Media24Media.com: #Empowerment

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Empowerment. Show all posts
Showing posts with label #Empowerment. Show all posts

24 घंटे में मिली ट्राइसाइकिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव के जीवन को मिली नई रफ्तार

No comments Document Thumbnail

मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री ने लिया तत्काल संज्ञान, शासकीय अवकाश के बावजूद सक्रिय रहा प्रशासन

समाज कल्याण विभाग ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से पहुंचाई सहायता, आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़े गणेश राम यादव

प्रतिमाह मिलती है दिव्यांग पेंशन: राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न हो रहा उपलब्ध

महतारी वंदन योजना का मिल रहा परिवार को लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन, संवेदनशीलता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की कार्यसंस्कृति एक बार फिर धरातल पर देखने को मिली। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्षपूर्ण जीवन को लेकर प्रकाशित एक मार्मिक समाचार पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को बिना किसी विलंब के शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर गणेश राम यादव के लिए ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी। यह पूरी प्रक्रिया रविवार के शासकीय अवकाश के दिन भी पूरी की गई, जो राज्य सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। विभागीय अधिकारियों की टीम जनपद पंचायत धरमजयगढ़ पहुंची और वहां से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासनिक दल गणेश राम यादव के घर भी पहुंचा, जहां उनके परिवार के सदस्यों, उनकी भाभी तथा वार्ड पंच से चर्चा की गई। उस समय गणेश राम यादव घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए यह जानकारी दी गई कि गणेश राम के घर लौटते ही उन्हें यह ट्राइसाइकिल उपलब्ध करा दी जाए।

उल्लेखनीय है कि धरमजयगढ़ क्षेत्र से हाल ही में गणेश राम यादव की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें वे हाथों के सहारे चलकर अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते दिखाई दे रहे थे। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में निवास करने के कारण उन्हें आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने तथा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए और प्रशासन ने भी संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या का समाधान सुनिश्चित किया।

ट्राइसाइकिल प्राप्त होने के बाद गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव के चेहरे पर राहत और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। भावुक माहौल में उन्होंने प्रशासन और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि अब तक गणेश राम यादव को छोटी-सी दूरी तय करने के लिए भी हाथों के सहारे सड़क और पगडंडियों पर चलना पड़ता था, जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने में भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब ट्राइसाइकिल मिलने से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आएगा। वे अधिक सहजता से आवागमन कर सकेंगे, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर पाएंगे तथा स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहले की तुलना में कहीं अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गणेश राम यादव की भाभी चंद्रवती ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा वे स्वयं भी दिव्यांग हैं। दोनों भाइयों को प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन प्राप्त होती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। इसके साथ ही राशन कार्ड के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न भी उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से गणेश राम के जीवन में बड़ी राहत आएगी और उनका दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में राज्य सरकार की संवेदनशील, जनकेंद्रित और जवाबदेह सुशासन व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में जिस तत्परता से शासन और प्रशासन ने कार्य किया जा रहा है, वह जरूरतमंदों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच का प्रेरणादायी उदाहरण गया है।

कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

No comments Document Thumbnail

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहीं बबीता यादव, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

रायपुर- संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।



रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

बंदूक छोड़ी, सम्मान पाया : आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर- हिंसा की राह छोड़ जब कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो न सिर्फ एक जीवन सुधरता है बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा मिलती है। नारायणपुर जिला के ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी नक्सल संगठन की कड़ियों में उलझे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया। आज वे न केवल खुद एक सम्मानित जीवन जी रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

भटके हुओं को दिखाई राह, शासन ने दिया सहारा

आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को सर्वाेपरि माना। उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी सकारात्मक बदलाव और सामाजिक योगदान को देखते हुए राज्य शासन की पुनर्वास योजनाओं का सीधा लाभ उन तक पहुँचाया गया, जिससे उनके वर्षों पुराने पक्के घर का सपना साकार हो सका।

योजनाओं के समन्वय से तैयार हुआ सपनों का घर

कमलू राम को मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए गए। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत 'आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना' के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें 1.20 लाख रुपए की लागत से पक्का आवास प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से स्वीकृत हुआ।आवास निर्माण के दौरान ही उन्हें मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के माध्यम से 23 हज़ार 490 रुपए की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिसने निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल दिया। नए आशियाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है। 

मिला सम्मानजनक जीवन

कमलू राम नुरेटी ने कहा कि पहले मैं परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था, जहाँ हर दिन नई कठिनाइयाँ सामने आती थीं। आज अपना पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार बेहद खुश है। हमें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है।

पुनर्वास योजनाएं ला रही हैं क्षेत्र में बदलाव

जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर बेहद सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासन की नीतियां और समाज का सहयोग एक साथ मिले, तो किसी भी जीवन को संवारा जा सकता है। यह बदलाव बस्तर और आस-पास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और अटूट विश्वास को मजबूत कर रहा है।

सरकारी योजना से बदली जिंदगीः मड़कम देवा ने झींगा पालन से लिखी सफलता की नई कहानी

No comments Document Thumbnail

एक साल में 5 लाख रूपए की कमाई, दूर-दूर से खरीदने पहुंच रहे ग्राहक

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी जैसे आयवर्धक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

छत्तीसगढ के सुकमा जिले के दुब्बाटोटा गांव के किसान मड़कम देवा इसकी प्रेरक मिसाल बनकर उभरे हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने झींगा और मछली पालन शुरू किया और आज आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

सरकारी सहायता से मिली नई शुरुआत

मड़कम देवा ने मत्स्य पालन विभाग की योजना के तहत तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपए का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 4.20 लाख रुपये का अनुदान शामिल था। इसके अलावा क्रेड़ा विभाग से अनुदान पर सोलर पंप मिलने से उन्हें 24 घंटे सिंचाई और तालाब में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इससे उनका व्यवसाय शुरू करना आसान हो गया।

प्रशिक्षण और मेहनत ने दिलाई बड़ी सफलता

मड़कम देवा ने कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। वैज्ञानिक तरीके से झींगा और मछली पालन करने का परिणाम यह रहा कि इस वर्ष जून माह में उन्होंने लगभग 2.50 क्विंटल झींगा और 15 क्विंटल मछली का उत्पादन कर करीब 5 लाख रूपए की आय अर्जित की।

उनके झींगा और मछली की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि आसपास ही नहीं, दूर-दूर से लोग दुब्बाटोटा पहुंचकर खरीदारी करते हैं।

रायपुर में हुआ सम्मान

झींगा पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मड़कम देवा को सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी मेहनत और शासकीय योजनाओं के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा में मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएं हैं। मड़कम देवा जैसे किसान आज जिले के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे लाभकारी व्यवसायों से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं।

आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ता कदम

झींगा और मछली पालन कम भूमि और कम लागत में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आज अनेक किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मड़कम देवा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा

No comments Document Thumbnail

​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात

रायपुर- राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।

मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने।

​आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण

शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।

इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है।

​आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति

सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।

सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।

"योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"

प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

147 बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेंगे निःशुल्क कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण

No comments Document Thumbnail

​रायपुर- जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में  जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्र में एक विशेष पहल की गई। कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु पंजीयन, चिन्हांकन एवं मापन शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन को सुगम बनाना है।

​एलिम्को के विशेषज्ञों ने किया परीक्षण

शिविर में भारत सरकार के मिनीरत्न उपक्रम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। जनपद पंचायत धमतरी, कुरूद सहित नगर पालिक निगम धमतरी और विभिन्न नगर पंचायतों (कुरूद, आमदी, भखारा) से बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंचे।

​विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से किए गए परीक्षण और मापन के बाद कुल 147 हितग्राहियों को पात्र पाया गया, जिन्हें आने वाले दिनों में निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बांटे जाएंगे। इसके साथ ही मौके पर ही 16 दिव्यांगजनों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड भी बनाए गए।

नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

सहायक उपकरणों के मापन के साथ-साथ शिविर में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया। समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ने उपस्थित सभी लोगों को जीवनभर नशामुक्त रहने की शपथ दिलाई। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

​शिविर में एलिम्को की तकनीकी टीम, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व नागरिक उपस्थित थे।

विशेष-लेख- बस्तर में बैंकिंग क्रांति - विश्वास, विकास और बदलाव की नई इबारत

No comments Document Thumbnail

नक्सलमुक्त बस्तर में विकास की नई धारा-  बैंकिंग विस्तार से मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था

31 नई बैंक शाखाओं के साथ बस्तर में आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

रायपुर- एक समय नक्सल हिंसा और विकास की चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर अब बदल चुका है। आज बस्तर शांति, विश्वास, सुशासन और विकास की नई पहचान बन रहा है। नक्सलमुक्त होते बस्तर में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंटरनेट और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से विस्तार पा रही हैं। कभी बैंकिंग सुविधाओं के अभाव, नकदी आधारित अर्थव्यवस्था और सीमित वित्तीय पहुंच के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में अब परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। इसी परिवर्तन का सबसे मजबूत उदाहरण है पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना। विष्णु देव साय की सरकार के गठन के बाद बस्तर में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। दूरस्थ और पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच ने यह साबित किया है कि अब बस्तर विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया बस्तर है, जहां बंदूक की आवाज नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और समृद्धि की नई गूंज सुनाई दे रही है।

बैंक शाखाएं नहीं, विकास के नए द्वार

दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में बैंक शाखाओं की स्थापना ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव लेकर आ रही है। पहले लोगों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या अन्य कस्बों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कई गांवों के लोगों को पूरा दिन खर्च कर बैंक पहुंचना पड़ता था। अब गांवों और ब्लॉक स्तर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचने से न केवल समय और संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव भी बढ़ रहा है, इससे शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रहा है और पारदर्शिता मजबूत हुई है।

बैंकिंग नेटवर्क बना नए बस्तर की पहचान

बस्तर संभाग के गांवों और कस्बों में बैंक शाखाओं का खुलना केवल वित्तीय संस्थाओं का विस्तार नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश का प्रतीक है। जिन क्षेत्रों में कभी मूलभूत सेवाएं पहुंचाना चुनौती माना जाता था, वहां आज आधुनिक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। पिछले ढाई वर्षों में बस्तर संभाग में 31 नई बैंक शाखाएं शुरू हुई हैं, इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है। तर्रेम, जगरगुंडा, चिंतलनार, किस्टाराम, पामेड़, समलवार और कोहकामेटा जैसे क्षेत्रों में बैंक शाखाओं का खुलना विकास और विश्वास दोनों का प्रतीक बन गया है।

नक्सलमुक्त बस्तर में बढ़ा विश्वास

बस्तर में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने के साथ अब विकास कार्यों को नई गति मिली है। बैंक शाखाओं का विस्तार यह दर्शाता है कि अब शासन और जनता के बीच विश्वास पहले से अधिक मजबूत हुआ है। जहां कभी लोगों को बैंकिंग कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब गांवों और ब्लॉक स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे आम नागरिकों का जीवन आसान हुआ है और वे औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से तेजी से जुड़ रहे हैं। आज बस्तर के ग्रामीण बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, किसान कृषि ऋण, बीमा, पेंशन और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ आसानी से ले पा रहे हैं, इससे आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ी हैं।

आदिवासी अंचलों को मिला आर्थिक संबल

 बस्तर संभाग की बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय की है। बैंकिंग नेटवर्क के विस्तार से आदिवासी परिवारों को अब सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे योजनाओं को लाभ सीधे हितग्राहियों के खाते में (डी बीटी के माध्यम) मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, तेंदूपत्ता बोनस, वन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और पारदर्शी व्यवस्था मजबूत हुई है। महिला स्व-सहायता समूहों को भी बैंकिंग सुविधाओं से बड़ी लाभ मिली है। समूहों को ऋण सुविधा मिलने से आजीविका गतिविधियों और छोटे उद्यमों को नई गति मिली है।स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत

31 नई बैंक शाखाओं के खुलने से बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया आधार मिला है। अब छोटे व्यापारियों, किसानों और युवाओं को वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी आधारित व्यवस्था की जगह डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, माइक्रो एटीएम और आधार आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंच चुकी हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक संगठित और पारदर्शी बन रही है। बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार से बाजार गतिविधियां बढ़ी हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

युवाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा

बस्तर में बैंकिंग नेटवर्क मजबूत होने से युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़े हैं। बैंक ऋण और वित्तीय सहायता मिलने से युवा अब कृषि आधारित उद्योग, लघु व्यवसाय, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप गतिविधियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहक सेवा केंद्र, बैंक मित्र और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। इससे आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।

विकास और सुशासन का नया मॉडल बनता बस्तर

बस्तर में बैंकिंग विस्तार यह दर्शाता है कि अब यह क्षेत्र केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि विकास और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग जैसी सुविधाओं का तेजी से विस्तार यह साबित कर रहा है कि नक्सलमुक्त बस्तर अब आत्मनिर्भरता और समग्र विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 31 नई बैंक शाखाओं का खुलना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की नई तस्वीर है- जहां विश्वास है, अवसर हैं और विकास की नई संभावनाएं हैं।

नया बस्तर- विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर

आज बस्तर बदल रहा है। गांवों तक पहुंचती बैंकिंग सेवाएं यह संदेश दे रही हैं कि अब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। नक्सलमुक्त बस्तर में मजबूत होता बैंकिंग नेटवर्क आने वाले समय में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहा है।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

No comments Document Thumbnail

जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री का श्रमदान: श्रमिक बहनों के साथ की ईंट जोड़ाई

No comments Document Thumbnail

“ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए… मसाला बढ़िया से डालिए” - जब श्रमिक बहन ने मुख्यमंत्री को सिखाया काम

रायपुर- सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में चल रहे औचक निरीक्षण और जनसंवाद के क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम लोखन में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सुशासन के ध्येय को और अधिक जीवंत बना दिया। 

निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल औपचारिक समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चुना, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उनके इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुशासन केवल नीति और कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में कार्य कर रहीं श्रमिक बहनों के बीच जाकर कुछ समय उनके साथ ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया।  

इसी दौरान श्रमिक बहन संगीता ने पूरे आत्मीय अधिकार और सहजता के साथ मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से कहा - “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह संवाद एक सामान्य वाक्य से कहीं अधिक था; इसमें वह विश्वास झलकता है, जो आज सरकार और जनता के बीच विकसित हो रहा है। यह वह स्थिति है, जहाँ आम नागरिक बिना झिझक अपनी बात रखता है और नेतृत्व उसे उसी सहजता से स्वीकार करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता का रिश्ता बनता है, तभी विकास की प्रक्रिया प्रभावी और स्थायी बनती है। उनके अनुसार, यही आत्मीयता और साझेदारी सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हों और श्रमिकों के लिए पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

सुशासन तिहार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, सहभागिता और विश्वास पर आधारित एक जीवंत व्यवस्था बन चुका है। यहाँ सरकार और जनता के बीच दूरी नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और साझेदारी का संबंध है - और यही संबंध प्रदेश के समग्र विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।

नारी शक्ति वंदन के संकल्प को मिला महिलाओं का व्यापक समर्थन

No comments Document Thumbnail

राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित  कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

रायपुर- हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।

राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।

राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ - मुख्यमंत्री

रायपुर- डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 



मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

सम्मेलन को सांसदबृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।

इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

‘SMILE’ योजना—हाशिए से सम्मान की ओर एक सशक्त पहल

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा शुरू की गई SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना आज देश के सबसे वंचित वर्गों—ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों—के जीवन में बदलाव की एक नई कहानी लिख रही है। 12 फरवरी 2022 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लॉन्च की गई यह योजना सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

₹390 करोड़ का निवेश, बदलाव की मजबूत नींव

वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इस योजना के लिए कुल ₹390 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए ₹265 करोड़ और भिक्षावृत्ति पुनर्वास के लिए ₹125 करोड़ आवंटित किए गए हैं। हर वर्ष बढ़ते बजट से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जमीनी स्तर पर असर—हजारों को मिला नया जीवन

मार्च 2026 तक भिक्षावृत्ति उप-योजना के तहत 31,055 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 9,935 व्यक्तियों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका है। इसके अलावा, देश के 17 राज्यों में 21 ‘गरिमा गृह’ संचालित हो रहे हैं, जहाँ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित आवास, भोजन और कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समग्र सहयोग

SMILE योजना, Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 के अनुरूप, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक सहायता देती है। इसके तहत छात्रों को छात्रवृत्ति, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, आयुष्मान भारत TG प्लस के तहत हर ट्रांसजेंडर व्यक्ति को ₹5 लाख तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवर मिलता है, जिसमें जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी और हार्मोन थेरेपी भी शामिल हैं।

भिक्षावृत्ति से आत्मनिर्भरता की ओर

इस योजना के अंतर्गत, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों की पहचान कर उन्हें आश्रय, परामर्श और कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सकें।

‘SMILE’—सिर्फ योजना नहीं, बदलाव की सोच

SMILE योजना का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे हालात बनाना है जहाँ व्यक्ति को किसी सहायता की जरूरत ही न पड़े। यह योजना समाज के सबसे कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।

निष्कर्ष

SMILE योजना आज एक ऐसी पहल बनकर उभरी है, जो न केवल जीवन बदल रही है, बल्कि समाज में समानता और गरिमा के मूल्यों को भी मजबूत कर रही है। यह योजना साबित करती है कि सही नीतियों और प्रतिबद्धता के साथ, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।

आदिवासियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

कसडोल में कंवर समाज सामुदयिक भवन तथा पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में बावनगढ़ आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज तुरतुरिया माता महासभा लवन के तत्वावधान में आयोजित गोंड़वाना आदर्श सामूहिक विवाह समारोह मे शामिल हुए। इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारम्परिक गोंडी रीति-रिवाज से दाम्पत्य सूत्र में बंधे 28 नवविवाहित जोड़ों क़ो आशीर्वाद व सुखमय दाम्पत्य जीवन की बधाई एवं शुभकामनायें दी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के पदाधिकारियों की मांग पर कसडोल नगर में कंवर समाज सामुदयिक भवन व नगर पंचायत पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए और ग्राम ओड़ान में बड़ादेव ठाना में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही ग्राम ओड़ान के शनिमंदिर से बड़ादेव ठाना तक सीसी रोड निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा हमारी सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। गोंडवाना संस्कृति के मानने वाले हमारे सभी आदिवासी भाई प्रकृति के पुजारी हैं। आप लोगों ने जल,जंगल और जमीन की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए इस साल हम लोगों ने 200 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह जनजातीय समुदाय के समग्र विकास की दिशा में प्रधानमंत्री जनमन योजना मील का पत्थर साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। हम लोगों ने आदिवासी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि प्रारम्भ किया है, जिसके माध्यम से बैगा, गुनिया और सिरहा को हर साल पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों का आय का एक बड़ा स्रोत वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण है। हम लोगों ने तेंदूपत्ता संग्रहण का दाम 4 हजार रूपये से बढ़ाकर 5500 रूपये प्रति मानक बोरा किया है। जंगल जाने, वनोपज का संग्रहण करने वाले आदिवासी भाई- बहनों के पैरों में कांटे न चुभे, इसका भी इंतजाम हमारी सरकार ने फिर से किया है। इस साल चरण पादुका वितरण भी किया जाएगा। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका प्रदान करने के लिए बजट में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह बहुत ही अच्छी पहल हैं। इस तरह के आयोजन से न केवल समाज संगठित होता है, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी रोक लगती है। उन्होंने कहा कि अभी 10 मार्च को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से 6 हजार से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह पूरे प्रदेश में संपन्न हुआ जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक संदीप साहु सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सीएआरए ने गुवाहाटी में दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय के तहत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) ने आज (30 जनवरी 2026) गुवाहाटी, असम में "विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) के गैर-संस्थागत पुनर्वास को बढ़ावा देना" विषय पर एक क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की।

पूरे दिन चलने वाली परामर्श बैठक में 122 हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (एसएआरए), विशेष गोद लेने एजेंसियां (एसएए), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू), मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य पेशेवर, बाल संरक्षण कार्यकर्ता और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। बड़ी संख्या में भागीदारी ने यह दर्शाया कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए गोद लेने और पुनर्वास तंत्र को मजबूत करने के प्रति संस्थागत प्रतिबद्धता बढ़ रही है।

कार्यशाला की शुरुआत सीएआरए की पहलों का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए हुई, जिनका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना है, इसके बाद एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया जिसमें विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को सफलतापूर्वक अपनाने की कहानियाँ दिखाई गईं। कार्यक्रम में आगे, प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों ने बच्चों को अपनाने और गैर-संस्थागत देखभाल को सुगम बनाने में वर्तमान चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अपनाये जा रहे अभिनव दृष्टिकोणों पर अपने अनुभव साझा किए।

विशेष विषयों से संबंधित सिफारिशों को सामने लाने के लिए एक समूह चर्चा का भी आयोजन किया गया, जिनके बारे में जानकारी प्रतिनिधियों को पहले ही प्रदान की गई थीं। विचार-विमर्श निम्नलिखित विषयों से संबंधित थे:

  1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी मूल्यांकन
  2. दत्तक ग्रहण के कानूनी और प्रक्रिया संबंधी पहलू
  3. वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियाँ
  4. शिकायत निवारण और संस्थागत समन्वय

प्रत्येक समूह ने पहचान, प्रमाणीकरण, परामर्श, प्रतिस्थापन और दत्तक ग्रहण के बाद के सहायता तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू करने योग्य सिफारिशें प्रस्तुत कीं। कार्यशाला में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दत्तक ग्रहण के संबंध में रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। अंतर-क्षेत्रीय समन्वय बढ़ाने, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमताओं का निर्माण करने और दत्तक ग्रहण करने वाले संभावित माता-पिता के बीच जानकारी आधारित निर्णय लेने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

परामर्श बैठक का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि दिव्यांग बच्चों को घरेलू स्तर पर गोद लेने को बढ़ावा दिया जाएगा, गैर-संस्थागत देखभाल तंत्र को मजबूत किया जाएगा और दत्तक ग्रहण जागरूकता माह के दौरान जागरूकता प्रयासों को तीव्र करने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप विकसित किया जाएगा।

सीएआरए ने अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया कि प्रत्येक बच्चे को, चाहे उसकी शारीरिक या विकासात्मक चुनौतियाँ कैसी भी हों, एक सुरक्षित, पोषणपूर्ण और स्थायी पारिवारिक वातावरण में पलना-बढ़ना चाहिए और गोद लेना बच्चों के कल्याण, पारदर्शिता और बच्चे के सर्वोत्तम हित के सिद्धांतों द्वारा मार्गदर्शित होना चाहिए।


राष्ट्रीय पटल पर चमका छत्तीसगढ़, 'मॉडल यूथ ग्राम सभा' में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने हासिल किया प्रथम स्थान

No comments Document Thumbnail

पंचायती राज मंत्रालय 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ के युवा लीडर्स को सहभागितापूर्ण शासन में उत्कृष्टता के लिए करेगा पुरस्कृत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव के क्षण में, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS), कोसमबुड़ा ने अपनी तरह की पहली ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ (MYGS) प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता बनकर उभरने का गौरव प्राप्त किया है। पंचायती राज मंत्रालय आगामी 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ की इस विजेता टीम को औपचारिक रूप से सम्मानित करेगा।

छत्तीसगढ़ की जनजातीय शिक्षा प्रणाली की बड़ी जीत देश भर के 800 से अधिक स्कूलों के प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए, ईएमआरएस कोसमबुड़ा के छात्रों ने ग्रामीण शासन की असाधारण समझ का प्रदर्शन किया। 30 अक्टूबर 2025 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य युवाओं को मॉक ग्राम सभा सत्रों के माध्यम से जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित करना था। छत्तीसगढ़ का शीर्ष स्थान यह दर्शाता है कि राज्य ने अपनी जनजातीय आवासीय स्कूल प्रणाली के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कितनी मजबूती से आत्मसात किया है।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईएमआरएस कोसमबुड़ा के प्राचार्य, डॉ. कमलाकांत यादव ने कहा:"मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) पहल में हमारे विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिलना हर्ष का विषय है। यह सफलता हमारे विद्यार्थियों के कड़े परिश्रम और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाती है। पंचायती राज मंत्रालय और केंद्र सरकार की यह दूरदर्शी पहल छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सहभागी शासन से जोड़ने का एक प्रभावी मंच है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला है। हम आगामी 28 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले सम्मान समारोह में सहभागिता को लेकर उत्साहित हैं।"

युवा सहभागिता के लिए दूरदर्शी पहल ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ को 30 अक्टूबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इस कार्यक्रम ने तीन महीने से भी कम समय में भारत के 800 से अधिक स्कूलों तक पहुँच बनाकर युवाओं में सहभागी शासन की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। देश भर से शॉर्टलिस्ट की गई शीर्ष 6 टीमों में ईएमआरएस कोसमबुड़ा ने ग्राम सभा के संचालन में अनुशासन और स्थानीय समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। 28 जनवरी को होने वाला सम्मान समारोह लोकतंत्र के इन युवा राजदूतों की उपलब्धि का उत्सव मनाएगा, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें यह सिखाता है कि सक्षम समाज वही है जो सबको साथ लेकर चलता है — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर कहा कि दिव्यांगजन  हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनो के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस समाज को यह समझने का अवसर देता है कि दिव्यांगजन किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और प्रगतिशील समाज वही है जो सभी को बराबरी के अवसर प्रदान करे और किसी भी व्यक्ति को उसकी शारीरिक सीमाओं के कारण पीछे नहीं रहने दे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सहायता उपकरण, कौशल-विकास, रोजगार अवसर, सामाजिक सुरक्षा और अनुकूल वातावरण निर्माण के लिए अनेक योजनाएँ सुदृढ़ रूप से लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में समान और सशक्त भागीदारी दिलाने का है, ताकि वे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और उनके साथ सम्मानजनक, सहयोगपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार अपनाएँ। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन तभी वास्तविक रूप से सशक्त होंगे जब समाज और शासन मिलकर ऐसी परिस्थितियाँ तैयार करें, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संदेश देता है।

ज्योतिबा फुले के विचार आज भी प्रासंगिक

No comments Document Thumbnail

 पुण्यतिथि पर संगोष्ठी आयोजित,जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की उठी मांग 

अभनपुर- मरार पटेल समाज अभनपुर राज एवं छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन रायपुर संभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को अभनपुर स्थित शाकंभरी भवन में महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर एक गरिमामय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, चिंतकों और विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लेकर महात्मा फुले के जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार डॉ. कृष्ण कुमार पाटिल, वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. मनीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार एवं पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री, सांसद प्रतिनिधि रायपुर अनिल अग्रवाल, सेवानिवृत्त अपर संचालक राजेंद्र पटेल, प्रदेश संयोजक सर्व समाज ब्रह्मदेव पटेल, जिलाध्यक्ष रायपुर एवं संभाग अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन ईश्वर पटेल, महामंत्री रायपुर संभाग वेदव्यास धीवर, पूर्व उपाध्यक्ष मरार पटेल समाज त्रिपुरारी पटेल, सर्व समाज उपाध्यक्ष फतीश साहू, महामंत्री सर्व समाज वेदव्यास देवांगन, कोषाध्यक्ष सर्व समाज भरत देवांगन, समाजसेवी नारायण सोनी और महेन्द्र पटेल उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे। सामाजिक विषमताओं, अशिक्षा, कुरीतियों, स्त्री शिक्षा तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे मुद्दों पर फुले दंपत्ति—ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई—ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ कार्य किया, वह वर्तमान समाज के लिए प्रेरणादायक है। वक्ताओं ने कहा कि फुले ने प्रतिकूल परिस्थितियों में समाज सुधार का जो मार्ग प्रशस्त किया, वह आज भी सामाजिक जागरूकता की दिशा में प्रकाशस्तंभ की तरह है।

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से यह आग्रह किया गया कि महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी और योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि बच्चे प्रारंभिक स्तर से ही समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के मूल्यों से परिचित हो सकें। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया कि चौराहों, सार्वजनिक स्थलों और विद्यालयों में महात्मा फुले एवं भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाएं एवं छायाचित्र स्थापित किए जाएं। वक्ताओं ने कहा कि शासन को प्रदेश के सभी स्कूलों में फुले दंपत्ति के छायाचित्र उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके।

आभार प्रदर्शन करते हुए ईश्वर पटेल ने कहा कि आने वाले वर्षों में महात्मा फुले की जयंती एवं पुण्यतिथि पर और भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं को माता सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले की छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर धर्मेंद्र पटेल, अवध राम पटेल, मधुसूदन पटेल, कोमल पटेल, व्यास नारायण पटेल, झड़ीराम पटेल, मिलन पटेल, नोहर पटेल, संजय पटेल, तिहारु राम पटेल, रिखीराम पटेल, लक्ष्मण पटेल, पंचूराम पटेल, बंसीलाल पटेल, संतोष पटेल, कमलेश पटेल, गोपाल पटेल, दौलत राम पटेल सहित सर्व समाज के बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

मनरेगा की राज्य स्तरीय सशक्त समिति की बैठक सम्पन्न

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की राज्य स्तरीय सशक्त समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में योजना के तहत वर्ष 2022-23 से अब तक किए गए कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में मोर गांव, मोर पानी महाअभियान, महात्मा गांधी नरेगा के साथ अभिशरण अंतर्गत कार्यों की समीक्षा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत योजना के क्रियान्वयन के संबंध में राज्य की पहल सहित महात्मा गांधी नरेगा से संबंधित विभिन्न विभागों में किए जा रहे कार्य आदि की समीक्षा की गई।

महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत महत्वपूर्ण कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2022-23 में कुल 39 लाख 82 हजार, 2023-24 में 38 लाख 56 हजार, 2024-25 में 38 लाख 44 हजार तथा 2025-26 में 39 लाख 30 हजार जाब कार्ड प्रदान किए गए। इसी तरह से वर्ष 2022-23 में रोजगार प्रदाय परिवारों की संख्या 25 लाख 74 हजार, 2023-24 में 24 लाख 77 हजार, 2024-25 में 25 लाख 61 हजार और 2025-26 में अब तक 16 लाख 6 हजार परिवारों को रोजगार प्रदाय किया गया। बैठक में बताया गया कि 100 दिवस का रोजगार प्राप्त परिवारों में वर्ष 2022-23 में 3 लाख 25 हजार 582, वर्ष 2023-24 में 3 लाख 22 हजार 936, वर्ष 2024-25 में 3 लाख 13 हजार 40 और वर्ष 2025-26 में अब तक 42 हजार 685 हितग्राहियों को रोजगार दिया गया। बैठक में बताया गया कि महात्मा गांधी नरेगा के तहत 2024-25 एवं 2025-26 में कुल 11 लाख 47 हजार 907 पौधे रोपित किए गए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मोर गांव, मोर पानी महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन प्रदाय किए जा रहे है। इसके लिए मोर गांव, मोर पानी महाअभियान से लोगों को जोड़ा जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है। योजना के अंतर्गत 56 हजार 112 प्रतिभागियों का उन्नमुखीकरण किया गया हैं। बैठक में बताया गया कि जल संचय, जल भागीदारी संबंधित कार्य हेतु राज्य के विभिन्न जिलों में 11 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए गए है। इस अभियान के अंतर्गत करीब 34 हजार 421 कार्यो को लिया गया है। जिसमें क्षेत्रीय हितग्राहियों को रोजगार प्रदान किया गया है।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ श्रीनिवास राव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।


वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर विशेष सत्र: समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी पर जोर

No comments Document Thumbnail

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सहयोग से “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (MWPSC Act)” पर विशेष सत्र का आयोजन डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली में किया। इस सत्र का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों, उनके लिए उपलब्ध सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों तथा समाज एवं समुदाय की भूमिका पर जागरूकता बढ़ाना था।

MWPSC अधिनियम, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और भरण-पोषण की कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करता है। यह अधिनियम बच्चों और निर्धारित परिजनों को यह कानूनी दायित्व देता है कि वे वरिष्ठ नागरिकों, जिसमें माता-पिता भी शामिल हैं, का भरण-पोषण करें तथा उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करें। इसके तहत मासिक भरण-पोषण भत्ता की सुविधा भी दी गई है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस विशेष सत्र में मुख्य अतिथि थे—

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

  • न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट एवं कार्यकारी अध्यक्ष, NALSA
    साथ ही मंत्रालय एवं NALSA के वरिष्ठ अधिकारी, विधि संकाय के प्रोफेसर, वकील, छात्र, वरिष्ठ नागरिक तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को राष्ट्र की नींव बताया

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आज के वरिष्ठ नागरिकों ने अपना पूरा जीवन परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में लगाया है। भारतीय परिवार व्यवस्था की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार प्रणाली ने भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रगति में बड़ा योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि:

  • भावनात्मक सहायता के लिए सरकार ने Elderline 14567 हेल्पलाइन शुरू की है।

  • राशtriya Vayoshri Yojana के तहत 7 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

  • 70 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बुजुर्गों की गरिमा बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

वरिष्ठों के प्रति सम्मान हमारी सांस्कृतिक परंपरा— न्यायमूर्ति सूर्य कांत

न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि भारतीय परंपरा में बुज़ुर्गों का सम्मान सदियों से हमारी नैतिक धरोहर रहा है। उन्होंने श्लोक उद्धृत किया—

“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः, चत्वारि तस्य वर्धन्ते— आयु, विद्या, यश, बलम्।”

उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान कम हो रहा है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • MWPSC Act, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा का ऐतिहासिक कानून है।

  • यह केवल दान का कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।

  • मंत्रालय, विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस और कानून के विद्यार्थियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे करुणा और संवेदनशीलता के साथ बुजुर्गों के प्रति अपना दायित्व निभाएँ।

वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या पर सरकार की ज़िम्मेदारी

सचिव अमित यादव ने कहा कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2011 के 10.38 करोड़ से बढ़कर 2050 में 34 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व है कि बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन जी सकें।

उन्होंने डिजिटल और वित्तीय बदलावों के कारण वरिष्ठों को होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि समुदाय व युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।

निष्कर्ष

इस विशेष सत्र ने कार्यपालिका, न्यायपालिका, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, NGOs और छात्रों को एक मंच पर लाकर MWPSC Act, 2007 की महत्ता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण में इसकी भूमिका पर व्यापक चर्चा का अवसर दिया।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.