Media24Media.com: Women Commission hearing

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आवेदिका को ब्याज का लालच देकर ज्वेलर्स ने ज्वेलरी देने से किया इनकार

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए सुनवाई की, जिसमें से एक प्रकरण की सुनवाई में आवेदिका ने बताया कि लगभग 1 करोड़ रुपये से ऊपर का सोने चांदी का सामान अनावेदक ने लिया है। उसकी FIR जिला राजनांदगांव के कोतवाली थाना में साल 2020 में कराया है, जिसमें अनावेदक न्यायालय में उपस्थित नहीं होता। 

मेरे पास अपने जीवन यापन के लिए कोई धनराशि नहीं है। आयोग के समक्ष अनावेदक ने बताया कि उसकी ज्वेलर्स की दुकान में उसका भाई बैठता था, जो भी लेनदेन है वह मेरे भाई ने किया है। मेरे भाई के खिलाफ मैं कार्रवाई करूंगा। क्योंकि मैं डेढ़ साल से कैंसर का इलाज करवाने के कारण बाहर था। इस कारण से मैं किसी प्रकार से भाई के खिलाफ कार्रवाई नहीं करा पाया हूं। आज मेरे पास कोई धनराशि नहीं है। अनावेदक ने स्वीकार किया कि ज्वेलरी दुकान मेरी जरूर थी। मैं शैक्षणिक संस्थान चलाता था। 

दुकान पर मेरा भाई बैठता था। आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ लगभग एक करोड़ रुपये के बिस्किट और जेवर दिलाए जाने का निवेदन किया है, जिसमें दस्तावेज भी संलग्न है और इस प्रकरण को महज इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि अनावेदक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। ये प्रकरण आवेदिका के जीवनभर की जमा पूंजी को धोखे से हड़पने से संबंधित है। इसके साथ ही अनावेदक के कथन से यह स्पष्ट है कि अनावेदक अपने भाई के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है, जिसमें दोनों भाई का मिलीभगत होना प्रतीत होता है। 

सुनवाई में अनावेदक ने आने से किया इंकार 

आयोग ने आवेदिका को, अनावेदक के भाई  को भी पक्षकार बनाने के निर्देशित किया गया है। साथ ही अगर अन्य कोई आवेदिका इस ज्वेलरी में ठगी का शिकार हुई हो तो वे भी आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती है। इस प्रकरण को आगामी सुनवाई में रखा गया है। एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने पिछली सुनवाई में पीएचई के कार्यपालन अभियंता  का नाम लिया था, आज की सुनवाई में कार्यपालन अभियंता आयोग में समस्त दस्तावेज लेकर उपस्थित हुए। सुनवाई में अनावेदक ने आने से इंकार किया है। पीएचई अधिकारी ने आयोग को बताया कि अनावेदक ने श्रम न्यायालय के उपादान आदेश दिनांक 16 जुलाई 2021 प्रस्तुत किया था, जिसके पालन में लगभग 7 लाख रूपये उसके खाते में भेज दिया गया था। जबकि उनके अभिलेख में यह दर्ज था कि उनके पिता की दो संतान है। 

अनुकंपा नियुक्ति के तहत प्रोबेशन पिरियड

न्यायालयीन आदेश के कारण अनावेदक को राशि दी गई थी। वर्तमान में GIS और DPF खाते में लगभग 4 लाख रूपये राशि जमा है, जिसे अब तक नहीं दिया गया है और अनावेदक वर्तमान में अनुकंपा नियुक्ति के तहत प्रोबेशन पिरियड पर है। आयोग के द्वारा अधिकारी कार्यपालन अभियंता पीएचई में कार्यरत है। उन्हें निर्देशित किया जाता है कि वह अनावेदक को शासकीय शोकॉस नोटिस भेजकर 7 लाख रूपये जमा कराने और श्रम न्यायालय के समस्त दस्तावेज और फाइल की प्रमाणित प्रतिलिपि भी जमा कराने के निर्देश दिए हैं। अपने स्तर पर श्रम न्यायालय के अभिलेखों की बारिकी से जांच कर आवेदिका की मदद कर समस्त दस्तावेजों की प्रतिलिपि आयोग की सुनवाई के समक्ष प्रस्तुत करने कहा गया। इससे इस प्रकरण का निराकरण किया जा सकें।

दोनों पक्षों की समस्या का स्थायी निदान 

इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदिका वर्तमान में 8 माह की गर्भवती है। अनावेदक नगर निगम रायपुर में कार्य करता है, जहां उसे 10 हजार प्रतिमाह मिलता है। आयोग द्वारा समझाइश दिए जाने पर 5 हजार रूपये प्रतिमाह देना स्वीकार किया। आगामी दिनांक को उभय पक्ष को उपस्थित होने कहा गया, जिसमें अनावेदक की पहली पत्नी को आयोग से फोन कर सूचना दी जाएगी, जिससे कि इस प्रकरण  में दोनों पक्षों की समस्या का स्थायी निदान किया जा सकेगा।

लड़ाई को लेकर दोनों पक्षों को समझाइश

एक अन्य प्रकरण में आवेदिकाओं ने अनावेदिका के विरुद्ध अलग अलग शिकायत किए हैं। दोनों पक्ष स्व सहायता समूह में रोजगार करती हैं। आपसी वर्चस्व की लड़ाई को लेकर दोनों पक्षों को समझाइश दिया गया है। अपने कार्य पर ही ध्यान केंद्रित करें और एक दूसरे के कार्य पर हस्तक्षेप ना करें। पूर्व में किए गए कार्यों के कारण हुए मतभेद को समाप्त करते हुए दोनो पक्षों ने एक दूसरे से आयोग के समक्ष माफी मांगे हैं। भविष्य में एक दूसरे के खिलाफ दुर्व्यवहार बयानबाजी न करने की बात स्वीकार किये हैं।इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।

न्यायालय में तलाक की प्रकिया करने के निर्देश

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अपनी बहू को ले जाने के आवेदन आयोग में दिया था, जिसमें अनावेदिका बहु अपने पति के साथ रहने से इंकार कर रही है। आवेदिका के पुत्र और अनावेदिका बहु दोनों आर्य समाज में विवाह किया। जिसके एक दिन बाद ही अनावेदिका अपने पिता के घर चली गई थी। अब अनावेदिका बहु तलाक चाहती है। आयोग द्वारा दोनो पक्षों को न्यायालय में तलाक की प्रकिया करने के निर्देश के साथ इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। 

पति पत्नी के मध्य लिखित समझौता

एक अन्य प्रकरण में पति पत्नी के मध्य लिखित समझौता हुआ। दोनों एक दूसरे के शर्तों को मानने सहमति दी है। आयोग की समझाइश दिए जाने पर पति पत्नी को बीस हजार रुपये देने तैयार हुआ। दोनों के मध्य लिखित समझौता स्टाम्प पर आगामी दिनांक को लिखाया जाएगा। प्रकरण को आगामी दिनांक में इस प्रकरण का निराकरण किया जाएगा। 

दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने पर स्पष्ट हुआ

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को अपने नशेड़ी पति के ऊपर शक होने के कारण एक अन्य महिला के विरुद्ध आयोग में शिकायत की है।  सुनवाई में दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने पर स्पष्ट हुआ कि अनावेदिका के  पिता और भाई का ऑटो पार्ट्स का व्यवसाय करते हैं, जिसमें आवेदिका का पति शॉकब रिपेयर का काम करता है और सामान अनावेदिका के दुकान से लेता है और उस दुकान का उधारी पैसा भी अभी तक नही दिया है। आवेदिका तीन महीने से अपने मायके में रह रही है उसे शक है कि पति का नाजायज संबंध है जो कि पूर्णत निराधार लगता है। ऐसे निराधार शक के आधार पर किसी महिला को अपमानित करना उचित नहीं है और आयोग किसी महिला को अपमानित नहीं कर सकती। 

आयोग ने दी पति पत्नी को समझाइश

आयोग में पति पत्नी को समझाइश दिया गया अगर इस प्रकरण पर पुन शिकायत मिलने पर पुन सुनवाई किया जा सकेगा।  इस प्रकरण को 6 माह की निगरानी में रखते हुए नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में उभय पक्षों के मध्य पिछली सुनवाई में 50 हजार देने की बात हुई थी, लेकिन 6 माह तक एक भी रूपये आवेदिका को नहीं दिया है। आवेदिका का कथन है कि उसने डेढ़ लाख रूपये की बाइक खरीदकर अनावेदक को दिया है उसकी किस्त भी चुकाई है। अनावेदक की गाड़ी को आयोग में जमा किया गया है। आगामी दिनांक को आवेदिका को 50 हजार रुपये देगा और अपनी गाड़ी वापस ले जाएगा। पैसा नहीं देने पर गाड़ी की चाबी आवेदिका को सौंप दिया जाएगा। जनसुनवाई में 31 प्रकरण रखे गए थे, जिसमें 4 प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया है।

अधिवक्ता अपने वकालत का दुरूपयोग करने से बचे: डॉ नायक

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रायपुर: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक, सदस्य शशिकांता राठौर, अनीता रावटे और अर्चना उपाध्याय की उपस्थिति में शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए सुनवाई की गई। सुनवाई में आवेदिका ने आयोग के आदेश का पालन करते हुए 50 हजार रुपए अनावेदक को आयोग के समक्ष सौंपा। आयोग के अध्यक्ष ने सीपीटीडब्ल्यूएस CPTWS रायपुर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विवेकानंद सोसायटी के अध्यक्ष को आवेदिका की जमा राशि को तत्काल आवेदिका के एकाउंट में NEFTI से या RTGST से जमा करने के निर्देश दिए। इसकी सूचना अनावेदक आयोग कार्यालय दस्तावेज के साथ भेजने पर प्रकरण को निराकृत किया जा सकेगा। 

इसी तरह एक अन्य प्रकरण में थाना प्रभारी तिल्दा के माध्यम से अनावेदक को उपस्थित कराने के लिए कई बार पत्र लिखा गया है। आज दिनांक की सुनवाई में भी थाना प्रभारी तिल्दा अनावेदक को उपस्थित कराने में असफल रहे हैं। इसके लिए अब आयोग रायपुर DGP को SP रायपुर की जिम्मेदारी तय सुनिश्चित कराने पत्र प्रेषित किया जाएगा, जिससे तिल्दा से अनावेदक आवश्यक रूप सुनवाई में उपस्थित हो। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने स्वयं को नौकरी से निकाले जाने को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया था। जिस पर अनावेदक ने विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत किया है और बताया कि आवेदिका दुर्ग में प्रसव दिनांक को कार्यरत कार्यालय तोकापाल बस्तर में उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर किया है। इस गंभीर अनियमितता को ध्यान में रखते हुए विभागीय उच्च अधिकारी ने आवेदिका को कार्यमुक्त कर दिया है। 

इस सम्बन्ध में आवेदिका चाहे तो संयुक्त संचालक के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकती है। यह प्रकरण आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर हो जाने से नस्तीबद्ध किया गया। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आयोग की समझाइश पर आवेदिका के रिहायशी भवन में किसी प्रकार से अनावेदक हस्तक्षेप नही करेगा। अनावेदक द्वारा अगर किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप किया जाता है तो आवेदिका को पूर्ण अधिकार है कि वह अनावेदक के विरुद्ध पुलिस थाना में प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करा सकती है। इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका की बहू अनावेदिका है। दोनो अपने पुत्र और पति पर एकाधिकार चाहती है। 

सुनवाई में शपथ पत्र पर बयान दर्ज

यह आयोग द्वारा तय करना सम्भव नहीं है। दोनों पक्षों को समझाइश दिए जाने पर अनावेदिका बहु का कहना है कि वह अपने पति के सहमति से तलाक लेना चाहती है। दोनो को अलग रहते 3 माह हुआ है। एक वर्ष बाद आपसी राजीनामा से तलाक के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में दुर्ग जिला में सुनवाई के समय आयोग कार्यालय में दोनो पक्ष को शपथ पत्र पर बयान दर्ज कर उपस्थित होने के निर्देश दिए गये थे। आज आयोग के सुनवाई में शपथ पत्र पर बयान दर्ज किया गया। उक्त दस्तावेजों और प्रकरणों को सुनने के बाद स्पष्ट हुआ कि आवेदिका अधिवक्ता है, उनके द्वारा अपने पक्षकार के पैरवी करने के वास्तविक रूप में अनावेदकगणो से चर्चा हुई थी। जिसे लेकर आवेदिका ने यह शिकायत किया कि अनावेदक ने उससे दुर्व्यवहार किया है। 

ऑडियो क्लिप को सभी सदस्यों ने सुना

आवेदिका द्वारा ऑडियो क्लिप को सभी सदस्यों ने सुना। ऑडियो में ऐसे कोई तथ्य नही आया जो आवेदिका के साथ दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता हो। अनावेदक ने आवेदिका  के प्रस्तुत अपील को स्वीकार किया है। जिसके खिलाफ आवेदिका उच्च न्यायालय या उच्च अपीलीय न्यायालय में पुनः अपील कर सकते हैं। अनावेदक गण ने बताया कि धारा 107 के तहत प्रकरण सुनने की पात्रता थी, लेकिन अनावेदक ने धारा 108 भूल सुधार का आवेदन प्रस्तुत किया था। इसको अब आवेदिका कहती है कि मैंने किसी अन्य के कहने पर ऐसा किया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि आवेदिका अपने पक्षकार का प्रकरण सही ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कानून की जानकर नही थी। इस तथ्य का मूल आवेदिका से मांगने पर दस्तावेज नही दे पाई है ऐसी स्थिति में आवेदिका का प्रकरण अभद्रता और अशोभनीय व्यवहार प्रमाणित नही होने से इस प्रकरण की निरस्त कर नस्तीबद्ध किया गया। 

मामले की प्रशासनिक जांच जारी

जांजगीर चापा के एक प्रकरण में आवेदिका ने धान खरीदी केंद्र के प्रांगण में अवैध कब्जा कर मकान बना लिया है। जिसकी नोटिस दिए जाने पर बचने के लिए आवेदिका ने आयोग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इस प्रकरण पर कब्जा वैध है या अवैध इस पर प्रशासनिक जांच जारी है। यह प्रकरण आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर है। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में अनावेदकगणो के विरुद्ध  जांजगीर जिले के हसौद थाने में एफआईआर दर्ज हो चुका है। अनावेदक जमानत पर रह रहे है। यह प्रकरण न्यायालय में प्रक्रियाधीन होने पर आयोग के क्षेत्राधिकार से बाहर है। इस तरह जांजगीर चापा के दो प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।

आवेदिका के पति के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच का मामला

एक अन्य प्रकरण में कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक के विरुद्ध आवेदिका ने मानसिक प्रताड़ना का आवेदन प्रस्तुत किया है। आयोग की सुनवाई में वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि आवेदिका के पति के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जिसमें न्यायालय से सजा हो चुकी है। इस कारण उनके निर्वाह भत्ता के निराकरण में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। आवेदिका एक गृहणी हैं और उन्हें अपने पति का ईलाज कराने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनके जीवन निर्वाह भत्ता या विभाग में जमा राशि की आवश्यकता है। 

मामला न्यायालय में लंबित

अनावेदकगण को आयोग ने आवेदिका के प्रकरण की शीघ्र जांच कर रिपोर्ट की समस्त दस्तावेज आगामी सुनवाई में आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने पिछली सुनवाई में स्वीकार किया था कि जमीन बिक्री होने पर आवेदिका को उसका हिस्सा दे देगा। आज की सुनवाई में अनावेदक कहता है कि 12 लाख रुपये की जमीन बिक्री किया। उसका पैसा मिला नही है। मामला न्यायालय में लंबित है। आयोग के समक्ष समस्त दस्तावेज प्रस्तुत किया है। आवेदिका ने बताया कि उनके पैतृक संपत्ति से कोई राशि नही मिली है। उस पैतृक संपत्ति के 8 दावेदार है। 12 लाख रुपये में 1/8 हिस्सा 1लाख 50 हजार रुपये पाने की हकदार आवेदिका है। आवेदिका उस प्रकरण में मध्यस्थ बनकर अपना हक लेने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकती है। अनावेदक न्यायालय में लंबित प्रकरण की जानकारी आवेदिका और अन्य अनावेदक को देंगे। इसके बाद दोनों पक्ष अपना दावा अदालत में पेश कर सकेंगे। जिससे इस प्रकरण को निराकृत किया जा सकेगा। 

31 प्रकरणों पर हुई सुनवाई

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक पीडब्ल्यूडी में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। जो आयोग की कई सुनवाई में अनुपस्थित रहा है। अनुपस्थिति का कारण पूछे जाने पर अनावेदक में आयोग से माफी मांगने के साथ ही कहा कि आवेदिका पत्नी के बैंक खाते में 39 हजार रुपये प्रतिमाह देता हैं। मकान पति पत्नी के संयुक्त नाम से है। आवेदिका जब चाहे मकान पर रह सकती है। आवेदिका ने बताया कि अनावेदक दूसरी औरत के कारण उसे घर से निकाल दिया है। जिसके कारण आवेदिका अब उस मकान में नही रहना चाहती। उनके 2 बच्चे जो 16 और 12 वर्ष के है जो साथ रह रहे है। बच्चो के स्कूली खर्च की जिम्मेदारी अनावेदक की है। शासकीय सेवा पुस्तिका में आवेदिका और बच्चों का नाम दर्ज है। जिसकी दस्तावेज अगली सुनवाई में अनावेदक को लाने कहा गया है। मकान का वर्तमान मूल्य और सम्पत्ति का कागजात जमा करने के निर्देश दिए गए। जनसुनवाई में 39 प्रकरण में 31 पक्षकार उपस्थित हुए, 10 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। जबकि बाकी अन्य प्रकरण को आगामी सुनवाई में रखा गया।

महिला आयोग ने करवाया पति-पत्नी में सुलह, तालियों की गड़गड़ाहट के साथ गई ससुराल

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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक और सदस्यगण शशिकांता राठौर, अनीता रावटे, अर्चना उपाध्याय ने बलौदाबाजार के जिला पंचायत के सभागार में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर जन सुनवाई की। सुनवाई में कुल 32 प्रकरण रखे गए थे, जिसमें 17 प्रकरणों के आवेदक उपस्थित रहे और उनकी सुनवाई की गई। उसमें से 8 प्रकरणों को निराकरण करते हुए नस्तीबद्ध किया गया। साथ ही कुछ प्रकरणों को सुनवाई के लिए रायपुर ट्रांसफर किया गया है।

फाइल फोटो

महिला आयोग अध्यक्ष नायक ने महिलाओं को समझाइश देते हुए कहा कि घरेलू आपसी मनमुटाव का समाधान परिवार के बीच किया जा सकता है। घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें। आपसी सामंजस्य सुखद गृहस्थ के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही आयोग के आड़ में अवैध काम को किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। जिला कार्यालय के सभा कक्ष में आयोजित सुनवाई में मुख्य रूप से महिलाओं से मारपीट मानसिक शारीरिक दैहिक प्रताड़ना कार्यस्थल पर प्रताड़ना दहेज प्रताड़ना से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की गई। 

फाइल फोटो

पलारी विकासखंड के अंतर्गत हरिनभट्टा गांव के आवेदक और अनावेदक कोयदा के रहने वाले पति-पत्नी के बीच आपसी सुलह कराकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ससुराल भेजा गया। इस पूरे मामले को 6 महीने तक संरक्षण अधिकारी को हर 2 हफ्ते में घर जाकर मुआयना करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह एक महिला आवेदक ने सिमगा विकासखंड के डोंगरिया गांव में समाज और ग्रामवासियों के खिलाफ हुक्का पानी और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। अनावेदक समाज प्रमुखों ने अध्यक्ष महोदय को बताया कि हमने आवेदक समाज से बहिष्कृत नहीं किया है। 

30 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश

इस दौरान उपस्थित समाज प्रमुखों ने सभी के सामने घोषणा की। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में पलारी विकासखंड के अंर्तगत धौराभाटा गांव के आवेदक ने गांव के प्रमुखों पर हुक्का पानी बंद करने का आरोप लगाया है, जिस पर आयोग की अध्यक्ष ने  बलौदाबाजार SDOP को 30 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं एक बहुचर्चित मामले में सुनवाई की गई, जिसमें कहा गया था कि एक अधिकारी जहां जाते हैं वहां शादी कर लेते हैं। उस प्रकरण के मामले में आवेदिका कसडोल निवासी के शिकायत पर आयोग ने डीएनए टेस्ट कराया था, जिस पर रिपोर्ट निगेटिव आया है, लेकिन आवेदिका ने रिपोर्ट में शक जाहिर करते हुए अपनी बात रखी। इसके साथ ही आवेदक के वैध प्रमाण पत्रों में पिता का नाम व्यक्ति का दर्ज है। जिस पर आयोग ने बात को गंभीरता से लिया।

पहली पत्नी से तलाक लिए दूसरी महिला से शादी

आयोग ने जांच रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं को देखते हुए फिर से एक्सपर्ट से जांच आवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही अनावेदक ने स्वीकार्य किया कि 1975 शादी में पहली शादी हुई थी। जबकि 1982 में बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली है। साथ ही दूसरी पत्नी का नाम सर्विस बुक में दर्ज है, जिस पर आयोग ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव और कलेक्टर सुकमा को आदेश जारी कर जांच करने को कहा है। क्योंकि प्रथम दृष्ट्या में ये पहली पत्नी के रहते दूसरे महिला से शादी करना बिना तलाक दिए गंभीर अपराध है।

सुनवाई के दौरान ये रहे उपस्थित

इसी तरह कसडोल विकासखंड के अंर्तगत गिंदोला के आवदेक के मामले में सास ने बहु का साथ दिया, जिसमें अनावेदिका क्रमांक 2 द्वारा पहले पति के रहते दूसरी शादी करना साथ ही इनका 5 साल का बच्चा होना स्वीकार्य किया। इसी तरह अनावेदक क्रमांक 1 द्वारा पहले पत्नी के रहते दूसरी शादी कर पत्नी रखना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। मामले में आयोग द्वारा अनावेदिका क्रमांक 2 को तत्काल हिरासत में लिया गया और आयोग ने उसे बलौदाबाजार SP को  रायपुर नारी निकेतन में रखने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई दौरान अपर कलेक्टर राजेंद्र गुप्ता, DSP अभिषेक सिंह,जिला कार्यक्रम अधिकारी एल आर कच्छप अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही आयोग की सुनवाई के दौरान आवेदक अनावेदक समेत जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

उधारी का पैसा नहीं देने के लिए अश्लील हरकत करने का लगाया झूठा आरोप, आयोग ने महिला को लगाई फटकार

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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक और सदस्य अनिता रावटे की उपस्थिति में शास्त्री चौक स्थित, राज्य महिला आयोग कार्यालय में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए सुनवाई की गई। बुधवार को प्रस्तुत प्रकरण में अनावेदक ने बताया कि आवेदिका लिखित इकरारनामा के माध्यम से व्यक्तिगत 50 हजार रुपये लिया है और वापस न करना पड़े इसलिए झूठी शिकायत आयोग में की थी। आवेदिका से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि उसने 50 हजार रूपये लिया है और वह एक महीने के अंदर आयोग के समक्ष रुपये वापस देना स्वीकार किया है। 


आवेदिका का कहना है कि अनावेदक ने उसे डांट लगाई थी इसलिए उनके खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला आयोग में महिलाओं की रक्षा का अर्थ कतई यह नहीं है कि महिला अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर पुरुषों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराए आवेदिका को आयोग के समझाइश दिए जाने पर आवेदिका ने आयोग के समक्ष अनावेदक से माफी मांगी और अगली सुनवाई में रुपये वापस करने की सहमति भी दी है।

दुर्भाग्यजनक स्थिति पर दोनों मासूम बच्चे 

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अपने पहले पति से तलाक और गुजारा भत्ता के साथ दोनों बच्चों की मांग की। अनावेदक और आवेदिका ने दूसरा विवाह कर लिया है। अब बच्चों पर दावा कर रहे है, यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। आयोग के अध्यक्ष किरणमयी नायक ने कहा कि बिना तलाक लिए दोनो पक्ष शादी कर दोषी साबित हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में प्रकरण का निराकरण किया जाना उचित नहीं होगा क्योंकि दोनों की स्थिति वैधानिक नहीं है। इस पूरे प्रकरण में दोनों मासूम बच्चे दुर्भाग्यजनक स्थिति पर है। 

फाइल फोटो

माता-पिता के रहते हुए दोनो बच्चे अनाथ हो गए हैं। प्रकरण में नाबालिग बच्चे का हैं। इस कारण आयोग ने इस प्रकरण को तत्काल बाल संरक्षण आयोग के तत्कालीन सहायक संचालक वर्तमान में जिला कार्यक्रम अधिकारी रायपुर से दूरभाष पर चर्चा कर दोनों पक्षों को बाल संरक्षण आयोग से कार्रवाई करने की बात कही गई। जिस पर इस प्रकरण की संपूर्ण फाइल और दोनों पक्षों को नाबालिग बच्चो के साथ बाल संरक्षण आयोग भेजा गया।

जिम्मेदारी से बचने के लिए लगातार मानसिक शोषण

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक आयोग के पिछली 3 सुनवाई में अनुपस्थित रहा। बुधवार की सुनवाई में अनावेदक को थाना भाटापारा के माध्यम से उपस्थित किया गया। आवेदिका ने बताया कि उनका अनावेदक से साल 2016 से प्रेम संबंध रहा हैं। इन संबंधों की आड़ में अनावेदक आवेदिका का आर्थिक शोषण करता रहा। अक्टूबर 2019 में आर्य समाज मे शादी करने के बाद अपने अपने घर वालो को बाद में बताएंगे कहकर आवेदिका का आर्थिक और शारीरिक शोषण भी करता रहा। आवेदिका को अलग अलग तरीके से डरा धमकाकर 4 लाख रुपये ले चुका है। आवेदिका को पत्नी के रूप में रखने और जिम्मेदारी से बचने के लिए लगातार मानसिक शोषण भी कर रहा है। 

 दहेज मांग करने संबंधी शिकायत

अनावेदक के पिता भी अनावेदक के इस कृत्य में बराबर के सहभागी है। अनावेदक लगातार आवेदिका के पैसे देने से इंकार कर रहा है और उसने स्वीकार किया कि आवेदिका से 4 लाख रुपये लिए है। इस गंभीर प्रकरण पर आयोग ने आवेदिका को स्थानीय पुलिस थाना में जाकर अनावेदक और उनके परिवार वालो के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण की FIR दर्ज कराने के निर्देश के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ शारीरिक और आर्थिक शोषण के साथ-साथ दहेज मांग करने संबंधी शिकायत की थी। 

समझाइश दिए जाने पर दोनों ने समय की मांग

अनावेदक इंडियन ऑयल में मैनेजर के पद पर कार्यरत है और 1 लाख 50 हजार रुपये मासिक वेतन है। आवेदिका डेढ़ साल से अलग है उसने बताया कि बच्चे की डिलीवरी के लिये मायके भेजे थे उसके बाद से लेने नहीं आ रहा है। उसने यह भी बताया कि अनावेदक ने उनके पिता से 45 लाख रुपये पेट्रोल पंप दिलाने के लिए लिया था। वह राशि भी अब तक वापस नहीं किया है और भरण पोषण राशि नहीं दे रहा है। आयोग के द्वारा समझाइश दिए जाने पर दोनों ने समय की मांग की।

8 प्रकरण नस्तीबद्ध

एक अन्य प्रकरण में पति-पत्नी के मध्य आपसी सहमति से विवाह विच्छेद के लिए आयोग में समक्ष तैयार हुए। बच्ची के संरक्षण के विषय मे पति के द्वारा पत्नी के साथ रहने की सहमति दिया। पति भविष्य में बच्ची से बात भी कर सकेगा। आयोग ने दोनों पक्षों को अधिवक्ता के सहयोग अपनी सहमति पत्र बनाकर आयोग कार्यालय में जमा करने कहा गया। आयोग के अध्यक्ष ने पति-पत्नी को एक साल से अलग रहने का आपसी राजीनामा बनाकर न्यायालय में प्रस्तुत करने के साथ ही इस प्रकरण को निगरानी में रखने का निर्देश दिया। बुधवार को जनसुनवाई में 25 प्रकरण में 22 पक्षकार उपस्थित हुए और 2 प्रकरणों को निगरानी में रखते हुए 8 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। बाकी अन्य प्रकरण को आगामी सुनवाई में रखा गया है।

आयोग में 23 महिला नगर सैनिकों की शिकायत, जांच के लिए कलेक्टर के पास भेजा गया केस

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक और सदस्य नीता विश्वकर्मा की उपस्थिति में कोरिया कलेक्ट्रेट परिसर के सभाकक्ष में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए सुनवाई की गई। जिनमें महिला आयोग के समक्ष जिले में महिला उत्पीड़न से संबंधित 16 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए। जिनमें 15 प्रकरणों की सुनवाई हुई, जिसमें 13 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए। बाकी 03 प्रकरण निगरानी में रखे गए हैं।


सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में समाचार पत्र के संपादक और संवाददाता के विरुद्ध आवेदिका द्वारा शिकायत की गई थी, जिसमें आवेदिका और संवाददाता उपस्थित रहे। जबकि संपादक अनुपस्थित रहे। आयोग द्वारा विस्तार से उभयपक्षों को सुना गया, जिसमें आवेदिका ने बताया संवाददाता ने आवेदिका के खिलाफ लगभग 100 से ज्यादा समाचार छापे हैं, जिसका दस्तावेज सहित शिकायत प्रस्तुत किया है। इस पर आयोग ने अनावेदक संवाददाता को भी सुना। उन्होंने अपने पत्रकारिता का अधिकार के तहत समाचार छापना व्यक्त किया, लेकिन आयोग अध्यक्ष द्वारा अपराध की गंभीरता बताई गई और मानहानि जनक समाचार और व्यक्तिगत आक्षेप के समाचार के लिए विस्तृत जांच कराए जाने की चर्चा की।

संवाददाता ने मांगी माफी

इस दौरान संवाददाता ने आयोग के समक्ष आवेदिका से माफी मांगने के लिए सहमत हुए और आवेदिका से अपने द्वारा समाचार प्रकाशित किए जाने की गलती मानकर माफी मांगी और आवेदिका ने मांगी मांगने के आधार पर उन्हें माफ करना स्वीकार किया। अनावेदक सम्पादक के उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ यह प्रकरण जारी रखा जाएगा।

तत्काल कड़ी कार्रवाई का निर्णय 

एक प्रकरण में पति द्वारा शारीरिक प्रताड़ना की शिकायत आवेदिका द्वारा की गई थी और भरण-पोषण की मांग की गई। आवेदिका द्वारा व्यक्त किया गया कि वह पति के साथ दाम्पत्य जीवन का निर्वहन करना चाहती है, आयोग द्वारा उभय पक्षों को समझाइश देकर दामपत्य जीवन का निर्वहन किये जाने और भविष्य में किसी प्रकार का कोई विवाद न हो। समझाइश दिए जाने पर अनावदेक पत्नी और बच्चों के साथ रहने और खर्च वहन करने को तैयार है। यह पूरा प्रकरण जिला संरक्षण अधिकारी के निगरानी में दिया गया है, पति पत्नी के इस प्रकरण को 6 माह निगरानी करेगी। अनावेदक द्वारा किसी प्रकार से आवेदिका को प्रताड़ित किये जाने की स्थिति में संरक्षण अधिकारी, आयोग की सदस्य नीता विश्वकर्मा को बताकर तत्काल कड़ी कार्रवाई का निर्णय कर सकती है।

23 महिला नगर सैनिकों की शिकायत

एक अन्य प्रकरण में नगरसेना की 23 आवेदिकागणों ने उपस्थित होकर कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत की। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने प्रकरण पर कहा कि यदि सभी ने एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत किया है तो गंभीर मुद्दा है। इसकी जांच अति आवश्यक है। इस पूर मामले को कलेक्टर को प्रेषित किया गया और स्थानीय विधायक को उनसे सहमति लेकर किसी महिला अधिकारी की उपस्थिति में प्रकरण पर आवेदिकागणों के कथन दर्ज कराकर अनावेदक के विरूद्ध कार्रवाई शुरू करे और परिणाम की सूचना दो माह के अंदर आयोग को प्रेषित करें। इसके आधार पर इस प्रकरण का निराकरण किया जा सके।

कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका से कार्यस्थल पर प्रताड़ना की शिकायत प्राप्त हुई थी। आवेदिका ने बताया कि प्रताड़ना के साथ उनका वेतन भी रोका गया है। प्रकरण की जांच के लिए विभागीय कमेटी गठित की गई है। आवेदिका द्वारा जांच कमेटी को बदलने की बात कही गयी। अध्यक्ष  नायक द्वारा आवेदिका की विस्तार से बात सुनी गयी और उन्हें समझाइश दी। सुनवाई के बाद आवेदिका ने अपना प्रकरण वापस लेना माना।

परिवार संपत्ति का एक तिहाई हिस्से का हकदार

इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को शंका थी कि उनके दादा की पूरी सम्पत्ति पर उनके दो चाचा ने कब्जा कर लिया है। सुनवाई के दौरान अनावेदकगणों ने दादा द्वारा संपत्ति का दिया गया 1997 का पंजीकृत त्याग पत्र, मूल दस्तावेज और फोटो प्रति प्रस्तुत की गई। प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आवेदिका की शंका दूर की गई और बताया कि आवेदिका और उनका परिवार संपत्ति का एक तिहाई हिस्से का हकदार है। इस जानकारी के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। महिला आयोग के सुनवाई के अवसर पर संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव सहित पुलिस और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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