Media24Media.com: #Pitru Paksha

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Pitru Paksha. Show all posts
Showing posts with label #Pitru Paksha. Show all posts

पितृ पक्ष और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग : 7 सितंबर को क्यों है पितृ पूजन का सबसे शुभ समय? पढ़े पूरी खबर

No comments Document Thumbnail

 Pitru Paksha 2025 : इस साल का पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है और उसी दिन साल का आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, दोनों घटनाओं का एक साथ होना बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग माना जा रहा है।


पितृ पक्ष और ग्रहण का महत्व

पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने, तर्पण और श्राद्ध करने का पावन समय है। वहीं, चंद्र ग्रहण आध्यात्मिक साधना और प्रार्थना का सबसे असरदार काल माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण काल में किए गए दान, जप और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में जब दोनों घटनाएं एक साथ घटित हों, तो इसका महत्व और भी ज्यादा हो जाता है।

क्यों है यह दिन खास?

ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग इसलिए अद्वितीय है क्योंकि पितृ पक्ष की शुरुआत ही चंद्र ग्रहण के साथ हो रही है। इसका अर्थ है कि 7 सितंबर को किया गया तर्पण, दान या मंत्रजाप सामान्य दिनों से कई गुना फलदायी होगा।

पितरों की शांति और आशीर्वाद के लिए करें ये कार्य

  • जल में काले तिल डालकर पितरों के नाम से तर्पण करें, संभव हो तो पवित्र नदी के किनारे।
  • ग्रहण के समय घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं और मौन साधना करें।
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे मंत्रों का जाप करें।
  • पितरों के नाम पर दान करें और गाय, कुत्तों, पक्षियों को भोजन-पानी कराएं।

ग्रहण के दौरान क्या न करें

  • ग्रहण लगने के समय भोजन और नींद से बचें।
  • इसके बजाय प्रार्थना, जप या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

चंद्र ग्रहण की अवधि

  • प्रारंभ: 7 सितंबर रात 9:57 बजे
  • पीक टाइम: रात 11:42 बजे
  • समापन: 1:26 बजे (8 सितंबर की अर्धरात्रि)

यह चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और ‘ब्लड मून’ के रूप में दिखाई देगा।

पितृ पक्ष 2025 : पितृ पक्ष में पितरों को कैसे खुश रखें - गरुड़ पुराण की सलाह

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। हर साल की तरह इस वर्ष भी पितृ पक्ष का आगमन होने जा रहा है। यह 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या पर समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह समय होता है जब पितृ अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा रखते हैं।


गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ पक्ष का महत्व

  • पितरों की आत्मा को शांति देने के लिए श्राद्ध और तर्पण करना आवश्यक माना गया है।
  • ऐसा करने से न केवल पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, बल्कि पितरों को मोक्ष भी प्राप्त होता है।
  • श्रद्धालु इस अवसर पर सुबह नदी किनारे तर्पण करते हैं।
  • क्या पितरों को देख पाना संभव है?

गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि:

पितरों के लिए अत्यधिक रोना या शोक करना वर्जित है।

भगवान नारायण गरुड़ से कहते हैं कि जो लोग पितरों के लिए अत्यधिक रोते हैं, उनके पितृ अश्रुपान करते हैं।

दुःख से नहीं, श्रद्धा से करें स्मरण

  • जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति को शोक नहीं करना चाहिए।
  • पितृ प्रसन्नता श्रद्धा और संकल्प से किया गया तर्पण ही लाता है।
  • गरुड़ पुराण में कहा गया है – “इस संसार में ऐसा कोई दैवीय या मानवीय उपाय नहीं है जिससे मृत व्यक्ति वापस धरती पर आ सके।”
  • अगर ऐसा संभव होता, तो महापुरुष जैसे भगवान राम, युधिष्ठिर और नल भी अपने अपनों से दोबारा मिलते।

समझदारी और संतुलन क्यों जरूरी है

  • यह संसार अनित्य है। गरुड़ पुराण हमें सिखाता है कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए, शोक नहीं।
  • स्थानीय धर्माचार्यों का कहना है कि पिंडदान और श्राद्ध से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में शांति बनी रहती है।
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.