Media24Media.com: वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर विशेष सत्र: समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी पर जोर

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वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर विशेष सत्र: समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी पर जोर

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सहयोग से “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (MWPSC Act)” पर विशेष सत्र का आयोजन डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली में किया। इस सत्र का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों, उनके लिए उपलब्ध सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों तथा समाज एवं समुदाय की भूमिका पर जागरूकता बढ़ाना था।

MWPSC अधिनियम, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और भरण-पोषण की कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करता है। यह अधिनियम बच्चों और निर्धारित परिजनों को यह कानूनी दायित्व देता है कि वे वरिष्ठ नागरिकों, जिसमें माता-पिता भी शामिल हैं, का भरण-पोषण करें तथा उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करें। इसके तहत मासिक भरण-पोषण भत्ता की सुविधा भी दी गई है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस विशेष सत्र में मुख्य अतिथि थे—

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

  • न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट एवं कार्यकारी अध्यक्ष, NALSA
    साथ ही मंत्रालय एवं NALSA के वरिष्ठ अधिकारी, विधि संकाय के प्रोफेसर, वकील, छात्र, वरिष्ठ नागरिक तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को राष्ट्र की नींव बताया

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आज के वरिष्ठ नागरिकों ने अपना पूरा जीवन परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में लगाया है। भारतीय परिवार व्यवस्था की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार प्रणाली ने भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रगति में बड़ा योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि:

  • भावनात्मक सहायता के लिए सरकार ने Elderline 14567 हेल्पलाइन शुरू की है।

  • राशtriya Vayoshri Yojana के तहत 7 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

  • 70 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बुजुर्गों की गरिमा बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

वरिष्ठों के प्रति सम्मान हमारी सांस्कृतिक परंपरा— न्यायमूर्ति सूर्य कांत

न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि भारतीय परंपरा में बुज़ुर्गों का सम्मान सदियों से हमारी नैतिक धरोहर रहा है। उन्होंने श्लोक उद्धृत किया—

“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः, चत्वारि तस्य वर्धन्ते— आयु, विद्या, यश, बलम्।”

उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान कम हो रहा है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • MWPSC Act, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा का ऐतिहासिक कानून है।

  • यह केवल दान का कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।

  • मंत्रालय, विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस और कानून के विद्यार्थियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे करुणा और संवेदनशीलता के साथ बुजुर्गों के प्रति अपना दायित्व निभाएँ।

वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या पर सरकार की ज़िम्मेदारी

सचिव अमित यादव ने कहा कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2011 के 10.38 करोड़ से बढ़कर 2050 में 34 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व है कि बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन जी सकें।

उन्होंने डिजिटल और वित्तीय बदलावों के कारण वरिष्ठों को होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि समुदाय व युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।

निष्कर्ष

इस विशेष सत्र ने कार्यपालिका, न्यायपालिका, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, NGOs और छात्रों को एक मंच पर लाकर MWPSC Act, 2007 की महत्ता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण में इसकी भूमिका पर व्यापक चर्चा का अवसर दिया।


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