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नियमानुसार कार्य करें अन्यथा होगी कड़ी कार्यवाही : प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

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रायपुर। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज जिलों में पदस्थ सहायक आयुक्तों की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक लेकर कड़े  निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ जिलों के छात्रावास / आश्रमों में खरीदी संबंधी अनियमितता जैसे भ्रामक समाचार एक गंभीर विषय है जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। हालांकि ज्यादातर प्रकरणों में कार्यादेश जारी करने से पूर्व ही उसे निरस्त किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसके अलावा पूर्व के वर्षों में हुई खरीदी अनियमितता भी प्रकाश में आई है।

ऐसे सभी प्रकरणों की जांच कराई जा रही है जांच में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कठोर शब्दों में चेतावनी दी कि सहायक आयुक्त अपने विभागीय कार्यों पर ही फोकस करें एवं दूसरे विभागो के कार्य हेतु कार्य एजेंसी बनने से बचें। यदि अति आवश्यक हो तो पहले मुख्यालय से इस संबंध में नियमानुसार अनुमति ली जाये तभी कार्य संपादित किया जाए, अन्यथा ऐसे प्रकरणों की जानकारी प्राप्त होने पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

प्रमुख सचिव बोरा ने कहा की प्रत्येक सहायक आयुक्त को भंडार क्रय नियम एवं जैम पोर्टल का पूरा ज्ञान होना चाहिए। विभागीय छात्रावास-आश्रमों से संबंधित कोई भी सामग्री उच्च गुणवत्तायुक्त एवं सभी मापदंडों के अनुरूप होनी चाहिए जिस पर भंडार क्रय समिति की सहमति पश्चात जिला कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रमों हेतु खरीदी संबंधी किसी भी सामग्री हेतु स्पष्ट प्रकिया का जैम पोर्टल के माध्यम से पालन होना चाहिए। सामग्री की गुणवत्ता एवं दर को गूगल पर जाकर भी सर्च किया जाना चाहिए ताकि उसमें एकरूपता बनी रहे।  उन्होंने विभागीय कार्य प्रणाली में सुधार हेतु समिति गठन के निर्देश आयुक्त, आदिम जाति कल्याण को दिए।

आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर द्वारा इस संबंध में एक पांच सदस्यीय समिति के गठन संबंधी निर्देश जारी किए जा रहे हैं। यह समिति जिले के छात्रावास-आश्रमों की व्यवस्था को सुधारने, निर्माण कार्यों में सुधार, शिक्षण संबंधी सुधार, जैम पोर्टल से संबंधित समस्या अथवा जिलों में अन्य समस्याओं पर सुझाव देगी जिसके आधार पर एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जायेगी। साथ ही सहायक आयुक्तों को निर्देशित किया कि प्रत्येक माह कम से कम 10 छात्रावास आश्रमों का निरीक्षण कर वहां पर साफ-सफाई, स्वच्छ शौचालय की स्थिति, किचन गार्डन, बच्चों के शयन कक्ष, क्लासरूम की साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। छात्रावास / आश्रमों में संधारित सभी पंजियों का भी अवलोकन करें। 

इसके अलावा सभी प्रयास आवासीय विद्यालयों हेतु संस्था चयन संबंधी कार्यवाही 31 जुलाई तक पूर्ण किये जाने के निर्देश दिए गए। पीएम जनमन से संबंधित सभी 18 जिलों में MPC के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिये।बैठक में अपर संचालक संजय गौड़, जितेन्द्र गुप्ता, आर. एस. भोई, उपायुक्त विश्वनाथ रेड्डी एवं कार्यपालन अभियंता त्रिदीप चक्रवर्ती भी उपस्थित थे।


उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राजनीतिक आंदोलनों से सम्बंधित दर्ज प्रकरणों पर मंत्रिपरिषद की उपसमिति की बैठक सम्पन्न

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रायपुर। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में 18 जुलाई को विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से सम्बंधित दर्ज अपराधों पर मंत्रिपरिषद की उपसमिति की बैठक विधानसभा परिसर, रायपुर में सम्पन्न हुई। बैठक में मंत्रिपरिषद के उप समिति के सदस्य उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कृषि मंत्री राम विचार नेताम एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित रहे।

मंत्रिपरिषद उपसमिति की बैठक में विभिन्न जिलों से प्राप्त विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से सम्बंधित दर्ज प्रकरणों में से 15 प्रकरणों की समीक्षा की गई। मंत्रिपरिषद उपसमिति द्वारा इन अनुशंसाओं को मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि अब तक मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक में 139 विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से सम्बंधित दर्ज प्रकरणों को प्रस्तुत किया जा चुका है जिसमे से 126 प्रकरणों को कैबिनेट की बैठक में अनुशंसा प्राप्त की जा चुकी है।


राजस्व मंडल के आदेशों में कूटरचना करने वालों पर कार्यवाही जारी

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अम्बिकापुर। विभिन्न प्रकरणों में आवेदकों द्वारा राजस्व मंडल के आदेशों में कूटरचना किए जाने की जानकारी पर कलेक्टर विलास भोसकर के मार्गदर्शन में लगातार कार्यवाही जारी है। इसी कड़ी में सोमवार को आदेश जारी कर कलेक्टर सरगुजा ने राजस्व मंडल के आदेश में कूटरचना पर तहसील अम्बिकापुर के ग्राम नवागढ़ के आवेदक इसरार अहमद के विरुद्ध सम्बन्धित थाने में एफआईआर कराने के निर्देश नायब तहसीलदार अम्बिकापुर को दिए हैं। 

कलेक्टर सरगुजा द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि राजस्व मंडल छग बिलासपुर के द्वारा अवगत कराया गया है कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत आदेशों तथा न्यायालय द्वारा पारित मूल आदेशों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया गया। परीक्षण उपरांत आदेशों में कूटरचना किया जाना पाया गया है। आवेदक द्वारा राजस्व मंडल छग बिलासपुर के आदेशों में कूटरचना की गई है, जो गंभीर आपराधिक कृत्य है। इस आधार पर राजस्व मंडल छग बिलासपुर के द्वारा सम्बन्धित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर सरगुजा ने आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि उक्त आवेदक पर एफआईआर दर्ज कराई जाए और तहसील अम्बिकापुर के ग्राम नवागढ़  स्थित भूमि खसरा क्रमांक 179/2 रकबा 0.072 हेक्टेयर भूमि का राजस्व मंडल छग बिलासपुर के कूटरचित आदेश के आधार पर हुए नामांतरण को निरस्त करते हुये उक्त भूमि को पूर्ववत शासकीय मद में दर्ज करते हुये उक्त शासकीय भूमि से आवेदक का अनाधिकृत कब्जा हटाया जाए।

महासमुंद : कलेक्टर के निर्देश पर तुरंत अमल

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महासमुंद। कलेक्टर प्रभात मलिक हाल ही में अधिकारियों की ली बैठक में समय सीमा के प्रकरणों के निराकरण और आम जानता की समस्याओं के समाधान और उनके अपने स्तर से निराकृत होने वाले प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रत्येक सोमवार को विकासखंड स्तरीय जन चौपाल कार्यक्रम करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिये थे।

कलेक्टर के निर्देश पर तुरंत अमल करते हुए आज सोमवार को ज़िले के महासमुंद सहित सभी विकासखंडों बाग़बाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली में समय सीमा की बैठक और जन चौपाल लगायी गयी। जहां आम जन की समस्याओं का समाधान भी हुआ। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को सरकारी योजनाओं के साथ विभागीय योजनाओं की भी जानकारी दी। योजनाओं से लाभ लेने की प्रक्रिया भी बतायी।

महासमुंद में जन चौपाल तहसील कार्यालय के सभाकक्ष में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) उमेश साहू की अध्यक्षता में आयोजित हुई। उन्होंने सभी विकासखंड स्तर के अधिकारियों को आम जन से प्राप्त सभी आवेदनों पर समय सीमा में कार्रवाई कर अवगत कराने के निर्देश दिए। पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने कहा। उन्होंने मानसून को ध्यान में रखते हुए सभी ज़रूरी व्यवस्था करने कहा। महासमुंद में आज की इस जन चौपाल में विभिन्न विभागों से संबंधित 17 आवेदन आये। इनमें 6 आवेदनों का निराकरण हुआ। शेष 11 आवेदनों के परीक्षण उपरांत कार्रवाई की जाएगी।

जनचौपाल में विभिन्न विभागों के विकासखंड स्तरीय अधिकारियों राजस्व, वन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पशुपालन, बैंक, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, खाद्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी,विद्युत, सहकारिता, श्रम सहित अन्य विभाग अधिकारियों ने बारी-बारी से अपने-अपने विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए ग्रामीणों से लाभ उठाने की अपील की।

वाई-फाई सुविधा से लैस होंगे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क को वाई-फाई सुविधा से लैस किया जाएगा, ताकि ये पार्क आर्थिक गतिविधियों के सक्रिय केन्द्र के रूप में विकसित हो सकें। मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में गौठानों में बनाए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण-2023 की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में गोबर पेंट निर्माण की कम से कम एक इकाई की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य करें। 

उन्होंने रीपा में उत्पादित सामग्रियों के संस्थागत बिक्री केन्द्रों का बड़े व्यावसायिक संस्थानों के साथ मार्केट लिंकेज कराने के निर्देश दिए। बघेल ने कहा कि रीपा से जुड़े हुए गौठानों को मल्टी एक्टिविटी केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। आर्थिक गतिविधियों में पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े परिवारों के साथ ही पुरूषों की भी सहभागिता बढ़ाई जाए। ऐसा प्रयास किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। इसी तरह उन्होंने रीपा के स्तर पर समूहों को विभिन्न व्यवसायों में कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र पूर्ण करने तथा बरसात के मौसम में सभी गौठानों में छायादार और फलदार वृक्षों का रोपण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में छत्तीसगढ़ सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण-2023 की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण का कार्य एक अप्रैल से प्रारंभ किया गया है। सर्वे का कार्य 30 अप्रैल तक किया गया। एक से 5 मई तक अद्यतनीकरण का कार्य किया जा रहा है। 5 मई से 15 मई तक गांवों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन कर दावा-आपत्ति लिया जाएगा तथा 15 मई से 18 मई तक दावा-आपत्ति वाले प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। 18 मई से 25 मई तक दावा-आपत्ति वाले प्रकरणों में किए गए निराकरणों का पुनः ग्रामसभा में अनुमोदन किया जाएगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर., संचालक पंचायत कार्तिकेय गोयल, रीपा के नोडल अधिकारी डॉ. गौरव कुमार सिंह और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा भी उपस्थित थीं।

भेंट-मुलाकात कार्यक्रम: मुख्यमंत्री की पहल से बलरामपुर जिले के किसानों की वर्षों से लंबित भू-अर्जन मुआवजा राशि मिली

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बलरामपुर। जिले के किसानों के लिए भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जाना सार्थक सिद्ध हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर जल संसाधन विभाग द्वारा गिरवानी और कोटराही जलाशय परियोजनाओं के 43 किसानों की लंबित भू-अर्जन राशि 5 करोड़ 46 लाख 20 हजार रुपए स्वीकृत की गई। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने इन किसानों को मुआवजा राशि का चेक वितरित किया।

किसानों का कहना है कि उन्होंने मुआवजे की आस ही छोड़ दी थी। मुआवजा राशि मिलने से किसानों में खुशी की लहर है। इन किसानों ने मुआवजा राशि मिलने पर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। किसानों की जमीन सिंचाई परियोजनाओं के लिए ली गई थी और लगभग 15 वर्षों से उन्हें मुआवजे की राशि नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में जब इन किसानों ने अपनी समस्या बताई तब उन्होंने अधिकारियों को भू-अर्जन मुआवजा प्रकरणों का परीक्षण कर किसानों को जल्द मुआवजा राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में वाड्रफनगर विकासखण्ड के गिरवानी और कोटराही में सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत जलाशय का निर्माण किया गया था। यहां सिंचाई परियोजनाओं के लिए 43 किसानों की खेतिहर भूमि डूबान क्षेत्र में घोषित करते हुए भू-अर्जन के तहत प्रकरण तैयार किया गया था। इन किसानों को लंबे समय से भू-अर्जन के अंतर्गत मुआवजे की राशि नही मिल पाई थी, किसान मुआवजे की राशि को लेकर चिंतित थे।

ऐसे में कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में सिंचाई परियोजनाओं के मुआवजा प्रकरणों का निराकरण करते हुए कोटराही जलाशय बांध योजना अंतर्गत कुल 16 प्रभावित किसानों को 01 करोड़ 81 लाख 20 हजार 6 सौ रुपये तथा गिरवानी जलाशय बांध योजना के अंतर्गत 27 प्रभावित किसानों को 03 करोड़ 65 लाख 40 रुपये मुआवजे राशि का प्रकरण तैयार किया गया।


सीएम ने अवैध निर्माण के नियमितिकरण के प्रकरणों के निराकरण में विलंब पर जताई गहरी नाराजगी

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अवैध निर्माण के नियमितिकरण के प्रकरणों के निराकरण में विलंब पर गहरी नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने कलेक्टरों को प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए यह नियम लाया गया है, राज्य सरकार ने लोगों को अवैध निर्माण के नियमितिकरण कराने का मौका दिया है, इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि इसका जनता के बीच व्यापक प्रचार प्रसार करें। मुख्यमंत्री ने इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता से करने के निर्देश देते हुए कहा है कि वे स्वयं प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने अवैध निर्माण के नियमितीकरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने और कैंम्प लगाने के निर्देश दिए हैं। अपर संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार आवासीय एवं गैर आवासीय अनधिकृत निर्माण के नियमितिकरण हेतु छत्तीसगढ़ राज्य शासन के द्वारा प्रदेश में 14 जुलाई से छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण संशोधन अधिनियम 2022 एवं नियम 2022 प्रभावशील किया गया था। 

जिसमें 14 जुलाई तक अस्तित्व में आये आवासीय एवं गैर आवासीय तथा भूमि उपयोग का परिवर्तन कर किये गये, अनधिकृत निर्माण का नियमितिकरण किया जाना है। छत्तीसगढ़ विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम-64 के उपबंधों के पालन में छत्तीसगढ़ अनधिकृत निर्माण के नियमितिकरण (संशोधन) विधेयक 2022 को 04 जनवरी 2023 को पुर्नस्थापित किया गया। प्रकरण के निराकरण हेतु जिला नियमितिकरण प्राधिकारी का गठन किया गया है। जिसमें कलेक्टर रायपुर को अध्यक्ष एवं सदस्यों में जिला पुलिस अधीक्षक, संबंधित नगरीय निकाय, जिनके क्षेत्र का प्रकरण होगा या आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, संबंधित विकास प्राधिकरण, जिनके क्षेत्र का होगा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के प्रभारी अधिकारी को सदस्य सचिव नियुक्ति किया गया है।

इस अधिनियम नियम के तहत अनधिकृत विकास करने वाले व्यक्तियों से निर्धारित प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ 14 जुलाई 2023 तक 01 वर्ष के लिये नियमितिकरण हेतु आवेदन पत्र प्राप्त किये जायेगें। इस अवधि में 30 दिन की वृद्धि करने का अधिकार जिला कलेक्टर को दिये गये है। आवेदन पत्र की प्राप्ति हेतु नगर पालिक निगम, नगर पालिका परिषद् एवं नगर पंचायत क्षेत्र में मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा निवेश क्षेत्र के भीतर किन्तु स्थानीय निकाय के बाहर संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय रायपुर अधिकृत किये गये है। नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत स्थानीय निकाय के द्वारा प्राप्त आवेदन पत्रों को निर्धारित आवक पंजी में दर्ज कर, स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन, शास्ति की गणना, कर्मकार शुल्क की गणना की जाकर संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के माध्यम से नियमितिकरण प्राधिकारियों की गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाकर निराकरण किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक रायपुर निवेश  क्षेत्रांतर्गत कुल 549 आवेदन प्राप्त किये गय है, जिसमें 396 आवासीय एवं 153 गैर आवासीय प्रकरण है। नियमितिकरण प्राधिकारियों की गठित समिति द्वारा अब तक 2 बैठक संचालित की गई है। कुल प्राप्त आवेदनों में से 35 प्रकरणों में मांग पत्र जारी किये जा चुके है, जिसके अनुसार 10 प्रकरणों में शास्ति राशि प्राप्त होने उपरांत कुल 27 प्रकरणों को स्वीकृति प्रदान की गई है। कुल 549 प्रकरणों में अनुमानित शास्ति अधिरोपित राशि 4,28,46,696.33 रूपए (चार करोड़ अट्ठाईस लाख छियालिस हजार छह सौ छियान्वे रूपए) मात्र है, जिसमें से दिनांक 17 जनवरी 2023 की स्थिति में शास्ति जमा राशि 27,46,522.85 रूपए (सत्ताईस लाख छियालिस हजार पांच सौ बाईस रूपए) मात्र प्राप्त की गई है।

प्रकरणों के निराकरण हेतु मापदंड निर्धारित है। इनमें आवासीय प्रयोजन हेतु अनधिकृत निर्माण में 120 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखंड पर निर्मित भवनों पर कोई शास्ति शमन शुल्क नहीं लिया जायेगा, किन्तु 120 वर्गमीटर से 240 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखण्डों पर 125/- रू. प्रति वर्गमीटर, 240 से 360 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल के भूखण्डों पर 200 रू. प्रति वर्गमीटर तथा 350 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखण्डों पर 300 रू. प्रति वर्गमीटर की दर से शास्ति की गणना की जायेगी। व्यावसायिक तथा अन्य गैर आवासीय प्रयोजनों हेतु निर्मित अनधिकृत निर्माण के लिये मापदंड 100 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु शास्ति भवन अनुज्ञा शुल्क का 16 गुणा शास्ति देय होगी। 100 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 200 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 21 गुणा शास्ति देय होगी।

200 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 300 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 26 गुणा शास्ति देय होगी। 300 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 400 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 31 गुणा शास्ति देय होगी। 400 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 500 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 36 गुणा शास्ति देय होगी। 500 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 600 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 41 गुणा शास्ति देय होगी। 600 वर्गमीटर से अधिक किन्तु 700 वर्गमीटर तक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 46 गुणा शास्ति देय होगी। 700 वर्गमीटर से अधिक के भूखंड पर निर्मित अनधिकृत निर्माण हेतु भवन अनुज्ञा शुल्क का 51 गुणा शास्ति देय होगी। भवन अनुज्ञा शुल्क से तात्पर्य भूमि विकास नियम 1984 में निर्धारित शुल्क से है। निर्धारित प्रयोजन से भिन्न भूमि उपयोग परिवर्तन करने पर उस क्षेत्र की भूमि के लिये वर्तमान में प्रचलित कलेक्टर गाईड लाईन दर का 5 प्रतिशत अतिरिक्त शास्ति देय होगी।

यदि अनधिकृत विकास, निर्धारित पार्किंग हेतु आरक्षित भूखंड स्थल पर किया गया हो तो नियमितिकरण की अनुमति तभी दी जायेगी, जब आवेदक द्वारा पार्किंग की कमी हेतु निर्धारित अतिरिक्त शास्ति राशि का भुगतान कर दिया गया हो। 1 जनवरी 2011 के पूर्व अस्तित्व में आये अनधिकृत विकास/निर्माण जिनकी भवन अनुज्ञा/विकास अनुज्ञा स्वीकृत हो, अथवा ऐसी अनधिकृत भवन जिसके लिए संबंधित स्थानीय निकाय में शासन द्वारा निर्धारित दर से सम्पत्ति कर का भुगतान किया जा रहा हो, ऐसे भवनों में यदि छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 अथवा संबंधित विकास योजना के अनुरूप पार्किंग उपलब्ध नहीं है तो 25 प्रतिशत तक पार्किंग हेतु देय शास्ति प्रत्येक कार स्थान हेतु 50 हजार रूपये, 25 प्रतिशत से अधिक एवं 50 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु 1 लाख रूपये, 50 प्रतिशत से अधिक एवं 100 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु 2 लाख रूपये शास्ति देय होगा। 

1 जनवरी 2011 अथवा उसके पश्चात् अस्तित्व में आये अनधिकृत विकास/निर्माण जिनकी भवन अनुज्ञा/विकास अनुज्ञा स्वीकृत हो, अथवा ऐसी अनधिकृत भवन जिसके लिए संबंधित स्थानीय निकाय में शासन द्वारा निर्धारित दर से सम्पत्ति कर का भुगतान किया जा रहा हो, ऐसे भवनों में यदि छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 अथवा संबंधित विकास योजना के अनुरूप पार्किंग उपलब्ध नहीं है तो 25 प्रतिशत तक पार्किंग हेतु देय शास्ति प्रत्येक कार स्थान हेतु 50 हजार रूपये, 25 प्रतिशत से अधिक एवं 50 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु 1 लाख रूपये शास्ति देय होगा। 50 प्रतिशत से अधिक एवं 75 प्रतिशत तक प्रत्येक कार स्थान हेतु 2 लाख रूपये शास्ति देय होगा। 

शमन योग्य पार्किंग आवासीय अधिभोग में 500 वर्गमीटर तक निर्मित क्षेत्र में पार्किंग हेतु उपलब्ध न्यूनतम क्षेत्रफल निरंक, 500 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र में पार्किंग हेतु उपलब्ध न्यूनतम क्षेत्रफल 50 प्रतिशत होगा, इसी प्रकार गैर आवासीय अधिभोग में 500 वर्गमीटर तक निर्मित क्षेत्र में पार्किंग हेतु उपलब्ध न्यूनतम क्षेत्रफल निरंक, 500 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र में पार्किंग हेतु उपलब्ध न्यूनतम क्षेत्रफल 50 प्रतिशत होगा। गैर लाभ अर्जन करने वाली सामाजिक संस्थाएं जो लाभ अर्जन के उद्देश्य से स्थापित न की गई हो के अनधिकृत विकास के प्रत्येक प्रकरण में शास्ति प्राक्कलित राशि के 50 प्रतिशत की दर से देय होगा। 

छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 39 में निर्धारित प्रावधानोंनुसार मार्ग की चौडाई उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थल में विद्यमान गतिविधियों में किसी प्रकार का लोकहित प्रभावित न होने की स्थिति में नियमितिकरण किया जा सकेगा। आवेदन पत्र का प्रारूप संलग्न दस्तावेज इत्यादि की जानकारी स्थानीय निकाय एवं कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर एवं विभागीय वेबसाईड www.tcp.cg.gov.in से प्राप्त की जा सकती है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजस्व प्रकरणों के निराकरण में लेट-लतीफी पर जतायी नाराजगी

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में बेवजह लेट-लतीफी पर गहरी नाराजगी जतायी है। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को राजस्व के सभी प्रकार के लंबित मामलों को तेजी से निराकरण करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राजस्व मामलों के निराकरण में लेट-लतीफी के लिए सीधे कलेक्टरों को जिम्मेदार मानकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

मुख्यमंत्री स्वयं फरवरी माह के आखिरी सप्ताह में जिला कलेक्टरों की बैठक लेकर जिलेवार राजस्व प्रकरणों जैसे- नामान्तरण, सीमांकन, डायवर्सन भूमि आबंटन,व्यवस्थापन तथा फ्री-होल्ड प्रकरणों के साथ ही अवैध निर्माण का नियमितिकरण तथा नगरीय निकायों को एक रूपये प्रति वर्ग फीट की दर से भूमि आवंटन आदि की समीक्षा करेंगे।

गौरतलब है कि राज्य में राजस्व प्रकरणों का निराकरण मुख्यमंत्री की मंशा और राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। इसको लेकर शासन द्वारा समय-समय पर निरंतर निर्देश जारी किए जाते रहे, परंतु अपेक्षा अनुरूप प्रगति न होने के मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया है और लंबित राजस्व प्रकरणों की स्वयं समीक्षा करने को कहा है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान लगातार प्रदेशभर की विधानसभाओं में पहुंचकर आम जनता से सीधे रू-ब-रू हो रहे है और विभिन्न योजनाओं के साथ ही उनके राजस्व संबंधी मामलों के बारे में भी फीडबैक ले रहे हैं और लंबित मामलों का तत्परता से निराकरण करने के निर्देश भी अधिकारियों को दे रहे है।


राज्य बाल संरक्षण आयोग ने की बच्चों के साथ लैंगिक अपराध मामलों में पहचान उजागर नहीं करने की अपील

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रायपुर। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपील की है कि समाज और परिवार के लिए बेहद जरूरी है वे बच्चों को शक, संशय और संवादहीनता से बचाएं। उन्होंने यह भी कहा है कि मीडिया को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध के प्रकरणों में उनकी पहचान उजागर करना पाक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन होने पर 6 माह से 1 वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।


बच्चों की पहचान उजागर नहीं करने की अपील

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने अपील की है कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध होने की दशा में किसी भी प्रकार से पहचान प्रकट नहीं की जा सकती है। समाचार पत्रों, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं वेब पोर्टल्स के द्वारा संस्थाओं का नाम, फोटो आदि प्रकाशित किये जाने की घटनाएं घट रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा ऐसी घटनाओं को रोकने और बच्चों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग की अपील

राज्य बाल संरक्षण आयोग के अनुसार, बच्चों के संरक्षण के लिए मीडिया के साथियों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों को जानना आवश्यक है। पत्रकारों को आयोग से पहले पता होता है कि अपराध कहां घटित हुआ है। मीडिया को बाल अधिकारों के उल्लंघन और शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से करनी चाहिए। उन्होंने अपील की है कि बच्चों से जुड़े हर मामले की सूचना आयोग को दी जाए।

कानूनों से आम लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने अपील की है कि बच्चों से जुड़े अपराधों पर नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया को संवेदनशील होने और उन्हें गंभीरता से लेने की सख्त जरूरत है, ताकि किसी पीड़ित बच्चे और विशेषकर यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचे बगैर उन्हें न्याय मिल सके। कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आम लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत है। बच्चों के साथ अपराध की स्थिति में समाज के हर वर्ग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाएं।

राजस्व मंत्री ने किया राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन

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रायपुर। प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा निवास पर वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे लिखित राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ का विमोचन किया। लगभग 1100 पृष्ठों के इस ग्रंथ में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद लोक हित में भू-राजस्व संहिता में अनेकों संशोधन किए गए हैं। संशोधनों के प्रवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा शासकीय परिपत्रों के माध्यम से जो दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, उन सभी का समावेश इस ग्रंथ में किया गया है।



राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लोकार्पण अवसर पर विमोचन करते हुए राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि इस ग्रंथ में राजस्व संबंधी सभी संदर्भों का समावेश होने से राजस्व प्रकरणों के संबंध में यह ग्रंथ मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते हुए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा, इसमें संदेह नहीं। राजस्व मंत्री ने उम्मीद जतायी कि इस ग्रंथ से राजस्व न्यायालयों और अधिवक्ताओं को बहुत सहायता मिलेगी। अथक परिश्रम से तैयार किए गए इस ग्रंथ के लिए राजस्व मंत्री ने ग्रंथ के लेखक वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार दुबे व पुस्तक प्रकाशन में सहयोगकर्ता अधिवक्ता अभिषेक दुबे को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

राजस्व पुस्तक परिपत्र ग्रंथ के लेखक विजय कुमार दुबे ने बताया कि ग्रंथ में राजस्व संबंधी मामलों के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी किए गए अद्यतन परिपत्रों तक को समाहित किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह ग्रंथ राजस्व संबंधी प्रकरणों के निपटान में एक संदर्भ पुस्तक के रूप में सर्व संबंधित के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। विद्वान अधिवक्ता दुबे ने बताया कि उनके द्वारा लिखित अनेक पुस्तकों में से यह चौथी पुस्तक है, जिसका विमोचन राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है। इससे पूर्व तीन अन्य पुस्तकों का विमोचन विगत वर्षों में राजस्व मंत्री द्वारा किया गया है।

राज्य सूचना आयोग आयोग में 4901 प्रकरणों का निराकरण

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग आयोग को जनवरी 2022 से 16 नवंबर 2022 की स्थिति में कुल 6667 आवेदन अपील और शिकायत के प्राप्त हुआ, जिनमें से अपील और शिकायत के 4901 प्रकरणों का निराकरण किया गया। तत्कालीन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त ने 1220 अपील और शिकायत के प्रकरणों का निराकरण किया। इसी प्रकार राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने 1421 अपील और शिकायत के प्रकरणों का निराकरण, राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने 1050 अपील और शिकायत और राज्य सूचना आयुक्त धनवेन्द्र जायसवाल के द्वारा 1210 अपील और शिकायत के प्रकरणों का निराकरण किया।



सूचना व्यक्ति के ज्ञान का स्त्रोत है। वह विकास की आधारभूत शक्तिहै । सूचना व्यक्ति के जीने और संघर्ष करने की सामर्थ को बढ़ाती है, जो सूचना दे रहा है उसमें सहयोग पारदर्शिता और संयम को विकसित करती है। केन्द्र और राज्य सरकारों के अतिरिक्त पंचायतीराज सरथाएँ, स्थानीय शासन तथा गैर-सरकारी संगठन जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी अनुदान प्राप्त होता है को, इस कानून में शामिल किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग आयोग को जनवरी 2022 से 16 नवंबर 2022 तक 4066 द्वितीय अपील के प्रकरण प्राप्त हुए जिनमें 3513 प्रकरणों का निराकरण किया गया। निराकृत द्वितीय अपील के प्रकरणों में तत्कालीन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राउत ने 842 प्रकरणों का राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने 961 द्वितीय अपील के प्रकरणों का निराकरण किया गया शामिल है। राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने 721 द्वितीय अपील के प्रकरणों का और राज्य सूचना आयुक्त धनवेन्द्र जायसवाल ने 989 द्वितीय अपील के प्रकरणों का निराकरण किया गया है।

इसी प्रकार जनवरी 2022 से 16 नवंबर 2022 तक 2601 शिकायत के प्रकरण आयोग को प्राप्त हुए जिनमें 1388 शिकायत के प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें तत्कालीन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त राउत ने 378 शिकायत प्रकरणों का, राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने 460 शिकायत के प्रकरणों का, राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने 329 और राज्य सूचना आयुक्त धनवेन्द्र जायसवाल के द्वारा 221 शिकायत के प्रकरणों का निराकरण किया है। राज्य सूचना आयोग में प्रशासनिक एवं कार्यसुविधा की दृष्टि से सूचना आयुक्तों के मध्य आयोग के कार्यो का विभाजन किया गया हैं।

वर्तमान में आयोग में चार वीडियो कांफ्रेसिंग की सुविधा है, जिसका उपयोग राज्य के सुदूर क्षेत्रों के जिलें के आवेदकों, शिकायतकर्ताओं से प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई के लिए निरन्तर की जा रही है। आयोग द्वारा अपील प्रकरणों में सुनवाई के समय जनसूचना अधिकारी एवं अपीलार्थी को नोटिस देकर निर्धारित तिथि को अभिलेखों के साथ बुलाया जाता है तथा दोनों पक्षों को अपना तर्क प्रस्तुत करने के लिए समुचित अवसर प्रदान किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने द्वितीय अपील और शिकायतों की सुनवाई कर समयबद्ध निराकरण किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में अपीलार्थी और जनसूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय अधिकारी को प्रकरण से संबंधित तर्क, जवाब लिखित रूप से आयोग को  ई-मेल, व्हाट्सअप और फैक्स से भेजने निर्देशित किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने की प्रकरणों की गंभीरतापूर्वक सुनवाई

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गरियाबंद। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती अनीता रावटे द्वारा जिले में प्राप्त प्रकरणों की गंभीरता से सुनवाई किया गया। आज राज्य महिला आयोग के समक्ष कुल 27 प्रकरण पंजीबद्ध हुए थे, 5 प्रकरणों राज्य महिला आयोग कार्यालय के लिए प्रेषित किया गया एवं 8 प्रकरण सुनवाई के पश्चात नस्तीबद्ध कर दिया गया है। आज हुए सुनवाई के प्रकरणों में मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, मारपीट और संपत्ति विवाद से संबंधित प्रकरण शामिल थे। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक तथा सदस्य श्रीमती अनीता रावटे ने गंभीरतापूर्वक लोगों की समस्याएं सुनी और वस्तुस्थिति अनुसार प्रकरणों संतुष्टिपूर्ण निराकरण किया। अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य डॉ अनीता रावटे ने आज मौके पर आवेदकों के प्रकरण का निराकरण कर आवेदक और अनावेदक दोनों को संतुष्ट किया। 




जनसुनवाई में उप पुलिस अधीक्षक सुश्री निशा सिन्हा, शासकीय अधिवक्ता सुश्री शमीम रहमान, अधिवक्ता डॉ अखिलेश भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडे सहित पुलिस प्रशासन भी मौजूद थे। सुनवाई के दौरान एक प्रकरण ग्राम परसदा के सरपंच एवं पंच के विरूद्ध उसी ग्राम के पंचायत सचिव आवेदिका का कहना है कि ग्राम पंचायत के सामान्य सभा की बैठक में अनावेदिका सरपंच ने आवेदिका पंचायत सचिव को धमकी दी थी। अनावेदिका का कथन है कि आवेदिका अपने जिम्मेदारी की पूर्ति नही कर रही थी। उसकी शिकायत पर जांच अधिकारी भी आये थे और उस बैठक के आवेदिका के खिलाफ निर्णय भी हुआ था। उसके बाद आवेदिका का स्थानांतरण दूसरे जगह कर दिया गया था। 

सरपंच और सचिव के बीच की सामान्य शिकायत होने के कारण इस प्रकरण को आयोग कार्यालय में स्थानांतरित किया गया है। जिसमें दोनो पक्षकार अपना अपना सबूत प्रस्तुत करेंगे जिससे इस प्रकरण का निराकरण किया जा सकेगा। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि दोनो पक्षो की बीच सुलह हो जाने एवं पिछले 8 माह के एक साथ रह रहे है और आवेदिका आगे कोई कार्यवाही नहीं चाहती है इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगण ने मिलकर एक संस्था के आश्रम में कब्जा कर लिया है और उनके सभी सामान रखा है। 

आवेदिका के साथ जमीनदाता भी उपस्थिति हुए। उनके पास स्टाम्प पर कुछ दस्तावेज है। उन्होने बताया कि उनके आश्रम में लगे जमीन को उन्होने खरीदा था और आश्रम के नाम पर दान करना स्वीकार किया था लेकिन बाद में अनावेदक की नियत खराब हो गयी और अपने भांजे के नाम जमीन कराने वाला था तब अपनी जमीन को वापस करने की मांग किया तब अनावेदक के स्टाम्प के लिखकर मांगा था। अनावेदक का कहना है कि सम्पत्ति मूलतः अनावेदक की पैतृक सम्पत्ति है पैतृक लिए वह अनुमति लेकर सम्पत्ति की देखरेख करनेे आया है। वहां रखी सामग्री आपसी राजीनामा से देने तैयार है। आयोग द्वारा दोनो पक्षो को अपना अपना दस्तावेजो सूचीबद्ध कर आयोग कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिये गये।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका अनावेदक की पहली पत्नि है जिनका कानूनी रिति रिवाज से तलाक नही हुआ है अनावेदक पुरातत्व विभाग के केयर टेकर पर पर कार्यरत है जिसका मासिक वेतन 25 हजार रूपये मिलता है, और अपनी पत्नि को भरण-पोषण हिस्सा नही देता है। आज आयोग के समक्ष पत्नि बेटे को उनके हिस्से का जमीन, मकान देने को राजी हुआ। आयोग ने दोनो पक्षों को आयोग कार्यालय रायपुर मे उपस्थित होने कहा गया और आयोग से इस प्रकरण पर काउंसलर नियुक्त करेगा जिस पर इस प्रकरण का निराकरण हो सके।

सम्पत्ति विवाद के एक अन्य प्रकरण में अनावेदकगण संयुक्त सहमति के 6 बराबर के हिस्सेदार है और आवेदिका का सम्पत्ति के 6वां हिस्सा है दोनो पक्षो को समझाइश दिया गया कि अपनी सम्पत्ति का पूर्ण ब्यौरा लेकर आयोग कार्यालय मे उपस्थित हो ताकि 6वां हिस्सा आवेदिका के पुत्र के नाम करने के लिए अनावेदिकागण स्टाम्प पर विधिवत लिखा पढ़ी कराया जा सके। अनावेदक अनावेदक अपनी जिम्मेदारी पर लेकर आवेदिका की सहमति दी। सभी अनावेदकगणों के पूर्ण विवरण सूचीबद्ध कर अनावेदक ने आयोग को दिया जिस पर उस पते पर थाना प्रभारी के माध्यम से अनावेदिकागणों को आवश्यक रूप से उपस्थित कराया जा सके जिससे इस प्रकरण पर समझौता कार्यवाही किया जा सके।

पशु चिकित्सा विभाग ने आवेदिका को किया सस्पेंड, विभाग द्वारा जांच रिपोर्ट आने के बाद आयोग लेगा प्रकरण पर निर्णय

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कवर्धा। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक ने आज कवर्धा जिले से महिला आयोग को प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई की। उनके द्वारा पक्षकारों की उपस्थिति में दोनों पक्षकारों की कथनों को सुनकर सुनवाई की गई। जिन प्रकरणों में सुनवाई पूर्ण की गई ऐसे प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। कुछ प्रकरणों को रायपुर में सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित किया गया है। सुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने पक्षकारों की उपस्थिति में उनके अभिमत और कथन को सुनकर फैसला सुनाया। आज की सुनवाई के लिए 12 प्रकरण आयोग के समक्ष रखें गए थे,  इनमें 7 प्रकरणों पर सुनवाई पूरी हो जाने पर नस्तीबद्ध किया गया। 



साथ ही अन्य प्रकरणों की सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित किया गया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. नायक ने कहा कि कबीरधाम जिले में अभी महिलाओं की बहुत ज्यादा शिकायते आयोग के पास नहीं आई है। प्राप्त शिकायतों पर आयोग द्वारा लगातार सुनवाई की जा रही है। इस दौरान कलेक्टर जनमेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मनीषा ठाकुर रावटे, संयुक्त कलेक्टर डॉ. मोनिका कौडो, डीएसपी श्रीमती मोनिका परिहार, जिला संरक्षण अधिकारी सुश्री निकिता डडसेना उपस्थित थे। पशु चिकित्सा विभाग के एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक उनके सहयोगी चिकित्सक है। उनके द्वारा लगातार आवेदिका के कामकाज को लेकर अनावश्यक दखलअंदाजी और टिका-टिप्पणी किया जाता था। 

आवेदिका ने आयोग में शिकायत दर्ज करने के पूर्व पशु चिकित्सा विभाग में भी शिकायत किया था, लेकिन जॉच समिति ने मेरे दस्तावेजों को नही देखा और अनावेदक चूंकि स्थानीय है और पूर्व में भी विभाग में काम कर चुके थे इसलिए अधीनस्थ कर्मचारियों पर दबाव बना रहता है। विभाग ने जून 2022 में आवेदिका को सस्पेंड कर दिया गया है, जिसकी अपील आवेदिका ने विभाग में कर रखी है और जॉच होना है। आयोग द्वारा इस स्तर पर आवेदिका के प्रकरण में तत्काल निर्णय लिया जाना संभव नहीं है। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा जॉच कर रिपोर्ट 02 माह में आयोग को आवश्यक रूप से प्रस्तुत करने आयोग द्वारा पत्र प्रेषित किया जाएगा। इस प्रकरण को रायपुर सुनवाई के लिए रखा गया है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि, फरवरी में लड़की गुम हुई थी और अप्रैल माह में मिल चुकी है और आरोपीगणों को पुलिस ने पकड़ लिया है वह जेल भी गया है। इसलिए प्रकरण जारी रखने का औचित्य नहीं है। आयोग द्वारा आवेदिका को समझाईश दिया गया कि वह इस प्रकरण में आरोपीगणों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए विधिक सहायता से अधिवक्ता प्राप्त कर सकती है।  जिला संरक्षण अधिकारी महिला बाल विकास विभाग कबीरधाम को आवेदिका का मदद करने के लिए कहा गया तथा आवेदन नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में अनावेदक लगातार अनुपस्थित है उसे मध्यप्रदेश भिण्ड जिला के एसपी को पत्र भेजकर एएसआई के माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए पत्र भेजना होगा। आवेदिका को समझाईश दिए जाने पर प्रकरण रायपुर में सुनवाई के लिए रखा जाना स्वीकार किया। आयोग ने कहा कि प्रकरण आगामी सुनवाई में डीजीपी और एसपी को पत्र भेजकर अनावेदक की उपस्थिति सुनिश्चित हो पाएगी।

अनावेदक के अभिभावक को पक्षकार बनाकर कोतवाली के माध्यम से आवश्यक उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रेषित किया जाएगा

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अपने प्रकरण की सुनवाई रायपुर में कराना चाहा। आवेदिका ने एक सूचीबद्व लिस्ट दिया जिसमें। अनावेदक के माता-पिता के नाम है, उन्हें भी इस प्रकरण में पक्षकार बनाना आवश्यक है क्योंकि इसी वजह से अनावेदक को बचाया जा रहा है। थाना कोतवाली कवर्धा के माध्यम से आवश्यक उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रेषित किया जाएगा। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने 02 दस्तावेज प्रस्तुत किए जिसमें आवेदिका के शिकायत को बढ़ा चढ़ाकर बताया गया है। अतः प्रकरण नस्तीबद्व किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका की ओर से जिसके द्वारा शिकायत प्रस्तुत किया गया है, उनके द्वारा ऐसे किसी भी शिकायत से इंकार किया गया। इसलिए प्रकरण को नस्तीबद्व किया गया।

आयोग के आड़ में अवैध कार्य स्वीकार्य नही, घरेलू आपसी मन मुटाव का समाधान परिवार के बीच ही किया जाए, सामाजिक बहिष्कार गंभीर चुनौती - डॉ किरणमयी नायक

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बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने आज जिला पंचायत के सभागार में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर जन सुनवाई की। सुनवाई में कुल 25 प्रकरण रखे गये थे। जिसमें 18 प्रकरणों के आवेदक उपस्थित रहे एवं उनकी सुनवाई की गयी। उसमें से आज 7 प्रकरणों को निराकरण करते हुए नस्तीबद्ध किया गया। साथ ही कुछ प्रकरणों को  सुनवाई हेतु रायपुर स्थानन्तरण किया गया है। इस दौरान महिला आयोग की सदस्य डॉ अनिता रावटे उपस्थित रही। डॉ. नायक ने महिलाओं को समझाईश देते हुए कहा कि घरेलू आपसी मनमुटाव का समाधान परिवार के बीच किया जा सकता है।


घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान एवं आपसी सामंजस्य सुखद गृहस्थ के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही आयोग के आड़ में अवैध कार्य को किसी भी तरह से स्वीकार्य नही किया जाएगा। 
वर्तमान समय में सामाजिक बहिस्कार एक बड़े चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित सुनवाई में मुख्य रूप से महिलाओं से मारपीट, मानसिक, शारीरिक, दैहिक प्रताड़ना कार्यस्थल पर प्रताड़ना दहेज प्रताड़ना से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की गई। भाटापारा विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम कोनीबंजर के आवेदक ने अपने पति पर बिना तलाक दिए विवाह करने का आरोप लगाया था। 

जबकि अनावेदक का आठ साल की बच्ची भी है।आयोग ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए अनावेदक के खिलाफ एफआईआर धारा आईपीसी की धारा 494 के तहत कराने के निर्देश दिए है। साथ ही उक्त मामले में न्यायालीन क्षेत्र भाटापारा रखने के निर्देश दिए है। उसी तरह बलौदाबाजार नगर  निवासी आवेदक ने अपने  अनावेदक ससुर पर समाज की आड़ में मानसिक प्रताड़ना एवं उनके पति के जायदाद को बेचने साथ ही घर से बेदखल करने का आरोप लगाया गया। आयेाग ने मामले की गंभीरता को लेते हुए पुलिस अधीक्षक को एक महिने के भीतर जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है। 

क्योंकि उक्त प्रकरण में आवेदक के खिलाफ दबाव पूर्ण तरीके से पुलिस विभाग के ही कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध पंजीबध्द कराने के संदेह मिले है। उक्त प्रकरण के लिए डीएसपी अभिषेक सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किए गए है। उसी तरह एक अन्य प्रकरण में भाटापारा विकासखंड के अंर्तगत ग्राम रमदैया निवासी आवेदक ने ग्राम पंचायत सरपंच पर सामाजिक से बहिष्कार कर हुक्कापानी बंद करने का आरोप लगाया है।

जिस पर आयोग ने मामले के जांच के लिए महिला बाल विकास के प्रोटेक्शन अधिकारी मंजू तिवारी एवं सखी सेंटर के केन्द्र प्रशासक तुलिका परगनिहा की नियुक्ति की गई है। उक्त अधिकारी आगामी 20 सितम्बर को गांव में पहुंचकर विस्तृत जांचकर रिपोर्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। इसी तरह सुनवाई दौरान डीएसपी अभिषेक सिंह,जिला कार्यक्रम अधिकारी एल आर कच्छप अन्य विभागीय अधिकारी गण उपस्थित थे। साथ ही आयोग की सुनवाई के दौरान आवेदक अनावेदक सहित जनप्रतिनिधि गण उपस्थित थे।

मानव तस्करी रोकथाम, अन्य हितधारकों तथा पीड़ीतों के पुनर्वास विषय पर हुआ परिचर्चा का आयोजन इस दौरान मानव तस्करी रोकथाम तथा पीड़ीतों के पुनर्वास विषय पर परिचर्चा का भी आयोजन किया गया। जिसमें जिलें में मानव तस्करी से संबंधित प्रकरणों के संबंध में जानकारी सहित इसके बचाव के आयामों पर मार्गदर्शन दिया गया। इस दौरान कलेक्टर रजत बंसल, पुलिस अधीक्षक दीपक झा सहित टास्क फोर्स के सम्मानित सदस्य भी उपस्थित रहे। इस दौरान कलेक्टर रजत बंसल ने मानव तस्करी के संबंध में जन जागरूकता के लिए अलग से कार्य महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को दिए है।

एसटी, एससी अधिनियम-1989 के प्रावधान के तहत दर्ज प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करें: सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 की राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ST, SC वर्ग को विभिन्न प्रावधानों के तहत मिलने वाले लाभों और अधिनियम-1989 के अंतर्गत 2019, 2020 एवं 2021 में दर्ज प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की गई। साथ ही अधिनियम-1989 के अंतर्गत 2019, 2020 एवं 2021 में स्वीकृत राहत राशि की भी समीक्षा की गई।


उक्त बैठक में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू
, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम समेत संसदीय सचिव व मुख्य सचिव अमिताभ जैनगृह सचिव मनोज पिंगुआ, विभागीय सचिव डी. डी. सिंह तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी उपस्थित थीं। वहीं संस्कृति मंत्री अमरजीत सिंह भगत व पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा समेत अन्य संसदीय सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। 


अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम
1989 के प्रावधान अनुसार गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में सदस्यगण ऑनलाइन वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से भी शामिल हुए। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम-1989 के प्रावधान के तहत दर्ज पुलिस के पास लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण करने के निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस अन्वेषण स्तर पर स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने में यदि विलंब होता है तो संबंधित ग्राम सभा से यह तस्दीक कर लिया जाये कि पीड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का है या नहीं। इसके लिए विधि विभाग,



गृह विभाग एवं आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग समन्वय कर समीक्षा कर लें। विशेष न्यायालयों में दर्ज प्रकरणों के त्वरित निराकरण किये जाने बाबत् विशेष लोक अभियोजकों के स्तर से यथोचित प्रयास करने संबंधी निर्देश दिये जाने हेतु विधि विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया। मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जिला स्तरीय एवं उपखण्ड स्तरीय बैठकों का आयोजन नियत समयावधि में आवश्यक रूप से किये जाने हेतु जिला कलेक्टरों को एवं अनुविभागीय अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी किये जाने के लिए भी निर्देशित किया।


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