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छत्तीसगढ़ में डरा रहा है करोना , आज प्रदेश में मिले 584 संक्रमित

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में डरा रहा है करोना 9.50 औसत से 584 मरीज छत्तीसगढ़ में मिले आज 27 दिनों में करो ना मिला 16 जिलों में करोना विस्फोट रायपुर जिले में आज 100 से अधिक संक्रमित 101 संक्रमित मिले प्रदेश में कुल संक्रमित एक्टिव का आंकड़ा 2986 पहुंचा करोना संक्रमण से 2 मरीजों की मौत रायपुर जिले में कुल संक्रमित 396 हुए रायपुर राजधानी जिले में कढ़ाई क्यों नहीं किस बात का इंतजार जिला प्रशासन को जबकि महासमुंद में 119 करुणा संक्रमित हैं। 


महासमुंद कलेक्टर ने करुणा के फैलाव को रोकने के लिए पूरे महासमुंद जिले में 144 धारा लगा दी है और धरना प्रदर्शन रैली पर रोक लगा दी है तो ऐसी कढ़ाई राजधानी और रायपुर जिले में क्यों नहीं जिला प्रशासन को और किस बात का इंतजार है महासमुंद जिले से 3 गुना अधिक मरीज रायपुर जिले में है यहां रायपुर जिले में सख्त बंदिश क्यों नहीं। 

रायपुर दुर्ग राजनांदगांव अंबिकापुर सूरजपुर बेमेतरा सहित अन्य जिलों में जहां संक्रमित मरीजों की संख्या 100 से अधिक है और प्रतिदिन मरीज बढ़ते जा रहे हैं महासमुंद जिले में लगाई गई जिला कलेक्टर द्वारा बंदिश की सख्त आवश्यकता कोरोना  के फैलाव को रोकने के लिए .


राज्य में एक्टिव केसेस की संख्या अब बढ़कर 2986 पहुंच गई है। वहीं जांजगीर-चांपा और बस्तर जिले में कोरोना की चपेट में आने से एक एक व्यक्ति की मौत हो गई है। ये संक्रमित दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित थे।

राज्य में एक्टिव केसेस की संख्या अब बढ़कर 2986 पहुंच गई है। वहीं जांजगीर-चांपा और बस्तर जिले में कोरोना की चपेट में आने से एक एक व्यक्ति की मौत हो गई है। ये संक्रमित दूसरी बीमारियों से भी पीड़ित थे।


Chhattisgarh में फिर डराने लगा : एक ही दिन में मिले 250 से ज्यादा संक्रमित, रायपुर में सबसे ज्यादा केस

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में कोरोना का मामला लगातार बढ़ता जा रहा. आज 4158 लोगों की कोरोना जांच हुई, जिसमें 264 की रिपोर्ट पाॅजिटिव आई है. सबसे ज्यादा रायपुर में 54 मरीज मिले हैं. वहीं बीजापुर आश्रम में पढ़ने वाले 18 बच्चे संक्रमित मिलने से जिले में हड़कंप मच गया है. बालक आश्रम हिंगुम और छोटेपल्ली में सभी संक्रमित मिले हैं. भैरमगढ़ बीएमओ संदीप कश्यप ने बताया, एंटीजेन टेस्ट में सभी बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. संक्रमित बच्चों को क्वारंटाइन किया गया है.


छत्तीसगढ़ शासन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग राज्य कन्ट्रोल एंड कमांड सेंटर की ओर से जारी कोरोना बुलेटिन में छत्तीसगढ़ में आज 4158 सैम्पलों की जांच हुई. इसमें 264 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. वहीं प्रदेश की औसत पॉजिटिविटी दर 6.35 प्रतिशत पहुंच गई है. प्रदेश में आज कोरोना संक्रमित किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है.


छत्तीसगढ़ के 24 जिलों में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. शेष जिलों में कोरोना का कोई नया मामला नहीं आया. प्रदेश में 11 अप्रैल को हुई कोरोना जांच में सबसे ज्यादा रायपुर में 54 संक्रमित मिले हैं. राजनांदगांव में 26, सरगुजा में 21, दुर्ग में 14, कांकेर में 10, बलौदाबाजार में 13, धमतरी और महासमुंद में 12-12 मरीज मिले हैं. नारायणपुर में 9, जांजगीर में 7, कोरबा, बालोद में 8-8, बेमेतरा में 7 संक्रमित पाए गए हैं.


छत्तीसगढ़ में कोरोना के डरावने आंकड़े, 24 घंटे में 25 संक्रमित मिले

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Chhattisgarh Corona Update: रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज कोरोना संक्रमण के कुल 5 नए मामलों की पुष्टि की गई है। राज्य में आज सर्वाधिक 3 केस कांकेर जिले से मिले है। वहीं राज्य में आज कुल 0 कोरोना मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। राज्य में आज किसी कोरोना संक्रमित की मौत नहीं हुई है। प्रदेश में अब कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 28 है। आज प्रदेश में 1,425 टेस्ट हुए है।


देखिए जिलेवार मरीजों की संख्या

टीबी के खतरे को कम करता है `नो स्मोक चूल्हा

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रायपुर. वार्ड 12 में रहने वाली राखी बाई  (परिवर्तित) को क्षय रोग से संक्रमित होने का पता तब चला जब एक दिन उनके मोहल्ले में टीबी चैंपियन गीता बर्मन उससे घर-घर सर्वे करने आई।  बात चीत में राखी ने गीता को बताया उसे काफी समय से खांसी रही है, बलगम भी बहुत आता है और कभी-कभी बलगम के साथ खून भी आता है. राखी बाई की थूक का सैंपल तुरंत लिया गया और उसकी जांच करवाने के बाद पता लगा उसे टीबी है.

``तब गीता दीदी ने मुझे बताया यह रोग पूरी तरह से ठीक होता है लेकिन उसके लिए  6 माह तक नियमित इलाज चलेगा। मुझे रोज़ दवा लेनी होगी क्योंकि अगर ऐसा करने से रोग और गंभीर हो सकता है जिसका उपचार लम्बा और ज्यादा मुश्किल होगा,’’ राखी ने बताया.


गीता ने उसको यह भी बताया कि घर के चूल्हे से निकलने वाले धुएं से भी बीमारी बढ़ सकती है इसलिए उससे धुआं रहित चूल्हे का उपयोग करना चाहिए.   धुआं-रहित चूल्हा या `नो स्मोकचूल्हा घर पर ही बनाया जाता है और इसमें खर्चा भी बहुत ही कम होता है.  कुछ ही दिनों में गीता की मदद से राखी के घर में भी `नो-स्मोकचूल्हा बनाया गया.  इस चूल्हे का धुआं एक पाइप के माध्यम से बाहर निकल जाता है  जिससे धुआं से होने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और खाना भी काफी समय तक चूल्हे पर गर्म रहता है.

टीबी चैंपियन सीखा रहे मिट्टी का चूल्हा बनाना

टीबी चैंपियन गीता बर्मन क्षय रोगियों और संभावित रोगियों को केवल इस रोग के बारे में बताती है बल्कि धुएं से होने वाले रोगों के बारे में भी जानकारी देती है.  चूल्हे पर खाना बनाने वालों को सिर्फ धुआं रहित (नो स्मोक) चूल्हे के बारे में बताती है बल्कि धुआं रहित चूल्हा लगवाने में भी मदद करती है.

गीता बर्मन कहती है: “वार्ड में चार घरों में धुआं रहित चूल्हा बनाया गया है. इस चूल्हे के निर्माण में 200 से 250 रुपये तक का खर्च आता है. इससे  घर के अंदर धुआं नहीं फैलता और  लकड़ी की खपत भी काफी कम होती है. यही इस चूल्हे की सबसे बड़ी विशेषता है. धुआं रहित चूल्हा होने की वजह से ही टीबी जैसी गंभीर बीमारी को पनपने से काफी हद तक रोका जा सकता है.विशेष रूप से चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं में टीबी के खतरे का जोखिम अधिक रहता है. परंपरागत चूल्हों से धुआं अधिक होता है. धुएं से होने वाले संक्रमण को भी कम कर देता है.“

क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी ने बताया: ‘’धुआं रहित (नो स्मोक) चूल्हे के लिये जिले में जोर-शोर से प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें मितानिन भी अहम भूमिका निभा रही हैं.यह चूल्हा कई मायनों में सबसे अलग और विशेष है जिसे टीबी रोग से बचाव हेतु एहतियाती सुरक्षा के लिए कोई भी अपने घर बनवा सकता है. डोर टू डोर टीबी जागरूकता के दौरान टीबी रोग के  संभावित मरीज चिन्हित होने की स्थिति में पीड़ित की सहमति से यह चूल्हा बनवाया जाता है.

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