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श्रीनगर में 17 फरवरी को टेली-लॉ और DISHA योजना पर क्षेत्रीय कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन

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श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर):- न्याय तक समग्र पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टेली-लॉ (Tele-Law) पहल के तहत DISHA योजना के अंतर्गत एक क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला का आयोजन 17 फरवरी 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू होगा।

यह कार्यशाला भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा “न्याय तक पहुंच” प्रभाग के तहत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करना है।

150 वर्ष पूरे होने पर ‘वंदे मातरम्’ से होगी शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से होगी, जो राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

DISHA योजना के विभिन्न आयामों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान “DISHA योजना के आयाम: सुगम एवं सुलभ न्याय तक पहुंच” सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें कानूनी साक्षरता बढ़ाने के लिए सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों, डिजिटल अभियानों और शैक्षणिक संस्थानों व नागरिक समाज संगठनों के साथ साझेदारी जैसे प्रयासों को प्रस्तुत किया जाएगा। खास तौर पर वंचित और कमजोर वर्गों तक सरल और तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंच बनाने पर जोर दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में DISHA योजना की झलक

कार्यक्रम में “DISHA in J&K: एक झलक” सत्र भी होगा, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और न्याय तक पहुंच सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।

उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान और ई-कैलेंडर का विमोचन

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में DISHA योजना से जुड़े उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा न्याय विभाग का वार्षिक ई-कैलेंडर भी जारी किया जाएगा, जिसमें वर्ष भर की गतिविधियों और जागरूकता अभियानों का रोडमैप होगा।

केंद्रीय मंत्री और शीर्ष न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री अरुण पाली की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

करीब 800 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश, हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, बार एसोसिएशन के अधिवक्ता, सरकारी वकील, न्यायिक अधिकारी, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के वीएलई, विश्वविद्यालयों और विधि महाविद्यालयों के फैकल्टी व छात्र, तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई नागरिक और हितधारक वर्चुअल माध्यम से भी जुड़ेंगे।

न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

यह क्षेत्रीय कार्यशाला देशभर में आयोजित की जा रही श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य टेली-लॉ और न्याय तक पहुंच कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाना, राज्य प्रशासन के साथ सहयोग मजबूत करना और अंतिम व्यक्ति तक न्याय सेवा पहुंचाना है। श्रीनगर में यह कार्यक्रम क्षेत्र में न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।


भारत ने स्पेन में 10वें OECD ग्लोबल राउंडटेबल में न्याय व्यवस्था में डिजिटल नवाचार और समावेशी सुधारों का प्रदर्शन किया

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उपराष्ट्रपति (स्वतंत्र प्रभार) कानून और न्याय मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने स्पेन के मैड्रिड में आयोजित 10वें OECD ग्लोबल राउंडटेबल ऑन इक्वल एक्सेस टू जस्टिस में भाग लिया। इस राउंडटेबल का मुख्य विषय था “डेटा-ड्रिवन और रिसिलिएंट जस्टिस सिस्टम्स फॉर शेयरड प्रॉस्पेरिटी”।

इस राउंडटेबल में न्याय मंत्री, वरिष्ठ न्यायिक प्रशासक, वैश्विक नेता, नीति निर्माता और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनका उद्देश्य न्याय संस्थानों को तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया, आर्थिक अनिश्चितता और नागरिक अपेक्षाओं के बीच भरोसेमंद और उत्तरदायी बनाना था।

मेघवाल ने अपने संबोधन में भारत की न्याय व्यवस्था में लोग-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और समावेशी सुधारों की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39A का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान न्याय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि को बनाए रखता है, जो सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता सुनिश्चित करता है।

उन्होंने डॉ. बी. आर. अंबेडकर के उद्धरण के माध्यम से न्याय की सार्वभौमिकता और समानता पर जोर दिया। मंत्री ने बताया कि भारत की न्याय सुधार पहल का उद्देश्य न्याय को केवल सुलभ ही नहीं बल्कि संवेदनशील और हर नागरिक की जरूरतों के अनुसार उत्तरदायी बनाना है।

ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट:

मेघवाल ने भारत के ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट का विवरण दिया, जो विश्व के सबसे बड़े डिजिटल न्याय सुधारों में से एक है। इसका तीसरा चरण (2023–2027) चल रहा है, जिसमें एआई, मशीन लर्निंग और नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर स्मार्ट, पेपरलेस और इंटीग्रेटेड कोर्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 560 करोड़ से अधिक न्यायिक रिकॉर्ड डिजिटाइज किए जा चुके हैं और 3.86 करोड़ से अधिक सुनवाई वर्चुअली हो चुकी हैं।

COVID-19 महामारी के दौरान लगभग 43 मिलियन वर्चुअल सुनवाइयां आयोजित की गईं। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग, AI और NLP आधारित टूल्स से न्यायिक पारदर्शिता को बढ़ावा मिला। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) पुलिस, अभियोजन, जेल और फोरेंसिक से डिजिटल रूप से जुड़कर त्वरित और प्रमाण-आधारित निर्णय लेने में मदद कर रहा है।

DISHA और Tele-Law:

मंत्री ने भारत की प्रमुख पहल DISHA (Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) और Tele-Law का विवरण भी दिया। इन पहलों के तहत 1.1 करोड़ से अधिक नागरिकों को 22 भारतीय भाषाओं में मुफ्त कानूनी सलाह दी गई। Nyaya Setu और Vidhi Baithaks जैसी पहलें भी न्याय तक पहुँच सुनिश्चित कर रही हैं।

AI और न्याय प्रणाली:

उन्होंने बताया कि भारत में न्याय प्रणाली में AI का उपयोग मानव-नियंत्रित, नैतिक और गोपनीयता-संवेदनशील है। SUVAS (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ़्टवेयर), SUPACE (सुप्रीम कोर्ट पोर्टल असिस्टेंस) और AI आधारित केस मैनेजमेंट सिस्टम्स के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया में गति, सटीकता और पहुंच बढ़ रही है।

वैश्विक सहयोग:

मेघवाल ने याद दिलाया कि भारत ने 2023 में "1st Regional Conference on Access to Legal Aid" की मेजबानी की थी, जिसमें 51 देशों के 191 प्रतिभागियों ने भाग लिया। भारत ने OECD और अन्य देशों के साथ नैतिक AI शासन, डेटा इंटरऑपरेबिलिटी और डिजिटल समावेशन पर सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत की प्रतिनिधि टीम में लॉ सेक्रेटरी डॉ. अंजू राठी राणा भी शामिल थीं।

मेघवाल ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” के आदर्श के तहत सभी देशों से सहयोग, विश्वास और समान न्याय के लिए वैश्विक समझौते बनाने का आह्वान किया।

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