Media24Media.com: छत्तीसगढ़ महिला आयोग

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महिला आयोग की समझाइश पर पति-पत्नी साथ रहने के लिए हुए तैयार

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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय मिलने के साथ उनका जीवन भी संवार रहा है। सोमवार को रायपुर के शास्त्री चौक स्थित आयोग कार्यालय में हुई सुनवाई में एक प्रकरण में जहां पति अपनी पत्नी और दो बच्चों को साथ रहने के लिए तैयार हुआ। वहीं एक अन्य प्रकरण में पति अपनी पत्नी को 5 हजार रूपए महीना भरण-पोषण देने के लिए राजी हो गया। इसके साथ ही अध्यक्ष किरणमयी नायक और सदस्यगण अनिता रावटे,  अर्चना उपाध्याय की समझाइश पर समाज प्रमुखों ने आवेदिकागणों से सामाजिक दंड स्वरूप लिए 30 हजार रूपए वापस किए। 

जनसुनवाई में 20 प्रकरण रखे गए थे, इनमें 15 पक्षकार उपस्थित हुए और 6 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। आयोग की सुनवाई में एक प्रकरण में आयोग की बात मानते हुए समाज प्रमुखों ने न सिर्फ आवेदिकागणों से सामाजिक दंड स्वरूप लिए गए 30 हजार वापस किया बल्कि आश्वासन दिया कि भविष्य में आवेदिका के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। समाज प्रमुखों ने सार्वजनिक रूप से ग्राम पंचायत के माध्यम से मुनादी कराने की बात कही, जिससे सामाजिक व्यक्ति आवेदिका पक्ष के साथ सामान्य व्यवहार करें। 

आयोग ने निर्देशित किया कि भविष्य में अगर समाज द्वारा फिर से आवेदिकागण के खिलाफ प्रतिबंध तब अनावेदकगण के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा सकता है। इस समझाइश के साथ प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने एनटीपीसी सीपत में वर्कमैन के पद पर कार्यरत उसके पति के खिलाफ शिकायत की है कि पति ने उसे 10 महीने से छोड़ दिया है और कोई भरण-पोषण राशि नहीं दे रहा है। पति उनकी 6 साल की बेटी को भी ले गया है। पति ने बच्ची की पढ़ाई भी छुड़ा दिया है और मिलने भी नहीं देते हैं। 

आयोग की समझाइश पर दूसरी महिला ने भविष्य में पति-पत्नी के बीच न आने की लिखित सहमति दी और पति पत्नी साथ रहने के लिए तैयार हुए। पति-पत्नी 10 बिन्दुओं पर अपनी शर्तें लिखित में आयोग के समक्ष जमा किया है। इस आधार पर प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। पति-पत्नी को आयोग द्वारा 6 महीने की निगरानी में रखा गया है। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने शिकायत की थी कि समाज ने 42 हजार रूपए लेने के बाद भी उनके परिवार का सामाजिक बैठकों में आना प्रतिबंधित कर दिया है। आयोग में समाज प्रमुखों को समझाइश दी जिस पर उन्होंने आवेदिका और उनके परिवारजनों के खिलाफ किसी भी तरह का कोई जातिगत प्रतिबंध और सामाजिक प्रतिबंध नहीं रखने की सहमति दी है। प्रकरण को निगरानी में रखते हुए नस्तीबद्ध किया गया है।

किराएदार पुलिस आरक्षक ने मकान मालकिन से किया अभद्र व्यवहार, राज्य महिला आयोग ने SP को दिए कार्रवाई के निर्देश

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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक  ने बिलासपुर जिले में महिलाओं से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए सुनवाई आयोजित की। आयोग की सदस्य अर्चना उपाध्याय और शशिकांता राठौर भी सुनवाई में उपस्थित रहीं। इस दौरान 25 प्रकरण रखे गए थे, जिसमें से 21 प्रकरणों में सुनवाई हुई। जबकि 10 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। अध्यक्ष नायक ने कहा कि महिलाओं से कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, जिससे वे सुरक्षित माहौल में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। 


कलेक्ट्रेट की मंथन सभाकक्ष में आयोजित सुनवाई में नायक ने एक प्रकरण में बिलासपुर के तिफरा DPS स्कूल के छात्र शिवम अग्रवाल को छठवीं और सातवीं कक्षा का मार्कशीट प्रदान करने का निर्देश दिया। छात्र की मार्कशीट स्कूल द्वारा रोककर रखी गई है, जिसके कारण उसे आगे की कक्षा में प्रवेश के लिए परेशानी हो रही है। छात्र के माता पिता ने आयोग से इस संबंध में गुहार लगाई। छात्र पीड़ित न हो और उसके भविष्य को देखते हुए दोनों पक्षों की वकील के माध्यम से काउंसलिंग कराई गई। साथ ही ये मामला लोक अदालत में भी है, इसलिए आवेदक द्वारा आयोग से प्रकरण वापस ले लिया गया।

संतुष्टि के आधार पर प्रकरण समाप्त 

एक अन्य प्रकरण में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलतरा की महिला RHO ने केंद्र के सुपरवाइजर पर अभद्रतापूर्वक व्यवहार में गाली गलौज करने की शिकायत की। अनावेदक ने आयोग के समक्ष सभी आवेदिका महिलाओं से मांफी मांगी। उन्हें समझाइश दी गई कि शासकीय सेवा में रहते हुए किसी भी महिला से गाली गलौज और अभद्रतापूर्ण व्यवहार न करें। नहीं तो सिविल सेवा आचरण के अंतर्गत उनके खिलाफ आयोग द्वारा कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है। आवेदकों की संतुष्टि के आधार पर प्रकरण को समाप्त कर नस्तीबद्ध किया गया। 

मकान खाली कराने के निर्देश

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक जो पुलिस विभाग में आरक्षक है, वह बीते 12-13 साल से आवेदिका का किराएदार है और एक साल से मकान किराया और पानी और बिजली का बिल नहीं दे रहा है। आवेदिका द्वारा मकान खाली करने के लिए कहे जाने पर वह पुलिस के नौकरी की आड़ में उसे धमकी देता है। इस संबंध में आयोग द्वारा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर की मध्यस्थता से अनावेदक को मकान खाली कराकर पूरे मामले का निराकरण कर आयोग को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है,  ताकि मामले को नस्तीबद्ध किया जा सके। 

भरण पोषण का खर्च देने के लिए तैयार पति

अनावेदक द्वारा मकान खाली नहीं करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जाएगी। एक प्रकरण में अपने पति से अलग रह रही महिला ने बेटी के भरण पोषण  के लिए पति से खर्च दिलाने की गुहार की। आयोग की समझाइश पर महिला का पति बेटी के पढ़ाई लिखाई और भोजन के खर्च के लिए प्रति माह तीन हजार रूपए बेटी के एकाउंट में देने के लिए राजी हुआ। सुनवाई के दौरान संयुक्त कलेक्टर मोनिका वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास निशा मिश्रा, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी नेहा राठिया और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया पर भावनात्मक बात शेयर करने से बचें महिलाएं: किरणमयी नायक

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राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा प्रायोजित वेबिनार श्रृंखला के तहत छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की ओर से आयोजित वेबिनार में अंबिकापुर क्षेत्र की महिलाओं ने भाग लिया। आयोग की अध्यक्ष  किरणमयी नायक के अगुवाई में आयोजित वेबिनार का विषय 'महिलाओं के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुर्व्यवहार और साइबर क्राइम' था। कार्यक्रम में अधिवक्ता उच्च न्यायालय की  निरूपमा वाजपेयी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुनंदा ढेंगे ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान महिलाओं के प्रश्नों और जिज्ञासाओं के जवाब भी वक्ताओं ने दिए और सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म संबंधी सभी शंकाओं का समाधान किया। 


अध्यक्ष किरणमयी नायक ने कहा महिला आयोग में कई ऐसे मामले आते हैं, जिनमें महिलाओं की फोटो का दुरूपयोग कर उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश होती है। कई बार महिला के नाम से पुरूष ID बनाकर ठगी कर लेते हैं। इससे महिलाओं को बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को छिपाना नहीं चाहिए। परिजन को इसकी जानकारी देनी चाहिए। महिलाएं इसकी शिकायत महिला आयोग के व्हाट्सएप नंबर 90983-82225 के माध्यम से या लिखित में कर सकती हैं। इसके अलावा 112 में भी शिकायत कर सकती है। इस संबंध में सभी को जागरूक होने की जरूरत हैं।

महिलाओं को न्याय मिलने में आसानी 

अधिवक्ता निरूपमा वाजपेयी ने कहा कि हिंसा किसी वर्चुअल प्लेटफार्म पर होती है तो वह असल जिंदगी से ज्यादा खतरनाक होती है। इस तरह का कोई अपराध होता है तो महिला हेल्पलाइन नंबर का प्रयोग कर सकती है। साइबर क्राइम कानून में संशोधन कर सजा का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं को न्याय मिलने में आसानी हुई है। 

कम उम्र की लड़कियों सबसे ज्यादा होती है शिकार     

डॉ. सुनंदा ढेंगे ने कहा कि कई एप्लीकेशन और प्लेटफॉर्म में लाइव चैटिंग और वीडियो कॉल की सुविधा है। जो सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके माध्यम से फेस का फोटो लेकर ब्लैकमेल या दुर्व्यवहार किया जा सकता है। इसका शिकार अधिकतर कम उम्र की बच्चियां होती है, जिन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं होती है। टिन्डर, हैपन, इंस्टाग्राम ये सारे ऐप फेसबुक से जुड़े होते हैं। फेसबुक में इमोशनल पोस्ट डालने से आपकी व्यक्तिगत जानकारी उनको मिल जाती है, फोटो को क्रॉप कर उसका दुरूपयोग किया जाता है। 

FB का इस्तेमाल करने वाले इन बातों का रखें ध्यान

डॉ. सुनंदा ने बताया कि किसी अपराध से जुड़ा हुआ पोस्ट तुरंत अपलोड नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई अनावश्यक टिप्पणी कर रहा है, तो उसे ब्लॉक कर देना चाहिए। अलग-अलग ID से कोई परेशान कर रहा है तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर आप शिकायत कर सकते हैं। किसी भी विज्ञापन के जरिए शॉपिंग नहीं किया जाना चाहिए। फेसबुक में भी ऑनलाइन खरीदी से बचें और हमेशा अपनी ID लॉग आउट करके रखें। फेसबुक के माध्यम से आपकी सारी जानकारी देखा जा सकता है। 

निशक्त महिला से धोखे से रजिस्ट्री कराने वाले के खिलाफ हुई कड़ी कार्रवाई, महिला आयोग ने की सुनवाई

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने सदस्य शशिकांता राठौर और अर्चना उपाध्याय की उपस्थिति में जिला पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में 25 प्रकरणों की सुनवाई की। महिला आयोग के समक्ष जिले में महिला उत्पीड़न से संबंधित 25 प्रकरण सुनवाई के लिए पेश किए गए। इनमें से 22 प्रकरणों का निराकरण किया गया। किरणमयी नायक ने महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए सभी कार्यालयों, जहां पर महिलाएं कार्यरत हो वहां आंतरिक परिवाद समिति का गठन करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज का आधार होती हैं। उन पर किसी भी प्रकार से उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए।


महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने करतला तहसील के चिकनी पाली गांव की वृद्ध और असहाय महिला की जमीन संबंधी विवाद का निपटारा किया। आवेदिका के मुताबिक अनावेदक ने उसके वृद्ध और अंधे-बहरे होने का फायदा उठाकर धोखे से बिना पूरे पैसे दिए उसकी जमीन का रजिस्ट्री करा ली थी। महिला आयोग ने सुनवाई कर 15 दिन के अंदर पैसे वापस करने या भुगतान करने में सक्षम न होने पर वृद्ध महिला के नाम पर फिर रजिस्ट्री करने के निर्देश दिए।

बेटियों को नौकरी और मुआवजा के निर्देश 

एक अन्य मामले में आवेदिका ने कार्य क्षेत्र से पृथक कर कार्यालय में संलग्न करने की शिकायत महिला आयोग में दर्ज कराई थी। महिला आयोग ने इस प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए कहा कि संलग्नीकरण या किसी अन्य प्रकार का विभागीय दायित्व सौंपना कार्य स्थल पर प्रताड़ना की श्रेणी में नहीं आता। महिला आयोग के कार्य क्षेत्र से बाहर होने के कारण इस प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। इस दौरान आयोग के समक्ष कुसमुंडा SECL द्वारा कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के बदले बेटियों को नौकरी और मुआवजा नहीं दिए जाने का प्रकरण भी आया। आयोग ने पूरी सुनवाई कर कुसमुंडा SECL प्रबंधन को योग्यतानुसार महिलाओं को नौकरी और मुआवजा देने की प्रक्रिया एक महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश दिए।

अनावेदक को भरण-पोषण देने के निर्देश

प्रकरण की सुनवाई के दौरान एक आवेदिका ने भरण-पोषण न दिए जाने और पति के किसी दूसरी महिला से संबंध होने की शिकायत की थी। महिला ने बताया कि अनावेदक राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर कार्यरत है। महिला आयोग अध्यक्ष किरणमयी नायक ने अनावेदक को भरण-पोषण दिए जाने के निर्देश दिए और अनावेदक के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश SDM को दिए। महिला आयोग के समक्ष मानसिक प्रताड़ना से संबंधित आवेदन भी आया जिसमें आवेदिका ने शिकायत की थी कि अनावेदक ने पहली पत्नी के होते हुए आवेदिका की मां के साथ पति के रूप में रहा था। वे मां की मृत्यु के बाद स्वयं को पति घोषित करते हुए पेंशन की राशि अपने नाम कराकर प्रतिमाह पेंशन ले रहा है और आवेदिका के मां के घर पर भी कब्जा कर रखा है। 

मानसिक प्रताड़ना से जुड़े थे सर्वाधिक केस 

इस पर सुनवाई करते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने कहा कि अवैध तरीके से स्वयं को मृतक महिला का पति बताकर शासकीय पेंशन का लाभ लेना अवैधानिक है और यह शासकीय राशि के गबन और धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। इस पर कलेक्टर को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान सर्वाधिक केस मानसिक प्रताड़ना से जुड़े थे। इसके साथ-साथ कार्य स्थल पर प्रताड़ना, दहेज प्रताड़ना, हत्या, अपहरण, भरण-पोषण से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई की गई। इस अवसर पर SDM सुनील नायक, पुलिस उप अधीक्षक योगेश साहू, DPO आनंद प्रकाश किस्पोट्टा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

लिव इन में रहने के बाद रेप केस दर्ज करवाना चाहती हैं लड़कियां

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छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने छत्तीसगढ़ में बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलो को लेकर बेतुका बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 'महिला आयोग में आए दिन ऐसी महिलाएं आती है जो पहले तो खुद अपनी मर्जी से लिव इन में रहकर संबंध बनाती है फिर बाद में रिपोर्ट दर्ज कराकर न्याय की उम्मीद करती हैं.।'





छत्तीसगढ़ में CM की कुर्सी को लेकर सियासी भूचाल





किरणमयी नायक ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसी महिलाएं हमसे न्याय की उम्मीद न करें क्योंकि आपने गलत किया है। उन्होंने कहा कि 'कई बार शादीशुदा महिलाएं अपने से कम उम्र के पुरूष के साथ संबंध बनाती है और रिश्ता बिगड़ जाने पर रेप केस दर्ज करवा देती है, फिर महिला आयोग से संरक्षण की मांग करती है। ये फिल्मी तरीके हैं कि लोग लिव इन में रह रहे हैं, हीरो-हिरोइन रह रहे हैं तो यहां भी यही शुरू कर दें, ये गलत परंपरा है, इन सबके चक्कर में महिलाओं और लड़कियों को नहीं आना चाहिए।'





न्याय की उम्मीद न करें महिलाएं





किरणमयी नायक ने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसी महिलाएं हमसे न्याय की उम्मीद न करें क्योंकि आपने गलत किया है। उन्होंने कहा कि 'कई बार शादीशुदा महिलाएं अपने से कम उम्र के पुरूष के साथ संबंध बनाती है और रिश्ता बिगड़ जाने पर रेप केस दर्ज करवा देती है, फिर महिला आयोग से संरक्षण की मांग करती है। ये फिल्मी तरीके हैं कि लोग लिव इन में रह रहे हैं, हीरो-हिरोइन रह रहे हैं तो यहां भी यही शुरू कर दें, ये गलत परंपरा है, इन सबके चक्कर में महिलाओं और लड़कियों को नहीं आना चाहिए।'  उन्होंने कहा कि 'अभिभावक अपनी बच्चियों पर नजर रखें और समझाइश दें।'





यूज करती हैं महिलाएं





उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाएं आकर हमसे मदद की उम्मीद करती हैं, जो महिलाएं सचमुच प्रताड़ित हो रही हैं, आयोग उनके साथ है। अक्सर अधिकांश मामले हमारे पास ऐसे आते हैं, जिसमें महिलाएं दोनों तरफ से इनडायरेक्ट यूज करतीं हैं।





कई प्रकरण हुए हैं खारिज





आयोग के पास दहेज प्रताड़ना, कार्यालय स्थल पर शोषण, घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा आते हैं। इनमें कई प्रकरण खारिज करने पड़ते हैं। यदि इनमें से किसी मामले की शिकायत पुलिस स्टेशन में दर्ज नहीं होती है तो महिला आयोग सुनवाई करता है। यदि पुलिस शिकायत दर्ज कर लेती है तो महिला आयोग पीड़िता को राहत नहीं दे पाता है।





जिम्मेदार बने लड़कियां





उन्होंने कहा कि पहले आप पढ़-लिखकर जिम्मेदार बनें। अगर आप किसी से शादी करना चाह रहे हैं तो आप देखें कि वह ज़िम्मेदार है कि नहीं। आपकी परवरिश कर सकता है कि नहीं। अगर शादीशुदा व्यक्ति आपको प्यार के झांसे में फंसा रहा है तो आपको यह समझना होगा कि वह आपसे झूठ बोल रहा है।






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