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Biranpur Violence: भुनेश्वर साहू हत्याकांड की होगी CBI जांच शुरू, डिप्टी CM विजय शर्मा ने की थी सिफारिश

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 Biranpur Violence:  छत्‍तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा क्षेत्र के बिरनपुर गांव में साल भर पहले 8 अप्रैल 2023 को भुनेश्वर साहू हत्याकांड की सीबीआई जांच शुरू हो गई है।  आगामी में महीने की शुरुआती हफ्ते में सीबीआई की टीम बिरनपुर आएगी। बिरनपुर में जिहादी मानसिकता के कुछ लोगों ने बेहद जिंदगी से भुवनेश्वर साहू की खान पारा मॉब लिंचिंग करते हुए बेरहमी से हत्या कर दी थी.


भुनेश्वर साहू हत्याकांड के दो दिन बाद दिन बाद 10 अप्रैल को पिता पुत्र रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की लाश मिली थी। शक्तिघाट इलाके में पिता-पुत्र बकरी चराने के लिए गांव के पास के मैदान में गए थे लेकिन बेहद संदिग्ध हालातो में 11 अप्रैल को उनकी लाश मिली। 

भुनेश्वर साहू हत्याकांड के दो दिन बाद दिन बाद 10 अप्रैल को पिता पुत्र रहीम मोहम्मद और ईदुल मोहम्मद की लाश मिली थी। शक्तिघाट इलाके में पिता-पुत्र बकरी चराने के लिए गांव के पास के मैदान में गए थे लेकिन बेहद संदिग्ध हालातो में 11 अप्रैल को उनकी लाश मिली ! मृतक भुनेश्वर के पिता अब विधायक

मृतक भुनेश्वर साहू के पिता को बीजेपी ने साजा विधानसभा से टिकट दिया था। यहां से ईश्वर साहू ने कांग्रेस के दिग्गज नेता रविंद्र चौबे को हराया और विधायक बन गए। ईश्वर साहू ने ही फरवरी में विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए कहा था कि, भुनेश्वर साहू के हत्यारों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसके बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने छत्‍तीसगढ़ विधानसभा में CBI जांच की घोषणा की थी।

इस पूरे मामले में तकी कवरेज सरकार पर मुस्लिम चुस्तीकरण के आरोप लगे थे ! तब सरकार के मंत्री और स्थानीय विधायक रविंद्र चौबे इस घटना से इतना घबरा गए थे कि वह मृतक परिवार के घर सांत्वना देने भी नहीं जा सके ! भुनेश्वर साहू हत्याकांड के बाद आरोप लगा कि,पुलिस के संरक्षण में जानबूझकर दो मुस्लिम पिता पुत्र की हत्या सिर्फ इसलिए करवाई गई ताकि हिंदू वोटो का ध्रुवीकरण नहीं हो सके। 

Odisha Train Accident मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, रेलवे के 3 अधिकारी अरेस्ट, हत्या का केस दर्ज

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 Odisha Train Accident : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI ) ने शुक्रवार को सबूत मिटाने और गैर इरादतन हत्या से जुड़ी धाराओं के तहत 3 रेलवे कर्मियों को गिरफ्तार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों रेलवे अधिकारियों की पहचान अरुण कुमार महंत (सीनियर सेक्शन इंजीनियर), मोहम्मद अमीर खान (सेक्शन इंजीनियर) और पप्पू कुमार (तकनीशियन) के रूप में की गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की यह कार्रवाई बालसोर ट्रेन दुर्घटना के सिलसिले में की गई है जिसमें 290 से अधिक यात्रियों की जान चली गई थी और 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 


सीनियर सेक्शन इंजीनियर अरुण कुमार मोहंता, सेक्शन इंजीनियर मोहम्मद अमीर खान और तकनीशियन पप्पू कुमार को सीआरपीसी की धारा 304 और 201 के तहत गिरफ्तार किया गया है। बालासोर ट्रेन त्रासदी की जांच से अब पुष्टि हो गई है कि सिग्नललैंड दूरसंचार विभाग के कर्मचारियों की गलती और लापरवाही के कारण 2 जून को दुखद रेल दुर्घटना हुई थी। एक महीने की लंबी जांच के बाद अब सीबीआई ने अपने मामले में गैर इरादतन हत्या और सबूत नष्ट करने से जुड़ी दो कड़ी धाराएं जोड़ी हैं। एजेंसी ने पिछले महीने दायर की गई अपनी पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में इन धाराओं को लागू नहीं किया था, जो ओडिशा पुलिस के मामले का फिर से पंजीकरण था।

यह गिरफ्तारी रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा बुधवार को बालासोर दुर्घटना पर रेलवे बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंपने के कुछ दिनों बाद हुई। जांच में दो ख़राब मरम्मत कार्यों के कारण दोषपूर्ण सिग्नलिंग पाई गई, जिनमें से एक 2018 में और दुर्घटना से एक घंटे पहले हुआ था, जिसके पीछे कोरोमंडल एक्सप्रेस का दूसरे ट्रैक पर एक मालगाड़ी के साथ टकराव का कारण था। हालांकि, मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, रेलवे ने बालासोर ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना पर सीआरएस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मामले में चल रही सीबीआई की जांच पर कोई "प्रभाव या हस्तक्षेप" न हो।






Manipur Violence : हिंसा की जांच के लिए CBI ने किया SIT का गठन , 6 FIR दर्ज

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 Manipur Violence : केंद्रीय जांच ब्यूरो ने छह प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को फिर से दर्ज किया है और मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक डीआईजी-रैंक अधिकारी के तहत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसमें करीब 100 लोगों की जान चली गई थी। एसआईटी में 10 अधिकारी होते हैं।


पूर्वोत्तर राज्य की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छह एफआईआर की जांच के लिए सीबीआई जांच की घोषणा की थी। पांच कथित आपराधिक साजिश पर और एक मणिपुर में हिंसा के पीछे सामान्य साजिश पर। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र के माध्यम से भेजे गए राज्य के एक संदर्भ पर कार्रवाई करते हुए, सीबीआई ने एसआईटी का गठन किया और मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली। शाह राज्य में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने और 3 मई से मणिपुर को प्रभावित करने वाली उथल-पुथल को हल करने के लिए युद्धरत कुकी और मेइती को एक साथ लाने के लिए मणिपुर की चार दिवसीय यात्रा पर थे।


सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक चुराचंदपुर में शाह ने -कुकी नागरिक समाज संगठनों के नेताओं, जनजाति प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों के साथ बंद कमरे में बैठकें कीं। नागरिक समाज संगठन के नेताओं, छात्र निकायों, महिला समूहों और जनजाति नेताओं के साथ था उनकी बातचीत का पहला दौर, जो लगभग एक घंटे तक चला। 



छत्तीसगढ़ में CBI की एंट्री - 4 बड़े कारोबारियों के निवास पर ईडी\सीबीआई के रेड

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 भिलाई। दुर्ग के पद्नाभपुर इलाके में सीबीआई ने सीए कोठारी के यहां दबिश दी है। सीबीआई ने सुबह- सुबह कोठरी के यहां दस्तक दी है। 20 की संख्या में अधिकारी कोठरी निवास पहुंचे हैं। निवास के बाहर भारी संख्या में फोर्स की तैनाती की गई है।


पूरा मामला हवाला कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 56 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई है। इसी लेकर वहां केस भी दर्ज है। तब से CA कोठारी फरार चल रहे थे। यह कैसे तीन महीने पहले ही सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था। जिसके बाद आज सुबह सीबीआई की टीम ने कोठरी निवास पर दबिश दी है।

हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। CBI की टीम ने पद्मनाभपुर मिनी स्टेडियम के सामने सुरेश कोठारी के एच160 निवास में जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक अनियम‍ितता को लेकर दुर्ग में FIR भी कराई जा चुकी है।

ज्ञातव्य हो कि होटल ग्रैंड इम्पीरिया में सप्ताह भर पहले ही शराब घोटाले के किंग पिन कहे जा रहे अनवर ढेबर को ईडी ने गिरफ्तार किया था, इसी संबंध में ईडी ने होरा पुत्र से भी पूछताछ की थी और आज घर में दबिश दी है। ज्ञातव्य हो कि होटल कारोबारी होरा एवं मनदीप के यहां पूर्व में आयकर छापा मार चुकी है।


शराब घोटाला में CBI का एक्शन डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को किया गिरफ्तार

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सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में रविवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से दूसरे दौर की पूछताछ के बाद शाम को गिरफ्तार कर लिया। वहीं मनीष सिसोदिया को सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इससे पहले राज घाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद सिसोदिया भारी-भरकम बैरिकेड्स वाले सीबीआई कार्यालय पहुंचे थे। सीबीआई की प्राथमिकी में आरोपी नंबर एक सिसोदिया से पहले 17 अक्टूबर को पूछताछ की गई थी।


क्यों हुई मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी?

मनीष सिसोदिया पर सबूतों को नष्ट करने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं इस मामले में एक ब्यूरोक्रैट ने सिसोदिया के खिलाफ बयान भी दिया है। उसके बयान को आईपीसी की धारा 164 तहत दर्ज किया गया है। सिसोदिया पर आईपीसी की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 477 -A (धोखाधड़ी करने का इरादा) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई को इस मामले में सिसोदिया के खिलाफ कई डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं। इसमें वॉट्सएप चैट से लेकर कई फोन के आईएमईआई नंबर मिले हैं जिन्हें सिसोदिया इस्तेमाल कर रहे थे। इन सबूतों को पूछताछ के दौरान सिसोदिया के सामने भी रखा गया जिनका वह जवाब नहीं दे पाए।

पॉलिसी में क्यों किया गया बदलाव?

सीबीआई ने सिसोदिया से जब पूछा कि शराब नीति में आखिर बदलाव क्यों किया गया और इनकी जरूरत क्यों पड़ी तो इसका वह जवाब नहीं दे पाए। शराब नीति में कुछ ऐसे प्रावधान जोड़े गए थे जो पहले मसौदे का हिस्सा ही नहीं थे। कई प्रावधानों को लेकर तो ना नीति को लागू करने से पहले कोई चर्चा की गई और ना ही फाइलों में इसका कोई रिकॉर्ड मिला।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि दिल्ली सरकार 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति लेकर आई थी। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद इसे कुछ समय बाद रद्द कर दिया गया था। इस नीति में सरकार ने शराब की बिक्री से खुद को बाहर कर लिया था और केवल निजी दुकानों को ही इसे बेचने की इजाजत दी गई। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। आबकारी विभाग मनीष सिसोदिया के पास है। इसलिए इस पॉलिसी के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। इस नीति के तहत दिल्ली में शराब की होम डिलीवरी और दुकानों को सुबह 3 बजे तक खुले रहने की भी अनुमति दी गई। इस नीति में लाइसेंसधारियों को शराब पर असीमित डिस्काउंट की भी छूट दी गई। जिस एल-1 लाइसेंस के लिए पहले ठेकेदारों को 25 लाख देना पड़ता था, नई शराब नीति लागू होने के बाद उसके लिए ठेकेदारों को पांच करोड़ रुपये चुकाने पड़े। नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप है।

मनीष सिसोदिया कि गिरफ्तारी के बाद आप के राज्यसभा सांसद ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने तानाशाही की हद कर दी। अडानी के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल से बीजेपी को डर लगता है। उसके मॉडल से डर लगता है। मोदी जी आपकी तानाशाही का अंत जरूर होगा।

इससे पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि मनीष सिसोदिया को रविवार को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आम आदमी पार्टी की तरफ से कहा गया था कि मनीष सिसोदिया की तरफ से जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। सीबीआई की तरफ से कहा गया है कि मनीष सिसोदिया जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, इस कारण उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा। शनिवार को आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा था कि मनीष सिसोदिया सीबीआई मुख्यालय जाएंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी आज तक एक रुपये का भी भ्रष्टाचार साबित नहीं कर पाई है।


दिल्ली शराब घोटाला : CBI ने KCR की बेटी का पूर्व CA दिल्ली शराब नीति मामले में गिरफ़्तार

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Liquor Scam । दिल्ली के कथित शराब घोटाले जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन  ने हैदराबाद  के चार्टर्ड अकाउंटेंड बुचिबाबू गोरंटला  को गिरफ्तार  कर लिया है। दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी को बनाने, लागू कराने में इनकी भूमिका बताई जाती है। हैदराबाद स्थित थोक और खुदरा लाइसेंसधारियों और उनके लाभार्थी मालिकों को गलत लाभ पहुंचाने के आरोप में गोरंटला को गिरफ्तार किया गया है।


तेलंगाना के गोरंटला पहले तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता के साथ काम करते थे। उन्हें सीबीआई ने राष्ट्रीय राजधानी में तलब किया था। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बुचिबाबू को मंगलवार शाम को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे और तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। सीबीआई बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश करेगी। सीबीआई ने तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता से भी दिसंबर में पूछताछ की थी।

सीबीआई ने कहा कि के कविता के पूर्व ऑडिटर बुची बाबू ने मामले में ‘साउथ ग्रुप’ का प्रतिनिधित्व किया। प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई ने दावा किया है कि ‘साउथ ग्रुप’ के नाम से जानी जाने वाली एक लॉबी की मिलीभगत से दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी को बदलकर घोटाला किया गया।

दिल्ली सरकार पर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाकर रिश्वत लेने के आरोपों के बाद एलजी वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। इसके बाद ‘आप’ सरकार ने विवादित एक्साइज पॉलिसी को वापस ले लिया था। इस केस में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी भी इस मामले की जांच कर रही है। हाल ही में ईडी की ओर से कोर्ट में दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का भी नाम लिया गया है। आप संयोजक की आरोपियों के साथ मिलीभगत का दावा किया गया है।

 

150 रुपये की घूस मामले में 32 साल बाद डेढ़ साल की सजा, शिकायतकर्ता की हो चुकी मौत

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लखनऊ :  150 रुपये की घूस 32 साल चला मुकदमा  और अब 87 साल की उम्र में डेढ़ साल की सजा। सीबीआई की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को रेलवे के सेवानिवृत्त क्लर्क राम नारायण वर्मा को दो अलग-अलग धाराओं में 150 रुपये की घूस के मामले में डेढ़ साल की जेल और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी ने यह घूस मेडिकल प्रमाण पत्र  बनाने के लिए ली थी। इतने दिन की सुनवाई में फरियादी की भी मौत हो चुकी है।


आरोपी राम नारायण वर्मा 1991 में लखनऊ के उत्तर रेलवे अस्पताल में क्लर्क पद पर तैनात था। उसने सेवानिवृत्त कर्मचारी इंजन ड्राइवर लोको फोरमैन रामकुमार तिवारी से मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर 150 रुपये की घूस मांगी थी। शिकायतकर्ता काफी गरीब था उसने किसी तरह 7 अगस्त 1991 को 50 रुपये का इंतजाम कर आरोपी को दिए। लेकिन, आरोपी ने सौ रुपये चुकाए बिना प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया। इससे परेशान पीड़ित रामकुमार तिवारी ने मामले की शिकायत तात्कालिक सीबीआई पुलिस अधीक्षक से की।

पुलिस अधीक्षक ने टीम गठित कर शिकायतकर्ता रामकुमार तिवारी को 50-50 रुपये के दो नोट दिए। कहा कि वह घूस मांगने वाले बाबू राज नारायण वर्मा को पास के ढाबे पर बुलाए। ढाबे पर सीबीआई की टीम ने राज नारायण वर्मा को मौके से घूस के बचे सौ रुपये लेते धर दबोचा था।

शिकायतकर्ता की हो चुकी मौत

मामले की सुनवाई के दौरान ही घूस लेने की शिकायत करने वाले रामकुमार तिवारी की मौत भी हो चुकी है। इस बीच घूस लेने के आरोपी की तरफ से हाईकोर्ट में इस मामले को शीघ्र निस्तारित कराए जाने की अपील भी दाखिल की गयी। इस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष कोर्ट को छह माह में मामले का निस्तारण कर केस खत्म करने का निर्देश भी दिया था। अदालत ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर इस मुकदमे का विचारण मात्र 35 दिनों की सुनवाई में किया है।

अदालत की दलील…

सीबीआई अदालत पांच के एडीजे पश्चिम अजय विक्रम सिंह ने अपने निर्णय में कहा है कि आरोपी की आयु एवं उसके पास से बरामद रिश्वत की राशि को देखा जाए तो यह कोई बहुत बड़ा मामला नहीं है। परंतु 32 साल पहले 100 रुपये की राशि भी उस जरूरतमंद के लिए बहुत अधिक होती थी, जिसे पेंशन के रूप में मात्र 382 रुपये मिलते हों। अदालत ने कहा है कि यदि आरोपी को उसके द्वारा किए गए कृत्य के लिए दंडित नहीं किया जाएगा तो समाज में उसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।


सीमेंट और स्टील घोटाला : NTPC लारा में जांच के लिए पहुंची CBI

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रायगढ़. नौ वर्ष पूर्व एनटीपीसी लारा में हुए सीमेंट और स्टील घोटाला मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार की सीबीआई की टीम एनटीपीसी लारा पहुंची और विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की।





कयास लगाया जा रहा है कि इस अफरा-तफरी के मामले में कई सफेदपोश चेहरे भी सामने आएंगे। जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर पुसौर क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी लारा में सीबीआई की टीम पहुंची और अधिकारियों से पूछताछ की।





बताया जाता है कि करीब 9 वर्ष पूर्व 2012 के आसपास कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर कंपनी के सेंट्रल स्टोर लारा से भारी मात्रा में सीमेंट व स्टील को गायब कर दिया गया। यह भी जानकारी मिली है कि उस दौरान कार्यरत अधिकारी जो वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनसे भी पूछताछ की जा रही है।





एके मिश्रा एनटीपीसी, लारा के पीआरओ ने बताया कि एनटीपीसी ने स्वयं सीमेंट और स्टील घोटाला मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। फिलहाल जांच जारी है।


CBI ने एक करोड़ के रिश्वत मामले में रेलवे अफसर समेत 3 को किया गिरफ्तार

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दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1985 के एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी महेंद्र सिंह चौहान को 1 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा है. महेंद्र सिंह के साथ दो अन्य लोगों को भी पकड़ा गया है. इनके पास से एक करोड़ रुपये भी बरामद कर लिया गया है.





केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी महेंद्र सिंह चौहान को 1 करोड़ रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा है. महेंद्र सिंह के साथ दो अन्य लोगों को भी पकड़ा गया है. इनके पास से एक करोड़ रुपये भी बरामद कर लिया गया है. 1985 बैच के अधिकारी महेंद्र सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.





सीबीआई सूत्रों ने बताया कि रेलवे में हाल के दिनों में इतनी बड़ी मात्रा में रिश्तव लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने का यह बड़ा मामला है. अधिकारी नॉर्दन ईस्टर्न फ्रंटियर रेलवेज में काम दिलाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था. CBI ने पांच राज्यों में 20 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की है.





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मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई ने 1 करोड़ रुपये का रिश्वत लेने के आरोप में महेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है. महेंद्र सिंह चौहान पर नॉर्दन ईस्टर्न फ्रंटियर रेलवेज में एक प्राइवेट कंपनी को काम दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है.





जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है वो महेंद्र सिंह चौहान के नाम पर रिश्वत ले रहे थे. सीबीआई सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि इसकी जानकारी मिली थी कि महेंद्र सिंह चौहान पूर्वोत्तर रेलवे में काम दिलाने के नाम पर एक कंपनी से 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांग रहा है. बाद में जाल बिछाया गया. महेंद्र सिंह चौहान के दो कथित सहयोगी जब रिश्वत ले रहे थे, उसी समय सीबीआई के अफसर मौके पर पहुंच गए और उन्हें धर दबोचा. सीबीआई अफसरों को संदेह है कि महेंद्र सिंह चौहान ने पहले भी रिश्वत ली होगी.


देश के सभी थानों में लगाएं जाएंगे CCTV कैमरे , SC निर्देश

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उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केन्द्र को निर्देश दिया कि गिरफ्तार करने और पूछताछ करने का अधिकार रखने वाले केन्द्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और राष्ट्रीय जांच एजेन्सी सहित सभी जांच एजेन्सियों के कार्यालयों में CCTV कैमरे लगाये जायें.





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न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरिमन, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा कि राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक थाने में प्रवेश और निकासी के स्थान, मुख्य प्रवेश द्वार, हवालात, सभी गलियारों, लॉबी, स्वागत कक्ष क्षेत्र और हवालात कक्ष के बाहर के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगे हों।





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शीर्ष अदालत ने इससे पहले मानव अधिकारों के हनन पर अंकुश लगाने के लिये थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था. न्यायालय ने कहा कि नार्कोटिक कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व गुप्तचर निदेशालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालयों सहित सभी जांच एजेन्सियों के उन सारे कार्यलयों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाये जायें जिनमे पूछताछ होती है और आरोपियों को रखा जाता है.





न्यायालय ने कहा कि CCTV कैमरे प्रणाली में नाइट विजन सुविधा (Night vision facility)के साथ ही आडियो और वीडियो की फुटेज की व्यवस्था होनी चाहिए और केन्द्र तथा राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिये ऐसी प्रणाली खरीदना अनिवार्य होगा जिनमें कम से कम एक साल और इससे ज्यादा समय तक CCTV कैमरे के आंकड़ों को संग्रहित कर रखने की सुविधा हो.


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