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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सरदार @150 यूनिटी मार्च—राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में की शिरकत

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भारत के उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन ने आज गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित सरदार @150 यूनिटी मार्च – राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन में शामिल होना एक महान सम्मान है। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की इस पवित्र भूमि की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।

14 लाख युवाओं की भागीदारी—एकता की ज्वाला आज भी प्रज्ज्वलित

उपराष्ट्रपति ने बताया कि पदयात्रा की शुरुआत 26 नवंबर—संविधान दिवस—को होना अत्यंत सार्थक है।
उन्होंने कहा कि 1,300 से अधिक पदयात्राओं में 14 लाख से ज्यादा युवाओं की भागीदारी यह साबित करती है कि सरदार पटेल द्वारा प्रज्ज्वलित राष्ट्रीय एकता की ज्योति आज भी उतनी ही उज्ज्वल है।

उन्होंने अपने पूर्व पदयात्रा अनुभवों को याद किया—जिसमें 19,000 किमी की रथयात्रा और तमिलनाडु, केरल एवं आंध्र प्रदेश में नदी जोड़ने, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता, अस्पृश्यता मिटाने और नशीले पदार्थों के विरुद्ध कई यात्राएँ शामिल थीं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी यात्राएँ लोगों से सीधे जुड़ने और राष्ट्रव्यापी संकल्प को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं।

‘भारत लौह पुरुष’ को नमन – 560 रियासतों के एकीकरण का ऐतिहासिक नेतृत्व

उन्होंने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा—

“भारत सदैव लौह पुरुष का ऋणी रहेगा, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव रखी।”

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का सपना आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा है।

तेजी से बढ़ता भारत—आर्थिक, सामाजिक, सामरिक प्रगति का दशक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, सैन्य और रणनीतिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है और अब वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर अग्रसर है।

युवा—भारत की ऊर्जा शक्ति

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवा देश की भविष्य ऊर्जा हैं, और जब वे एकता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो भारत को नवाचार और विकास का वैश्विक नेता बना सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से ‘नशीली दवाओं को ना कहने’ का आग्रह किया और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने, डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा में योगदान देने की सलाह दी।

नारी शक्ति—विकास से नेतृत्व की तरफ

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने देश के फोकस को महिला सशक्तिकरण से महिला-नेतृत्व विकास की ओर मोड़ दिया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा—भारत की अडिग प्रतिबद्धता

उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमताएँ कई गुना बढ़ी हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत की संप्रभुता की रक्षा और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के संकल्प को प्रदर्शित किया।

श्रम सुधार—नए भारत की पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था

उपराष्ट्रपति ने चार नए श्रम संहिताओं को एक बड़ा सुधार बताते हुए कहा कि यह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास की भावना का प्रतिबिंब है, जिसने भारत के श्रम ढांचे को आधुनिक, पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित बनाया है।

अमृतकाल में विकसित भारत 2047 की ओर

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय पदयात्रा का समापन विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा पर होना केवल सरदार पटेल को श्रद्धांजलि ही नहीं, बल्कि नए भारत की भावना को भी सलाम है।
उन्होंने कहा कि अमृतकाल में भारत विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, और सरदार पटेल के आदर्श ही इस यात्रा के पथप्रदर्शक बने रहेंगे।

10-दिवसीय राष्ट्रीय पदयात्रा—आत्मनिर्भरता और पर्यावरण चेतना का प्रतीक

करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक 180 किमी की यह 10-दिवसीय पदयात्रा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण जागरूकता का संदेश समेटे हुए थी, जो प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संदेश पुनः स्थापित करती है।

कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री रक्ष खडसे, टोखन साहू सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।


Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर युवाओं और नागरिकों की भारी भागीदारी

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MY Bharat, युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा ने आज अपने चौथे दिन का उत्साहजनक आगाज़ किया। 26 नवंबर 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर अानंद से शुरू हुई यह पदयात्रा पूरे देश के युवाओं को एकजुट करने और भारत की एकता के वास्तुकार को सम्मानित करने के लिए आयोजित की जा रही है।

पदयात्रा की विस्तृत पहुंच

शुरुआत से ही पदयात्रा में असाधारण सहभागिता रही है। अब तक 15.5 लाख से अधिक नागरिकों ने 640 जिलों, 1,524 पदयात्राओं, 451 लोकसभा क्षेत्रों और 23,820 से अधिक संस्थानों में भाग लिया है।

  • क़रमसाद से केवड़िया तक राष्ट्रीय पदयात्रा ने चौथे दिन तक 57 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें समुदायों, युवा समूहों और MY Bharat स्वयंसेवकों का उत्साहपूर्ण सहयोग दिखाई दिया।

चौथे दिन की यात्रा

चौथे दिन की यात्रा में यश कॉम्प्लेक्स, ISKCON मंदिर (गोत्री रोड), BPCL चार्जिंग स्टेशन, ब्रह्माकुमारी अतलदरा और अतलदरा BAPS मंदिर शामिल थे।
इस अवसर पर पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री, वाणिज्य और उद्योग, पदयात्रा में शामिल हुए और युवाओं को प्रेरित किया।

अतलदरा BAPS मंदिर में विशेष कहानी कथन सत्र “सरदार गाथा: द डैज़लिंग कमांडर” आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित रहे:

  • डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री, युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार

  • जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

  • रवनीत सिंह बिट्टू, राज्य मंत्री, रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

MLAs, MPs और अन्य वरिष्ठ स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

जेपी नड्डा का संदेश

जे.पी. नड्डा ने सरदार पटेल के अद्वितीय योगदान और एकता की भावना को याद करते हुए कहा कि पटेल ही सच्चे राष्ट्रपुरुष थे, जिन्होंने एकीकृत भारत की नींव रखी। उन्होंने पटेल की लंदन में कानूनी शिक्षा, अहमदाबाद में प्रारंभिक सुधार, बारडोली आंदोलन और अहमदाबाद नगर निगम अध्यक्ष के रूप में योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि 1.6 करोड़ भारतीयों के लिए एकता का प्रतीक है।

मनसुख मांडविया का संदेश

डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की और कहा कि गुजरात में राष्ट्रीय पदयात्रा हर निर्वाचन क्षेत्र तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि यह एकता मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प का साकार दर्शन है।

नर्मदा और गोदावरी प्रवाह

  • नर्मदा प्रवाह, नागपुर से शुरू होकर पदयात्रा में शामिल हुआ।

  • गोदावरी प्रवाह, मुंबई से रवाना होकर मार्ग में है।
    ये प्रतीकात्मक रूप से भारत के नदी क्षेत्रों को एकजुट कर रहे हैं।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय गतिविधियाँ

  • स्मृति वन में प्राथमिक स्कूल के छात्रों द्वारा बनाई गई सरदार पटेल की चित्रकला प्रदर्शित की गई।

  • वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

प्रदर्शनियाँ और ग्राम सभा

  • नवलखी ग्राउंड, वडोदरा में “राज्य समेकन के सरदार – राष्ट्र की मौन क्रांति” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

  • दिन का समापन ग्राम सभा से हुआ, जिसमें डायरो प्रस्तुतियाँ, सामुदायिक चर्चाएँ और सरदार पटेल के आदर्शों का सामूहिक reaffirmation शामिल था।

समापन

Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा Statue of Unity की ओर बढ़ते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी, साझा प्रयास और राष्ट्रीय गर्व के माध्यम से पूरे भारत को एकजुट करने का संदेश दे रही है।


राष्ट्रीय पदयात्रा: ‘Sardar@150 Unity March’ 26 नवंबर से होगा प्रारंभ

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युवा शक्ति के साथ देशभर में एकता का भव्य संदेश

भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (MYAS) द्वारा MY भारत के माध्यम से Sardar@150 Unity March की राष्ट्रीय पदयात्रा का आयोजन 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर शास्त्री मैदान, वल्लभ विद्यापनगर से किया जा रहा है। पिछले कई सप्ताहों से देशभर में चल रहे व्यापक एकता अभियानों के बाद यह राष्ट्रीय पदयात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत–श्रेष्ठ भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए एक ऐतिहासिक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।

राष्ट्रीय पदयात्रा का शुभारंभ

पदयात्रा की शुरुआत कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी, जिनमें शामिल हैं—

  • गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल

  • त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा

  • केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल

  • केंद्रीय राज्यमंत्री निमुबेन् बाम्भनिया

  • गुजरात सरकार के वरिष्ठ मंत्री

  • गुजरात विद्यापीठ और सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति

  • पैरा ओलंपिक पदक विजेता सपना व्यास और मानसी जोशी

  • पूर्व क्रिकेटर राकेश चौहान

  • हजारों MY भारत स्वयंसेवक और युवा प्रतिभागी

अब तक की उपलब्धियाँ: देशभर में जबरदस्त उत्साह

24 नवंबर तक अभियान ने देश के 780 में से 613 जिलों को कवर कर लिया है।

  • अब तक 1,422 पदयात्राएँ विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित

  • 431 लोकसभा क्षेत्रों को कवर

  • कुल 7,200 किलोमीटर की दूरी तय

  • 14.3 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी

इन पदयात्राओं में 2 से 15 किलोमीटर के मार्ग शामिल रहे, जिन्हें स्थानीय इतिहास और संस्कृति के आधार पर चुना गया।

26 नवंबर का कार्यक्रम

पदयात्रा की शुरुआत सुबह 9 बजे सरदार पटेल के करमसद स्थित पैतृक निवास पर पुष्पांजलि से होगी। इसके बाद शास्त्री मैदान, वल्लभ विद्यापनगर में सरदार सभा का आयोजन होगा, जिसमें सरदार पटेल के योगदान और उनके विचारों पर चर्चा होगी।

दोपहर 12 बजे पदयात्रा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जाएगी। यह 11 दिनों में लगभग 180 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 6 दिसंबर को केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुँचकर संपन्न होगी।

पहले दिन का मार्ग

पहले दिन पदयात्रा निम्न स्थानों से गुजरेगी—
सदर पटेल विश्वविद्यालय → शहीद चौक → भाईकाका सर्कल → टाउन हॉल सर्कल → बोरसद चोकड़ी → जिटोडिया रोड → अंधारिया चोकड़ी → नवली (रात्रि विश्राम)

नवली में स्थानीय लोककला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंवाद आयोजित होंगे।

150 थीम आधारित पड़ाव

पूरे मार्ग में 150 विशेष थीम-स्टॉप बनाए गए हैं जहाँ—

  • प्रदर्शनियाँ

  • स्थानीय हस्तशिल्प

  • सरकारी योजनाओं की जानकारी

  • युवा संवाद और इंटरैक्टिव सत्र

आयोजित किए जाएंगे। हर दिन ‘सरदार गाथा’ के माध्यम से सरदार पटेल के जीवन के प्रेरक प्रसंगों का वाचन होगा।

स्वदेशी भावना के साथ सामुदायिक सहभागिता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के संदेश को आगे बढ़ाते हुए—

  • प्रतिभागियों को खादी पहनने के लिए प्रेरित किया जाएगा

  • स्थानीय कलाकारों व महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल लगाए जाएंगे

  • ‘एक पेड़ माँ के नाम’, स्वच्छता ड्राइव, ग्राम सभाओं जैसी गतिविधियाँ होंगी

6 दिसंबर: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्रीय समापन कार्यक्रम

पदयात्रा 6 दिसंबर को केवड़िया पहुँचकर समापन करेगी, जहाँ सभी प्रतिभागी मिलकर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देंगे—जिनके नेतृत्व ने 562 रियासतों को जोड़कर आधुनिक भारत की नींव रखी।


गुजरात की धरती पर बस्तर का सम्मान — एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ने दिखाया विकास का नया मॉडल

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नए छत्तीसगढ़ की झलक देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुए प्रभावित

एकता नगर(गुजरात)- गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज आयोजित एकता परेड में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सभी का मन मोह लिया। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय जीवन, परंपराओं और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और सशक्त संदेश से सबका ध्यान आकर्षित किया।

झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौर नृत्य ने बस्तर की आन-बान और सामूहिकता की भावना को सजीव कर दिया। उनके पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों की गूंज और लोक उल्लास की प्रतीक बनी। वहीं, नंदी का चित्रण बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की परंपरा को अभिव्यक्त करता नजर आया।

झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। कभी नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है। अब यहाँ बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है।

झांकी के अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता का प्रतीक बनी। संपूर्ण झांकी की ढोकरा शिल्पकला से की गई सजावट ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और परंपरागत कौशल को दर्शाया।

छत्तीसगढ़ की यह झांकी न केवल अपनी संस्कृति और कला में समृद्ध है, बल्कि यह बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी कहती है। झांकी ने दिखाया कि आज का नया बस्तर परंपरा, प्रकृति और विकास का सुंदर संगम बन चुका है। कभी दुर्गम और पहुँच से दूर रहने वाले इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, जिन पर बच्चों के स्कूल जाने की चहल-पहल सुनाई देती है और स्कूलों में घंटियाँ बजने लगी हैं।

गांवों में बिजली की रौशनी और इंटरनेट की पहुँच ने नई आशाएँ जगाई हैं। युवाओं में कुछ करने, आगे बढ़ने का जोश दिखाई देता है। महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं — हस्तशिल्प, वनोपज और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। लोग अब विकास पर भरोसा करने लगे हैं।

यह झांकी इस विश्वास का प्रतीक है कि बस्तर अब सिर्फ़ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ते एक नए युग के लिए भी जाना जा रहा है।


एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने देशभर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों के प्रजेंटेशन देखे। हर राज्य ने अपनी थीम, मॉडल और विचार समिति के सामने प्रस्तुत किए। इसी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चयनित किया गया।

अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल हुईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता नगर में ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी — भारत की शाही विरासत और राष्ट्रीय एकता को समर्पित एक भव्य पहल

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परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर, साझा विरासत और एकता के संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी। यह संग्रहालय भारत की शाही और राजवंशीय विरासत को सम्मान देने का एक भव्य प्रयास है, जो ₹367 करोड़ की अनुमानित लागत से एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में पाँच एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित यह संग्रहालय भारत के शाही राज्यों और राजवंशों की गौरवशाली धरोहर को संरक्षित और प्रदर्शित करेगा। इसमें विभिन्न राजवंशों और रियासतों से संबंधित राजचिह्न, कलाकृतियाँ, वस्त्र, पांडुलिपियाँ, चित्रकला और अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। चार थीम आधारित गैलरियों के माध्यम से यह संग्रहालय आगंतुकों को एक इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान करेगा, जो इतिहास, एकता और त्याग की भावना से प्रेरित करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की स्वतंत्रता के समय, देश ब्रिटिश प्रशासनिक क्षेत्रों और 550 से अधिक रियासतों में विभाजित था। इन रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में, रियासतों के शासकों को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के माध्यम से भारत में विलय के लिए राज़ी किया गया। 1949 तक लगभग सभी रियासतें भारतीय संघ का हिस्सा बन गईं, जिसने एक एकीकृत और संप्रभु गणराज्य की नींव रखी। यह शांतिपूर्ण एकीकरण भारत की कूटनीतिक कुशलता, समावेशिता और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक है।

मुख्य उद्देश्य

इस संग्रहालय की स्थापना निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ की जा रही है:

  • भारत की शाही और रियासती विरासत का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करना।

  • उन ऐतिहासिक कलाकृतियों और अभिलेखों को संरक्षित करना जो भारत की सांस्कृतिक एकता और पहचान को दर्शाते हैं।

  • जनता को भारत के एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया, रियासतों के योगदान और शासन के विकास के बारे में शिक्षित करना।

  • भारत की शाही और लोकतांत्रिक विरासत पर शोध, संरक्षण और सार्वजनिक अधिगम का एक प्रमुख केंद्र बनना।

मुख्य डिज़ाइन विशेषताएँ

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से प्रेरित होकर, संग्रहालय में एक इंटरएक्टिव और अनुभवात्मक अधिगम गैलरी होगी, जो इतिहास को जीवंत तरीके से प्रस्तुत करेगी।

  • संग्रहालय की वास्तुकला प्राकृतिक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बिठाती है, जिसमें जल निकाय, फव्वारे, आंगन और उद्यान प्रमुख संरचनात्मक तत्व हैं।

  • प्रवेश द्वार शाही बाग़ों से प्रेरित लैंडस्केप के माध्यम से होगा, जो अंदर की भव्यता का अनुभव कराएगा।

  • यात्रा का समापन म्यूज़ियम कैफ़े में होगा, जहाँ पर्यटक राजसी व्यंजन का आनंद लेते हुए अपने अनुभव पर विचार कर सकेंगे।

गैलरी अवलोकन

  1. गैलरी 1: ओरिएंटेशन गैलरी – फिल्मों और ऑडियो-विज़ुअल माध्यमों के ज़रिए शाही इतिहास और संग्रहालय की कहानी का परिचय।

  2. गैलरी 2: “द थ्रोन एंड द स्टेट” – राजपरिवारों, शासन व्यवस्था, जनकल्याण नीतियों और प्रजा के प्रति उनके स्नेह को प्रदर्शित करेगी।

    • व्यूइंग लाउंज और डेक से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नर्मदा नदी का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।

  3. गैलरी 3: “द स्टोरी ऑफ़ इंडिया’स इंटीग्रेशन” – भारत के राजनीतिक एकीकरण से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और दस्तावेज़ों को प्रदर्शित करेगी।

  4. गैलरी 4: “हॉल ऑफ यूनिटी” – सभी रियासतों के प्रतीक और चिन्हों को प्रदर्शित करेगी, जिन्होंने भारत की एकता में योगदान दिया।

निष्कर्ष

रियासतों का एकीकरण स्वतंत्र भारत की असाधारण उपलब्धि है, जो "एकता में विविधता" की भावना का प्रतीक है। प्रस्तावित ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का उत्सव मनाएगा, भारत की शाही विरासत को संरक्षित करेगा और उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रदर्शित करेगा।

यह संग्रहालय अतीत की विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम होगा — एक जीवंत प्रतीक के रूप में, जो भारत की सांस्कृतिक एकता और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता की शपथ दिलाई

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस – 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकता प्रतिज्ञा भी दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह निर्णय लिया है कि इसे पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर सरदार पटेल ने अपने वकालत के पेशे को त्याग दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1928 के बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व कौशल की सच्ची झलक देखने को मिली, जब किसानों के साथ अन्याय के विरोध में आंदोलन छेड़ा गया। यह आंदोलन जो एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और ब्रिटिश शासन को किसानों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी और वे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के 562 रियासतों में विभाजन की चुनौती थी और यह प्रश्न उठता था कि इतनी बिखरी हुई रियासतों वाला देश एकजुट भारत कैसे बनेगा।अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल के अथक प्रयास, दृढ़ निश्चय और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों का विलय संभव हुआ और वर्तमान भारत का नक्शा आकार में आया। काठियावाड़, भोपाल, जूनागढ़, जोधपुर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी रियासतों ने अलग रहने की कोशिश की, लेकिन सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति ने उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का केवल एक अधूरा कार्य शेष रह गया था — कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर वह कार्य पूरा किया, जो सरदार पटेल का सपना था, और आज हमारे सामने वास्तविक रूप से एकीकृत भारत है।

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब देश के लोग तिरंगा फहरा रहे थे, तब सरदार पटेल नौसेना के युद्धपोत की निगरानी कर रहे थे। उस समय लक्षद्वीप पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठा था, और सरदार पटेल ने तत्काल नौसेना को वहाँ भेजकर तिरंगा फहरवाया, जिससे लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग बन गया।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न प्राप्त करने में 41 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल के योगदान के अनुरूप कोई भव्य स्मारक भी नहीं बनाया गया था। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने केवडिया में एक भव्य स्मारक — स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — बनाने का संकल्प लिया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर 2013 को रखी गई और केवल 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा तैयार हुई, जो आज पूरे देश की एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, और इस प्रतिमा के निर्माण में उपयोग किए गए लगभग 25,000 टन लोहे का संग्रह किसानों के उपकरणों को पिघलाकर किया गया। प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे का प्रयोग हुआ। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण कर चुके हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मार्ग पर चलकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की नींव रखी, उसी मार्ग पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केवडिया में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने सरदार पटेल को भव्य परेड के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष यह एकता परेड इसी भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी विशेष रूप से मनाए जा रहे हैं।अमित शाह ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक पूरे देश में सरदार पटेल के विचारों को विशेषकर युवाओं तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की प्रतिज्ञा ले रहे हैं, वही भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होंगे।

अमित शाह ने पटना में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस 2025 के आयोजन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया

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गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पटना, बिहार में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय एकता दिवस–2025 और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर होने वाले उत्सवों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देश को एकजुट करने, आज के भारत की नींव रखने और एक अखंड राष्ट्र के निर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ष 31 अक्टूबर को केवड़िया में सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के समक्ष आयोजित परेड में शामिल होते हैं। इस वर्ष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर विशेष आयोजन किया जा रहा है और गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि हर वर्ष 31 अक्टूबर को यह भव्य परेड आयोजित की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि यह परेड केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और राज्यों की पुलिस बलों के सम्मान में आयोजित की जाती है, जिससे देश की एकता और अखंडता के संकल्प को दोहराया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष “रन फॉर यूनिटी” कार्यक्रम को और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जो देशभर के सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलों, पुलिस थानों, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में आयोजित होगा। इसके पश्चात् सभी नागरिक “राष्ट्रीय एकता प्रतिज्ञा” भी लेंगे।

गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचारधारा हैं। वे न केवल स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे, बल्कि महात्मा गांधी के साथ मिलकर उन्होंने आंदोलन को संगठित ढांचा भी प्रदान किया। उन्होंने बताया कि 1928 का बारडोली सत्याग्रह किसानों के शोषण के खिलाफ था और इसी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी थी।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय ब्रिटिशों ने भारत को 562 रियासतों में विभाजित कर दिया था, और पूरी दुनिया को यह असंभव लग रहा था कि इन रियासतों को एक देश में जोड़ा जा सके। लेकिन सरदार पटेल ने अपने अद्भुत कौशल और दूरदर्शिता से बहुत कम समय में इन सभी रियासतों का भारत में विलय कर आधुनिक भारत का नक्शा तैयार किया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने हैदराबाद, जूनागढ़, भोपाल, काठियावाड़, त्रावणकोर और जोधपुर जैसे राज्यों की जटिल समस्याओं का समाधान किया और पाकिस्तान की साजिशों को भी नाकाम किया। उन्होंने कहा कि जब 15 अगस्त 1947 को देश आज़ादी मना रहा था, तब सरदार पटेल नौसेना के अधिकारियों के साथ नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे, ताकि लक्षद्वीप भारत का हिस्सा बन सके।

गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल जैसे महान व्यक्तित्व को स्वतंत्रता के बाद भुलाने का प्रयास किया गया और उन्हें भारत रत्न मिलने में 41 वर्ष की देरी हुई। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने सरदार पटेल की स्मृति में “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” की परिकल्पना की और मात्र 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा निर्मित हुई।

इस प्रतिमा के निर्माण में देशभर के किसानों के औज़ारों से इकट्ठा किया गया लोहा प्रयोग हुआ। 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे से निर्मित यह प्रतिमा आज भारत की अभियांत्रिकी क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। अब तक 2.5 करोड़ से अधिक लोग यहाँ आ चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 15,000 लोग इस स्थल का भ्रमण करते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर की सुबह एकता नगर में आयोजित भव्य परेड में सलामी लेंगे। इस परेड में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस बलों, महिला पुलिस अधिकारियों, वीरता पदक प्राप्त जवानों और भारतीय वायुसेना की “सूर्य किरण” टीम का शानदार एयर शो शामिल होगा। 900 से अधिक कलाकार भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर प्रस्तुत करेंगे।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष 31 अक्टूबर को यह परेड आयोजित की जाएगी, जो युवाओं को प्रेरित करेगी और देश में एकता व अखंडता की भावना को और मजबूत करेगी।

उन्होंने अंत में कहा कि हमें मिलकर सरदार पटेल के आदर्शों पर चलकर “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का सशक्त वातावरण निर्मित करना है।

राष्ट्रीय एकता दिवस 2025: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उत्सव

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परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में देश की एकता, अखंडता और विविधता में एकता के मूल्यों को सम्मान देने हेतु मनाया जाता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इस दिवस का उद्देश्य नागरिकों को देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता के प्रति संकल्पबद्ध करना है।

राष्ट्रीय एकता दिवस पहली बार वर्ष 2014 में मनाया गया था, जब भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से घोषित किया। 31 अक्टूबर 2015 को आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (Ek Bharat Shreshtha Bharat)’ पहल की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना है।

2025 का वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष है।

सरदार पटेल की विरासत

भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत के राजनीतिक एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 560 से अधिक रियासतों — जो देश के लगभग 40% क्षेत्र और जनसंख्या को कवर करती थीं — को भारत संघ में विलय कराया।
‘स्टेट्स डिपार्टमेंट’ के प्रमुख के रूप में उन्होंने कूटनीति, संवाद और आवश्यकतानुसार प्रशासनिक दृढ़ता का प्रयोग करते हुए देश के विखंडन को रोका और भारत की भौगोलिक एकता सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में आधुनिक भारत की एकीकृत लोकतांत्रिक संरचना की नींव पड़ी।

पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) की स्थापना की, जिसे उन्होंने देश की “इस्पाती ढांचा (Steel Frame)” कहा — जो आज भी राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक स्थिरता का आधार है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत – सरदार पटेल के दृष्टिकोण की निरंतरता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को आरंभ की गई ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB)’ पहल, सरदार पटेल के एकीकृत भारत के दृष्टिकोण का मूर्त रूप है।
यह कार्यक्रम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है, जिससे “विविधता में एकता” का संदेश सशक्त हो सके।

मुख्य उद्देश्य:

  • नागरिकों के बीच भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना

  • राज्यों के बीच संवाद और साझेदारी बढ़ाना

  • भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना

  • पारस्परिक समझ और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना

EBSB से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम:

  • भाषा संगम ऐप – 22 आधिकारिक भाषाओं में 100 से अधिक वाक्यों को सीखने हेतु

  • युवा संगम एवं EBSB क्लब्स – युवाओं के लिए अंतर-राज्यीय संवाद मंच

  • काशी-तमिल संगमम् – उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक बंधन का उत्सव

  • My Bharat डिजिटल पोर्टल – नागरिक सहभागिता, क्विज़ और अभियान

  • Dekho Apna Desh एवं EBSB वॉल जैसी डिजिटल पहलें – देश की विविधता का उत्सव

2025 के आयोजन और कार्यक्रम

इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह सरदार पटेल की 150वीं जयंती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में आयोजित मुख्य समारोह में भाग लेंगे।

मुख्य कार्यक्रमों की झलक:

  • मुख्य परेड स्थल: एकता नगर, नर्मदा जिला

  • विशेष प्रदर्शन: वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम द्वारा एयर शो

  • भागीदारी: 9 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 16 मार्चिंग दस्ते, 4 CAPF इकाइयाँ, NCC कैडेट्स, महिला अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर

  • सांस्कृतिक झांकियाँ: “विविधता में एकता” थीम पर आधारित 900 कलाकारों का प्रदर्शन

  • भारत पर्व (1–15 नवंबर): विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल और बिरसा मुंडा जयंती विशेष समारोह

  • Run for Unity: दिल्ली में राजघाट से लाल किला तक आयोजित मैराथन, जिसमें छात्र, विकलांगजन, और सुरक्षा बल शामिल होंगे

  • ₹280 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ

देशी नस्ल के कुत्तों की परेड

इस वर्ष की परेड में रामपुर हाउंड्स और मुढ़ोल हाउंड्स (BSF के भारतीय नस्ल के कुत्ते) का दल भी शामिल होगा। यह “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को प्रदर्शित करेगा।
इन कुत्तों ने राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘रिया’ नामक मुढ़ोल हाउंड, जिसने ‘ऑल इंडिया पुलिस डॉग प्रतियोगिता’ में प्रथम स्थान प्राप्त किया, दल का नेतृत्व करेगी।

Sardar@150 Unity March

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा My Bharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से “Sardar@150 Unity March” का आयोजन किया जा रहा है।
यह यात्रा युवाओं में एकता, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: 6 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा

  • प्रतियोगिताएँ: सोशल मीडिया रील्स, निबंध लेखन, Sardar@150 Young Leaders प्रोग्राम

  • पहला चरण (31 अक्टूबर – 25 नवंबर): सभी जिलों में पदयात्राएँ, निबंध-वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, महिला कल्याण शिविर आदि

  • राष्ट्रीय पदयात्रा (26 नवंबर – 6 दिसंबर): करमसद (पटेल का जन्मस्थान) से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया) तक 152 किमी की यात्रा

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की उस दूरदर्शी नेतृत्व की याद दिलाता है, जिसने विभाजित रियासतों को जोड़कर एक भारत की नींव रखी।
  • आज यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि नागरिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण की सतत प्रेरणा बन चुका है।
  • ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के माध्यम से यह उत्सव अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि सालभर चलने वाला जन आंदोलन बन गया है — जो भारत की विविधता में एकता के अमर मंत्र को जीवंत रखता है।

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