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न्यायिक अधोसंरचना से न्याय शीघ्र व सुलभ होगा- मुख्य न्यायाधीश सिन्हा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में न्यायिक अधोसंरचना में वृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हुए एवं आमजन के लिए बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से माननीय मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के द्वारा आज बिलासपुर जिला के बिल्हा तहसील में नवीन सिविल कोर्ट भवन का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी पोर्टफोलियो न्यायाधीश जिला बिलासपुर, न्यायामूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास, न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की गरिमामय उपस्थिति रही। 

मुख्य न्यायाधिपति महोदय सिन्हा ने न्याय की प्रभावी पहुंच आमजन तक स्थापित किये जाने में न्यायिक अधोसंरचना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि, सशक्त अंधोसंरचना ही प्रभावी न्यायप्रणाली की आधारशिला होती है। छ.ग. राज्य के समस्त जिले में बुनियादी न्यायिक अधोसंरचना स्थापित होने से न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की दक्षता बढ़ने के साथ-साथ आमजन को निष्पक्ष एवं कुशल न्याय, शीघ्र, सरल, सुलभ हो सकेगा। 

मुख्य न्यायाधिपति के द्वारा नवीन सिविल न्यायालय भवन बिल्हा की हरियाली, वातावरण एवं स्वच्छता के साथ - साथ न्यायालय कक्ष, सुविधाजनक प्रतिक्षालय, शिशु देखभाल कक्ष अभियोजन कार्यालय, सुरक्षित बंदीगृह एवं उपलब्ध सुविधाओं की प्रंशसा करते हुए कहा कि यह भवन छत्तीसगढ़ के अन्य जिला न्यायालयों के लिये मिसाल साबित होगा। 

इस अवसर पर मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने कहा कि, माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा न्यायिक संस्थाओं में बुनयादी एवं आधारभूत सुविधा उपलब्ध किये जाने पर जोर दिया जाता रहा है। उनकी प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था किये जाने की है कि, छत्तीसगढ़ के सभी न्यायिक संस्थाओं में सर्वसुविधायुक्त भवन हो, जिससे आधारभूत संसाधन उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि बिल्हा में नवीन सिविल कोर्ट भवन, समय की जरुरत थी। बिल्हा में नवीन न्यायालय भवन निर्माण से स्थानीय नागरिकों को न्याय तक त्वरित पहुँच सुनिश्चित होगी। यह भवन न केवल भौतिक रूप से सुसज्जित है, बल्कि इसमें डिजिटल कोर्ट, वकीलों के लिए आधुनिक कक्ष, अस्पताल, ए.टी.एम. तथा प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। मुख्य न्यायाधिपति द्वारा उपस्थित न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी एवं अधिवक्तागण को दिशानिर्देश दिया गया कि, सुविधायुक्त अधोसंरचना व आधुनिक तकनीकी का उपयोग पक्षकारों को सुविधापूर्ण वातावरण में शीघ्र एवं गुणवत्तायुक्त न्याय प्रदान किये जाने हेतु किया जाए। न्याय की आशा के साथ उपस्थित पक्षकारों की समस्याओं को सुविधापूर्ण वातावरण में शीघ्रता से निराकृत किया जाए। 

यह उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति  रमेश सिन्हा द्वारा पद भार ग्रहण करने के पश्चात् सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के दूरस्थ जिला मुख्यालय एवं बाह्य न्यायलयों का भ्रमण कर न्यायिक अधोसंरचना एवं आवश्यक सुविधाओं का अभाव होने से पक्षकारों, अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारी एवं अधिकारियों को होने वाली असुविधा को दृष्टिगत रखते हुये दूरदर्शिता-पूर्ण एवं सकारात्मक सोच के भागीरथ प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में न्यायिक अधोसंरचना से अभूतपूर्ण विकास कार्य हो रहा है। इससे अधिकारी एवं कर्मचारियों की दक्षता में वृद्धि होने के साथ पक्षकारों को सुविधायुक्त वातावरण, शीघ्र न्याय प्राप्त करने की परिकल्पना साकार हो रही है। बिल्हा का नवीन न्यायालय भवन का निर्माण कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्ता के उच्चतम मानको के अनुरूप पूर्ण हो सका है। लोकार्पण, कार्यक्रम की शुरूआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर के स्वागत भाषण से हुई और समापन मुख्य न्यायिक मजिस्टेट धन्यवाद ज्ञापन से हुआ, कार्यकम के पश्चात न्यायालय भवन प्रांगण में वृक्षारोपण किया गया। 

इस कार्यक्रम में छ.ग. उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं समस्त न्यायिक अधिकारीगण बिलासपुर, अध्यक्ष उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ बिलासपुर, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ बिल्हा, संभाग आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य प्रशासनिक, पुलिस एवं अधिकारीगण, अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारी और इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधि शामिल थे।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने उच्च न्यायालय के वाहन चालक को उत्कृष्ट सेवा के लिए किया सम्मानित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा द्वारा आज उच्च न्यायालय के कर्मचारी लक्ष्मण सिन्हा, वाहन चालक को उनकी कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण व उत्कृष्ट सेवा के लिए स्मृति चिन्ह, शॉल व श्रीफल प्रदान करते हुए सम्मानित किया गया तथा उनके भावी स्वस्थ्य जीवन के लिए शुभकामनाएं दी।

उल्लेखनीय है कि लक्ष्मण सिन्हा इसी माह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1998 में राज्य प्रशासनिक अधिकरण से अपनी सेवा प्रांरभ की थी तथा उसके भंग होने के पश्चात् वर्ष 2005 से इस उच्च न्यायालय में अपनी सेवायें प्रदान कर रहे थे। इस अवसर पर संयुक्त रजिस्ट्रार कम पीपीएस एम.वी.एल.एन सुब्रहमन्यम, डिप्टी रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) हिमांशु कुमार विश्वास व प्रोटोकॉल अधिकारी आर.एस. नेगी उपस्थित रहे।

 


केंद्र सरकार ने अरविंद कुमार वर्मा को बनाया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का जज

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 रायपुर :  केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के न्यायिक अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में प्रमोशन को मंजूरी दे दी है। इसकी जानकारी कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने X पर दी।


केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के न्यायिक अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में प्रमोशन को मंजूरी दे दी है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने बीते चार जनवरी को न्यायिक अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा को हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव भेजा था। जिसके बाद केंद्र सरकार अरविंद कुमार वर्मा को हाईकोर्ट का जज बनाने की मंजूरी दे दी।


भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि भारत की राष्ट्रपति ने अरविंद कुमार वर्मा को 2 साल की अवधि के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल अपने कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी रहेगा। जस्टिस के रूप में वर्मा की नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की संख्या 16 हो जाएगी। हाई कोर्ट में जजों के कुल स्वीकृत पद 22 हैं।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर नियुक्तियों की घोषणा की। तीन नामों की लिस्ट जारी करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए माननीय राष्ट्रपति, माननीय मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद, इन्हें हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किया गया है।”

बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बीते छह अगस्त को अरविंद कुमार वर्मा को हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा था। मुख्यमंत्री और राज्यपाल के अनुमोदन के बाद फाइल सर्वोच्च न्यायालय को भेजी गई थी। अरविंद कुमार वर्मा इससे पहले जगदलपुर, रायपुर और बिलासपुर में जिला और सत्र न्यायाधीश रह चुके हैं। 5 मई 2022 से वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल के पद पर पदस्थ हैं।


BIG NEWS : IAS रानू साहू से 3 दिन तक पूछताछ करेगी ED , कोर्ट ने दी रिमांड

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रायपुर। विशेष कोर्ट ने आईएएस रानू साहू तीन दिनों का रिमांड मंजूर कर लिया है। ईडी ने 14 दिन की रिमांड मांगी थी। ईडी को 25 जुलाई को रानू साहू को फिर से कोर्ट में पेश करना होगा। ईडी विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की कोर्ट में आईएएस रानू साहू को पेश करके 14 दिन की रिमांड मांगी थी। 


आईएएस रानू साहू की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील फैजल रिजवी ने बताया कि ईडी ने 14 दिन की रिमांड मागी थी। कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड मंजूर की है।

आईएएस रानू को भी कोयला से संबंधित मामले में गिरफ्तार किया गया है।  अक्‍टूबर 2022 से जनवरी 2023 तक ईडी ने जब-जब आईएएस साहू को बुलाया तब- तब वे ईडी के कार्यालय गईं। जनवरी 2023 के बाद से आज तक ईडी ने उन्‍हें कोई सम्‍मन जारी नहीं किया है। 

बता दें कि आईएएस रानू साहू के घर ईडी ने कई कोल परिवहन से जुड़े मामले को लेकर दबिश दी थी। इस दौरान ईडी के अफसरों द्वारा उनके बंगले और मायके से कई अहम दस्तावेज बरामद किए जाने का दावा किया था। बताया जा रहा है कि ईडी ने इन दस्तावेजों और आय से जुड़े मामलों को लेकर कई बार पूछताछ की, लेकिन उन्होंने संतोषप्रद जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।


छत्तीसगढ़ के जस्टिस प्रशांत मिश्रा बनेंगे सुप्रीम कोर्ट में जज

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बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा  को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है। वहीं सीनियर एडवोकेट के.वी. विश्ववनाथन भी सुप्रीम कोर्ट में नए जज होंगे।


इस आशय का एक प्रस्ताव 16 मई को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम के प्रस्ताव के अनुसार, उच्च न्यायालयों के पात्र मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ उप न्यायाधीशों की योग्यता और क्षमता के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद निर्णय लिया गया है। बता दें कि जस्टिस मिश्रा को 13 अक्टूबर, 2021 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं। सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान संरचना में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।

रायगढ़ जिले में हुआ था जन्म


जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा का जन्म 29 अगस्त 1964 को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जन्म हुआ था. उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की. इसके बाद गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली. चार सितंबर 1987 को वकील के रूप में काम शुरू किया. उन्होंने रायगढ़ जिला न्यायालय, जबलपुर हाईकोर्ट, बिलासपुर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की. इस दौरान उन्होंने सिविल, क्रिमिनय और रिट सभी तरह के मामलों की पैरवी की. जनवरी 2005 में उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सीनियर अधिवक्ता के रूप में नॉमिनेट किया गया. वे छत्तीसगढ़ राज्य बार कौंसिल के अध्यक्ष भी रहे.

BIG -NEWS : Rahul Gandhi को तगड़ा झटका, मानहानि मामले में Surat Court ने खारिज कर दी अर्जी

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सूरत। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। आपराधिक मानहानि केस में दोषी करार दिए गए राहुल गांधी की उस याचिका को सूरत सेशंस कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी दोषसिद्धि और सजा पर रोक की मांग की थी।


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरपी मोगेरा की अदालत ने पिछले गुरुवार को राहुल गांधी के आवेदन पर फैसला 20 अप्रैल तक सुरक्षित रख लिया था। राहुल को आपराधिक मानहानि के इस मामले में 2 साल कैद की सजा सुनाए जाने के एक निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राहुल की अपील लंबित रहने के बीच फैसला सुरक्षित रखा गया।

राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से सांसद बने थे। पिछले 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में राहुल गांधी को दोषी करार दिया था और दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी जिसके एक दिन बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया।

राहुल ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ तीन अप्रैल को सत्र अदालत का रुख किया। उनके वकीलों ने दो आवेदन भी दाखिल किये जिनमें एक सजा पर रोक के लिए और दूसरा अपील के निस्तारण तक दोषी ठहराये जाने पर स्थगन के लिए था।

अब HC में करेंगे अपील

मोदी सरनेम मानहानि केस में सूरत की सेशंस कोर्ट ने राहुल गांधी की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अब राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

 

 

यशवंत चंद्रचूड़ ने ली सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शपथ

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नईदिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि वे रजिस्ट्री और न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए काम करेंगे।


न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित का स्थान लिया है, जो कल सेवानिवृत्त हो गए। उन्नीस सौ उनसठ में जन्मे, न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ तेरह मई दो हजार सोलह को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। इससे पहले, उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया था




बिलासपुर में पॉक्सो एक्ट के क्रियान्वयन पर कार्यशाला सम्पन्न

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रायपुर। पॉक्सो एक्ट के क्रियान्वयन पर बिलासपुर में कार्यशाला का आयोजन किया गया। हाईकोर्ट बिलासपुर की किशोर न्याय कमेटी द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती तेजकुंवर नेताम आज बिलासपुर में किशोर न्याय कमेटी हाईकोर्ट द्वारा बच्चों के लैंगिक अपराधों के संरक्षण अधिनियम 2012 के क्रियान्वयन पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में शमिल हुईं। कार्यशाला के आयोजन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य न्यायिक अकादमी का भी सहयोग रहा।



शुभारंभ सत्र में मुख्य न्यायाधीश अरूप गोस्वामी व अन्य न्यायाधीशगण उपस्थित थे। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति पी सेम कोशी ने और न्यायमूर्ति अरविंद सिह चंदेल, श्रीमती तेजकुंवर नेताम, महिला बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती दिव्या मिश्रा ने सह अध्यक्षता की। इस सत्र में पॉक्सो एक्ट के क्रियान्वयन से जुड़ी विसंगतियों और संवेदनशील बिंदुओं पर आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने प्रस्तुति और सुझाव दिये। उन्होंने बच्चे और आरोपी का सामना न होने देने, मनोवैज्ञानिक सलाहकारों की उपलब्धता की कमी आदि की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भविष्य में पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर आयोग द्वारा की जा रही पहल के बारे में भी अवगत कराया।

संयुक्त जिला कार्यालय में मेगा कानूनी जागरूकता अभियान

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बालोद। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वाधान में एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार 31 अक्टूबर 2022 से 13 नवम्बर 2022 तक कानूनी जागरूकता और आउटरीच के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद डॉ प्रज्ञा पचैरी के मार्गदर्शन में नालसा मॉड्यूल मेगा कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन संयुक्त जिला कार्यालय बालोद में आज आयोजित किया गया। उक्त मेगा शिविर में शासन द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को इलेक्ट्रिक ऑटो, इलेक्ट्रानिक ट्रायसायकल, मछली जाल, आईस बॉक्स आदि प्रदान किया गया तथा कुछ हितग्राहियों को श्रम विभाग की भगिनी प्रसूति योजना अंतर्गत चेक व खाद्य विभाग की सार्वभौम पीडीएस योजना के तहत् राशन कार्ड प्रदाय की गई एवं स्कूल में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र वितरण किया गया।



उक्त मेगा शिविर में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट मुकेश कुमार पात्रे, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती श्यामवती मराबी के द्वारा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी गई एवं एडीएम योगेन्द्र श्रीवास राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में जानकारी दी गई एवं श्रम विभाग के श्रमपदाधिकारी संजय सिंह के द्वारा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के संबंध में जानकारी दी गई। उक्त अवसर पर सुश्री आस्था यादव न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सुश्री कोनिका यादव व्यवहार न्यायाधीश तथा हेमंत राज ध्रुव व कुमारी माधुरी मरकाम प्रशिक्षु न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के पैरालिगल वांलिटियर्स रमेश कुमार शर्मा, कमलेश्वर साहू, बृजेश साहू, प्रमेश्वरी एवं एवं हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  


अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए विधिक रूप से जागरूक होना जरूरी : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश टोप्पो

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मुंगेली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा-निर्देश के अनुसार जिले में 13 नवंबर तक कानूनी जागरूकता और आउटरीच के माध्यम से नागरिकों का सशक्तिकरण के संबंध में अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में और कलेक्टर राहुल देव मार्गदर्शन में आज जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभाकक्ष में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में जिला स्तरीय मेगा विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।



अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रबोध टोप्पो ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विधिक जागरूकता का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को कानून से संबंधित बातों से परिचित कराकर उनका सशक्तिकरण करना है। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत न केवल कमजोर व्यक्तियों को विधिक सेवा उपलब्ध कराया जाना शामिल है, बल्कि सुदूर एवं ग्रामीण अंचलों में कैम्प लगाकर आम जनता को विभिन्न विधिक प्रावधानों से अवगत कराते हुए उन्हें विधिक रूप से साक्षर बनाना भी विधिक सेवा कार्यक्रम का एक अभिन्न अंग है, जिसे विधिक साक्षरता कार्यक्रम के रूप में जाना जाता है।

टोप्पो ने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए विधिक रूप से जागरूक होना जरूरी है। विधिक अज्ञानता के कारण लोग अपने अधिकारों से वंचित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई गरीब व्यक्ति धनाभाव के चलते अपने मुकदमे की पैरवी नहीं कर पा रहा है या उसे वकील नियुक्त करने में परेशानी आ रही है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन कर सकता है, कुछ औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद उसे प्राधिकरण की ओर से वकील मुहैया कराया जाता है। उन्होंने कहा कि हर जिले व हर तहसील में एक सेवा प्राधिकरण का स्थापना किया गया है, जहां किसी भी समस्या संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बलराम कुमार देवांगन ने कहा कि हम विधि के बारे में जितना ज्ञान रखेंगे, उतना ही हम अपना सर्वांगीण विकास कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चा जब पैदा होता है, तभी कानूनी प्रक्रिया से जुड़ जाता है। इसलिए सभी को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने संविधान में समान विधिक सेवा सभी नागरिकों को उपलब्ध कराने उल्लेखित अनुच्छेदों का जिक्र किया। व्यवहार न्यायाधीश लोकेश कुमार ने कहा कि विधिक जागरूकता का मुख्य उद्देश्य लोगों को दिए गए हक के प्रति जागरूक करना है। निःशुल्क विधिक सेवा सभी नागरिकों का अधिकार है और प्रयास है कि सभी नागरिकों को इसकी जानकारी हो। 

जिला पंचायत के सीईओ डी. एस. राजपूत ने कहा कि वंचितों को आर्थिक एवं सामाजिक न्याय दिलाने के लिए जागरूकता और आउटरीच अभियान एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में जिला स्तरीय मेगा विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह काफी सहयोगी साबित होगा।स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के उपलक्ष्य में ‘‘हक हमारा भी तो है’’ के तहत जिला स्तरीय मेगा विधिक जागरूकता शिविर में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा 13 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड

राजस्व विभाग द्वारा 13 विद्यार्थियों को जाति, निवास एवं आय प्रमाण पत्र, जनपद पंचायत लोरमी द्वारा 03 हितग्राहियों को नवीन जाॅब कार्ड, कृषि विभाग द्वारा 10 हितग्राहियों को मिनी किट, समाज कल्याण विभाग द्वारा 07 हितग्राहियों को व्हील चेयर और ट्रायसायकल, खाद्य विभाग द्वारा 09 हितग्राहियों को राशनकार्ड और मछलीपालन विभाग द्वारा 07 हितग्राहियों को जाल, आईस बाॅक्स एवं प्लेक्टान ग्रोवर प्रदान किया गया। इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर नवीन भगत, एसडीएम मुंगेली सुश्री आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित संबंधित विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे। मंच संचालन शिक्षक रामपाल सिंह ने किया।

 

केन्द्रीय जेल में बंद एक कैदी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को लिखा धमकी भरा पत्र

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बिलासपुर। बिलासपुर की केन्द्रीय जेल में बंद एक कैदी द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को धमकी भरा पत्र भेजकर पचास करोड़ रूपए की फिरौती की मांग करने का मामला सामने आया है। बिलासपुर पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि अपहरण आदि मामलों में जेल में बंद पुष्पेन्द्र नाथ चौहान नाम के कैदी द्वारा डाक से नैनीताल पत्र भेजने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि यह कैदी इससे पहले भी पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के अनेक प्रभावशाली लोगों को धमकी भरे पत्र भेजकर फिरौती की मांग कर चुका है। 



इस मामले की जांच करने उत्तराखंड से नैनीताल पुलिस की टीम बिलासपुर पहुंची हुई है। बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र स्थित पोड़ी गांव में अंधविश्वास के चलते एक ग्रामीण की मृत्यु हो गई है। बताया जाता है कि मृतक मानसिक रोगी था। इलाज कराने के लिए उसे एक बैगा के यहां ले जाया गया, जहां बैगा ने झाड़फूंक के नाम पर उसके शरीर में कई जगह पर गर्म सलाखों से दागा, जिसके चलते रोगी की मृत्यु हो गई। पुलिस ने आरोपी बैगा पर हत्या का मामला दर्ज किया है।

जांजगीर पंच की हत्या, दो आरोपियों को फांसी की सजा

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जांजगीर। जांजगीर के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश जून नेग्राम पंचायत के एक पंच की हत्या के मामले में दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही आरोपियों पर पचास-पचास हजार रूपये का अर्थदण्ड भी लगाया है। गौरतलब है कि इन दोनों आरोपियों ने पिछले वर्ष शिवरीनारायण थाना क्षेत्र के तुस्मा गांव के पंच की हत्या कर दी थी। 



यह घटना नवागढ़ तुस्मा गांव के पंच भागवत साहू पिता प्रेमलाल की दो युवकों सोहित कुमार केंवट पिता दुकालु केंवट और सुनील कुमार केंवट पिता महादेव केंवट ने दिनदहाड़े जमीन विवाद को लेकर हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों युवक गांव गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गए और वहां से हाथ में हथियार लहराते हुए एक युवक ने कहा कि उसी ने हत्या की है क्योंकि उसकी जमीन को बिकवा दिया गया मगर उसका पूरा पैसा नहीं दिया गया। 

अभी इसमें शामिल और लोगों को भी मारेगा। सूचना मिलने पर पुलिस गांव पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। तथा यह बतादेँ कि यह आरोपि अपनी जमीन की समस्या का निराकरण की मांग कर रहे थे तुस्मा निवासी सोहित कुमार केंवट और सुनील कुमार केंवट का जमीन को लेकर पंच भागवत साहू से विवाद था।



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हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का पांचवा दीक्षांत समारोह कल 31 जुलाई को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.वी. रमना होंगे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। इसके अलावा आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा के साथ ही कई अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भी समारोह में शामिल होंगे।



भारत के मुख्य न्यायाधीश कल सुबह दिल्ली से रवाना होकर रायपुर विमानतल पहुंचेंगे। दीक्षांत समारोह में शामिल होने के बाद वे विमान से दोपहर विशाखापट्नम के लिए रवाना हो जाएंगे। गौरतलब है कि दीक्षांत समारोह में बी.ए.एल.एल.बी. के तीन सौ सात, एल.एल.एम. के एक सौ दस और पी.एच.डी. के चार विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी। वहीं, तेईस विद्यार्थियों को विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम से गोल्ड मैडल प्रदान किया जाएगा।
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