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UPI के बाद अब RBI जल्द लॉन्च करेगा ULI: ये क्‍या है और कैसे करेगा काम

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Unified Lending Interface : भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के यूपीआई का डंका लेन-देन को लेकर पूरी दुनिया में बज रहा है, तो वहीं लोन सेक्टर में क्रांति लाने के लिए आरबीआई देश में यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस यानी यूएलआई लाने की तैयारी कर रहा है। इससे ग्राहकों को आसानी से कम ब्याज दर में ऋण मिल सकता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एकल कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि यूएलआई से लोगों को बहुत अधिक फायदा होने वाला है। भारतीय रिजर्वबैंक (RBI) ने लोन सेक्टर में काम को आसान और सहज बनाने के उद्देश्य से बीते साल ULI की पायलट परियोजना की शुरुआत की थी और अब जल्द इसे लॉन्च किया जा सकता है।


इस इंटीग्रेटेड लोन प्लेटफॉर्म को खासतौर पर छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए आसानी से और कम समय में कर्ज मुहैया कराने के लिए तैयार किया जा रहा है। जिस तरह से यूपीआई के आने के बाद पेमेंट सिस्टम में क्रांति देखने को मिली और उसके तौर तरीकों में बड़ा बदलाव आया, ठीक ऐसी ही उम्मीद लोन सेक्टर में बदलाव के लिए जताई जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि बैंकिंग सर्विसेज के डिजिटलाइजेशन के सफर को जारी रखते हुए हमने बीते साल इस प्लेटफॉर्म का प्रयोग शुरू किया था, जो कि बिना किसी बाधा के लोन प्रोसेस को आसान बनाता है। इसके लॉन्च होने पर खासतौर पर किसानों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों (MSME) को फटाफट लोन मिल सकेगा। उन्होंने इस प्लेटफॉर्म की खासियतों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें अलग-अलग राज्यों के लैंड रिकॉर्ड समेत अन्य डाटा होगा। जिसके जरिए छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज लेने वालों के लिए लोन अप्रूवल में लगने वाला समय बहुत कम हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि यूएलआई को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये अलग-अलग सोर्सेज से जानकारी जुटाता है, जिसके चलते लोन के लिए अप्लाई करने वालों को बहुत ज्यादा डॉक्युमेंट्स देने की जरूरत नहीं होती और उन्हें आसानी से कर्ज मिल सकता है। यूएलआई प्लेटफॉर्म Loan के लिए अप्लाई करने वाले ग्राहक के आधार, E-KYC के साथ ही लैंड रिकॉर्ड, पैन और अकाउंट से संबंधित जरूरी जानकारियों को अलग-अलग सोर्सेज से कम समय में जुटाएगा। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि यूनिफाइड लैंडिंग इंटरफेस बैंकिंग सेवाओं के डिजिटलीकरण का हिस्सा है।

ULI दरअसल, डिजिटल डेटा मुहैया कराता है, जिसमें तमाम डेटा प्रोवाइडर्स से लोन लेने वालों तक के लैंड रिकॉर्ड भी शामिल होते हैं, जो कि क्रेडिट वैल्यूएशन में लगने वाले समय को कम करने में मदद करता है। शक्तिकांत दास के अनुसार, ग्राहकों का फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल डेटा जो कि अभी तक फाइलों में दबा रहता है और लोन लेते समय उसे खंगालने में लंबा समय लगता है, ये यूएलआई उस तक आसान डिजिटल पहुंच बनाकर काम आसान कर देता है। यूएलआई 'प्लग ऐंड प्ले' नजरिये के साथ तैयार किया गया है, जिससे लोन प्रोसेस में आने वाली कई तरह की जटिलताएं कम हो जाती हैं।

RBI ने जारी किया नए सीरीज वाला नोट , 500 की नोट पर होगी प्रभु श्री राम की तस्वीर!

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नई दिल्ली : 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। वही इसको लेकर देश में भी बहुत उत्साह है। वही इस बीच सोशल मीडिया पर प्रभु श्री श्रीराम और अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की तस्वीरों के साथ 500 रुपये के नोट का फोटो निरंतर वायरल हो रहा है।


सोशल मीडिया पर प्रभु श्रीराम और अयोध्या में श्रीराम मंदिर के तस्वीरों के साथ वाला 500 रुपये के नोट को देखें तो 500 रुपये के नोट में जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर है वहां वायरल हो रहे 500 रुपये के नोट में प्रभु श्रीराम की तस्वीर है तथा नोट के पीछे जहां लाल किले की फोटो है वहां अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर की तस्वीर है। सोशल मीडिया पर प्रभु श्रीराम के फोटो के साथ 500 रुपये का नोट ट्रेंड कर रहा है।

वही एक ओर ये नोट वायरल हो रहा है लेकिन RBI की ओर से प्रभु श्रीराम के तस्वीर वाले 500 रुपये के नए सीरीज के नोट जारी किए जाने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार, प्रभु श्रीराम की तस्वीरों के साथ वायरल हो रहा 500 रुपये का नोट फर्जी है। बैंकिंग सेक्टर के जानकार और वॉयस ऑफ बैंकिंग के फाउंडर अश्वनी राणा ने कहा, RBI की ओर से ऐसी कोई ना तो ऐलान किया गया है और ना जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि ये एक फेक न्यूज है। RBI ऐसा कोई 500 रुपये के नए सीरीज का नोट जारी नहीं करने जा रहा है।

ये है सच्चाई

बैंक नोटों में किए जाने वाले बदलाव के बारे में हमें ऐसी कोई सूचना आरबीआई की वेबसाइट पर नहीं मिली और न ही किसी न्यूज रिपोर्ट्स में इसकी जानकारी दी गई है.आरबीआई की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, मौजूदा चलन वाले नई सीरीज के 2000 रुपये, 500 रुपये, 200 रुपये, 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये और 10 रुपये के नोटों पर महात्मा गांधी की ही तस्वीर लगी हुई है.

बढ़ गई 2000 रुपये को नोट बदलने की डेडलाइन, अब इस तारीख तक बदल सकेंगे नोट

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भारतीय रिजर्व बैंक  महीने के आज सितंबर महीने से आखिरी दिन देश के उन लोगों को बड़ी राहत दी है, जो अब तक किसी वजह से चलन से बाहर किए जा चुके 2000 रुपये के अपने नोटों को नहीं बदलवा सके थे. RBI ने अब इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर 7 अक्टूबर 2023 कर दिया है. गौरतलब है कि पहले इस काम को करने के लिए 30 सितंबर की लास्ट डेट तय हुई थी. ये मियाद आज खत्म हो रही थी. हालांकि इससे पहले ही आरबीआई ने लोगों को 7 दिन की मोहलत और दे दी है. 


आरबीआई के आज के फैसले के मुताबिक, 2000 रुपये के नोट लीगल टेंडर रहेंगे. यानी अगर आपके पास भी 2000 रुपये के  नोट हैं तो जरा भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. क्योंकि ये अब भी बड़ी आसानी से किसी भी बैंक या आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर बदले जा सकेंगे.

इस अपडेट के बाद बैंक 8 अक्टूबर से एक्सचेंज के लिए ₹ 2,000 के नोट स्वीकार करना बंद कर देंगे. दरअसल केंद्रीय बैंक ने अपने सर्कुलर में साफ-साफ संकेत दिया है कि नई तय की गई 7 अक्टूबर की डेडलाइन तक भी अगर 2000 रुपये के नोटों को नहीं बदला जाता है यानी इसके बाद भी अगर किसी के पास कोई 2000 का नोट रह जाएगा, तो आप उसे ना बैंक में जमा कर सकेंगे और ना ही बदल सकेंगे. इन नोटों को RBI के 19 क्षेत्रीय कार्यालय से बदला जा सकेगा. एक बार में 20000 से ज़्यादा के नोट नहीं बदले जा सकते हैं. वहीं ये नोट भारतीय डाक द्वारा आरबीआई के 'निर्गम कार्यालयों' को डाक द्वारा भी भेजे जा सकते हैं.


RBI का बड़ा फैसला, अब 500 रुपए के पेमेंट पर नहीं होगी UPI पिन की जरूत ...

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 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है. ये फैसला उन लोगों के लिए है जो कि यूपीआई लाइट का यूज करते हैं. वास्तव में आरबीआई ने यूपीआई लाइट के यूजर्स की ट्रांजेक्शन लिमिट में इजाफा कर दिया है. अब यूजर्स इस फीचर के साथ 500 रुपये तक का ट्रांजेक्शन कर पाएंगे और यूजर्स को पिन की भी जरुरत नहीं पड़ेगी. वहीं दूसरी ओर सरकार ने जल्द ही पेमेंट के ऑफलाइन मोड को भी लांच करने का ऐलान किया है. यूपीआई लाइट को एनसीपीआई और आरबाआई ने सितंबर 2022 में सबके लिए लांच किया था. यह यूपीआई का काफी सिंपल वर्जन माना जाता है.


यूपीआई के इस लाइट वर्जन को इस मकसद के साथ लांच किया गया था ताकि बैंकों की ओर से प्रोसेसिंग फेल होने की वजह से यूजर्स को परेशानी का सामना ना करना पड़े. यूपीआई का हरेक यूजर यूपीआई लाइट का यूज कर सकता है. अगर बात लिमिट की करें तो यूपीआई से हर रोज एक लाख रुपये की ट्रांजेक्शन की जा सकती है. वहीं यूपीआई लाइट के थ्रू अब 500 रुपये की ट्रांजेक्शन की जा सकेगी. आज से पहले यह लिमिट मात्र 200 रुपये थी. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह सुविधा न केवल रिटेल सेक्टर को डिजिटल रूप से सक्षम बनाएगी, बल्कि जहां इंटरनेट/दूरसंचार संपर्क कमजोर है या उपलब्ध नहीं है वहां कम राशि का ट्रांजेक्शन इससे संभव हो पाएगा.

वहीं दूसरी ओर नए पेमेंट मोड मतलब यूपीआई पर कन्वर्सेशनल पेमेंट्स की सुविधा शुरू करने जा रहा है. आरबीआई की ओर से जारी बयान के अनुसार, इसके जरिये यूजर्स ट्रांजेक्शन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एआई-बेस्ड सिस्टम के साथ संवाद स्थापित कर पाएंगे. यह एकदम सुरक्षित व संरक्षित लेनदेन होगा. यह आॅप्शन स्मार्टफोन और फीचर फोन बेस्ड यूपीआई प्लेटफॉर्म दोनों में जल्द उपलब्ध होगा. इससे देश में डिजिटल सेक्टर का विस्तार होगा. हिंदी और अंग्रेजी के बाद इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा. आरबीआई के अनुसार, इन सभी घोषणओं के संबंध में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे.

वहीं दूसरी ओर आरबीआई ने भी भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव ना किया हो और मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी के अनुमान को भी बदलते हुए 6.5 फीसदी पर रखा हो, लेकिन महंगाई के अनुमान में इजाफा कर दिया है. आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई दर 5.4 फीसदी पर आ सकती है, जबकि जून के महीने में यह अनुमान 5.1 फीसदी पर रखा है. वहीं दूसरी ओर जुलाई-सितंबर 2023 के लिए सीपीआई महंगाई का अनुमान 5.2 फीसदी से बढ़ाकर 6.2 फीसदी कर दिया गया है. अक्टूबर-दिसंबर 2023 के लिए सीपीआई महंगाई के अनुमान 5.4 फीसदी से बढ़ाकर 5.7 फीसदी कर दिया गया है.


भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला? प्रिंटिंग प्रेस से RBI के बीच गायब हुआ 500-500 नोट के 88 हजार करोड़ रुपये

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सूचना अधिकार से मिली जानकारी से सामने आया है कि नासिक में सरकारी प्रेस ने 500 रुपये के 8,810.65 मिलियन नोट छापे थे, लेकिन रिजर्व बैंक को 7260 मिलियन नोट ही मिले हैं.


Printing Scam: आरटीआई से हैरान कर देने वाला खुलासा सामने आया है। 88 हजार करोड़ के 500 रु के नोट गायब हैं। बता दें कि टकसालों ने नए डिजाइन किए गए 500 रुपये के 8,810.65 मिलियन नोट जारी किए, लेकिन आरबीआई को केवल 7,260 मिलियन के नोट मिले। मिसिंग नोटों की कीमत 88,032.5 करोड़ रुपये है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी को इसकी जानकारी नहीं है कि गायब हुए 1,760.65 मिलियन 500 रुपये के नोट कहां है, जिसमें अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक नासिक मिंट में मुद्रित 210 मिलियन नोट शामिल हैं। गायब होने वाले नोटों की कीमत 88,032.5 करोड़ रुपये है। बार-बार प्रयासों के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रवक्ता ने रिजर्व बैंक वॉल्ट से गायब होने वाले नोटों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

यहां होती है नोटों की छपाई

भारत अधिकृत नोट मुद्रण को तीन सरकारी मिंटों – भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण (पी) लिमिटेड, बेंगलुरु, करेंसी नोट प्रेस, नासिक, और बैंक नोट प्रेस, देवास में मुद्रित करता है और उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक वॉल्ट में भेजता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे की वितरण के लिए होते हैं।

RTI से हुआ बड़ा खुलासा

RTI का डेटा अधिकार के तहत जानकारी अधिग्रहण की गई जिसे एक्टिविस्ट मनोरंजन रॉय ने हासिल किया। नासिक करेंसी नोट प्रेस द्वारा 375.450 मिलियन नए डिजाइन के 500 रुपये के नोटों की मुद्रण की गई, लेकिन रिजर्व बैंक के रिकॉर्ड में केवल 345.000 मिलियन नोट मिले हैं, जो अप्रैल 2015 से दिसंबर 2016 तक मुद्रित किए गए थे। पिछले महीने एक अन्य आरटीआई के उत्तर में, नासिक करेंसी नोट प्रेस ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2015-2016 (अप्रैल 2015-मार्च 2016) के लिए 210 मिलियन रुपये के 500 नोट आरबीआई को आपूर्ति किए गए थे, जब रघुराम राजन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे।

नासिक करेंसी नोट प्रेस की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि नए डिजाइन के 500 रुपये के नोट भारतीय रिजर्व बैंक को आपूर्ति किए गए हैं, लेकिन रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में नए डिजाइन वाले 500 रुपये के नोटों की कोई उल्लेख नहीं है, जो उसकी सार्वजनिक डोमेन वार्षिक रिपोर्ट पर सुधार के रूप में जारी की गई है। नासिक करेंसी नोट प्रेस द्वारा प्रदान की गई अधिक जानकारी में दिखाया गया है कि 2016-2017 में भारतीय रिजर्व बैंक को 1,662.000 मिलियन नए डिजाइन के 500 रुपये के नोट आपूर्ति किए गए थे।

 

2000 के नोट बदलने के लिए फॉर्म भरना होगा या नहीं, बैंक ने लिया बड़ा फैसला

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Change Rs 2000 Notes : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दो हजार के नोटों का चलन बंद करने का फैसला लिया है। आरबीआई ने कहा है कि 23 मई से लोग बैंकों में जाकर अपने पास पड़े 2 हजार के नोट को बदल सकेंगे। बैंकों में नोट कैसे बदले जायेंगे इसे लेकर कई तरह की बातें हो रही थी। लेकिन देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने आज लोगों को बड़ा राहत देने का एलान कर दिया।


नोट बदलने के लिए किसी कागज की जरूरत नहीं

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने सभी ब्रांच को नोट बदलने को लेकर दिशा निर्देश दिये हैं. इसमें साफ साफ कहा गया है कि 2 हजार के 10 नोट यानि 20 हजार रूपये के नोट बदलने के लिए किसी पर्ची की जरूरत नहीं होगी. बैंक में नोट बदलने आये व्यक्ति से किसी तरह का पहचान पत्र भी नहीं मांगा जायेगा. यानि जिस भी व्यक्ति को नोट बदलना हो वह सीधे बैंक में जायेगा और बगैर किसी कागज के नोट बदल कर आ जायेगा.

बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया देश का सबसे बड़ा बैंक है. उसके इस फैसले के बाद अब ये तय हो गया है कि दूसरे सरकारी बैंक भी यही प्रक्रिया अपनायेंगे. एसबीआई ने अपने शाखाओं को कहा है कि वह सुनिश्चित करे कि नोट बदलने आये लोगों को परेशानी नहीं हो.

बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि जिनके पास 2000 रुपये के नोट हैं वे 23 मई से 30 सितंबर 2023 के बीच बैंक जाकर उसे 500 या 100 रूपये के नोटों से बदलवा सकते हैं. आप अपने बैंक अकाउंट में भी 2000 रुपये के नोट को जमा कर सकते हैं. इसके लिए कोई भी अतिरिक्त फॉर्म नहीं भरना होगा. पैसा डिपॉजिट करने को लेकर पहले से ही बैंक के जो नियम हैं उनका ही पालन करना होगा.

ग्रामीण इलाके के लोग यहां बदले नोट

ग्रामीण इलाकों बैंक की शाखाओं की संख्या कम है. ऐसे में लोग बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सेंटर जाकर 2000 रुपये के नोट को बदल सकते हैं. लेकिन ग्रामीण सेंटर पर सिर्फ 4000 रुपये तक के ही नोट यानि 2000 रुपये के दो नोट ही बदले जा सकते हैं. बता दें कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट बैंक की छोटी शाखा की तरह काम करते हैं. यहां ग्रामीणों को बैंक अकाउंट खोलने में मदद के अलावा रूपये का ट्रांजैक्शन भी होता है.

RBI के ऑफिस में भी बदले जायेंगे नोट

आरबीआई ने अपने कई ऑफिस में 2 हजार के नोट बदलने की सुविधा दी है. आरबीआई के अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी,हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम ऑफिस में दो हजार के नोट बदले जा सकते हैं.

 

2 हजार की नोटबंदी को लेकर सरकार पर भड़के संजय राउत, कहा- देश चला रहे, अहमदाबाद की दुकान नहीं'

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मुंबई : RBI द्वारा 2000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने PM मोदी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब पहली बार नोटबंदी की थी तब पीएम ने कहा था कि इससे भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कालाधन, महंगाई कम होगी. इसमें से कुछ भी नहीं हुआ. लोगों का रोजगार गया, भ्रष्टाचार, कालाधन, आतंकवाद बढ़ गया.


राउत ने कहा कि PM ने ये भी कहा था अगर मेरा ये फैसला गलत हुआ तो आप मुझे फांसी पर लटका देना. अब दूसरी बार नोटबंदी कर रहे हैं. देश की अर्थव्यवस्था के साथ इतना घिनौना खिलवाड़ इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा. राउत ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि आप अहमहाबाद में दुकान नहीं बल्कि एक देश चला रहे हैं.

राउत ने कहा कि PM ने ये भी कहा था अगर मेरा ये फैसला गलत हुआ तो आप मुझे फांसी पर लटका देना. अब दूसरी बार नोटबंदी कर रहे हैं. देश की अर्थव्यवस्था के साथ इतना घिनौना खिलवाड़ इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा. राउत ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि आप अहमहाबाद में दुकान नहीं बल्कि एक देश चला रहे हैं.

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने कहा क‍ि प्रधानमंत्रीने ये भी कहा था कि अगर मेरा ये फैसला गलत हुआ तो आप मुझे फांसी पर लटका देना। अब दूसरी बार नोटबंदी कर रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था के साथ इतना घिनौना खिलवाड़ इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा।

'क्‍या वो सूरत की दुकान चला रहे'

राउत ने सीधा हमला बोलते हुए सवाल करते हुए कहा क‍ि उनको क्‍या लगता है? वो देश चला रहे हैं या अहमदाबाद की दुकान चला रहे हैं? क्‍या वो सूरत की दुकान चला रहे हैं। राउत ने नोटबंदी पर पीएम की ओर से क‍िए गए वादे का भी ज‍िक्र क‍िया।

2,000 Rupee Note : RBI वापस ले रहा 2000 रुपए के नोट, 30 सितंबर तक रहेंगे वैध

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 Rupee Note : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 2000 रुपये के नोट पर बड़ा फैसला लिया है. आरबीआई जल्द ही पूरे देश से 2000 रुपये का नोट वापस लेगा। लेकिन इस मामले में भी पेंच है। आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि 2000 रुपये का नोट लीगल टेंडर के तौर पर जारी रहेगा।



भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को सलाह दी है कि वे तत्काल प्रभाव से 2000 रुपये के के नोट जारी करना बंद करें, हालांकि 2000 रुपये के नोट नोट लीगल टेंडर बने रहेंगे। RBI ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि 30 सितंबर इन नोटों को बदलते रहें। एक बार बीस हजार रुपए के नोट ही बदले जाएंगे। (RBI ) 



केंद्रीय बैंक ने कहा है कि वह 2,000 रुपये के नोट प्रचलन से हटा रहा है और लोग यह नोट 30 सितंबर तक बदल सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 19 क्षेत्रीय कार्यालय 23 मई से कम मूल्यवर्ग के नोटों के साथ बदलने के लिए 2,000 रुपये के नोट लेना शुरू करेंगे.

गौरतलब है कि नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रातोंरात 1,000 और 500 रुपये के नोटों को बंद किए जाने के बाद रिजर्व बैंक ने 2,000 रुपये के नोट की छपाई शुरू की थी. RBI

बैंक खोज-खोज कर लौटाएंगे लोगों के पैसे, शुरू हो रहा 100 दिनों का स्पेशल अभियान - आरबीआई का आदेश

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नई दिल्ली । बैंकों  में बिना दावे वाली पड़ी अरबों रुपये की रकम के मालिकों को खोजने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक  अब 100 दिन का अभियान चलाएगा। इस अभियान को 100 डेज-100 पेज (100 Days – 100 Pages) नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत हर बैंक 100 दिनों के अंदर देश के हर जिले में शीर्ष 100 बिना दावे वाले जमाकर्ताओं को खोजेगा और उसका भुगतान करेगा।


आरबीआई के आदेश पर सभी बैंक एक जून से इस अभियान की शुरुआत करेंगे। नियम के मुताबिक, जिस भी बचत या चालू खाता को 10 साल तक नहीं चलाया जाता है, या कोई टर्म जमा का खाता है जिसमें 10 साल तक कोई दावा नहीं करता है, ऐसे खातों में पड़ी रकम को लावारिस या बिना दावे वाली रकम माना जाता है। बैंक इन ग्राहकों से संपर्क करने की कोशिश भी करते हैं। इसके बावजूद अगर कोई दावेदार नहीं मिलता तो यह एक विशेष खाते में चली जाती है।

वित्त मंत्री सीतारमण ने दिया था निर्देश

हाल ही में एक बैठक के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण  ने इस बिना दावे के रकम को लेकर नियामकों से कहा था कि वे बैंकिंग शेयर, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड या इंश्योरेंस के रूप में जहां भी बिना दावे वाली रकम पड़ी है, उसके निपटारे के लिए विशेष अभियान संचालित करें। आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ का कहना है कि ऐसे मामलों में जहां नामित व्यक्ति की जानकारी नहीं है, वहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत कदम आगे बढ़ाए जाएंगे।

सरकारी बैंकों में करीब 35,000 करोड़ रुपये की रकम ऐसी है जिस पर किसी ने अपना दावा नहीं किया है। सरकारी बैंकों ने इस पैसे को रिजर्व बैंक को ट्रांसफर कर दिया है। इसमें भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई में 8,086 करोड़ रुपये के लावारिस हैं। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक में 5,340 करोड़ रुपये, केनरा बैंक में 4,558 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा में 3,904 करोड़ रुपये हैं।

एलआईसी के पास भी 21 हजार करोड़ से ज्यादा

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, कर्नाटक, बिहार, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बैंकों में बिना दावे वाली रकम सबसे ज्यादा है। वहीं, जीवन बीमा कंपनियों में 31 मार्च, 2021 तक 22,043 करोड़ रुपये और गैर जीवन बीमा कंपनियों के पास 1,241.81 करोड़ रुपये बिना दावे के पड़े हैं। एलआईसी के पास ही अकेले 21,538.93 करोड़ रुपये की ऐसी जमा रकम है।

 

Forex Reserve : देश का विदेशी मुद्रा भंडार 32.9 करोड़ डॉलर घटकर 578.45 अरब डॉलर पर

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नई दिल्ली । अर्थव्यवस्था के र्मोचे पर झटका देने वाली खबर है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 मार्च को समाप्त हफ्ते में 32.9 करोड़ डॉलर घटकर 578.45 अरब डॉलर रह गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यह जानकारी दी है।


आरबीआई ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 31 मार्च को समाप्त हफ्ते 32.9 करोड़ डॉलर घटकर 578.45 अरब डॉलर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की वजह स्वर्ण आरक्षित भंडार में कमी है। इससे पिछले हफ्ते विदेशी मुद्रा भंडार 5.98 अरब डॉलर बढ़कर 578.78 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था।

आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में अहम योगदान देने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.6 करोड़ डॉलर घटकर 509.691 अरब डॉलर रह गई है। वहीं, स्वर्ण भंडार का मूल्य 27.9 करोड़ डॉलर घटकर 45.20 अरब डॉलर रह गया। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) भी 2.7 करोड़ डॉलर घटकर 18.392 अरब डॉलर रह गया।

आरबीआई के मुताबिक इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में रखा हुआ देश का मुद्रा भंडार 1.4 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 5.165 अरब डॉलर हो गया। 31 मार्च को बीते वित्त वर्ष 2022-23 में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कुल 28.86 अरब डॉलर की गिरावट रही है।

उल्लेखनीय है कि वैश्विक घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय बैंक के रुपये की विनियम दर में तेज गिरावट को रोकने के लिए मुद्रा भंडार का उपयोग करने की वजह से बाद में इसमें गिरावट आई है। अक्टूबर, 2021 में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। 

ब्याज दर में बदलाव नहीं : RBI ने रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा , महंगे नहीं होंगे लोन

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नई दिल्ली। अगर होम लोन और कार लोन की बढ़ती ईएमआई से आपके कंधे झुक गए हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की पहली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। अभी भी रेपो रेट की दर 6.50% ही रहेगी। इससे आपके होम और कार लोन की EMI नहीं बढ़ेगी, क्योंकि बैंक अब ब्याज दर में कोई बढ़ोतरी नहीं करेंगे। बता दें कि बैठक से पहले ये अनुमान लगाया जा रहा था कि RBI 0.25% रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। आरबीआई के इस ऐलान से बाजार में तेजी देखने को मिल रही है। सुबह जब बाजार खुला था तब नुकसान में था। अभी ग्रीन में आ गया है।


RBI ने बैठक में कही ये बात

अमेरिका में बैंकों के विफल होने से वित्तीय संकट मुद्दा बना है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो दर 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रहेगा।

अर्थव्यवस्था में जारी पुनरुद्धार को बरकरार रखने के लिये हमने नीतिगत दर को यथावत रखा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हम स्थिति के हिसाब से कदम उठाएंगे।

बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है।

आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, 2022-23 में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2023-24 में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। महंगाई अभी भी बनी हुई है।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 में महंगाई 5.2 प्रतिशत रहेगी।

पहली तिमाही में यह 5.1 प्रतिशत पर होगी।

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई में नरमी आएगी।

महंगाई को कम करने के लिए जरूरी सभी प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

रेपो रेट से आम आदमी पर क्या पड़ता है प्रभाव

जब बैंकों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा यानी रेपो रेट कम होगा तो वो भी अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। और यदि रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाएगा तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और वे अपने ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा कर देंगे। बता दें कि रेपो रेट में बदलाव करने से आम जनता पर असर कैसे पड़ता है, उसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है। बैंक हमें कर्ज देते हैं और उस कर्ज पर हमें ब्याज देना पड़ता है। ठीक वैसे ही बैंकों को भी अपने रोजमर्रा के कामकाज के लिए भारी-भरकम रकम की जरूरत पड़ जाती है और वे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से कर्ज लेते हैं। इस ऋण पर रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं।


पिछले साल कब-कब बढ़ी ब्याज दर 

मई – 0.4 %

8 जून -0.5 %

5 अगस्त – 0.5 %

30 सितंबर – 0.5 %

7 दिसंबर – 0.35 %

8 फरवरी – 0.25%


RBI का आदेश : 31 मार्च तक रविवार को भी खुले रहेंगे सभी बैंक

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नई दिल्ली। बैंकों की सभी ब्रांच 31 मार्च तक रविवार को खुली रहेंगी। RBI ने बैंकों को अपनी ब्रांच 31 मार्च तक खोले रखने का आदेश दिया है। इससे अब आप रविवार को भी बैंक से जुड़े काम निपटा सकेंगे। 31 मार्च के बाद लगातार 2 दिन यानी 1 और 2 अप्रैल को बैंकों में कामकाज नहीं होगा।


RBI ने कहा कि 31 मार्च को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 खत्म हो जाएगा। सरकार से जुड़े सभी ट्रांजैक्शंस 31 मार्च तक सेटल हो जाने चाहिए। उसने इसके लिए बैंकों को खास ध्यान रखने को कहा है।

RBI ने कहा है कि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (NEFT) और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सिस्टम के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शंस 31 मार्च को रात 12 बजे तक जारी रहेंगे।

सरकारी चेक के कलेक्शन के लिए स्पेशल क्लियरिंग

सरकारी चेक के कलेक्शन के लिए स्पेशल क्लियरिंग कंडक्ट किए जाएंगे, जिसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (DPSS) जरूरी निर्देश जारी करेगा। DPSS आरबीआई के तहत आता है। सेंट्रल एंड स्टेट गवर्नमेंट के ट्रांजैक्शंस की रिपोर्टिंग के लिए रिपोर्टिंग विंडो 31 मार्च को 1 अप्रैल को दोपहर तक ओपन रखे जाएंगे।

31 मार्च तक पैन को आधार से लिंक नहीं कराया तो हो जायेगा इनएक्टिव

बता दें कि अगर आपने अभी तक अपने पैन को आधार से लिंक नहीं कराया हो तो 31 मार्च 2023 तक करा लें. ऐसा नहीं करने पर पैन इनएक्टिव हो जाएगा. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) 30 जून 2022 के बाद से पैन को आधार से लिंक कराने के लिए 1000 रुपए की लेट फीस वसूल रहा है.

PPF-सुकन्या अकाउंट्स में मिनिमम अमाउंट जमा करना जरूरी

अगर आपका पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) अकाउंट है, लेकिन इस वित्त वर्ष में इनमें पैसे नहीं डाल पाये हैं, तो अकाउंट एक्टिव रखने के लिए इनमें 31 मार्च तक कुछ रुपए डालना जरूरी है. PPF और SSY में पैसे नहीं डाले जाने पर ये अकाउंट्स इनएक्टिव (बंद) हो सकते हैं. अगर न्यूनतम जरूरी रकम नहीं डाली गयी, तो इन्हें दोबारा एक्टिव करवाने के लिए आपको जुर्माना देना पड़ेगा.

 

 

RBI के शक्तिकांत दास को मिला 'गवर्नर ऑफ द ईयर' का सम्मान, प्रधानमंत्री ने बधाई दी

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नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास  को साल 2023 के लिए ‘गवर्नर ऑफ द ईयर’  पुरस्कार से सम्मानित किया गया गया. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक शोध पत्रिका सेंट्रल बैंकिंग ने दास को यह उपाधि दी. आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन 2015 में देश की ओर से पहली बार इस पुरस्कार से सम्मानित हुए थे.


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास को 2023 के लिए ‘गवर्नर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर बृहस्पतिवार को उन्हें बधाई दी और कहा कि यह देश के लिए बहुत गर्व की बात है।

अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन केंद्रीय बैंकिंग ने कोरोना वायरस महामारी और यूक्रेन युद्ध के उथल-पुथल वाले दौर में वित्तीय बाजार की अगुवाई करने के लिए दास को यह पुरस्कार दिया।

मोदी ने एक ट्वीट में कहा, "यह हमारे देश के लिए बहुत गर्व की बात है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास को केंद्रीय बैंकिंग पुरस्कार 2023 में 'गवर्नर ऑफ द ईयर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें बधाई।"

रघुराम राजन को भी गवर्नर ऑफ द ईयर सम्मान मिला था

शक्तिकांत दास के नेतृत्व में आरबीआई ने कई महत्वपूर्ण सुधारों को लागू किया है, नई भुगतान प्रणालियों की शुरुआत की और महामारी के दौरान ग्रोथ को पुश करने वाले उपाय किए. इससे पहले 2015 में सेंट्रल बैंकिंग ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को भी गवर्नर ऑफ दि ईयर के सम्मान से नवाजा था.

क्या है सेंट्रल बैकिंग

गौरतलब है कि सेंट्रल बैकिंग पब्लिकेशन पब्लिक पॉलिसी और फाइनैंशियल मार्केट से जुड़ी पब्लिकेशन कंपनी है. ये दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के कामकाज पर अपनी नजर रखती है.

RBI ने लगातार छठी बार दिया झटका , रेपो रेट में हुई 0.25% की बढ़ोतरी, महंगी हो जाएगी EMI

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 नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक बार फिर आम आदमी को झटका दिया है. आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट या 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है. इसके बाद सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे. देश में महंगाई काबू में आने के बाद भी आरबीआई ने दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है. देश में महंगाई दर का आंकड़ा कम होने के बाद भी रिजर्व बैंक ने लगातार छठी बार नीतिगत दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इसके बाद रेपो रेट 6.25% से बढ़कर 6.50% हो गया है. यानी होम लोन से लेकर ऑटो और पर्सनल लोन सब कुछ महंगा हो जाएगा और आपको ज्यादा EMI चुकानी होगी. देश का आम बजट पेश किए जाने के बाद ये आरबीआई एमपीसी की बैठक थी और इसमें फिर से आम आदमी के झटका लगा है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को तीन दिवसीय एसपीसी बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान किया. बता दें एक्सपर्ट्स पहले से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी किए जाने की संभावना जता रहे थे. गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2022 में हुई MPC बैठक में ब्याज दरों को 5.90% से बढ़कर 6.25% किया गया था. आरबीआई ने बीते साल से अब तक छह बार रेपो रेट में इजाफा करते हुए कुल 2.50% की बढ़ोतरी की है.

6 बार में 2.50% की बढ़ोतरी

मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। इस वित्त वर्ष की पहली मीटिंग अप्रैल में हुई थी। तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था, लेकिन RBI ने 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया था।

22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में ये बदलाव हुआ था। इसके बाद 6 से 8 जून को हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया। इससे रेपो रेट 4.40% से बढ़कर 4.90% हो गई। फिर अगस्त में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई। सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गई। फिर दिसंबर में ब्याज दरें 6.25% पर पहुंच गई। अब ब्याज दरें 6.50% पर पहुंच गई है।

एक साल में करीब 2988 रुपए बढ़ी EMI

ब्याज दरों के बढ़ने के बाद मई से पहले जो होम लोन आपको 5.65% रेट ऑफ इंटरेस्ट पर मिल रहा था वो अब 8.15% पर पहुंच गया है। यानी 20 साल के लिए 20 लाख के लोन पर आपको हर महीने करीब 2,988 ज्यादा की EMI देनी होगी।

0.25% रेट बढ़ने से कितना फर्क पड़ेगा

मान लीजिए रोहित नाम के एक व्यक्ति ने 7.90% के फिक्स्ड रेट पर 20 साल के लिए 30 लाख का लोन लिया है। उसकी EMI 24,907 रुपए है। 20 साल में उसे इस दर से 29.77 लाख रुपए का ब्याज देना होगा। यानी, उसे 30 लाख के बदले कुल 59.77 लाख रुपए चुकाने होंगे।

रोहित के लोन लेने के बाद RBI रेपो रेट में 0.25% का इजाफा कर देता है। इस कारण बैंक भी 0.25% ब्याज दर बढ़ा देते हैं। अब जब रोहित का एक दोस्त उसी बैंक में लोन लेने के लिए पहुंचता है तो बैंक उसे 7.90% की जगह 8.15% रेट ऑफ इंटरेस्ट बताता है।

रोहित का दोस्त भी 30 लाख का ही लोन 20 साल के लिए लेता है, लेकिन उसकी EMI 25,374 रुपए की बनती है। यानी रोहित की EMI से 467 रुपए ज्यादा। इस वजह से रोहित के दोस्त को 20 साल में कुल 60.90 लाख रुपए चुकाने होंगे। ये रोहित से 1.13 लाख ज्यादा है।

अनधिकृत डिजिटल प्लेटफार्म और मोबाइल एप की धोखाधड़ी से रहें सावधान, RBI ने की ये अपील

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनधिकृत डिजिटल प्लेटफार्मों के बढ़ते फर्जीवाड़ों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के संबंध में आम नागरिकों को सावधान रहने को कहा है। RBI ने आम नागरिकों को सचेत करते हुए बताया कि कई व्यक्ति और छोटे व्यवसायी, अनधिकृत डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफार्म और मोबाइल एप के त्वरित और परेशानी रहित तरीके से ऋण देने के वादों का शिकार हो रहे हैं। इस संबंध में प्रस्तुत रिपोर्टों में ब्याज की अत्यधिक दर, उधारकर्ताओं से मांगे जाने वाले अतिरिक्त छिपे हुए शुल्क, अस्वीकार्य और कठोर वसूली के तरीके और उधारकर्ताओं के मोबाइल फोन पर डेटा पहुंचाने के लिए करार के दुरूपयोग का भी उल्लेख किया गया है।



रिजर्व बैंक ने आम जनता को आकर्षक वेबसाइट के माध्यम से प्रमुख बैंकों के प्रतीक चिन्ह का गलत उपयोग कर वाणिज्यिक बैंकों के फर्जी ग्राहक सेवा केन्द्र (CAP), बैंक मित्रों और व्यापार संवाददाताओं की नियुक्ति के संबंध में झूठे प्रलोभन के प्रति भी सचेत रहने को कहा है। RBI ने बताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र, बैंक मित्रों और व्यापार संवाददाताओं की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल नहीं होता। रिजर्व बैंक ने आम जनता को आगाह किया है कि वे ऑनलाइन या मोबाइल एप के माध्यम से ऋण प्रदान करने वाली कंपनी या फर्म से उधार लेने के पहले पूरी तरह जांच कर लें। 

इस तरह करें शिकायत

उपभोक्ताओं को अज्ञात व्यक्तियों, असत्यापित या अनधिकृत एप के साथ केवाईसी दस्तावेजों की प्रतियों को कभी साझा नहीं करना चाहिए। ऐसे एप्स या बैंक खाते के संबंध में कानूनी एजेंसियों या सचेत पोर्टल  https://sachet.rbi.org.in   के माध्यम से शिकायत दर्ज कराना चाहिए। रिजर्व बैंक ने बताया है कि आरबीआई में पंजीकृत बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) और राज्य सरकारों द्वारा विनियमित संस्थाएं ही वैध सार्वजनिक ऋण देने की गतिविधियां कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ने इनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले डिजिटल लैंडिंग प्लेटफार्म को बैंकों और NBFC का नाम ग्राहकों के सामने सार्वजनिक करना अनिवार्य किया है। रिजर्व बैंक में पंजीकृत NBFC के नाम और पते वेबसाइट https://rbi.org.in/ से प्राप्त किए जा सकते हैं और इसके माध्यम से रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।

रेपो रेट में RBI ने नहीं किया कोई बदलाव, GDP -7.5 का अनुमान

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नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव (RBI keep unchanged repo rate) नहीं किया है। ये भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के नतीजों में सामने आया है। रिजर्व बैंक ने ये भी स्वीकार कर लिया है कि इस वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी (GDP) ग्रोथ मानइस रहेगी यानी इसमें गिरावट आएगी। रिजर्व बैंक के मुताबिक इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ -7.5 फीसदी रहेगी।





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हर किसी की नजर ब्याज दरों में बदलाव को लेकर आरबीआई (RBI) के फैसले पर टिकी थी। लेकिन रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 4% और रिवर्स रेपो रेट को 3.35% पर बरकरार रखा है। एमपीसी की बैठक 2 से 4 दिसंबर तक थी। इसके बाद दोपहर 12 बजे गवर्नर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।





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गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर दो माह पर अपनी सालाना मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। इसके पहले हुई अक्टूबर की बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव (RBI keep unchanged repo rate)नहीं किया था।





रिजर्व बैंक इस साल रेपो रेट में 115 बेसिस प्वाइंट यानि 1.15 परसेंट तक की कटौती कर चुका है। इस कटौती के साथ ही रेपो रेट साल 2000 के बाद 4 परसेंट पर है, जो कि सबसे निचला स्तर है। गौरतलब है कि खुदरा महंगाई पिछले कई महीनों से रिजर्व बैंक के सुविधाजनक स्तर 4 फीसदी से ऊपर बना हुआ है।





भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी





हालांकि जीडीपी के मोर्चे पर थोड़ी राहत वाली बात है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर की इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आयी है, जो अनुमानों से कम गिरावट है। जून की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आयी थी।


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