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शिलांग में 13–14 जुलाई को 'नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार' पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), मेघालय सरकार के सहयोग से 13–14 जुलाई 2026 को शिलांग, मेघालय में "नेक्स्टजेन प्रशासनिक एवं ई-गवर्नेंस सुधार" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन देशभर के नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तथा सुशासन के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को सार्वजनिक प्रशासन एवं डिजिटल शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा।

उद्घाटन सत्र को भारत सरकार में डीएआरपीजी, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडोनर) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा तथा मेघालय सरकार के मुख्य सचिव डॉ. शाकिल पी. अहमद भी संबोधित करेंगे।

सम्मेलन में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, नीति-निर्माता, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि तथा लोक प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता परियोजनाओं, मेघालय सरकार की उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों तथा डीएआरपीजी समर्थित राज्य सहयोगात्मक पहलों (स्टेट कोलैबोरेटिव इनिशिएटिव–एससीआई) पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इनमें जिला समग्र विकास, डिजिटल शासन, साइबर सुरक्षा, लोक सेवा वितरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, बैंकिंग, शहरी प्रशासन, ग्रामीण विकास तथा प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन जैसे विविध विषय शामिल होंगे।

सम्मेलन की शुरुआत मेघालय सरकार की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर केंद्रित विशेष सत्र से होगी, जिसमें राज्य की नवाचारी प्रशासनिक पहलों एवं नागरिक-केंद्रित सुधारों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्होंने सेवा वितरण और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत किया है।

इसके बाद प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहल (2023 एवं 2024) पर आधारित सत्र आयोजित होगा, जिसमें जिला स्तर की उत्कृष्ट नवाचार परियोजनाओं एवं सुशासन मॉडलों को प्रस्तुत किया जाएगा। इन पहलों ने समग्र विकास, शिक्षा, ग्रामीण आजीविका तथा आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं।

तीसरे सत्र में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 से सम्मानित परियोजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों एवं सार्वजनिक संस्थानों द्वारा विकसित अत्याधुनिक डिजिटल शासन पहलों का प्रदर्शन होगा। इन परियोजनाओं में शहरी प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल बैंकिंग, तीर्थ प्रबंधन, पंचायती राज, उपभोक्ता संरक्षण तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग को प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्हें देशभर में अपनाया जा सकता है।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास पर आयोजित विशेष सत्र में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) एवं उत्तर-पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा संचालित परिवर्तनकारी पहलों पर चर्चा होगी। इसमें बांस एवं अगरवुड मूल्य श्रृंखला, पर्यटन, क्षेत्रीय अवसंरचना, परियोजना निगरानी तथा सतत विकास के लिए अंतरराज्यीय सहयोग से जुड़े नवाचारों को प्रस्तुत किया जाएगा।

सम्मेलन में डीएआरपीजी/राज्य सहयोगात्मक पहल (एससीआई) के अंतर्गत उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर भी विशेष सत्र आयोजित होगा। इसमें मेघालय, मिजोरम एवं नागालैंड की अभिनव प्रशासनिक परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इन पहलों में प्रौद्योगिकी आधारित लोक सेवा वितरण, परियोजना निगरानी प्रणाली, डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म, उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र तथा सार्वजनिक सुरक्षा समाधान शामिल होंगे, जिन्हें डीएआरपीजी के सहयोग से विकसित किया गया है।

इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य अभिनव सुशासन मॉडल साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। सम्मेलन का लक्ष्य शासन में डिजिटल परिवर्तन को गति देना, नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण को सुदृढ़ करना, सफल प्रशासनिक मॉडलों के व्यापक प्रसार को बढ़ावा देना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों एवं श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों पर ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से पारदर्शी, कुशल एवं उत्तरदायी लोक प्रशासन का निर्माण करना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की संपत्तियों की बुकिंग अब पूरी तरह ऑनलाइन

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घर बैठे करें आवेदन, बुकिंग और मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान

कमल विहार एवं रावभाटा सहित लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां पोर्टल पर उपलब्ध

रायपुर- रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे।

प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके।

ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी।

रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

​'जनता के द्वार, डिजिटल सरकार': छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’

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धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी

रायपुर- आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।

इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।

चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक

अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।

पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।

घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा

लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। ​नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।

​डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'

सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।

लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर

धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

विशेष लेख-सेवा सेतु- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।

डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति

एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं।

इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है

इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया।

प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है।

व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान

तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं।

पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल

“सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना 2027 का शंखनाद

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51 हजार से अधिक कर्मचारी घर-घर पहुँचकर जुटा रहे जानकारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य में भारत की जनगणना 2027श् के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। 01 मई से शुरू हुआ यह महाभियान 30 मई 2026 तक चलेगा। इस कार्य के लिए राज्य भर में 51 हजार 300 प्रगणक और 9 हजार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो घर-घर जाकर डेटा एकत्रित कर रहे हैं।

पहली बार डिजिटल मोड में जनगणना

इस बार की जनगणना ऐतिहासिक है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जा रही है। प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रश्नों की जानकारी दर्ज करेंगे।

प्रशासन सख्त- अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई

प्रशासन ने जनगणना कार्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नगर निगम में ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 44 कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ सिविल आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इससे इनकार करना एक दंडनीय अपराध है।

उपलब्धियां और उत्साह का वातावरण 

दुर्गम क्षेत्रों में मिसाल- बस्तर जिले के तोकापाल तहसील अंतर्गत ग्राम गाटम के प्रगणक ने विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन कार्य पूर्ण कर राज्य स्तर पर उत्साह का संचार किया। अभियान के पहले दिन ही जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों ने फील्ड में जाकर कार्यों का निरीक्षण किया और कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। स्व-गणना राज्य में डिजिटल साक्षरता का प्रभाव दिखा, जहाँ 16 से 30 अप्रैल के बीच 1 लाख 49 हजार 862 परिवारों ने वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी गणना की।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की गारंटी

जनगणना निदेशालय ने आम नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। यह जानकारी किसी भी टैक्स, पुलिस जांच या कोर्ट केस में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं की जा सकती। यहाँ तक कि सूचना का अधिकार के माध्यम से भी व्यक्तिगत डेटा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इन आंकड़ों का उपयोग केवल राष्ट्र निर्माण और जन कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण हेतु किया जाएगा।

नागरिकों से अपील

प्रशासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जब भी प्रगणक उनके घर आएं, उन्हें सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। आपका यह सहयोग केवल जानकारी मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आपका अमूल्य योगदान है।

आम जनता को शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम इस्तेमाल करें: मुख्य सचिव विकासशील

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सूचना प्रौद्योगिकी पर सूचना विज्ञान अधिकारियों की कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में उभरती नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन की सभी योजनाओं का अधिकतम फायदा लोगों को शीघ्र मिले इसके लिए सूचना प्रौद्योगिक की सभी जरूरी नई तकनीकियों का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना और संचार संस्थानों को अपने कार्यक्रम मोबाइल ऐप, वेबसाइट आदि नागरिक केन्द्रित और आसानी से उपयोग करने लायक बनायें। 

मुख्य सचिव ने कहा कि एनआईसी के अधिकारियों को नई आईटी से हमेशा अपडेट रहना चाहिए। नई सूचना तकनीक से शासन की योजनाओं से हितग्राहियों को शीघ्रता से लाभान्वित किया जाना चाहिए। सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद ने राज्य स्तरीय सूचना केन्द्र एवं जिला सूचना विज्ञान केन्द्रों के अधिकारियों से उनके संस्थान में उपलब्ध संसाधनों एवं उपकरणों की उपलब्धता तथा जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

कार्यालय के शुभारंभ सेशन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र मुख्यालय नई दिल्ली के डीडीजी दयानंद साहा ने कहा कि विभिन्न नवीन सूचना प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं के जरिए हम नागरिकों को सेवायें प्रदान कर सकते है। कार्यशाला को विविध सूचना प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को जानकरी दी। कार्यशाला में ट्रिपल आईटी के संचालक तथा कुलपति प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने एआई के उपयोग के संबंध में व्यापक जानकारी दी। एनआईसी छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्रीकांत पाण्डे ने साईबर सुरक्षा, संयुक्त संचालक अभिजीत कौशिक,  उपेन्द्र सिंह सहित अन्य आईटी विशेषज्ञों ने भी सम्बोधित किया। कार्यशाला में जिलों से आए जिला सूचना विज्ञान अधिकारियों और राज्य स्तरीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों के बीच सूचना प्रौद्योगिकियों का उपयोग नागरिक सेवाओं के लिए करने एवं शासन की फ्लैगशिप स्कीमों का फायदा हितग्राहियों तक शीघ्र पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के विभिन्न जिलों में कार्यरत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और एनआईसी के राज्य स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।


यूआईडीएआई और मैपमायइंडिया के बीच समझौता, Mappls ऐप पर दिखेंगे अधिकृत आधार केंद्र

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नई दिल्ली- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के लिए मैपमायइंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते के तहत आने वाले महीनों में Mappls ऐप पर देशभर के अधिकृत आधार केंद्रों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस पहल से लोगों को अधिकृत आधार केंद्रों की पहचान करने और वहां तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही, उपयोगकर्ता यह भी देख सकेंगे कि किस केंद्र पर कौन-सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जैसे वयस्क नामांकन, बच्चों का नामांकन या केवल पता और मोबाइल अपडेट।

यह सहयोग नागरिकों की सुविधा बढ़ाने, गलत जानकारी को रोकने और आधार सेवा केंद्रों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह समझौता 1 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित हुआ।

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करेगी और देशभर में सत्यापित आधार केंद्रों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे लोगों को सही और अधिकृत केंद्र आसानी से मिल सकें।

इस सेवा के लागू होने के बाद, जब उपयोगकर्ता Mappls ऐप पर आधार केंद्र खोजेंगे, तो उन्हें सीधे अधिकृत केंद्रों की जानकारी मिलेगी। मैपमायइंडिया इस प्लेटफॉर्म पर यूआईडीएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को एकीकृत कर सटीक डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।

मैपमायइंडिया के सह-संस्थापक और सीएमडी राकेश वर्मा ने कहा कि यह यूआईडीएआई के साथ जुड़कर लोगों को आधार सेवाओं तक आसान पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती: गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी ने ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने के लिए समझौता किया

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नई दिल्ली- भारत सरकार ने तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘संपन्न’ (SAMPANN) डिजिटल पेंशन एवं वित्तीय प्रबंधन प्लेटफॉर्म को अपनाने के लिए गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी (CPA) के साथ समझौता किया है।

यह समझौता दूरसंचार विभाग के अंतर्गत नियंत्रक जनरल संचार लेखा (CGCA) कार्यालय की ओर से उप महानियंत्रक जी. संदीप कुमार गौड़, कोचीन पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अध्यक्ष कासिविश्वनाथ और गोवा सरकार की ओर से रेजिडेंट कमिश्नर शकील उल रहमान राथर द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

‘संपन्न’ (System for Accounting and Management of Pension) एक क्लाउड-आधारित, एंड-टू-एंड ऑनलाइन पेंशन प्रबंधन प्रणाली है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्लेटफॉर्म पेंशन की प्रक्रिया को शुरू से लेकर भुगतान और लेखांकन तक पूरी तरह डिजिटल बनाता है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए पेंशन स्वीकृति, अधिकृतकरण, लेखांकन और भुगतान की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल मंच पर सरल और पारदर्शी बनाया गया है। गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट अथॉरिटी द्वारा इसे अपनाने से आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

संचार मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर महीने औसतन ₹1,650 करोड़ की पेंशन वितरित की जा रही है और अब तक कुल ₹72,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन की दिशा बदली है, जहां अब सेवाएं सीधे नागरिकों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस समझौते के माध्यम से नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाने की इस अवधारणा को अन्य संस्थानों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने डाक विभाग और दूरसंचार विभाग को भी ‘संपन्न’ प्लेटफॉर्म अपनाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।

इस मौके पर संचार मंत्री ने ‘संपन्न’ कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को दर्शाया गया है।

कार्यक्रम के अंत में सीजीसीए वंदना गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि पेंशनर्स किसी एक विभाग से नहीं जुड़े होते, बल्कि उन्हें सर्वोत्तम सेवाएं मिलनी चाहिए, इसी सोच के साथ ‘संपन्न’ को सभी संस्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ

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डिजिटल हुआ जशपुर: घर बैठे क्यूआर कोड से भरें टैक्स

रायपुर- छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में अब टैक्स भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को एचडीएफसी बैंक की ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान कर सकेंगे।

इस नई व्यवस्था के तहत एचडीएफसी बैंक ने नगर पालिका जशपुर के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किया है। प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड जनरेट किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जो राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और कुशल बनाती है। इस प्रणाली के तहत वर्तमान में लगभग 4600 हाउसहोल्ड को शामिल किया गया है, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां शामिल हैं।

इस पहल से जहां नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

सी-डॉट और दिल्ली पुलिस के बीच समझौता, तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था सी-डॉट (C-DOT) ने दिल्ली पुलिस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में तकनीक आधारित, स्वदेशी और सुरक्षित पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करना है।

इस समझौते के तहत सी-डॉट दिल्ली पुलिस को आधुनिक और उन्नत तकनीकी समाधान उपलब्ध कराएगा, जिससे पुलिस की संचार व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ा सुधार होगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूती देता है।

समझौते के अंतर्गत नौ प्रमुख तकनीकों को लागू किया जाएगा। इनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए संदिग्धों और लापता व्यक्तियों की पहचान आसान होगी। SAMVAD प्लेटफॉर्म सुरक्षित मैसेजिंग और कॉलिंग की सुविधा देगा, जबकि SAMVAD Prime वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष सुरक्षित संचार प्रणाली होगी।
इसके अलावा, C-DOT Meet के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, MCX प्लेटफॉर्म से आपात स्थितियों में त्वरित संचार, और इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम से प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

साथ ही, सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए जनता को आपातकालीन सूचनाएं तुरंत भेजी जा सकेंगी। साइबर सुरक्षा के लिए Trinetra ESOC और Trinetra 360 जैसे AI आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे। वहीं, क्वांटम आधारित सुरक्षा समाधान पुलिस संचार को भविष्य के खतरों से सुरक्षित बनाएंगे।

इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय और दिल्ली पुलिस आयुक्त श्री सतीश गोलछा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने इस साझेदारी को देश में तकनीक आधारित पुलिसिंग का एक मॉडल बताया।

यह समझौता दिल्ली को एक सुरक्षित, स्मार्ट और तकनीकी रूप से सक्षम शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिजिटल ऋण पुस्तिका राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम-राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

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डिजिटल किसान किताब और ऋण पुस्तिका का शुभारंभ

पारदर्शी और तकनीक-सक्षम राजस्व व्यवस्था की ओर ऐतिहासिक कदम

रायपुर- छत्तीसगढ़ में आज डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में डिजिटल किसान किताब का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली भाग 1से 4 पुस्तक का भी विमोचन किया गया। यह पहल राज्य के किसानों और भूमिधारकों को आधुनिक, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस अवसर पर संचालक भू अभिलेख विनीत नन्दनवार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

डिजिटल किसान किताब अब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब का स्थान लेगी। इसके माध्यम से किसानों को अपनी भूमि संबंधी जानकारी कभी भी और कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा भुइया पोर्टल पर B-1 एवं P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध रहेगी, जिसे किसान आसानी से देख और डाउनलोड कर सकेंगे।

डिजिटल प्रणाली में आवश्यक विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे, जिससे जानकारी संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। साथ ही, संबंधित पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने से दस्तावेजों की वैधता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने  कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, सशक्त और नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी आजीविका के लिए भूमि पर निर्भर हैं। अब ऋण पुस्तिका से संबंधित जानकारी ऑनलाइन और वास्तविक समय में उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण एवं शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी।

मंत्री ने बताया कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी, अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल एवं प्रभावी बनेगी। यह पहल “डिजिटल छत्तीसगढ़” की अवधारणा को मजबूती प्रदान करेगी तथा शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, NIC तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों और तकनीकी टीम को बधाई देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम उपयोग करें।

डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका का शुभारंभ छत्तीसगढ़ में राजस्व सुधारों की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।

वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूएमईईडी पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल लॉन्च

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नई दिल्ली- वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनोन्मुखी और जवाबदेह बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) केंद्रीय पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल — सर्वे मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल — को 30 जनवरी 2026 को लॉन्च किया।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

सर्वे मॉड्यूल वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित सूचनाओं के संग्रहण, प्रबंधन और अद्यतन के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है, जिससे पोर्टल पर सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध कराया जा सके।

वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल को वक्फ संपत्तियों से संबंधित लीज प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मॉड्यूल लीज से जुड़ी प्रमुख जानकारियों जैसे लीज अवधि, लीज राशि और अन्य संबंधित विवरणों का सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रिकॉर्ड रखने और निगरानी में सहायता करता है, जिससे जवाबदेही और निगरानी तंत्र और सुदृढ़ होगा।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा डिजिटल गवर्नेंस उपकरणों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से इन मॉड्यूल्स के व्यापक कार्यान्वयन और पात्र लाभार्थियों के बीच इनके प्रति जागरूकता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

UMEED केंद्रीय पोर्टल, जिसका उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 6 जून 2025 को किया गया था, वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों की रीयल-टाइम अपलोडिंग, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।

यह पोर्टल देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए एक व्यापक परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखता है।

पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग सहित डिजिटल इन्वेंट्री, ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी लीज एवं उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस टूल्स के साथ एकीकरण, तथा सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स तक सार्वजनिक पहुंच शामिल है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय देशभर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है।

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker से एकीकरण

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प्रधान नियंत्रक संचार लेखा (Pr CCA), दिल्ली के कार्यालय ने दूरसंचार विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी पेंशनरों को सूचित किया है कि SAMPANN पेंशन पोर्टल का DigiLocker प्लेटफॉर्म के साथ सफलतापूर्वक एकीकरण कर दिया गया है। यह पहल भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप है।

इस एकीकरण के माध्यम से पेंशनर अब SAMPANN से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज—जैसे पेंशन भुगतान आदेश (e-PPO), ग्रेच्युटी स्वीकृति आदेश, कम्यूटेशन स्वीकृति आदेश और फॉर्म-16—को सीधे अपने DigiLocker खाते से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा मोबाइल या डेस्कटॉप के माध्यम से कभी भी और कहीं से भी उपलब्ध है, जिससे सुरक्षित, पेपरलेस और पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित होती हैं। इससे बैंकिंग, चिकित्सा प्रतिपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं में भी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर आशीष जोशी, प्रधान नियंत्रक संचार लेखा, दिल्ली ने कहा कि यह पहल भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और सरकार के पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस के विजन को साकार करता है।

पेंशनर इस सेवा का लाभ उठाने के लिए https://digilocker.gov.in पर आधार के माध्यम से लॉग इन कर सकते हैं, अपना PPO नंबर लिंक कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं। सहायता के लिए समर्पित हेल्पलाइन और SAMPANN पोर्टल उपलब्ध हैं। DigiLocker और SAMPANN सेवाओं से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) नीचे दिए गए हैं।

SAMPANN के बारे में

SAMPANN (System for Accounting and Management of Pension) दूरसंचार विभाग की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसे नियंत्रक जनरल संचार लेखा कार्यालय द्वारा विकसित, स्वामित्व और संचालित किया गया है। इसे 29 दिसंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्रणाली पेंशन प्रशासन को प्रणाली-केंद्रित से पेंशनर-केंद्रित बनाती है।

SAMPANN ने पेंशन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ कर दिया है—मामलों की शुरुआत से लेकर e-PPO जारी करने, भुगतान, लेखा, ऑडिट, शिकायत निवारण तक। अब पेंशन सीधे बैंक खातों में जमा होती है। पेंशनर घर बैठे भुगतान की स्थिति देख सकते हैं, जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, विवरण अपडेट कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही हैं।

FAQ: DigiLocker के माध्यम से SAMPANN सेवाएं

1. DigiLocker क्या है?

DigiLocker भारत सरकार का सुरक्षित क्लाउड प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक अपने महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं और साझा कर सकते हैं। यह डिजिटल वॉलेट की तरह कार्य करता है और कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को समाप्त करता है।

2. DigiLocker तक कैसे पहुंचें?

  • वेब पोर्टल: https://digilocker.gov.in

  • मोबाइल ऐप: Google Play Store (Android) या Apple Store (iOS) से DigiLocker ऐप डाउनलोड करें।

3. पंजीकरण और लॉग-इन कैसे करें?

  • मोबाइल नंबर/आधार से रजिस्ट्रेशन करें

  • OTP सत्यापन के बाद MPIN सेट करें

  • MPIN या OTP से लॉग-इन करें

4. DigiLocker पर सेवाएं कैसे खोजें?

लॉग-इन के बाद “Search Documents” विकल्प का उपयोग करें।
SAMPANN से जुड़ी सेवाओं को SAMPANN, DoT, Pension, Gratuity, Commutation जैसे कीवर्ड से खोजा जा सकता है।

5. DigiLocker पर उपलब्ध SAMPANN सेवाएं:

  • e-PPO

  • ग्रेच्युटी भुगतान आदेश

  • कम्यूटेशन भुगतान आदेश

  • फॉर्म-16

पेंशनर संबंधित सेवा में अपना PPO नंबर दर्ज कर “Get Document” पर क्लिक करके दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं।

यह पहल पेंशनरों के लिए सुविधा, पारदर्शिता और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित, अब तक कोई ब्रीच नहीं: लोकसभा में सरकार का स्पष्ट बयान

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आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर चुका है। देश में लगभग 134 करोड़ जीवित आधार धारक हैं और अब तक 16,000 करोड़ से अधिक आधार प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार धारकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक UIDAI के डेटाबेस से किसी भी प्रकार का डेटा ब्रीच नहीं हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि UIDAI ने डिफेंस-इन-डेप्थ अवधारणा पर आधारित मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। आधार डेटा के प्रसारण और भंडारण के दौरान उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

UIDAI की सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को STQC द्वारा ISO 27001:2022 और प्राइवेसी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के लिए ISO/IEC 27701:2019 का प्रमाणन प्राप्त है। इसके अलावा, UIDAI को संरक्षित प्रणाली घोषित किया गया है, जिससे राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) द्वारा लगातार साइबर सुरक्षा परामर्श दिया जाता है।

आधार पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी के लिए स्वतंत्र ऑडिट एजेंसी के माध्यम से गवर्नेंस, रिस्क और कंप्लायंस फ्रेमवर्क लागू किया गया है। साथ ही, UIDAI अपने सभी अनुप्रयोगों का नियमित रूप से साइबर सुरक्षा ऑडिट करता है, जिसमें स्टैटिक और डायनामिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग शामिल है।

सरकार ने दोहराया कि आधार प्रणाली न केवल तकनीकी रूप से सशक्त है, बल्कि नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, जिससे डिजिटल इंडिया के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

सही पेंशन सही पेंशनधारी को सही समय पर: SPARSH डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म

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परिचय:

सिस्टम फॉर पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन - रक्षा (SPARSH), एक फ्लैगशिप डिजिटल इंडिया पहल, देश का पहला एंड-टू-एंड डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म बन गया है। इसे डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट (DAD) द्वारा PCDA (Pensions), प्रयागराज के माध्यम से संचालित किया जाता है। नवंबर 2025 तक SPARSH ने भारत और नेपाल में 31.69 लाख रक्षा पेंशनधारियों को ऑनबोर्ड किया है। यह पहले 45,000 से अधिक एजेंसियों द्वारा संचालित विखंडित प्रणाली की जगह एक संगठित, पारदर्शी और जवाबदेह डिजिटल ढांचे के रूप में कार्य करता है।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  1. 94.3% लेगेसी विसंगति मामलों का समाधान:

    • पिछले सिस्टम से माइग्रेट किए गए 6.43 लाख विसंगति मामलों में से 6.07 लाख को पेंशनधारियों के हक को प्रभावित किए बिना सामान्यीकृत किया गया।

  2. वरिष्ठ और गैर-तकनीकी पेंशनधारियों के लिए व्यापक आउटरीच:

    • देशभर में 284 SPARSH आउटरीच प्रोग्राम और 194 रक्षा पेंशन समाधान आयोजन आयोजित किए गए।

    • इन कार्यक्रमों में 8,000 से अधिक शिकायतों का तत्काल समाधान किया गया।

  3. पारदर्शिता और शिकायत निवारण में सुधार:

    • पेंशनधारी अब ऑनलाइन पूरी पेंशन जानकारी देख सकते हैं और आसानी से सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    • औसत शिकायत निवारण समय अप्रैल 2025 में 56 दिन से घटकर नवंबर 2025 में 17 दिन हो गया।

    • DAD ने 73% संतुष्टि स्कोर प्राप्त किया, जो सभी मंत्रालयों/विभागों में 5वें स्थान पर है।

  4. DLC 4.0 अभियान:

    • 1–30 नवंबर 2025 के दौरान, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) 4.0 अभियान के तहत DAD ने 202 कार्यालय, 4.63 लाख कॉमन सर्विस सेंटर्स, 15 बैंक और 27 नोडल अधिकारियों के माध्यम से अभियान चलाया।

    • 30 नवंबर 2025 तक 20.94 लाख DLCs जारी किए गए - जो सभी विभागों में सबसे अधिक हैं।

  5. भुगतान और OROP-III:

    • FY 2024–25 में रक्षा पेंशन बजट ₹1,57,681 करोड़ SPARSH के माध्यम से रियल-टाइम भुगतान किया गया।

    • OROP-III, जुलाई 2024 में लागू, ने 20.17 लाख लाभार्थियों को सिर्फ 15 दिनों में ₹1,224.76 करोड़ का त्वरित वितरण सुनिश्चित किया।

निष्कर्ष:

SPARSH भारत की सबसे बड़ी एकीकृत पेंशन प्रणाली और रक्षा कर्मियों के लिए एकमात्र पूर्णत: डिजिटल पेंशन समाधान है। यह सरकार की पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान, देखभाल और समय पर समर्थन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

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मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल

भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त 

छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान

रायपुर- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।


विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

सोनम त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं —  सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों।त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मंत्रालय के सभी विभागों में अब अनिवार्य होगी आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली

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प्रशासनिक कार्यकुशलता और समय की पाबंदी को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर- पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक कार्यकुशलता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी भवन और इन्द्रावती भवन में कार्यरत सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) लागू करने की घोषणा की है।

आज वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में मुख्य सचिव विकास शील की उपस्थिति में नए सिस्टम का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली तथा दीवार पर लगाए गए आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का डेमो प्रस्तुत किया गया। इस प्रणाली का परीक्षण कल से प्रारंभ होगा और 01 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य होगी।

मुख्य सचिव विकास शील ने निर्देशित किया  है कि 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों/ विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू कर दी जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को कड़ाई से इसका पालन करना होगा।

कर्मचारियों के लिए उपस्थिति दर्ज करने के तरीके

नए प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को रोज़ाना दो बार—प्रवेश के समय “IN” और प्रस्थान के समय “OUT”—उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए दो विकल्प उपलब्ध किए गए हैं:

1. मोबाइल ऐप के माध्यम से फेसियल ऑथेंटिकेशन

कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर आधार-आधारित फेसियल वेरिफिकेशन के माध्यम से IN/OUT उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। यह प्रणाली सुविधा और बायोमेट्रिक सुरक्षा—दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

2. प्रवेश द्वारों पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण

मंत्रालय भवनों के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर दीवार पर लगे थम्ब-बेस्ड आधार-सक्षम बायोमेट्रिक डिवाइसेज़ स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कर्मचारी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।

दोनों प्रणालियाँ समानांतर रूप से संचालित होंगी और कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं और नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है, जिससे व्यवस्थित और निर्बाध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। सभी कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके आधार और सेवा संबंधी विवरण उपस्थिति पोर्टल में सही ढंग से अपडेट हों।नई उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा।

आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) की शुरुआत राज्य सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही, कार्यकुशलता और सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार लाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह प्रणाली न केवल विभागीय संचालन को सरल बनाएगी, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता की संस्कृति को भी स्थापित करेगी।

“महानदी और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) का क्रियान्वयन पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज मुख्य सचिव और सभी सचिवों की उपस्थिति में फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली और दीवार पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS आधारित उपस्थिति अनिवार्य होगी और 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों में लागू कर दी जाएगी। मैं अपेक्षा करता हूँ कि हर अधिकारी और कर्मचारी समयपालन और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि हम आधुनिक, तकनीक-आधारित और जवाबदेह शासन व्यवस्था की ओर निरंतर अग्रसर हो सकें।” – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र अब पूरी तरह ऑनलाइन,अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के आधार कार्ड हेतु ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र की कोई बाध्यता नहीं

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रायपुर- भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में संशोधित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का ऑनलाइन बनाया जाना अनिवार्य किया गया है।

उल्लेखनीय है कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों की जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध आधार होगा। अर्थात, इस तिथि के पूर्व जन्मे बच्चों के मामलों में अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे। परंतु अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही तिथि प्रमाण का एकमात्र स्रोत होगा। राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से जन्मे प्रत्येक बच्चे के लिए ऑनलाइन जारी जन्म प्रमाण पत्र को ही मान्य किया गया है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के जन्म तिथि प्रमाणन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। उनके लिए अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं। लेकिन अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही जन्म प्रमाण का एकमात्र आधार होगा।

पूर्व में जिन बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मैन्युअल पद्धति से जारी किया गया था, उनके लिए भी अब पोर्टल में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनाने का प्रावधान उपलब्ध है। इससे पुराने प्रमाण पत्र भी डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा सकेंगे।

यह संज्ञान में आया है कि कुछ जिलों में केवल उन्हीं जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं जिनमें क्यूआर कोड (QR Code) है। यह विषय संज्ञान में आने पर इस विषय में राज्य सरकार द्वारा सहायक प्रबंधक, UIDAI हैदराबाद से अनुरोध किया गया है कि वे राज्य के सभी आधार केंद्रों को उचित दिशा-निर्देश जारी करें। 

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में संशोधित पोर्टल के लॉन्च के बाद प्रारंभिक चरण में कुछ तकनीकी कठिनाइयाँ आई थीं, जिन्हें भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा समाधान कर दिया गया। साथ ही राज्य के सभी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को नए पोर्टल के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से सभी जन्म प्रमाण पत्र केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बनाए जा रहे हैं, और वर्तमान में पोर्टल पूरी तरह से तकनीकी रूप से सुचारू रूप से संचालित है।

विधि कार्य विभाग ने LIMBS और PFMS के एकीकरण से अधिवक्ता शुल्क भुगतान प्रक्रिया को किया पूर्णतः डिजिटल

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भारत सरकार की विशेष अभियान 5.0 के तहत दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग (Department of Legal Affairs – DLA) ने प्रक्रियागत सरलीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने लीगल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड ब्रीफिंग सिस्टम (LIMBS) को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से एकीकृत कर दिया है। यह सुधार अधिवक्ताओं के शुल्क के वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बना रहा है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल इंडिया जैसी सरकार की प्रमुख पहलों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पहले अधिवक्ताओं को फीस का भुगतान करने की प्रक्रिया भौतिक दस्तावेजों पर निर्भर थी — जिसमें मैन्युअल सत्यापन और कागज़ी फाइलों को पे एंड अकाउंट्स ऑफिस तक भेजने की लंबी प्रक्रिया शामिल थी। इससे भुगतान में विलंब होता था और प्रणाली पेपर-इंटेंसिव बनी रहती थी। अब, e-Bill मॉड्यूल के उन्नत संस्करण के माध्यम से अधिवक्ताओं और विधि अधिकारियों को फीस का भुगतान पूरी तरह से डिजिटल और एंड-टू-एंड इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भुगतान समयबद्ध और कुशलता से हो रहा है।

अब LIMBS पर तैयार किए गए बिल सीधे PFMS से जुड़े हुए हैं, जिससे उनका डिजिटल सत्यापन, स्वीकृति और भुगतान स्वतः हो जाता है। यह एक पेपरलेस सिस्टम है, जो रीयल-टाइम ट्रैकिंग, कम प्रसंस्करण समय और मानवीय त्रुटियों को समाप्त करता है। प्रत्येक दावे के लिए एक क्लेम रेफरेंस नंबर (CRN) उत्पन्न होता है, जिससे विभागीय इकाइयां भुगतान की स्थिति को वास्तविक समय में देख सकती हैं। भुगतान की स्वीकृति के बाद राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में PFMS के माध्यम से स्थानांतरित हो जाती है।

केंद्रीय एजेंसी अनुभाग (CAS) ने फरवरी 2025 में LIMBS के माध्यम से पैनल अधिवक्ताओं के भुगतान के लिए e-Bill मॉड्यूल लागू किया था, और अब इसे अन्य मुकदमेबाजी इकाइयों, जैसे दिल्ली उच्च न्यायालय में भी विस्तारित करने की तैयारी है। इसके अलावा, विधि अधिकारियों के रिटेनर शुल्क के लिए एक अलग मॉड्यूल विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

यह एकीकरण डिजिटल प्रशासन को सशक्त करता है, पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है और पर्यावरणीय स्थिरता को भी प्रोत्साहित करता है। इस एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म से विधिक शुल्क भुगतान प्रक्रियाओं में समानता और मानकीकरण सुनिश्चित हुआ है।

विशेष अभियान 5.0 के उद्देश्यों के अनुरूप यह पहल सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाती है, डिजिटल परिवर्तन को गति देती है और नागरिक-केंद्रित सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। मैन्युअल प्रक्रियाओं को समाप्त करके और कार्यप्रवाह को मानकीकृत करके, विधि कार्य विभाग इस सुधार को अन्य कानूनी भुगतान श्रेणियों तक विस्तारित कर रहा है, जिससे विकसित भारत @2047 की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है।

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क: भारत में सुरक्षित और स्केलेबल डिजिटल गवर्नेंस के लिए स्वदेशी पहल

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क्रिप्टोकरेंसी के साथ अपने शुरुआती जुड़ाव से आगे बढ़ते हुए, ब्लॉकचेन तकनीक 21वीं सदी के सबसे परिवर्तनकारी डिजिटल नवाचारों में से एक बन गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों के विपरीत, जो अपनी कंप्यूटिंग शक्ति से शक्ति प्राप्त करती हैं, ब्लॉकचेन का मूल्य बिचौलियों के बिना सत्यापन योग्य विश्वास स्थापित करने की इसकी क्षमता में निहित है।

भारत की वर्तमान शासन प्रणालियां अक्सर केंद्रीकृत डेटाबेस पर निर्भर करती हैं, जिनमें त्रुटियां, धोखाधड़ी और पारदर्शिता की कमी हो सकती है। ब्लॉकचेन तकनीक अपनी छेड़छाड़-रोधी, वितरित लेजर प्रणाली के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करती है, जहां रिकॉर्ड कई नोड्स में सुरक्षित रूप से बनाए रखे जाते हैं। यह डिजाइन अनधिकृत संशोधनों को लगभग असंभव बना देता है और डेटा की अखंडता और विश्वास को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है।

इसकी विशाल क्षमता को पहचानते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) ने विभिन्न क्षेत्रों में ब्लॉकचेन समाधानों को लागू करने के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क (एनबीएफ) विकसित किया है। एनबीएफ का उद्देश्य सार्वजनिक सेवा वितरण में ब्लॉकचेन के एकीकरण का मार्गदर्शन करना है, जिससे अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित होती है। 

         

ब्लॉकचेन क्या है?

ब्लॉकचेन एक वितरित, पारदर्शी, सुरक्षित और अपरिवर्तनीय डेटाबेस है जो रिकॉर्ड या लेन-देन के बहीखाते की तरह काम करता है, छेड़छाड़-रोधी है और कंप्यूटरों के एक नेटवर्क पर सुलभ है।

ब्लॉकचेन के प्रकारों को समझना

  • सार्वजनिक ब्लॉकचेन: इस नेटवर्क में, सभी नोड्स रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं, लेन-देन सत्यापित कर सकते हैं, कार्य-प्रमाणन कर सकते हैं और नए ब्लॉक जोड़ सकते हैं।
  • निजी ब्लॉकचेन: यह एक अनुमति प्राप्त ब्लॉकचेन है, जो किसी संगठन के भीतर चुनिंदा प्रतिभागियों तक सीमित है। नियंत्रक संस्था सुरक्षा, प्राधिकरण और पहुंच के स्तर निर्धारित करती है, जो इसे सरकारी अनुप्रयोगों के लिए आदर्श बनाती है। डिजाइन के अनुसार, यह प्रतिभागियों के बीच विश्वास बढ़ाता है और साथ ही डेटा गोपनीयता और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करता है।
  • कंसोर्टियम ब्लॉकचेन: इस नेटवर्क मेंब्लॉकचेन अर्ध-विकेंद्रीकृत होता हैजिसे साझा डेटा प्रबंधन और सत्यापन के लिए कई संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से नियंत्रित किया जाता है।
  • हाइब्रिड ब्लॉकचेन: यह सार्वजनिक और निजी ब्लॉकचेन का मिश्रण है जो चुनिंदा डेटा तक पहुंच की अनुमति देता है।

ब्लॉकचेन की मूलभूत शक्तियां—पारदर्शिता, अपरिवर्तनीयता, विकेंद्रीकरण और विश्वास—राष्ट्रीय ब्लॉकचेन ढांचे के केंद्र में हैं। ये विशेषताएं सुरक्षित और कुशल डिजिटल प्रणालियों को सक्षम बनाती हैं, और शासन में बदलाव, नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने और प्रशासनिक अड़चनों को कम करने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। 

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्कसुरक्षित और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य डिजिटल गवर्नेंस के लिए भारत का स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क (एनबीएफ), जिसकी शुरुआत मार्च 2021 में ₹64.76 करोड़ के बजट परिव्यय के साथ हुई थी, 4 सितंबर 2024 को अपने आधिकारिक लॉन्च के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। एनबीएफ को अनुमति प्राप्त ब्लॉकचेन-आधारित अनुप्रयोगों के विकास और परिनियोजन में तेजी लाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारत के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और स्केलेबल डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

प्रौद्योगिकी स्टैक - विश्वस्य ब्लॉकचेन स्टैक

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क के मूल में विश्वस्य ब्लॉकचेन स्टैक है। यह एक स्वदेशी और मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म है जिसे शासन के लिए ब्लॉकचेन-आधारित अनुप्रयोगों के निर्माण और परिनियोजन हेतु तकनीकी आधार प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। विश्वस्य ब्लॉकचेन स्टैक की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • ब्लॉकचेन-एज--सर्विस (बीएएएस): विश्वस्य एक साझा सेवा के रूप में ब्लॉकचेन अवसंरचना प्रदान करता है। यह सरकारी संस्थाओं को अपना स्वयं का अवसंरचना बनाए या प्रबंधित किए बिना ब्लॉकचेन-आधारित अनुप्रयोगों को तैनात करने की अनुमति देता है।
  • वितरित अवसंरचना: यह स्टैक भुवनेश्वरपुणे और हैदराबाद में स्थित एनआईसी डेटा केंद्रों में लागू है। यह वितरित नेटवर्क आर्किटेक्चर ब्लॉकचेन-आधारित अनुप्रयोगों के लिए दोष सहिष्णुतामापनीयता और लचीलापन सुनिश्चित करता है।
  • अनुमति प्राप्त ब्लॉकचेन परत: यह प्लेटफ]र्म एक अनुमति प्राप्त ब्लॉकचेन पर बनाया गया हैजो यह सुनिश्चित करता है कि केवल सत्यापित और अधिकृत प्रतिभागी ही लेनदेन में शामिल हो सकते हैं या उन्हें मान्य कर सकते हैं।
  • ओपन एपीआई और एकीकरण सेवाए: विश्वस्य प्रमाणीकरण और डेटा विनिमय के लिए ओपन एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेसऔर एकीकरण मॉड्यूल प्रदान करता है। ये सुविधाएं ई-गवर्नेंस प्लेटफार्मों के साथ सहज एकीकरण को सक्षम बनाती हैं।

एनबीएफलाइट - स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के लिए ब्लॉकचेन सैंडबॉक्स

एनबीएफलाइट ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी स्टैक का एक सैंडबॉक्स संस्करण है, जिसे नवाचार, प्रयोग और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और छात्रों को पूर्ण स्तर पर लागू करने की आवश्यकता के बिना, नियंत्रित वातावरण में ब्लॉकचेन-आधारित अनुप्रयोगों का प्रोटोटाइप बनाने की अनुमति देता है। यह आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसे प्रमुख शासन और उद्योग क्षेत्रों में स्मार्ट अनुबंध टेम्पलेट्स के साथ आता है, जिससे उपयोगकर्ता अनुप्रयोगों को तेजी से विकसित और सत्यापित कर सकते हैं।

प्रमाणिक - ऐप सत्यापन के लिए अभिनव ब्लॉकचेन समाधान

आज के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल परिदृश्य में, मोबाइल उपकरणों को दुर्भावनापूर्ण ऐप्स और धोखाधड़ी वाले ग्राहक सहायता से बचाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये खतरे व्यक्तिगत डेटा से समझौता कर सकते हैं और वित्तीय नुकसान का कारण बन सकते हैं। प्रमाणिक एक अभिनव समाधान है जो मोबाइल एप्लिकेशन की प्रामाणिकता और स्रोत को सत्यापित करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का लाभ उठाता है। जब उपयोगकर्ता किसी ऐप को स्कैन या जांचते हैं, तो प्रमाणिक उसकी वैधता को सत्यापित करने के लिए ब्लॉकचेन रिकॉर्ड के साथ विवरणों का मिलान करता है, जिससे मोबाइल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है।

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन पोर्टल

राष्ट्रीय ब्लॉकचेन पोर्टल शासन और उद्योग में ब्लॉकचेन तकनीक को अपनाने के लिए भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। यह प्लेटफॉर्म नवाचार, मानकीकरण और अनुप्रयोगों के लिए ब्लॉकचेन के क्रॉस-सेक्टर अपनाने का समर्थन करता है, विश्वास को बढ़ावा देता है और उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत के नेतृत्व को बढ़ाता है। भारत का एनबीएफ दुनिया के उन कुछ सरकार के नेतृत्व वाली पहलों में से एक है जो विभिन्न उद्योगों में ब्लॉकचेन तकनीक का समर्थन करती है।

ब्लॉकचेन-सक्षम श्रृंखलाएं शासनआपूर्ति श्रृंखलाओं और न्याय प्रणालियों में बदलाव ला रही हैं

एक विश्वसनीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा प्रमुख नियामकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के समन्वित प्रयासों द्वारा संचालित हो रही है। एनबीएफ शासन, आपूर्ति श्रृंखलाओं और उद्यमों में ब्लॉकचेन को अपनाने के लिए मूलभूत अवसंरचना प्रदान करता है।

प्रमाणपत्र और दस्तावेज श्रृंखला

प्रमाणपत्र जारी करने और उपयोग करने की वर्तमान प्रणाली में धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों के उपयोग और सेवा वितरण में देरी जैसी चुनौतियां आती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने ऐसे अभिलेखों के सुरक्षित भंडारण और पुनर्प्राप्ति हेतु एक 'प्रमाणपत्र श्रृंखला' (सर्टिफिकेट चेन) बनाने हेतु ब्लॉकचेन तकनीक को अपनाया है।

इस प्रमाणपत्र श्रृंखला का एक उपयोग मामला केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के शैक्षणिक दस्तावेज़ों को ब्लॉकचेन में संग्रहीत करना है।

इसी प्रकार, डॉक्यूमेंट चेन एक ऐसा एकल प्लेटफ़ॉर्म है जो जारीकर्ता अधिकारियों और उपभोक्ता संस्थाओं को सरकार द्वारा जारी किए गए जाति, आय, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे किसी भी दस्तावेज के भंडारण और पुनर्प्राप्ति के लिए एक मानक प्रक्रिया प्रदान करता है।  भारत के ब्लॉकचेन-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से 34 करोड़ से अधिक दस्तावेजों का सुरक्षित रूप से सत्यापन किया जा चुका है, जिनमें से 21 अक्टूबर 2025 तक 48,000 से अधिक दस्तावेज डॉक्यूमेंट चेन के हैं।

लॉजिस्टिक्स चेन

लॉजिस्टिक्स चेन विभिन्न हितधारकों के बीच माल या संसाधनों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके, आपूर्ति श्रृंखला में सभी लेन-देन एक छेड़छाड़-रोधी बहीखाते में दर्ज किए जाते हैं, जिससे हर चरण पर पता लगाने की क्षमता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है। लॉजिस्टिक्स चेन के उपयोग के मामलों में से एक कर्नाटक की दवाओं के लिए ऑनलाइन आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन प्रणाली (औषधहै।

औषध प्रणाली ब्लॉकचेन के साथ एकीकृत है ताकि निर्माता से अस्पतालों तक दवाओं की आवाजाही से संबंधित लेन-देन, जिसमें गुणवत्ता जांच भी शामिल है, रिकॉर्ड किया जा सके। मरीज दवा लेने से पहले निर्माता का विवरण, समाप्ति तिथि और दवा की गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। यह लेन-देन में पता लगाने की क्षमता (ट्रैक एंड ट्रेस) प्रदान करता है जिससे नकली दवाओं के आने की संभावना कम होती है, सटीकता बढ़ती है और पारदर्शिता आती है।

न्यायपालिका श्रृंखला

न्यायपालिका श्रृंखला न्यायिक डेटा और दस्तावेज़ों का एक सुरक्षित, अपरिवर्तनीय और समय-मुद्रित रिकॉर्ड प्रदान करके न्याय प्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वास बढ़ाने के लिए ब्लॉकचेन का लाभ उठाती है। ब्लॉकचेन नोटिस, सम्मन और ज़मानत आदेशों के इलेक्ट्रॉनिक वितरण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे देरी कम होती है और मैन्युअल निर्भरता समाप्त होती है। 21 अक्टूबर, 2025 तकब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पर कुल 665 न्यायिक दस्तावेज़ सत्यापित किए जा चुके हैं।

अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली

न्यायपालिका श्रृंखला पर आधारित, अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) आपराधिक न्याय पारिस्थितिकी तंत्र को एकीकृत करती है। यह केस रिकॉर्ड, साक्ष्य और न्यायिक दस्तावेज़ों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म सुनिश्चित करती है। 21 अक्टूबर 2025 तक, ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पर 39,000 से अधिक आईसीजेएस दस्तावेज सत्यापित किए जा चुके हैं।

संपत्ति श्रृंखला (प्रॉपर्टी चेन)

ब्लॉकचेन-आधारित संपत्ति प्रबंधन प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक संपत्ति लेनदेन ब्लॉकचेन पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो। भूमि अभिलेखों में अद्यतन या स्थानांतरण के दौरान भी, सभी हितधारक निर्णय लेने से पहले संपूर्ण लेन-देन इतिहास तक पहुंच सकते हैं। यह पारदर्शिता भावी खरीदारों को स्वामित्व, अधिकारों और दायित्वों को सत्यापित करने में मदद करती है, जिससे मुकदमेबाजी में उल्लेखनीय कमी आती है और विवाद समाधान में तेजी आती है। 21 अक्टूबर 2025 तक, ब्लॉकचेन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से 34 करोड़ से अधिक संपत्ति दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका है।

भारत में ब्लॉकचेन अपनाने के लिए रणनीतिक रोडमैप और नियामक पहल

माइटी द्वारा विकसित ब्लॉकचेन पर राष्ट्रीय रणनीति, भारत में ब्लॉकचेन तकनीक के विकास के लिए एक रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह चुनौतियों का समाधान करती है और विभिन्न क्षेत्रों में ब्लॉकचेन एकीकरण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करती है।

ब्लॉकचेन तकनीक में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) (बीसीटी)

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने एक उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की स्थापना की है जो सरकारी विभागों को पूर्ण पैमाने पर कार्यान्वयन से पहले पायलट परियोजनाओं (प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट्स) के विकास हेतु परामर्श, प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करने हेतु एक मंच के रूप में कार्य करेगा।

सीओई ब्लॉकचेन-संबंधी सेवाएं और आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) अवसंरचना प्रदान करता है जो विभागों को अपने सिस्टम को जोड़ने और ब्लॉकचेन तकनीक (बीसीटी) का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करता है। इसने हाइपरलेजर सॉटूथ, हाइपरलेजर फैब्रिक और एथेरियम जैसे लोकप्रिय ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म के साथ काम किया है—जो सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल नेटवर्क बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ओपन-सोर्स सिस्टम हैं।

बीसीटी में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राईकी भूमिका

ट्राई ने ब्लॉकचेन-आधारित वितरित लेज़र तकनीक (डीएलटी) को दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत किया है, जिससे सभी प्रमुख संस्थाओं (पीई) और टेलीमार्केटर्स (टीएम) को अपनी संदेश प्रसारण श्रृंखलाओं को पंजीकृत करना अनिवार्य हो गया है, जिससे एसएमएस की उत्पत्ति से लेकर वितरण तक की संपूर्ण ट्रैकिंग संभव हो गई है। नियामकों और एक्सेस प्रदाताओं के सहयोग से कार्यान्वित इस पहल ने उपभोक्ता संरक्षण को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है, स्पैम को कम किया है और नियामक अनुपालन और डिजिटल विश्वास को लागू करने में ब्लॉकचेन की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया है। 1.13 लाख से अधिक संस्थाओं को कवर करने वाले इस बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन को आरबीआई, सेबी, एनआईसी और सी-डैक के सहयोग से क्रियान्वित किया गया।

बीसीटी में भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल रुपया (ई₹) जैसी पायलट परियोजनाओं के माध्यम से भारत की वित्तीय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का लाभ उठा रहा है। दिसंबर 2022 में ग्राहकों और व्यापारियों के एक बंद उपयोगकर्ता समूह के भीतर शुरू किया गया रिटेल पायलट यह दर्शाता है कि ब्लॉकचेन कैसे भुगतान प्रणालियों में वित्तीय समावेशन और नवाचार को बढ़ावा देते हुए त्वरित, पता लगाने योग्य और पारदर्शी भुगतान को सक्षम बनाता है।

 डिबेंचर अनुबंध निगरानी के लिए NSDL द्वारा ब्लॉकचेन का उपयोग

भारत की सबसे बड़ी डिपॉजिटरी, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) ने डिबेंचर अनुबंध निगरानी के लिए एक वितरित लेजर तकनीक (डीएलटी)-आधारित ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पेश किया है, जो भारत के पूंजी बाजारों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्लेटफॉर्म जारीकर्ताओं और डिबेंचर ट्रस्टियों को परिसंपत्ति शुल्क रिकॉर्ड करने, परिसंपत्ति कवर अनुपात की निगरानी करने और एक सुरक्षित डिजिटल लेजर पर अनुबंधों को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है। यह लेजर छेड़छाड़-रोधी, क्रिप्टोग्राफ़िक रूप से हस्ताक्षरित और समय-मुद्रित है, जिससे एक सत्यापन योग्य ऑडिट ट्रेल बनता है और निवेशकों का विश्वास बढ़ता है।

ब्लॉकचेन तकनीक में क्षमता निर्माण पहल

ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों में कुशल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) ने ब्लॉकचेन पर केंद्रित कई क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन पहलों का उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करना है।

 कौशल विकास कार्यक्रम

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (माइटी) के क्षमता निर्माण प्रभाग ने विभिन्न विभागों में तकनीकी दक्षता बढ़ाने के लिए सरकारी अधिकारियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं। 214 से अधिक कार्यक्रमों ने ब्लॉकचेन जैसे उभरते क्षेत्रों में 21,000 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। राज्य ई-मिशन टीमों (एसईएमटी) द्वारा समर्थित, ये पहल भविष्य के लिए तैयार सरकारी कार्यबल को बढ़ावा दे रही हैं जो तकनीक-आधारित शासन को आगे बढ़ाने के लिए सुसज्जित हैं।

 फिनटेक और ब्लॉकचेन विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजी-डीएफबीडी):

क्रिप्टोकरेंसी, NFT (नॉन-फंजिबल टोकन) और अन्य ब्लॉकचेन अनुप्रयोगों के उदय ने तेज़, सस्ते और अधिक सुरक्षित प्लेटफ़ॉर्म की मांग को बढ़ा दिया है, जिससे फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र में विकास को गति मिल रही है। इस मांग को पूरा करने के लिए, फिनटेक और ब्लॉकचेन डेवलपमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (पीजी-डीएफबीडी) जैसे कार्यक्रम पेशेवरों और छात्रों को ब्लॉकचेन, फिनटेक, एआई/एमएल, साइबर सुरक्षा, प्रोग्रामिंग और नियामक ढांचे को कवर करने वाला एक व्यापक 900 घंटे का पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं।

बीएलईएनडीसी-डैक ऑनलाइन कोर्स

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा प्रस्तुत बीएलईएनडी कार्यक्रम, एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम है जिसका उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों और शुरुआती करियर वाले पेशेवरों को ब्लॉकचेन तकनीक और इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों में दक्षता हासिल करने में मदद करना है। यह पाठ्यक्रम ब्लॉकचेन अवधारणाओं, वास्तुकला, घटकों और परिचालन तंत्रों की व्यापक समझ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही प्रतिभागियों को विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया के ब्लॉकचेन अनुप्रयोगों को विकसित करने में सक्षम बनाता है।

फ्यूचरस्किल्स प्राइम (पीआरआईएमई)

फ्यूचरस्किल्स प्राइम (रोजगार के लिए आईटी जनशक्ति के पुनर्कौशल/अप-कौशल कार्यक्रम) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) द्वारा प्रायोजित एक उद्योग-उन्मुख पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के कार्यबल को ब्लॉकचेन जैसी दस उभरती प्रौद्योगिकियों में डिजिटल क्षमताओं से लैस करना, रोजगार क्षमता को बढ़ाना और देश के तकनीकी प्रतिभा पूल को मजबूत करना है।

आगे की राहभविष्य में ब्लॉकचेन के उपयोग के मामले

  

सार्वजनिक सेवाओं में दक्षता और विश्वास बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में ब्लॉकचेन-आधारित उपयोग के मामलों का अध्ययन किया जा रहा है। ये पहल दर्शाती हैं कि ब्लॉकचेन कैसे शासन में नवाचार को बढ़ावा दे सकता है, जवाबदेही सुनिश्चित कर सकता है और प्रणालीगत अक्षमताओं को कम कर सकता है। प्रमुख अवधारणा प्रमाण (पीओसी) में सुरक्षित स्वामित्व रिकॉर्ड के लिए भूमि रिकॉर्ड, पारदर्शी दान ट्रैकिंग के लिए ब्लड बैंक, वास्तविक समय कर निगरानी के लिए जीएसटी श्रृंखला और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) शामिल हैं।

निष्कर्ष

डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, ब्लॉकचेन तकनीक डिजिटल शासन में विश्वास और पारदर्शिता के समावेश को बदल रही है। राष्ट्रीय ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क पहल के माध्यम से, भारत एक एकीकृत और अंतर-संचालनीय ब्लॉकचेन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है जो सरकार-से-नागरिक (जी2सी) और सरकार-से-व्यवसाय (जी2बी) सेवाओं का समर्थन करता है, साथ ही प्रौद्योगिकी में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। क्षमता निर्माण और स्वदेशी ब्लॉकचेन समाधानों के विकास पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारत समावेशी विकास के लिए ब्लॉकचेन का लाभ उठाने में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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