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कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव गिरफ्तार, बलौदाबाजार सीजीएम कोर्ट में किया गया पेश, कोर्ट ने न्यायिक रिमांड पर भेजा

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में जून में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को दुर्ग जिले से गिरफ्तार कर लिया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि यादव को राज्य के दुर्ग जिले में उनके आवास से पकड़ा गया और फिर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के मुख्यालय बलौदाबाजार लाया गया, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।


पुलिस की कार्रवाई की खबर फैलने के बाद यादव के कई समर्थक दुर्ग के भिलाई नगर इलाके में उनके आवास के बाहर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। यादव भिलाई नगर निर्वाचन क्षेत्र से दूसरी बार विधायक हैं।

20 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए

अग्रवाल ने बताया कि बलौदाबाजार शहर में आगजनी मामले में कोतवाली पुलिस थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यादव को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने यादव को बयान दर्ज करने के लिए कम से कम तीन बार बुलाया था, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मणिपुर के सबसे पुराने विद्रोही गुट UNLF ने हिंसा छोड़ी, केंद्र के साथ शांति समझौता

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने केंद्र के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अमित शाह ने इस बात की जानकारी अपने ट्विटर एक्स से दी है। उन्होंने जानकारी शेयर करते हुए लिखा कि “एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई. पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने आज नई दिल्ली में यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे पूर्ति का एक नया अध्याय जुड़ गया है।


उन्होंने आगे लिखा “यूएनएलएफ, मणिपुर का सबसे पुराना घाटी-आधारित सशस्त्र समूह हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। गृह मंत्री ने कहा, मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा कई अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ यूएनएलएफ पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद शांति समझौता हुआ। यह निर्णय तब लिया गया जब केंद्र को लगा कि ये संगठन मणिपुर में सुरक्षा बलों, पुलिस और नागरिकों पर हमलों और हत्याओं के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल हैं।

यूएनएलएफ क्या है?

24 नवंबर, 1964 को एरियाबम समरेंद्र सिंह के नेतृत्व में स्थापित, यूएनएलएफ उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में सबसे पुराना मैतेई विद्रोही समूह है। 70 और 80 के दशक में, समूह ने मुख्य रूप से लामबंदी और भर्ती पर ध्यान केंद्रित किया। 1990 में, इसने भारत से मणिपुर की 'मुक्ति' के लिए एक सशस्त्र संघर्ष शुरू करने का निर्णय लिया। उसी वर्ष, इसने मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) नामक एक सशस्त्र विंग का गठन किया।

 

Manipur Violence: मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, भीड़ ने सीएम बीरेन सिंह आवास पर किया हमला

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 Manipur Violence: पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में पिछले चार महीनों से जारी जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. इस क्रम में भीड़ ने आज यानी गुरुवार को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की फैमिली के एक खाली घर भी अटैक कर दिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद सुरक्षाबलों ने आक्रोशित भीड़ को तितर-बितर कर दिया. मीडिया रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया गया कि राजधानी इंफाल के हिंगांग इलाके में भीड़ ने सीएम के परिवार के एक घर पर हमला करने की कोशिश की.


पुलिस ने 100 मीटर दूर ही रोक दिया

जानकारी के अनुसार घर पर हमला करने आ रही भीड़ को पुलिस ने 100 मीटर दूर ही रोक दिया. पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि अब इस घर में कोई नहीं रहता है. आपको बता दें कि मणिपुर में सोमवार को पूरे राज्य में उस समय तनाव फैल गया जब सोशल मीडिया पर मैतई समुदाय के दो छात्रों की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. ये दोनों छात्र जुलाई से लापता चल रहे थे. दोनों छात्रों की मौत की खबर के बाद मंगलवार और बुधवार को खूब हिंसक प्रदर्शन हुआ. इस दौरान इंफाल पश्चिम जिले में उपायुक्त ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की गई. भीड़ ने इस दौरान भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी. इस हिंसा में 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें से ज्यादातर स्कूली छात्र हैं.

हिंसा में अब तक 175 लोगों की मौत

आपको बता दें कि मणिपुर में पिछले चार महीने से जारी हिंसा में अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इस अवधि में 5 हजार से ज्यादा अगजनी और 4 हजार से ज्यादा घरों में तोड़फोड़ के केस दर्ज किए गए हैं. उपद्रवियों ने इस दौरान 386 धार्मिक स्थलों में भी तोड़फोड़ की है. मणिपुर में हिंसा के चलते अब तक 65 हजार लोग अपना घर त्याग चुके हैं.

मणिपुर में महिलाएं बन रही हैं ढाल, बचा रही हैं हिंसा के आरोपियों को, सेना ने जारी किया बयान

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मणिपुर। सामुदायिक झड़पों के बाद मणिपुर में तनावपूर्ण स्थिति के बीच, भारतीय सशस्त्र बलों ने स्थानीय महिला गतिविधियों से पूर्वोत्तर राज्य में शांति बहाल करने में मदद करने का आग्रह किया। सेना की ओर से यह विनम्र अनुरोध महिला कार्यकर्ताओं द्वारा जानबूझकर मार्गों को अवरुद्ध करने और हिंसा प्रभावित मणिपुर में सुरक्षा बलों के अभियान में हस्तक्षेप करने के बाद आया है।


सेना की स्पीयर्स कोर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि इस तरह के अनुचित हस्तक्षेप से सुरक्षा बलों की समय पर प्रतिक्रिया को नुकसान पहुंच रहा है। महिला प्रदर्शनकारी जानबूझकर सुरक्षा बलों के अभियान में हस्तक्षेप कर रही हैं। यह बयान इंफाल पूर्व के इथम गांव में सेना और महिलाओं के नेतृत्व वाली भीड़ के बीच गतिरोध के दो दिन बाद आया है, जिसके कारण सेना को वहां छिपे 12 आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा।

महिला कार्यकर्ताओं ने की आतंकियों को भगाने में मदद?

विशेष रूप से, यह बयान इंफाल पूर्व के इथम गांव में सेना और महिलाओं के नेतृत्व वाली भीड़ के बीच गतिरोध के दो दिन बाद आया है, जिसके कारण सेना को वहां छिपे 12 आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा। सुरक्षाबलों ने ट्वीट किया मणिपुर में महिला कार्यकर्ता जानबूझकर मार्गों को अवरुद्ध कर रही हैं और सुरक्षा बलों के संचालन में हस्तक्षेप कर रही हैं।

इस तरह का अनुचित हस्तक्षेप जीवन और संपत्ति को बचाने के लिए गंभीर परिस्थितियों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा समय पर प्रतिक्रिया के लिए हानिकारक है। भारतीय सेना आबादी के सभी वर्गों से अपील करती है कि शांति बहाल करने में हमारे प्रयासों का समर्थन करें। मणिपुर की मदद करने में हमारी मदद करें।

मणिपुर में महिला एक्टिविस्ट जानबूझकर रास्तों को कर रहीं अवरुद्ध

अधिकारियों ने कहा कि इथम में गतिरोध शनिवार को पूरे दिन चलता रहा और महिलाओं के नेतृत्व वाली बड़ी क्रोधित भीड़ के खिलाफ बल प्रयोग की संवेदनशीलता और ऐसी कार्रवाई के कारण संभावित हताहतों की संख्या को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशनल कमांडर के परिपक्व निर्णय के बाद समाप्त हुआ।

उन्होंने बताया कि 2015 में 6 डोगरा यूनिट पर घात लगाकर किए गए हमले सहित कई हमलों में शामिल मैतेई उग्रवादी समूह कांगलेई यावोल कन्ना लुप (केवाईकेएल) के बारह सदस्य गांव में छिपे हुए थे। सुरक्षाकर्मी जब्त हथियार और गोला-बारूद लेकर चले गए।

मणिपुर हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद 3 मई को पहली बार झड़पें हुईं। मणिपुर की आबादी में मेइतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। आदिवासी – नागा और कुकी – आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

 

Manipur Violence : हिंसा की जांच के लिए CBI ने किया SIT का गठन , 6 FIR दर्ज

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 Manipur Violence : केंद्रीय जांच ब्यूरो ने छह प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को फिर से दर्ज किया है और मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक डीआईजी-रैंक अधिकारी के तहत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसमें करीब 100 लोगों की जान चली गई थी। एसआईटी में 10 अधिकारी होते हैं।


पूर्वोत्तर राज्य की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छह एफआईआर की जांच के लिए सीबीआई जांच की घोषणा की थी। पांच कथित आपराधिक साजिश पर और एक मणिपुर में हिंसा के पीछे सामान्य साजिश पर। अधिकारियों ने बताया कि केंद्र के माध्यम से भेजे गए राज्य के एक संदर्भ पर कार्रवाई करते हुए, सीबीआई ने एसआईटी का गठन किया और मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली। शाह राज्य में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने और 3 मई से मणिपुर को प्रभावित करने वाली उथल-पुथल को हल करने के लिए युद्धरत कुकी और मेइती को एक साथ लाने के लिए मणिपुर की चार दिवसीय यात्रा पर थे।


सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से एक चुराचंदपुर में शाह ने -कुकी नागरिक समाज संगठनों के नेताओं, जनजाति प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों के साथ बंद कमरे में बैठकें कीं। नागरिक समाज संगठन के नेताओं, छात्र निकायों, महिला समूहों और जनजाति नेताओं के साथ था उनकी बातचीत का पहला दौर, जो लगभग एक घंटे तक चला। 



छत्तीसगढ़ : कांग्रेस ने भाजपा प्रवक्तओं का कांग्रेसियों ने किया बायकॉट , BJP ने कसा तंज

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर गाँव में हुए हिंसा के मामलें में सूबे की सियासत गरमाई हुई है। अब कांग्रेस ने इस मामलें में भाजपा के प्रवक्ताओं का टीवी डिबेट में बायकाट करने का ऐलान कर दिया है। इसके लिए बक़ायदा कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने एक पत्र भी ज़ारी किया है।


ये पत्र कांग्रेस ने सूबे के तमाम समाचार चैनल के संपादकों के नाम लिखे गए है, जिसमें कांग्रेस ने बीजेपी के दो प्रवक्ताओं के साथ टीवी डिबेट में शामिल ने होने की बात कही है।


इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने भाजपा के इन नेताओं को चैनल्स में प्रतिबंधित करने की मांग रख दी है। अब इस लेटर पर भाजपा ने कांग्रेस पर भी तंज़ कसते हुए “चोरी उस पर सीनाजोरी” कह कर तीखे तेवर दिखाए है।

पत्र में भाजपा ने इन दो प्रवक्ताओं के साथ डिबेट में शमिल नहीं होने के पीछे की वज़ह “दोनों प्रवक्ताओं ने मु्ख्यमंत्री भूपेश बघेल और बिरनपुर की घटना को लेकर सोशल मीडिया में अभद्र टिप्पणी” करना बताया गया है। जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस ने यह फैसला किया है।

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आंनद शुक्ला का कहना है कि दोनों प्रवक्ताओं ने सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी की जिसके समाज का भाईचारा खतरे में पड़ रहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने मजबूरी में यह फैसला किया है। यदि वह अपने बयान पर खेद प्रगट कर देंगे तो कांग्रेस बैन हटा देगी।

भाजपा प्रवक्ताओं ने कसा तंज-चोरी उस पर सीनाजोरी

प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग द्वारा समाचार चैनलों को लिखी गई चिट्ठी पर भाजपा ने तंज कसते हुए कहा है कि “चोरी उस पर सीनाजोरी…!” बल्कि बिरनपुर की घटना पर कांग्रेस को प्रदेश की जनता से मांफी मांगनी चाहिए।

वहीं तथ्य को सरकार स्वीकार नहीं कर पा रही है। इसलिए इस प्रकार की कार्रवाई कर रही है। पहले पुलिस का सहारा लेकर और अब यह लेटर जारी कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का का हनन कर रही है।

ओडिशा के संबलपुर में हिंसा के बाद अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, बंद की गई इंटरनेट सेवाएं

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संबलपुर : ओडिशा के संबलपुर शहर में ताजा हिंसा के बीच जिला प्रशासन ने अनिश्चित काल के लिए कर्फ्यू लगा दिया है। इंटरनेट सेवा भी और दो दिनों के लिए निलंबित कर दी गई है। संबलपुर सदर के उपजिलाधिकारी प्रवेश चंद्र दंडसेना ने मौजूदा स्थिति की जानकारी के आधार पर शुक्रवार देर रात कर्फ्यू का आदेश जारी कर दिया।


डीआईजी (उत्तर मध्य रेंज) बृजेश कुमार राय ने कहा कि शुक्रवार रात कुछ दुकानों में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ की गई। इसलिए प्रशासन ने शहर में हिंसा के बाद क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कर्फ्यू लगाने का फैसला किया।

आदेश में कहा गया है, शांति सुनिश्चित करने के लिए धारा 144 (1) सीआरपीसी के तहत कर्फ्यू की स्थिति घोषित की जाती है, जिसमें कोई भी व्यक्ति या लोगों का समूह अपने घरों से बाहर न निकले।

धनुपाली, खेतराजपुर, ऐंथापाली, बरेईपाली, सदरा तथा टाउन के छह थाना क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है। कर्फ्यू की अवधि के दौरान किसी भी व्यक्ति या लोगों के समूह को अपने घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है।ं


साम्प्रदायिकता के खिलाफ रायपुर नागरिक समाज का सड़क पर उतरने का ऐलान

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रायपुर। बेमेतरा में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर रायपुर नागरिक समाज ने गहरी चिंता व्यक्त की है। समाज की ओर से दो व्यक्तियों या समुदायों के बीच के झगड़े या विवाद को साम्प्रदायिक रंग देकर हिंसा के लिए उकसाने की शर्मनाक कोशिशों की घोर निंदा की गई है। समाज का कहना है कि भाजपा, आरएसएस, विहिप और बजगरंग दल जैसे संगठन लगातार प्रदेश का माहौल करने की कोशिश कर रहे हैं,

ऐसे में सरकार के साथ साथ जागरूक नागरिकों की महती जिम्मेदारी है कि नफरत के इस माहौल के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। "रायपुर नागरिक समाज" की बुधवार को बुलाई गई बैठक में अलग अलग संगठनों और विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे। बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रस्ताव पारित किया गया।

हर जिले में बनेगी फैक्ट फाइंडिंग टीम

रायपुर नागरिक समाज ने छ्त्तीसगढ़ के सभी जिलों के जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वह संगठित होकर साम्प्रदायिकता के खिलाफ खड़े हों। जहां भी इस तरह की घटनाएं घटें या फिर आशंका हो नागरिक समाज के लोग गांधीवादी , समतावादी लोगों को लेकर मौके पर जाएं और शांति एवं सौहार्द्र के लिए लोगों से अपील करें।

रायपुर नागरिक समाज प्रदेश के सभी जिलों से संपर्क स्थापित कर वहां नागरिक समाज की फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाएगा। रायपुर नागरिक समाज ने राज्य में पुलिस प्रशासन से साम्पदायिक तनाव फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटने की अपील की है। बेमेतरा में हुए साम्पदायिक दंगे के खिलाफ रायपुर नागरिक समाज 14 अप्रैल को अंबेडकर चौक से भगत सिंह चौक तक शांति मार्च निकालेगा।

आज की बैठक की अध्यक्षता डॉ राकेश गुप्ता ने और संचालन विनयशील ने किया। बैठक में मुख्य रूप से धर्मराज महापात्रा, मनमोहन अग्रवाल, सुभाष बजाज, उमा प्रकाश ओझा, अधीर भगवानानी, नितिन सिन्हा, डॉ विप्लब् बंदोपाध्याय, पीसी रथ, बालकृष्ण अय्य्यर, आर के तिवारी, शाहबुद्दीन अंसारी, रिजवान अंसारी, आवेश तिवारी, मिन्हाज असद ईश्वर सिंह दोस्त, हरदीप जुनेजा, पलाश सुरजन, राजेश अवस्थी और राजकुमार सोनी मौजूद थे।


छत्‍तीसगढ़ बंद के दौरान तोड़फोड़, चक्‍काजाम करने वाले 200 बजरंग दल, वीएचपी समेत भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR

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रायपुर। बेमेतरा के बिरनपुर गांव में भड़की हिंसा में हिंदू युवक की हत्या के विरोध में सोमवार को छत्तीसगढ़ बंद के दौरान राजधानी रायपुर में उपद्रव और तोड़फोड़ करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किए हैं। पुलिस ने गोलबाजार थाने में बजरंग दल, वीएचपी समेत भाजपा कार्यकर्ताओं के 200 लोगों के खिलाफ अनाधिकृत चक्काजाम करने की धाराओं में मामला दर्ज किया है।


टीकरापारा थाना की पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता राजेश वैष्णव, किशोर, अजय और लव अमित समेत अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ जान से मारने की धमकी समेत रास्ता रोककर तोड़फोड़ समेत बलवा की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है

पुलिस का कहना है कि बंद के दौरान थाना टिकरापारा क्षेत्र अंतर्गत स्थित बस स्टैंड में कुछ लोगों द्वारा बस में तोड़फोड़ किया जिस पर व्यक्तियों को चिन्हित उनके विरुद्ध थाना टिकरापारा में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

इसी प्रकार जय स्तंभ चौक पर लंबे समय तक चक्काजाम कर यातायात बाधित किया गया जिससे आम जनता को अत्यधिक परेशानी हुई जिस पर ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध थाना गोल बाजार में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

इन लोगों पर दर्ज है केस

गोलबाजार थाना में भाजपा कार्यकर्ता केदार गुप्ता, संजू नारायण सिंह, अमरजीत चावला, चंद्रशेखर वर्मा, घनश्याम चौधरी, प्रदीप वाधवानी, प्रफुल्ल विश्वकर्मा और अमित साहू समेत 200 बजरंग दल, वीएचपी समेत भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनाधिकृत चक्काजाम करने की धाराओं में मामला दर्ज हुआ है l

 

साजा की घटना पर सियासत, विश्व हिन्दू परिषद ने किया सोमवार को छत्तीसगढ़ बंद का ऐलान…

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रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के  के साजा में दो स्कूली बच्चों के विवाद के बाद दो समुदायों में भड़की हिंसा के दौरान युवक की हत्या के विरोध में विश्‍व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने 10 अप्रैल को छत्‍तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है। विश्व हिंदू परिषद एवं सकल हिन्दू समाज प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा, बेमेतरा जिले के साजा अंतर्गत बिरनपुर की घटना से हिंदू समाज बेहद आहत है और आक्रोशित है।


विश्व हिंदू परिषद इस संपूर्ण घटना की न्यायिक जांच की मांग करती है। साथ ही साथ दोषियों को कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग करती है। इस दौरान वीएचपी नेता चंद्रशेखर वर्मा ने लव जिहाद के मुद्दे पर भूपेश सरकार को निशाने पर लिया।

उन्‍होंने कहा, इसी क्षेत्र की 7-8 युवतियों को पिछले 4-5 सालों में बहला फुसलाकर घर से भगाकर शादी कर लवजिहाद इन जेहादियों के द्वारा किया गया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से मुस्लिम जेहादियों का आतंक अपनी चरम पर है। ऐसी घटनाएं पूरे छत्तीसगढ़ के हर जिले में योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को परेशान एवं डराने के लिए की जा रही है।


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