Media24Media.com: मधुमेह

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अनियमित दिनचर्या और खान-पान की आदतों से मधुमेह का खतरा, जानिए कैसे करे बचाव

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रायपुर। आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में खुद की सेहत का ख्याल रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। आधुनिक जीवन-शैली, अनियमित दिनचर्या और खान-पान की खराब आदतों के कारण कम उम्र में ही कई तरह की बीमारियां घेर रही हैं। डायबिटीज यानि मधुमेह भी तेजी से बढ़ रही इसी तरह की बीमारी है। यह न केवल उम्रदराजों को, बल्कि युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में ले रही है। संयमित खान-पान और स्वस्थ जीवन-शैली अपनाकर इससे बचा जा सकता है। मधुमेह के बारे में लोगों को जागरूक और शिक्षित करने पूरी दुनिया में हर साल 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है।



राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में गैर-संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न ने बताया कि मधुमेह या डायबिटीज हमें तब होता है जब हमारे शरीर के हार्मोन इंसुलिन या कहें तो रक्त शर्करा या ग्लूकोज की मात्रा हमारे शरीर के साथ सही तालमेल नहीं बिठा पाती है। ज्यादातर खराब जीवन-शैली के कारण यह होता है। मधुमेह दो प्रकार का होता है। टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में पाया जाता है। इसमें शरीर में इंसुलिन की सेंसिटिविटी (Sensitivity) खत्म हो जाती है जिससे शरीर का मेटाबॉलिक सिस्टम खराब हो जाता है और शुगर का लेवल बढ़ने लगता है।

डॉ. नवरत्न ने बताया कि टाइप-2 डायबिटीज अधिकांशतः 40 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों में होता है। इसमें शरीर को जितनी इंसुलिन की आवश्यकता होती है, इंसुलिन की उतनी मात्रा शरीर को नहीं मिल पाती है। गर्भावस्था के दौरान भी मधुमेह हो जाता है जो कि एक सीमित समय के लिए होता है और समय के साथ वह ठीक भी हो जाता है। परिवार में माता-पिता या भाई-बहन में किसी को मधुमेह है तो अन्य रक्त संबंधियों के भी इससे पीड़ित होने की आशंका होती है।  प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर्स व सब-सेंटर्स में एनसीडी क्लीनिक के माध्यम से 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों की नियमित रूप से मधुमेह की निःशुल्क जांच की जा रही है।

मधुमेह के लक्षण

ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, वजन का असामान्य रूप से ज्यादा या कम होना, थकान या कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, आंखों की रोशनी का कमजोर होना या धुंधला दिखना, हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन, बार-बार पेशाब होना या पेशाब का संक्रमण होना, चोट या घाव का देर से भरना या ठीक न होना मधुमेह के सामान्य लक्षण हैं। इस तरह के लक्षण दिखाई देने या महसूस होने पर अपने निकटतम शासकीय स्वास्थ्य केंद्र जाकर मधुमेह की निःशुल्क जांच अवश्य कराएं।

मधुमेह से बचाव

मधुमेह से बचाव के लिए नियमित व्यायाम या योग जरुर करना चाहिए। समय पर संतुलित भोजन मधुमेह से बचाव के लिए बहुत आवश्यक है। अधिक घी-तेल वाले भोजन का सेवन करने से भी मधुमेह का खतरा बढ़ता है। भोजन में अनाज, दालें, हरी-पत्तेदार सब्जियां, मौसमी सब्जी, ताज़े मौसमी फल, दूध व दही से बनी चीजों का सही मात्रा में सेवन करना चाहिए। रेशेदार भोजन भी पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए। रोजाना 10-12 गिलास पानी जरुर पिएं। अपने भोजन में अंकुरित अनाज को शामिल करें। शराब से परहेज करें।

अनुशासित खान-पान और नियमित व्यायाम से दूर रहेगा मधुमेह

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रायपुर: मधुमेह यानी डायबिटीज आज जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनते जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि इस रोग से न सिर्फ शहरी जीवन जीने वाले बुजुर्ग, युवा, किशोर और महिलाएं बड़ी तेजी से प्रभावित हो रही हैं, बल्कि शारीरिक श्रम करने वाले और नियमित दिनचर्या अपनाने वाले ग्रामीणों को भी यह अपनी गिरफ्त में लेते जा रहा है। मोटापा, मानसिक तनाव और नियमित व्यायाम या योग के अभाव समेत अनिद्रा, अनियमित दिनचर्या, अनियंत्रित खानपान जिसमें ज्यादा घी, तेल व वसायुक्त खाद्य पदार्थो जैसे जंक या फास्ट फूड, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बा बंद भोजन, मांसाहार, धूम्रपान और शराब का सेवन मधुमेह के मुख्य कारण हैं। 

आज के दौर में अधिकांश बच्चे, किशोर और युवा इन खान-पानों और जीवन शैली को अपना रहे हैं, जिसके फलस्वरूप वे तेजी से मधुमेह से ग्रस्त हो रहे हैं। शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आयुर्वेद सिर्फ चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि पूरी जीवन पद्धति है। इसे अपनाकर जीवन शैली से जुड़े अनेक रोगों से बचा जा सकता है। आधुनिक जीवन शैली से जुड़े इस रोग को अनुवांशिक भी माना गया है। लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में बताए गए दिनचर्या, ऋतुचर्या और खान-पान अपनाकर तथा नियमित व्यायाम और योग से इस बीमारी से बचाव संभव है। 

मधुमेह खुद में एक गंभीर बीमारी 

असल में मधुमेह स्वयं में एक गंभीर बीमारी होने के साथ-साथ अनेक रोगों का कारण और रोगमुक्ति की प्रक्रिया को धीमा करने वाला कारक भी है। इसलिए इस रोग के शुरुआती लक्षण, बचाव और नियंत्रण के उपायों के प्रति सतर्क होना जरूरी है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि आमतौर पर मधुमेह के शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा भूख या प्यास लगना या बार-बार पेशाब होना, थकान, वजन घटना, नजर का धुंधलापन, शरीर में चिपचिपाहट, हाथ-पैर के तलुओं में जलन सहित यौनांगों में खुजली, जलन या घाव के लक्षण मिलते हैं। किसी व्यक्ति को जब भी यह लक्षण मिले तो बिना विलंब किए उसे तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

मधुमेह से बचाव के लिए भोजन में इन सामग्रियों का करें उपयोग

डॉ. शुक्ला ने बताया कि मधुमेह के बचाव में प्रमुख भूमिका संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता की है, इसलिए इन अनुशासनों का पालन आवश्यक है। आयुर्वेद पद्धति के अनुसार मधुमेह रोग से बचाव के लिए व्यक्ति को अपने भोजन में जौ-बाजरा, गेंहू के दरदरे मिश्रित आटे की रोटी, गाय का घी, जौ और चने की सत्तू, मेथी, सोंठ या अदरक, दाल चीनी, हल्दी, लहसुन समेत अन्य मसालों का उपयोग, पुराना चांवल, सांठी चांवल, सप्ताह में दो-तीन दिन करेला, मुनगा सहित कटु स्वाद वाले सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा जामुन, अमरूद, आंवला, अंजीर जैसे फल का सेवन लाभदायक होता है। इस रोग से बचाव के लिए मांसाहार, शराब, धूम्रपान और अत्यधिक मीठा पदार्थो का सेवन वर्जित है।

नियमित व्यायाम से दूर रहेगा मधुमेह

मधुमेह से बचने के लिए आयुर्वेद में सही खान-पान के साथ ही नियमित व्यायाम, खेल, योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करते हुए मानसिक तनाव से बचने का परामर्श दिया जाता है। इस पद्धति में भोजन के तुरंत बाद शयन या आराम को वर्जित करते हुए हल्का चहलकदमी करने के साथ भोजन के बाद वज्रासन भी लाभदायक बताया गया है। मधुमेह से बचाव में सुप्त बद्धकोणासन, पश्चिमोत्तानासन, अधोमुख शवासन, हलासन जैसे योगाभ्यास सहायक होते हैं। मधुमेह से पीड़ित रोगियों को इस रोग के प्रति अनुशासित होने की भी जरूरत होती है। उन्हें अपने चिकित्सक के निरंतर संपर्क में रहते हुए उनके परामर्श के अनुसार दवाइयां लेनी चाहिए।

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