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कभी थे शिक्षक विहीन स्कूल, अब यहां फैलेगा शिक्षा का उजियारा

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रायपुर।  जशपुर जिले में कभी शिक्षक विहीन रहे स्कूल अब शिक्षा की रोशनी से जगमगाने लगेंगे। युक्तियुक्तकरण के पूर्व जिले में 15 शिक्षक विहीन स्कूल थे। इसमें प्राथमिक शाला की संख्या 14 और हाई स्कूल की संख्या 01 थी। युक्तियुक्तकरण के उपरांत इन 14 प्राथमिक शाला में 28 और 01 हाई स्कूल में 06 शिक्षकों को दर्ज संख्या के मान से पदस्थ कर दिया गया है।

इसी तरह युक्तियुक्तकरण के पूर्व एकल शिक्षकीय प्राथमिक शाला की संख्या 262 थी। युक्तियुक्तकरण के बाद 262 शिक्षकों को दर्ज संख्या के मान से पदस्थ कर दिया गया है। जिले में अब शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या शून्य हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसको ध्यान में रखकर शालाओं और शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन किया जा रहा है। जहां जरूरत ज्यादा है, वहां शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को, जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीक के अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर मिल सके। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी।  

छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और प्रभावशाली प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम होगा।

वनांचल के गांवों में लौटी शिक्षा की रौशनी, युक्तियुक्तकरण से दूरदराज़ के स्कूलों में पहुंचे शिक्षक, ग्रामीणों ने जताया आभार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का असर अब वनांचल के गांवों में साफ़ दिखाई देने लगा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में वर्षों से शिक्षक की कमी से जूझते स्कूलों को अब राहत मिली है। लंबे समय से शिक्षक की मांग कर रहे ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी झलक रही है।

                           

हाईस्कूल बड़गांवखुर्द को मिले दो व्याख्याता

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित हाईस्कूल बड़गांवखुर्द में पहले कोई भी स्थायी शिक्षक नहीं था। केवल एक अतिथि शिक्षक के सहारे स्कूल चल रहा था। लेकिन युक्तियुक्तकरण के तहत अब हिन्दी और गणित के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना की गई है। इससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब बच्चों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का मौका मिलेगा, जिससे पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा।

ढाब गांव में शिक्षा को मिला नया सहारा

विकासखंड भरतपुर के ग्राम ढाब की प्राथमिक शाला में वर्षों से सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब यहां एक सहायक शिक्षक की नियुक्ति हुई है। गांव के सरपंच और अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षा का माहौल सुधरेगा और बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से हो सकेगी।

खोखनिया गांव में पूरी हुई वर्षों की मांग

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे खोखनिया गांव की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लंबे समय से शिक्षक नहीं थे। यहां 87 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन शिक्षक कम थे। अब युक्तियुक्तकरण के बाद प्राथमिक शाला में एक और माध्यमिक शाला में दो शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इससे गांववालों को बड़ी राहत मिली है।

देवशील में शिक्षकों की पदस्थापना से जागी नई उम्मीद

ऐसे ही एक अन्य पहुंचविहीन गांव देवशील की प्राथमिक शाला में 57 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल में केवल एक शिक्षक कार्यरत थे। अब एक और शिक्षक की नियुक्ति से यहां शिक्षा को नई गति मिलेगी। ग्रामीणों ने शिक्षक की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है, कि शिक्षा की पहुंच अंतिम गांव तक हो। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के माध्यम से हमने उन स्कूलों में शिक्षक भेजे हैं, जहां सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी । बच्चों को अच्छी पढ़ाई का अवसर मिले, यह हमारा संकल्प है। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

गीता जयंती विशेष : शिक्षक पटेल ने संकुल केंद्र के स्कूलों को किया गीता भेंट, 11000 श्रीमद्भागवत गीता का करेंगे दान

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आरंग। बुधवार को श्रीमद्भागवत गीता जयंती के अवसर पर शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा के शिक्षक महेन्द्र पटेल ने अपने विद्यालय के बच्चों सहित संकुल केंद्र के समस्त शालाओं के मुस्कान पुस्तकालयों  के लिए श्रीमद्भागवत गीता भेंट किया। साथ ही धर्म से विशेष जुड़ाव रखने वाले बुजुर्गो को भी श्रीमद्भागवत भेंटकर गीता जयंती की शुभकामनाएं दिए।इस अवसर पर शिक्षक पटेल ने बच्चों को श्रीमद्भागवत का महत्व बताते हुए, संस्कृत के पाठ्यक्रम में शामिल श्रीमद्भागवत गीता श्लोको का वाचन कराया। तथा श्रीमद्भागवत के श्लोकों को जीवन पर्यन्त जीवनोपयोगी बताते कंठस्थ करने प्रेरित किया। 

शिक्षक महेन्द्र ने बताया उन्होंने अपने जीवन काल में अपने पिता स्वर्गीय शिवचरण पटेल की स्मृति में 11000/ हजार श्रीमद्भागवत गीता दान करने का संकल्प लिया।अब तक वह 3800 से अधिक श्रीमद्भागवत गीता का वितरण कर चुके हैं।इससे पूर्व भी वह विकासखंड के सभी विद्यालयों के सभी पुस्तकालयों के लिए गीता भेंट कर चुके हैं। वहीं संकुल केंद्र भिलाई के नोडल प्राचार्य सी एल साहू, संकुल समन्वयक जीतेंद्र शुक्ला, प्रधान पाठिका डार्थी तांडी, खम्मन साहू, गोपाल साहू, सुशील कुमार आवडे, डोमन डहरिया, दानेन्द्र साहू,किरण यादव, शिक्षक देवऋषि पात्रे, शंकर वर्मा, जीतेंद्र यदु, किसान नेता पारसनाथ साहू सहित अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं ने शिक्षक पटेल की पहल की सराहना किए हैं।

विद्यार्थियों को बड़ा सपना देखने प्रेरित करें शिक्षक : राज्यपाल रमेन डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन गरिमामयी समारोह में वर्ष 2023-24 के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान प्रदान किया। राज्यपाल डेका ने कहा शिक्षक विद्यार्थियों को बड़ा सपना देखने प्रेरित और पूरा करने प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा देना सुनिश्चित करें।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-2024 के लिए सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। प्रदेश के तीन महान साहित्यकारों के नाम पर 03 शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार तथा 52 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षक सम्मान वर्ष 2024-25 के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा की।

राजभवन के दरबार हॉल में आज आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में तीन उत्कृष्ट शिक्षकों बिलासपुर जिले की डॉ. रश्मि सिंह धुर्वे को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कबीरधाम जिले के राजर्षि पाण्डेय को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार और दुर्ग जिले की डॉ. श्रीमती सरिता साहू को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस तरह प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक एल.बी वर्ग के 52 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रतिभाओ के विकास में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक समाज के प्रमुख नागरिक हैं। राज्यपाल ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति में बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जिसका परिणाम भी अच्छा होगा।

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज हर क्षेत्र में क्रांति हो रही है और शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति हो रही है। शिक्षक इस क्रांति का एक हिस्सा है। शिक्षकों के पढ़ाने का तरीका बदल गया है, लेकिन इस बदलाव के साथ-साथ शिक्षा के गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। बच्चों में नैतिक मूल्यांे का विकास करने की जवाबदारी भी शिक्षकों की है।

डेका ने कहा कि माता-पिता एक बच्चे को जन्म देते हैं जबकि शिक्षक उस बच्चे के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं और उसे उज्ज्वल भविष्य प्रदान करते हैं। शिक्षा के अलावा, शिक्षक बेहतर इंसान बनने के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और प्रेरणा देने के लिए हर कदम पर हमारे साथ खड़े रहते हैं। शिक्षक ज्ञान और बुद्धि का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक देश उतना ही अच्छा होता है जितने उसके लोग, उसी प्रकार उसके नागरिक भी उतने ही अच्छे होते हैं जितने उसके शिक्षक। इसलिए बहुत कुछ शिक्षकों पर निर्भर करता है कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें। मैं सभी शिक्षकों को उनके जुनून, समर्पण, प्रतिबद्धता और योगदान के लिए सलाम करता हूं।

राज्यपाल डेका ने कहा कि शिक्षण सभी व्यवसायों की जननी है। शिक्षक दिवस हमें भविष्य की पीढ़ियों को और भी अधिक चुनौतियों का सामना करने और हमारे देश को मानव कल्याण के प्रति उच्च संवेदनशीलता के साथ एक उन्नत और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं की याद दिलाता है।

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस का जितना उत्साह और महत्व है वैसा शायद ही कहीं और देखने को नहीं मिलता। भूतपूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की जयंती को हम सब शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। साय ने कहा कि भारत देश उत्तम शिक्षा के मामले में हमेशा से समृद्ध रहा है। गणित के क्षेत्र में शून्य भारत ने ही विश्व को दिया, आर्यभट्ट जैसे वैज्ञानिक और भाष्कराचार्य जैसे गणितज्ञ भारत में ही पैदा हुए। नागार्जुन जैसे रसायनज्ञ यहाँ हुए।

शिक्षकों ने देश को हमेशा नई दिशा दिखाई है। भले ही आज इंटरनेट की दुनिया में ज्ञान एक क्लिक पर उपलब्ध है लेकिन अनुभव भरा ज्ञान, संस्कारपूर्ण शिक्षा, जीवन जीने की कला, कौशल, उत्तम शैली की सीख केवल विद्यालयों में शिक्षकों के जरिए ही संभव है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जरूरत को समझा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लेकर आए। इस नीति के माध्यम से हमारी शिक्षा में आमूलचूल बदलाव की संभावना तैयार हुई है, जिसमें लोकल से वोकल तक के ज्ञान, सीख व समझ का समावेश किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को हमने प्रदेश में भी लागू कर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हमने प्रदेश में 9438 बालवाड़ियाँ आरंभ की हैं। हमने 18 स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई की शुरुआत की है। इसके लिए किताबें बनाई हैं और शिक्षक इसे पढ़ा रहे हैं। यह बच्चों की नींव तैयार करने में काफी महत्वपूर्ण है। शिक्षा से नक्सलवाद का अँधियारा छँटने से बस्तर में अब शिक्षा की रोशनी भी तेजी से फैल रही है। बस्तर में वर्षों से बंद 29 स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक समय एआई तथा रोबोटिक्स का है। हमारे बच्चे भी इसमें पीछे नहीं रहेंगे। हमने आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए भी स्कूलों में रोबोटिक्स तथा एआई की शिक्षा आरंभ कर दी है। नक्सल प्रभावित जिलों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए हम बिना ब्याज के शिक्षा ऋण दे रहे हैं। हमारा सबसे ज्यादा ध्यान कौशल विकास पर है। छोटे-छोटे ट्रेड में बच्चों को थोड़ा भी प्रशिक्षित कर दें, तो उनके लिए बेहतर भविष्य की राह खुल जाती है। हम हाइटेक स्कूल तैयार कर रहे हैं। प्रदेश में पीएम योजना के अंतर्गत 211 स्कूलों का शुभारंभ किया गया है। इसके अलावा 52 स्कूलों की और स्वीकृति मिल गई है। यहाँ गुणवत्तायुक्त शिक्षा बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही है। हमारी सरकार ने 13 नगरीय निकायों में नालंदा की तरह हाइटेक लाइब्रेरी की स्थापना का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने स्कूलों में न्योता भोज की भी पहल की है, इससे सामुदायिक सहयोग से स्कूलों में बच्चों को रूचिकर पोषण आहार मिल रहा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने स्वागत उद्बोधन के साथ प्रतिवेदन का वाचन किया। आभार प्रदर्शन संचालक लोक शिक्षण श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने किया। स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय को स्मृति चिन्ह स्वरूप पुस्तक भेंट की।

कार्यक्रम में आयुक्त जनसंपर्क मयंक श्रीवास्तव, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजीव झा, राज्यपाल की संयुक्त सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, पत्रकारगण उपस्थित थे।


सहायक शिक्षक एवं शिक्षक पद के लिये बी.एड. योग्यता के संबंध में

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रायपुर। युवाओं को रोजगार देने का वादा पूरा करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने कुल 12489 पद वितिापित किये थे. व्याख्याता के 432 पदों पर भर्ती लगभग पूरी हो चुकी है. शिक्षक के 5772 पदों पर काउंसिलिंग एवं दस्तावेज सत्यापन का कार्य लगातार चल रहा है और लगभग 10 दिन में पूरा हो जायेगा. इन पदों पर बी.एड. योग्यता वाले अभ्यर्थी पात्र है तथा उनकी भर्ती लगातार की जा रही है.

सहायक शिक्षक के 6285 पदों पर नियुक्ति के लिये काउंसिलिंग प्रारंभ जा चुकी है. छत्तीसगढ शासन व्दारा जारी विज्ञापन में सहायक शिक्षक के पदों पर भी बी.एड. को पात्र माना गया था, और उन्हें व्यापाम की परीक्षा में बैठने का अवसर भी दिया गया, परन्तु इसी बीच अचानक दिनांक 11 अगस्त को राजस्थान राज्य से संबंधित सिविल अपील क्र. 5068/2023 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने बी.एड. को सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिये अपात्र घोषित कर दिया.

इसके तत्काल बाद माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने याचिका क्र. डब्ल्यू.पी.एस. 5788/2023 में दिनांक 21 अगस्त को सहायक शिक्षक पद हेतु बी.एड. योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए काउंसलिंग की कार्यवाही स्थगित रखने का आदेश दिया, परन्तु डी.एड. एवं डी.एल.एड. की काउंसलिंग पर कोई रोक नही लगाई. माननीय न्यायालय के इस आदेश में पालन में डी.एड. एवं डी.एल.एड. योग्यता वाले अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग जारी रखी गयी है, जिससे राज्य के युवाओं को शीघ्रता से रोजागार दिया जा सके. बी.एड. योग्यता वाले अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध विधिक उपचारों के बारे में महाधिवक्ता महोदय से मार्गदर्शन मांगा गया है.

शिक्षक पद हेतु अभ्यर्थियों की प्रथम चरण की ऑनलाईन काउंसिलिंग 14 से 23 अगस्त तक

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रायपुर। शिक्षक सीधी भर्ती-2023 में शिक्षक पद के लिए अभ्यर्थियों की प्रथम चरण ऑनलाईन काउंसिलिंग 14 अगस्त को दोपहर 12 बजे से 23 अगस्त को रात्रि 12 बजे तक स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट  https://eduportal.cg.nic.in/ में प्रारंभ की जा रही है।
                      

इस काउंसिलिंग में व्यापम परीक्षा परिणाम के अनुसार कटऑफ रैंक की जानकारी विभाग की पोर्टल पर देखी जा सकती है। विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभाग की वेबसाइट https://eduportal.cg.nic.in/ का अवलोकन कर सकते हैं।

शाला प्रवेशोत्सव के दौरान निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों का वेतन काटने के निर्देश

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जांजगीर-चांपा। कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी के निर्देशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी एच आर सोम सहित उड़नदस्ता दल द्वारा शाला प्रवेशोत्सव पर जिले के स्कूलों को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 45 शिक्षक बिना पूर्व सूचना, आवेदन के अनुपस्थित पाये गये हैं।
                    

जिनके विरूद्ध जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस जारी कर अनुपस्थित दिवस का नियमानुसार वेतन काटने के निर्देश संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं संबंधित प्राचार्याे को दिए हैं।  जिला शिक्षा अधिकारी एच आर सोम ने बताया कि अनुपस्थित शिक्षकों में बलौदा विकासखंड के 15 शिक्षक, अकलतरा विकासखंड के 10 शिक्षक, नवागढ़ विकासखंड के 06 शिक्षक, पामगढ़ विकासखंड के 06 शिक्षक और बम्हनीडीह विकासखंड के 08 शिक्षक अनुपस्थित पाये गए। अनुपस्थित शिक्षकों के विरूद्ध नोटिस जारी कर वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं।


स्कूलों के आकस्मिक निरीक्षण में पहुँचे कलेक्टर, बच्चों के संग जमीन में बैठ कर चखा भोजन का स्वाद

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बलौदाबाजार। नये शैक्षणिक सत्र का जायजा लेने कलेक्टर चंदन कुमार ने जिले के विभिन्न स्कूल का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान वह बलौदाबाजार विकासखण्ड के अंतर्गत प्राथमिक शाला भरसेली,प्राथमिक शाला रवान, एवं पूर्व माध्यमिक शाला रवान में पहुँचकर बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य शिक्षा सम्बंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिमसें मुख्य रूप से पाठ्य पुस्तक सामग्रियों का शत प्रतिशत वितरण,गणवेश वितरण, शिक्षकों की संख्या,मध्यान्ह भोजन  गुणवत्ता,दर्ज संख्या,बच्चों की पढ़ाई का स्तर शामिल है।
                 

निरीक्षण के दौरान पूर्व माध्यमिक शाला रवान मे शिक्षक एल बी हरीश कुमार साहू अनुपस्थित मिले। बिना पूर्व सूचना एवं उनके आवेदन नही होने पर 1 दिन का वेतन काटने सहित कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। उन्हें 7 दिवस के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए है।इसके साथ ही मौके पर उपस्थित प्रधानपाठक को कड़ी फटकार लगाते हुए समझाइश दी गयी है कि इस तरह की गलती शिक्षकों के द्वारा नही दोहराना चहिए इनसे बच्चों का अंततः नुकसान होता है एवं शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

कलेक्टर चंदन कुमार प्राथमिक शाला भरसेली में भोजन के समय ही पहुँचे। बच्चों को भोजन करते देख गुणवत्ता का जायजा लेने खुद जमीन में बैठकर बच्चों के संग भोजन किए। इस दौरान कलेक्टर कुमार दूसरी कक्षा की छात्र भूमि ध्रुव एवं तीसरी कक्षा छात्र  पायल धृतलहरे से बातचीत कर पढ़ाई के बारे में जानकारी हासिल की। पायल धृतलहरे ने कलेक्टर को बताया कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूँ। इस पर कलेक्टर ने मन लगाकर पढ़ने का सलाह दिया। भोजन में दाल,आचार एवं आलू की सब्जी परोसा गया जिसकी गुणवत्ता की कलेक्टर ने तारीफ की। साथ ही बच्चों के द्वारा खाने के पहले पार्थना भी किया जिस पर कलेक्टर ने शिक्षकों की भी तारीफ करते हुए कहा बच्चों में ऐसे संस्कार विकसित करनें की जिम्मेदारी हम सब की होती है। इसके दूरगामी परिणाम बच्चों के हम सब को मिलते है।

बच्चों को पढ़ाया पाठ ...वॉटर स फॉर

कलेक्टर चंदन कुमार ने पूर्व माध्यमिक शाला रवान में कक्षा 8वी के बच्चों को इंग्लिश विषय की प्रसिद्ध चेप्टर वॉटर स फॉर का पाठ पढ़ाया। कलेक्टर को अपने पास पाकर बच्चों ने बेहद उत्सुकता से पाठ का अवलोकन किया। बच्चों ने कलेक्टर कुमार के एक एक शब्दो का अर्थ बताते हुए उनके प्रश्नों का जवाब दिया। इस दौरान कलेक्टर ने सभी शिक्षकों को पढ़ाई पर अधिक जोर देने,बच्चों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए है। निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी सी एस ध्रुव भी उपस्थित रहे।

बच्चों की रूचि को पहचानकर कैरियर चुनने के लिए दें मार्गदर्शन: स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. दासन

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रायपुर। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस भारती दासन ने कहा कि शिक्षक बच्चों को अपने कैरियर का चुनाव करने के लिए उनकी रूचि को पहचाने और मार्गदर्शन करें। डॉ. भारती दासन ’उजियारा ’ कैरियर मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यक्रम के तहत राज्य से चयनित मास्टर ट्रेनर के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस भारती दासन और प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा श्रीमती इफ्फत आरा उजियारा कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया। राज्य स्तरीय कार्यक्रम के शुभारंभ के पश्चात जिलों एवं स्कूलों में कार्यक्रम का संचालन होगा जिसमें प्रत्येक हाईस्कूल एवं हायरसेकेण्डरी स्कूल से एक-एक शिक्षक का कैरियर काउंसलर के रूप में चयन कर उन्हें मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शासकीय स्कूलों के बच्चों के कैरियर के चुनाव एवं उज्जवल भविष्य के निर्माण से संबंधित था। कार्यशाला में 500 कैरियर कार्ड से संबंधित रिव्यू एवं चर्चा हुई। कार्यशाला का आयोजन यूनिसेफ और समग्र शिक्षा द्वारा 19 से 22 जून तक संयुक्त रूप से किया गया। कार्यशाला में राज्य से चयनित 66 हाईस्कूल और हायरसेकेण्डरी के शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण दिया गया।

स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस भारती दासन ने कार्यशाला में उपस्थित मास्टर ट्रेनर शिक्षकों से कहा कि बच्चें अपने आसपास में जिनके संपर्क में आते हैं वे उसी को अपने कैरियर के लिए चुन लेते हैं, जैसे- डाक्टर, शिक्षक, पुलिस इत्यादि। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों को उनके कैरियर के चुनाव के लिए अलग-अलग विकल्पों के बारे में चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक के रूप में आप सब की यह भूमिका होनी चाहिए कि दसवीं के बाद विषय का चुनाव और बारहवीं कक्षा के बाद बच्चों को अपने कैरियर के चुनाव करने केे लिए उनकी रूचि को पहचाने तथा मार्गदर्शन करें।

स्कूल शिक्षा सचिव ने कहा कि ज्यादातर बच्चों को विज्ञान या गणित विषय का चुनाव कर डाक्टर या इंजीनियर बनने का सुझाव दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कला (आर्ट्स) विषय के माध्यम से भी बच्चें अपने कैरियर का चुनाव किन-किन क्षेत्रों में कर सकते हैं, इसकी जानकारी बच्चों को देना आवश्यक है। बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता क साथ भी चर्चा करना आवश्यक है, जिससे बच्चों की रूचि एवं भविष्य में उनके द्वारा चयन किए जाने वाले कैरियर के बारे में चर्चा हो। माता-पिता को उस बात के लिए भी प्रेरित करना आवश्यक है कि वह अपनी इच्छा को बच्चों पर न थोपें बल्कि बच्चों की रूचि को ध्यान में रखते हुए उनका सहयोग करें।

शासकीय स्कूलों में समर कैंप बना विविध विधाओं का केंद्र

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सारंगढ़ बिलाईगढ़। "रोते रोते हंसना सीखो, हंसते हंसते रोना, जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलौना" किशोर कुमार के इस गीत के जैसे बच्चों को सिखाने वाले शिक्षक या अन्य प्रोफेशनल कलाकार जितने कला जानते हैं उतने ही अच्छे ढंग से बच्चों को ये कला सीखा सकते हैं।

कलेक्टर डॉ फरिहा आलम सिद्दीकी के निर्देशन में जिले के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में संचालित समर कैंप में ऐसे बहुत से शिक्षक कई विधाओं के जानकार हैं जो बच्चों को प्रोफेशनल डांस, पतंग बनाना, चित्रकला, मूर्तिकला, शॉल स्वेटर बुनना, मेहंदी, रंगोली, माटीकला के मूर्तियों में आकर्षक रंग रोगन सिखाकर इन विधाओं को नई पीढ़ी को स्थानांतरित कर रहे हैं। समर कैंप में बच्चों को खेल खेल में संज्ञा सर्वनाम क्रिया विशेषण और अंग्रेजी के शब्दों से वाक्य बनाना, भाग देना जैसे परम्परागत शिक्षा भी प्रदान की जा रही है। 

प्राथमिक शाला बरभांठा के बच्चों के करमा कुहुकी गाबो मांदर के ताल म और छेर छेरा गीत पर बेहतर डांस प्रस्तुत किया गया।प्राथमिक और मिडिल स्कूल बेल्हा,ओटगन, कारीपाट, बरभांठा, नवापारा, पवनी, मडकड़ी, छिर्रा, चुरेला, गिरसा, भटगांव, डुरुमगढ़, सरसीवां, स्वामी आत्मानंद स्कूल बिलाईगढ़ के साथ साथ अन्य स्कूलों में नियमित समर कैंप कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि समर कैंप में अन्य दैनिक खेल कबड्डी, फुगड़ी, बांटी, भौरा भी खेले जा रहे हैं।

बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन में महासमुंद के शिक्षकों ने की शिरकत

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महासमुंद। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में बेगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन में महासमुंद से पदाधिकारियों ने शिरकत करते हुये छत्तीसगढ़़ प्रदेश की ओर से महासमुंद का नाम रोशन किया है। जिला अध्यक्ष टेकराम सेन ने बताया कि महासमुंद जिला की ओर से प्रांतीय मंत्री उमेश भारती गोस्वामी, जिला संगठन मंत्री, राजेन्द्र इंगोले, प्रचार सचिव, भगोलीराम साहू, सलाहकार मंडल से राजेश शर्मा, भागवत जगत ने प्रतिनिधित्व करते हुये छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं महासमुंद जिला की स्थिति से अवगत कराते हुये राष्ट्रहित, 



शिक्षा हित, शिक्षार्थी एवं शिक्षक हित की मूल मंत्र के आधार पर राष्ट्र की प्रगति में शिक्षक संघ की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देशभर के 28 राज्यों से 4500 शिक्षक प्रतिनिधियों एवं 150 विश्वविद्यालयीन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया । बारह सत्रों में विभाजित तीन दिवसीय कार्यशाला में शिक्षा की दशा व दिशा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर गहन विचार विमर्श व चिंतन किया गया । प्रदेश की ओर से प्रांताध्यक्ष ओंकार सिंह ठाकुर, महामंत्री यशवंत वर्मा, प्रांतीय मंत्री उमेश भारतीय सहित 44 प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय शैक्षिक सम्मेलन में उपस्तिति दर्ज कराई।

जिला कीओर से जिलाध्यक्ष टेकराम सेन, हिमांशु भारतीय, श्रीमती एस. चन्द्रसेन, सचिव तिलक चंद्राकर, विजय लक्ष्मी चंद्राकर, मधु शर्मा, रामकुमार साहू, ज्योतिष चौधरी, यू.के. दास, मानिक साहू, आशा साहू, प्रमोद कन्नौजे, चंद्रहास पात्र, मनोज कमार राणा, राकेशधर शर्मा, लता वैष्णव, सुशील शर्मा, किशोर साहू रथ, पिरित पटेल, रोहिणी देवांगन, अविनाश लाल, डोमन सिंह टंडन सहित समस्त पदाधिकारियों ने बधाई दी है।

उल्लेखनीय कार्यों के लिए शिक्षकों का सम्मान, देशभर में मनाया गया शिक्षक दिवस

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नई दिल्ली।रायपुर। आज शिक्षक दिवस है। यह दिवस शिक्षाविद् और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।  इस मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए देशभर के चुने हुए शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। 



इनमें राजधानी रायपुर के शासकीय प्राथमिक पंडित सखाराम दुबे स्कूल की सहायक शिक्षिका ममता अहार भी शामिल हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा, विद्यार्थियों में विज्ञान, साहित्य और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिभा के विकास का आधार है और नई शिक्षा नीति में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में 60 शिक्षकों का सम्मान

वहीं, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के साठ उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। राजभवन में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के महान साहित्यकारों के नाम पर चार शिक्षकों को स्मृति पुरस्कार और छप्पन शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके पर राज्यपाल ने राज्य शासन द्वारा स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में किये जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना की। 

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के खुलने से शहरों से लेकर दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों के अंग्रेजी में पढ़ने का सपना पूरा हो रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सबसे पहले राज्यपाल अनुसुईया उइके को शिक्षक दिवस की बधाई दी और कहा कि राज्यपाल स्वयं शिक्षक रह चुकी हैं और आज छत्तीसगढ़ के संवैधानिक मुखिया के रूप में पदस्थ हैं। यह हम सबके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश में उभरा है। 

उन्होंने शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कोविड काल में भी समाज के प्रति अपना दायित्व निभाते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया। वहीं, दुर्ग जिले के भनसुली में आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने भारत की दार्शनिक परंपरा और गुरु के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। इस बीच, शिक्षक दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम ने अशासकीय स्कूलों के एक सौ छप्पन शिक्षकों को शॉल, श्रीफल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।

छियालीस शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

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रायपुर। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले छियालीस शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। यह समारोह नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार पाने वालों में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शासकीय प्राथमिक स्कूल पंडित सखाराम दुबे की सहायक शिक्षिका ममता अहार भी शामिल हैं। सुश्री अहार पिछले बीस वर्षों से लोक संगीत के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं।



राजभवन में होगा आयोजन

वहीं, कल ही राजभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। राज्यपाल अनुसुईया उइके समारोह में प्रदेश के साठ शिक्षकों को सम्मानित करेंगी। इनमें से छप्पन शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान और चार शिक्षकों को प्रदेश के महान साहित्यकारों के नाम पर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। समारोह में राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिकों को इक्कीस-इक्कीस हजार रूपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। 

साथ ही प्रदेश की महान विभूतियों की स्मृति में दिए जाने वाले पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को पचास-पचास हजार रूपए और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। वहीं, विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम और संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव होंगे। राज्यपाल अनुसुईया उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी गुरूजनों और प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री करेंगे शिक्षकों से बातचीत

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षक दिवस के अवसर पर कल नई दिल्ली में अपने आवास पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत करेंगे। शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार का उद्देश्य देश के उन बेहतरीन शिक्षकों के अद्वितीय योगदान की प्रशंसा और उनका सम्मान करना है, जिन्होंने अपनी प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत से न केवल स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है बल्कि अपने विद्यार्थियों के जीवन को भी बेहतर बनाया है। इस वर्ष, देश भर से छियालीस शिक्षकों को, तीन चरण की पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।

फेडरेशन में फूट के आसार, आंदोलन समाप्ति की घोषणा पर रार, कहा :- दबाव डालकर आंदोलन खत्म करा रही सरकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले किए जा रहे आंदोलन की समाप्ति की घोषणा के साथ ही संगठन में फूट पड़ने की आशंका जताई जा रही है। आंदोलन की समाप्ति से प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारी-अधिकारियों में कथित तौर पर नाराजगी है। कर्मचारियों-अधिकारियों ने इसे यूनियन लीडर द्वारा की गई जबरदस्त धोखा, छल एवं गद्दारी करार दिया है। 



बताया गया है फेडरेशन के प्रदेश स्तरीय बैठक में कल यह कहा गया था की 12% डीए एवं एचआरए की मांग पूर्ति के बगैर आंदोलन समाप्ति नहीं होगा। परंतु आज अचानक ऐसा क्या हो गया जिसके कारण आंदोलन समाप्ति की गई? यह सवाल सभी के जेहन में है।

कर्मचारियों के साथ धोखा, छल!

छत्तीसगढ़ प्रदेश के कर्मचारी नेता एवं शिक्षक एलबी संवर्ग छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने बयान जारी कर कहा है कि फेडरेशन द्वारा हड़ताल समाप्ति की घोषणा प्रदेश के साढ़े चार लाख कर्मचारी अधिकारियों के साथ जबरदस्त धोखा, छल एवं पीठ में छुरा भोंकना है।  प्रदेश के तेजतर्रार कर्मचारी नेता जाकेश साहू ने कहा कि हमारे साथ फेडरेशन के टॉप लीडर कमल वर्मा सहित उनके कोर कमेटी के सदस्यों के  धोखा किया गया है। जब आंदोलन के संबंध में दो दिन पहले मुख्यमंत्री का स्टेटमेंट आया कि प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी हड़ताल समाप्त कर दें। 

इसके बाद फेडरेशन के आंदोलन में हलचल बढ़ गई थी। तब फेडरेशन के यूनियन लीडर कमल वर्मा द्वारा रायपुर में अचानक एक सितंबर को बैठक बुलाई गई थी। जिसमें आंदोलन समाप्ति की सुगबुगाहट का खबर प्रदेश भर में आग की तरह फैल गया। जिसके पश्चात प्रदेश भर के विभिन्न संगठनों के अधिकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में रायपुर में फेडरेशन के बैठक में उपस्थित हुए। वहां पर आंदोलन समाप्ति के मुद्दे पर कमल वर्मा एवं समस्त प्रदेश पदाधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई एवं आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।

ऐसी की गई व्यूह रचना

प्रदेशभर से आए हुए कर्मचारी अधिकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक लंबित डीए और एचआरए अर्थात 38% डीए और सातवें वेतनमान पर एचआरए का आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक हम साढ़े चार लाख कर्मचारी-अधिकारी आंदोलन पर डटे रहेंगे। साथ ही इस संबंध में राजधानी के समस्त इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में यह खबर चलने लगा कि लगातार हड़ताल जारी रहेगा। तत्पश्चात बैठक समाप्त हो गई। लेकिन इसके दूसरे ही दिन अर्थात दो सितंबर को अचानक ऐसा क्या हुआ कि आंदोलन समाप्त करना पड़ा। 

इसकी पटकथा थी कि मुख्यमंत्री के आंदोलन समाप्ति की चेतावनी के बाद संयोजक कमल वर्मा एवं इसकी कोर कमेटी मुख्यमंत्री के बयान से डरे हुए थे और आंदोलन समाप्त करने वाले थे लेकिन विभिन्न सोशल मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप में प्रदेशभर के साढ़े चार लाख कर्मचारियों के तेवर एवं विरोध को देखते हुए कमल वर्मा ने अचानक बैठक बुलाई। जहां पर सभी कर्मचारी पहुंचकर विरोध जता दिए। इसलिए कमल वर्मा एवं उसकी टीम ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया था। लेकिन बैठक समाप्ति होने के बाद कमल वर्मा द्वारा फिर एक नई पटकथा लिखी गई और कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे से मिलकर आंदोलन समाप्ति की घोषणा कर दी गई। यह कर्मचारी एवं अधिकारियों के साथ जबरदस्त धोखा, छल एवं गद्दारी है।

विश्वास नहीं हो रहा है...

कर्मचारी नेता जाकेश साहू ने बताया कि उक्त आंदोलन की समाप्ति से प्रदेशभर के कर्मचारी अधिकारी हक्के- बक्के रह गए हैं लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि आंदोलन समाप्त हो चुकी है। आज प्रदेश के बस्तर संभाग, सरगुजा संभाग, बिलासपुर संभाग एवं दुर्ग संभाग में सभी जगह के साढ़े चार लाख कर्मचारी अधिकारियों द्वारा फेडरेशन के उक्त आंदोलन समाप्ति से काफी नाराज एवं दुखी हैं।

चार सितंबर को रायपुर में आपात बैठक

इस मुद्दे पर प्रदेश के कद्दावर कर्मचारी नेता एवं शिक्षक एलबी संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने आगामी रविवार 4 सितंबर को राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट गार्डन में प्रदेश भर के समस्त 27 जिलों के समस्त 104 संगठनों के जिलाध्यक्ष, जिला संयोजक, जिला बॉडी के सभी पदाधिकारी एवं प्रदेश के 146 विकास खंडों के फेडरेशन के समस्त विकासखंड संयोजक, ब्लॉक अध्यक्ष, सचिव एवं सभी पदाधिकारियों से अपील की है, 

कि 27 जिलों एवं 146 विकासखंडों से एक-एक गाड़ी में सभी साथी हड़ताल समाप्ति के मुद्दे पर विरोध जताने और आगे की रणनीति तय करने, अधिक से अधिक संख्या में रविवार 4 सितंबर को, रायपुर कलेक्ट्रेट गार्डन में सुबह 11:00 बजे तक पहुंचें। सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक प्रदेश के साढ़े चार लाख अधिकारीयों कर्मचारियों के केंद्र के समान लंबित डीए एवं एचआरए तथा विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन एवं भावी रणनीति तय करने के लिए बैठक आयोजित की गई है।


शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में मौका दिए जाने संसदीय सचिव से की मुलाकात

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महासमुंद। डीएड-बीएड अंतिम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पात्रता दिलाने संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। जिस पर संसदीय सचिव चंद्राकर ने इस दिशा में शासन का ध्यानाकर्षित कराने का आश्वासन दिया। आज बुधवार को विजय बघेल, मुस्ताक खान, निशी चंद्राकर, वंदानी योगी, वेदराम पटेल, संतोषी पटेल, मीनाक्षी प्रधान, लिलेश निषाद, लक्ष्मी साहू, लोमेश सिन्हा, धनंजय कुमार, 



अमित, गुलाब साहू आदि संसदीय सचिव निवास पहुंचकर संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में दस हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। डीएड व बीएड अंतिम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों में संशय है कि वे आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे कि नहीं।

चूंकि भर्ती प्र्िरकया पूर्ण होने में विलंब हो जाता है तब तक डीएड-बीएड अंतिम वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों का अध्यापन जून 2023 तक पूर्ण हो जाएगा। दो-तीन महीने के अंतर के कारण उन्हें बेरोजगारी की पीड़ा सहनी पड़ सकती है। लिहाजा डीएड-बीएड अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को आगामी भर्ती परीक्षा में शामिल किया जाए। आगामी भर्ती परीक्षा के नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित हो कि डीएड-बीएड अंतिम वर्ष के विद्यार्थी पात्र होंगे। जिस पर संसदीय सचिव व विधायक चंद्राकर ने उनकी मांगों की ओर शासन का ध्यानाकर्षित कराने का आश्वासन दिया।

इंग्लिश मिडियम कॉलेज के लिए सीएम का जताया आभार

संसदीय सचिव व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने महासमुंद में इंग्लिश मिडियम कॉलेज संचालित किए जाने के अनुमति पर आभार जताया है। संसदीय सचिव चंद्राकर ने बताया कि स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय प्रारंभ किया जाना है। जिसके तहत महासमुंद के पीजी कॉलेज में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय प्रारंभ होगा।


शिक्षक के जन्मदिन को बच्चों ने बना दिया यादगार, लगाए पीपल के पेड़

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आरंग। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में 9 जुलाई को अपने शिक्षक महेंद्र पटेल के जन्म दिवस के अवसर पर बच्चों ने पौधरोपण कर उपहार दिया। पर्यावरण मित्र शिक्षक महेद्र पटेल सदैव अपने जन्मदिन पर पौधरोपण करते हैं। जिसे देखते हुए बच्चों ने प्रेरित होकर लगभग 50 पौधे रोपित किए। जिसमें पीपल, नीम ,करंज, अमरूद, मुनगा इत्यादि पौधे शिक्षकों के साथ मिलकर रोपित किये। वहीं रोपित पौधे की देखभाल करने का भी संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रधान पाठक के के परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र पटेल,



अशोक चंद्राकर, सूर्यकांत चंद्राकर, दीनदयाल धीवर कन्हैया साहू सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित थे। गौरतलब है कि आरंग के रहने वाले शिक्षक महेन्द्र पटेल अपने जन्मदिन पर  सैकड़ों पेड़ पौधे लगाते हैं। उनका कहना है प्रकृति को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उनके स्कूल के बच्चे भी उनके जन्मदिन पर पौधरोपण कर अपने शिक्षक को जन्मदिन की बधाई देते हैं।

उन्होंने अब तक सैकड़ों पेड़ पौधे लगाकर संरक्षित कर चुके हैं। उनके लगाए कई पौधे बड़े होकर फल देने लगे हैं। विगत 5-6 वर्षों से वह जन्मदिन को यादगार बनाने पीपल, नीम, बरगद तथा अन्य पौधे रोपित करते आ रहे हैं। इन्होंने पौधरोपण व संरक्षण को लेकर प्रेरक जागरूकता गीत तथा पेड़ बर झगरा  नामक शार्ट छत्तीसगढ़ी मूवी भी बनाई है। जिसके लिए इन्हें अनेक सामाजिक संगठनों द्वारा जिला व राज्य स्तर पर अनेक सम्मान भी मिल चुका है।


वह
कहते हैं कि लोग जन्मदिन पर पार्टियां मना कर कुछ ही लोगों के साथ खुशियां मनाते हैं यदि पर्यावरण संरक्षित करने पौधरोपण करें तो उससे मिलने वाले प्राण वायु (आक्सीजन) संपूर्ण मानव समुदाय के लिए पार्टियां होगी। इतना ही नहीं शिक्षक महेंद्र पटेल ने यह तय किया है कि उनके देहांत के बाद पार्थिव शरीर को कंडा से जलाया जाएगा। अर्थात दाह संस्कार कंडा से किया जाएगा। जिससे पेड़ काटकर लकड़ी का उपयोग न करना पड़े।  प्रकृति से इस जुड़ाव की सर्वत्र सराहना की जा रही है।

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