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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में आयोजित राजगोपुरम उद्घाटन, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह कार्यक्रम कर्नाटक के बेलगावी जिले के श्री क्षेत्र यादुर में आयोजित हुआ।

मुख्य बातें

  • उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आध्यात्मिक पुनर्जागरण और सभ्यतागत पुनः पुष्टि का क्षण बताया।

  • उन्होंने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं बल्कि एक जीवंत सभ्यता है, जो सिंधु घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक चेतना की निरंतर धारा के रूप में बहती आई है।

  • उन्होंने बताया कि यही वह पवित्र भूमि है जहाँ वेदों का ज्ञान पहली बार सुना गया और जहाँ भगवद् गीता का संदेश आज भी मानवता को साहस से कर्म करने, धर्मपूर्वक जीवन जीने और श्रद्धा से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

हिंदू दर्शन पर विचार

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू चेतना केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है।
उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् – पूरी दुनिया एक परिवार है” के सिद्धांत को भारत की आध्यात्मिक दृष्टि का आधार बताया, जो प्रकृति और हर मानव में दिव्यता देखती है।

वीरशैव-लिंगायत परंपरा

उन्होंने वीरशैव लिंगायत परंपरा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस परंपरा ने कर्नाटक और पड़ोसी महाराष्ट्र में आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संतों को श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कादसिद्धेश्वर स्वामीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने इस पवित्र स्थल को पुनः खोजकर और पुनर्जीवित कर सनातन धर्म की ज्योति को फिर से प्रज्ज्वलित किया।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म समय की परीक्षा से गुजर सकता है, लेकिन कभी मिट नहीं सकता।

विकास और विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न “विकास भी, विरासत भी” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक रूप से प्रभावशाली राष्ट्र बन रहा है, लेकिन साथ ही अपनी सभ्यतागत जड़ों से भी जुड़ा हुआ है।

अन्य गणमान्य लोग

इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं:

  • थावरचंद गहलोत – कर्नाटक के राज्यपाल

  • एम. बी. पाटिल – कर्नाटक सरकार में मंत्री

  • श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी

  • इरन्ना कडाडी– राज्यसभा सांसद

साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धार्मिक नेता भी इस समारोह में उपस्थित रहे।



कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव - मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ विकसित प्रदेश बनने तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है। उन्होंने संत समागम समारोह दामाखेड़ा की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कल रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ श्री उदित मुनि नाम साहेब,पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है। नक्सलवाद का प्रदेश से 31 मार्च 2026 तक समूल नष्ट हो जाएगा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हैं। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथी श्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही विदेशों से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। 

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा सहित सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के शांति प्रिय धरा में कबीरपंथ का है व्यापक प्रभाव -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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डबल इंजन की सरकार से लोगों को मिल रहा है फायदा, विकसित प्रदेश बनने छत्तीसगढ़ तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सतगुरु कबीर संत समागम समारोह दामाखेड़ा में हुए शामिल 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ उदित मुनि नाम साहेब,पंथ प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस दौरान संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब  छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है।31 मार्च 2026 तक प्रदेश से समूल नष्ट होग़ा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। डबल इंजन की सरकार का फायदा लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे है। आज के कार्यक्रम में पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते है। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथीश्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया की इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतो के साथ ही विदेशो से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने मेला संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से 75 लाख रूपये करने पर मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व  विधायक शिवरतन शर्मा सहित  सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथी उपस्थित थे।

राजिम त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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साहू समाज का सामूहिक विवाह कार्यक्रम सामाजिक उत्थान की मिसाल —मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव में हुए शामिल

रायपुर- राजिम भक्तिन माता एवं माता कर्मा के बताए संदेश मानव समाज के लिए कल्याणकारी है, हमें उनके संदेशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय ने आज राजिम के त्रिवेणी संगम में आयोजित भक्त माता राजिम जयंती महोत्सव को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने भगवान राजीव लोचन एवं भक्त माता राजिम की पूजा अर्चना कर प्रदेश और समाज की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहू सृजन पत्रिका का विमोचन किया। साहू समाज द्वारा मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया। 



मुख्यमंत्री साय ने राजिम माता भक्ति जयंती की बधाई देते हुए कहा कि साहू समाज समृद्ध और शिक्षित समाज है जो हर दृष्टिकोण से समृद्ध रहा है। साहू समाज का इतिहास भी समृद्ध रहा है। हम सबको दानवीर भामाशाह,बाबा सत्यनारायण जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह समाज निरंतर विकास करें। यही कामना है। जब समाज एक जुट होगा तो केवल समाज ही नहीं प्रदेश और देश भी शक्तिशाली और समृद्ध बनता है। 

मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के सामूहिक विवाह को अनुकरणीय पहल बताते हुए कहा कि राजिम माता ने जिस साहू समाज को अपनी मेहनत और त्याग से संगठित किया, आज वह समाज शिक्षा, कृषि व व्यवसाय सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राजिम माता के आशीर्वाद से हर गारंटी को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ खनिज, वन, उर्वरा से भरपूर है। अब नक्सलवाद से जवान पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हम सबका संकल्प है कि 31 मार्च तक बस्तर को नक्सल मुक्त कर देंगे। राज्य के विकास में बाधक नक्सलवाद अब खत्मा की ओर है। राज्य को हम सब समृद्धि की दिशा में लेकर जाएंगे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सिरकट्टी आश्रम में भव्य राम जानकी मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की गई। इस पुण्य अवसर पर हमें शामिल होने का सौभाग्य मिला। जैसे अयोध्या धाम में धर्म ध्वजा स्थापना किए हैं, उसी तर्ज पर यहां कुटेना में भी धर्म ध्वजा स्थापित किया गया है। मेरा सौभाग्य है कि एक साल पहले भी इस अवसर पर शामिल होने का अवसर मिला था। 

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने कहा कि साहू समाज एक संगठित समाज के रूप में जाना जाता है। आज हम सभी राजिम माता की जयंती मनाने आये हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के इस पावन धरती से प्रेरणा लेकर जाएंगे और मिलकर समाज के विकास के लिए काम करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि माता राजिम भक्तीन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि राजिम त्याग, भूमि तपस्या, साधना और श्रम की भूमि है। भगवान को खिचड़ी खिलाने वाले समाज से हमारा समाज का नाता है। हम अपने पुरखों के योगदान को याद करके समाज को आगे ले जा सकते हैं। शिक्षा और संस्कार भी जरूरी है। 

इस अवसर पर साहू समाज के प्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव रोहित यादव, आईजी बस्तर सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘टाइमलेस विज़डम ऑफ भारत’ सम्मेलन को किया संबोधित

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 दिसंबर 2025) हैदराबाद में ब्रह्माकुमारीज़ शांति सरोवर द्वारा आयोजित ‘टाइमलेस विज़डम ऑफ भारत: शांति और प्रगति के मार्ग’ विषयक सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन ब्रह्माकुमारीज़ शांति सरोवर की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक समुदाय आज अनेक परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, सामाजिक संघर्ष, पारिस्थितिक असंतुलन और मानवीय मूल्यों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने हैं। ऐसे समय में इस सम्मेलन का विषय अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक विकास से सुख और शांति प्राप्त नहीं होती, बल्कि आंतरिक स्थिरता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण भी आवश्यक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा ने हमें सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। हमारी आध्यात्मिक विरासत विश्व की मानसिक, नैतिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। आधुनिकता और अध्यात्म का संगम हमारी सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’—संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना—आज वैश्विक शांति की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अध्यात्म सामाजिक एकता और राष्ट्रीय प्रगति की सशक्त नींव है। जब व्यक्ति मानसिक स्थिरता, नैतिक मूल्यों और आत्मसंयम का विकास करता है, तो उसका व्यवहार समाज में अनुशासन, सहिष्णुता और सहयोग को बढ़ावा देता है। आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित लोग अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय योगदान देते हैं।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारीज़ संगठन दशकों से भारतीय सार्वभौमिक मूल्यों का प्रसार विभिन्न देशों में कर रहा है। यह संगठन लोगों के बीच शांति और सकारात्मकता का संचार कर समाज के नैतिक और भावनात्मक ताने-बाने को मजबूत कर रहा है। इस प्रकार यह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आदि जगद्गुरु श्री शिवरात्रेश्वर शिवयोगी महास्वामी जी की 1066वीं जयंती समारोह का किया उद्घाटन

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 दिसंबर, 2025) कर्नाटक के मांड्या जिले के मालवल्ली में आदि जगद्गुरु श्री शिवरात्रेश्वर शिवयोगी महास्वामी जी की 1066वीं जयंती समारोह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि युगों-युगों से संतों ने अपनी ज्ञानवाणी और करुणा के माध्यम से मानवता को आलोकित किया है। उनके जीवन हमें यह स्मरण कराते हैं कि सच्ची महानता सत्ता या धन में नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और आध्यात्मिक शक्ति में निहित है। ऐसे महान संतों में आदि जगद्गुरु श्री शिवरात्रेश्वर शिवयोगी महास्वामी जी प्रकाश और प्रेरणा के एक उज्ज्वल दीप के रूप में विराजमान हैं।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि मठ के मार्गदर्शन और संरक्षण में जेएसएस महाविद्यापीठ शिक्षा और सामाजिक विकास को समर्पित भारत की प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में फैले इसके अनेक संस्थान युवाओं के निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उत्थान, संस्कृति संरक्षण और समावेशी समाज की नींव मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि तीव्र परिवर्तन और अनिश्चितताओं के इस युग में सामाजिक समरसता, नैतिक नेतृत्व, युवा सशक्तिकरण और आंतरिक दृढ़ता के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए हमें तकनीक की शक्ति के साथ-साथ मूल्यों की मजबूती भी चाहिए। एक विकसित भारत के लिए आधुनिक शिक्षा और नैतिक ज्ञान, नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी, आर्थिक वृद्धि और सामाजिक समावेशन, तथा प्रगति और करुणा का समन्वय आवश्यक है। भारत सरकार इसी समग्र दृष्टि के साथ कार्य कर रही है। सुत्तूर मठ जैसी संस्थाएं इस राष्ट्रीय प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति हमारा युवा वर्ग है—उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता, मूल्य और चरित्र। भारत का भविष्य केवल उनके कौशल और ज्ञान से ही नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी और उद्देश्यबोध से भी आकार लेगा। उन्होंने सुत्तूर मठ जैसी संस्थाओं से युवाओं को प्रेरित करने, जिम्मेदार नागरिकों का निर्माण करने और आने वाले भारत के शिल्पकारों का मार्गदर्शन जारी रखने का आग्रह किया।


भूटान सरकार के अनुरोध पर भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन 25 नवंबर तक बढ़ाया गया

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भूटान की राजकीय सरकार के विनम्र अनुरोध पर, भारत से लाए गए भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेषों का थिंपू में जारी प्रदर्शन आधिकारिक रूप से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। यह प्रदर्शन, जिसने हजारों श्रद्धालु भक्तों को आकर्षित किया है, अब 25 नवंबर 2025 तक जारी रहेगा।

पवित्र अवशेषों की भारत वापसी की सुविधा के लिए, एक विशेष विमान 24 नवंबर 2025 को भूटान के लिए रवाना होगा। पवित्र अवशेष अगले दिन, 25 नवंबर 2025, को भारत वापस लाए जाएंगे।

इस महत्वपूर्ण समापन समारोह के लिए केंद्रीय संसदीय मामलों और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जाएगा। इस अवधि के विस्तार से भारत और भूटान के बीच गहन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को उजागर किया गया है और भूटान के लोगों द्वारा इस प्रदर्शन को दी गई अपार श्रद्धा को दर्शाया गया है।

भूटान के लोगों की असीम श्रद्धा हमारे साझा आध्यात्मिक विरासत का प्रमाण है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को भूटान के अनुरोध को स्वीकार करते हुए और अधिक भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर देने में गर्व है। यह आयोजन हमारे दोनों देशों के बीच सदाबहार मित्रता और पारस्परिक सम्मान के संबंधों को और मजबूत करता है।

यह प्रदर्शन भारत-भूटान संबंधों में एक ऐतिहासिक आयोजन रहा, जिसने साझा बौद्ध विरासत का जश्न मनाया और विश्वास और सहयोग के विशेष बंधनों को मजबूती दी।


भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों पर श्रद्धांजलि: भारत-भूटान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत

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थिम्पू में ताशीचोडज़ॉन्ग के भव्य कुएनरेय में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों पर हजारों भक्तों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। ये अवशेष भारत से लाए गए हैं और वर्तमान में भूटान की प्रमुख बौद्धिक केंद्रों में से एक में प्रतिष्ठित हैं।

भारत के वरिष्ठ भिक्षुओं की उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा लाए गए इन पवित्र अवशेषों का उद्देश्य स्थानीय भक्तों को आशीर्वाद देना और भूटान की बौद्ध आबादी के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करना है।

शुरू से ही सुबह के समय, मठ में भक्तों की निरंतर भीड़ देखी गई, और बाहर लंबी कतार देशवासियों की गहरी आध्यात्मिक भक्ति और श्रद्धा को दर्शाती है।

यह अवशेष भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली से 8 नवंबर 2025 को भूटान में “सद्भावना उपहार” के रूप में लाए गए हैं और ये 18 नवंबर 2025 तक ताशीचोडज़ॉन्ग के भव्य कुएनरेय में प्रतिष्ठित रहेंगे, इसके बाद इन्हें भारत में पुनः विधिपूर्वक लौटाया जाएगा।

इस आयोजन का समायोजन भूटान के चौथे राजा, जिग्मे सिंगे वांगचुक के 70वें जन्मजयंत वर्ष को समर्पित है, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व में भूटान में लोकतंत्र की स्थापना हुई और देश की वैश्विक बौद्ध पहचान मजबूत हुई।

यह पवित्र अवशेष प्रदर्शनी भारत के संस्कृति मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (IBC) और राष्ट्रीय संग्रहालय के सहयोग से आयोजित की गई है और 8 से 18 नवंबर 2025 तक थिम्पू में आयोजित है।

प्रदर्शनी में तीन थीमैटिक प्रदर्शनियां शामिल हैं:

  1. गुरु पद्मसंभव: भारत में जीवन और पवित्र स्थलों की यात्रा

  2. शक्यवंश की पवित्र विरासत: बुद्ध अवशेषों का उत्खनन और महत्व

  3. बुद्ध का जीवन और शिक्षाएं

भारत की भागीदारी इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी में दो राष्ट्रों के साझा बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है और भारत-भूटान मित्रता को और गहरा करती है।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की शताब्दी स्मृति समारोह में की शिरकत

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में परमपूज्य आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज जी की पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य श्री के 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह हेतु इस पवित्र स्थल पर आगमन की शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के दिगंबर परंपरा के पुनर्जागरण में किए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद जैसे जैन सिद्धांतों का सजीव उदाहरण है, जो आज भी आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि भौतिकवाद और अस्थिरता से भरे इस युग में आचार्य श्री का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची स्वतंत्रता भोग में नहीं, बल्कि संयम में है; और सच्चा सुख बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति में निहित है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस शताब्दी समारोह के माध्यम से श्रवणबेलगोला स्थित दिगंबर जैन मठ ने न केवल एक महान संत की स्मृति का सम्मान किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आध्यात्मिक ज्योति को पुनः प्रज्वलित किया है। उन्होंने कहा कि अनावृत की गई प्रतिमा सादगी, पवित्रता और करुणा की शक्ति की स्मृति दिलाने वाला प्रतीक बनकर खड़ी रहेगी।

उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी का संदेश समस्त भारतीयों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा।

उन्होंने श्रवणबेलगोला के दो हजार वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊँची एकाश्म मूर्ति को आध्यात्मिक श्रद्धा और कला कौशल का शाश्वत प्रतीक बताया।

राधाकृष्णन ने सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा आचार्य भद्रबाहु की प्रेरणा से श्रवणबेलगोला में संन्यास लेने के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि यह घटना दर्शाती है कि सांसारिक उपलब्धियों के शिखर पर पहुँचने के बाद भी व्यक्ति को अंततः आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश करनी चाहिए।

उन्होंने भारत सरकार द्वारा प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने और जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु “ज्ञान भारतम मिशन” शुरू करने की सराहना की। उन्होंने तमिलनाडु और जैन धर्म के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन धर्म ने संगम कालीन और पश्चात् संगम कालीन तमिल साहित्य जैसे शिलप्पदिकारम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के वर्तमान प्रमुख अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी की भी सराहना की, जो आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की परंपरा को स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों जैसे प्राकृत रिसर्च इंस्टीट्यूट के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रवणबेलगोला भारत की आध्यात्मिक धरोहर का उज्ज्वल रत्न बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, योजना और सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर, हासन से सांसद श्रेयस एम. पटेल, श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महास्थान मठ के संतगण और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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