Media24Media.com: धान खरीदी

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छत्तीसगढ़ में 15 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदे सरकार :  मोहन चंद्राकर

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किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का निर्णय अव्यवहारिक और राइस मिल कारोबार के लिए खतरा बन गया है। अनेक राइस मिलों में तालाबंदी की स्थिति निर्मित हो सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार चाहे तो 15 क्विंटल धान खरीदी कर किसानों की आय मे वृद्धि कर राइस मिलर्स व्यवसाय को भी चौपट होने से बचा सकती है।

मोहन चंद्राकर, प्रगतिशील किसान

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। छत्तीसगढ़ की भूमि में लगभग 20 हजार से अधिक किस्मों की धान की खेती की जाती है। सन 2000 मे जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ पृथक राज्य का निर्माण किया गया। तब प्रदेश की बागडोर श्री अजीत जोगी के हाथों मे सौंपी गई। उस समय छत्तीसगढ़ मे धान की खेती और उत्पादन बहुत कम होती थी। प्रदेश में अजीत जोगी की सरकार द्वारा सबसे पहले किसानों से समर्थन मूल्य पर सोसायटी के माध्यम से धान खरीदी की पहल की गई। जिससे प्रदेश के गरीबों के लिए पर्याप्त मात्र मे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) मे बांटने के लिए चावल उपलब्ध हो सके। तत्कालीन प्रदेश सरकार की यह एक अच्छी पहल थी। इससे एक तीर से दो निशाना साधा गया। एक ओर सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधा धान खरीदकर किसानों को आर्थिक लाभ पहुच रही थी। तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीबों को चावल (खाद्यान्न) बांट रही थी।

कृषि आधारित उद्योग से रोजगार

प्रदेश सरकार किसानों से धान खरीद कर उसे राज्य में स्थापित राइस मिलों से धान की मिलिंग करा रही थी। इससे प्रदेश मे राइस मिल उद्योग को प्रोत्साहित कर नई ऊर्जा प्रदान की गई। इससे राज्य में साल दर साल नए राइस मिल की स्थापना होती गई और प्रदेश के इस कृषि आधारित उद्योग से हजारों-लाखों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है ।

प्रदेश के पहली विधानसभा चुनाव मे भारतीय जनता पार्टी की चुनावी घोषणा हुई। और बीजेपी की सरकार बनी तो किसानों को केंद्र सरकार के MSP के अलावा राज्य सरकार बोनस भी दी। बीजेपी की यह घोषणा प्रदेश के किसानों को अधिक उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया। और प्रदेश सरकार द्वारा धान खरीदी को प्रदेश ही नहीं पूरे देश के लिए एक मजबूत चुनावी एजेंडा मिल गया। इसके बाद किसान या खेती का कार्य करने वालों को देश की सभी राजनीतिक पार्टियां तावज्जो देने लगी।

खेती को मिला बढ़ावा

बीजेपी की प्रदेश सरकार के इस प्रभावशाली महत्वपूर्ण कार्य से प्रदेश के किसान, जो खेती किसानी से विमुख हो रहे थे। वे अब वापस खेती किसानी की तरफ मुड़ने लगे। गावों के पढे-लिखे युवा, जो रोजगार की तलाश मे शहरों मे भटक रहे थे, वे भी गाँव लौट कर खेती किसानी करने लगे।

प्रदेश मे साल दर साल धान की बम्पर उत्पादन होने लगी। और धान की बढ़ती उपज से प्रभावित होकर प्रदेश के राइस मिल उद्योग मे भी जबरदस्त ग्रोथ होने लगा। जहाँ सन 1999 मे प्रदेश में केवल कुछ गिने चुने राइस मिलें थीं, वहीं अब सैकड़ों की संख्या मे राइस मिलें लग चुकी है। इससे रोजगार मे भी बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश के कुछ प्रमुख जिले जहाँ धान उत्पादन के अलावा कोई और फसल नहीं होता है और वहाँ कोई भी अन्य उद्योग नहीं स्थापित है, वहाँ राइस मिलें लगने से किसान, ग्रामीण मजदूर एवं राइस मिल उद्योग का स्वर्णिम काल शुरू हो गया।

प्रदेश की तात्कालिक बीजेपी सरकार के इस कदम का देश की कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अनुशरण किया। छत्तीसगढ़ मे अपनी-अपनी सरकार बनाने के लिए किसानों से धान खरीदी को अपना राजनीतक केंद्र बिन्दु बनाया । 1970 के दशक के हरित क्रांति के कुछ -कुछ प्रतिफल यह छत्तीसगढ़ के किसानों और धान उत्पादन मे दिखने लगा। प्रदेश के दूसरे विधानसभा चुनाव और तीसरे विधानसभा चुनाव मे राजनीतिक पार्टीयां न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा राज्य सरकार की किसानों को बोनस राशि देने का खेल शुरू हुआ। राजनीतिक पार्टियां बोनस की राशि की बोलिया लगाने लगे । हमारी सरकार आने से न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर इतना बोनस देंगे, आदि आदि। नतीजन, प्रदेश के किसानों ने भी राजनीतिक पार्टियों के घोषणाओं को हाथों -हाथ लिया और धान उत्पादन की क्षमता मे जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। साल 2024-25 में 149 लाख मीट्रिक टन समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का नया रिकार्ड बना।

धान का औसत उत्पादन 20 से 21 क्विंटल

प्रदेश के मेहनतकश किसानों ने अपना किसान धर्म का पालन किया और प्रदेश ही नहीं किन्तु अन्य प्रदेशों के गरीबों का पेट भरने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को सक्षम बनाया। वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश मे 3100 से अधिक राइस मिलर्स हैं, जिनकी बर्बादी की शुरुआत होने की सुगबुगाहट होने लगी। इसके कुछ प्रमुख कारण है–प्रदेश सरकार द्वारा किसानों से पूरा 21 क्विंटल धान की खरीदी करना, प्रदेश सरकार द्वारा 3100 रुपये में प्रति क्विंटल धान की खरीदी करना। प्रदेश के किसानों के खेती से औसत मे 20-21 क्विंटल ही धान का उत्पादन होता है। कहीं-कहीं, किसी क्षेत्र विशेष मे 25 क्विंटल तक भी उत्पादन होता है। किन्तु प्रदेश का औसत उत्पादन 20-21 क्विंटल प्रति एकड ही है।

राइस मिलर्स के लिए धान उपलब्ध नहीं

पिछले विधानसभा चुनाव से प्रदेश सरकार किसानों से उनका सम्पूर्ण धान की खरीदी कर रही है, तो बाजार मे राइस मिलर्स के लिए धान उपलब्ध नहीं होती है। जिस कारण से मिलर्स को मजबूरी में सरकार का ही कस्टम मिल का काम करना पड़ता है। प्रदेश सरकार के पास वर्तमान मे अपने धान की रख रखाव के लिए पूरी अधोसंरचना नहीं है।

प्रदेश के उपार्जन केंद्रों और संग्रहण केंद्रों में कोई भी गोडाउन नहीं है, जिससे धान रखने में अव्यवस्था होती है। प्रदेश मे नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास भी राज्य पूल और केन्द्रीय पूल के चावल रखने के लिए पर्याप्त गोडाउन नहीं होने के कारण मिलर्स से समय पर चावल नहीं ले पा रही है। केंद्र सरकार के लाख कोशिश के बाद भी खाद्य पदार्थों, विशेष कर चावल का बाजार मूल्य काम नहीं हो रही है। इसका कारण है बाजार मे पर्याप्त मात्र मे धान की उपलब्धता नहीं होने से चावल की सुगम पूर्ति बाधित होना।

किसान और मिलर्स दोनों का भला

अगर सरकार मे बैठे लोग चाहेंगे तो इसको सुगम कर सकते हैं। प्रदेश सरकार चाहे तो किसानों की प्रति एकड़ आय मे बढ़ोतरी करते हुए लगभग 25% - 27% तक धान बाजार मांगों के अनुरूप किसानों के बेचने के लिए किसानों के पास छोड़ सकती है। आज प्रदेश के किसानों से सरकार 21 क्विंटल धान 3100/- प्रति क्विंटल मे खरीदी करती है। जिसका मूल्य होता है 65100 रुपये। प्रदेश सरकार के पास इस 21 क्विंटल धान या इससे मिलिंग कर प्राप्त चावल को रखने की कोई अधोसंरचना नहीं होना, तो धान में सूखत , चावल रखने के लिए पर्याप्त गोडाउन नहीं है, इन सब अव्यवस्था में मिलर्स बिना वजह आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं और कई मिलर्स राइस मिल व्यसाय को बंद कर रहे हैं। एक महत्वपूर्ण सुझाव है कि अगर सरकार चाहे तो किसानों को 21 क्विंटल धान का प्रतिफल 65100 रुपये दे, किन्तु केवल 15 क्विंटल धान ही उपार्जन समितियों के माध्यम से खरीदी करे, इससे किसानों को अतरिक्त आय होगी।

कैसे व्यवस्था होगी, समझें

21 क्विंटल धान 3100/- में मतलब किसानों को मिलता है 65100 रुपये सरकारी खरीदी से। अब अगर सरकार 15 क्विंटल खरीदी कर पूरा भुगतान 65100 रुपये करती है तो किसानों को मिलता है 4340/- प्रति क्विंटल मूल्य और किसान बचत धान 6 क्विंटल को बाजार मे बेचता है मान लो 2000/- प्रति क्विंटल मे तो ये होता है 12000/-। तो इसका मतलब हुआ कि किसान को अपनी एक एकड़ मे उत्पादित 21 क्विंटल धान का मूल्य होता है- 77100 रुपये। इस तरह किसानों की आय मे भी वृद्धि होती है और बाजार मे भी लगभग 25-26% धान आने से राइस मिलर्स भी अपना अस्तित्व बचा सकते हैं।

पिछले साल के धान खरीदी का टूटा रिकार्ड, धान खरीदी का आंकड़ा 145 लाख मीट्रिक टन से पार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 14 नवम्बर से शुरू हुए धान खरीदी का सिलसिला अनवरत रूप से जारी है। अब तक के धान खरीदी में पिछले साल का रिकार्ड टूट गया है। पिछले वर्ष 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इस वर्ष आज दिनांक तक हुई धान खरीदी का आंकड़ा 145 लाख मीट्रिक टन से पार हो गया है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 25 लाख 13 हजार किसान धान बेच चुके हैं। धान खरीदी के एवज में बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत अभी तक किसानों को 29 हजार 599 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है।

धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मीलिंग के लिए तेजी के साथ धान का उठाव किया जा रहा है। अभी तक 110 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ और टीओ जारी कर दिया गया है। जिसके विरूद्ध 87 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठाव हो चुका है। धान खरीदी  31 जनवरी 2025 तक चलेगी।

प्रदेश के समस्त पंजीकृत कृषकों को खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान विक्रय हेतु टोकन की सुविधा ऑनलाईन एप्प (टोकन तुंहर हांथ) एवं उपार्जन केन्द्रों में 25 जनवरी 2025 तक के लिए उपलब्ध कराया गया है। किसान सुविधा अनुसार तिथि का चयन कर नियमानुसार धान विक्रय कर सकते है।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा इस खरीफ वर्ष के लिए 27.78 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.59 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है।

राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य की तहत 24 जनवरी को 30 हजार 762 किसानों से 1.41 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। इसके लिए 58 हजार 997 टोकन जारी किए गए थे।

15 फरवरी तक किसानों को धान खरीदी के अंतर की राशि एकमुश्त देंगे - मुख्यमंत्री साय

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  रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार 15 फरवरी तक धान खरीदी के मूल्य के अंतर की राशि किसानों को एकमुश्त देगी। इसका निर्णय आज केबिनेट की बैठक में ले लिया गया है। इसका लाभ राज्य के लगभग 27 लाख किसानों को होगा। मुख्यमंत्री साय ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय में विकास कार्यों के लोकार्पण शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस अवसर पर किसानों के सिंचाई विद्युत पंप सहायता योजना का नाम डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना करने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को 137.41 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की सौगात दी, जिसमें 47.87 करोड़ के 84 कार्यों का लोकार्पण और 89.54 करोड़ रूपए के भूमिपूजन कार्य शामिल है।


मुख्यमंत्री साय ने 38 करोड़ रूपए की लागत से सारंगढ़ में जिला अस्पताल का निर्माण व 18.75 करोड़ की लागत से बनने वाले संयुक्त जिला कार्यालय भवन के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ में उद्योग स्थापना के लिए जमीन आबंटन, डेढ़ करोड़ की लागत से सारंगढ़ मुख्य मार्ग चौड़ीकरण, सरिया में 50 सीटर छात्रावास भवन, सारंगढ़ में उच्च स्तरीय विश्राम गृह भवन निर्माण, कोसीर के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर हितग्राहियों को शासन के विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहायता राशि के चेक व सामग्री प्रदान की।

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि 20 वर्षों तक सारंगढ़ मेरी कर्मभूमि रही है। अब मुख्यमंत्री के रूप में सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित छत्तीसगढ़ के विकास की जिम्मेदारी को पूरा करने का कार्य लगातार कर रहे हैं। हमने बीते एक साल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की गारंटी को पूरा करने का काम किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवासों के निर्माण में तेजी आई है। पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी गई है। पहले चरण में 8.47 लाख आवास निर्माण को स्वीकृति मिली थी। इनमें से कई हितग्राहियों के आवास पूर्ण हो गए हैं और अब वे गृह प्रवेश कर रहे है। केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ आगमन पर उन्होंने 3 लाख 88 हजार अतिरिक्त आवास की स्वीकृति दी है। आगामी अप्रैल माह में राज्य को 3 लाख आवासों की स्वीकृति और मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में आवास प्लस के सर्वे का काम भी शुरू कर दिया है। पीएम आवास के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। अब जिनके पास दो पहिया वाहन है, 2.5 एकड़ सिंचित भूमि अथवा 5 एकड़ असिचिंत भूमि, 15 हजार तक की मासिक आमदनी वालों को भी आवास मिलेगा। आवास स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने ऑनलाइन ऐप लॉन्च किया गया है। इससे किसी भी व्यक्ति द्वारा घर बैठे ही आवेदन किया जा सकेगा। राज्य सरकार महतारी वंदन योजना में माताओं और बहनों को एक हजार रुपए की राशि प्रतिमाह दे रही है। उन्होंने कहा कि सारंगढ़ के दानसरा की माताएं और बहनें इस राशि से राममंदिर बनवा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पंडित दीनदयाल भूमिहीन कृषि श्रमिक योजना के तहत 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि श्रमिक लाभान्वित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में 50 हजार गांवों के 65 लाख ग्रामीणों को स्वामित्व कार्ड प्रदान किया। इससे कई पीढ़ियों से ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि में निवास कर रहे लोगों को अधिकार पत्र मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के दस जिलों में 61 हजार लोगों को स्वामित्व कार्ड वितरण किया गया है। पीएससी घोटाले के दोषियों को सजा दिलाने का कार्य कर रहे हैं। इससे प्रदेश के युवाओं का विश्वास परीक्षा प्रणाली में फिर से लौटा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा 144 सालों बाद पूर्ण महाकुंभ का संयोग बना है। छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज महाकुंभ में साढ़े चार एकड़ में विशाल छत्तीसगढ़ मंडप बनाया गया है। यहां छत्तीसगढ़ के निवासियों के लिए निःशुल्क भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री साय ने जिलेवासियों को महाकुंभ में सहभागी बनने का न्यौता दिया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि हम लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने का काम कर रहे हैं। राज्य सरकार ने गांव से लेकर शहर तक विकास कार्यों को गति देने का काम कर रही हैं। 3100 रूपये में धान खरीदी हो रही है। महतारी वंदन का पैसा हर महीने मिल रहा है। आवास का निर्माण तेजी से हो रहा है। किसानों को 2 साल का बकाया बोनस दिया गया है।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले एक साल में लगातार विकास के कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम को सांसद राधेश्याम राठिया एवं कमलेश जांगड़े ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विधायक सारंगढ़ उत्तरी गनपत जांगड़े, विधायक बिलाईगढ़ श्रीमती कविता प्राण लहरे, पूर्व विधायक शमशेर सिंह, केराबाई मनहर, सुश्री कामदा जोल्हे, ज्योति पटेल, जगन्नाथ पाणिग्राही सहित अन्य जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कृषक उन्नति योजना : समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों में जगा नया विश्वास

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 अम्बिकापुर : शासन की मंशानुरूप कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से 3100 रुपए क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। जिससे कृषकों की आय में वृद्धि के साथ ही उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार आया है।


जिले के अम्बिकापुर के उपार्जन केंद्र सुखरी में धान बेचने आए भीम सिंह ने बताया कि उन्होंने गत वर्ष 127 क्विंटल धान बेचा था, जिसके अंतर की राशि लगभग एक लाख रुपए उन्हें मिले थे। उन्होंने इस राशि से सिंचाई हेतु पम्प खरीदा। सिंचाई सुविधा में वृद्धि से उन्होंने धान के साथ अब शेष भूमि में सब्जी लगाया है, जिससे उन्हें अच्छी खासी अतिरिक्त आय हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हम किसानों को जो गारंटी दी थी, वो पूरी हुई है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया।

भीमसिंह ने बताया कि इस वर्ष भी उन्होंने धान बेचा है। बोनस राशि मिलने पर वे इस राशि को भविष्य के लिए जमा करेंगे। उन्होंने खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि शासन द्वारा हमें माइक्रो एटीएम की भी सुविधा दी गई है जिसमें जरूरत के हिसाब से तुरंत पैसे निकाल सकते हैं।

मंत्रि-मंडलीय उप समिति की बैठक : धान खरीदी के साथ ही धान के उठाव में तेजी लाने दिए निर्देश, अब तक 63.14 लाख मीट्रिक टन धान की हो चुकी खरीदी

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रायपुर। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल बघेल की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ विधानसभा स्थित मुख्य समिति कक्ष में मंत्री मंडलीय उप समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में धान खरीदी व्यवस्था सहित कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव, किसानों के लिए पर्याप्त बारदाने की व्यवस्था, टोकन की स्थिति सहित विभिन्न किसान हित से जुड़े मुद्दे की समीक्षा की गई। बैठक में धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान के उठाव में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसानों को विक्रय में सहुलियत प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक में मंत्री-मंडलीय उप समिति के सदस्य कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा 20 सूत्रीय कार्यान्वयन मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा शामिल हुए।

खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के किसानों से सुगमता पूर्वक धान खरीदने के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में धान खरीदी सुव्यस्थित हो तथा किसानों को सरलता के साथ बारदाना उपलब्ध हो इसके लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में धान उठाव और कस्टम मिलिंग, केन्द्रीय पूल और छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा कराने तथा परिवहन के संबंध में भी विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। वर्तमान में राज्य में 2058 सहकारी समितियां तथा 2739 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से आगामी खरीफ विपणन वर्ष में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान लगाया गया है।

बैठक में खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 14 नवम्बर 2024 से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान के तहत अब तक 63.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। धान खरीदी के एवज में राज्य 13.19 लाख किसानों को बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत 14058 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव जारी है। धान के उठाव में तेजी लाने के प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किए गए हैं। अब तक कुल धान खरीदी का 50 प्रतिशत से अधिक धान के उठाव के लिए डिओ और टीओ जारी कर दिया गया है। जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा अब तक लगभग 10 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।

बैठक में खाद्य विभाग के सचिव अन्बलगन पी, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रेणु जी पिल्ले, वित्त विभाग के विशेष सचिव चंदन कुमार, सहकारिता विभाग के आयुक्त कुलदीप शर्मा, खाद्य विभाग के संचालक जितेन्द्र कुमार शुक्ला, कृषि विभाग के संचालक डॉ. सरांश मित्तल, मार्कफेड के प्रबंध संचालक रमेश शर्मा, अपेक्स बैंक के ओएसडी अविनाश कुमार श्रीवास्तव, खाद्य विभाग के संयुक्त सचिव जी.एस. सीकरवार सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

महासमुंद : अब तक 182 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 54426 किसानों से 274341.76 टन धान खरीदी

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महासमुंद। राज्य शासन के मंशानुरूप खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 अंतर्गत कृषक उन्नति योजना के तहत जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अभियान तेजी से चल रहा है। यह अभियान किसानों को उचित मूल्य पर धान बेचने की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर उपार्जन केंद्रों के माध्यम से धान खरीदने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का कार्य कर रहा है।

नोडल अधिकारी आशीष शर्मा ने बताया कि 10 दिसम्बर तक 182 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 54426 किसानों से 274341.76 टन धान खरीदा गया, जिसकी राशि 631 करोड़ 52 लाख रुपए किसानों को वितरित की गई। उन्होंने बताया कि अब तक जिले के उपार्जन केन्द्रों में एक करोड़ 31 लाख 8 हजार से अधिक बारदाना प्राप्त हुआ है। जिसमें 71 लाख 72 हजार 258 नया बारदाना है। 41 लाख 6 हजार 907 बारदाना मिलर से प्राप्त, 15 लाख 22 हजार 402 पीडीएस से प्राप्त तथा किसानों से 3 लाख 7 हजार 109 बारदाना प्राप्त हुआ है। 73 लाख 48 हजार 692 बारदाने का उपयोग उपार्जन केन्द्रों में किया जा रहा है। अभी 57 लाख 59 हजार 984 बारदाना शेष है।

किरण सिंह देव ने धान खरीदी के मुद्दे पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए दीपक बैज पर जमकर निशाना साधा, बोले - कांग्रेस किसानों को गुमराह करने और अराजकता फैलाने में लगी है

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 रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने धान खरीदी के मुद्दे पर लगातार झूठ फैलाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज पर जमकर निशाना साधा है। देव ने कहा कि बैज समेत सभी कांग्रेस नेता धान खरीदी के मुद्दे पर लगातार झूठ बोलकर प्रदेश के किसानों को गुमराह करने और प्रदेश में येन-केन-प्रकारेण अराजकता फैलाने के टूलकिट एजेंडा पर चल रहे हैं।


भाजपा प्रदेशअध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि सत्ता के लिए बौखलाती कांग्रेस ने पहले महतारी वंदन योजना को लेकर लगातार झूठ बोला। जब भाजपा सरकार ने तथ्यों के साथ कांग्रेस के झूठ की धज्जियाँ उड़ाई तो अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर नया टूलकिटिया एजेंडा चलाया। जब कांग्रेस के लोग ही अमूमन हर बड़े अपराध में संलिप्त पाए जाकर बेनकाब होने लगे, कानून के शिकंजे में जब खुद कांग्रेसी या उनके करीबी आने लगे तब अपने ही बुने षड्यंत्रों के जाल में फँसकर कांग्रेस छटपटाने लगी। महतारी वंदन और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर मुँह की खाने के बाद भी कांग्रेस अपनी ओछी और साजिशाना राजनीति से बाज नहीं आ रही है और अब वह धान खरीदी के मुद्दे पर फिर झूठ की राजनीति करने पर आमादा है।

देव ने कहा कि धान खरीदी को लेकर किसी भी बिंदु पर प्रदेश की भाजपा सरकार पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार कांग्रेस को नहीं रह गया है। कांग्रेस को कोई भी आक्षेप लगाने से पहले अपने गिरेबाँ में झाँकना चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कहा कि कांग्रेस ने वादाखिलाफी करके अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में लगातार किसानों को प्रताड़ित करने का काम किया। किसानों को इन 5 वर्षों में धान बेचने के लिए सोसाइटियों में बारदाने की समस्या से लगातार जूझना पड़ा। भूपेश बघेल की सरकार ने किसानों को कभी गिरदावरी के नाम पर कटौती कर किसानों को परेशान किया तो कभी बारदाने नहीं है, कहकर किसानों को बारदाने खरीदने के लिए कहा और बाहर से बारदाने लाने का पैसा स्वयं देने का भी वादा किया लेकिन आज तक उन किसानों को बारदाने के पैसे का भुगतान नहीं किया गया।

देव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के किसानों को लगातार 5 वर्षों तक धान खरीदी का पैसा हमेशा किश्तों में दिया जाता था। कभी भी किसानों को उनकी उपज का एकमुश्त भुगतान पिछली भूपेश सरकार ने नहीं किया जिसकी वजह से किसान कोई बड़ा काम नहीं कर पाता था। देव ने कहा कि आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी कर रही है और 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान का भुगतान किसानों को एकमुश्त किया जा रहा है जिससे आज प्रदेश का किसान खुशहाल है।

अन्नदाताओं के धान का एक-एक दाना खरीदना हमारा लक्ष्य : योगेश्वर राजू सिन्हा

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महासमुंद। गुरुवार को खरीफ वर्ष 2024-25 के लिए धान खरीदी की शुरुआत हुई। महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने पिटियाझर धान खरीदी केंद्र में पूजा-अर्चना कर धान खरीदी का शुभारंभ किया। साथ ही अपनी उपज बेचने आए किसान भाइयों से मुलाकात व चर्चा कर मंडी में धान बेचने के लिए की गई व्यवस्था का भी जायजा लिया। धान बेचने आए किसान के उपज को मशीन में तौल कर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने खरीदी की शुरुआत की।

इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी सरकार 14 नवंबर को प्रदेश के अन्नदाता किसानों के सम्मान में 'धान तिहार' के रूप में मना रही है। प्रदेश के अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का पूरा मान मिलेगा। हमारी सरकार ने जो वादा किया था प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी व 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसान भाइयों को भुगतान वह पूरा किया जाएगा। धान खरीदी के मद्देनजर हमारी सरकार ने किसान भाइयों की सुविधा के लिए पूरी तैयारियां की है। अन्नदाताओं के धान का एक-एक दाना खरीदना हमारा लक्ष्य है, इस बार पूरे प्रदेश में 27 लाख से अधिक किसानों का धान हमारी सरकार खरीदेगी और भुगतान भी 72 घंटे के अंदर सुनिश्चित करेंगे।

किसानों को धान खरीदी के लिए अधिक दूरी तय न करना पड़े, इसका भी हमने विशेष ख्याल रखा है। उपार्जन केंद्रों के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ धान खरीदी की व्यवस्था की गई है। अन्नदाता हमारे छत्तीसगढ़ की आत्मा हैं, उनकी मेहनत को पूरा दाम और सम्मान मिले, इसके लिए हमारी सरकार तत्पर है। हमने किसानों से उनके पूरी उपज को खरीदने, खरीदी में पूरी पारदर्शिता बरतने और तय समयसीमा में भुगतान करने पर विशेष ध्यान दिया है।  इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश साहू, पवन पटेल सहित मंडी के स्टाफ व किसान उपस्थित थें।

किसान बोले सरकार खुले दिल से ले रही उनका धान

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बेमेतरा। आज गुरुवार से जिले में खरीफ सीजन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत हो गयी। कलेक्टर सहित जिला नोडल अधिकारियों ने सौंपे गये धान उपार्जन केन्द्रों में पहुंचकर किसानों का फूल मालाओं से स्वागत किया और इलेक्ट्रॉनिक  तोल मशीन (काँटबांटे) की पूजा कर धान खरीदी का शुभारम्भ किया। कलेक्टर रणबीर शर्मा ने खरीदी केंद्र में किसान रामाधर तिवारी का शाल-श्रीफल से स्वागत किया। किसानों से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक तोल मशीन पर उनका धान तौल कर शुरुआत की।

जिले की लोलेसरा में कृषक सहकारी समिति में अपनी उपज धान बेचने आये ग्राम चारभाठा के किसान रामाधर तिवारी ने बताया कि वे 108 कट्टा धान बेचने आए है। कलेक्टर के हाथों स्वागत व सम्मान पाकर बहुत खुश और प्रसन्न है। उन्होंने कहा की उनका धान विष्णुदेव सरकार खुले दिल से ले रही है। केंद्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य के ऊपर रुपये प्रति एकड़ धान के अंतर की राशि से खरीदी से अब छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी और सुधार आयेगा। एक और किसान सेवकराम ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमि में धान की फसल लगाई थी।जिसका धान समिति द्वारा आसानी से ले लिया गया। बहरहाल आज से शुरू हुई धान खरीदी केंद्रों में इस बार किसानों के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री साय द्वारा धान खरीदी के अपने वायदे को पूरा निभाया इसकी ज्यादा चर्चा है।

वही कृषक हेमन वर्मा ने ग्राम बैजी ने बताया कि अब सरकार की नीतियों से कृषि भी लाभ का व्यवसाय होता जा रहा है। एक और किसान अजय साहू ग्राम गर्रा ने बताया कि अब किसानों की धान खरीदी का कार्य पूर्व से बेहतर तरीके से हो रहा है।खरीदी केंद्र की संख्या बढ़ाने से अब केंद्रों में भीड़भाड़ वाली स्थिति नही है।किसान आसानी से अपनी साल भर की मेहनत की उपज धान बेचकर उसका उचित मूल्य प्राप्त करेगा।

एक कृषक सेवक राम वर्मा ने बताया कि अब सहकारी समिति में धान बेचना अच्छा लग रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने धान का मूल्य बढ़ाने का अपना वायदा पूरा करते हुए किसानों की सुविधाओं की ओर भी विशेष ध्यान दिया जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। धान बिक्री पर उन्हें समर्थन मूल्य की राशि भी जल्दी मिल जाएगी। इससे उनकी आर्थिक स्थित में सुधार भी पहले से ठीक आ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का किया शुभारंभ

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर किसानों से प्रदेशव्यापी धान खरीदी महापर्व का शुभारंभ बालोद जिले के भांठागांव (बी) धान खरीदी केन्द्र से किया। इसी के साथ आज 14 नवम्बर राज्य में किसानों से धान खरीदी की शुरूआत हो गई है, जो 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। मुख्यमंत्री साय ने भांठागांव (बी) उपार्जन केन्द्र पहुंचने के बाद इलेक्ट्रॉनिक तौल एवं अन्य यंत्रों का पूजन और वहां उपस्थित किसानों को माला पहना कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने किसान भाईयों को धान खरीदी महापर्व के शुभारंभ की बधाई और शुभकामनाएं दी।


मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ग्राम भांठागांव के किसान भागबली ने कुल 148 क्विंटल और श्री हरिराम ने 65 क्विंटल 20 किलो धान की बिक्री की। मुख्यमंत्री के समक्ष अपने धान की बिक्री का अवसर प्राप्त होने से किसान भागबली और हरिराम बहुत ही खुश नजर आ रहे थे। उक्त उपार्जन केन्द्र में 14 नवम्बर को धान खरीदी हेतु कुल 06 किसानों का टोकन काटा गया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम मोहंदीपाट में 30 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित जिला सेवा सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा मर्यादित दुर्ग के नवीन शाखा भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री साय ने इससे पूर्व छत्तीसगढ़ महतारी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम स्थल में मुख्यमंत्री श्री साय ने शहीद बिरसा मुंडा एवं गहिरा गुरु के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक होगी। किसानों को उनके द्वारा बेचे गए धान के एवज में राज्य शासन द्वारा 72 घंटे भीतर उनके बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में धान खरीदी के लिए 2,739 स्थापित किए गए हैं। इस साल धान बेचने के लिए 27,01,109 पंजीकृत किसानों द्वारा बोये गए धान का कुल रकबा 34,51,729 हेक्टेयर है। पंजीकृत किसानों में 1,35,891 नये किसान हैं।

कार्यक्रम में सांसदभोजराज नाग, विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सोनादेवी देशलहरा, पूर्व विधायक बीरेंद्र साहू एवं राजेंद्र राय, कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष हरबंश मिरी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि पवन साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर, कंवर समाज के जिला अध्यक्ष केश कुमार ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधियो एवं विभिन्न समाज के पदाधिकारी, किसान एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी आज से, केंद्रों में सभी तैयारियां पूरी, मुख्यमंत्री के निर्देश पर धान खरीदी की सभी आवश्यक तैयारी पूर्ण

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 रायपुर : राज्य में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी आज 14 नवंबर से प्रारंभ होने जा रही है। प्रदेश के किसानों से धान खरीदी की योजना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिशानिर्देश पर प्रदेश के सभी 2739 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली गई है। इस खरीफ सीजन के लिए प्रदेश में पंजीकृत कुषकों की संख्या 27 लाख 1 हजार 109 है। इस वर्ष 1 लाख 35 हजार 891 नये किसान पंजीकृत हुए हैं और 1 लाख 36 हजार 263 हेक्टेयर नवीन रकबों का पंजीयन किया गया है।


सभी उपार्जन केन्द्रों में बायोमैट्रिक डिवाईस के माध्यम से उपार्जन की व्यवस्था की गई है। छोटे, सीमांत और बडे़ कृषकों के द्वारा उपजाये गए धान को निर्धारित समर्थन मूल्य में खरीदा जाएगा। इसके लिए 7 नवंबर से ही टोकन आवेदन की व्यवस्था आरंभ कर दी गई है। खरीदी सीजन में लघु एवं सीमांत कृषकों को अधिकतम 2 टोकन एवं बडे़ कृषकों को 3 टोकन की पात्रता होगी।

धान खरीदी अवधि 14 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025 के दौरान किसान अपना धान खरीदी केन्द्रों में लाकर समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते है। खरीदी केंद्रों में तौल हेतु इलेक्ट्रानिक कांटा-बांट की व्यवस्था की गई है। खरीदी केंद्रों से धान का उठाव मिलर एवं परिवहनकर्ता के माध्यम से समयानुसार कराने के निर्देश दिये गये है। सभी खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त बारदाने की व्यवस्था से लेकर छांव, पानी आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली गई है।

धान उपार्जन केन्द्रों में शिकायत एवं निवारण के लिये हेल्प लाइन नंबर भी चस्पा कर दिये गये हैं। विपणन संघ मुख्यालय स्तर पर शिकायत निवारण हेतु कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है जिसका नं. 0771-2425463 है। धान बेचने वाले किसानों को समय पर भुगतान हेतु मार्कफेड द्वारा राशि की व्यवस्था कर ली गई है। समितियों में राशि आहरण हेतु ‘‘माइक्रो एटीएम’’ की व्यवस्था भी दी जा रही है, जिससे कि किसानों को सुविधा हो। किसानों द्वारा समिति में धान विक्रय के 72 घंटे के भीतर राशि किसानों के बैंक खाते में अंतरित कर दी जायेगी। खाद्य मंत्री श्री बघेल के निर्देश पर धान रिसाइकलिंग बोगस खरीदी पर नियंत्रित करने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टीम द्वारा राज्य के अलग अलग संभागों में विशेष कार्ययोजना बनाई गई है।

राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र में विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है एवं चेक पोस्ट की स्थापना की गई है। मंडी विभाग द्वारा मंडी अधिनियम के तहत जिलों में अधिकृत व्यापारियों की सूची जिला प्रशासन के साथ साझा किया गया है। एनआईसी द्वारा तैयार मोबाइल एप्प के माध्यम से गिरदावरी के खसरों का पुनः सत्यापन लगातार जारी है। मार्कफेड द्वारा राज्य स्तर पर एकीकृत कंट्रोल कमांड सेंटर स्थापित कर राईस मिल एवं उपार्जन केन्द्रों पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी।

राज्य स्तर पर अलग अलग जिलों के लिए राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की जांच टीम बनाई गई है, जो लगातार जिले में हो रही धान खरीदी की मानिटरिंग करेंगे। विभागीय मंत्री द्वारा निर्देशित किया गया है कि राज्य स्तरीय दल आबंटित जिलों में खरीदी के दौरान कम से कम तीन बार भ्रमण करेंगे। प्राप्त शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्यवाही की जाएगी और की गई कार्यवाही के संबंध में अवगत भी कराया जाएगा।

धान खरीदी के लिए 12 नवंबर तक ट्रायल रन एवं सभी तैयारियां पूरी करें

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 14 नवंबर से राज्य में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की चाक-चौबंद व्यवस्था के निर्देश के परिपालन में सभी जिलों में कलेक्टरों के मार्गदर्शन में सहकारिता, मार्कफेड एवं खाद्य विभाग द्वारा सभी तैयारियां तेजी पूरी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों की सुविधा के लिए बारदानों की व्यवस्था, फड़, चबूतरा, पीने का पानी, किसानों के बैठने की छायादार व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों को धान खरीदी केन्द्रों की व्यवस्था का औचक निरीक्षण करने को भी कहा है।

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हें इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में सहकारिता आयुक्त कुलदीप शर्मा ने आज सहकारिता विभाग के राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों की संयुक्त वर्चुअल बैठक ली। उन्होंने जिला पंजीयक तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को धान खरीदी की अग्रिम तैयारियों के संबंध में कडे निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी तथा बैंक धान खरीदी के संबंध में अपनी जिम्मेदारी को समयानुसार पूरा करें। धान उपार्जन केन्द्रों से बारदानों की व्यवस्था, फड़, चबूतरा, पीने का पानी, किसानों के बैठने की छायादार स्थान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। धान की सुरक्षा हेतु पर्याप्त डनेज एवं तारपोलिन आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। धान बेचने के लिए केन्द्र में आने वाले किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।

सहकारिता आयुक्त शर्मा ने सभी समितियों में सीसीटीव्ही कैमरे लगाने के लिए उचित जगह का चयन करने को कहा ताकि संपूर्ण परिसर कव्हर हो सके। उन्होंने ट्रायल रन के साथ-साथ सभी अग्रिम तैयारी 12 नवंबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को धान खरीदी नीति अनुसार स्टेक लगाने, सभी समितियों को उचित संख्या में ही टोकन जारी करने के निर्देश दिए। मौसम खराब होने अथवा बारिश होने की स्थिति में किसी तरह की  अव्यवस्था उत्पन्न न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाए।

सहकारिता आयुक्त ने बैंक अधिकारियों को बैंकों में उपलब्ध माइक्रो एटीएम समितियों को उपलब्ध कराने को कहा ताकि किसानों को इससे राशि आहरण की व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों को सभी समितियों में भ्रमण कर वहां की व्यवस्था का मुआयना करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर से लेकर 31 जनवरी 2025 तक समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन किया जाएगा। इस अवधि में व्यवस्था से जुड़े अधिकारी न तो अनावश्यक रूप से अवकाश पर जाएंगे न ही मुख्यालय से बाहर रहेंगे। बैठक में अपर पंजीयक एस.के. जोशी, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के.एन काण्डे, ओएसडी अविनाश श्रीवास्तव, संयुक्त पंजीयक संदीप गुप्ता सहित, अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

धान खरीदी में फर्जीवाड़ा करने वाला केन्द्र प्रभारी गिरफ्तार

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रायपुर। मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के गुरुवाइनडबरी धान खरीदी केंद्र में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी रामदास बंजारे को पुलिस ने तिफरा बिलासपुर के पास घेरा बंदी कर आज गिरफ्तार किया। गुरुवाइनडबरी धान खरीदी केंद्र प्रभारी रहते हुए इसने फर्जीवाड़ा कर शासन को 91 लाख 68 हजार से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचाया था।

धान खरीदी में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर कलेक्टर राहुल देव के निर्देश पर केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल एवं विवेक शुक्ला के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी लोरमी श्रीमती माधुरी धीरही के नेतृत्व में थाना लालपुर एवं साइबर सेल की टीम द्वारा आरोपी रामदास बंजारे की गिरफ्तारी के लिए सभी संभावित स्थानों पर छापेमारी की गई। एफ.आई.आर. के बाद से आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। इस दौरान सूचना मिली कि आरोपी बिलासपुर के तिफरा के पास छिपकर अपना नाम पता बदल कर रह रहा था। सूचना पर तत्काल थाना लालपुर और साइबर सेल की टीम को गिरफ्तारी के लिए बिलासपुर भेजा गया और तिफरा के पास आरोपी को घेराबंदी करते हुए गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।

सहायक आयुक्त सहकारिता हितेश श्रीवास ने बताया कि रामदास बंजारे द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में धान खरीदी के दौरान बेईमानीपूर्वक 25 सौ क्विंटल से अधिक धान का गबन किया गया था। इसके साथ ही किसानों से खरीदे गए धान में से 600 बोरी धान को बेईमानी पूर्वक बिक्री करने के लिए श्याम राईस प्रोडक्ट बरेला के ट्रक क्रमांक सीजी 12 एस 2108 में लोड कराया गया था। उक्त कृत्य के लिए उनके खिलाफ थाना लालपुर मुंगेली में आईपीसी की धारा 420, 409 तथा 511 के तहत अपराध दर्ज करते हुए जांच की जा रही थी। विवेचना में पाया गया था कि उसके द्वारा लगभग 91 लाख 68 हजार रुपए के धान का फर्जीवाड़ा किया गया है। आरोपी रामदास बंजारे अपराध दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहा था।   

महासमुंद : समय-सीमा की बैठक में कलेक्टर ने की धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा

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 महासमुंद : कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज सुबह 10 बजे से समय सीमा की बैठक लेकर विभिन्न विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमां के बेहतर क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने धान खरीदी की सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 की समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु सभी उपार्जन केंद्रों पर सभी ज़रूरी व्यवस्थाएँ समय रहते पूरी कर ली जाए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्री एस. आलोक, वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत, अपर कलेक्टर रवि कुमार साहू एवं जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।


उन्होंने मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जन चौपाल, जन शिकायत और अन्य प्राप्त पत्रों की निराकरण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर लंगेह ने कहा कि पात्र छूटे हुए लोगों का आयुष्मान कार्ड आवश्यक शिविर लगाकर बनाएं। ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि राशन कार्ड नवीनीकरण और ई-केवाईसी के लिए भी जनपद के सीईओ खाद्य विभाग के साथ मिलकर विशेष कार्रवाई करें। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्कूल, आंगनबाड़ी, छात्रावासों का नियमित निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए है। कलेक्टर ने ज़िले के सभी एसडीएम को पटाखा विक्रय स्थलों पर समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। एसडीएम एवं खाद्य औषधि प्रसाशन के अधिकारियों को आगामी त्यौहार को ध्यान में रखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों की जाचं एवं सतत निगरानी करने के निर्देश दिए है।

बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का खरीदी हेतु किसान पंजीयन के संबंध में व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि खरीफ विपणन 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान और मक्का की खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन एक जुलाई से चल रहा है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। पंजीयन के लिए सभी किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सहकारी समिति प्रबंधक से संपर्क कर नया पंजीयन करा सकते हैं।

उन्होंने कैरी फारवर्ड हेतु एकीकृत किसान पोर्टल में छुटे हुए कृषकों के पंजीयन करने के लिए एसडीएम एवं नोडल अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिये। अनुविभागीय अधिकारियों को फसल बीमा प्रयोग एवं प्रत्येक ग्राम के औसत उत्पादकता के आधार पर जिले के औसत धान उत्पादन की जानकारी तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही ग्रामवार पड़त भूमि का सत्यापन कराने, धान के अतिरिक्त लगाये गये अन्य फसल की जानकारी का प्रमाण पत्र पटवारियों से 25 अक्टूबर तक लेने को कहा। जिले में गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर आगामी धान खरीदी की तैयारियां करने के निर्देश दिये। उन्होंने ऐसे कृषकों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा जो किसान विगत वर्षो में समर्थन मूल्य में धान बिक्री नहीं किए है यदि चालू सीजन में धान विक्रय के लिए पंजीयन करते है तो इसकी जानकारी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं तहसीलदार को देने को कहा।

बैठक में कृषकों के पंजीकृत रकबा का एप्प के माध्यम से पटवारियों एवं कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा रेण्डम सत्यापन करने को कहा गया। जिसे तहसील स्तर पर 5 प्रतिशत कुल पंजीकृत रकबा का, 5 प्रतिशत जिला स्तर पर और दो प्रतिशत राज्य स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जायेगा। इसके लिए सत्यापन दल का गठन करने के निर्देश दिये। जिला स्तर पर भी जांच दल का गठन एवं उनका प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिये। कलेक्टर श्री लंगेह ने शासन द्वारा जिले के संवेदनशील धान खरीदी केन्द्रों के अतिरिक्त ऐसे समस्त केन्द्रों के पहचान करने को कहा, जहां विगत वर्ष 1 प्रतिशत की अधिक की कमी या धान के निराकरण में कठिनाई हुई हो। इस दौरान गत खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में जिन धान उपार्जन केन्द्र को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। उन केन्द्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिये। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र के लिए विशेष जांच दल का गठन करने एवं गत वर्ष अनुसार 16 चेकपोस्ट में रोस्टरवार अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। उन्होंने धान के रख-रखाव के लिए उपार्जन केन्द्रां में मानक स्टेकिंग और ड्रेनेज मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने धान की सम्भावित अवैध बिक्री और परिवहन पर भी अभी से सतर्क रहने और तैयारी करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में कलेक्टर ने कहा कि धान समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों को आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए पंजीकृत माना जाएगा एवं इसके लिए विगत खरीफ वर्ष 2023-24 में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि एवं धान के रकबे एवं खसरे को राजस्व विभाग के माध्यम से अद्यतन करा लिया जाए।

बैठक में कलेक्टर ने जिले में 05 नवम्बर को राज्योत्सव की तैयारी के संबंध में भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिले में राज्योत्सव गरिमापूर्ण ढंग से मनाया जाएगा जिसके लिए अधिकारी दिए गए जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता से करें। उन्होंने पीएम जनमन, नशा मुक्ति अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, आगामी रबी फसल की तैयारी के संबंध में भी समीक्षा की। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले में चल रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित करें तथा निगरानी करते रहें ताकि सभी वर्गों के लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट का बड़ा फैसला, 14 नवंबर से होगी धान खरीदी, शिक्षाकर्मियों के परिजनों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की हुई बैठक में 14 नवंबर से धान खरीदी का फैसला लिया गया. इसके साथ दिवंगत शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के कर्मचारियों के अनुकम्पा हेतु पात्र आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने का भी फैसला लिया गया.


खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन तथा कस्टम मिलिंग की नीति का अनुमोदन किया गया। मंत्रिमण्डलीय उप समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान समर्थन मूल्य पर राज्य के किसानों से नगद एवं लिंकिंग में धान खरीदी 14 नवम्बर 2024 से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। राज्य में धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक की जाएगी।


समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए कृषि विभाग द्वारा एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से किसान पंजीयन की प्रक्रिया जारी है, जो 31 अक्टूबर 2024 तक चलेगी। वर्ष 2024-25 में 160 लाख टन धान के उपार्जन का अनुमान है। समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था पूर्व वर्ष की भांति लागू रहेगी। मंत्रिपरिषद में खरीदी केन्द्रों में धान के नियंत्रित एवं व्यवस्थित रूप से उपार्जन हेतु सीमांत एवं लघु कृषकों को अधिकतम दो टोकन तथा दीर्घ कृषकों को अधिकतम तीन टोकन प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। सभी खरीदी केन्द्रों में इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र के माध्यम से धान खरीदी होगी। धान खरीदी के लिए 4.02 लाख गठान नये जूट बारदाना जूट कमिश्नर के माध्यम से क्रय करने की स्वीकृति दी गई है। धान खरीदी के लिए कुल 8 लाख गठान बारदाने की जरूरत होगी।


मंत्रिपरिषद की बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सहकारी समितियों में कार्यरत डाटाएन्ट्री ऑपरेटरों को 18,420 रूपए प्रतिमाह के मान से कुल 12 माह का मानदेय भुगतान का निर्णय लिया गया। इस पर कुल 60 करोड़ 54 लाख रूपए का व्यय भार आएगा। जिसके भुगतान के लिए पूर्व वर्षाें की भांति राशि मार्कफेड को प्रदाय की जाएगी।

विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से संबंधित प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लिये जाने के संबंध में गठित मंत्रिपरिषद की उपसमिति द्वारा अनुशंसित 49 प्रकरणों को माननीय न्यायालय से वापस लिए जाने का निर्णय लिया गया है।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 2021 के नियम 8 (2) में सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमाण्डर के पद पर नियुक्ति हेतु भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2024 में केवल एक बार के लिए अभ्यार्थियों की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में 05 वर्ष की छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सभी छूटों को मिलाकर अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी।

राज्य के सभी ग्राम पंचायतों के प्रत्येक घर में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु छत्तीसगढ़ ग्रामीण पेयजल संचालन एवं संधारण नियम, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति अपने दायित्वों के साथ-साथ ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के संचालन एवं संधारण का कार्य भी देखेगी। ग्राम सभा के अनुमोदन से जल प्रभार का निर्धारण के अलावा नये कनेक्शन का निर्णय, वित्तीय प्रबंधन, मरम्मत, पेयजल गुणवत्ता का निर्धारण एवं शिकायतों का निराकरण करेगी।

दिवंगत शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के कर्मचारियों के अनुकम्पा हेतु पात्र आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत ऐसे शिक्षक (पंचायत) संवर्ग के कर्मचारी जिनकी मृत्यु सेवाकाल में हो गई थी और जिनके आश्रित नियमानुसार अनुकम्पा हेतु पात्र है, उन्हें छत्तीसगढ़ शिक्षक (पंचायत) संवर्ग नियम 2018 के आधार पर पात्रता अनुसार अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी। ऐसी स्थिति में स्कूल शिक्षा विभाग से पद पूर्ति के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पद प्रदाय करने के पूर्व के आदेश को शिथिल करने का निर्णय भी लिया गया है, ताकि दिवंगत के पात्र आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जा सके।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण (मीसा/डी.आई.आर. राजनैतिक या सामाजिक कारणों से निरूद्ध व्यक्ति) सम्मान निधि नियम, 2008 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों का राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्ठि की जाएगी तथा अंत्येष्ठि के लिए उनके परिवार को 25 हजार रूपए की सहायता राशि दी जाएगी।

देशी/विदेशी मदिरा बोतलों पर चस्पा किये जाने हेतु Excise Adhesive Label (Hologram) होलोग्राम में अधिक सुरक्षात्मक फीचर्स उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार के उपक्रम भारत प्रतिभूति मुद्रणालय, नासिक रोड (महाराष्ट्र) से होलोग्राम क्रय करने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य की औद्योगिक नीति 2019-24 के तहत स्टील डाउन स्ट्रीम प्रोजेक्ट्स, एथेनॉल इकाईयों एवं कोर सेक्टर के सीमेंट उद्योगों के लिये विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज के निर्धारण का अनुमोदन किया गया। 

समर्थन मूल्य में धान खरीदी 5 नवंबर से शुरू हो : जुगनू चन्द्राकर

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 धान का 3217 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी सुनिश्चित करना चाहिए 

महासमुन्द : खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य में धान खरीदी के लिए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की अध्यक्षता में मंत्री मंडलीय उप समिति की आयोजित बैठक में  दीपावली को ध्यान में रखकर  15 नवम्बर से समर्थन मूल्य में धान खरीदी करने का निर्णय लिया है  जो किसानों के साथ धोखा है। 

किसान भुगतान संघर्ष समिति महासमुन्द के संयोजक जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर  ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भाजपा सरकार की नीति और नियत किसान हितैषी दिखाई नहीं दे रही है । वर्ष 2024- 25 में समर्थन मूल्य में धान खरीदी दीपावली के कारण 1 नवम्बर से शुरू न कर 15 नवम्बर से किये जाने का निर्णय लिया है जबकि 15 नवम्बर को गुरुनानक जयंती है इसलिए 5 नवम्बर  से शुरू किया जाना उचित होगा क्योंकि हरुना किस्म की फसल कटाई नवरात्र के समय शुरू हो जाएगी उन किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए एक महीना इंतजार करना पड़ेगा।

 दीपावली को ध्यान में रखकर 5 नवम्बर को समर्थन मूल्य में धान खरीदी किया जाना चाहिए जिससे पहले पंद्रह दिन हरुना किस्म की खरीदी हो जाएगी और फिर लंबी अवधि की धान आ जायेगी इससे खरीदी केंद्रों में बारदाना व्यवस्था, खरीदी की पर्याप्त जगह आदि आवश्यक व्यवस्था बनाने में सुविधा होगी। साथ ही धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य राज्य सरकार की 3100 रुपये और केन्द्र सरकार की बढ़ी हुई कीमत 117 रुपये जोड़कर 3217 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी होगी यह भी सुनिश्चित करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ : इस तारीख से धान खरीदी होगी शुरू, इतने रुपये प्रति क्विंटल दर से धान खरीदेगी सरकार, पढ़े पूरी खबर

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार इस बार धान की खरीदी एक नवंबर से शुरू कर सकती है। माना जा रहा है कि समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के लिए सरकार अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में धान नीति जारी कर सकती है। जिसमें किसानों को इस बात की जानकारी दी जाएगी की इस बार धान की खरीदी कैसे की जाएगी। धान खरीदी के साथ-साथ सरकार बारदाने को लेकर भी नीति लागू कर सकती है।


3100 रुपये का समर्थन मूल्य
छत्तीसगढ़ में सरकार 3100 रुपये के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करती है। किसानों से इस बार भी धान खरीदी 3100 रुपये में की जाएगी। धान खरीदी की नीति सबसे पहले मंत्रिमंडलीय उपसचिव के समक्ष रखी जाएगी। यहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी लगते ही धान की खरीदी की सारी जानकारी किसानों को दी जाएगी।

1 नवंबर को दीपावली का त्योहार
इस बार दीपालली का त्योहार भी एक नवंबर को है। ऐसे में धान की खरीदी होगी या नहीं कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी। त्योहारों को देखते हुए धान खरीदी की तारीखों में विस्तार भी किया जा सकता है। धान खरीदी नीति के साथ-साथ मक्का खरीदी की नीति को भी कैबिनेट की मुहर लग सकती है। धान खरीदी नीति में इस बार कितनी धान खरीदी करना है इसका भी लक्ष्य तय किया जाएगा। पिछली बार सरकार ने 130 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा था।

धान खरीदी केंद्रों पर इस बार इलेक्ट्रॉनिक वेटिंग मशीनों का उपयोग किया जाएगा ताकि सही वजन सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, धान खरीदी के लिए 30,000 गठान बरदाने की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल यह प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा, जहां अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक की सबसे बड़ी धान खरीदी

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर अब तक की सबसे बड़ी धान की खरीदी हुई है। एक नवंबर से 04 फरवरी तक चले इस अभियान में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद अब तक हुई यह सबसे बड़ी धान खरीदी है। इस वर्ष 130 लाख टन धान खरीदी का अनुमान लगाया गया था। इस साल की धान खरीदी की तुलना करने पर यह पिछली धान खरीदी से 37.39 लाख टन अधिक है। पिछले साल 107.53 लाख टन धान की खरीदी हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की गई। किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से धान की खरीदी की गई है। वर्तमान में किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान किया गया है। जल्द ही अंतर की राशि का भुगतान किसानों को किया जाएगा। धान खरीदी सीजन में 24 लाख 72 हजार से अधिक किसानों से 144.92 लाख टन धान की खरीदी की गई है। इसके एवज में किसानों को 30 हजार 68 करोड़ 81 लाख रूपए का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों एवं किसान प्रतिनिधियों की मांग और उनकी परेशानियों को देखते हुए धान खरीदी की अवधि 31 जनवरी से बढ़ाकर 4 फरवरी कर दी थी। ऐसे किसान जो किन्हीं कारणों से 31 जनवरी तक धान नहीं बेच पाए थे, उन किसानों को मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील फैसले का लाभ मिला। धान खरीदी के लिए बढ़ाई गई अवधि में 19 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। 1 फरवरी से लेकर 4 फरवरी के बीच 2.69 लाख टन धान की खरीदी हुई।

राज्य में चालू खरीफ विपणन वर्ष में 130 लाख टन धान का उपार्जन अनुमानित था। धान की रिकॉर्ड खरीदी के चलते अनुमानित उपार्जन का आंकड़ा काफी पीछे छूट गया है। इस साल धान बेचने के लिए राज्य के 26.85 लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। पंजीकृत धान का रकबा 33.51 लाख हेक्टेयर था। धान खरीदी की व्यवस्था के समानांतर कस्टम मिलिंग का काम भी तेजी से जारी है। उपार्जित धान 144.92 लाख टन में से 105.36 लाख टन धान के उठाव का डीओ जारी किया जा चुका है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 98.41 लाख टन धान का उठाव किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का आखिरी दिन आज, खुले रहेंगे उपार्जन केन्द्र

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में रविवार 4 फरवरी को भी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जाएगी. इस बार के चालू सीजन में धान खरीदी का आज आखिरी दिन है. इसकी जानकारी खाद्य विभाग के अधिकारियों ने दी है. इस दिन रविवार होने के बावजूद भी उपार्जन केन्द्रों में धान की खरीदी की जाएगी.


144.67 लाख मीट्रिक टन धान अब तक खरीदा: खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा अब तक किसानों से 144.67 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर रिकार्ड खरीदी की जा चुकी है. धान उपार्जन के एवज में किसानों को 30 हजार 68 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है.

धान खरीदी की मार्कफेड के आंकड़े: मार्कफेड के महाप्रबंधक से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य में समर्थन मूल्य पर अब तक 24 लाख 70 हजार 612 किसानों से 03 फरवरी 2024 तक 144 लाख 67 हजार 644 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है. धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है. अब तक 104 लाख 68 हजार 668 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 96 लाख 98 हजार 715 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है.


गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के किसानों के हित में धान खरीदी की अवधि 4 फरवरी 2024 तक बढ़ाने के निर्देश दिए थे. जिसके बाद धान खरीदी की अवधि 4 फरवरी 2024 तक बढ़ाई गई थी, जिसका आज आखिरी दिन है.


छत्तीसगढ़ में 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी : किसानों को 29 हजार 318 करोड़ रूपए का भुगतान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 के तहत एक नवंबर 2023 से धान खरीदी का अभियान निरंतर जारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की हित में बड़ा फैसला लेते हुए अब राज्य में 4 फरवरी तक समर्थन मूल्य पर होगी धान खरीदी। शनिवार और रविवार को भी धान खरीदी किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष मोदी की गारंटी के अनुरूप किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा अब तक किसानों से 142.23 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा चुकी है। धान उपार्जन के एवज में किसानों को 29 हजार 318 करोड़ रूपए से अधिक की राशि का भुगतान बैंक के माध्यम से किया गया है।

मार्कफेड के महाप्रबंधक से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में समर्थन मूल्य पर अब तक 24 लाख 51 हजार 28 किसानों से 31 जनवरी 2024 तक 142 लाख 23 हजार 702 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए निरंतर धान का उठाव जारी है। अब तक 102 लाख 74 हजार 132 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 93 लाख 44 हजार 627 मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है।

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