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एएमआरआईटी फार्मेसी के 10 वर्ष पूरे: स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने किया समारोह का उद्घाटन

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एएमआरआईटी (Affordable Medicines and Reliable Implants for Treatment) फार्मेसी की 10वीं वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सस्ती दवाओं की उपलब्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा देने में सार्वजनिक क्षेत्र की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

2015 में स्थापना के बाद से, एएमआरआईटी फार्मेसियों ने जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं को 50% से 90% तक की छूट पर उपलब्ध कराकर मरीजों, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लोगों के इलाज की लागत को काफी कम किया है।

सभा को संबोधित करते हुए, नड्डा ने एएमआरआईटी के सफल संचालन के लिए एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को बधाई दी। उन्होंने याद किया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सभी नागरिकों को सुलभ, किफायती और न्यायपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया था। इसी दृष्टि के साथ जन औषधि और एएमआरआईटी जैसी पहल शुरू की गईं, ताकि दवाएं और चिकित्सा उपकरण कम कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि एएमआरआईटी आज एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें 255 से अधिक फार्मेसियाँ संचालित हैं, और इसे पूरे देश में 500 आउटलेट तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि जहाँ आज हर एम्स में एएमआरआईटी फार्मेसी उपलब्ध है, अब लक्ष्य इसे हर मेडिकल कॉलेज और हर जिला अस्पताल तक पहुँचाना है ताकि किफायती दवाएं देश के हर नागरिक तक पहुंच सकें।

एएमआरआईटी फार्मेसी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रांडेड दवाओं पर 50% की औसत छूट से अब तक 6.85 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। लगभग ₹17,000 करोड़ की एमआरपी वाली दवाएं अब तक वितरित की गई हैं, जिससे मरीजों को लगभग ₹8,500 करोड़ की बचत हुई है।

उन्होंने एएमआरआईटी फार्मेसियों के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि और स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा के मार्गदर्शन में एएमआरआईटी की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और न्यायसंगत दवा पहुँचाना है।

उन्होंने एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और एएमआरआईटी नेटवर्क की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि पूरा एचएलएल और एएमआरआईटी परिवार नेटवर्क के विस्तार, सिस्टम सुधारने और संचालन को और मजबूत करने के लिए “जोश, जूनून और जज़्बात” के साथ कार्य करता रहेगा।

धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए अनीता थम्पी ने स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग और एचएलएल व एएमआरआईटी टीमों की प्रतिबद्धता की भी सराहना की, जिनकी मेहनत से सस्ती दवाएं लोगों तक पहुँची हैं।

इस अवसर पर नड्डा ने देशभर में 10 नई एएमआरआईटी फार्मेसियों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने AMRIT ITes – Eco Green Version 2.0 नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया, जो संचालन को अधिक पारदर्शी, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा।

कार्यक्रम के दौरान एएमआरआईटी के दस वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक जारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती दवाएं पहुँचाने के लिए मोबाइल फार्मेसी वैन का भी शुभारंभ किया गया। इसके अलावा, दवाओं की उपलब्धता, कीमत और नजदीकी एएमआरआईटी फार्मेसी की जानकारी देने के लिए एक 24×7 नेशनल कॉन्टैक्ट सेंटर का उद्घाटन किया गया।

पृष्ठभूमि

एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड, एएमआरआईटी का कार्यान्वयन एजेंसी, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न सार्वजनिक उपक्रम है। यह गर्भनिरोधक उत्पादों, अस्पताल उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों, डायग्नोस्टिक सेवाओं (हिंदलैब्स), खुदरा फार्मेसी (AMRIT), एचएलएल फार्मेसी, आईवियर, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, प्रोक्योरमेंट और कंसल्टेंसी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करती है। एचएलएल 7 अत्याधुनिक फैक्ट्रियों, 5 सहायक कंपनियों और एक कॉर्पोरेट आरएंडडी केंद्र का संचालन करता है, जो भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।

चिकित्सा महंगाई और बढ़ते प्रीमियम पर नियंत्रण के लिए DFS सचिव ने की उच्चस्तरीय बैठक

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वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नगराजु की अध्यक्षता में 13 नवंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सा महंगाई (Medical Inflation) और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में हो रही बढ़ोतरी से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में जनरल इंश्योरेंस काउंसिल, एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (AHPI) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मैक्स हेल्थकेयर, फोर्टिस हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स जैसे प्रमुख स्वास्थ्य सेवा संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा न्यू इंडिया एश्योरेंस, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस सहित कई प्रमुख बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

सचिव ने बीमा कंपनियों और अस्पतालों को सलाह दी कि—

  • नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज पर तेज़ी से ऑनबोर्डिंग करें

  • उपचार के लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल तैयार करें

  • सामान्य (Uniform) एम्पैनलमेंट मानदंड विकसित करें

  • कैशलैस क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को सुगम और तेज़ बनाएं
    ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुलभ और किफायती बन सकें।

उन्होंने जोर दिया कि सभी बीमा कंपनियों के लिए मानकीकृत अस्पताल एम्पैनलमेंट मानदंड लागू होने से पॉलिसीधारकों को एक समान कैशलैस सुविधा मिलेगी, सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा और अस्पतालों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा।

सचिव ने यह भी कहा कि बीमा कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—

  • पॉलिसीधारकों को सर्वोत्तम स्तर की सेवा मिले

  • अस्पताल में भर्ती होने से लेकर क्लेम अप्रूवल तक प्रक्रिया तेज़ और सरल हो

  • क्लेम सेटलमेंट में बेहतर टर्नअराउंड टाइम सुनिश्चित किया जाए

बैठक के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि चिकित्सा महंगाई कई कारकों से जुड़ी हुई है, लेकिन अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच समन्वित प्रयास, लागत नियंत्रण, पारदर्शिता और मानकीकरण से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिभागियों में थे—

  • इंदरजीत सिंह, सचिव जनरल, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल

  • डॉ. सुनीता रेड्डी, एमडी, अपोलो हॉस्पिटल्स

  • शिवकुमार पट्टाभिरामन, एमडी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स

  • अभय सोई, सीएमडी, मैक्स हेल्थकेयर

  • डॉ. गिरधर जे. ग्यानी, महानिदेशक, AHPI

  • कृष्णन रामचंद्रन, सीईओ, नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस

  • अमिताभ जैन, ईडी एवं सीओओ, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस

  • मीरा पार्थसारथी, जनरल मैनेजर, ओरीएंटल इंश्योरेंस

इसके अतिरिक्त कई अन्य हितधारक भी चर्चा में शामिल हुए।

भारत को वैश्विक वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में अग्रसर: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित 22वें सीआईआई वार्षिक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार के निरंतर सुलभता (affordability) पर केंद्रित दृष्टिकोण से बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत (0%) कर दिया है, साथ ही चिकित्सा उपकरणों, कैंसर की दवाओं और अन्य आवश्यक दवाओं पर शुल्क में कमी की है ताकि उपचार अधिक से अधिक नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बन सके।

गोयल ने कहा कि सरकार आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर शुल्क या उपकर (cess) में और कमी की संभावनाओं पर विचार करने के लिए खुली है, ताकि अधिक दवाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उन दवाओं और उत्पादों की सूची साझा करें जिन पर शुल्क में कमी से लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक “सुनने वाली सरकार (listening government)” है, जो सुझावों और विचारों के लिए हमेशा खुली है तथा सरकार, चिकित्सा पेशेवरों और स्वास्थ्य उद्योग के संयुक्त प्रयासों से न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी बल्कि भारत को वैश्विक चिकित्सा एवं वेलनेस गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने जन औषधि केंद्रों की सफलता का भी उल्लेख किया, जो अब 10,000 से अधिक हो गए हैं, और जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाएँ व स्वच्छता उत्पाद नाममात्र कीमतों पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को काफी राहत मिली है।

गोयल ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य मॉडल समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम ऐसा ढांचा नहीं अपना सकते जहाँ स्थानीय नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहें और ध्यान केवल अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पर्यटन पर केंद्रित हो।” उन्होंने ज़ोर दिया कि मजबूत घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली भारत को चिकित्सा मूल्य यात्रा (medical value travel) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में मदद करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार “अच्छा स्वास्थ्य एक समृद्ध समाज की नींव है” को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) 2047 के लक्ष्य की दिशा में डॉक्टरों और पूरे चिकित्सा तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

गोयल ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में केवल 7 एम्स (AIIMS) और 387 मेडिकल कॉलेज थे। अब यह संख्या बढ़कर 23 एम्स और 706 मेडिकल कॉलेज हो गई है। इससे डॉक्टरों की बढ़ती मांग पूरी होगी और भारत से विश्व को उत्कृष्ट चिकित्सा पेशेवरों का योगदान मिलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष लाल किले से घोषणा की थी कि 2029 तक मेडिकल सीटों की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि की जाएगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 70 करोड़ लोग मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के पात्र हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री की संवेदनशील नेतृत्व शैली का उदाहरण है 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, आय की परवाह किए बिना, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय।

गोयल ने मेडिकल टूरिस्ट्स के लिए वीजा ऑन अराइवल और ई-वीजा सुविधाओं का स्वागत किया, और कहा कि भारत पहले से ही कई देशों को यह सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, विदेशों में लंबी प्रतीक्षा अवधि, और सस्ते इलाज की वजह से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल चाहें तो 10 प्रतिशत तक विदेशी मरीजों को सेवा दें और उनकी आय का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत या CSR कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब वर्गों के लिए योगदान करें, जिससे विकास और समावेशन दोनों सुनिश्चित हों।

उन्होंने कहा कि भारत में विश्व-स्तरीय चिकित्सा सेवाएँ विकसित देशों की तुलना में एक-तिहाई या एक-चौथाई लागत पर उपलब्ध हैं। भारत के डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और देखभाल करने वाले कर्मी पूरी दुनिया में मांग में हैं।

गोयल ने प्रमुख अस्पतालों से अनुरोध किया कि वे नर्सों और केयरगिवर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करें और सरकार एनआरआई डॉक्टरों को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में योगदान करने के लिए नीति विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसका आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक वेलनेस और करुणामय सेवा का संतुलित मेल है। उन्होंने कहा कि ‘हील इन इंडिया (Heal in India)’ में योग, आयुर्वेद, ध्यान और आध्यात्मिक पर्यटन को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि भारत को समग्र वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने कहा, “भारत के पास आधुनिक चिकित्सा कौशल, पारंपरिक वेलनेस विरासत, प्रतिभाशाली जनशक्ति और आतिथ्य की संस्कृति — सब कुछ है जो उसे दुनिया का नंबर एक वेलनेस डेस्टिनेशन बना सकता है।”

'महा MedTech मिशन' के माध्यम से भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा

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अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने भारतीय आयुष एवं चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से Mission for Advancement in High-Impact Areas (MAHA) – Medical Technology (महाः MedTech) की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को तेज करना, महंगे आयात पर निर्भरता कम करना और किफायती तथा उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल तकनीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है।

मुख्य उद्देश्य:

  • प्राथमिक रोग क्षेत्रों के लिए प्रभावशाली तकनीकों का समर्थन कर सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालना।

  • लागत को कम करने वाली तकनीकों के माध्यम से सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना।

  • देश में मेडटेक विकास, विनिर्माण और उद्योग–शिक्षा सहयोग को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना।

मिशन की सीमा:

यह योजना नवीनतम चिकित्सा उपकरणों और इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स को कवर करती है, जिनमें उपकरण और उनके प्रमुख घटक, इम्प्लांट, सहायक और सर्जिकल डिवाइस, उपभोज्य सामग्री और सॉफ्टवेयर आधारित चिकित्सा समाधान शामिल हैं। इसमें उन्नत डायग्नोस्टिक इमेजिंग, न्यूनतम इनवेसिव तकनीकें, पॉइंट ऑफ केयर मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, AI/ML प्लेटफॉर्म, रोबोटिक्स और अन्य उभरते क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है। मिशन उन परियोजनाओं का स्वागत करता है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं जैसे टीबी, कैंसर, नवजात देखभाल और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा से संबंधित हों।

समर्थन और सुविधाएं:

  • पेटेंट मित्र (Patent Mitra) – IP सुरक्षा और तकनीक हस्तांतरण।

  • मेडटेक मित्र (MedTech Mitra) – नियामक मार्गदर्शन और अनुमोदन।

  • क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क – नैदानिक प्रमाणीकरण और डेटा संग्रह।

  • उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और मेंटरशिप।

आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा:

  • कॉनसेप्ट नोट्स: 15 सितंबर से 7 नवंबर 2025 तक, ANRF पोर्टल पर जमा करें: www.anrfonline.in

  • पूर्ण प्रस्ताव: केवल शॉर्टलिस्ट किए गए कॉन्सेप्ट नोट्स को दिसंबर 2025 में पूर्ण प्रस्ताव जमा करने का अवसर मिलेगा।

यह मिशन भारत में मेडिकल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रभावशाली समाधानों को बाजार में लाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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