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डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़: 'वसुंधरा' परियोजना से सुशासन और पारदर्शी राजस्व सेवाओं का नया दौर

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विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सेवा के संकल्प' के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रही है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के माध्यम से प्रदेश भर के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।

सफलता का आधार: दंतेवाड़ा का क्रांतिकारी मॉडल

इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता की मजबूत नींव दंतेवाड़ा जिले के क्रांतिकारी मॉडल पर आधारित है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।

विस्तृत खाका: 12.89 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण

​दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।

वित्तीय ढांचा और समयबद्ध कार्यान्वयन

इस विशाल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

तकनीकी नवाचार: AI और ब्लॉकचेन से सुरक्षा

​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी।

त्वरित सेवाएं और सुशासन का नया युग

इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे आसानी से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

डिजिटल क्रांति की राह पर सारंगढ़-बिलाईगढ़

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विष्णु प्रसाद वर्मा,गुलाब डडसेना,    

सहायक संचालक

तकनीक से बदली खेती की तस्वीर, डिजिटल क्रॉप सर्वे में रचा इतिहास

रायपुर- छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ तकनीक के प्रभावी उपयोग और दूरदर्शी प्रशासनिक रणनीति के बल पर प्रदेश में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कृषि क्षेत्र को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में संचालित राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल क्रॉप सर्वे के क्रियान्वयन में जिले ने समूचे प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है। प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में 87 प्रतिशत कार्य पूर्णता के साथ सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने यह शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि 86 प्रतिशत के साथ खैरागढ़ दूसरे और 81 प्रतिशत के साथ कोरिया तीसरे स्थान पर है।

प्रदेश में 88.45 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे

मैदानी स्तर पर मुस्तैदी और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के बूते जिले में कुल 53 हजार 524 लक्षित प्लॉटों के सापेक्ष 47 हजार 350 प्लॉटों का सर्वे पूरा कर लिया गया है, जो 88.45 प्रतिशत की वास्तविक प्रगति को दर्शाता है। केवल सर्वे ही नहीं, बल्कि डेटा सत्यापन और अनुमोदन में भी तेजी लाते हुए 35 हजार 476 मामलों को अनुमोदित किया जा चुका है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सभी छह तहसीलों में सर्वे का काम एक होड़ की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसमें 93.27 प्रतिशत प्रगति के साथ सारसींवा तहसील सबसे आगे है। इसके ठीक पीछे भटगांव तहसील ने 93.15 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। जिले के सबसे बड़े राजस्व क्षेत्र सारंगढ़ ने भी 88.60 प्रतिशत सर्वे पूर्ण करने के साथ-साथ सर्वाधिक 84.36 प्रतिशत अनुमोदन दर्ज कराकर प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश की है। इसी तरह सारिया, बिलाईगढ़ और बरमकेला तहसीलों में भी 84 से 86 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।

डिजिटल ब्यौरा सटीक पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा

राजस्व और कृषि विभाग की पूरी टीम शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए मुस्तैद है। मैदानी अमले के साथ सतत समन्वय और नियमित समीक्षा के बल पर बचे हुए प्लॉटों का काम भी तेजी से निपटाया जा रहा है। फसलों का यह सटीक डिजिटल ब्योरा न केवल पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा, बल्कि आने वाले समय में किसानों को बीमा दावों से लेकर शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

सुशासन एवं स्वप्रगटीकरण की दिशा में अभिनव पहल का एक वर्ष पूर्ण, जानकारी सबकी, निगरानी सबकी

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वीबी - जीरामजी योजना के क्यूआर कोड को मिले 7 लाख से अधिक स्कैन, औसत प्रतिदिन 2 हजार से अधिक लोगों ने ली जानकारी

प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सूचना की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने की अभिनव पहल ने पूरा किया एक वर्ष

रायपुर- सुशासन, पारदर्शिता एवं स्वप्रगतिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रदेश में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई अभिनव पहल ‘क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली ने एक वर्ष पूर्ण कर लिया है। वर्तमान में वीबी जी राम जी, पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में पिछले वर्ष क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए थे। इस नवाचार के माध्यम से ग्रामीणों एवं आमजन को संबंधित ग्राम पंचायत में योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में कराए गए कार्यों, भुगतान तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही स्थान पर सहज, सरल एवं सुलभ रूप से उपलब्ध कराई गईं।

एक वर्ष में क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया

इस पहल को प्रदेशवासियों का उल्लेखनीय प्रतिसाद मिला है। पिछले एक वर्ष में इन क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया, यानी औसतन प्रतिदिन 2 हजार से अधिक बार ग्रामीणों एवं आमजन ने योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त की। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि तकनीक आधारित सूचना व्यवस्था को आमजन ने व्यापक रूप से अपनाया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को मिला नया आयाम

क्यूआर कोड के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों एवं उनसे संबंधित जानकारी आमजन की पहुंच में आने से पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिली है। ग्रामीण अब अपने क्षेत्र में योजना के तहत हुए कार्यों, उनके भुगतान एवं अन्य संबंधित विवरणों की जानकारी स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। इससे सूचना के लिए किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और आमजन को ‘सूचना मांगने’ के बजाय ‘सूचना देखने’ की सुविधा मिली है। इस नवाचार ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संभावित अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने से सामाजिक निगरानी और जनभागीदारी को बढ़ावा मिला है।

आरटीआई एवं शिकायतों में भी कमी

क्यूआर कोड के माध्यम से योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी ग्राम पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध होने का सकारात्मक प्रभाव सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों तथा योजना संबंधी शिकायतों पर भी देखने को मिला है। जानकारी की सहज उपलब्धता से ऐसे आवेदनों एवं शिकायतों में कमी आई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनी है।

मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित हुआ नवाचार

क्यूआर कोड आधारित इस स्वप्रगतिकरण नवाचार की प्रभावशीलता और उपयोगिता को देखते हुए इसे मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि तकनीक के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सुशासन को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने की यह पहल उल्लेखनीय और अनुकरणीय है।

‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की दिशा में प्रभावी कदम

बीबी- जीरामजी योजना के क्यूआर कोड ने ग्राम पंचायतों में सूचना को सीमित दायरे से निकालकर सीधे आमजन तक पहुंचाया है। पिछले एक वर्ष में 7 लाख से अधिक स्कैन इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है। यह पहल न केवल पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को मजबूत कर रही है, बल्कि स्वप्रगतिकरण एवं सुशासन की अवधारणा को भी धरातल पर साकार कर रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से आमजन स्वयं अपने क्षेत्र में योजना के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और विकास कार्यों की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं।

एक वर्ष की अवधि में क्यूआर कोड आधारित इस नवाचार ने यह सिद्ध किया है कि तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी का समन्वय सुशासन को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बना सकता है। प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में लागू यह पहल आने वाले समय में डिजिटल पारदर्शिता एवं जनसशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

डिजिटल छत्तीसगढ़- अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

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नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश,पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

रायपुर- राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation)  की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ  लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न  पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत  तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन  जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।

राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट  (E-Court)  सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।

 सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील

नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।

मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी। 

ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम

राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।

राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

शिलांग में 13–14 जुलाई को 'नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार' पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), मेघालय सरकार के सहयोग से 13–14 जुलाई 2026 को शिलांग, मेघालय में "नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन देशभर के नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तथा सुशासन के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को सार्वजनिक प्रशासन एवं डिजिटल शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा।

उद्घाटन सत्र को भारत सरकार में डीएआरपीजी, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडोनर) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा तथा मेघालय सरकार के मुख्य सचिव डॉ. शाकिल पी. अहमद भी संबोधित करेंगे।

सम्मेलन में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, नीति-निर्माता, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा लोक प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता परियोजनाओं, मेघालय सरकार की उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों तथा डीएआरपीजी समर्थित राज्य सहयोगात्मक पहलों (स्टेट कोलैबोरेटिव इनिशिएटिव–एससीआई) पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इनमें जिला समग्र विकास, डिजिटल शासन, साइबर सुरक्षा, लोक सेवा वितरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, बैंकिंग, शहरी प्रशासन, ग्रामीण विकास तथा प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन जैसे विविध विषय शामिल होंगे।

सम्मेलन की शुरुआत मेघालय सरकार की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर केंद्रित विशेष सत्र से होगी, जिसमें राज्य की नवाचारी प्रशासनिक पहलों एवं नागरिक-केंद्रित सुधारों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्होंने सेवा वितरण और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत किया है।

इसके बाद प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024) पर आधारित सत्र आयोजित होगा, जिसमें जिला स्तर की उत्कृष्ट नवाचार परियोजनाओं एवं सुशासन मॉडलों को प्रस्तुत किया जाएगा। इन पहलों ने समग्र विकास, शिक्षा, ग्रामीण आजीविका तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

तीसरे सत्र में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित परियोजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों एवं सार्वजनिक संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक डिजिटल शासन पहलों का प्रदर्शन होगा। इन परियोजनाओं में शहरी प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल बैंकिंग, तीर्थ प्रबंधन, पंचायती राज, उपभोक्ता संरक्षण तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग को प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्हें देशभर में अपनाया जा सकता है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास पर आयोजित विशेष सत्र में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) एवं उत्तर-पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा संचालित परिवर्तनकारी पहलों पर चर्चा होगी। इसमें बांस एवं अगरवुड मूल्य श्रृंखला, पर्यटन, क्षेत्रीय अवसंरचना, परियोजना निगरानी तथा सतत विकास के लिए अंतरराज्यीय सहयोग से जुड़े नवाचारों को प्रस्तुत किया जाएगा।

सम्मेलन में डीएआरपीजी/राज्य सहयोगात्मक पहल (एससीआई) के अंतर्गत उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें मेघालय, मिजोरम एवं नागालैंड की अभिनव प्रशासनिक परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इन पहलों में प्रौद्योगिकी आधारित लोक सेवा वितरण, परियोजना निगरानी प्रणाली, डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म, उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र तथा सार्वजनिक सुरक्षा समाधान शामिल होंगे, जिन्हें डीएआरपीजी के सहयोग से विकसित किया गया है।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य अभिनव सुशासन मॉडल साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। सम्मेलन का लक्ष्य शासन में डिजिटल परिवर्तन को गति देना, नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ करना, सफल प्रशासनिक मॉडलों के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों एवं श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से पारदर्शी, कुशल एवं उत्तरदायी लोक प्रशासन का निर्माण करना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की संपत्तियों की बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन

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घर बैठे करें आवेदन, बुकिंग और मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान

कमल विहार एवं रावभाटा सहित लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां पोर्टल पर उपलब्ध

रायपुर- रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे।

प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके।

ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी।

रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

​'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार': छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’

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धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी

रायपुर- आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।

इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।

चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक

अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।

पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा

लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। ​नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।

​डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'

सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।

लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर

धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

विशेष लेख-सेवा सेतु- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति

एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं।

इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है

इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया।

प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है।

व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान

तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं।

पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल

“सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना 2027 का शंखनाद

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51 हजार से अधिक कर्मचारी घर-घर पहुँचकर जुटा रहे जानकारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य में भारत की जनगणना 2027श् के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। 01 मई से शुरू हुआ यह महाभियान 30 मई 2026 तक चलेगा। इस कार्य के लिए राज्य भर में 51 हजार 300 प्रगणक और 9 हजार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्रित कर रहे हैं।

पहली बार डिजिटल मोड में जनगणना

इस बार की जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रश्नों की जानकारी दर्ज करेंगे।

प्रशासन सख्त- अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई

प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इससे इनकार करना एक दंडनीय अपराध है।

उपलब्धियां और उत्साह का वातावरण 

दुर्गम क्षेत्रों में मिसाल- बस्तर जिले के तोकापाल तहसील अंतर्गत ग्राम गाटम के प्रगणक ने विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन कार्य पूर्ण कर राज्य स्तर पर उत्साह का संचार किया। अभियान के पहले दिन ही जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण किया और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। स्व-गणना राज्य में डिजिटल साक्षरता का प्रभाव दिखा, जहाँ 16 से 30 अप्रैल के बीच 1 लाख 49 हजार 862 परिवारों ने वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी गणना की।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटी

जनगणना निदेशालय ने आम नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। यह जानकारी किसी भी टैक्स, पुलिस जांच या कोर्ट केस में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं की जा सकती। यहाँ तक कि सूचना का अधिकार के माध्यम से भी व्यक्तिगत डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इन आंकड़ों का उपयोग केवल राष्ट्र निर्माण और जन कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण हेतु किया जाएगा।

नागरिकों से अपील

प्रशासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। आपका यह सहयोग केवल जानकारी मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आपका अमूल्य योगदान है।

आम जनता को शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल करें: मुख्य सचिव विकासशील

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सूचना प्रौद्योगिकी पर सूचना विज्ञान अधिकारियों की कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन की सभी योजनाओं का अधिकतम फायदा लोगों को शीघ्र मिले इसके लिए सूचना प्रौद्योगिक की सभी जरूरी नई तकनीकियों का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना और संचार संस्थानों को अपने कार्यक्रम मोबाइल ऐप, वेबसाइट आदि नागरिक केन्द्रित और आसानी से उपयोग करने लायक बनायें। 

मुख्य सचिव ने कहा कि एनआईसी के अधिकारियों को नई आईटी से हमेशा अपडेट रहना चाहिए। नई सूचना तकनीक से शासन की योजनाओं से हितग्राहियों को शीघ्रता से लाभान्वित किया जाना चाहिए। सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र एवं जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थान में उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों की उपलब्धता तथा जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

कार्यालय के शुभारंभ सेशन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र मुख्यालय नई दिल्ली के डीडीजी दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के जरिए हम नागरिकों को सेवायें प्रदान कर सकते है। कार्यशाला को विविध सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जानकरी दी। कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक तथा कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने एआई के उपयोग के संबंध में व्यापक जानकारी दी। एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साईबर सुरक्षा, संयुक्त संचालक अभिजीत कौशिक,  उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी सम्बोधित किया। कार्यशाला में जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों और राज्य स्तरीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों के बीच सूचना प्रौद्योगिकियों का उपयोग नागरिक सेवाओं के लिए करने एवं शासन की फ्लैगशिप स्कीमों का फायदा हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और एनआईसी के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।


यूआईडीएआई और मैपमायइंडिया के बीच समझौता, Mappls ऐप पर दिखेंगे अधिकृत आधार केंद्र

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नई दिल्ली- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए मैपमायइंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत आने वाले महीनों में Mappls ऐप पर देशभर के अधिकृत आधार केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से लोगों को अधिकृत आधार केंद्रों की पहचान करने और वहां तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, उपयोगकर्ता यह भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कौन-सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे वयस्क नामांकन, बच्चों का नामांकन या केवल पता और मोबाइल अपडेट।

यह सहयोग नागरिकों की सुविधा बढ़ाने, गलत जानकारी को रोकने और आधार सेवा केंद्रों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 1 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित हुआ।

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करेगी और देशभर में सत्यापित आधार केंद्रों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे लोगों को सही और अधिकृत केंद्र आसानी से मिल सकें।

इस सेवा के लागू होने के बाद, जब उपयोगकर्ता Mappls ऐप पर आधार केंद्र खोजेंगे, तो उन्हें सीधे अधिकृत केंद्रों की जानकारी मिलेगी। मैपमायइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर यूआईडीएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को एकीकृत कर सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।

मैपमायइंडिया के सह-संस्थापक और सीएमडी राकेश वर्मा ने कहा कि यह यूआईडीएआई के साथ जुड़कर लोगों को आधार सेवाओं तक आसान पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती: गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी ने ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने के लिए समझौता किया

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘संपन्न’ (SAMPANN) डिजिटल पेंशन एवं वित्तीय प्रबंधन प्लेटफॉर्म को अपनाने के लिए गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी (CPA) के साथ समझौता किया है।

यह समझौता दूरसंचार विभाग के अंतर्गत नियंत्रक जनरल संचार लेखा (CGCA) कार्यालय की ओर से उप महानियंत्रक जी. संदीप कुमार गौड़, कोचीन पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अध्यक्ष कासिविश्वनाथ और गोवा सरकार की ओर से रेजिडेंट कमिश्नर शकील उल रहमान राथर द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

‘संपन्न’ (System for Accounting and Management of Pension) एक क्लाउड-आधारित, एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन प्रबंधन प्रणाली है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्लेटफॉर्म पेंशन की प्रक्रिया को शुरू से लेकर भुगतान और लेखांकन तक पूरी तरह डिजिटल बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन स्वीकृति, अधिकृतकरण, लेखांकन और भुगतान की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल मंच पर सरल और पारदर्शी बनाया गया है। गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी द्वारा इसे अपनाने से आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

संचार मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर महीने औसतन ₹1,650 करोड़ की पेंशन वितरित की जा रही है और अब तक कुल ₹72,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन की दिशा बदली है, जहां अब सेवाएं सीधे नागरिकों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के माध्यम से नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने की इस अवधारणा को अन्य संस्थानों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने डाक विभाग और दूरसंचार विभाग को भी ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

इस मौके पर संचार मंत्री ने ‘संपन्न’ कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को दर्शाया गया है।

कार्यक्रम के अंत में सीजीसीए वंदना गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि पेंशनर्स किसी एक विभाग से नहीं जुड़े होते, बल्कि उन्हें सर्वोत्तम सेवाएं मिलनी चाहिए, इसी सोच के साथ ‘संपन्न’ को सभी संस्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ

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डिजिटल हुआ जशपुर: घर बैठे क्यूआर कोड से भरें टैक्स

रायपुर- छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में अब टैक्स भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को एचडीएफसी बैंक की ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान कर सकेंगे।

इस नई व्यवस्था के तहत एचडीएफसी बैंक ने नगर पालिका जशपुर के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किया है। प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड जनरेट किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जो राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और कुशल बनाती है। इस प्रणाली के तहत वर्तमान में लगभग 4600 हाउसहोल्ड को शामिल किया गया है, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां शामिल हैं।

इस पहल से जहां नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

सी-डॉट और दिल्ली पुलिस के बीच समझौता, तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था सी-डॉट (C-DOT) ने दिल्ली पुलिस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में तकनीक आधारित, स्वदेशी और सुरक्षित पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करना है।

इस समझौते के तहत सी-डॉट दिल्ली पुलिस को आधुनिक और उन्नत तकनीकी समाधान उपलब्ध कराएगा, जिससे पुलिस की संचार व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ा सुधार होगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूती देता है।

समझौते के अंतर्गत नौ प्रमुख तकनीकों को लागू किया जाएगा। इनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए संदिग्धों और लापता व्यक्तियों की पहचान आसान होगी। SAMVAD प्लेटफॉर्म सुरक्षित मैसेजिंग और कॉलिंग की सुविधा देगा, जबकि SAMVAD Prime वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष सुरक्षित संचार प्रणाली होगी।
इसके अलावा, C-DOT Meet के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, MCX प्लेटफॉर्म से आपात स्थितियों में त्वरित संचार, और इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम से प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

साथ ही, सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए जनता को आपातकालीन सूचनाएं तुरंत भेजी जा सकेंगी। साइबर सुरक्षा के लिए Trinetra ESOC और Trinetra 360 जैसे AI आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे। वहीं, क्वांटम आधारित सुरक्षा समाधान पुलिस संचार को भविष्य के खतरों से सुरक्षित बनाएंगे।

इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय और दिल्ली पुलिस आयुक्त श्री सतीश गोलछा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने इस साझेदारी को देश में तकनीक आधारित पुलिसिंग का एक मॉडल बताया।

यह समझौता दिल्ली को एक सुरक्षित, स्मार्ट और तकनीकी रूप से सक्षम शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिजिटल ऋण पुस्तिका राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम-राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डिजिटल किसान किताब और ऋण पुस्तिका का शुभारंभ

पारदर्शी और तकनीक-सक्षम राजस्व व्यवस्था की ओर ऐतिहासिक कदम

रायपुर- छत्तीसगढ़ में आज डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1से 4 पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पहल राज्य के किसानों और भूमिधारकों को आधुनिक, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर संचालक भू अभिलेख विनीत नन्दनवार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे।

डिजिटल प्रणाली में आवश्यक विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे, जिससे जानकारी संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। साथ ही, संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने  कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं। अब ऋण पुस्तिका से संबंधित जानकारी ऑनलाइन और वास्तविक समय में उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी।

मंत्री ने बताया कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी तथा शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, NIC तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें।

डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।

वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूएमईईडी पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल लॉन्च

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नई दिल्ली- वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनोन्मुखी और जवाबदेह बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) केंद्रीय पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल — सर्वे मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल — को 30 जनवरी 2026 को लॉन्च किया।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

सर्वे मॉड्यूल वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित सूचनाओं के संग्रहण, प्रबंधन और अद्यतन के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है, जिससे पोर्टल पर सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध कराया जा सके।

वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल को वक्फ संपत्तियों से संबंधित लीज प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मॉड्यूल लीज से जुड़ी प्रमुख जानकारियों जैसे लीज अवधि, लीज राशि और अन्य संबंधित विवरणों का सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रिकॉर्ड रखने और निगरानी में सहायता करता है, जिससे जवाबदेही और निगरानी तंत्र और सुदृढ़ होगा।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा डिजिटल गवर्नेंस उपकरणों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से इन मॉड्यूल्स के व्यापक कार्यान्वयन और पात्र लाभार्थियों के बीच इनके प्रति जागरूकता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

UMEED केंद्रीय पोर्टल, जिसका उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 6 जून 2025 को किया गया था, वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों की रीयल-टाइम अपलोडिंग, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।

यह पोर्टल देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए एक व्यापक परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखता है।

पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग सहित डिजिटल इन्वेंट्री, ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी लीज एवं उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस टूल्स के साथ एकीकरण, तथा सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स तक सार्वजनिक पहुंच शामिल है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय देशभर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है।

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker से एकीकरण

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प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr CCA), दिल्ली के कार्यालय ने दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी पेंशनरों को सूचित किया है कि SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण कर दिया गया है। यह पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप है।

इस एकीकरण के माध्यम से पेंशनर अब SAMPANN से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज—जैसे पेंशन भुगतान आदेश (e-PPO), ग्रेच्युटी स्वीकृति आदेश, कम्यूटेशन स्वीकृति आदेश और फॉर्म-16—को सीधे अपने DigiLocker खाते से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा मोबाइल या डेस्कटॉप के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी उपलब्ध है, जिससे सुरक्षित, पेपरलेस और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित होती हैं। इससे बैंकिंग, चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं में भी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर आशीष जोशी, प्रधान नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली ने कहा कि यह पहल भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और सरकार के पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस के विजन को साकार करता है।

पेंशनर इस सेवा का लाभ उठाने के लिए https://digilocker.gov.in पर आधार के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं, अपना PPO नंबर लिंक कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं। सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन और SAMPANN पोर्टल उपलब्ध हैं। DigiLocker और SAMPANN सेवाओं से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) नीचे दिए गए हैं।

SAMPANN के बारे में

SAMPANN (System for Accounting and Management of Pension) दूरसंचार विभाग की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसे नियंत्रक जनरल संचार लेखा कार्यालय द्वारा विकसित, स्वामित्व और संचालित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्रणाली पेंशन प्रशासन को प्रणाली-केंद्रित से पेंशनर-केंद्रित बनाती है।

SAMPANN ने पेंशन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ कर दिया है—मामलों की शुरुआत से लेकर e-PPO जारी करने, भुगतान, लेखा, ऑडिट, शिकायत निवारण तक। अब पेंशन सीधे बैंक खातों में जमा होती है। पेंशनर घर बैठे भुगतान की स्थिति देख सकते हैं, जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, विवरण अपडेट कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही हैं।

FAQ: DigiLocker के माध्यम से SAMPANN सेवाएं

1. DigiLocker क्या है?

DigiLocker भारत सरकार का सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक अपने महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं और साझा कर सकते हैं। यह डिजिटल वॉलेट की तरह कार्य करता है और कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करता है।

2. DigiLocker तक कैसे पहुंचें?

  • वेब पोर्टल: https://digilocker.gov.in

  • मोबाइल ऐप: Google Play Store (Android) या Apple Store (iOS) से DigiLocker ऐप डाउनलोड करें।

3. पंजीकरण और लॉग-इन कैसे करें?

  • मोबाइल नंबर/आधार से रजिस्ट्रेशन करें

  • OTP सत्यापन के बाद MPIN सेट करें

  • MPIN या OTP से लॉग-इन करें

4. DigiLocker पर सेवाएं कैसे खोजें?

लॉग-इन के बाद “Search Documents” विकल्प का उपयोग करें।
SAMPANN से जुड़ी सेवाओं को SAMPANN, DoT, Pension, Gratuity, Commutation जैसे कीवर्ड से खोजा जा सकता है।

5. DigiLocker पर उपलब्ध SAMPANN सेवाएं:

  • e-PPO

  • ग्रेच्युटी भुगतान आदेश

  • कम्यूटेशन भुगतान आदेश

  • फॉर्म-16

पेंशनर संबंधित सेवा में अपना PPO नंबर दर्ज कर “Get Document” पर क्लिक करके दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं।

यह पहल पेंशनरों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित, अब तक कोई ब्रीच नहीं: लोकसभा में सरकार का स्पष्ट बयान

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आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर चुका है। देश में लगभग 134 करोड़ जीवित आधार धारक हैं और अब तक 16,000 करोड़ से अधिक आधार प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार धारकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक UIDAI के डेटाबेस से किसी भी प्रकार का डेटा ब्रीच नहीं हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि UIDAI ने डिफेंस-इन-डेप्थ अवधारणा पर आधारित मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। आधार डेटा के प्रसारण और भंडारण के दौरान उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

UIDAI की सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को STQC द्वारा ISO 27001:2022 और प्राइवेसी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के लिए ISO/IEC 27701:2019 का प्रमाणन प्राप्त है। इसके अलावा, UIDAI को संरक्षित प्रणाली घोषित किया गया है, जिससे राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) द्वारा लगातार साइबर सुरक्षा परामर्श दिया जाता है।

आधार पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी के लिए स्वतंत्र ऑडिट एजेंसी के माध्यम से गवर्नेंस, रिस्क और कंप्लायंस फ्रेमवर्क लागू किया गया है। साथ ही, UIDAI अपने सभी अनुप्रयोगों का नियमित रूप से साइबर सुरक्षा ऑडिट करता है, जिसमें स्टैटिक और डायनामिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग शामिल है।

सरकार ने दोहराया कि आधार प्रणाली न केवल तकनीकी रूप से सशक्त है, बल्कि नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, जिससे डिजिटल इंडिया के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सही पेंशन सही पेंशनधारी को सही समय पर: SPARSH डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म

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परिचय:

सिस्टम फॉर पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन - रक्षा (SPARSH), एक फ्लैगशिप डिजिटल इंडिया पहल, देश का पहला एंड-टू-एंड डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म बन गया है। इसे डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट (DAD) द्वारा PCDA (Pensions), प्रयागराज के माध्यम से संचालित किया जाता है। नवंबर 2025 तक SPARSH ने भारत और नेपाल में 31.69 लाख रक्षा पेंशनधारियों को ऑनबोर्ड किया है। यह पहले 45,000 से अधिक एजेंसियों द्वारा संचालित विखंडित प्रणाली की जगह एक संगठित, पारदर्शी और जवाबदेह डिजिटल ढांचे के रूप में कार्य करता है।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  1. 94.3% लेगेसी विसंगति मामलों का समाधान:

    • पिछले सिस्टम से माइग्रेट किए गए 6.43 लाख विसंगति मामलों में से 6.07 लाख को पेंशनधारियों के हक को प्रभावित किए बिना सामान्यीकृत किया गया।

  2. वरिष्ठ और गैर-तकनीकी पेंशनधारियों के लिए व्यापक आउटरीच:

    • देशभर में 284 SPARSH आउटरीच प्रोग्राम और 194 रक्षा पेंशन समाधान आयोजन आयोजित किए गए।

    • इन कार्यक्रमों में 8,000 से अधिक शिकायतों का तत्काल समाधान किया गया।

  3. पारदर्शिता और शिकायत निवारण में सुधार:

    • पेंशनधारी अब ऑनलाइन पूरी पेंशन जानकारी देख सकते हैं और आसानी से सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    • औसत शिकायत निवारण समय अप्रैल 2025 में 56 दिन से घटकर नवंबर 2025 में 17 दिन हो गया।

    • DAD ने 73% संतुष्टि स्कोर प्राप्त किया, जो सभी मंत्रालयों/विभागों में 5वें स्थान पर है।

  4. DLC 4.0 अभियान:

    • 1–30 नवंबर 2025 के दौरान, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) 4.0 अभियान के तहत DAD ने 202 कार्यालय, 4.63 लाख कॉमन सर्विस सेंटर्स, 15 बैंक और 27 नोडल अधिकारियों के माध्यम से अभियान चलाया।

    • 30 नवंबर 2025 तक 20.94 लाख DLCs जारी किए गए - जो सभी विभागों में सबसे अधिक हैं।

  5. भुगतान और OROP-III:

    • FY 2024–25 में रक्षा पेंशन बजट ₹1,57,681 करोड़ SPARSH के माध्यम से रियल-टाइम भुगतान किया गया।

    • OROP-III, जुलाई 2024 में लागू, ने 20.17 लाख लाभार्थियों को सिर्फ 15 दिनों में ₹1,224.76 करोड़ का त्वरित वितरण सुनिश्चित किया।

निष्कर्ष:

SPARSH भारत की सबसे बड़ी एकीकृत पेंशन प्रणाली और रक्षा कर्मियों के लिए एकमात्र पूर्णत: डिजिटल पेंशन समाधान है। यह सरकार की पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान, देखभाल और समय पर समर्थन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

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मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल

भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त 

छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान

रायपुर- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।


विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

सोनम त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं —  सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों।त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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