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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए पेंशनर सम्मेलन में

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पेंशनर्स समाज की धरोहर हैं, जिन्होंने अपने सेवाकाल में शासन-प्रशासन की नींव को सुदृढ़ किया और आज राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे है। प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में पेंशनरों का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी कर्तव्यनिष्ठ सेवा के कारण ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से जारी है। मुख्यमंत्री आज पमशाला में आयोजित सरगुजा संभागीय पेंशनर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के वक्त जिन शासकीय सेवकों ने कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वे आज भले ही सेवानिवृत हो चुके है लेकिन उनका अनुभव और मार्गदर्शन नए अधिकारियों के लिए हमेशा काम आएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पूर्व सरगुजा कमिश्नर रिटायर्ड आईएएस महेश्वर साय पैंकरा द्वारा लिखित किताब करमडार एवं अन्य कथनी तथा महुवा के फूल का विमोचन किया। उन्होंने पेंशनर संघ की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राधा-कृष्ण मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। 

इस अवसर पर प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर ने कहा कि मुख्यमंत्री साय पेंशनर संघ सम्मलेन में शामिल होने वाले पहले मुख्यमंत्री है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पूर्व विधायक भरत साय, पेंशनर संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर, बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।


पेंशन अदालत में लंबित मामलों का त्वरित समाधान, पेंशनभोगियों को मिली बड़ी राहत

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नई दिल्ली- पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 24 दिसंबर 2025 को आयोजित पेंशन अदालत में कुल 30 मंत्रालयों/विभागों से जुड़े 1087 दीर्घकालिक पेंशन संबंधी मामलों पर सुनवाई की गई। इनमें से 815 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जिससे इस व्यवस्था की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।

इस पेंशन अदालत में रक्षा, गृह, वित्त, डाक, आवासन एवं शहरी कार्य, नागरिक उड्डयन सहित विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मामलों को शामिल किया गया। कई मामलों में वर्षों से लंबित पेंशन और बकाया राशि का निपटारा हुआ, जिससे पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली।

कुछ प्रेरक और भावनात्मक समाधान उदाहरण

सत्यम मिश्रा (प्रयागराज)

114 दिनों से लंबित असाधारण पेंशन (Extra Ordinary Pension) का मामला जुलाई 2024 से अटका हुआ था। पेंशन अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी बात रखने के बाद बीएसएफ अधिकारियों ने जानकारी दी कि ₹5,73,728 की बकाया राशि (एक्स-ग्रेशिया सहित) का भुगतान कर दिया गया है और 1 दिसंबर 2025 से पेंशन प्रारंभ कर दी जाएगी।

दलजीत सिंह (रेवाड़ी, हरियाणा)

150 दिनों से अधिक समय से कम्यूटेशन राशि के भुगतान का मामला लंबित था। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत PCDA(P), प्रयागराज ने बताया कि ₹12,02,656 की कम्यूटेशन राशि 10 नवंबर 2025 को उनके खाते में जमा कर दी गई है।

नसीम अख्तर (श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर)

अगस्त 2020 से पारिवारिक पेंशन का मामला लंबित था। पेंशन अदालत में जानकारी दी गई कि 24 दिसंबर 2025 को प्राधिकरण जारी कर दिया गया है और समस्त बकाया राशि शीघ्र भुगतान की जाएगी।

 कंचन बाला (ऊना, हिमाचल प्रदेश)

जनवरी 2021 से अविवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन न मिलने का मामला। बीएसएफ अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि 10 दिनों के भीतर मामला निपटाया जाएगा।

मुक्ता चक्रवर्ती (गुवाहाटी, असम)

अक्टूबर 2020 से लंबित पारिवारिक पेंशन मामले में PAO-CBDT और CPAO को 10 दिनों के भीतर समीक्षा कर शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए।

मानिका दास (दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल)

229 दिनों से लंबित पारिवारिक पेंशन बकाया का मामला। अधिकारियों ने बताया कि ₹18 लाख की बकाया राशि शीघ्र जमा की जाएगी और 31 दिसंबर 2025 से नियमित पेंशन प्रारंभ होगी।

संवेदनशील प्रशासन की मिसाल

पेंशन अदालत ने यह सिद्ध कर दिया कि संवाद, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के माध्यम से वर्षों से अटके मामलों का समाधान संभव है। यह पहल न केवल पेंशनभोगियों के लिए राहत का माध्यम बनी, बल्कि सरकार की ‘Ease of Living’ की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

मध्य प्रदेश में अंतर-पिढ़ी संबंध उत्सव: सामाजिक सामंजस्य और सक्रिय वृद्धावस्था को सुदृढ़ करना

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भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को गवर्नमेंट एक्सीलेंस हायर सेकेंडरी स्कूल, नवगोंग, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश में “Celebration of Intergenerational Bonds” कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य विभिन्न पीढ़ियों के बीच भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और सक्रिय एवं सम्मानजनक वृद्धावस्था को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण, भारत सरकार, मुख्य अतिथि थे। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सामाजिक संगठन प्रतिनिधि, छात्र और बच्चों के दादा-दादी सहित परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

उद्देश्य और महत्व

यह कार्यक्रम पीढ़ियों के बीच स्नेह, संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना, मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाना, और सामूहिक सामाजिक जागरूकता को मजबूत करना है। यह पहल भारत सरकार की समावेशी और बुजुर्ग-अनुकूल समाज बनाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

गतिविधियाँ और मुख्य आकर्षण

कार्यक्रम में अंतर-पिढ़ी सामंजस्य बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं:

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: छात्रों ने नृत्य, संगीत और कला प्रस्तुतियों के माध्यम से बुजुर्गों के प्रति सम्मान और मूल्य परंपरा का संदेश दिया।

  • इंटरैक्टिव सेशन: वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए, जिससे युवाओं के साथ सार्थक संवाद हुआ।

  • सामूहिक शपथ: सभी उम्र के प्रतिभागियों ने सम्मान, प्रेम और देखभाल बनाए रखने की शपथ ली।

  • वॉकाथॉन: श्री वीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में आयोजित, जिसमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने स्वास्थ्य, एकता और सक्रिय जीवनशैली का संदेश दिया।

मंत्री का संबोधन और प्रमुख पहल

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अनुभव, परंपरा और मूल्यों के संरक्षक हैं और राष्ट्र की अमूल्य शक्ति हैं। उन्होंने सामुदायिक पहल और अंतर-पिढ़ी संवाद के माध्यम से सक्रिय, स्वस्थ और सम्मानजनक वृद्धावस्था के महत्व पर जोर दिया।

मुख्य पहलों में शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): गतिशीलता, दृष्टि और श्रवण संबंधित सहायक उपकरण प्रदान करती है; अब तक 7.28 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित।

  • एल्डरलाइन 14567: वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शन और आपातकालीन सहायता प्रदान करता है, अब तक 27 लाख+ कॉल्स प्राप्त।

  • अंतर-पिढ़ी जुड़ाव: सांस्कृतिक, सामुदायिक और स्कूल कार्यक्रमों के माध्यम से, जिसमें ग्रैंडपेरेंट्स डे भी शामिल है।

मंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ व्यक्तिगत बातचीत की और उनके अनुभव एवं सुझाव सुने।

परिणाम

कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, युवाओं और समुदाय को सम्मान, सहभागिता और सहयोग के साझा मंच पर एकत्र किया। सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, संवाद और शारीरिक गतिविधियों ने अंतर-पिढ़ी सामंजस्य का संदेश दिया और समान, समावेशी और सहानुभूतिपूर्ण समाज की आवश्यकता को रेखांकित किया।

विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शक और आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया और युवाओं को उनके अनुभव से सीखने तथा राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। यह पहल वरिष्ठ नागरिक कल्याण और एक सशक्त, समावेशी भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” का आयोजन

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, ने 28.11.2025 को नई दिल्ली के जनपथ स्थित डीआईएसी के भीम हॉल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सक्रिय उम्र बढ़ने और अंतरपीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देना था और यह वरिष्ठ नागरिक दिवस (IDOP)-2025 की श्रृंखला का हिस्सा था। इस कार्यक्रम की थीम थी: “अनुभव से ऊर्जा तक”

इस सत्र की शोभा वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से बढ़ी। कार्यक्रम में बी.एल. वर्मा, माननीय राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, विशेष रूप से उपस्थित थे।

संविधान एवं वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित पहल:

भारत का संविधान, अनुच्छेद 41 के तहत, राज्य को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान करने का आदेश देता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए पेरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न्स की देखभाल और कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया गया। यह ऐतिहासिक कानून हमारी सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है — जिसमें देखभाल, कर्तव्य और प्रेम को कानूनी अधिकारों में बदल दिया गया। वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय जिम्मेदार है।

जनसंख्या एवं चुनौतियां:

2011 की जनगणना के अनुसार देश में लगभग 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं। यह संख्या 2036 तक 22 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। इस बढ़ती जनसंख्या से वरिष्ठ नागरिक-केंद्रित नीतियों पर ध्यान देने का अवसर भी मिलता है। भारत ने इस दिशा में नीति और कानूनी ढांचे दोनों स्तरों पर कई पहलें की हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ:

कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायु सेना बैंड ने "स्पेस फ्लाइट", "सुजलम सुफ़लम", "रिजॉइस इन रायसना", "इवनिंग स्टार", "वन्दे मातरम्" और "सारे जहाँ से अच्छा" जैसे गीत प्रस्तुत किए। इन धुनों ने उपस्थित लोगों में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना जगाई।

पद्मश्री गीता चंद्रन और उनकी टीम ने भरतनाट्यम प्रस्तुत किया। उन्होंने त्रिदारा, नमः शिवाय, ओंकारा करिणी (लवंगी राग) और संकीर्तन जैसी प्रस्तुतियाँ दीं। इन भारतीय नृत्य प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

माननीय मंत्री का संबोधन:

बी.एल. वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे वरिष्ठ नागरिक हमेशा ज्ञान, धैर्य और मूल्य आधारित जीवन के प्रतीक रहे हैं। उनके जीवन के प्रत्येक अध्याय — कठिन परिश्रम, संघर्ष, त्याग और उपलब्धियों से भरा — युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का प्रकाश है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष इसलिए है क्योंकि संगीत, नृत्य और कला अनुभव को अभिव्यक्त करने और ऊर्जा को सुंदर रूप देने का माध्यम बनते हैं।

यह कार्यक्रम स्मरणीय है क्योंकि आज तीन पीढ़ियाँ एक मंच पर हैं — वरिष्ठ नागरिकों के संगीत प्रदर्शन, युवाओं की कला और बच्चों की हर्षोल्लासपूर्ण उपस्थिति। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय इस दिशा में कार्य कर रहा है और इसके प्रत्येक कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए गरिमा, सुरक्षा, सक्रिय जीवन और भागीदारी सुनिश्चित करना है।

सारांश:

सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” ने वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों, नीति निर्धारकों और गैर-सरकारी संगठनों को एक मंच पर लाकर सक्रिय उम्र बढ़ने और अंतरपीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा दिया।


वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर विशेष सत्र: समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी पर जोर

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सहयोग से “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 (MWPSC Act)” पर विशेष सत्र का आयोजन डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली में किया। इस सत्र का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों, उनके लिए उपलब्ध सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों तथा समाज एवं समुदाय की भूमिका पर जागरूकता बढ़ाना था।

MWPSC अधिनियम, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और भरण-पोषण की कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करता है। यह अधिनियम बच्चों और निर्धारित परिजनों को यह कानूनी दायित्व देता है कि वे वरिष्ठ नागरिकों, जिसमें माता-पिता भी शामिल हैं, का भरण-पोषण करें तथा उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करें। इसके तहत मासिक भरण-पोषण भत्ता की सुविधा भी दी गई है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस विशेष सत्र में मुख्य अतिथि थे—

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

  • न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट एवं कार्यकारी अध्यक्ष, NALSA
    साथ ही मंत्रालय एवं NALSA के वरिष्ठ अधिकारी, विधि संकाय के प्रोफेसर, वकील, छात्र, वरिष्ठ नागरिक तथा विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को राष्ट्र की नींव बताया

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आज के वरिष्ठ नागरिकों ने अपना पूरा जीवन परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में लगाया है। भारतीय परिवार व्यवस्था की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार प्रणाली ने भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रगति में बड़ा योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि:

  • भावनात्मक सहायता के लिए सरकार ने Elderline 14567 हेल्पलाइन शुरू की है।

  • राशtriya Vayoshri Yojana के तहत 7 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

  • 70 वर्ष से अधिक आयु वाले सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बुजुर्गों की गरिमा बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

वरिष्ठों के प्रति सम्मान हमारी सांस्कृतिक परंपरा— न्यायमूर्ति सूर्य कांत

न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि भारतीय परंपरा में बुज़ुर्गों का सम्मान सदियों से हमारी नैतिक धरोहर रहा है। उन्होंने श्लोक उद्धृत किया—

“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः, चत्वारि तस्य वर्धन्ते— आयु, विद्या, यश, बलम्।”

उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान कम हो रहा है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • MWPSC Act, 2007 वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा का ऐतिहासिक कानून है।

  • यह केवल दान का कार्य नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।

  • मंत्रालय, विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस और कानून के विद्यार्थियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे करुणा और संवेदनशीलता के साथ बुजुर्गों के प्रति अपना दायित्व निभाएँ।

वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती जनसंख्या पर सरकार की ज़िम्मेदारी

सचिव अमित यादव ने कहा कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2011 के 10.38 करोड़ से बढ़कर 2050 में 34 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में यह सरकार का दायित्व है कि बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन जी सकें।

उन्होंने डिजिटल और वित्तीय बदलावों के कारण वरिष्ठों को होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया और कहा कि समुदाय व युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।

निष्कर्ष

इस विशेष सत्र ने कार्यपालिका, न्यायपालिका, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, NGOs और छात्रों को एक मंच पर लाकर MWPSC Act, 2007 की महत्ता और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण में इसकी भूमिका पर व्यापक चर्चा का अवसर दिया।


विशेष लेख : वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध - छत्तीसगढ़ का आदर्श मॉडल

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 बुजुर्ग - संस्कृति, अनुभव और मूल्यों के स्तंभ

रायपुर-भारतीय संस्कृति के केंद्र में हमारे बुजुर्ग हैं - जिनके अनुभव समाज को दिशा देते हैं और जिनकी स्मृतियाँ हमारी सभ्यता की नींव हैं, लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में पारिवारिक संरचना और सामाजिक दायरे सिमटने लगे हैं। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहभागिता और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिकता बन जाता है। इसी भावना को साकार करती है - छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील नीतियाँ और सशक्त क्रियान्वयन।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठजनों के सम्मान को शासन प्रणाली में प्रमुख स्थान दिया है। उनका मानना है “माता-पिता की पूजा ही ईश्वर की पूजा है।” इसी सोच के साथ राज्य में ऐसे प्रकल्पों का विस्तार हो रहा है जो बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। एक अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और दुर्ग में पीपीपी मॉडल के तहत आधुनिक वृद्धाश्रम स्थापित करने तथा असहाय बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए रायपुर में उपकरण सर्विस सेंटर खोलने की घोषणा की। इसी के साथ राज्य में “सियान गुड़ी” जैसे सामाजिक-आध्यात्मिक केंद्रों का विस्तार बुजुर्गों को मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहारा प्रदान कर रहा है।

छत्तीसगढ़ की समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने वृद्धजन केंद्रित कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका कहना है “संवेदनशील शासन का अर्थ है, हर बुजुर्ग तक सेवा और सुरक्षा पहुँचाना।”

राज्य में 35 वृद्धाश्रम सक्रिय रूप से संचालित हैं, जहाँ लगभग 1049 वरिष्ठ नागरिक भोजन, आवास, स्वास्थ्य, परामर्श और मनोरंजन की सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं। गंभीर रोगों या असहाय स्थिति में रह रहे बुजुर्गों के लिए रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, रायगढ़, बालोद और बेमेतरा इन 6 जिलों में प्रशामक देखभाल गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ 128 वरिष्ठजनों को निःशुल्क उपचार, दवाइयाँ और नियमित स्वास्थ्य देखभाल मिल रहा है। वरिष्ठजनों की समस्याओं के निवारण हेतु स्थापित हेल्पलाइन सेवा द्वारा अब तक 2 लाख 70 हजार से अधिक प्रकरणों का समाधान किया जा चुका है। यह सेवा न केवल उनकी पहुँच बढ़ाती है, बल्कि आत्मविश्वास और सुरक्षा बोध भी जगाती है।

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम - 2007 का राज्य में सख्ती से पालन किया जा रहा है। अनुविभाग स्तर पर - भरण-पोषण अधिकरण, जिला स्तर पर - अपीलीय अधिकरण इन व्यवस्थाओं ने बुजुर्गों को संपत्ति, सुरक्षा और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को नियमित पेंशन सहायता प्रदान की जा रही है 60 से 79 वर्ष तक की आयु के बुजुर्गों को 500 रुपए प्रति माह और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठजनों को 650 रुपए प्रति माह सहायता राशि दी जा रही है। वर्तमान में 14 लाख से अधिक बुजुर्ग इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। यह सहायता उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा का आधार बनती है।

राज्य सरकार की योजनाएँ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के अधिकार को सुदृढ़ कर रही हैं। आयुष्मान भारत और शहीद वीर नारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजनाओं के तहत 8 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क उपचार मिला है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत 50 हजार से अधिक बुजुर्गों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, छड़ी, चश्मा जैसे उपकरण प्रदान किए गए हैं।

आध्यात्मिक संतोष बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना और श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक, 278 व्यक्ति तीर्थयात्राओं का लाभ ले चुके हैं। यात्रा के दौरान भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक वर्ष एक अक्टूबर वृद्धजन दिवस राज्य और जिला स्तर पर मनाया जाता है। इन कार्यक्रमों से समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान केवल एक सामाजिक मूल्य नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि संवेदनशील शासन, सुचारु क्रियान्वयन और मानवीय दृष्टिकोण मिलकर बुजुर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं।


पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा 1 से 30 नवम्बर, 2025 तक देशव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 का आयोजन

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कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) द्वारा 1 से 30 नवम्बर, 2025 तक देशव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) अभियान 4.0 आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान, डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ लिविंग मिशन के अनुरूप, पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए सरकार की एक प्रमुख पहल है।

देशव्यापी DLC अभियान 4.0 के दौरान, दूरसंचार विभाग द्वारा अहमदाबाद के पालडी स्थित टैगोर हॉल में 4 नवम्बर, 2025 को एक मेगा कैंप आयोजित किया जा रहा है। पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारी इस कैंप का दौरा करेंगे। इस मेगा कैंप का उद्देश्य पेंशनभोगियों को विभिन्न डिजिटल माध्यमों से अपना जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में सहायता करना है। UIDAI द्वारा आवश्यकता पड़ने पर आधार रिकॉर्ड अद्यतन और तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाएगी।

DLC अभियान 4.0 का लक्ष्य 2 करोड़ पेंशनभोगियों तक पहुंचना है, जो देशभर के 2000 से अधिक शहरों और कस्बों को कवर करेगा। इस अभियान में आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया है, जिससे पेंशनभोगी बिना बायोमेट्रिक उपकरणों के आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकेंगे। विशेष ध्यान अति वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग पेंशनभोगियों पर दिया जा रहा है, जिन्हें इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा डोरस्टेप DLC सेवा प्रदान की जा रही है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात (24 नवम्बर, 2024) और संविधान दिवस संबोधन (26 नवम्बर, 2024) में इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे डिजिटल इंडिया जैसी पहलें, जैसे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, देशभर के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन प्रक्रिया को सरल बना रही हैं।

यह अभियान बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, दूरसंचार विभाग, यूआईडीएआई, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), एनआईसी, तथा गुजरात की पेंशनभोगी कल्याण संघों — जैसे केंद्रीय निवृत्त कर्मचारी मंडल, बड़ोदा सेंट्रल पेंशनर्स एसोसिएशन, और डाक व तार एवं अन्य केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स एसोसिएशन — को एक साथ लाकर पेंशनभोगियों के डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देता है। DLC पोर्टल विभिन्न एजेंसियों द्वारा जीवन प्रमाण पत्र के वास्तविक समय मॉनिटरिंग की सुविधा प्रदान करता है।

मेगा कैंप के दौरान सचिव (P&PW) और कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशंस अकाउंट्स की पेंशनभोगियों के साथ इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 2000 पेंशनभोगी विभिन्न विभागों और संगठनों से इस कैंप में शामिल होंगे।

देशव्यापी DLC अभियान 4.0 के हिस्से के रूप में, गुजरात में 82 शहरों और 107 स्थानों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे, जो विभिन्न जिलों और उपविभागों को कवर करेंगे। इन सभी शिविरों के सुचारू संचालन हेतु कुल 107 नोडल अधिकारी भाग लेंगे।

विभाग पेंशनभोगियों के जीवन को सरल बनाने और उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए ऐसे प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों और पहलों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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