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मंत्रिपरिषद की बैठक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर मंत्रिपरिषद द्वारा द्वितीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2024-2025 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।


मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं के छत्तीसगढ़ पुलिस में भर्ती के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उम्मीदवारों के लिए ऊंचाई और सीना के निर्धारित मापदण्ड में एक बार के लिए छूट प्रदान करने का निर्णय लिया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार, उपनिरीक्षक संवर्ग, प्लाटून कमाण्डर की सीधी भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2024 में निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई 163 सेंटीमीटर तथा सीना बिना फुलाये 78 से.मी. एवं फुलाने पर 83 से.मी. केवल अनुसूचित जनजाति वर्ग के पुरूष अभ्यर्थियों के लिए केवल एक बार के लिए छूट देने का निर्णय लिया गया है। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य में डेयरी उद्यमिता को प्रोत्साहन देने एवं दुग्ध संकलन तथा प्रसंस्करण में वृद्धि हेतु राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ एम.ओ.यू. करने का निर्णय लिया गया। इससे नवीन तकनीक के उपयोग के साथ ही दुग्ध महासंघ के प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि होगी। अनुसूचित क्षेत्रों में दुधारू पशु उत्प्रेरण से स्वरोजगार में वृद्धि के साथ ही दुग्ध उत्पादन की लागत कम होगी तथा दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि के साथ ही प्रदेश के दुग्ध उत्पादक कृषकों के दुग्ध विक्रय के लिए सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित हो सकेगी।   

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में संशोधन बाबत् छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितिकरण (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

राजधानी रायपुर में 15 जनवरी से 15 फरवरी 2025 तक आयोजित ऑटो एक्सपो के दौरान वाहनों के लाईफ टाईम रोड टैक्स पर एकमुश्त 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया तथा प्रदेश के सभी डीलरों को इस सुविधा का  लाभ वाहन क्रेताओं को दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।

छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए सुदृढ़ वातावरण तैयार करने, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा राज्य के खिलाड़ियों के लिए सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर जिला मुख्यालय में खेल हेतु आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना का अनुमोदन किया गया।

इसके तहत छत्तीसगढ़ में खेल क्लब को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए संबंधित पंजीकृत समितियों को खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने पर आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पारंपरिक खेलोें को पुनर्जीवित किया जाएगा। ओलम्पिक खेलों को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में बढ़ावा देने के साथ ही राज्य के खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने पर उनको शत-प्रतिशत यात्रा व्यय  तथा खेल उपकरण की सुविधा देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित अतिशेष (सरप्लस) धान के निराकरण के संबंध में गहन विचार-विमर्श किया गया। कैबिनेट ने खरीफ सीजन में उपार्जित शतप्रतिशत धान की कस्टम मिलिंग उसी खरीफ सीजन में पूरा कर जमा कराने तथा इस साल के अतिशेष धान का चावल केन्द्रीय पूल के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम में सितम्बर 2025 तक उपार्जित किए जाने के लिए लक्ष्य वृद्धि हेतु प्रस्ताव धान खरीदी समाप्त होते ही भारत सरकार को पुनः भेजे जाने के संबंध में चर्चा की गई तथा अतिशेष धान का निराकरण नीलामी से करने की अनुमति दी गई है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कस्टम मिलिंग हेतु फोर्टिफाईड राईस कर्नेल की व्यवस्था के संबंध में फोर्टिफाईड चावल जमा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा NeML के माध्यम से दर का निर्धारण पश्चात् आपूर्ति प्रारंभ होने तक गत् खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 अनुसार मिलरों द्वारा एफआरके निर्माताओं से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दर के अधीन फोर्टिफाईड राईस कर्नेल (FRK) क्रय कर फोर्टिफाईड चावल जमा किये जाने की अनुमति दी गई है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि 80 रूपए करने का निर्णय लिया खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में राईस मिलों को लंबित प्रोत्साहन राशि की प्रथम किश्त प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया।

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 (क्रमांक 1 सन् 1994)  की धाराओं में संशोधन संबंधी छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ नगर पालिक अधिनियम 1961 (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2024 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

अनुसूचित जनजाति का सर्वांगीण विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता : विष्णु देव साय

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ द्वारा आयोजित आदिवासी समाज के नवनिर्वाचित विधायकों के सम्मान समारोह एवं आमसभा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत गजमाला एवं पगड़ी पहनाकर पारंपरिक आदिवासी स्वागत गीत से किया गया।


इस अवसर पर समारोह को सम्बोधित करते हुए साय ने कहा कि आज 18 दिसंबर का दिन है। आप सभी को बाबा गुरु घासीदास जयंती की हार्दिक बधाई। परमपूज्य बाबा गुरु घासीदास जी ने समाज को मनखे मनखे एक समान का संदेश देकर हम सभी को नया रास्ता दिखाया। आज हमारे समाज के लिए सौभाग्य की बात है कि जिस छत्तीसगढ़ में करीब 32 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी है और जहां सबकी अपेक्षा थी कि आदिवासी मुख्यमंत्री बने, हमारे आदिवासी समाज की इस उम्मीद को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने पूरा किया है।

साय ने कहा कि आज हमारे प्रधानमंत्री जी के कारण पूरी दुनिया में हमारे देश का डंका बज रहा है। आज देश के सर्वोच्च महामहिम राष्ट्रपति के पद पर हमारे आदिवासी समाज की श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी विराजमान है। छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने किया, ताकि यहां के अनुसूचित जनजाति के लोगों का समुचित सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो सके। अनुसूचित जनजाति का सर्वांगीण विकास हो सके इसलिए उन्होंने भारत सरकार में पहली बार आदिम जाति कल्याण विभाग का गठन भी किया। अनुसूचित जनजाति समुदाय की सबसे ज्यादा चिंता हमारी सरकार करती है।

साय ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास का संकल्प लेकर मोदी की गारंटी में छत्तीसगढ़ की जनता से जो भी वादा हमने किया है, उसे पूरा करने की जवाबदारी हमारी है। हमारी सरकार ने ही महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष माताओं-बहनों को 12 हजार रुपए और किसानों के हित में 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी की घोषणा सहित प्रत्येक वर्ग के हित में घोषणाएं की है। उन्होंने कहा कि हमने वादा किया था कि गरीबों को आवास मुहैय्या कराएंगे, हमने इसे पूरा किया। हमने 13 दिसम्बर को शपथ ग्रहण किया और 14 दिसंबर को सबसे पहले केबिनेट में 18 लाख हितग्राहियो को आवास देने का निर्णय लिया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, विधायक केदार कश्यप, विधायक कवासी लखमा सहित आदिवासी समुदाय के अन्य विधायक, एवं अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के प्रांताध्यक्ष आर एन ध्रुव सहित आदिवासी समुदाय के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नैसर्गिक कोसा से दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार के निर्देशन में विगत पौने पांच साल में रेशम प्रभाग ने दो लाख से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। रेशम प्रभाग में संचालित नैसर्गिक टसर बीज प्रगुणन एवं संग्रहण कार्यक्रम अंतर्गत 2 लाख 5 हजार 565 लोगों को नियमित रोजगार मिला है। इस योजना अंतर्गत 6386.56 लाख नग नैसर्गिक टसर का ककून का उत्पादन किया गया है।

जिससे एक लाख 9 हजार 856 अनुसूचित जनजाति और 19 हजार 196 अनुसूचित जाति के लोगों को रोजगार मिला है। राज्य के दंतेवाड़ा, जगदलपुर (बस्तर), उत्तर बस्तर के तहत कोण्डागांव, नारायणपुर, कांकेर तथा धमतरी, रायपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग, कोरबा, जशपुर, कोरिया जिला वनों से आच्छादित क्षेत्र है। इन सभी जिलों में मूलतः अनुसूचित जाति, जनजाति के परिवार निवास करते है जो कि समाज की मुख्य धारा से जुड़े गए हैं। इन लोगों को शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर रेशम पालन को कृषि का दर्जा मिला है। इससे रेशम पालन को बढ़ावा मिलेगा। वनांचल के सभी जिलों में नैसर्गिक कोसा उत्पादन के संग्रहण के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों द्वारा आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। इस दिशा में ग्रामोद्योग संचालनालय द्वारा प्राकृतिक वन क्षेत्रों में नैसर्गिक बीज का प्रगुणन कर उसे सघन वन क्षेत्रों में फैलाया जाता है, जिससे वनवासी हितग्राहियों द्वारा नैसर्गिक कोसा संग्रहण कर आय का एक अतिरिक्त साधन प्राप्त कर सकंे। इस क्षेत्र में निवासरत् परिवार मूलतः वनों पर आधारित उपज का विपणन कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं। उक्त सभी जिलों के वन खण्डों में प्राकृतिक रूप से साल, साजा, सेन्हा, धौरा, बेर के वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इन वृक्षों में टसर कोसा की रैली, लरिया एवं बरफ प्रजाति के कोसाफल नैसर्गिक रूप से उत्पादित होते हैं।

आदिवासी समाज और जनता अब मुख्यमंत्री के झूठ-फरेब के झाँसों में नहीं आएगी - गागड़ा

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने 12 जनजाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा झूठा श्रेय बटोरने की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री बघेल के पत्र लिखने के बाद 12जनजातियों को सूची में शामिल करने संबंधी दावे को निरा हास्यास्पद बताते हुए गागड़ा ने कटाक्ष करते हुए पूछा है कि लोकसभा में तत्संबंधी संशोधन विधेयक ही सन 2016 में पेश हुआ और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार 2018 में बनी तो मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र किसको लिखा था? 


गागड़ा ने संशोधन विधेयक की प्रतियाँ जारी कर कांग्रेस के झूठ-फरेब से भरे राजनीतिक आचरण की चर्चा की और मुख्यमंत्री बघेल को याद दिलाया कि जुलाई में राज्यसभा में बिल आया तो कांग्रेस ने पीठ दिखाने का काम जरूर किया था। सूची में शामिल 12 जनजातियों के आदिवासी भाई-बहनों के साथ-साथ प्रदेश की जनता ने देखा है कि कौन शोषित-वंचित आदिवासियों के साथ कौन खड़ा है और कौन नहीं? सब को पता है भाजपा ने इन आदिवासियों के साथ न्याय करके उन्हें उनका हक दिलाया है तो क्रेडिट तो भाजपा को मिलनी ही है।

भाजपा नेता व पूर्व मंत्री गागड़ा ने कहा कि  2016 का विधेयक संख्या 325 संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां आदेश (संशोधन) पेश हुआ था, तो किस आधार पर मुख्यमंत्री बघेल पहल करने की बात करते हैं? भाजपा पहले भी आदिवासी समाज के साथ खड़ी थी, आज भी खड़ी है और हमेशा खड़ी रहेगी। गागड़ा ने कहा कि मात्रात्मक त्रुटि सुधार कर लाभ देने की कोशिश की गई थी तो पर्दे के पीछे से जाकर हाईकोर्ट से स्टे लेने का काम हुआ। जो लोग हाईकोर्ट गए थे, उन्हें मुख्यमंत्री बघेल ने लाभ के पदों से नवाजा है।

 प्रदेश की जनता और 12 जनजाति समाज को यह सच भी भलीभांति पता है। भाजपा की सरकार ने स्कूल, आश्रम, छात्रावासों में प्रवेश और छात्रवृति की भी सुविधा जारी रखी थी, लेकिन मुख्यमंत्री बघेल ने तो सबसे वंचित रखा । श्री गागड़ा ने कहा कि आज बस्तर, सरगुजा से स्थानीय भर्ती को खत्म कर दिया गया है, साथ ही विभागीय पदोन्नति को को भी भूपेश सरकार ने अटकाकर रखा है। मेडिकल कॉलेजों में भर्ती में सैकड़ों बच्चों को प्रदेश कांग्रेस की भूपेश सरकार वंचित कर रही है। आदिवासी समाज और प्रदेश की जनता अब मुख्यमंत्री बघेल के झूठ-फरेब के ऐसे झाँसों में नहीं आने वाली और भविष्य में प्रदेश कांग्रेस की यह नाकारा सरकार सत्ता से बेदखल होने के बाद अपने कर्मों को गिनती हुई दिखेगी।

छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के नवनियुक्त पदाधिकारियों ने पदभार संभाला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष इदरीश गांधी, उपाध्यक्ष नजीर कुरैशी और सदस्यगण सर्वश्री नजीर अहमद सिद्दिकी, सत्तार अली, रिजवान खान, इस्माईल खान, गुलाबुद्दीन, एजाज खोखर, मुनव्वर अली, शब्बीर खान, अब्दुल शाहिद कुरैशी, बदरूद्दीन इराकी और श्रीमती हाजरून खान (बानो) ने आज अपना पद्भार ग्रहण किया। शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित वन मंत्री मोहम्मद अकबर, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत



श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, विधायक कुलदीप जुनेजा, अध्यक्ष खादी ग्रामोद्योग बोर्ड राजेन्द्र तिवारी, अध्यक्ष पाठ्यपुस्तक निगम शैलेष नितिन त्रिवेदी, अध्यक्ष हज कमेटी असलम खान, अध्यक्ष योग आयोग श्री ज्ञानेश शर्मा, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग महेन्द्र छाबड़ा एवं सदस्य अनिल जैन एवं हफीज खान, सभापति नगर निगम रायपुर प्रमोद दुबे, पूर्व अध्यक्ष वक्फ बोर्ड सलाम रिजवी सहित अन्य निगम मंडल के सदस्य उपस्थित थे। सभी ने नवनियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को बधाई देते हुए शुभकामनाएं दी।

नवनियुक्त अध्यक्ष इदरीश गांधी ने पद्भार ग्रहण समारोह में उपस्थित मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए सरकार की मंशा के अनुरूप राज्य में उर्दू भाषा को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि उर्दू अकादमी अपने लक्ष्य और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूरी संजीदगी से काम करेगी। छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग क्लासेस प्रारंभ करने के लिए भरपूर कोशिश करेगी। इस मौके पर उर्दू अकादमी के सचिव एम.आर. खान ने उर्दू अकादमी की गतिविधियों की जानकारी दी।

भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव: ब्रह्मानंद नेताम भाजपा प्रत्याशी घोषित

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जगदलपुर। भारतीय जनता पार्टी ने भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए ब्रह्मानंद नेताम को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नेताम वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले, वे भाजपा की युवा मोर्चा राष्ट्रीय कार्यसमिति और मजदूर महासंघ में भी अलग-अलग पदों पर रहे हैं। नेताम वर्ष दो हजार आठ में भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। 



इस बीच, जिला निर्वाचन अधिकारी प्रियंका शुक्ला ने बताया कि इस उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। उम्मीदवार सत्रह नवंबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच अट्ठारह नवंबर को होगी। वहीं, नाम वापसी की अंतिम तिथि इक्कीस नवंबर निर्धारित की गई है। इस उपचुनाव के लिए पांच दिसंबर को वोट डाले जाएंगे। मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा आठ दिसंबर को होगी

आदिवासी समाज के आरक्षण में कटौती के विरोध में चक्काजाम

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में आदिवासी समाज के आरक्षण में कटौती के विरोध में चक्काजाम किया। यह विरोध प्रदर्शन भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा किया गया। विभिन्न जिलों में पार्टी के आदिवासी नेताओं ने इस प्रदर्शन की अगुवाई की।



राजधानी रायपुर में लालपुर फ्लाई ओव्हर पर चक्काजाम कर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर आदिवासी समाज के नेता नंदकुमार साय ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से प्रदेश में आदिवासी समाज का आरक्षण कम हो गया है। उन्होंने कहा कि जब तक आदिवासियों के हित में निर्णय नहीं लिया जाएगा, यह लड़ाई जारी रहेगी।


आरक्षण प्रावधानों के अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ के अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दल जाएगा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में छत्तीसगढ़ राज्य से अधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का संयुक्त दल आरक्षण प्रावधानों के अध्ययन के लिए शीघ्र ही महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं कर्नाटक जाएगा। यह अध्ययन दल उक्त राज्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आरक्षण प्रावधानों के संबंध में सुसंगत एवं उपयुक्त जानकारी, विधिक स्थिति, पिछड़ेपन संबंधी, क्वांटिफिएबल डाटा या समकक्ष आयोग/प्रतिवेदन की जानकारी संबंधी राज्य के आरक्षण संबंधी न्यायालयीन प्रकरण एवं वस्तुस्थिति का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ शासन को रिपोर्ट सौंपेगा।



छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय द्वारा उक्त राज्यों में आरक्षण के प्रावधानों के अध्ययन के लिए 5-5 सदस्यीय अध्ययन दल के गठन का आदेश जारी किया गया है। जारी आदेश के तहत महाराष्ट्र राज्य में आरक्षण के प्रावधानों के अध्ययन के लिए आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग श्रीमती शम्मी आबिदी, अवर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग एस.के. सिंह, उपायुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग प्रज्ञान सेठ, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व सामाजिक कार्यकर्ता आर. वी. सिंह और सेवानिवृत्त आईपीएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता भारत सिंह जाएंगे।

इसी तरह जल संसाधन विभाग के सचिव पी. अनबलगन, अवर सचिव सामान्य प्रशासन विभाग श्रीमती अंशिका पाण्डेय, अपर संचालक आदिम जाति संजय गौर, सेवानिवृत्त आईएएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता बी.एल. ठाकुर एवं जी.एस. धनंजय का दल तमिलनाडु राज्य में अध्ययन के लिए जाएगा। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भीम सिंह, अवर सचिव सामान्य प्रशासन पुलक भट्टाचार्य, अपर संचालक आदिम जाति ए.आर. नवरंग, सेवानिवृत्त आईएएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता एच.एल. नायक तथा सेवानिवृत्त आईएफएस एवं सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम लकड़ा का संयुक्त दल कर्नाटक में अध्ययन के लिए जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा : शासकीय विभागों में रोस्टर के पालन के संबंध में जांच के लिए गठित होगा प्रकोष्ठ

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राष्ट्रीय गोंडवाना गोंड महासभा की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य शासन के विचार हेतु एक सामाजिक प्रस्ताव सौंपा गया है। इसमें अनुसूचित जनजाति समुदाय के हित संबंधी विभिन्न बिन्दुओं को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इनकी मांगों पर त्वरित पहल करते हुए कहा कि शासकीय विभागों में रोस्टर के पालन के संबंध में जांच के लिए प्रकोष्ठ गठित होगा। साथ ही सहकारिता विभाग में हर समुदाय के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने भी आश्वस्त किया। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव के अन्य बिन्दुओं पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार के लिए आश्वस्त किया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुलाकात के लिए राज्य भर से आदिवासी समाज के प्रमुख 01 नवम्बर को राजधानी रायपुर पहुंचे थे।



इस दौरान राष्ट्रीय गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोनऊराम नेताम द्वारा समाज की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव में सहकारिता विभाग में अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को अधिनियम के अनुसार प्रतिनिधित्व प्रदान करने और संविधान के अनुच्छेद 16 (4) के तहत प्रदत्त उपबंध अनुसार विभिन्न सेवाओं, पदोन्नति, शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के अवसर उपलब्ध कराना शामिल है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में रोस्टर प्रणाली को लागू करने एक समिति गठित करने और मंत्रालय में इसके निगरानी के लिए एक प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है।

इसके अलावा प्रस्ताव भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए घातक बताते हुए इसमें छत्तीसगढ़ शासन को विचार करने और छत्तीसगढ़ में अनुच्छेद 342 में उल्लेखित अनुसूचित जनजाति समुदाय को आदिवासी, ट्रायबल, इंडिजिनियस प्यूपुल्स समुदाय के रूप में मान्यता देने हेतु पहल शामिल है। राज्य में टीएसपी के तहत आबंटित 21 हजार करोड़ के लक्ष्य को मार्च 2023 तक पूरा करने आदिम जाति विभाग से विशेष अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है। खनिज उत्खनन, बांध एवं उद्योग आदि परियोजना से प्रभावित ग्रामवासियों को राहत, पुनर्वास एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने संबंधी बिन्दु शामिल है।

इस अवसर पर गोंड़ समाज, उरांव, भुईंया, कंवर, मुण्डा, पंडो, मंझवार, नगेसिया, नागवंशी आदि विभिन्न समाजों के प्रतिनिधिमंडल में सर्वश्री रामसाय, भानुप्रताप सिंह मरकाम, रघुनाथ, तुलसीराम, चतुर सिंह तारम, सुश्री तारा मंडावी, श्रीमती महावती कोमरे, शेर सिंह आचला, बाल सिंह, निलकंठ सिंह ठाकुर, पन्नालाल धु्रव, शिवप्रसाद, कौशल ठाकुर, पुनीत राम, मनोज भगत, रविन्द्र पैकरा, शरण सिंह, सोमार साय, सीताराम, बिहारी राम पैकरा, शिवराम पण्डो, बबलू कुमार, राजेश, मलकू राम, रविशंकर तथा रामचन्द्र मुण्डा आदि शामिल थे।

राज्यपाल का आभार प्रकट करने पहुंचा आदिवासी समाज, सहयोग के जताया आभार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने प्रदेश के बारह समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुण्डा के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है। पहले ही खबर दी जा चुकी है कि कल ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रदेश की बारह जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मंजूरी दी थी। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यपाल ने पिछले वर्ष 11 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन में 12 जातियों के संबंध में मात्रात्मक त्रुटि का मुद्दा प्रमुखता के साथ उठाया था। 




राज्यपाल अनुसुईया उइके ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हुई मुलाकातों में भी इस विषय पर उचित कार्यवाही का आग्रह किया था। राज्यपाल ने कहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से राज्य के 12 जाति समुदायों को भी अनुसूचित जनजाति से संबंधित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा और उनके अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा। इस बीच, आज आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल से मुलाकात कर बारह जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

एसटी, एससी अधिनियम-1989 के प्रावधान के तहत दर्ज प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करें: सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 की राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ST, SC वर्ग को विभिन्न प्रावधानों के तहत मिलने वाले लाभों और अधिनियम-1989 के अंतर्गत 2019, 2020 एवं 2021 में दर्ज प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की गई। साथ ही अधिनियम-1989 के अंतर्गत 2019, 2020 एवं 2021 में स्वीकृत राहत राशि की भी समीक्षा की गई।


उक्त बैठक में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू
, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम समेत संसदीय सचिव व मुख्य सचिव अमिताभ जैनगृह सचिव मनोज पिंगुआ, विभागीय सचिव डी. डी. सिंह तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी उपस्थित थीं। वहीं संस्कृति मंत्री अमरजीत सिंह भगत व पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा समेत अन्य संसदीय सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। 


अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम
1989 के प्रावधान अनुसार गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में सदस्यगण ऑनलाइन वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से भी शामिल हुए। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम-1989 के प्रावधान के तहत दर्ज पुलिस के पास लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण करने के निर्देश देते हुए कहा कि पुलिस अन्वेषण स्तर पर स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने में यदि विलंब होता है तो संबंधित ग्राम सभा से यह तस्दीक कर लिया जाये कि पीड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का है या नहीं। इसके लिए विधि विभाग,



गृह विभाग एवं आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग समन्वय कर समीक्षा कर लें। विशेष न्यायालयों में दर्ज प्रकरणों के त्वरित निराकरण किये जाने बाबत् विशेष लोक अभियोजकों के स्तर से यथोचित प्रयास करने संबंधी निर्देश दिये जाने हेतु विधि विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया। मुख्यमंत्री बघेल ने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जिला स्तरीय एवं उपखण्ड स्तरीय बैठकों का आयोजन नियत समयावधि में आवश्यक रूप से किये जाने हेतु जिला कलेक्टरों को एवं अनुविभागीय अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी किये जाने के लिए भी निर्देशित किया।


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