Media24Media.com: पितृ पक्ष 2025 : पितृ पक्ष में पितरों को कैसे खुश रखें - गरुड़ पुराण की सलाह

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पितृ पक्ष 2025 : पितृ पक्ष में पितरों को कैसे खुश रखें - गरुड़ पुराण की सलाह

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 रायपुर। हर साल की तरह इस वर्ष भी पितृ पक्ष का आगमन होने जा रहा है। यह 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह समय होता है जब पितृ अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा रखते हैं।


गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ पक्ष का महत्व

  • पितरों की आत्मा को शांति देने के लिए श्राद्ध और तर्पण करना आवश्यक माना गया है।
  • ऐसा करने से न केवल पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, बल्कि पितरों को मोक्ष भी प्राप्त होता है।
  • श्रद्धालु इस अवसर पर सुबह नदी किनारे तर्पण करते हैं।
  • क्या पितरों को देख पाना संभव है?

गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि:

पितरों के लिए अत्यधिक रोना या शोक करना वर्जित है।

भगवान नारायण गरुड़ से कहते हैं कि जो लोग पितरों के लिए अत्यधिक रोते हैं, उनके पितृ अश्रुपान करते हैं।

दुःख से नहीं, श्रद्धा से करें स्मरण

  • जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को शोक नहीं करना चाहिए।
  • पितृ प्रसन्नता श्रद्धा और संकल्प से किया गया तर्पण ही लाता है।
  • गरुड़ पुराण में कहा गया है – “इस संसार में ऐसा कोई दैवीय या मानवीय उपाय नहीं है जिससे मृत व्यक्ति वापस धरती पर आ सके।”
  • अगर ऐसा संभव होता, तो महापुरुष जैसे भगवान राम, युधिष्ठिर और नल भी अपने अपनों से दोबारा मिलते।

समझदारी और संतुलन क्यों जरूरी है

  • यह संसार अनित्य है। गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए, शोक नहीं।
  • स्थानीय धर्माचार्यों का कहना है कि पिंडदान और श्राद्ध से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में शांति बनी रहती है।
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