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सिम्स में पहली बार 78 वर्षीय महिला के अंडाशय कैंसर की सफल सर्जरी

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एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवन

रायपुर- छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन हुआ बिल्कुल मुफ्त 

निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।

15×12×10 सेमी का विशाल ट्यूमर और 3 अगस्त को सफल सर्जरी

सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने हासिल की सफलता

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉक्टरों ने बताया अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।

एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

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विशेष टीकाकरण दिवस पर राज्य में सर्वाधिक बालिकाओं को लगी एचपीवी वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम की दिशा में बड़ी उपलब्धि

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ की प्रभावी रणनीति और जनजागरूकता अभियान से 74 विद्यालयों में चला व्यापक टीकाकरण अभियान, हजारों बालिकाओं के सुरक्षित भविष्य की रखी मजबूत नींव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा  बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।

राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।

राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।

अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

​कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: धमतरी में विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह शुरू

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13 से 18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीका

रायपुर- धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

​कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

​यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),​जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और ​निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।

​बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

​धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

​कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है।  सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को मिलेगी नई दिशा: आज लॉन्च होगा 'सुमन रोडमैप 2030'

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन में 'सुमन रोडमैप 2030' (SUMAN Roadmap 2030) का शुभारंभ करेंगे। यह रोडमैप मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है।

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने का लक्ष्य।

  • नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में उल्लेखनीय कमी लाने पर जोर।

  • गर्भधारण से पहले, गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक संपूर्ण जीवन-चक्र आधारित स्वास्थ्य सेवाएं।

  • 13 राज्यों के 130 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में विशेष रणनीति लागू होगी, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है।

  • उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, निगरानी और उपचार के लिए चार-स्तरीय प्रणाली विकसित की जाएगी।

गर्भवती महिलाओं को मिलेंगी विशेष सुविधाएं

  • समय पर पंजीकरण और सभी प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित की जाएंगी।

  • आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता प्रत्येक दो सप्ताह में घर जाकर स्वास्थ्य जांच, पोषण परामर्श और सुरक्षित प्रसव की तैयारी कराएंगी।

  • कठिन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसव के लिए बेहतर एम्बुलेंस और रेफरल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

  • बर्थ वेटिंग होम, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wing), हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) और आईसीयू जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

नई पहलें

  • सुमन पंचायत के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाई जाएगी।

  • मदर्स पिकनिक कार्यक्रम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • JANANI पोर्टल के जरिए डिजिटल मॉनिटरिंग और एआई आधारित लेबर रूम विकसित किए जाएंगे।

  • जलवायु परिवर्तन, हीटवेव और अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का लक्ष्य पूरे देश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर शून्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु सुनिश्चित करना है। यह रोडमैप परिवार नियोजन, पोषण, किशोर स्वास्थ्य और नवजात देखभाल को एकीकृत करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा।

JANANI प्लेटफॉर्म लॉन्च: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा डिजिटल मजबूती

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देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘JANANI’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करेगा।


JANANI प्लेटफॉर्म गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु देखभाल और परिवार नियोजन जैसी सेवाओं की ट्रैकिंग करेगा। इसमें QR आधारित डिजिटल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी अलर्ट, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा दी गई है।

यह प्लेटफॉर्म U-WIN और POSHAN जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से भी जुड़ा होगा, जिससे लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। अब तक JANANI पर 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षित मासिक धर्म: सरकार की व्यापक स्वच्छता और जागरूकता पहल

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केंद्रीय सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की योजनाओं और पहलों के माध्यम से मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय किशोर लड़कियों (10–19 वर्ष) में मासिक धर्म स्वच्छता (MH) को बढ़ावा देने के लिए मासिक धर्म स्वच्छता संवर्धन योजना लागू करता है। इस योजना का उद्देश्य मासिक धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी नैपकिन तक पहुंच सुनिश्चित करना और पर्यावरण के अनुकूल डिस्पोजल प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए MH नीति बनाई है, जो विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई। यह नीति सस्ते MH उत्पादों, लिंग-विशिष्ट शौचालय और सुरक्षित डिस्पोजल सुविधाओं तक पहुंच को सुव्यवस्थित करती है, स्कूल पाठ्यक्रम में MH शिक्षा को शामिल करती है और सभी स्कूलों में संवेदनशीलता और जागरूकता को प्राथमिकता देती है। इसके अलावा, शिक्षक और फ्रंटलाइन वर्कर्स—सहायक नर्स मिडवाइफ (FLW-ANMs), अक्रीडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWWs)—को योजना के अंतर्गत उपयुक्त प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके लिए राशि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, ‘मिशन शक्ति’ के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (BBBP) घटक का उद्देश्य भी मासिक धर्म और सैनिटरी नैपकिन के उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, 15-24 वर्ष की महिलाओं में हाइजेनिक तरीकों का उपयोग करने वाली प्रतिशत संख्या NFHS-4 में 57.6% से बढ़कर NFHS-5 में 77.3% हो गई है।

जल शक्ति मंत्रालय ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म प्रबंधन (MHM) पर जागरूकता पैदा करने के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश विकसित किए हैं। स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत विभिन्न राज्य-विशिष्ट परियोजनाओं के माध्यम से मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के लिए पहल करता है, जिसमें सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनों और इनसिनरेटर की स्थापना शामिल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर लड़कियों की स्वास्थ्य और पोषण स्थिति सुधारने तथा उन्हें स्कूल में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किशोरियों की योजना (SAG) लागू करता है।

शिक्षा मंत्रालय ने 07.06.2024 को सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों को दिशा-निर्देश जारी किए, जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 18.03.2025 को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि उनके संस्थानों में सैनिटरी सुविधाओं की उपलब्धता हो।

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (MoHFW) नए मासिक धर्म प्रबंधन तरीकों और सैनिटरी नैपकिन के वैकल्पिक सतत विकल्पों पर शोध करता है, ताकि उनकी सुरक्षा, स्वीकार्यता, किफायतीपन और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

साथ ही, 2015-16 से मासिक धर्म स्वच्छता योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत राज्य कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। 2021-22 में लगभग 34.92 लाख किशोर लड़कियों को हर महीने सैनिटरी नैपकिन पैक प्रदान किए गए।

दूसरी ओर, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल विभाग ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के तहत देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए हैं, जो पर्यावरण अनुकूल ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन ‘सुविधा’ प्रति पैड केवल ₹1 में प्रदान करते हैं। ये पैड ASTM D-6954 मानकों के अनुरूप बायोडिग्रेडेबल हैं। 30.11.2025 तक सुविधा नैपकिन की कुल बिक्री 96.30 करोड़ पहुंच चुकी है।

यह जानकारी राज्य मंत्री, महिला एवं बाल विकास सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

अध्ययन में महिलाओं के ओरल कैंसर में विशिष्ट CASP8 जीन म्यूटेशन की पहचान

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भारतीय वैज्ञानिकों ने दक्षिण भारत की महिला मरीजों में मौखिक कैंसर (ओरल कैंसर) उत्पन्न करने वाले ड्राइवर जीन म्यूटेशन की खोज की है। भारत दुनिया में ओरल कैंसर का सबसे अधिक बोझ झेलने वाले देशों में शामिल है, विशेषकर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत की महिलाओं में इसकी दर चिंताजनक रूप से अधिक है। इसका मुख्य कारण तंबाकू-मिश्रित पान, सुपारी, गुटखा और संबंधित उत्पादों का व्यापक सेवन है। जहाँ पुरुषों में इस रोग पर काफी शोध हुए हैं, वहीं महिलाओं में होने वाला ओरल कैंसर अब तक काफी हद तक अनदेखा रहा है।

मरीजों के जीन का अनुक्रमण

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु और BRIC-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), कल्याणी के वैज्ञानिकों ने देवराज उर्स अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SDUAHER), कोलार के चिकित्सकों के साथ मिलकर एक महिला-केंद्रित अध्ययन किया है, जिसमें दक्षिण भारत की महिलाओं की एक विशिष्ट तंबाकू चबाने की आदत का विश्लेषण किया गया।

यह अध्ययन JNCASR, बेंगलुरु के प्रो. तापस के. कुंडू के नेतृत्व में किया गया, जिसका उद्देश्य यह समझना था कि महिलाओं में कैंसर कैसे विशिष्ट रूप से विकसित होता है, बीमारी किस प्रकार प्रकट होती है और आगे बढ़ती है, तथा इन मरीजों के उपचार को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।

जीन अनुक्रमण से प्राप्त बड़ी खोज

कोलार जिले की महिलाओं में प्रचलित एक विशिष्ट तंबाकू-चबाने की आदत (कड्डीपुड़ी) वाली OSCC-GB महिला मरीजों के ट्यूमर और रक्त के नमूनों पर Whole-exome sequencing (WES) और copy-number array प्रोफाइलिंग की गई। इस विश्लेषण से मौखिक कैंसर बनने की प्रक्रिया में शामिल एक अनोखे ड्राइवर म्यूटेशन की पहचान हुई।

यह अध्ययन Clinical and Translational Medicine Journal में प्रकाशित हुआ और इसका उद्देश्य उन जैविक कारणों को उजागर करना था, जिनके कारण भारतीय महिलाओं में ओरल कैंसर अत्यंत आक्रामक, पुनरावर्ती और जीवन-घातक रूप में सामने आता है।

उन्नत जीनोमिक तकनीकों के उपयोग से, शोधकर्ताओं ने कोलार (SDUAHER) की महिला मरीजों में 10 प्रमुख जीनों में महत्वपूर्ण म्यूटेशन पाए।

हालांकि दो प्रमुख जीन CASP8 और TP53 में उच्च म्यूटेशन पाए गए, लेकिन विशिष्ट रूप से CASP8 को एक प्रमुख ड्राइवर म्यूटेशन (कैंसर उत्पन्न करने वाला) पाया गया — जो पहले अध्ययन किए गए पुरुष-प्रधान ओरल कैंसर मामलों से अलग है।

शोध के मुख्य निष्कर्ष

  • छोटे समूह (N=38) के बावजूद, TP53 और CASP8 के संयुक्त म्यूटेशन से अत्यंत आक्रामक और घातक प्रकार का मौखिक कैंसर विकसित होने की पुष्टि हुई।

  • टीम अब इस नए ड्राइवर म्यूटेशन और TP53 परिवर्तन की पृष्ठभूमि में कैंसर बनने की आणविक प्रक्रिया को समझने के लिए आगे के शोध पर काम कर रही है।

  • शोधकर्ताओं ने ट्यूमर ऊतकों की डिजिटल जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीप लर्निंग) का उपयोग किया और दो अलग-अलग समूहों की पहचान की, जिनमें प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया भिन्न थी। यह संकेत देता है कि उपचार मरीज की प्रतिरक्षा प्रोफ़ाइल के आधार पर अधिक प्रभावी ढंग से अनुकूलित किया जा सकता है।

महत्व और आगे की दिशा

यह क्रांतिकारी अध्ययन कैंसर शोध में एक नया मानक स्थापित करता है।
यह न केवल महिलाओं को जैव-चिकित्सा अनुसंधान में अधिक शामिल करने की आवश्यकता पर बल देता है, बल्कि भारत में ओरल कैंसर से निपटने के लिए व्यक्तिगत चिकित्सा (personalized medicine) की दिशा भी दिखाता है — एक ऐसा रोग जो देश में हजारों जानें ले चुका है।

हालांकि, इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए अधिक बड़े और विविध मरीज समूहों पर शोध की आवश्यकता होगी।


रजोनिवृत्ति देखभाल में एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा: सफदरजंग अस्पताल और सीएआरआई के बीच एमओयू हस्ताक्षर

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महिलाओं के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने आज केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), जो केन्द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य रजोनिवृत्ति (Menopause) देखभाल में सुधार के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

रजोनिवृत्ति से गुजर रहीं महिलाओं में सामान्यतः गर्माहट के दौरे (Hot Flushes), अनिद्रा, थकान, योनि शुष्कता, मूड में उतार-चढ़ाव, चिंता और स्मरण शक्ति संबंधी समस्याएँ देखी जाती हैं। सुरक्षित और सहयोगी उपचार विकल्पों में बढ़ती रुचि के चलते कई महिलाएँ समग्र (Holistic) चिकित्सा पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद, की ओर रुख कर रही हैं। यह MoU पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा को एकीकृत करने वाले प्रमाणित प्रोटोकॉल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह के दौरान VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि आयुर्वेद आधारित उपचार, जब एलोपैथिक तरीकों के साथ सावधानीपूर्वक उपयोग किए जाते हैं, तो रजोनिवृत्ति से गुजर रही महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि धातु युक्त आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

CARI के प्रभारी डॉ. हेमंता पाणिग्रही ने बताया कि CCRAS आयुर्वेद के वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए दशकों से कार्यरत है। उन्होंने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में आयुर्वेद इकाई वर्ष 1996 से सक्रिय है और मरीजों की देखभाल तथा सहयोगात्मक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा, “प्रमाण-आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वीकृति मिल रही है, और यह साझेदारी एकीकृत अनुसंधान पद्धतियों को और मजबूत करेगी तथा जनसामान्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगी।”

यह सहयोग रजोनिवृत्ति देखभाल को बेहतर बनाने हेतु वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक हस्तक्षेप विकसित करने पर केंद्रित है, ताकि आधुनिक चिकित्सा को पूरक समर्थन मिल सके। इस पहल से मरीजों के परिणामों में सुधार, अनुसंधान क्षमता में वृद्धि और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. शिवशंकर राजपूत और प्रो. उपमा सक्सेना ने परियोजना के विवरण प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. चारु बाम्बा (मेडिकल सुपरिटेंडेंट), डॉ. श्वेता माता और डॉ. असीमा जैन भी उपस्थित रहीं।

यह MoU VMMC–सफदरजंग अस्पताल और आयुष मंत्रालय की ओर से सहयोगात्मक, मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में एकीकृत अनुसंधान के नए मानक स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


नारायणपुर में ITBP का निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं और ग्रामीणों को स्वास्थ्य एवं जागरूकता की सुविधा

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में, 29वीं बटालियन, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने धनोरा में COB परिसर में “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के तहत एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना और बल और समुदाय के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करना था।

इस शिविर में लगभग 150 महिलाओं, 50 पुरुषों और 20 बच्चों के साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और ITBP कर्मियों ने भाग लिया। मेडिकल सेवाएँ ITBP सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक ठाकुर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर धनोरा के डॉ. अविनाश शक्रदांडे और उनकी टीम द्वारा प्रदान की गईं। शिविर के दौरान स्वास्थ्य जांच कराई गई और आवश्यक चिकित्सीय सलाह दी गई।

महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिनमें स्वच्छता, संतुलित पोषण और मौसमी रोगों से सुरक्षा पर जानकारी दी गई। ग्रामीणों को “नशा मुक्त भारत अभियान” के महत्व के बारे में भी संवेदनशील किया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ITBP कर्मी, स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। यह पहल न केवल ITBP की सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि बल और समुदाय के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने में एक उत्कृष्ट प्रयास साबित हुई।

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान : महिलाओं के स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रव्यापी पहल

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स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान

देशभर में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान — जो कि 8वें राष्ट्रीय पोषण माह (17 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2025) के साथ संयोजन में आयोजित किया जा रहा है — का शुभारंभ 17 सितम्बर, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस अभियान के अंतर्गत, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, देशभर के 160 ईएसआई अस्पतालों में व्यापक स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद

अभियान के पहले दिन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद में महिलाओं के स्वास्थ्य, रोकथामात्मक देखभाल और सामुदायिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पूजा गोयल (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष) और डॉ. रोहित ढाका (सहायक प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) द्वारा किया गया। इस अवसर पर फैकल्टी सदस्य, मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ भी उपस्थित थे। इस पहल ने ईएसआईसी की प्रतिबद्धता को दर्शाया, जो कामकाजी महिलाओं और उनके परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है।

उद्योगिक स्वास्थ्य शिविर शाही एक्सपोर्ट प्रा. लि. एवं ध्रुव ग्लोबल लि. में आयोजित किए गए, जहाँ महिलाओं की गैर-संचारी रोगों (NCDs) और क्षय रोग (टीबी) के लिए प्रश्नावली आधारित स्क्रीनिंग की गई। जांच में हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, और क्लिनिकल परीक्षण शामिल थे। जीवनशैली से जुड़े रोग, मासिक धर्म स्वच्छता, टीकाकरण, पोषण और एनीमिया प्रबंधन पर परामर्श एवं जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। साथ ही, निक्षय मित्र पहल के अंतर्गत लाभार्थियों का पंजीकरण भी हुआ और टीबी संकल्प में भागीदारी हुई।

इसके अतिरिक्त, अस्पताल परिसर में रक्तदान शिविर भी आयोजित हुआ। स्वैच्छिक रक्तदाता और सिंगल डोनर प्लेटलेट (SDP) दाताओं को सम्मानित किया गया। सभी दाताओं की हीमोग्लोबिन और ब्लड ग्रुप की जांच की गई तथा रक्त को सुरक्षित संक्रमण हेतु वायरल मार्कर स्क्रीनिंग से जांचा गया। साथ ही, समुदाय में रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित हुए।

महिला स्वास्थ्य पर विशेष जोर देते हुए व्यापक स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें गर्भवती महिलाओं की जांच, पोषण मूल्यांकन, परामर्श और टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं एनीमिया की स्क्रीनिंग की गई। महिलाओं के लिए मौखिक, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की विशेष जांच की गई, जिनमें पैप स्मीयर टेस्ट भी शामिल था।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनतनगर, हैदराबाद

17 सितम्बर, 2025 को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनतनगर, हैदराबाद में हाल ही में निर्मित 200-बेड वाले अस्पताल भवन में इन-हाउस कैंप सेवाओं का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सौरव कुमार दत्ता (मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, ईएसआईसी) ने की और इस अवसर पर राजीव लाल (क्षेत्रीय निदेशक, ईएसआईसी, हैदराबाद) समेत वरिष्ठ अधिकारी एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

नई 200-बेड की सुविधा के साथ कैंप सेवाओं की शुरुआत ने ईएसआईसी सनतनगर की स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाया है, जिससे बीमित लाभार्थियों और आम जनता दोनों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक सुलभ होंगी।

अभियान के तहत अस्पताल परिसर में कई गतिविधियाँ आयोजित हुईं—

  • वार्षिक निवारक स्वास्थ्य जांच शिविर

  • रक्तदान शिविर और संकल्प

  • स्वच्छता ही सेवा संकल्प

  • योग सत्र

  • फार्माकोविजिलेंस सप्ताह समारोह

इन गतिविधियों ने ईएसआईसी की समग्र दृष्टि को उजागर किया, जिसमें स्वास्थ्य संवर्धन, रोग रोकथाम और सामुदायिक भागीदारी पर बल दिया गया।

निष्कर्ष

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत आयोजित इन गतिविधियों ने न केवल महिलाओं को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराईं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव, पोषण और महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों पर भी जागरूकता फैलाई। ईएसआईसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।


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