Media24Media.com: युक्तियुक्तकरण

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माँझीपारा के विद्यालय को मिला खेवइया, यहाँ के विद्यार्थी बनेंगे पढ़इया

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रायपुर। विष्णुदेव सरकार की शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की नीति ने आज कोरबा जिले के माझीपारा के मछुआ परिवारों के विद्यार्थियों की पढ़ाई लिखाई को नई दिशा दे दी है । कोरबा शहर से लगभग 80 किलोमीटर दूर पाली विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगा नाला में बड़ी संख्या में मांझी परिवार निवास करते हैं। नाव चलाने, मछली बेचने सहित मजदूरी कर अपना आजीविका चलाने वाले इन परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने शासन ने इनके बसाहट के पास ही प्राथमिक शाला प्रारंभ किया। अन्तिम छोर वाले इस गाँव के पाठशाला में पिछले कई साल से विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से नियमित शिक्षक नहीं थे। 

शिक्षको की कमी की वजह से माँझीपारा के बच्चों की पढ़ाई तो जारी थी लेकिन उन्हें ऐसा लगता था कि मानो जिस नाव रूपी प्राथमिक शाला में वे सवार है वह मझधार में फंसी हुई है। उन्हें मंजिल तक पहुंचाने एक और खेवइया रूपी शिक्षक की नितांत आवश्यकता है। राज्य शासन की युक्ति युक्तकरण की पहल ग्राम पंचायत डोंगा नाला माँझीपारा के पाठशाला के विद्यार्थियों के लिए बड़ी वरदान बनकर आई। यहाँ एक और शिक्षिका की नियुक्ति हो जाने से मानो स्कूल को एक और खेवइया मिल गया है, जो इन्हें मंजिल तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मददगार साबित होगा।

 माँझीपारा में पांचवीं तक पाठशाला खुले हुए 21 साल हो गए, लेकिन यहाँ बच्चों की संख्या के हिसाब से शिक्षकों की कमी कभी न कभी बनी ही रही। शिक्षको की कमी की वजह से इस स्कूल से वास्ता रखने वाले माँझी जाति के लोगो के बच्चों को समस्या का सामना करना पड़ता था। समस्या सिर्फ यहाँ पढ़ाई करने वाले बच्चों तक की ही नहीं थीं, उनके पालकों की भी थी। उन्हें भी अपने बच्चों के भविष्य की चिंता थी। इस बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अपनाई गई युक्ति युक्तकरण की प्रक्रिया से माँझीपारा के प्राथमिक शाला में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के साथ ही स्कूल की भी भाग खुल गई। स्कूल में जहाँ दो नियमित शिक्षक हो गए, वही यहाँ पदस्थ हुई शिक्षिका नई मैडम के रूप में दिन भर विद्यार्थियों के जुबान में बस गई है। पाठशाला खुलते ही मैडम के आने और कक्षा में पढ़ाने की चर्चा तो विद्यार्थी करते ही है, मन लगाकर पढ़ाई भी करते हैं।

पाली ब्लॉक के अंतर्गत दूरस्थ ग्राम पंचायत डोंगानाला के अंतर्गत अंतिम छोर पर बड़ी संख्या में मांझी परिवार निवास करते हैं। मांझी परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए नजदीक ही प्राथमिक शाला का संचालन शासन द्वारा किया जाता है। प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक श्री मणि दास मानिकपुरी ने बताया कि विद्यालय वर्ष 2004 से संचालित है। वर्तमान में 50 विद्यार्थी अध्ययनरत है। उन्होंने बताया कि आसपास के गरीब परिवार के बच्चे इस विद्यालय में पढ़ाई करने आते हैं। यहां नियमित शिक्षक की कमी बनी हुई थी। युक्ति युक्तकरण से हमारे विद्यालय में एक शिक्षिका की नियुक्ति की गई है। नई शिक्षिका के आने से विद्यार्थियों को पढ़ाई में बहुत मदद मिली है। इधर क्लास ले रही नई शिक्षिका राजश्री लहरे से विद्यार्थी भी घुले-मिले नजर आ रहे थे। ब्लैकबोर्ड पर लिखकर अभ्यास में जुटी शिक्षिका को पाकर कक्षा दूसरी की सिमरन, बृज कुमारी ,कक्षा पांचवीं की सती कुमारी, प्रियांशी सहित अन्य विद्यार्थियों में खुशी का वातावरण है। वे बताती है कि नई मैडम अच्छी लगती है। वे हमें हिंदी गणित पढ़ाती है। शिक्षिका राजश्री का भी कहना है कि यहाँ जॉइनिंग के बाद यहाँ के विद्यार्थियों से घुलना मिलना जरूरी है ताकि वे निसंकोच होकर पढ़ाई में ध्यान दे सके और सवालों को पूछ सके।


अब जीपीएम जिले की कोई भी शाला शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय नहीं

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रायपुर। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अब कोई भी शाला न तो शिक्षकविहीन है और न ही एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। यह सफलता शिक्षकों के प्रभावी युक्तियुक्तकरण के जरिए प्राप्त हुई है।

शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, युक्तियुक्तकरण से पहले जिले में 4 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन थीं, वहीं 130 प्राथमिक एवं 10 पूर्व माध्यमिक शालाएं एकल शिक्षकीय थीं। अब इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है। यह जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक कदम है, जो विद्यार्थियों के हित में एक समर्पित प्रयास को दर्शाता है।

जिले में कुल 13 शालाओं का समायोजन किया गया, जबकि 844 में से 831 शालाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी, वहाँ से अतिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण कर उन्हें आवश्यकता वाले विद्यालयों में पदस्थ किया गया है।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की समन्वित पहल से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो। युक्तियुक्तकरण के परिणामस्वरूप अब संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा — जैसे कि अच्छी भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम: सूरजपुर में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण सफल

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रायपुर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से सूरजपुर जिला प्रशासन ने शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिले की कई शालाएं जहां शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रही थीं, वहीं कुछ विद्यालयों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ थे।
                

इस असंतुलन को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने छात्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया। इसके तहत जहां शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ थे, वहां से उन्हें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की जरूरतमंद शालाओं में स्थानांतरित किया गया।

 ओपन काउंसलिंग से तय हुई पदस्थापनाएं

इस प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न किया गया। 1 से 3 जून 2025 तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विश्रामपुर में ओपन काउंसलिंग का आयोजन किया गया। इसमें वरियता के आधार पर शिक्षकों को नई शालाएं चुनने का अवसर मिला। इससे न केवल शिक्षकों को संतोषजनक स्थान मिला, बल्कि उन स्कूलों को भी लाभ मिला जहां लंबे समय से योग्य शिक्षकों की आवश्यकता थी।

 णवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ठोस कदम

इस युक्तियुक्तकरण से अब जिले के दूरस्थ व ग्रामीण अंचलों की शालाओं में भी सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध हो गए हैं। इससे बच्चों को अब गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों में भी बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।

शिक्षकों की नई और आवश्यकतानुसार पदस्थापना से जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। यह पहल न केवल बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को संतुलित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी एक सकारात्मक और दूरदर्शी प्रयास सिद्ध हो रही है।

शासन की इस पहल को शिक्षक समुदाय और अभिभावकों दोनों से सराहना मिल रही है। यह युक्तियुक्तकरण न केवल शिक्षक वितरण की समस्या का समाधान है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही नीति और पारदर्शी प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना संभव है।

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप में मनेन्द्रगढ़ बीईओ निलंबित

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रायपुर। सरगुजा संभाग के आयुक्त ने मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी मनेन्द्रगढ़ सुरेन्द्र प्रसाद जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य शासन के निर्देशानुसार शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के दौरान बरती गई अनियमितताओं के चलते की गई है। जारी आदेश के अनुसार, जायसवाल पर शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में हेरफेर करने, विषयों की गलत जानकारी देने और चक्रिय नियमों का पालन न करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

आदेश में तीन प्रमुख अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है जिस में माध्यमिक शाला लेदरी में वरिष्ठता क्रम में आगे होने के बावजूद श्रीमती गुंजन शर्मा को अतिशेष घोषित किया गया। इसी तरह प्राथमिक शाला चिमटीमार में नियुक्ति तिथि के आधार पर श्रीमती अर्णिमा जायसवाल को अतिशेष माना जाना चाहिए था, किंतु इसके विपरीत श्रीमती संध्या सिंह को अतिशेष सूची में रखा गया। माध्यमिक शाला साल्ही में शिक्षक सूर्यकांत जोशी के विषय की गलत जानकारी दी गई और विषय चक्र का पालन नहीं किया गया।

आयुक्त सरगुजा ने इसे कर्तव्य में लापरवाही और स्वैच्छाचारिता मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलम्बन की कार्रवाई की है। निलंबन की अवधि में जायसवाल का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर नियत किया गया है।

युक्तियुक्तकरण से शिक्षक विहीन शालाओं में अब फैलेगा ज्ञान का उजियारा

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रायपुर। रायगढ़ जिले के शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षिकीय शालाओं के लिए युक्तियुक्तकरण का कदम दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है। दूरस्थ अंचलों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय शाला होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। वह अब युक्तियुक्तकरण से दूर होने जा रहा है। रायगढ़ जिले के 21 शिक्षक विहीन और 267 एकल शिक्षिकीय स्कूलों को अब शिक्षक मिल चुके हैं। इससे इन शालाओं में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा।

राज्य शासन के दिशा-निर्देश में जिले में अतिशेष शिक्षकों के काउंसलिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने पश्चात अब जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों को नए शिक्षक मिल चुके है। इससे अब न केवल इन क्षेत्रों के स्कूलों को नए शिक्षक मिले है बल्कि विद्यार्थियों के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा भी सुनिश्चित हुई है। रायगढ़ जिले के अंतिम छोर धरमजयगढ़ विकासखंड के कुम्हीचुंआ के प्राथमिक शाला में 105 विद्यार्थी हैं, यह स्कूल शिक्षक विहीन था। लेकिन अब युक्तियुक्तकरण से यहां के विद्यार्थियों को 4 नए शिक्षक मिल गए हैं। इस बारे में सचिव श्री ईश्वर डनसेना ने बताया कि सरपंच एवं ग्रामीणों द्वारा बच्चों के भविष्य को देखते हुए शिक्षकों की मांग रखी गई थी। सुदूर क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। वर्तमान में शिक्षक नहीं होने से कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों का भविष्य अधर में था। लेकिन आज युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शाला को शिक्षक मिलने से बच्चों के भविष्य को आशा की एक नई किरण दिखने लगी है।

जिले के विकासखण्ड तमनार के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कोलम एक एकल शिक्षकीय शाला है जहां विद्यार्थियों की दर्ज संख्या 112 है।  गांव के सरपंच गंगाराम पोर्ते कहते है कि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला एकल शिक्षकीय होने से बच्चों को पढ़ाई में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। एक शिक्षक के भरोसे पूरे स्कूल का संचालन हो रहा था। उन्होंने बताया कि यहां लगभग दस गांव से बच्चे शिक्षा प्राप्त करने आते है। शिक्षकों की कमी से यहां स्कूल में पढ़ाई-लिखाई काफी प्रभावित हो रही थी। लेकिन आज युक्तियुक्तकरण से शाला को 02 शिक्षक और मिले है। इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी।

युक्तियुक्तकरण से पहले जिले के मैदानी इलाकों के स्कूलों में दर्ज संख्या के मान से अधिक शिक्षक कार्यरत थे और वहीं दूरस्थ ग्रामीण एवं पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों में विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के मान से शिक्षक कार्यरत नहीं होने के कारण शिक्षक, छात्र-छात्राओं के अध्यापन कार्य में जो असंतुलन की स्थिति निर्मित थी। संसाधनों के इस असंतुलित वितरण से कई विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई पर काफी नकारात्मक असर पड़ रहा था। विषय शिक्षकों की उपलब्धता नहीं होने से छात्रों को गणित और विज्ञान जैसे विषयों पर पकड़ बनाने में दिक्कत होती थी। उच्च शिक्षा के लिए इन संकायों में प्रवेश लेने की इच्छा से रुचि होने के बाद भी वंचित होना पड़ता था। जिसे युक्तियुक्तकरण के माध्यम से दूर करने का कार्य किया गया है। जिले में 21 स्कूल जहां शिक्षक ही नहीं थे वहां अब शिक्षकों की पदस्थापना हो चुकी है। वहीं 267 एकल शिक्षकीय स्कूलों में अन्य शिक्षकों की पोस्टिंग की गई है। इससे स्कूलों का संचालन अब बेहतर तरीके से हो पाएगा।

युक्तियुक्तकरण से कोकड़ी प्राथमिक शाला को मिला नया शिक्षक, शिक्षा व्यवस्था में आएगा सकारात्मक बदलाव

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रायपुर। राज्य शासन द्वारा विद्यालयों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की पहल का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। महासमुंद विकासखंड के ग्राम कोकड़ी (ग्राम पंचायत खट्टर) स्थित प्राथमिक शाला में वर्षों बाद एक अतिरिक्त शिक्षक की पदस्थापना की गई है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और संचालन व्यवस्था में स्पष्ट सुधार की उम्मीद की जा रही है।

प्रधानपाठक गेंदलाल कोकड़िया ने जानकारी दी कि विद्यालय पिछले लगभग 20 वर्षों से केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा था। एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं को पढ़ाने, प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी उठानी पड़ती थी, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना बेहद कठिन हो गया था।

अब युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत हेमंत कुमार देवांगन को अतिरिक्त शिक्षक के रूप में पदस्थ किया गया है। इससे विद्यालय में कक्षाओं का उचित विभाजन संभव होगा और दोनों शिक्षक मिलकर पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने, विद्यार्थियों की समझ को गहराई देने तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन देने में सक्षम होंगे।

प्रधानपाठक ने बताया कि पहले पठन-पाठन के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए समय नहीं मिल पाता था, लेकिन अब खेल, कला, पुस्तकालय संचालन, विज्ञान आधारित गतिविधियाँ जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकेगा। इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

गांववासियों और पालकों में इस सकारात्मक बदलाव को लेकर उत्साह है। उनका विवास है कि अब उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ समुचित मार्गदर्शन भी मिलेगा। यह नियुक्ति न केवल विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक नई उम्मीद की तरह है। युक्तियुक्तकरण की यह पहल दूरस्थ व ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

शिक्षकों का संतुलित पदस्थापना से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

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रायपुर। कोरिया जिले में शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने 5 जून को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यह प्रक्रिया शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण मरकाम एवं जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता भी मौजूद थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने बताया कि नगरीय और ग्रामीण अंचलों में शिक्षकों के पदस्थापना में असंतुलन है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षक अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि दूरस्थ गांवों में शिक्षकों की भारी कमी से शिक्षण गुणवत्ता और छात्र प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेंगे विषय विशेषज्ञ शिक्षक

कलेक्टर ने बताया कि अब गणित, भौतिकी, रसायन और जीवविज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित होगा और विद्यार्थियों को विषयवस्तु की बेहतर समझ मिलेगी। इन शिक्षकों का पुनः समायोजन कर जरूरतमंद विद्यालयों में पदस्थापना की जा रही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं, बल्कि शिक्षा सुधार की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम है। यह समूचा प्रयास शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। कलेक्टर ने कहा कि यह परिवर्तन जिले के शैक्षिक और समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे इस पहल को सकारात्मक रूप में जनमानस तक पहुंचाएं, ताकि समाज में शिक्षा को लेकर विश्वास और जागरूकता बढ़ सके।

दो प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल

जिले की स्थिति का विवरण देते हुए कलेक्टर ने बताया कि कोरिया जिले में 2 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 57 एकल शिक्षक स्कूल हैं। वहीं, 95 प्राथमिक और 75 पूर्व माध्यमिक शिक्षक जिले में अतिशेष हैं। इनका पुनः समायोजन कर शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया किसी भी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा में सुधार लाना है।

एक भी स्कूल का समायोजन नहीं

 जिले में 145 में से एक भी स्कूल का समायोजन नहीं किया गया है। राज्य में भी केवल 241 स्कूलों का समायोजन किया गया है, जबकि 10,297 स्कूल यथावत संचालित रहेंगे। युक्तियुक्तकरण के लाभों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों को बेहतर भवन, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकेंगी। साथ ही, बच्चों की ड्रॉपआउट दर में कमी, तीन बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति और पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित होगी।

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से कोरिया जिले की शिक्षा व्यवस्था होगी सुदृढ़, 121 शिक्षकों को नई पदस्थापना

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रायपुर। शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया आज कोरिया जिले में कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी की अध्यक्षता में जिला पंचायत के मंथन कक्ष में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर अपर कलेक्टर अरुण कुमार मरकाम, जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने जानकारी दी कि कोरिया जिले में कुल 121 शिक्षकों, जिनमें 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक, तथा 7 व्याख्याता शामिल हैं, को काउंसलिंग के पश्चात नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि कुछ शहरी स्कूलों में छात्र संख्या की तुलना में अधिक शिक्षक पदस्थ थे, जबकि कई दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी थी। इस समायोजन प्रक्रिया से अब उन विद्यालयों में भी शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी, जहां पहले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे।

कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन भी स्थापित होगा। इससे परीक्षा परिणामों में भी सुधार की संभावना है और शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की गई है। शिक्षक युक्तियुक्तकरण को शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सुदृढ़ और सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे न केवल शिक्षकों का उचित उपयोग संभव हो रहा है, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है।

 

 

छत्तीसगढ़ में शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से शिक्षा में नया संतुलन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और प्रभावशाली प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसको ध्यान में रखकर शालाओं और शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन किया जा रहा है। जहां जरूरत ज्यादा है, वहां शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को, जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीक के अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर मिल सके। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी।

कोरबा जिले के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में अब न्यूनतम दो व तीन शिक्षक पदस्थ किए गए हैं। 287 सहायक शिक्षक, 147 माध्यमिक शिक्षक और 75 व्याख्याताओं को काउंसलिंग के माध्यम से ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया है, जहां शिक्षक की जरूरत थी। इससे पोड़ी उपरोड़ा, पाली, करतला, कटघोरा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षकविहीन रहे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। गणित, विज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञों शिक्षक स्कूलों में उपलब्ध होंगे।

रायपुर के धरसीवां विकासखंड में कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के मान से शिक्षक अधिक पदस्थ हैं। नयापारा कन्या स्कूल में 33 छात्राओं पर 7 शिक्षक तथा रविग्राम में 82 विद्यार्थियों पर 8 शिक्षक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से इन शिक्षकों को आवश्यकता वाली शालाओं में पदस्थ किया जाएगा, जिससे शिक्षक और छात्र के अनुपात का संतुलन कायम होने के साथ ही दूरस्थ इलाकों के बच्चों को भी अध्यापन के लिए शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

इसी तरह शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन के चलते राजनांदगांव और दुर्ग जिले के ग्रामीण स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट आई है। राजनांदगांव के घोटिया स्कूल में 103 छात्रों पर मात्र 3 व्याख्याता हैं, वहीं दुर्ग के मुरमुदा, सिलितरा और बिरेझर जैसे स्कूलों में पर्याप्त संख्या में व्याख्याता न होने के कारण इन स्कूलों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है। इसके उलट शहरी स्कूलों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण से अब इस असमानता को दूर किया जा रहा है।

बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा में कुल 1611 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इससे शैक्षणिक संसाधनों का समुचित वितरण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, खेल सामग्री जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, एक ही परिसर में संचालित शालाओं का एकीकरण कर प्रशासनिक खर्च में भी बचत होगी। कमोवेश यह स्थिति कोरिया जिले में मिली, जिसके कारण जिले में 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक व 7 व्याख्याताओं को ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया, जहां शिक्षकों की जरूरत रही है। जिलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है और अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के माध्यम से उनकी पसंद की शालाओं में पदस्थ किया जा रहा है।

सरगुजा जिले में भी युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 283 सहायक शिक्षकों को उन शालाओं में भेजा गया है, जहां शिक्षकों की जरूरत थी। जांजगीर जिले में 18 प्रधान पाठक, 196 शिक्षक और 436 सहायक शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पारदर्शी व वरिष्ठता प्रणाली के आधार पर पूर्ण की गई। चयनित शिक्षकों को तत्काल पदस्थापना आदेश भी दे दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षक युक्तियुक्तकरण की यह नीति न केवल शैक्षणिक असमानताओं को दूर कर रही है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

दुर्ग जिले में शिक्षकों की पोस्टिंग में असंतुलन से प्रभावित हो रहा ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम

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रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने शिक्षा विभाग को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि जिले के ग्रामीण अंचलों के शासकीय हाई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी तथा शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की अधिकता के कारण शैक्षिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण अंचल के स्कूलों का परीक्षा परिणाम औसत से भी कम है। शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए युक्तियुक्तकरण जरूरी है। ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थापना करने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और रिजल्ट में सुधार होगा। 

जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने रिपोर्ट में उल्लेखित किया है कि विकासखंड धमधा अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल मुरमुदा में स्वीकृत 6 पदों के विरुद्ध मात्र 3 व्याख्याता कार्यरत हैं, जबकि कक्षा दसवीं की छात्र संख्या 63 है। शिक्षक अभाव के कारण यहाँ का वार्षिक परीक्षा परिणाम मात्र 47.62 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार शासकीय हाई स्कूल सिलितरा और शासकीय हाई स्कूल बिरेझर में भी स्थिति अत्यंत दयनीय है। दोनों विद्यालयों में स्वीकृत 6-6 पदों के विरुद्ध एक भी व्याख्याता पदस्थ नहीं है। क्रमशः 81 एवं 63 छात्रों की दर्ज संख्या वाले इन विद्यालयों में परीक्षा परिणाम क्रमशः 36.59 प्रतिशत एवं 35.00 प्रतिशत ही रहा है।

वहीं दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में छात्रों की अपेक्षा शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से कहीं अधिक है। उदाहरणस्वरूप, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केम्प-1 मिलाई में 225 छात्रों के लिए स्वीकृत 7 पदों के विरुद्ध 17 शिक्षक कार्यरत हैं, जो कि दर्ज संख्या के मान से 10 शिक्षक अधिक हैं। इसी प्रकार नेहरू शासकीय प्राथमिक शाला दुर्ग में 113 छात्रों के लिए स्वीकृत 4 पदों की तुलना में 11 शिक्षक पदस्थ हैं, जो कि 7 शिक्षक अतिरिक्त हैं। जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने ग्रामीण विद्यालयों में शिक्षकों की शीघ्र पदस्थापना  की आवश्यकता जताई है, ताकि परीक्षा परिणाम में सुधार लाया जा सके और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

हजारों की संख्या में स्कूल बंद होने की बातें भ्रामक और तथ्यहीन, सिर्फ 166 स्कूलों का होगा समायोजन शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह रहेंगे चालू

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रायपुर। शिक्षा विभाग ने कतिपय संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा युक्तियुक्तकरण से हजारों की संख्या में स्कूलों के बंद होने की बात को पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि असलियत इससे बिलकुल अलग है। प्रदेश सरकार की ओर से जारी युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी की पढ़ाई रोकना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

राज्य के कुल 10,463 स्कूलों में से सिर्फ 166 स्कूलों का समायोजन होगा। इन 166 स्कूलों में से ग्रामीण इलाके के 133 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें छात्रों की संख्या 10 से कम है और एक किलोमीटर के अंदर में दूसरा स्कूल संचालित है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 33 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें दर्ज संख्या 30 से कम हैं और 500 मीटर के दायरे में दूसरा स्कूल संचालित है। इस कारण 166 स्कूलों को बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से समायोजित किया जा रहा है, इससे किसी भी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शेष 10,297 स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे। उनमें केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक स्तर पर आवश्यक समायोजन किया जा रहा है। स्कूल भवनों का उपयोग पहले की तरह ही जारी रहेगा और जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ शिक्षक भी उपलब्ध रहेंगे।

यहाँ स्पष्ट करना जरूरी है कि स्कूलों का “समायोजन” और “बंद” होना अलग चीज है। समायोजन का अर्थ है पास के स्कूलों को एकीकृत कर बेहतर संसाधनों का उपयोग। इसका मकसद बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, न कि स्कूल बंद करना। शिक्षा विभाग ने लोगों से अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। सच्चाई यह है कि राज्य सरकार स्कूलों को मजबूत करने, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और हर बच्चे को बेहतर शिक्षा देने की सुदृढ व्यवस्था में जुटी है।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण यानि तर्कसंगत समायोजन कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहां संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीकी अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जाए, ताकि  बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर उपलब्ध हो सके। इससे बच्चों को ज्यादा योग्य और विषय के हिसाब से विशेषज्ञ शिक्षक मिलेंगे। स्कूलों में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर आदि की सुविधाएं सुलभ होंगी।  शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में अब पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। जिन स्कूलों में पहले गिनती के ही छात्र होते थे, वे अब पास के अच्छे स्कूलों में जाकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस बदलाव से शिक्षा का स्तर सुधरेगा।

सरकार की मंशा साफ है, हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। यही वजह है कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शिक्षकों की तैनाती सिर्फ संख्या के हिसाब से नहीं बल्कि जरूरत के हिसाब से हो। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक ठोस बदलाव है, जिससे आने वाली पीढ़ी को मजबूत नींव मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुधार की नई पहल: युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को उत्कृष्ट स्वरूप प्रदान करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता से लागू करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के पीछे शिक्षा विभाग की वह समीक्षा रिपोर्ट है, जिसमें राज्यभर के सरकारी स्कूलों में संसाधनों के असमान वितरण की गंभीर स्थिति सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 211 शासकीय विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी छात्र दर्ज नहीं है, फिर भी वहां नियमित शिक्षक पदस्थ हैं। इससे न केवल शैक्षणिक संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि आवश्यकता वाले विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

उदाहरण के लिए, सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड की प्राथमिक शाला साजाभवना में कोई छात्र नहीं है, जबकि एक सहायक शिक्षक वहां कार्यरत हैं। इसी तरह हर्राटिकरा स्कूल में भी छात्र संख्या शून्य है, लेकिन वहां एक प्रधान पाठक और दो सहायक शिक्षक पदस्थ हैं।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे विद्यालयों की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है, और अब वहां से शिक्षकों को तत्काल उन स्कूलों में नियोजित किया जाएगा जहां उनकी आवश्यकता है।

दूसरी ओर राज्य के अनेक दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षक संकट की स्थिति बनी हुई है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुंवारपुर में विषयवार शिक्षक न होने के कारण वर्ष 2024-25 में कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम महज 40.68 प्रतिशत रहा, जो राज्य औसत से बहुत कम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जब कुंवारपुर प्रवास पर थे, तब ग्रामीणों ने उनके समक्ष शिक्षक नियुक्तियों की मांग पुरज़ोर ढंग से रखी। ग्रामीणों ने कहा कि गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी जैसे विषयों के लिए वर्षों से शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि जहां शिक्षक अनुपयोगी रूप से पदस्थ हैं, वहां से उन्हें शीघ्रता से जरूरतमंद स्कूलों में भेजा जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक वहीं तैनात हों जहां छात्र हैं – यही सुशासन की प्राथमिक शर्त है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त करने का अभियान है। उन्होंने कहा कि हम उस व्यवस्था की नींव रख रहे हैं, जहाँ शिक्षक और छात्र दोनों अपनी सही जगह पर हों।  युक्तियुक्तकरण इस परिवर्तन की वह कुंजी है, जो वर्षों की उलझनों को सुलझाएगी और शिक्षा को नई ऊँचाई देगी। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय समय की माँग है। यदि इसे निष्पक्षता और डेटा-आधारित पद्धति से लागू किया जाए, तो छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली देश में एक आदर्श मॉडल बन सकती है।

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने तुरंत युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को सक्रिय किया है, जिसमें पारदर्शिता, मानवीय दृष्टिकोण और स्कूलों की जरूरत को प्राथमिक आधार बनाया गया है। इस कदम से एक ओर शिक्षकविहीन स्कूलों को शिक्षक मिल सकेंगे, वहीं दूसरी ओर छात्रविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना को  रोका जा सकेगा। यह पुनर्संरचना शिक्षा प्रणाली को संतुलित, कुशल और परिणामोन्मुखी बनाएगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का युक्तियुक्तकरण का निर्णय महज़ व्यवस्थागत सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा को सार्थक और समावेशी बनाने की ऐतिहासिक पहल है। यह उस सोच का प्रतिबिंब है जो कहती है – शिक्षा वहां शुरू होती है, जहां शिक्षक और छात्र दोनों उपस्थित हों – एक उत्तम उद्देश्य के साथ स्वर्णिम भविष्य की ओर अग्रसर होते हुए,  इस प्रेरणा के साथ कि हर पाठशाला देश की अगली पीढ़ी का निर्माण स्थल है।

स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप 10,463 शालाओं का युक्तियुक्तकरण

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने राज्य में कुल 10,463 शालाओं के युक्तियुक्तकरण का आदेश जारी किया है, जिसमें ई-संवर्ग की 5849 और टी-संवर्ग की 4614 शालाएं शामिल हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह युक्तियुक्तकरण आदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के निर्देशों के अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संसाधनों का संतुलित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग का दूरदर्शी निर्णय स्कूल शिक्षा को बेहतर, समावेशी और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल है। मुख्यमंत्री साय  ने स्कूलों के युक्तियुक्तकरण को लेकर शिक्षा विभाग के निर्णय की सराहना करते हुए कहा है कि यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षकों के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण और निरंतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ही परिसर में विभिन्न स्तरों के विद्यालयों का समायोजन, न केवल प्रशासनिक दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि इससे शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी और छात्र ड्रॉपआउट की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी। इससे स्कूली वातावरण अधिक प्रभावशाली बनेगा और बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उठाया गया यह कदम छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने जानकारी दी कि शालाओं के युक्तियुक्तकरण अंतर्गत एक ही परिसर में संचालित 10,297 विद्यालयों को युक्तियुक्त किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में एक किलोमीटर के दायरे में स्थित 133 विद्यालयों और शहरी क्षेत्र में 500 मीटर के दायरे में स्थित 33 विद्यालयों को भी युक्तियुक्त किया गया है।

उन्होंने बताया कि इस पहल से शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षकीय शालाओं में अब अतिशेष शिक्षकों की तैनाती संभव होगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सीधा सुधार देखने को मिलेगा। युक्तियुक्तकरण के कारण शिक्षकों की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे अन्य जरूरतमंद शालाओं में भी संतुलन बन पाएगा। इस समायोजन से स्थापना व्यय में भी कमी आएगी, जिससे शैक्षणिक ढांचे पर अधिक निवेश संभव होगा।

स्कूल शिक्षा सचिव ने जानकारी दी कि एक ही परिसर में पढ़ाई की निरंतरता बने रहने से बच्चों की ड्रॉपआउट दर घटेगी, और छात्र ठहराव दर में सुधार होगा।शालाओं के युक्तियुक्तकरण से बच्चों को बार-बार प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी शिक्षा यात्रा अधिक सहज और निरंतर होगी। उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण से विद्यालय परिसरों में बेहतर अधोसंरचना तैयार करना भी सरल होगा, जिसमें पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशाला और खेल सुविधाएं साझा की जा सकेंगी। राज्य सरकार का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित क्लस्टर विद्यालय अवधारणा के अनुरूप है, जहां एकीकृत परिसर में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई सुनिश्चित की जाती है।

उन्होंने कहा कि  इस प्रक्रिया में केवल प्रशासनिक समन्वय किया गया है, न कि किसी पद को समाप्त किया गया है। इस कदम से शिक्षकों का न्यायसंगत वितरण संभव होगा और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक सुलभ रूप से उपलब्ध हो सकेगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत छात्रों और शिक्षकों के अनुपात के प्रावधानों का पालन करते हुए युक्तियुक्तकरण किया गया है, जिसकी राज्य में  शैक्षणिक गुणवत्ता के स्तर को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

"छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल न केवल वर्तमान शैक्षणिक ढांचे को सुदृढ़ करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी, सशक्त और समावेशी शिक्षा व्यवस्था का आधार तैयार करेगी। स्कूल शिक्षा विभाग का स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का दूरदर्शी निर्णय प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर, समावेशी और प्रभावशाली बनाने की दिशा मंर एक सशक्त पहल है। युक्तियुक्तकरण से न केवल शैक्षणिक संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित होगा, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निरंतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा। यह छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"

 

महासमुंद : पीडीएस दुकान के संचालन हेतु इच्छुक संस्था 3 अप्रैल तक कर सकते हैं आवेदन

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महासमुंद। अनुविभाग पिथौरा के अंतर्गत सहकारी समितियों के द्वारा संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों का समर्पण किया गया है। इन समर्पित ग्राम पंचायतों में शासन के निर्देशानुसार एवं कार्यालय कलेक्टर (खाद्य शाखा ) महासमुंद द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकानों का युक्तियुक्तकरण किया जाना है। इसके अनुसार नवीन शासकीय उचित मूल्य दुकान का नवीन आबंटन किया जाना है।

इनमें 15 ग्राम पंचायत अमलीडीह, उतेकेल, देवलगढ़, बोइरडीह, बामडाडीह, सागुनढाप, ढाबाखार, जामजुड़ा, बरनईदादर, धनोरा, राजसवैयाखुर्द, खैरखुटा, नयापाराकला, दुरूगपाली एवं डूमरपाली में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के तहत विकासखंड में स्थित वृहत्ताकार आदिम जाति बहुद्देशीय सहकारी समितियों, प्राथमिक कृषि साख समितियों, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व सहायता समूहों, ग्राम पंचायतां, अन्य उपभोक्ता सहकारी समितियों से जो शासकीय उचित मूल्य की दुकान के संचालन के लिए इच्छुक है, 

उन समितियों से निर्धारित प्रपत्र में आवेदन समस्त दस्तावेजों के साथ आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक संस्था विहित प्रारूप एक में अपना आवेदन 03 अप्रैल 2023 तक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय पिथौरा में कार्यालयीन अवधि में जमा कर सकते हैं। उक्त सभी ग्राम पंचायतों में उचित मूल्य की दुकान की आबंटन की कार्यवाही छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण ) आदेश 2016 की कंडिका 09 के तहत की जाएगी। 

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