर’ आयोजित

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इंडिया के सहयोग से “इन्फ्लुएंजा तैयारी एवं प्रतिक्रिया के लिए अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को सुदृढ़ करना” विषय पर दो दिवसीय इन्फ्लुएंजा चिंतन शिविर का आयोजन 22–23 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में किया।

चिंतन शिविर का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वीडियो संदेश के माध्यम से किया। उन्होंने इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए समन्वित तैयारी और प्रतिक्रिया उपायों के महत्व पर जोर देते हुए सर्ज क्षमता योजना को देश की महामारी-रोधी क्षमता मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) की अहम भूमिका को रेखांकित किया और केंद्र व राज्यों के बीच मजबूत तथा सहयोगात्मक निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

इस चिंतन शिविर में स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि और पर्यावरण मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD), राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों सहित लगभग 100 विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह सहभागिता सरकार के वन हेल्थ और समग्र सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach) को और सशक्त करती है। इन्फ्लुएंजा मामलों की रिपोर्टिंग के इतिहास वाले 11 राज्यों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि राज्य एवं जिला निगरानी इकाइयों के IDSP अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े, जिससे सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला। कार्यक्रम में तकनीकी प्रस्तुतियां, पैनल चर्चाएं, समूह कार्य सत्र और राज्यों की प्रस्तुतियां शामिल रहीं।

चर्चाओं में यह रेखांकित किया गया कि इन्फ्लुएंजा आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दीर्घकालिक रोगों से ग्रसित व्यक्तियों के लिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय IDSP नेटवर्क के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौसमी इन्फ्लुएंजा की वास्तविक समय में निगरानी कर रहा है। शिविर में इस बात पर सहमति बनी कि प्रभावी अंतर-क्षेत्रीय समन्वय, मजबूत निगरानी, प्रयोगशाला क्षमता और नैदानिक तैयारी के माध्यम से मौसमी एवं जूनोटिक इन्फ्लुएंजा के शीघ्र पता लगाने और समय पर प्रतिक्रिया को और बेहतर किया जाए।

चिंतन शिविर का एक प्रमुख परिणाम इन्फ्लुएंजा तैयारी की एक संरचित चेकलिस्ट का विकास रहा, जो केंद्र, राज्यों और जिलों को चार प्रमुख क्षेत्रों में मार्गदर्शन प्रदान करेगी—

  1. निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और जोखिम आकलन

  2. प्रयोगशाला प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण

  3. अस्पताल तैयारी और नैदानिक प्रतिक्रिया

  4. वन हेल्थ समन्वय, जोखिम संचार और सामुदायिक सहभागिता (RCCE)

शिविर का समापन मौसमी एवं जूनोटिक इन्फ्लुएंजा से निपटने के लिए समग्र सरकारी और वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति के साथ हुआ। सभी मंत्रालयों ने मानव, पशु और वन्यजीव क्षेत्रों में एकीकृत निगरानी को मजबूत करने, प्रयोगशाला एवं जीनोमिक क्षमताओं को बढ़ाने, समय पर डेटा साझा करने और राष्ट्रीय महामारी तैयारी ढांचे के अनुरूप क्षेत्रीय कार्य योजनाओं को संरेखित करने का संकल्प लिया। चर्चाओं ने इन्फ्लुएंजा तथा अन्य श्वसन वायरल खतरों की रोकथाम, शीघ्र पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए भारत की समन्वित राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दोहराया।

राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन सभा 2025: “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” की दिशा में भारत का समग्र दृष्टिकोण

No comments Document Thumbnail

भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री,जगत प्रकाश नड्डा, जिन्होंने वन हेल्थ पर कार्यकारी संचालन समिति की अध्यक्षता भी की है, ने आज भारत मंडपम कन्वेंशन हॉल से वीडियो संदेश के माध्यम से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन सभा 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग; डॉ. अजय के. सूद, अध्यक्ष, वैज्ञानिक संचालन समिति, वन हेल्थ एवं प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार; और डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग एवं महानिदेशक, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) भी उपस्थित थे।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम का थीम है: “Translating Knowledge to Practice – One Earth, One Health, One Future” (ज्ञान को व्यवहार में रूपांतरित करना – एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य)।

सभा के दौरान मुख्य बातें:

  • एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण:

    नड्डा ने कहा कि “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य, एक भविष्य” केवल थीम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भविष्य की महामारियों के प्रति तैयार रहने का आधार है।

  • भारत की स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार प्रगति:

    उन्होंने भारत की दवा और चिकित्सा विज्ञान में वैश्विक भूमिका का उल्लेख किया, साथ ही कोविड-19 वैक्सीन विकास की उपलब्धियाँ जैसे Covaxin, Covishield, Corbevax और दुनिया की पहली नाक के माध्यम से दी जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन को सराहा। उन्होंने भारत की mRNA, DNA, वायरल वेक्टर और बायोसिमिलर जैसी अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों पर भी प्रकाश डाला।

  • नैदानिक और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली में प्रगति:

    भारत ने TrueNat, PathoDetect और CRISPR-आधारित परीक्षणों जैसे नवाचारों के माध्यम से नैदानिक सेवाओं को तेज़, सटीक और सुलभ बनाया है। INSACOG और CoWIN जैसी प्लेटफार्मों ने देश की जनसंख्या-स्तरीय डिजिटल स्वास्थ्य क्षमता को प्रदर्शित किया।
  • राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन:

    नड्डा ने इसे महामारी तैयारी की दिशा में भारत के महत्वपूर्ण कदमों में से एक बताया। यह मिशन मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, पृथ्वी विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और आपदा प्रबंधन समेत 16 केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों/विभागों को एकीकृत करता है।

  • मुख्य क्रियाएं और सुविधाएँ:

    • कसाईखानों, पक्षी अभयारण्यों, चिड़ियाघरों और शहरी अपशिष्ट जल प्रणालियों में एकीकृत निगरानी।

    • संयुक्त रोग प्रकोप जाँच और चिकित्सा उपायों का विकास।

    • राष्ट्रीय स्तर पर 23 BSL-3 और BSL-4 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क।

  • वन हेल्थ दृष्टिकोण के लाभ:

    • महामारी और रोगों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।

    • एकीकृत हस्तक्षेपों और स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार।

    • मानव, पशु, पौधों और पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण।

अन्य वक्ताओं की मुख्य बातें:

  • डॉ. वी. के. पॉल (नीति आयोग):

    उन्होंने कहा कि यह एक सच्चा जन आंदोलन है जो मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देगा। उन्होंने राज्यों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
  • डॉ. अजय के. सूद:

    उन्होंने हाल के वर्षों में मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, पौधों और पर्यावरण प्रणालियों को एकीकृत करने के प्रयासों का उल्लेख किया। राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने अब 16 प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाकर इस समन्वित दृष्टिकोण को साकार किया है।

  • अन्य उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी:

    अनु नागर (संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग), डॉ. निवेदिता गुप्ता (विज्ञानी G और संचारी रोग प्रमुख, ICMR), केंद्रीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं साझेदार एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

विशेष गतिविधि:

सभा के अवसर पर BSL-3 प्रयोगशाला नेटवर्क SOP Compendium का विमोचन भी किया गया, जिसका उद्देश्य प्रयोगशालाओं में मानकीकृत प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना है।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस पर राष्ट्रीय कार्य योजना 2.0 (2025–29) लॉन्च की

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज राष्ट्रीय रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस–AMR) पर राष्ट्रीय कार्य योजना का दूसरा संस्करण (2025–29) लॉन्च किया।
इस अवसर पर उनके साथ डॉ. ए. के. सूद, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार; पुन्या सलिला श्रीवास्तव, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव; डॉ. राजीव बहल, सचिव—स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, तथा डॉ. सुनीता शर्मा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS) भी उपस्थित रहे।

“AMR एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है, समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से संभव” —  नड्डा

कार्यक्रम में बोलते हुए नड्डा ने जोर देकर कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है जिसे केवल सामूहिक प्रयासों से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में यात्रा वर्ष 2010 में प्रारंभ हुई थी और 2017 में पहला NAP-AMR लॉन्च किया गया था।


उन्होंने कहा कि AMR विशेष रूप से सर्जरी, कैंसर उपचार और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रक्रियाओं में गंभीर जोखिम पैदा करता है। एंटीबायोटिक दवाओं के अतिरिक्त और गलत उपयोग से यह समस्या और बढ़ गई है, जिसके लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कई महत्त्वपूर्ण कदमों का भी उल्लेख किया।

NAP–AMR 2.0 में प्रमुख सुधार

नड्डा ने बताया कि AMR पर नई राष्ट्रीय कार्य योजना—NAP-AMR 2.0—ने पहली कार्य योजना में पहचानी गई कमियों को दूर किया है। इसमें:

  • AMR प्रयासों की जिम्मेदारी बढ़ाना

  • सभी क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय

  • निजी क्षेत्र के साथ मजबूत भागीदारी शामिल है।

उन्होंने जागरूकता, शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रयोगशाला क्षमता और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नियमित बैठकों और समीक्षा की आवश्यकता भी बताई।

“AMR एक प्रकार की वैश्विक महामारी है” — डॉ. ए. के. सूद

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. सूद ने कहा कि NAP-AMR 2.0 का लॉन्च WHO की विश्व AMR जागरूकता सप्ताह (18–24 नवंबर) के पहले दिन होना अत्यंत उपयुक्त है।

उन्होंने बताया:

  • केरल और गुजरात OTC (ओवर-द-काउंटर) एंटीबायोटिक बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले राज्य हैं।

  • कई एंटीमाइक्रोबियल और कीटनाशक कृषि उपयोग के लिए प्रतिबंधित किए गए हैं।

  • India AMR Innovation Hub के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों को जोड़कर नई तकनीकों पर कार्य किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) को वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में मान्यता दी गई है, जिसके स्वास्थ्य, राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव व्यापक हैं।

AMR के परिणाम:

  • उपचार में देरी

  • संक्रमण के प्रसार का बढ़ना

  • स्वास्थ्य-सेवा लागत में वृद्धि

  • सर्जिकल प्रक्रियाओं, अंग प्रत्यारोपण और कैंसर उपचार की प्रभावशीलता में कमी

भारत ने AMR रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता माना है।
2010 में राष्ट्रीय कार्यबल का गठन, 2011 में राष्ट्रीय नीति और 2017 में पहली राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) लॉन्च की गई थी।

NAP-AMR 2.0 का निर्माण 2022 से कई चरणों में हुआ, जिसमें मानव स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, कृषि, अनुसंधान सहित 20 से अधिक मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी थी।

नई कार्य योजना में:

  • सभी मंत्रालयों के स्पष्ट कार्य, समयसीमा और बजट शामिल

  • विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय की व्यवस्था

  • निजी क्षेत्र, उद्योग, तकनीकी संस्थानों, NGOs और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों की सक्रिय भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम में मत्स्य पालन मंत्रालय, पशुपालन मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, AYUSH मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.