Media24Media.com: क्या है डेंगू के लक्षण

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एडीज प्रजाति के मच्छर से फैलता है डेंगू, बचाव के लिए करें ये उपाय

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डेंगू बुखार एक आम वायरस जनित संचारी रोग है। यह मच्छर के काटने से फैलता है। डेंगू बुखार के मुख्य लक्षण अकस्मात तेज सिर दर्द और बुखार का होना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना, आखों के पीछे दर्द होना जो कि आखों को घुमाने से बढ़ता है, जी मिचलाना-उल्टी होना और गंभीर मामलों में नाक मुंह मसूड़ों से खून आना या त्वचा पर चकते उभरना है।


डेंगू से बचने के उपाय 

डेंगू फैलाने वाला मच्छर रूके हुए साफ पानी में पनपता है। जैसे कि कूलर , पानी की टंकी , फ्रिज की ट्रे , फूलदान , नारियल का खोल , टूटे हुए बर्तन और टायर। इसके लिए सभी लोगों को चाहिए कि वे पानी से भरे हुए बर्तनों और टंकियों को ढक कर रखें। कूलर को हफ्ते में एक दिन आवश्यक रूप से सुखाए । बता दें कि डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है। ऐसे में बदन को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहने। डेंगू के इलाद के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। बुखार उतारने के लिए पैरासीटामाल टेबलेट का उपयोग किया जाता है। लोगों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे एस्प्रीन या आइबु्रफेन का इस्तमाल अपने आप न करें। डेंगू होने पर डॉक्टर की सलाह ले।

एडीज प्रजाति का होता है डेंगू फैलाने वाला मच्छर 

डेंगू फैलाने वाला मच्छर एडीज प्रजाति का होता है । इसे टाइगर मच्छर भी कहा जाता है।  यह मच्छर दिन के समय काटता है। डेंगू एडिज मच्छर को अपने अंडे देने के लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती हैं। एडीज मच्छर के अंडे कई दिनों तक बिना पानी के भी रह सकते हैं।

कब पनपते हैं डेंगू के मच्छर?

डेंगू के मच्छर अधिकतर जुलाई से अक्टूबर के बीच ही पनपते हैं। इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज मच्छर 3 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता है। एडीज मच्छर गर्म से गर्म माहौल में भी जिंदा रह सकता है। मानसून के समय पानी इकठ्ठा होने से डेंगू के मच्छर पनपने का अधिक खतरा रहता है। इसलिए गर्मियों की शुरुआत के साथ ही और लोगों के घरों में कूलर लगने के बाद ही बारिश में स्वास्थ्य विभाग घरों में कूलर में पानी जमा होने की चेकिंग शुरू कर देते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह बीमारी अभी भी उतनी ही घातक है और इसे लेकर पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है।

डेंगू का मच्छर आम मच्छर से होता है अलग

डेंगू के मच्छर का नाम एडीज बताया गया है। इस मच्छर के काटने से डेंगू की बीमारी होती है। यह आम मच्छरों से अलग होता है। बता दें कि यह मच्छर अधिकतर रोशनी में काटते हैं। कई रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यह मच्छर सुबह के वक्त काटते हैं। सुबह और दिन के वक्त या जब रोशनी हो तो इसका अधिक ध्यान रखने की जरूरत होती है। एडीज ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम नहीं होता और यही कारण है की यह अधिकतर घुटनो के नीचे काटता है। यह एक भ्रम है की डेंगू के मच्छर सिर्फ गंदे पानी में पनपते हैं। साफ-सुथरे इलाकों में और साफ-सुथरे पानी में यह मच्छर पनपते हैं तो सभी को इसका ध्यान रखने की जरूरत है।

कैसे करें बचाव?

  • साफ या गंदा पानी जमा कर के न रखें।
  • कूलर के पानी को भी 7 दिन में बदलें और हो सके तो उसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल डाल दें।
  • पानी की टंकी को ढक्कन से ढक कर रखें।
  • खिड़कियों को जाली या शीशे से बंद कर के रखें और दरवाजे भी बंद कर के रखें ताकि मच्छर घर में न आ सकें।
  • मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी या स्प्रे का प्रयोग करें।
  • एक्वेरियम, फूलदान में हर हफ्ते पानी बदलें।

तीन प्रकार का होता है डेंगू

सामान्य या क्लासिकल - बुखार के साथ तेज दर्द, और शरीर पर दाने लेकिन यह चार से पांच दिन में बिना दवा ठीक हो जाता है। कुछ लोगों को सामान्य दवाएं दी जाती हैं।

डेंगू हैमरेजिक - यह खतरनाक होता है और प्लेटलेट और व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम हो जाती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

डेंगू शॉक सिंड्रोम - इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। बीपी और नब्ज की गति कम हो जाती है। तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।

डेंगू से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अब जियो टैगिंग की ली जाएगी मदद

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दुर्ग जिले में डेंगू पर नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति बनाई गई है। रविवार को इस पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डॉ. आलोक शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा की गई। बैठक में यह तय किया गया कि जियो टैगिंग जैसी तकनीक के साथ ही परंपरागत तरीकों से डेंगू के रोकथाम के लिए कार्य किया जाएगा। साथ ही अस्पतालों की व्यवस्था भी सुदृढ़ रहेगी और इसकी निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी।





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डेंगू मरीजों के लिए प्लेटलेट्स के इंतजाम के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रमुख सचिव ने रविवार को डेंगू प्रभावित क्षेत्रों सेक्टर-4 और छावनी का निरीक्षण भी किया। जहां पर उन्होंने लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि सजग रहकर डेंगू की रोकथाम की जा सकती है। इस दौरान NRHM MD डॉ. प्रियंका शुक्ला, कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, नगर निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी भी उपस्थित थे।





प्रभावी रूप से प्रचार-प्रसार





प्रमुख सचिव ने डेंगू के हॉटस्पॉट इलाकों में निगम अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण भी किया। निगम अधिकारियों ने बताया कि यहां सतत रूप से फागिंग और टेमीफोस का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही कूलर की जांच भी की जा रही है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि साफ पानी का जमाव कहीं भी नहीं होने दिया जाए। इसके लिए प्रभावी रूप से प्रचार प्रसार किया जाए।





40 हजार टेस्टिंग किट





डेंगू से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर रणनीति बनाई जाए। कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा कि इस संबंध में सघन मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि डेंगू को पनपने से रोका जा सके। डॉ. शुक्ला ने बताया कि जियो टैगिंग जैसी तकनीक से हॉटस्पॉट में कार्य करना बेहतर होगा और इससे अधिकाधिक मरीजों की पहचान हो सकेगी। जिले को 40 हजार टेस्टिंग किट भी प्रदान किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों की टेस्टिंग हो सके और डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।





डॉ. आलोक शुक्ला ने दी जानकारी





मीटिंग में डॉ. आलोक शुक्ला ने जियो टैगिंग के द्वारा डेंगू मरीजों के स्पॉट मैपिंग के निर्देश दिए। इसके लिए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट में एक सेक्शन दिया जाएगा, जिसमें डेंगू के लक्षण से ग्रसित कोई भी व्यक्ति उस सेक्शन में जाकर अपने नाम, पते और मोबाइल नंबर के साथ अपने आपको जियो टैग कर सकता है।





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लक्षण के आधार पर मलेरिया, डेंगू और हेपेटाइटिस तीनों के विकल्प उपलब्ध हैं, जिसमें जानकारी देने वाले व्यक्ति को अपने लक्षण के आधार पर तीनों में से एक विकल्प को चुनना है। यह इस प्रक्रिया का प्राथमिक स्तर है। इसके बाद यह डाटा स्वास्थ्य विभाग में रिफ्लेक्ट होगा। जहां इस डाटा से संबंधित व्यक्ति का डिटेल लेकर लैब टेक्नीशियन वहां पहुंचेंगे और इसका सैंपल लेकर उसकी टेस्टिंग करेंगे।





डेंगू मरीजों के सर्वोत्तम इलाज पर सतत नजर





अगर टेस्टिंग में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई जाती है तो उन व्यक्तियों को आइसोलेट कर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उनका ट्रीटमेंट चालू कर दिया जाएगा। यह प्लेटफार्म सभी आम जनता के लिए खुला रहेगा और इसमें SMS अलर्ट सिस्टम भी रखा जाएगा। इस तरह, तकनीक के इस्तेमाल से डेंगू रोकथाम की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सकेगी। डॉ. शुक्ला ने कहा कि हॉस्पिटल में भी डेंगू मरीजों के सर्वोत्तम इलाज पर सतत नजर रखें। प्लेटलेट्स की त्वरित व्यवस्था के लिए सिस्टम प्रभावी रूप से कार्य करता रहे।





कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश





कलेक्टर ने कहा कि जिले में डेंगू नियंत्रण पर युद्ध स्तर पर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि आम जनता से लगातार अपील करें कि अपने आस-पास के स्थानों में जल को इकट्ठा ना होने दें। जल जनित रोगों से बचाव के लिए वाटर सप्लाई सिस्टम में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि पानी की टेस्टिंग विभिन्न स्तरों में की जाए, ताकि सभी को स्वच्छ पानी प्राप्त हो सके।





घर- घर सर्वे कर जन जागरूकता





उन्होंने निर्देश दिए कि जहां भी लार्वा प्राप्त हो उसके आस-पास के क्षेत्र को चिन्हिंत करके लार्वा को नष्ट करने का कार्य किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि ANM,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ANM और आरोग्य समिति की संयुक्त टीम प्रत्येक वार्ड में घर- घर सर्वे कर जन जागरूकता का कार्य करती रहे। उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से इन कार्यों को क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।


तेज बुखार के साथ सिर, आंख और शरीर में दर्द हो सकते हैं डेंगू के लक्षण

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कोरोना संक्रमण के दौरान आने वाले बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षण डेंगू के हो सकते हैं। इस लिए मानसून आने के साथ ही डेंगू रोग के संक्रमण से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरुरी होता है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत 16 मई को हर साल स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। वर्तमान में कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए जागरुकता रैली निकालने सहित गतिविधियां संभव नहीं है। ऐसे में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने सभी जिलों के CMHO और जिला मलेरिया अधिकारियों को वर्चुवल मीटिंग, सोशल मिडिया, बैनर, पोस्टर सहित हैंडबिल के माध्यम से प्रचार कर लोगों को जागरुक करने गतिविधियां संचालित करने का निर्देश दिया हैं।





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शहर और गांवों में मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दीवार पर नारे लेखन का काम किया जाएगा| स्थानीय स्तर पर फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर को कोविड-19 गाइड लाइन का पालन करते हुए सामाजिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करना होगा । CMHO डॉ. एसके शर्मा के मुताबिक डेंगू से बचाव के लिए आम लोगों को सजग होना जरुरी है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है इसलिए घर या आसपास कहीं भी इसे जमा नहीं होने दें।





मलेरिया नियंत्रण अधिकारी ने दी जानकारी





वहीं जिला मलेरिया नियंत्रण अधिकारी डॉ. ज्योति अनिल जसाठी ने कहा कि जिले में अभी तक डेंगू का एक भी केस सामने नहीं आया है। इससे निपटने के लिए शहरी क्षेत्र में नगर निगम प्रशासन को जलजमाव नहीं होने देने और फॉगिंग कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जिले के चारों ब्लॉकों में सभी PHC प्रभारी के माध्यम से ग्राम स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव कराने के साथ आमजन को जागरूक करने वाले हैंडबिल वितरित किए जाएंगे। यह बीमारी मानसून के समय आती है और इसी समय सबसे ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। मानसून के साथ डेंगू के मच्छरों के पनपने का मौसम भी शुरू होता है।





कब पनपते हैं डेंगू के मच्छर?





डेंगू के मच्छर अधिकतर जुलाई से अक्टूबर के बीच ही पनपते हैं। इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज मच्छर 3 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता है। एडीज मच्छर गर्म से गर्म माहौल में भी जिंदा रह सकता है। मानसून के समय पानी इकठ्ठा होने से डेंगू के मच्छर पनपने का अधिक खतरा रहता है। इसलिए गर्मियों की शुरुआत के साथ ही और लोगों के घरों में कूलर लगने के बाद ही बारिश में स्वास्थ्य विभाग घरों में कूलर में पानी जमा होने की चेकिंग शुरू कर देते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह बीमारी अभी भी उतनी ही घातक है और इसे लेकर पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है।





डेंगू का मच्छर आम मच्छर से होता है अलग





डेंगू के मच्छर का नाम एडीज बताया गया है। इस मच्छर के काटने से डेंगू की बीमारी होती है। यह आम मच्छरों से अलग होता है। बता दें कि यह मच्छर अधिकतर रोशनी में काटते हैं। कई रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यह मच्छर सुबह के वक्त काटते हैं। सुबह और दिन के वक्त या जब रोशनी हो तो इसका अधिक ध्यान रखने की जरूरत होती है। एडीज ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम नहीं होता और यही कारण है की यह अधिकतर घुटनो के नीचे काटता है। यह एक भ्रम है की डेंगू के मच्छर सिर्फ गंदे पानी में पनपते हैं। साफ-सुथरे इलाकों में और साफ-सुथरे पानी में यह मच्छर पनपते हैं तो सभी को इसका ध्यान रखने की जरूरत है।





डेंगू बुखार के लक्षण





मादा एडीज यानी अगर डेंगू मच्छर अगर काटे तो इसके कुछ दिनों बाद लक्षण दिखने शुरू होते हैं । ठंड के साथ तेज बुखार, सिर, आंखों, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल चकत्ते इसके लक्षण है ।





कैसे करें बचाव?





  • साफ या गंदा पानी जमा कर के न रखें।
  • कूलर के पानी को भी 7 दिन में बदलें और हो सके तो उसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल डाल दें।
  • पानी की टंकी को ढक्कन से ढक कर रखें।
  • खिड़कियों को जाली या शीशे से बंद कर के रखें और दरवाजे भी बंद कर के रखें ताकि मच्छर घर में न आ सकें।
  • मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी या स्प्रे का प्रयोग करें।
  • एक्वेरियम, फूलदान में हर हफ्ते पानी बदलें।




तीन प्रकार का होता है डेंगू





सामान्य या क्लासिकल - बुखार के साथ तेज दर्द, और शरीर पर दाने लेकिन यह चार से पांच दिन में बिना दवा ठीक हो जाता है। कुछ लोगों को सामान्य दवाएं दी जाती हैं।





डेंगू हैमरेजिक - यह खतरनाक होता है और प्लेटलेट और व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम हो जाती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।





डेंगू शॉक सिंड्रोम - इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। बीपी और नब्ज की गति कम हो जाती है। तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।


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