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भारत ने स्पेन में 10वें OECD ग्लोबल राउंडटेबल में न्याय व्यवस्था में डिजिटल नवाचार और समावेशी सुधारों का प्रदर्शन किया

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उपराष्ट्रपति (स्वतंत्र प्रभार) कानून और न्याय मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने स्पेन के मैड्रिड में आयोजित 10वें OECD ग्लोबल राउंडटेबल ऑन इक्वल एक्सेस टू जस्टिस में भाग लिया। इस राउंडटेबल का मुख्य विषय था “डेटा-ड्रिवन और रिसिलिएंट जस्टिस सिस्टम्स फॉर शेयरड प्रॉस्पेरिटी”।

इस राउंडटेबल में न्याय मंत्री, वरिष्ठ न्यायिक प्रशासक, वैश्विक नेता, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनका उद्देश्य न्याय संस्थानों को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया, आर्थिक अनिश्चितता और नागरिक अपेक्षाओं के बीच भरोसेमंद और उत्तरदायी बनाना था।

मेघवाल ने अपने संबोधन में भारत की न्याय व्यवस्था में लोग-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और समावेशी सुधारों की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39A का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान न्याय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि को बनाए रखता है, जो सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित करता है।

उन्होंने डॉ. बी. आर. अंबेडकर के उद्धरण के माध्यम से न्याय की सार्वभौमिकता और समानता पर जोर दिया। मंत्री ने बताया कि भारत की न्याय सुधार पहल का उद्देश्य न्याय को केवल सुलभ ही नहीं बल्कि संवेदनशील और हर नागरिक की जरूरतों के अनुसार उत्तरदायी बनाना है।

ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट:

मेघवाल ने भारत के ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट का विवरण दिया, जो विश्व के सबसे बड़े डिजिटल न्याय सुधारों में से एक है। इसका तीसरा चरण (2023–2027) चल रहा है, जिसमें एआई, मशीन लर्निंग और नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर स्मार्ट, पेपरलेस और इंटीग्रेटेड कोर्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 560 करोड़ से अधिक न्यायिक रिकॉर्ड डिजिटाइज किए जा चुके हैं और 3.86 करोड़ से अधिक सुनवाई वर्चुअली हो चुकी हैं।

COVID-19 महामारी के दौरान लगभग 43 मिलियन वर्चुअल सुनवाइयां आयोजित की गईं। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग, AI और NLP आधारित टूल्स से न्यायिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिला। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) पुलिस, अभियोजन, जेल और फोरेंसिक से डिजिटल रूप से जुड़कर त्वरित और प्रमाण-आधारित निर्णय लेने में मदद कर रहा है।

DISHA और Tele-Law:

मंत्री ने भारत की प्रमुख पहल DISHA (Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) और Tele-Law का विवरण भी दिया। इन पहलों के तहत 1.1 करोड़ से अधिक नागरिकों को 22 भारतीय भाषाओं में मुफ्त कानूनी सलाह दी गई। Nyaya Setu और Vidhi Baithaks जैसी पहलें भी न्याय तक पहुँच सुनिश्चित कर रही हैं।

AI और न्याय प्रणाली:

उन्होंने बताया कि भारत में न्याय प्रणाली में AI का उपयोग मानव-नियंत्रित, नैतिक और गोपनीयता-संवेदनशील है। SUVAS (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ़्टवेयर), SUPACE (सुप्रीम कोर्ट पोर्टल असिस्टेंस) और AI आधारित केस मैनेजमेंट सिस्टम्स के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया में गति, सटीकता और पहुंच बढ़ रही है।

वैश्विक सहयोग:

मेघवाल ने याद दिलाया कि भारत ने 2023 में "1st Regional Conference on Access to Legal Aid" की मेजबानी की थी, जिसमें 51 देशों के 191 प्रतिभागियों ने भाग लिया। भारत ने OECD और अन्य देशों के साथ नैतिक AI शासन, डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और डिजिटल समावेशन पर सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की प्रतिनिधि टीम में लॉ सेक्रेटरी डॉ. अंजू राठी राणा भी शामिल थीं।

मेघवाल ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” के आदर्श के तहत सभी देशों से सहयोग, विश्वास और समान न्याय के लिए वैश्विक समझौते बनाने का आह्वान किया।

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