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Ram Navami 2024: कब मनाई जा रही राम नवमी, पूजा के लिए जानें शुभ मुहूर्त

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 Ram Navami 2024: धार्मिक पुराणों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम ने माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया था। हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी मनाई जाती है। राम नवमी को देशभर में बड़े ही धूम- धाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री राम की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भगवान श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में हुआ था। भगवान श्री राम की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। आइए जानते हैं, राम नवमी डेट, पूजा-विधि और शुभ मुहूर्त...


राम नवमी डेट- 17 अप्रैल, 2024, बुधवार

मुहूर्त-

नवमी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 16, 2024 को 01:23 पी एम बजे
नवमी तिथि समाप्त - अप्रैल 17, 2024 को 03:14 पी एम बजे

राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त - 11:10 ए एम से 01:43 पी एम

अवधि - 02 घण्टे 33 मिनट्स

राम नवमी पूजा विधि

इस पावन दिन शुभ जल्दी उठ कर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
अपने घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
घर के मंदिर में देवी- देवताओं को स्नान कराने के बाद साफ स्वच्छ वस्त्र पहनाएं।
भगवान राम की प्रतिमा या तस्वीर पर तुलसी का पत्ता और फूल अर्पित करें।
भगवान को फल भी अर्पित करें।
अगर आप व्रत कर सकते हैं, तो इस दिन व्रत भी रखें।
भगवान को अपनी इच्छानुसार सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
इस पावन दिन भगवान राम की आरती भी अवश्य करें।
आप रामचरितमानस, रामायण, श्री राम स्तुति और रामरक्षास्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
भगवान के नाम का जप करने का बहुत अधिक महत्व होता है। आप श्री राम जय राम जय जय राम या सिया राम जय राम जय जय राम का जप भी कर सकते हैं। राम नाम के जप में कोई विशेष नियम नहीं होता है, आप कहीं भी कभी भी राम नाम का जप कर सकते हैं।

राम नवमी व्रत पूजा सामग्री लिस्ट

श्री राम जी का चित्र अथवा मूर्ति
पुष्प
नारियल
सुपारी
फल
लौंग
धूप
दीप
घी
पंचामृत
अक्षत
तुलसी दल
चंदन
मिष्ठान

राम नवमी के दिन भगवान राम की विधि- विधान से पूजा- अर्चना करनी चाहिए। इस दिन भगवान राम के मंत्रों का जप करने से सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है और भगवान राम का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

राम

राम नाम ही स्वंय सबसे बड़ा और सिद्ध मंत्र है। जो व्यक्ति रोजाना राम नाम का जप करता है उस पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता है। राम नवमी के पावन दिन आप अपनी इच्छानुसार राम नाम का जप जरूर करें।

ऊॅं रां रामाय नम:

इस मंत्र का जप करने से सभी विपदाएं दूर हो जाती हैं। भगवान राम का यह मंत्र काफी प्रभावशाली और शक्तिशाली है। राम नवमी के दिन इस मंत्र का जप जरूर करें। 

लाफिनकला मे 16 मानस मंडलियो ने दी सस्वर प्रस्तुति

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  महासमुन्द । ग्राम लाफिनकला में बसंत पंचमी के अवसर पर श्रीरामचरित मानस गान सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ के ख्यात 16 टीमों ने भाग लेकर मनमोहक प्रस्तुति दी। जय बजरंग मानस मंडली के द्वारा भगवान राम की पूजा अर्चना व मानस गान कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। वहीं आमंत्रित 16 मंडलियों द्वारा मानस गान किया गया।


रात्रि में छत्तीसगढ की संस्कृति जस जगराता कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन कुमारी सोनिया साहू व शिक्षक गोवर्धन साहू ने किया। गुरुवार को राजीव लोचन मानस परिवार परतेवा गरियाबंद, जय सिद्धेश्वर मानस परिवार देवरतिल्दा, गुरू बैताल मानस परिवार मगरलोड,भूमिजा महिला मानस परिवार गुडियारी रायपुर, प्रज्ञा मानस परिवार सोरिद गरियाबंद, माधुर्य मानस प्रचार पोटियाडीह, इसी प्रकार द्वितीय दिवस शुक्रवार को श्री राम मानस परिवार मोतिमपुर, रेशमी महिला मानस मंडली बिरकोनी, स्तुति बालिका मानस परिवार अमोरी झलप,शारदा रानी बालिका मानस परिवार सोरिद,तुलसी के फूल पंडवानी मंडली मड़ेली छुरा, मानस परिवार कठौली, शनिवार को तिलोचन राघव मानस परिवार पारागांव आरंग, हंस वाहिनी बालिका मानस परिवार भिलाई दुर्ग,भगवती मानस परिवार सेनचुवा, भरत भाई मानस परिवार भटगांव सोरम द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत की गई। सभी प्रतिभागी मंडली को सम्मान राशि दी गई। आयोजन समिति के अध्यक्ष हरिराम साहू, सचिव रामजी साहू, कोषाध्यक्ष जनक राम साहू, संचालक गोवर्धन साहू, श्री राम जानकी मंदिर समिति के अध्यक्ष गिरीश साहू ,सचिव संतराम साहू, ग्राम समिति अध्यक्ष रामकुमार साहू, ग्राम समिति सचिव तोषकुमार साहू, सरपंच हेमीन पटेल, उपसरपंच डुमन लाल साहू,पूर्व सरपंच केतन साहू,पंचगण कमलेश साहू,झलक राम साहू , पूर्णिमा साहू,रोशनी वैष्णव,नेहा साहू, इंदिया साहू, सरपंच प्रतिनिधि नेतन पटेल,एवं आयोजन समिति के सदस्य हेमूराम साहू, सुखेन्द साहू, ओमप्रकाश साहू,पंचराम साहू, जीवराखन साहू, पुरानिक साहू, पवन साहू, विजय साहू, धर्मेन्द्र साहू,लोकू साहू, समारू विश्वकर्मा, गोविंद साहू ,तिलक पटेल, तुलस राम पटेल,रोमन पटेल,अजय पटेल,प्रदीप तुकाराम साहू का विशेष सहयोग रहा। वही कार्यक्रम का आनंद लेने नगर पालिका महासमुंद के अध्यक्ष राशि महिलांग, पार्षद मीना वर्मा, कर्मा जागृति महिला समूह महासमुंद के अध्यक्ष सती साहू,व आसपास के ग्रामीण व बड़ी संख्या मे लोग उपस्थित होकर कार्यक्रम का आनंद लिया।

भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा हमारी पहचान, ध्वाजारोहण के बाद बोले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज 75 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रदेश की जनता को संबोधित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद परेड की सलामी ली।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा हमारी पहचान है। हम ‘रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाई पर वचन न जाई’ का अनुसरण करते हैं। हमारी चेतना में एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन समाहित है, जो हमें मानव धर्म के लक्ष्यों के प्रति जागरूक रखता है। इनके रास्ते पर चलते हुए हम छत्तीसगढ़ के जन-जन का सपना पूरा करेंगे।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि आज के दिन, भारत के अमृत काल में, 75वें गणतंत्र दिवस के रूप में एक सुनहरी कड़ी जुड़ रही है। यह पावन अवसर हमारे देश के महान संविधान की सफलता का सबसे बड़ा पर्व है। इस अवसर पर मैं महान नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करते हुए देश को इस गौरवशाली मुकाम पर पहुंचाने वाली सभी विभूतियों को नमन करता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले मैं छत्तीसगढ़ महतारी के महान सपूतों अमर शहीद गैंद सिंह, शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधूर को सादर नमन करता हूं, जिन्होंने हमारे प्रदेश को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा और पूरे छत्तीसगढ़ में त्याग-बलिदान, न्याय-समानता जैसे आदर्शों की अलख जगाई। उन्होंने राष्ट्रीय चेतना के विकास में आदिवासी अंचलों का अग्रणी योगदान दर्ज कराया था। बाद में इस राह पर चलकर प्रदेश के अनेक वीरों और राष्ट्र भक्तों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई एवं प्रदेश और देश के विकास में योगदान दिया। ऐसी सभी विभूतियों को मैं सादर नमन करता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम भारत के लोगों ने अपना संविधान बनाया और स्वयं ही इस संविधान को अधिनियमित और आत्मार्पित किया था। भारत के सुनहरे भविष्य की आधारशिला 26 जनवरी 1950 को, हमारे संविधान को लागू करने के साथ रख दी गई थी। हमारा संविधान, अतीत के अनुभवों, वर्तमान की जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 75 वर्षों का सफर बताता है कि हम एक सफलतम लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में स्थापित हुए हैं। मैं आज बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों का पावन स्मरण करता हूं, जिन्होंने सामूहिक बुद्धिमत्ता से संविधान रचकर हमारे गणतंत्र को राह दिखाई। हमारा संविधान समस्त नागरिकों को सामाजिक-आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार-अभिव्यक्ति-विश्वास-धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता का अधिकार प्रदान करता है। इस तरह लोकतंत्रात्मक गणराज्य के रूप में भारत की पहचान, सफलता और अभूतपूर्व उपलब्धियों का परचम पूरी दुनिया में फहरा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों और अभियानों के कारण विगत लगभग एक दशक में देश ने सभी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी सफलताएं अर्जित की हैं, जिसके कारण एक ओर जहां प्रत्येक देशवासी का माथा गर्व से ऊंचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर पूरी दुनिया ने भारत का लोहा माना है। अनेक क्षेत्रों में अब भारत, विश्व का नेतृत्व कर रहा है। हमारे गणतंत्र की गौरवगाथा से देश और प्रदेश के विकास को नए पंख मिले हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व और तत्कालीन माननीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा देकर, छत्तीसगढ़वासियों को विकास के पंख प्रदान किए थे। इस प्रकार 1 नवम्बर 2000 से छत्तीसगढ़ में विकास यात्रा शुरू हुई। गणतंत्र में सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है, आम जनता की इच्छाओं, आकांक्षाओं का सम्मान, प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का ध्यान, प्रत्येक नागरिक की आवश्यकताओं की पहचान और उसके अनुसार सरकार की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन।

18 लाख हितग्राहियों को मिलेंगे पक्के आवास

उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने विगत 9 वर्षों में जिस प्रकार से देश की सेवा की है, उससे न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया में भी उनकी लोकप्रियता, न्यायप्रियता और नेतृत्व क्षमता स्थापित हुई है। उन्होंने जनकल्याण के साथ विश्व कल्याण की अपनी सोच से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्य के आवासहीन परिवारों को पक्का आवास प्रदान करने की गारंटी को हमने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमने अपनी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के 18 लाख से अधिक परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी है। इस तरह से हम देश में हर बेघर के सिर पर छत देने के लक्ष्य को पूरा करने में भी अपना योगदान देंगे।

घर-घर पहुंचेगा नल से जल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के साथ हमने जल जीवन मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के प्रत्येक घर में पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का वादा किया था। निर्धारित लक्ष्य जल्दी से जल्दी पूरा करने के लिए हमने अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था कर दी है।

12 लाख किसानों को मिले धान बोनस के 3,716 करोड़ रूपए

अन्नदाताओं की समृद्धि और खुशहाली को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य के जन्मदाता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस-‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर 2 साल की धान खरीदी के बकाया बोनस के एकमुश्त भुगतान को लेकर वादा किया गया था। यह वादा हमने नियत तिथि को निभाया और 12 लाख से अधिक किसानों को एकमुश्त 3 हजार 716 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।

प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी

‘कृषक उन्नति योजना’ के अंतर्गत हमने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का आदेश जारी करके यह व्यवस्था लागू कर दी है। व्यवस्था में सुधार हेतु ऑनलाइन धान खरीदी केन्द्रों में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से धान खरीदी की जा रही है। 48 घंटे के भीतर भुगतान की व्यवस्था की गई है, जिसमें काफी हद तक सफलता मिली है।

सिंचाई के लिए निःशुल्क बिजली: 1,123 करोड़ रूपए का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको याद होगा कि कृषक जीवन ज्योति योजना, हमारी ही पूर्ववर्ती सरकार की देन थी, जिसने किसानों के जीवन में बहार लाई थी। निःशुल्क बिजली प्रदाय से उनकी सिंचाई सुविधा और उत्पादन क्षमता में बहुत बढ़ोतरी हुई थी। सरकार बनते ही हमने इस योजना की समीक्षा की और पाया कि किसानों को निःशुल्क बिजली देने की यह व्यवस्था बहुत कारगर साबित हुई है, जिसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 1 हजार 123 करोड़ रुपए अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है।

सरकार किसानों के साथ

किसान भाइयों और बहनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें इस बात का पूरा अहसास है कि आपको अपने जीवन में किन बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आपकी मेहनत और त्याग अनमोल है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि कृषि तथा इससे संबंधित सभी क्षेत्रों पर हम लगातार ध्यान देंगे और समस्याओं का निराकरण करते जाएंगे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केन्द्र योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, जैविक खेती मिशन, राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना आदि योजनाओं का समय पर अधिकाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को देने की व्यवस्था की जाएगी।

महतारी वंदन योजना में मिलेगी 12,000 रूपए की राशि

मातृशक्ति को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों, बेटियों के सम्मान, स्वाभिमान, स्वावलंबन और सुरक्षा के लिए हम हरसंभव कदम उठाएंगे। उनकी सेहत, शिक्षा और पोषण के लिए भी समुचित योजनाएं कारगर ढंग से लागू की जाएंगी। हमने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 12 हजार रुपए वार्षिक आर्थिक सहायता प्रदान करने का वादा निभाने की दिशा में पहल प्रारंभ की है।

पारदर्शीता के साथ होंगी पीएससी तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हम विद्यार्थियों और युवाओं की चिंता से अवगत हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ पीएससी की सभी प्रमुख परीक्षाओं की प्रक्रिया को यूपीएससी की तर्ज पर सुव्यवस्थित करने हेतु प्रयास किया जा रहा है। हमने पीएससी प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया है। हमारी सरकार ने सभी प्रमुख परीक्षाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अनेक स्तरों पर परीक्षण प्रारंभ कर दिया है। हम नौनिहालों और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए उनकी शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, संस्कार, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे सभी विषयों पर समग्रता से पहल करेंगे।

विकसित भारत संकल्प यात्रा से मिल रहा योजनाओं का लाभ

विकसित भारत संकल्प यात्रा की भी मुख्यमंत्री ने चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि विकसित भारत संकल्प यात्रा के माध्यम से प्रदेश में एक महाअभियान संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के हर वंचित और कमजोर व्यक्ति तक पहुंचना और पात्रतानुसार उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करना है। यह यात्रा प्रदेश की सभी 11 हजार 654 ग्राम पंचायतों तथा 170 नगरीय निकायों में पहुंच रही है। भारत सरकार की जनहितकारी समस्त योजनाओं के पात्र हितग्राहियों तक पहुंचकर उनसे संबंधित योजनाओं के बारे में जागरूक कर रही है। इसके अलावा स्थल पर योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस महाअभियान से कमजोर तबकों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण में मदद मिल रही है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए पीएम-जनमन योजना

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मैं प्रधानमंत्री जी की इस महान जनहितकारी पहल का अभिनंदन करता हूं, जो प्रत्येक नागरिक के सशक्तीकरण का माध्यम बनी है। इतना ही नहीं, समाज के सबसे पिछड़े समुदायों को लक्षित करते हुए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) का क्रियान्वयन भी किया जा रहा है। राज्य में विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं अबूझमाड़िया को पीएम-जनमन के माध्यम से 9 केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा 11 लक्ष्यों पर कार्य किया जा रहा है ताकि इन समुदायों के लोगों और उनकी बसाहटों में जो अभाव बच गए हैं, उनका निराकरण किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा भी राज्य सरकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय के विकास की विभिन्न योजनाओं को कारगर ढंग से संचालित करने के लिए संकल्पबद्ध है। तेन्दूपत्ता तथा अन्य वनोपजों से उनकी आजीविका के साधनों को मजबूत करने तथा इनके रहवासी क्षेत्रों में बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध करने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छता के संबंध में कहा कि मैं प्रदेशवासियों को साधुवाद देता हूं, जिनके सहयोग से छत्तीसगढ़ को देश के तीसरे सबसे स्वच्छ राज्य का खिताब मिला है। मैं चाहूंगा कि स्वच्छता के सभी मापदण्डों पर आप सबकी लगन और जागरुकता लगातार बढ़े। हमें प्रदेश को स्वच्छता के शिखर पर पहुंचाना है ताकि जीवन स्तर उन्नयन के विभिन्न प्रयासों का अधिक लाभ सबको मिले।

गरीब परिवारों को पांच वर्ष तक मिलेगा निःशुल्क चावल

कोविड-19 की विश्वव्यापी आपदा से निपटने के लिए किसी भी जरूरतमंद परिवार को पोषण समस्या न हो यह ध्यान में रखते हुए केन्द्र शासन ने निःशुल्क अनाज प्रदान करने की योजना शुरू की थी। अब प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत दिसम्बर 2028 तक निःशुल्क चावल प्रदाय की व्यवस्था कर दी है। छत्तीसगढ़ में इस योजना से 67 लाख 94 हजार अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को मासिक पात्रता का चावल दिया जाएगा।

वन नेशन वन राशन कार्ड से पीडीएस में पारदर्शीता

मुख्यमंत्री ने पीडीएस प्रणाली से संबंधित सुधारों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना प्रारंभ की गई है, जिसमें हितग्राहियों को अपनी पसंद की किसी भी राशन दुकान से राशन सामग्री प्राप्त करने की सुविधा है।

36 लाख महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 36 लाख से अधिक नवीन गैस कनेक्शन जारी किए गए हैं। छूटे हुए पात्र हितग्राहियों को विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान विशेष अभियान संचालित करते हुए उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इस योजना से महिलाओं की सेहत, सुविधा और स्वाभिमान की स्थिति में बहुत सुधार आया है।

अयोध्या के तीर्थ यात्रा के लिए रामलला दर्शन योजना

हमारा छत्तीसगढ़ धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का प्रदेश है। यहां हर क्षेत्र में कुछ न कुछ विशेषताएं हैं, जिसका सम्मान करते हुए एक साझा संस्कृति का विकास प्रदेश में हुआ है। हमारी सरकार सभी जातियों, धर्मों, समुदायों की आस्था का सम्मान करते हुए समरस विकास के रास्ते पर चलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या धाम में प्रभु राम की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रति लोगों की जिज्ञासा और अगाध श्रद्धा भाव का सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने रामलला दर्शन योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत प्रति वर्ष हजारों लोगों का अयोध्या धाम तथा काशी विश्वनाथ धाम, प्रयागराज की तीर्थयात्रा कराई जाएगी।

सुशासन से करेंगे हर वादा पूरा

छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधन, पर्यटन विकास के अवसर, परंपरागत ज्ञान तथा कौशल, परिश्रमी तथा विवेकशील जनता, नवीन संभावनाओं के अनुसार अपने को ढालने की इच्छाशक्ति, नई चुनौतियों का सामना करने का साहस जैसे तमाम आवश्यक तत्व मौजूद हैं। सुशासन के माध्यम से सही दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। नक्सलवाद तथा विभिन्न प्रकार के अपराधों, हिंसा व अन्याय पर तेजी से रोक लगे। संविधान की भावना अनुसार सभी क्षेत्रों और सभी वर्ग के लोगों को विकास के समुचित अवसर मिलें। सेवा, सुशासन, सुरक्षा और विकास के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं ताकि सभी छत्तीसगढ़वासियों की आय और जीवन स्तर उन्नयन में वृद्धि का सिलसिला तेजी से आगे बढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हर वादा पूरा करने के लिए तत्पर है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके प्यार, सहयोग और समर्थन से हम छत्तीसगढ़ महतारी का, छत्तीसगढ़ के जन-जन का हर सपना पूरा करेंगे।

 

राममय हुआ महासमुंद : विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने किया भगवान राम की आरती

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महासमुंद। अयोध्या में हुए आज राम लला के प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक पल में महासमुंद नगरवासी गवाही बने। स्थानीय विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा सपत्नीक भगवान राम की पूजा अर्चना कर जिले वासियों की सुख समृद्धि की कामना की।

आज स्थानीय कचहरी चौक के हनुमान मंदिर में पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा सहित कलेक्टर प्रभात मलिक, एसपी राजेश कुकरेजा, वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं शहर के श्रद्धालु गण बड़ी संख्या में शामिल हुए।  इस अवसर पर जिले के उत्कृष्ट 5 रामायण मंडलियों द्वारा भक्तिमय राम भजन की प्रस्तुति की गई। प्रस्तुति के पश्चात विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा द्वारा शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। जिसमें श्रोतागण राम भक्ति में झूमते नजर आए। अयोध्या में हुए राम लला प्राण प्रतिष्ठा के लाइव प्रसारण को देखने सभी अतिथिगण एवं नागरिकगण शामिल हुए।

इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि संदीप दीवान, पूर्व युवा आयोग के सदस्य प्रशांत श्रीवास्तव, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष पवन पटेल, दिग्विजय साहू, सतपाल सिंह पाली, प्रकाश शर्मा, श्रीमती नीलम दीवान, मुन्ना साहू, राजेंद्र साहू, निरंजना शर्मा अन्य प्रतिनिधिगण, अतिथिगण एवं श्रद्धालु गण शामिल हुए। साथ ही जिले के सभी विकासखंडों के प्रमुख मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां अयोध्या से हुए लाइव प्रसारण को देखा गया तथा स्थानीय रामायण मण्डली द्वारा रामायण की भक्तिमय प्रस्तुति की गई। 

प्रशासन द्वारा प्रमुख मंदिरों में लाइव प्रसारण देखने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई थी। महासमुंद विकासखण्ड के ग्राम खैरझिटी, बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत खल्लारी मंदिर प्रांगण में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी तरह शहर एवं गांव के राम मंदिर समितियों द्वारा भी राम मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। मंदिर प्रांगणों में आज सुबह से ही साफ-सफाई की गई। महासमुंद में विधायक राजू सिन्हा ने साफ-सफाई की। इसके अलावा मंदिरों में विशेष रंगोली चित्रित किया गया। मंदिरों में भोज भंडारा, विशेष पूजा अर्चना की गई। इसी तरह शाम को दीपदान और दीप प्रज्ज्वलन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

उद्धव ठाकरे को स्पीड पोस्ट से मिला अयोध्या का न्योता, संजय राउत बोले- 'भगवान राम देंगे श्राप'

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 Ram Mandir Opening : महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्योता शनिवार को मिला। यह कार्यक्रम 22 जनवरी यानी दो दिन बाद होना है। ठाकरे को न्योता स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया है।


पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) उन्हें निमंत्रण न भेजने के लिए भाजपा को निशाने पर ले रही थी। वहीं, अब डाक से न्योता भेजने पर शिवसेना नेता संजय राउत ने फिर भाजपा पर हमला बोला है। राउत ने कहा कि भगवान राम इसके लिए उन्हें (भाजपा को) श्राप देंगे।

राउत ने कहा कि आप सेलेब्रिटीज और फिल्म स्टार्स को विशेष निमंत्रण दे रहे हैं। उनका राम जन्मभूमि से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन आप ठाकरे परिवार के साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी।

संजय राउत ने आगे कहा कि भगवान राम इसके लिए आपको माफ नहीं करेंगे और शाप देंगे। आप भगवान राम की पूजा करते हैं और सरकार रावण की तरह चलाते हैं। बता दें कि इसे लेकर उद्धव ठाकरे पहले भी कह चुके हैं कि उन्हें राम मंदिर जाने के लिए भाजपा या किसी की ओर से कोई निमंत्रण पाने की जरूरत नहीं है।

ठाकरे ने मांग उठाई है कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को करनी चाहिए। मंदिर के उद्घाटन का उद्धव ठाकरे ने स्वागत किया है लेकिन भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसने इस धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक प्रोग्राम में बदल दिया है।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- इनके लिए भगवान राम काल्पनिक

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 रायपुर : आज पूरा देश राममय है लेकिन देश की बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस, भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हो रही है. इसपर देशभर में चर्चा हो रही है, राजनीतिक बयानबाजी हो रही है. इसी कड़ी में भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है. राज्य के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कांग्रेस के लिए भगवान राम काल्पनिक है. राम मंदिर के निर्माण में रोड़े लगाए है.


अरुण साव ने कहा कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण में रोड़े लगाए है

दरअसल डिप्टी सीएम अरुण साव ने गुरुवार को रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रुख साफ है. यही कांग्रेस है जिन्होंने भगवान राम को काल्पनिक कहा. राम मंदिर के निर्माण में रोड़े लगाए. आज पूरा देश मंदिर के लोकार्पण को ऐतिहासिक बनाने में लगा है. कांग्रेसी सोंचें कि वे कहां हैं. इसके बाद अरुण साव ने छत्तीसगढ़ में भगवान राम के स्वागत की तैयार पर जानकारी दी है.

भगवान राम के ननिहाल में क्या है तैयारी?

डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि 22 जनवरी ऐतिहासिक दिन होने वाला है. भव्य और दिव्य मंदिर के लोकार्पण का कार्यक्रम होगा. दुनिया के राम भक्त उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी में हैं और छत्तीसगढ़ में विशेष तैयारी की जा रही है. शहर-शहर, गांव-गांव ,अलग-अलग धार्मिक संगठनों द्वारा विविध आयोजन की तैयारी है. हमारी सरकार भी तैयारी में जुटी है. छत्तीसगढ़ में उत्साह दोगुना है. हर एक व्यक्ति इस दिन को यादगार बनाने की तैयारी में है.

‘हमारी सरकार काम कर रही तो इनके पेट में दर्द हो रहा’

मोदी की गारंटी को वादाखिलाफी की गारंटी बताने वाले कांग्रेस के बयान पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा कि अब तो कांग्रेस की बातों पर ज्यादा भरोसा नहीं है. 5 साल में छत्तीसगढ़ की जनता को जैसे ठगा, लूटा गया. आज जब ‘मोदी की गारंटी’ लोगों तक जा रही है. उनके पेट में दर्द हो रहा है, क्योंकि उनकी सोच नहीं है कि जनहित और जनता के हित में काम हो.

Chhattisgarh News: रामलला के ननिहाल से चावल के बाद अब अयोध्या भेजी जाएगी 100 टन सब्जी

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Chhattisgarh News:  2024 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी पूरा देश बनेगा । छत्तीसगढ़ से 100 टन सब्जियां अयोध्या भेजी जाएगी। सीएम साय ने ट्विटर पर बताया कि आगामी 22 जनवरी को अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। जिस पर हर सनातनी को गर्व है। 


मेरे प्रदेश के अन्नदाताओं ने भी राम काज के लिए अपने खेतों से उगाई गई 100 टन सब्जियां राम मंदिर निर्माण कार्य में योगदान स्वरूप भेजने का निर्णय लिया है। भगवान राम जन-जन हृदय में बसे हैं ऐसे में प्रभु श्रीराम के ननिहाल के किसानों का ये अगाध प्रेम और भक्ति का ये अद्भुत स्वरूप सराहनीय और वंदनीय हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से यंहा राज्य अतिथि गृह पहुना में छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात कर नववर्ष की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को कुम्हारी, दुर्ग जिले में 12 एवं 13 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय किसान मेला में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए संघ के सदस्यों को धन्यवाद दिया।संघ के अध्यक्ष विरेन्द्र लोहान ने मुख्यमंत्री को बताया कि मेले में किसान भाइयों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियों के कृषि उत्पादों एवं आधुनिक यन्त्रों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। साथ ही कृषि विशेषज्ञओं की संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि संघ से जुड़े किसानों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य में योगदान हेतु 100 टन सब्जी भेजने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने संघ के इस निर्णय कि सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।


मुख्यमंत्री बघेल ने आदि पुरुष फिल्म डायलॉग पर दिया बयान , भगवान राम को युद्धक राम दिखाया, डायलॉग हैं अमर्यादित

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फ़िल्म आदिपुरूष को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भगवान राम को युद्धक राम के रूप में दिखाया जा रहा है. भगवान हनुमान को भी इसी रूप में दिखाया जा रहा है. आदिपुरुष फ़िल्म का जो संवाद है, वह अमर्यादित है. फ़िल्म में शब्दों का चयन अनुचित है. भगवान हनुमान के संवाद बहुत ही निम्न स्तर के हैं. बहुत खराब ढंग से संवाद कहे गए हैं.


भूपेश बघेल ने कहा कि हमने जो रामचरित मानस और रामायण पढ़े और टीवी पर देखें हैं, उसके ठीक विपरीत आदिपुरुष फ़िल्म में दिखाया गया है. आदिपुरुष को आज की पीढ़ी देखेगी तो उस पर गलत प्रभाव पड़ेगा. बजरंगबली के मुंह से वो शब्द बोलवाए जा रहे हैं, जो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के शब्द होते हैं. मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं.

बता दें कि लंबे इंतजार के बाद आदिपुरुष फिल्म सिनेमाघरों में आ चुकी है. फिल्म को पांच भाषाओं हिंदी, तेलुगू, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में 6200 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है. हिंदी भाषा में इस फिल्म को अकेले 4 हजार स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है.

ऐसे में अब फिल्म के पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सामने आ गया है. आदिपुरुष का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन जानकर हर कोई हैरान रह सकता है. फिल्म ने पहले ही दिन कई रिकॉर्ड बना लिए हैं.

आदिपुरुष फिल्म ने पहले दिन 85-90 करोड़ रुपये की ओपनिंग की है. हालांकि ये अभी भी फिल्म के अनुमानित आंकड़े हैं, जो कि बिना नाइट शो के है. आदिपुरुष फिल्म ने अकेले हिंदी में ही 45 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है.

इस फिल्म ने हिंदी भाषी राज्यों में सबसे ज्यादा कमाई की है. इसके अलावा प्रभास की फिल्म ने इसे अन्य भाषाओं में मिलाकर भी कमाई की है. ऐसे में तमाम ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि प्रभास की ये फिल्म इस वीकेंड धमाकेदार कमाई करने वाली है.

बता दें कि आदिपुरुष फिल्म में साउथ के सुपरस्टार प्रभास ‘राम भगवान’ की भूमिका निभा रहे हैं और कृति सेनन ‘मां सीता’ की भूमिका निभाती नजर आ रही हैं. इसके अलावा देवदत्त नाग ‘भगवान हनुमान’ की भूमिका में नजर आए और सैफ अली खान ‘रावण’ की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि ‘प्यार का पंचनामा’ अभिनेता सनी सिंह ‘लक्ष्मण’ की भूमिका निभा रहे हैं. रामायण पर आधारित इस फिल्म को 500 करोड़ के भारी भरकम बजट में बनाया गया है.


जो श्रीराम पूरे विश्व को मार्ग दिखाते हैं उन्हें छत्तीसगढ़ की एक वनवासी माता शबरी ने मार्ग दिखाया

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 न कैकयी भगवान राम को निर्वासन देती, न वो आपको प्राप्त होते, यह घटना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य हो गई, इस भूमि में प्रभु के चरण पड़े , अपने-अपने राम के प्रस्तोता एवं प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास ने राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के आयोजन की प्रशंसा की , कहा - राम वन गमन पथ के पथ पर विचरण कर और श्रीराम के चरणों की धूलि लूं तो मेरा सौभाग्य होगा


रायपुर : जो श्रीराम पूरे विश्व को ज्ञान का मार्ग बताते हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ में रहने वाली वनवासी माता शबरी ने ज्ञान का मार्ग दिखाया। शबरी ने ही उन्हें कहा कि पंपा सरोवर जाएं और सुग्रीव से मिलें। रामकथा के प्रस्तोता तथा प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास ने यह बात कही। श्री विश्वास राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने रायगढ़ पहुंचे हुए हैं।

श्री विश्वास ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य है कि यहां श्रीराम के चरणों की धूलि पड़ी। श्री विश्वास ने कहा कि भगवान श्री राम विश्व मंगल, लोक मंगल और समरस शासन की सबसे बड़ी अवधारणा हैं। 1932 में महात्मा गांधी ने नव जीवन अखबार में रामराज्य और भारत पर अपने विचार लिखे थे। मैं बरसों से छत्तीसगढ़ आ रहा हूं। छत्तीसगढ़ में श्री राम के वनगमनपथ के विकास के संबंध में राष्ट्रीय स्तर पर बात हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल तथा संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत से इस संबंध में चर्चा होती है। मुख्यमंत्री जी को रामवनपथगमन के विकास और राष्ट्रीय स्तर पर इस सुंदर आयोजन के लिए मैं धन्यवाद देता हूँ। रामकथा को लेकर, उनके पुण्यस्थलों को सहेजने को लेकर बहुत अच्छा काम हो रहा है। श्री विश्वास ने कहा कि वह उन सभी जगहों पर जाना चाहेंगे, जहां से श्रीराम के चरण पड़े। मैं उस मार्ग का विचरण करना चाहता हूं जहां से राघवेंद्र सरकार गुजरे तथा उनकी चरण धूलि लेना चाहता हूं।

श्री विश्वास ने कहा कि आज अरण्यकांड पर मेरी प्रस्तुति होगी, जब श्री राम छत्तीसगढ़ में वनवास में आए होंगे। उस समय यहां सघन वन रहा होगा। उस समय जनजातियों से उनके आत्मीय संवाद हुए। श्रीराम ने हमें बताया कि यहां के वनवासी कितने सरल हैं। कितने आत्मीय हैं और हमेशा सत्य के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी विशेष इच्छा माता कौशल्या एवं माता शबरी पर केंद्रित व्याख्यान करने की है। माता कौशल्या जिन्होंने अपने पुत्र को लोक कल्याण के लिए वन भेज दिया। इसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। इन सब की कथा कहना चाहता हूं। रायगढ़ संस्कारधानी में सुंदर आयोजन हो रहा है। बहुत सुंदर कार्य राम कथा को लेकर भी हुआ है।

 

कम्बोडिया में राम हर दिल में बसते हैं , रामायण को यहां नृत्य के रूप में दर्शाया जाता है , भगवान राम की महिमा की गाथा है रिमकर

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रायपुर : भारत से करीब 4500 किमी की दूरी पर स्थित देश कम्बोडिया में विश्व का सबसे बड़ा विशाल अंगकोर वाट (विष्णु) मंदिर है। यहां की संस्कृति में भगवान राम घर-घर और लोगों के दिलों मे बसते हैं, यहां राम को हर आम आदमी की कहानी से जोड़कर देखा जाता है।


कम्बोडिया से पहुंची 12 सदस्यीय टीम ने बताया कि यहां जिस तरह से भगवान राम को पूजते हैं, उसी तरह वहां भी राम की मान्यता है, हमारे यहां राम को रिमकर के नाम से जाना जाता है। यह एक कम्बोडियन महाकाव्य से उद्घृत कविता है जो संस्कृत के रामायण से प्रेरित है। रिमकर यानी राम की महिमा होती है। कम्बोडिया में भी सरकार यहां की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करती है। यहां भगवान की कहानी को आम लोगों से जोड़कर दिखाया जाता है। कम्बोडिया से आए के रामकथा के एक कलाकार ने बताया कि इस तरह की प्रस्तुति देने पहली बार भारत आए हैं, लेकिन इससे पूर्व वे पारिवारिक यात्रा में वे भारत आ चुके हैं।

अंतराष्ट्रीय रामायण महोत्सव में शुभारंभ अवसर पर 1 जून को कम्बोडिया की अंतरराष्ट्रीय रामायण टीम ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी थी। आकर्षक वेशभूषा के साथ 25 मिनट की प्रस्तुति के दौरान टीम ने दर्शकों का दिल जीत लिया। कम्बोडिया रामायण टीम द्वारा अहिरावण प्रसंग की संगीतमय प्रस्तुति की गयी, इस प्रसंग में रावण का भाई अहिरावण राम को मूर्छित कर पाताल लोक ले जाते हैं। तब हनुमान राम को लाने पाताललोक जाते हैं, जहां उनका सामना अपने ही पुत्र मकरध्वज से होता है। युद्ध में दोनों की लड़ाई होती है, लेकिन इसमें किसी जीत या हार नहीं होती। अंत में हनुमान राम को वापस लाते हैं।

कम्बोडिया की टीम ने इस प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। भावों को समझने भाषा आड़े नहीं आई। लोग कम्बोडिया के रामायण में भी उसी भावधारा में बहते रहे जैसे मानस कथा सुनकर अभिभूत हो जाते हैं।

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के चरित्र में छत्तीसगढ़ का भी अंश - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि भगवान राम ने अपने वनवास के 10 साल छत्तीसगढ़ में गुजारे। भगवान राम ने वनवास के दौरान कितनी कठिनाई झेली पर अपनी मर्यादा नहीं खोई। भगवान राम जब वन गए तो मर्यादा पुरूषोत्तम बन गए। उनके इस चरित्र निर्माण में छत्तीसगढ़ का भी अंश है।

मुख्यमंत्री आज कला और साहित्य की नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित भव्य समारोह में तीन दिवसीय राष्ट्रीय रामायण महोत्सवका शुभारंभ कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ माता कौशल्या और शबरी माता का प्रदेश है। यहां सदियों से निवास कर रहे आदिवासियों, वनवासियों का प्रदेश है। भगवान राम का राजतिलक होना था लेकिन वे वनवास गए, निषादराज से मिले, शबरी से मिले, ऋषि मुनियों से मिले। हमारा रिश्ता वनवासी राम के साथ ही कौशल्या के राम से भी है, इसलिए वे हमारे भांजे है, हम छत्तीसगढ़वासी भांजे का पैर छूते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहली बार छत्तीसगढ़ में शासकीय रूप से राष्ट्रीय स्तर पर रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राम जी के आदर्श चरित्र के श्रवण के लिए यह सुंदर आयोजन किया जा रहा है यद्यपि यह राष्ट्रीय आयोजन है लेकिन इसमें कंबोडिया, इंडोनेशिया जैसे विदेशी दल भी हिस्सा ले रहे हैं, जिससे यह महोत्सव अंतर्राष्ट्रीय हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मैंने राष्ट्रीय रामायण उत्सव के दौरान सुंदर मार्च पास्ट भी देखा इसमें रामनामी सम्प्रदाय का राम मार्चपास्ट भी देखा। इन्होंने पूरा जीवन राम को समर्पित कर दिया है। वे निराकार में विश्वास करते हैं, जिस तरह कबीर निराकार में विश्वास करते हैं। इस तरह सबके अपने-अपने राम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम कथा हमारे दिलों में बसी हुई है। हमारी सुबह राम-राम से होती है और शाम भी राम-राम से होती है।

हमारे हर गांव में रामलीला की सुंदर मंडलियां बनी हुई है। आमजन राम से गहरी आत्मीयता इसलिए महसूस करते हैं क्योंकि राम सबके हैं, वे निषादराज के हैं, शबरी के हैं। सबसे अनुराग रखते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सांस्कृति आदान-प्रदान के लिए उन सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है, जहां तीर्थ स्थल हैं और इनमें 2 एकड़ जमीन चाही है ताकि हम अपने यात्रियों के लिए यहां रहने की अच्छी व्यवस्था बना सकें। साथ ही हम अपने तीर्थ स्थलों को भी विकसित कर रहे हैं ताकि हमारे यहां जो तीर्थयात्री आएं उन्हें भी अच्छी सुविधा मिल पाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकांश समय वनवासियों के साथ बिताया। उनके साथ गहरी आत्मीयता का वृतांत हमें रामायण में मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी संस्कृति के संवर्धन के लिए हम तीन वर्षों से राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। आदिवासियों के देवगुड़ी का संरक्षण कर रहे हैं, उनके घोटुल का संरक्षण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने रायगढ़ के निवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ मानव संस्कृति के सबसे आरंभिक गवाहों में से रहा है, यहां के शैल चित्र बताते हैं कि मानव जाति के सबसे आरंभिक सांस्कृतिक विकास के उदाहरण यहां भी मिलते हैं। इस संस्कारधानी नगरी ने कला के क्षेत्र में लोगों को संस्कारित करने के लिए बड़ा कार्य किया है। केलो के संरक्षण के लिए हम काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि सीता राम चरित अति पावन, मधुर सरस अरु अति मनभावन। राम का आदर्श चरित्र हम सबको यहां सुनने को मिल रहा है निश्चय ही हम सब के लिए गौरव की बात है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर यह अनुपम आयोजन हो रहा है। राम कथा के श्रवण से हम सब राम के आदर्शों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा ग्रहण करेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि राम वन गमन पथ के माध्यम से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भगवान राम से जुड़े स्थलों को विकसित करने का बड़ा काम किया है। पूर्व सांसद  नंद कुमार साय ने भवभूति का उदाहरण देते हुए कहा कि भवभूति ने भगवान राम का जो चरित्र कहा है उसी चरित्र के मुताबिक गरीबों की सेवा का कार्य छत्तीसगढ़ में हो रहा है।

छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राम से जुड़े स्थलों को बढ़ाने के लिए एवं गौठान में गौ सेवा के लिए बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, विधायक प्रकाश नायक, रामकुमार यादव, रायगढ़ नगर निगम की महापौर श्रीमती जानकी काटजू, कलेक्टर रायगढ़ तारन प्रकाश सिन्हा, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

 

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन : सीएम 1 जून को करेंगे शुभारंभ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय रामायण महोत्सवका भव्य आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 01 जून को अपरान्ह 3 बजे रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में इसका शुभारंभ करेंगे। इस राष्ट्रीय महोत्सव में देश के 12 राज्यों सहित कंबोडिया और इंडोनेशिया के रामायण दलों द्वारा रामकथा पर भक्तिपूर्ण प्रस्तुति दी जाएगी।

इन रामायण दलों की प्रस्तुति में सर्वव्यापी भगवान राम की रामकथा के विविधतापूर्ण राष्ट्रीय-वैश्विक स्वरूपों की झलक देखने को मिलेगी। रामायण के अरण्य काण्ड पर रामायण दलों की प्रतियोगिता प्रतिदिन आयोजित की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार भजन संध्या में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। रामलीला मैदान में तीन दिनों तक रामकथा की अविरल भावधारा बहेगी। इस राष्ट्रीय महोत्सव में केरल, कर्नाटक, ओड़िसा, असम, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के रामायण दल शामिल हो रहे हैं। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतिम दिन हिन्दी के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास अपनी विशेष प्रस्तुति अपने-अपने राम म्युजिक नाईटसे भगवान राम की महिमा का बखान करेंगे।  

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के शुभारंभ समारोह में पंडितों, पुरोहितों और स्थानीय कलाकारों द्वारा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़ में  आमंत्रित विदेशी तथा अन्तर्राज्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक मार्च पास्ट किया जाएगा। ‘‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सव‘‘ के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री एवं रायगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल, विधायक लालजीत सिंह राठिया, प्रकाश नायक, चक्रधर सिंह, जिला पंचायत रायगढ़ के अध्यक्ष निराकार पटेल, नगर पालिक निगम की महापौर जानकी काटजू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

प्रथम दिवस का आकर्षण: कंबोडिया के रामायण दल की प्रस्तुति

आयोजन के प्रथम दिवस दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक जसगीत गायक देवेश शर्मा प्रस्तुति देंगे। शाम 4.30 बजे से 5 बजे तक कंबोडिया के दल द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद शाम 5.15 बजे अन्तर्राज्यीय रामायण मंडलियों के मध्य अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें उत्तराखंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। भजन संध्या में रात्रि 7.30 बजे से 9 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार सण्मुख प्रिया (इंडिययन आइडल) तथा रात्रि 9 बजे से 10.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार शरद शर्मा (सा रे गा मा) द्वारा भजन प्रस्तुत किए जाएंगे।

 दूसरे दिन का आकर्षण: बाबा हंसराज रघुवंशी और लखबीर सिंह लक्खा की प्रस्तुति

 राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के दूसरे दिन का मंचीय कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे तथा स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में दोपहर 2.15 बजे हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होगा तथा दोपहर 2.30 से रात्रि 8.30 बजे तक आयोजित अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता में 8 राज्यों झारखण्ड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, ओड़िसा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। भजन संध्या में रात्रि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार बाबा हंसराज रघुवंशी तथा रात्रि 9.30 बजे से 10.30 बजे तक लखबीर सिंह लक्खा भजनों की प्रस्तुति देंगे।

तीसरे दिन का आकर्षण: इंडोनेशिया के रामायण दल की प्रस्तुति 

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के तीसरे दिन समापन समारोह का आयोजन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। महोत्सव के तीसरे दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें 4 राज्य केरल, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। शाम 6 बजे से 6.30 बजे तक कंबोडिया के दल द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी।

शाम 6.30 बजे 7 बजे तक केलो महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें महिला स्व-सहायता समूह की बहनें गोबर निर्मित दिये से दीपदान करेंगी। रात्रि 7 बजे से मंचीय कार्यक्रम शुरू होगा, जिसमें हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाएगा। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का समापन समारोह रात्रि 7.30 बजे से 8.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें विजेता दलों को पुरस्कार वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही विदेशी कलाकारों और प्रतियोगिता के निर्णायकों को भी सम्मानित किया जाएगा।

इस अवसर पर विजेता दलों और विदेशी कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। रात्रि 8.30 बजे से 9 बजे तक इंडोनेशिया के दल की प्रस्तुति होगी। भजन संध्या में रात्रि 9 बजे से 9.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार मैथिली ठाकुर तथा 9.30 बजे से 10 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार कुमार विश्वास द्वारा अपने-अपने राम म्युजिक नाईटकी प्रस्तुति दी जाएगी। छत्तीसगढ़ के लोक गायक दिलीप षड़ंगी अपनी टीम के साथ महोत्सव के तीनों दिन हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके साथ ही साथ प्रतिदिन रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

छत्तीसगढ़ : महाकाव्य रामायण के अरण्य-कांड पर होगा आधारित नृत्य नाटिका का विषय

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छत्तीसगढ़ का भगवान राम, माता कौशल्या और महाकाव्य रामायण से है गहरा संबंध


रायपुर । राष्ट्रीय रामायण महोत्सव 01 जून 03 जून तक रामलीला मैदान, रायगढ़, छत्तीसगढ़ में आयोजित होगा। यह एक प्रकार का प्रतियोगिता वाला कार्यक्रम होगा, इसलिए राज्यों से रामायण ‘झांकी प्रदर्शन‘ समूह के प्रतिनिधि मंडल को आमंत्रित किया गया है। नृत्यनाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्यकाण्ड पर आधारित होगा।

 छत्तीसगढ़ राज्य धार्मिक व सांस्कृतिक विरासतों से समृद्ध एक ऐसा प्रदेश है, जिसका श्रीराम, माता कौशल्या व उनके जीवन चरित्र पर आधारित महाकाव्य रामायण से बहुत गहरा संबंध है। छत्तीसगढ़ राज्य को श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है। माता कौशल्या का जन्म तत्कालीन दक्षिण कोसल में हुआ था, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है। माता कौशल्या को उनके उदार भाव, उनके ज्ञान व श्रीराम के प्रति उनके वात्सल्य भाव के लिये जाना जाता है, यही कारण है कि उन्हें मातृत्व भाव के प्रतीक के रूप में कई स्थानों पर पूजा जाता है, परंतु छत्तीसगढ़ राज्य एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां चन्द्रखुरी नामक स्थान पर माता कौशल्या को समर्पित मंदिर स्थापित है।

भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के लगभग 10 वर्ष अधिकांशतः दण्डकारण्य में व्यतीत किये हैं एवं उक्त सभी स्थानों पर श्रीराम की उपस्थिति से संबंधित बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं। मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश के वनक्षेत्र के संदर्भ में ऐसी धारणा है कि श्रीराम ने अपने वनवास अवधि का एक महत्वपूर्ण भाग यहां व्यतीत किया था, इसलिए इस क्षेत्र में श्रीराम को समर्पित बहुत से मंदिर एवं पवित्र स्थल स्थित हैं ।

यह क्षेत्र कई आदिवासी समुदायों का भी निवास स्थान माना जाता है, जिन्होंने सदियों से अपने पूर्वजों की परंपराओं व संस्कृति को सहेज कर रखा है। श्रीराम ने छत्तीसगढ़ की दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदियां शिवनाथ व महानदी के तट के निकट अपने वनवास का अधिकांश समय बिताया था।

छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के रामायण ‘झांकी प्रदर्शन समूह‘ को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतर्गत प्रतियोगी कार्यक्रम होंगे, जिसमें प्रस्तुत की जाने वाली नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्य-कांड पर आधारित होगा। छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

 

 

भगवान राम के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत : डॉ रश्मि

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महासमुन्द। ग्राम पचरी में रामायण कार्यक्रम में महासमुंद कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई। इस अवसर पर महासमुंद कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने भगवान राम की पूजा अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। उन्होंने उपस्थित ग्रामवासियों से कहा हम सभी को भगवान राम चंद्र जी के बताए मार्ग पर चलने की जरूरत है। रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।

छत्तीसगढ़ भगवान राम का नैनिहाल है। इसीलिए छत्तीसगढ़ के भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ में जहां जहां भगवान राम पधारे थे उस जगह को चिन्हित कर जीर्णोधार करने का काम हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के द्वारा किया गया।उक्त अवसर पर सीटू सलूजा प्रदेश महामंत्री किसान कांग्रेस राजा गंभीर नरेंद्र कौशिक गज्जू ध्रुव ममता चंद्रकार सरपंच श्रीमती हेमलता डडसेना अर्चना मारकंडे पवन डड़सेना हेमंत डड़सेना राजेश डड़सेना  चमेली डडसेना लखन टंडन जनक डडसेना होमेश्वर मनीराम जगन्नाथ गेन्द्रम देवकुमार लीलाधर साहूसहित समस्त कांग्रेस जन और ग्रामीण जन उपस्थित थे।

न छेनी, न चलेगी हथौड़ी - 600 करोड़ साल पुरानी शिलाओं से कैसे तराशी जाएंगी रामलला की मूर्ति , जाने ...

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नई दिल्ली । अयोध्या में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति तैयार करने के लिए नेपाल से शाली ग्राम शिलाएं लाई गई हैं। ये शिलाएं नेपाल के काली गंडकी नदी से लाई गई हैं। बताया जा रहा है कि करीब 600 करोड़ साल पुरानी इन शिलाओं से ही रामलला की मूर्ति को तैयार किया जाएगा लेकिन सामने चुनौती है कि इन शिलाओं पर लोहे के औजारों का इस्तेमाल वर्जित हैं। यानी छेनी और हथौड़ी के जरिए रामलला की मूर्ति नहीं बनाई जाएगी। तो सवाल उठता है कि ऐसे में इन भारी भरकम शिलाओं पर किस चीज का इस्तेमाल कर रामलला की मूर्ति तैयार की जाएगी?


हीरे काटने वाले औजार से होगा मूर्ति का निर्माण

ऐसा बताया जा रहा है कि लोहे का इस्तेमाल वर्जित होने की वजह से छेनी या हथौड़ी का इस्तेमाल इन शिलाओं पर नहीं किया जाएगा। तो ऐसे में इन शिलाओं के जरिए रामलला की मूर्ति को गढ़ने के लिए हीरे काटने वाले औजार का प्रयोग किया जाएगा। नेपाल (Nepal) से लाई गई दो शिलाओं का वजन काफी ज्यादा है इन में से एक 26 टन की तो दूसरी शिला 14 टन की है।

इन शिलाओं पर रिसर्च करने वाले भूगर्भीय वैज्ञानिक डॉ. कुलराज चालीसे ने दावा किया है कि मां जानकी की नगरी से भगवान राम के स्वरूप निर्माण के लिए लायी गई देवशिला में 7 हार्नेस की है। इसलिए लोहे की छेनी के जरिए इन्हें नहीं गढ़ा जा सकता है।

डॉ. कुलराज चालीसे का मानना है कि करीब 600 करोड़ साल पहले की इन शिलाओं पर लोहे के औजारों के बजाए हीरे काटने वाले औजारों का इस्तेमाल किया जाएगा।

26 जनवरी को नेपाल में लादी गई शिलाओं को तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में चार क्रेनों की मदद से उतारा गया। ये शालिएं 1 फरवरी को अयोध्या पहुंची। अगले दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देव शिलाओं की पूजा की गई। फिर इन्हें राम मंदिर समिति को सौंप दिया गया। इससे पहले पूजा-अर्चना के लिए शिलाओं को फूल मालाओं से सजाया गया था।

Ayodhya Mandir: नेपाल से अयोध्या लायी जा रही विशाल शालिग्राम शिलाएं, बनायी जाएगी रामलला की मूर्ति

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 Ayodhya Mandir:  यूपी के अयोध्या में भगवान राम भव्य मंदिर निर्माण हो रहा है। यहां भगवान राम की मूर्ति के लिए विशेष पत्थर का इस्तेमाल होगा, जिसके लिए नेपाल की गंडकी नदी से निकाली गईं विशेष शालिग्राम शिलाएं दो फरवरी को अयोध्या पहुंचेंगी। राम मंदिर के अगले साल जनवरी में मकर संक्रांति तक तैयार होने की उम्मीद है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शिलाओं के साथ आ रहा है और 2 फरवरी को अयोध्या भी पहुंचेगा। हिंदू पौराणिक मान्यता के अनुसार, सीता नेपाल के राजा जनक की बेटी थीं और उनका विवाह अयोध्या के भगवान राम से हुआ था।


जानकारी के मुताबिक ये दोनों शालिग्राम शिलाएं करीब 600 साल पुरानी है। नेपाल के मस्तंग में थोरोंग ला पर्वत दर्रे के तल पर मुक्तिनाथ घाटी में शालिग्रामम के करीब गंडकी नदी से इन्हें निकाला गया है। पोखरा के करीब मिली इन शिलाओं की नेपाल के ही जनकपुर में पूजा की गई। इसके बाद अयोध्या के लिए रवाना किया गया। इसके गुरुवार को अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है। शालिग्राम के रूप में जानी जाने वाली चट्टानों को विष्णु का अप्रतिष्ठित प्रतिनिधित्व माना जाता है।

नेपाल के पीएम और गृहमंत्री के आने की चर्चा

प्रकाश गुप्ता ने कहा कि इनमें से एक शिलाखंड का वजन 26 टन है, जबकि दूसरे का वजन 14 टन है। उन्होंने बताया कि विहिप के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र सिंह पंकज बुधवार को नेपाल के मस्तंग जिले से दो पवित्र शिलाओं की खेप लेकर चल चुके है, उनके गुरुवार को अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है। चर्चा ये भी है कि इन शिलाओं के अयोध्या पहुंचने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी यहां पहुंचेंगे।

निर्माण के लिए मूर्तिकारों का होगा चयन

भगवान राम की मूर्ति इन्हीं शालिग्राम शिलाओं से होगा, ये बात तय हो गई है। इन बेहद साख शिलाओं से मूर्ति बनाने के लिए भी मूर्तिकारों का चयन किया जाएगा। मूर्तिकार सबसे पहले अपनी एक ड्राइंग और सैंपल बनाकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देंगे। इसके बाद जिसकी ड्राइंग और सैंपल सबसे अच्छा होगा, उसे मूर्ति बनाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।


माता कौशल्या का धाम हुआ दीयों से रोशन

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रायपुर। माता कौशल्या का मायका और भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी धाम को आज दीपावली की पूर्व संध्या व रूप चौदस के मौके पर 31 हजार दीयों से रोशन किया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राम वन गमन परिपथ के चिन्हित स्थलों से मे माता कौशल्या माता मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। आज यहां रायपुर समेत अनेक जिलों से राजीव युवा मितान क्लब के सदस्य यहां दीप दान के लिए पहुंचे थे।



दीप दान से पूर्व राजीव युवा मितान क्लब के सदस्यों ने पहले माता कौशल्या धाम चंदखुरी में मंदिर परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। फिर रंगोली व फूलों से परिसर को सजाया। वहीं संध्या बेला में माता कौशल्या मंदिर प्रांगण को 31 हजार दीयों से रोशन किया गया। दीयों की सजावट से ही जय सिया रामउकेरा गया। दीप दान के पश्चात रंग-बिरंगे पटाखों से आतिशबाजी कर चंदखुरी के आसमान को जगमग किया गया। इस दौरान विधायक देवेन्द्र यादव विशेष रूप से मौजूद रहे।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे चंदखुरी को माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। इस लिहाज से चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध है। भगवान राम ने अपने बाल्यपन का काफी समय भी अपने ननिहाल में बिताया है। वहीं वनवास के 14 वर्ष में से लगभग 10 वर्ष की अवधि वे छत्तीसगढ़ के अलग-अलग स्थानों पर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भगवान राम की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने और उन स्थलों के धार्मिक महत्व को समझते हुए उन्हें धर्मस्थल के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया है।

इसके लिए राम वन पथ गमन मार्ग के कुल 75 स्थलों का चयन किया गया है, जिसमें से प्रथम चरण में 9 स्थलों का भव्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत माता कौशल्या धाम से की गई है। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर ही विश्व में एकमात्र माता कौशल्या के मंदिर का जीर्णोद्धार व आकर्षक सौंदर्यीकरण कराया गया है। दूसरे स्थल के रूप में माता शबरी की नगरी शिवरीनारायण को भी विकसित किया जा चुका है।

आज दीपावली की पूर्व संध्या पर विधायक देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में राजीव युवा मितान क्लब के लगभग 200 सदस्यों ने माता कौशल्या धाम चंदखुरी स्थित मंदिर प्रांगण में सफाई के बाद 31 हजार दीपक जलाकर दीपोत्सव मनाया। इस दौरान भव्य आतिशबाजी भी की गई। दीप दान के लिए चंदखुरी समेत आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान आर.पी. सिंह, राजीव युवा मितान क्लब के जिला समन्वयक सुमित साव, सुश्री रोमा भारद्वाज, अंकित बागबाहरा, आशीष चंद्राकर समेत सभी क्लब समन्वय व 200 की संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

कौशल्या के राम से छत्तीसगढ़ का गहरा नाता , आज भी लोग भांजे में देखते हैं प्रभु राम की छवि

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छत्तीसगढ़ की अस्मिता के प्रतीक माता कौशल्या के बेटे भगवान राम का भांजा के स्वरूप में गहरा नाता है। इसका जीता-जागता उदाहरण है, छत्तीसगढ़ में सभी जाति समुदाय के लोग बहन के पुत्र को भगवान के प्रतिरूप मतलब भांजा मानकर उनका चरण पखारते हैं। मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रभु श्रीराम से कामना करते हैं। यह और भी  प्रबल तब होता है, जब गांव-शहर-कस्बा कहीं भी हो कोई भी जाति या समुदाय के हो मांमा-भांजा के बीच के रिश्ते को पूरी आत्मीयता के साथ निभाया जाता है। 


मांमा के साथ किसी भांजे का यह रिश्ता कई बार माता-पिता के लिए बेटे से भी ज्यादा घनिष्ठ स्वरूप में दिखाई पड़ता है। त्रेतायुग में जब छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम कोसल और दंडकारण्य के नाम से विख्यात था, तब कोसल नरेश भानुमंत थे। वाल्मिकी रामायण के अनुसार अयोध्यापति युवराज दशरथ के राज्याभिषेक के अवसर पर कोसल नरेश भानुमंत को भी अयोध्या आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर कोसल नरेश की बेटी और राजकन्या भानुमति भी अयोघ्या गई हुई थी। 

युवराज दशरथ कोसल राजकन्या भानुमति के सुंदर और सौम्य रूप को देखकर मोहित हो गए और कोसल नरेश महाराज भानुमंत से विवाह का प्रस्ताव रखा। युवराज दशरथ और कोसल की राजकन्या भानुमति का वैवाहिक संबंध हुआ। शादी के बाद कोसल क्षेत्र की राजकुमारी होने की वजह से भानुमति को कौशल्या कहा जाने लगा। अयोध्या की रानी इसी कौशल्या की कोख से मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ। तभी ममतामयी माता कौशल्या को तत्कालीन कोसल राज्य के लोग बहन मानकर अपने बहन के बेटे भगवान राम को प्रतीक मानकर भांजा मानते है और उनका पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।

देवताओं की नगरी 

कालांतर छत्तीसगढ़ में स्मृतिशेष आठवी-नौंवी सदी में निर्मित माता कौशल्या का भव्य मंदिर राजधानी रायपुर से 27 किलोमीटर दूर आरंग विकासखंड के चंदखुरी में स्थित है। चंदखुरी भी रामायण से छत्तीसगढ़ को सीधे जोड़ता है। रामायण के बालकांड के सर्ग 13 श्लोक 26 में आरंग विकासखंड के तहत आने वाले गांव चंदखुरी का जिक्र मिलता है। माना जाता है कि चंदखुरी सैकड़ों साल पहले चंद्रपुरी मतलब देवताओं की नगरी के नाम से जानी जाती थी। 

भांजे में देखते हैं प्रभु राम की छवि

समय के साथ चंद्रपुरी, चंदखुरी हो गया जो चंद्रपुरी का अपभ्रंश है। पौराणिक दृष्टि से इस मंदिर का अवशेष सोमवंशी कालीन आठवी-नौंवी शताब्दी के माने जाते है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी संस्कृति में राम का नाम रचे-बसे हैं। तभी तो जब एक दूसरे से मिलते समय चाहे  रिश्ते-नाते हो या अपरिचित राम-राम कका, राम-राम काकी, राम-राम भैइया जैसे उच्चारण से अभिवादन आम तौर पर देखने सुनने को मिल ही जाता है।

माता कौशल्या का दुर्लभ मंदिर 

छत्तीसगढ़ के ग्राम चंदखुरी की पावन भूमि में प्रभु श्रीराम की जननी माता कौशल्या का दुर्लभ मंदिर देश और दुनिया में एक मात्र मंदिर है। यह छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण अस्मिता का प्रतीक है। प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरते इस मंदिर के गर्भ गृह में माता कौशल्या की गोद में बालरूप में प्रभु श्रीराम  जी की वात्सल्य प्रतिमा श्रद्धालुओं और भक्तों के मन को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। वहीं पूर्वी छत्तीसगढ़ के महानदी, जोंक नदी और शिवनाथ नदी के संगम स्थल शिवरीनारायण क्षेत्र में रामनामी समुदाय में भगवान श्री राम के प्रति अकूत प्रेम और अराधना को परिलक्षित करता है।

शोधकर्ताओं ने दी जानकारी

स्मरणीय तथ्य है कि छत्तीसगढ़ का प्राचीनतम नाम दक्षिण कोसल था। रामायण काल में छत्तीसगढ़ का अधिकांश भाग दंडकारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता था। यह क्षेत्र उन दिनों दक्षिणापथ कहलाता था। शोधकर्ताओं द्वारा वनवास काल में प्रभु राम चन्द्र जी के यहां आने का प्रमाण मिलता है। शोधकर्ताओं के शोध किताबों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के 14 सालों में से लगभग 10 साल से ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया था। 

लक्ष्मण और माता सीता ने छत्तीसगढ़ में समय व्यतीत किया

छत्तीसगढ़ के लोकगीतों में देवी सीता की व्यथा, दंडकारण्य की भौगोलिकता और वनस्पतियों के वर्णन भी मिलते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने और यहां के विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया था। इसलिए छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है। भगवान राम के इन्हीं स्मरणीय तथ्यों और आगमन को सहेजने के लिए छत्तीसगढ़ ने श्री राम के यात्रा पथ को और जहां-जहां भगवान श्री राम, भगवान श्री लक्ष्मण और माता सीता ने समय व्यतीत किया है।

रोजगार मुहैया कराने की दिशा कारगर प्रयास

जिन-जिन स्थानों पर उन्होंने आाराम किया पूजा-अर्चना की उन यादों को सहेजकर मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर से शुरू कर राम-वन-गमन-पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नवरात्रि के पहले दिन 7 अक्टूबर को करने जा रहे हैं। इससे निश्चित ही देशवासियों की आस्था का सम्मान बढ़ेगा। यह  भूपेश सरकार का एक बड़ा उल्लेखनीय और ऐतिहासिक कदम हैं। राम-वन-गमन-पथ के निर्माण से निश्चित ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिलेगी। वहीं राम वन गमन परिपथ को एक पर्यटन सर्किट के तौर पर विकसित किए जाने का निर्णय रोजगार मुहैया कराने की दिशा में भी एक कारगर प्रयास होगा। 

 75 स्थलों का भ्रमण

विभिन्न शोध प्रकाशनों के अनुसार प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया। जिसमें से 51 स्थल ऐसे हैं, जहां श्री राम ने भ्रमण के दौरान रूककर कुछ समय बिताया था। राम वन गमन पथ में आने वाले छत्तीसगढ़ के नौ महत्वपूर्ण स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (अम्बिकापुर) , शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्त ऋषि आश्रम (धमतरी) और जगदलपुर(बस्तर) और रामाराम (सुकमा) सहित उन इक्यांवन स्थलों को चिन्हांकित कर विकसित किया जा रहा है।

आकर्षक प्रतिमा का निर्माण

पहले चरण में इन नौ महत्वपूर्ण स्थलों को विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने  137 करोड़ रूपए का ‘कान्सेप्ट-प्लान‘ तैयार किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के  अनुरूप माता कौशल्या मंदिर के मूलस्वरूप को यथावत रखते हुए भव्य और आर्कषक मंदिर के निर्माण किया गया है। वहीं इस क्षेत्र में सौन्दर्यीकरण का काम भी पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही भगवान श्री राम का 51 फीट ऊंचा भव्य और आकर्षक प्रतिमा का निर्माण किया गया है। जिसका अनावरण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। 

राम वन गमन पर्यटन परिपथ का विकास

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के लिए राज्य शासन द्वारा बीते साल पांच करोड़ रूप्ए और इस साल 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने और भव्य राम मंदिर निर्माण शिलान्यास के साथ ही अब छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पर्यटन परिपथ के निर्माण से छत्तीसगढ़ की देश भर में खास पहचान बनेगी। भगवान श्रीराम की माता कौशल्या मंदिर के साथ ही छत्तीसगढ़ में कोरिया से बस्तर के अंतिम छोर तक राम वन गमन पर्यटन परिपथ का विकास होगा। इससे प्रदेश के पर्यटन का भी तेजी से विकास होगा।   

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