Media24Media.com: भारत बंद

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आज भारत बंद, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने नहीं दिया समर्थन

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रायपुर। अनुसूचित जाति व जनजाति आरक्षण में क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ देश भर के विभिन्न संगठनों ने आज 21 अगस्त को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस देशव्यापी बंद को छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने समर्थन नहीं देने का निर्णय लिया है।


बंद के मद्देनजर छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने ‘भारत बंद’ के आव्हान को लेकर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ और सर्व समाज के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। यह बैठक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी आरक्षण वर्गीकरण के आदेश के विरोध में प्रस्तावित ‘भारत बंद’ के समर्थन के लिए चेम्बर का रुख जानने के लिए आयोजित की गई थी।

चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि इस विषय पर चेम्बर के पदाधिकारियों और सर्व समाज के प्रतिनिधियों के बीच गहन चर्चा हुई। हालांकि, चेम्बर से जुड़े राष्ट्रीय संगठनों ने ‘भारत बंद’ के समर्थन में अनभिज्ञता जताई और इसके समर्थन से इंकार कर दिया। चेम्बर के प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि चेम्बर से जुड़े छोटे व्यापारियों, रेहड़ी पटरी वालों और फल-सब्जी, दूध एवं अन्य कच्चे सामान के व्यापार से जुड़े व्यापारिक संगठनों को अचानक बंद की स्थिति में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसीलिए, बिना पूर्व सूचना और व्यापारिक संघों की बैठक के बिना, ‘भारत बंद’ का समर्थन करना संभव नहीं है।

इस बैठक में चेम्बर के अन्य प्रमुख पदाधिकारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद गोलछा, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र जग्गी, कार्यकारी महामंत्री विकास आहूजा, और सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चेम्बर ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी आकस्मिक बंद का समर्थन नहीं करेंगे, जिससे छोटे व्यापारियों और अन्य संबंधित लोगों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने भी बंद से किया किनारा
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि एसोसिएशन ने बंद का समर्थन नहीं किया है, लेकिन जिन इलाकों में एसटी/एससी वर्ग का प्रभाव है उन इलाकों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है, जबकि शहरी इलाकों में स्कूल आंशिक रूप से खुले रहेंगे। राजीव गुप्ता ने बताया कि बंद के चलते बस और दूर दराज के इलाकों से स्कूल आने वाले छात्रों को परेशानी न हो इसलिए स्कूल को खोलकर रखना है या बंद रखना है इसका निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय स्कूल प्रबंधन को दिया गया है।

कल 21 अगस्त को रहेगा भारत बंद, सेवाएं रहेंगी बाधित, क्या खुलेगा, पढ़े पूरी खबर

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 नई दिल्लीः एससी/एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ में 21 अगस्त 2024 को देशभर में भारत बंद का आह्वान किया है. आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने बुधवार को देशभर में इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, जिसका समर्थन कई दलित समूहों ने किया है. इसके साथ ही राजनीति पार्टी बसपा ने भी भारत बंद का सर्मथन किया है.


क्यों हैं भारत बंद?
मंगलवार को एससी/एसटी आरक्षण पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमीलेयर बनाने की अनुमति दी है. कोर्ट ने कहा कि जिसे इसकी असल में जरूरत है, उन्हें आरक्षण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. तभी आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने भारत बंद करन का ऐलान कर कोर्ट से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.

भारत बंद के दौरान क्या बंद रहेगा
भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा रहेगा और क्या बंद रहेगा इसको लेकर कोई आधिकारिक ऐलान अभी तक नहीं किया गया है। हालांकि ऐसी आशंका है कि भारत बंद के दौरान सार्वजनक परिवहन सेवाओं पर इसका असर पड़ सकता है। हो सकता है कि कुछ जगहों पर प्राइवेट दफ्तर बंद किए जा सकते हैं।

ये सेवाएं जारी रहेंगी
भारत बंद के दौरान अस्पताल और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी। बैंक दफ्तर और सरकारी कार्यालय बंद रखने संबंधी अभी तक कोई आदेश सरकार की तरफ से नहीं आया है। इसलिए माना जा रहा है कि बुधवार को बैंक और सरकारी दफ्तर खुले रहेंगे। 

भारत बंद के क्रम में महासमुन्द जिले में भी बंद का आह्वान

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  महासमुंद । कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने बताया कि किसान यूनियनों ने 16 फरवरी 2024 को भारत बंद की घोषणा की है। इस राष्ट्रव्यापी बंद के प्रमुख मुद्दों में एमएसपी गारंटी की मांग और बेरोजगारी और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान शामिल है।


किसान संघों ने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, पेंशनभोगियों, छोटे व्यापारियों, ट्रक ऑपरेटरों, पेशेवरों, पत्रकारों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों से हाथ मिलाने और राष्ट्रीय स्तर पर आजीविका के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया है।

जिले के सभी ब्लाक अध्यक्ष निर्देशित करते हुए कहा कि, 16 फरवरी 2024 को आयोजित, भारत बंद का समर्थन करते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से आम नागरिकों को आजीविका के महत्वपूर्ण मुद्दों से जागरूक करें और भारत बंद के आध्यान को हमारे अन्नदाताओं के प्रति एकजुटता के साथ खुले मंच से समर्थन कर भारत बंद को सफल बनायें जिला कांग्रेस व ब्लाक काँग्रेस के पदाधिकारीगण, जोन अध्यक्ष, सेक्टर प्रभारी, बुथ अध्यक्ष, युवक काँग्रेस ,महिला काँग्रेस,NSUI, किसान काँग्रेस,सेवादल काँग्रेस, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाकाँग्रेस के पदाधिकारी, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्यगण, नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षदगण, एवं समस्त काँग्रेस के प्रकोष्ठ के पदाधिकारीगण आप सभी से शमिल होकर बंद को सफल बनाने की अपील की व महासमुंद जिला के सभी व्यापारी बंधुओ से इस बंद में सहयोग की अपील कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने की।

28 और 29 मार्च को ट्रेड यूनियनों ने की भारत बंद की घोषणा, बैंकों के कामकाज होंगे प्रभावित

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अगर आप भी इस हफ्ते बैंक के काम निपटाने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए। क्योंकि अगले दो दिनों तक बैंकिंग काम प्रभावित रह सकता है। दरअसल, ट्रेड यूनियनों ने 28 और 29 मार्च को भारत बंद रखने का ऐलान किया है। ये बंद केंद्र सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों, किसानों और आम लोगों पर पड़ रहा है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि दो दिन के भारत बंद को लेकर कोयला, स्टील, ऑयल, टेलीकॉम, पोस्टल, आईटी, कॉपर, बैंक और बीमा क्षेत्रों को एक नोटिस भेजा गया है।

बैंक यूनियनों के कर्मचारियों ने भी बंद का समर्थन किया है। 28 और 29 मार्च को बैंको की प्राइवेटाइजेशन और बैंकिंग लॉ ऐक्ट 2021 को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयज एसोसिएशन के कर्मचारी संगठनों ने 22 मार्च को बैठक की थी, जिसके बाद इस बंद का ऐलान किया गया है। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ ने फेसबुक पर कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र हड़ताल में शामिल होगा।

इन मुद्दों को लेकर हड़ताल

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की सरकार की योजना के साथ-साथ बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक 2021 के विरोध में बैंक संघ हड़ताल में भाग ले रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने एक बयान जारी कर ग्राहकों को जानकारी दी है कि 28 और 29 मार्च को बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हड़ताल में कोयला, इस्पात, तेल, दूरसंचार, डाक, आयकर, तांबा और बीमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिकों के भाग लेने की उम्मीद है। रेलवे और रक्षा क्षेत्र की यूनियनें देश भर में सैकड़ों स्थानों पर हड़ताल के समर्थन में जन लामबंदी करेंगी। दो दिनों के ट्रेड यूनियन्स के हड़ताल के दौरान सामान्य सेवाएं प्रभावित रहेंगी, जिसकी वजह से बैंक में कामकाज प्रभावित हो सकता है।

SBI ने की व्यवस्था

वहीं भारतीय स्टेट बैंक के मुताबिक भारतीय बैंक संघ ने उसे सूचित किया है कि ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयज एसोसिएशन, बैंक एम्प्लॉयज फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने नोटिस देकर देशव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसले के बारे में जानकारी दी है। भारतीय स्टेट बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि बैंक ने हड़ताल के दिनों में अपनी शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की है, जिससे काम कम प्रभावित होगा। 

बढ़ती महंगाई को लेकर ट्रेड यूनियन का भारत बंद आज, संयुक्त किसान मोर्चा ने भी दिया समर्थन

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देश में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Rising petrol and diesel prices), गुड्स और सर्विस टैक्स, ई-बिल को लेकर व्यापारिक संस्था द कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की तरफ से आज 'भारत बंद' का ऐलान किया गया है। इसके तहत देशभर के 8 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 40 हजार ट्रेड एसोसिएशंस ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की तरफ से किए जाने वाले ‘भारत बंद’ का समर्थन किया है।





PCC चीफ ने दिया समर्थन





यह बंद वस्तु और सेवा कर (GST) के प्रावधानों में समीक्षा की मांग को लेकर किया जा रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भी इस बंद का समर्थन किया है। PCC चीफ मोहन मरकाम ने सभी जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटीयों को व्यापारियों के बंद के आह्वान को समर्थन देने के निर्देश जारी किए हैं।





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ई-वे बिल को खत्म करने को लेकर ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन (AITWA) ने भी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से किए जाने वाले भारत बंद का समर्थन किया है। एक बयान में कैट ने कहा है कि देश भर में सभी ट्रांसपोर्ट कंपनियां शुक्रवार को बंद रहेंगी। इसके अलावा उसने कहा कि लघु उद्योग, हॉकर्स, महिला उद्यमी, स्वयं उद्यमियों एवं व्यापार से जुड़े अन्य क्षेत्रों के राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय संगठन भी व्यापार बंद को अपना समर्थन देंगे।





1500 छोटे-बड़े संगठन देंगे धरना





बयान में कहा गया है कि सभी राज्यों में चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स अधिवक्ता के संगठन भी बंद को समर्थन देंगे। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया और महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली सहित देश भर में सभी राज्यों के लगभग 1500 छोटे-बड़े संगठन शुक्रवार को धरना देंगे।





व्यापारियों में बड़ा गुस्सा





भरतिया और खंडेलवाल ने कहा कि 22 दिसंबर और उसके बाद जीएसटी नियमों में एकतरफा अनेक संशोधन किये गए जिनको लेकर देश भर के व्यापारियों में बड़ा गुस्सा है। इन संशोधनों द्वारा कर अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए गए हैं, जिनमें विशेष तौर पर अब कोई भी अधिकारी अपने विवेक के अनुसार कोई भी कारण से किसी भी व्यापारी का जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर ससपेंड कर सकता है।





नीतियों का उल्लंघन





उन्होंने कहा की इस प्रकार के नियमों से न केवल भ्रष्टाचार बढ़ेगा बल्कि अधिकारी किसी भी व्यापारी को प्रताड़ित कर सकेंगे। भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा कि इसी प्रकार जिस तरह से विदेशी ई कॉमर्स कंपनियां अपने मनमाने तरीके से ई-कॉमर्स के कानून एवं नीतियों का उल्लंघन कर रही है। उसको रोकने के लिए सरकार को शीघ्र ही एफडीआई पालिसी में नया प्रेस नोट जारी करना चाहिए और कानून का उल्लंघन करने वाली ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।





बंद का समर्थन





कैट ने कहा कि एक करोड़ ट्रांसपोर्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने बंद का समर्थन किया है। हॉकरों के राष्ट्रीय संगठन हॉकर्स संयुक्त कार्रवाई समिति ने भी बंद का समर्थन किया है। हालांकि, अन्य व्यापारी संगठनों मसलन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा कि वे बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं।





कैट के महासचिव ने दी जानकारी





कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सभी राज्यों के 1,500 बड़े और छोटे संगठन जीएसटी संशोधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं मसलन दवा की दुकानों, दूध और सब्जी की दुकानों को बंद से बाहर रखा गया है। वहीं फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव वी के बंसल ने कहा कि कुछ मांगों के समर्थन में हम दुकानें बंद करने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, हमारा मानना है कि पिछले 43 माह के दौरान जीएसटी अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है।





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दिल्ली की सीमाओं पर नये कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृहस्पतिवार को किसानों से 26 फरवरी को परिवहन एवं श्रमिक संघों द्वारा बुलाये गये भारत बंद में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लेने की अपील की। व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)व्यवस्था के प्रावधानों की समीक्षा की मांग को लेकर बुलाये गये भारत बंद के मद्देनजर 26 फरवरी को देशभर में सभी वाणिज्यिक बाजार बंद रहेंगे।





भारत बंद को छत्तीसगढ़ में मिला कांग्रेस का समर्थन





कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने शुक्रवार को देश भर में भारत व्यापार बंद का आह्वान किया है। पीसीसी चीफ मोहन मरकाम ने सभी जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटीयों को व्यापारियों के बंद के आह्वान को समर्थन देने के निर्देश जारी किए हैं। कैट ने 26 फरवरी को देशभर में विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है। इस दौरान सभी बाजार बंद रहेंगे। सभी राज्यों के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।


किसान आंदोलन : आठ दिसंबर को भारत बंद करेंगे किसान

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नई दिल्ली: दिल्ली को घेरने के बाद किसानों का यह आंदोलन (Peasant movement) पूरे देश में फैलता जा रहा है। किसानों ने अब 8 दिसम्बर को भारत बंद (8 December Bharat band) की घोषणा की है। इस दौरान सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाए जाएंगे, इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे। हालांकि कल सरकार के साथ एक दौर की बात और होना है, पर किसान बिल वापसी और MSP की गारंटी से कम पर तैयार नहीं हैं।





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किसानों की मांग है, कि MSP स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों की तरह C2+50 परसेंट होना चाहिए। इससे पहले बीते रोज पूरे देश में 2 घंटे के चक्का जाम किया गया, अब 5 दिसम्बर को हर गांव में मोदी, अंबानी और अडानी का पुतला जलाया जाएगा।





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सिंघु बॉर्डर पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत (8 December Bharat band) में हो रहा है और आगे भी होगा। हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कल कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे।





प्रेस वार्ता के दौरान आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि आज तमिलनाडु में और कर्नाटक में हमारा प्रदर्शन था। अब इन किसानों को भी दिल्ली आने को बोल दिया गया है। पूरे देश के किसानों को दिल्ली आने का आह्वान किया गया है। अब सरकार से लड़ाई आर पार की होगी। आंदोलन को लेकर पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है।


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