Media24Media.com: अनुशासित खान-पान और नियमित व्यायाम से दूर रहेगा मधुमेह

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

अनुशासित खान-पान और नियमित व्यायाम से दूर रहेगा मधुमेह

Document Thumbnail

रायपुर: मधुमेह यानी डायबिटीज आज जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि इस रोग से न सिर्फ शहरी जीवन जीने वाले बुजुर्ग, युवा, किशोर और महिलाएं बड़ी तेजी से प्रभावित हो रही हैं, बल्कि शारीरिक श्रम करने वाले और नियमित दिनचर्या अपनाने वाले ग्रामीणों को भी यह अपनी गिरफ्त में लेते जा रहा है। मोटापा, मानसिक तनाव और नियमित व्यायाम या योग के अभाव समेत अनिद्रा, अनियमित दिनचर्या, अनियंत्रित खानपान जिसमें ज्यादा घी, तेल व वसायुक्त खाद्य पदार्थो जैसे जंक या फास्ट फूड, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बा बंद भोजन, मांसाहार, धूम्रपान और शराब का सेवन मधुमेह के मुख्य कारण हैं। 

आज के दौर में अधिकांश बच्चे, किशोर और युवा इन खान-पानों और जीवन शैली को अपना रहे हैं, जिसके फलस्वरूप वे तेजी से मधुमेह से ग्रस्त हो रहे हैं। शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आयुर्वेद सिर्फ चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि पूरी जीवन पद्धति है। इसे अपनाकर जीवन शैली से जुड़े अनेक रोगों से बचा जा सकता है। आधुनिक जीवन शैली से जुड़े इस रोग को अनुवांशिक भी माना गया है। लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में बताए गए दिनचर्या, ऋतुचर्या और खान-पान अपनाकर तथा नियमित व्यायाम और योग से इस बीमारी से बचाव संभव है। 

मधुमेह खुद में एक गंभीर बीमारी 

असल में मधुमेह स्वयं में एक गंभीर बीमारी होने के साथ-साथ अनेक रोगों का कारण और रोगमुक्ति की प्रक्रिया को धीमा करने वाला कारक भी है। इसलिए इस रोग के शुरुआती लक्षण, बचाव और नियंत्रण के उपायों के प्रति सतर्क होना जरूरी है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि आमतौर पर मधुमेह के शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा भूख या प्यास लगना या बार-बार पेशाब होना, थकान, वजन घटना, नजर का धुंधलापन, शरीर में चिपचिपाहट, हाथ-पैर के तलुओं में जलन सहित यौनांगों में खुजली, जलन या घाव के लक्षण मिलते हैं। किसी व्यक्ति को जब भी यह लक्षण मिले तो बिना विलंब किए उसे तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

मधुमेह से बचाव के लिए भोजन में इन सामग्रियों का करें उपयोग

डॉ. शुक्ला ने बताया कि मधुमेह के बचाव में प्रमुख भूमिका संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता की है, इसलिए इन अनुशासनों का पालन आवश्यक है। आयुर्वेद पद्धति के अनुसार मधुमेह रोग से बचाव के लिए व्यक्ति को अपने भोजन में जौ-बाजरा, गेंहू के दरदरे मिश्रित आटे की रोटी, गाय का घी, जौ और चने की सत्तू, मेथी, सोंठ या अदरक, दाल चीनी, हल्दी, लहसुन समेत अन्य मसालों का उपयोग, पुराना चांवल, सांठी चांवल, सप्ताह में दो-तीन दिन करेला, मुनगा सहित कटु स्वाद वाले सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा जामुन, अमरूद, आंवला, अंजीर जैसे फल का सेवन लाभदायक होता है। इस रोग से बचाव के लिए मांसाहार, शराब, धूम्रपान और अत्यधिक मीठा पदार्थो का सेवन वर्जित है।

नियमित व्यायाम से दूर रहेगा मधुमेह

मधुमेह से बचने के लिए आयुर्वेद में सही खान-पान के साथ ही नियमित व्यायाम, खेल, योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करते हुए मानसिक तनाव से बचने का परामर्श दिया जाता है। इस पद्धति में भोजन के तुरंत बाद शयन या आराम को वर्जित करते हुए हल्का चहलकदमी करने के साथ भोजन के बाद वज्रासन भी लाभदायक बताया गया है। मधुमेह से बचाव में सुप्त बद्धकोणासन, पश्चिमोत्तानासन, अधोमुख शवासन, हलासन जैसे योगाभ्यास सहायक होते हैं। मधुमेह से पीड़ित रोगियों को इस रोग के प्रति अनुशासित होने की भी जरूरत होती है। उन्हें अपने चिकित्सक के निरंतर संपर्क में रहते हुए उनके परामर्श के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए।

Advertisement Sushasan Divas Advertisement Mohan Chandrakar Chhattisgarh Tourism Chhattisgarh Tourism
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.