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राज्यसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, चर्चा के लिए 7 घंटे का समय निर्धारित

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 नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में सरकारी परीक्षाओं में धांधली रोकने से जुड़ा 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक' पेश किया गया। सदन में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए 7 घंटे का समय आवंटित किया गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।


विधेयक पर विचार-विमर्श के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पूर्ववर्ती यूपीए सरकार और 2014 के बाद विपक्ष शासित राज्यों में हुई पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक निचले सदन (लोकसभा) से पहले ही पारित हो चुका है, जहाँ विपक्ष के हंगामे के बावजूद विस्तृत चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई थी। अब यह विधेयक मार्गदर्शन और परिपक्व निर्णय के लिए उच्च सदन के समक्ष आया है।

स्पेशल टास्क फोर्स 2-3 महीने में पूरी करेगी जांच

सदन को संबोधित करते हुए जितेंद्र सिंह ने बताया कि पेपर लीक मामलों की जांच के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अपनी जांच 2 से 3 महीने के भीतर पूरी करेगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में मोदी सरकार द्वारा मूल कानून लाए जाने से पहले, दशकों तक इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस और व्यापक कानूनी ढांचा क्यों तैयार नहीं किया गया था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट से 5 महीने में मिलेगा न्याय

नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। मामले में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है और अदालती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए संशोधन कानून के प्रभावी होने के बाद मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से की जाएगी और 5 महीने के भीतर फैसला आना तय होगा।

गौरतलब है कि इससे पहले लोकसभा में हंगामे और नारेबाजी के बीच विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखा था, जिसके बाद निचले सदन ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया था।

लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा में जाना लगभग तय, भाजपा से उम्मीदवार घोषित

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रायपुर- भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। यह फैसला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पसंद पर केंद्रीय चुनाव समिति की मुहर लगने के बाद आया।

लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक पृष्ठभूमि 

लक्ष्मी वर्मा 55 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेत्री हैं, जिन्होंने एमए की डिग्री प्राप्त की है। वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। 

रायपुर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही कुर्मी समाज और महिला मतदाताओं में मजबूत पकड़ रखती हैं। 

उनका राजनीतिक सफर 1990 से शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली और 1994 में रायपुर नगर निगम पार्षद बनीं। 

 चुना जाना लगभग तय 

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं, जहां भाजपा को एक सीट आसानी से मिल सकती है क्योंकि राज्य में 90 विधायक हैं और 31 वोट पर्याप्त हैं। 

प्रदेश संगठन ने सात नामों का पैनल भेजा था, जिसमें से केंद्रीय स्तर पर लक्ष्मी वर्मा का चयन हुआ। यह चयन भाजपा की महिला सशक्तिकरण नीति को मजबूत करता है।

कोरिया गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से भेंट की

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कोरिया गणराज्य के राष्ट्रीय विधानसभा के माननीय उपाध्यक्ष ली हैक-यंग के नेतृत्व में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आज संसद भवन में राज्यसभा के माननीय उपसभापति हरिवंश से भेंट की।

बैठक के दौरान हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य सशक्त एवं प्रगतिशील लोकतंत्र हैं तथा दोनों देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान की एक मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि दोनों संसदों के बीच नियमित संवाद और संपर्क ने भारत-कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

द्विपक्षीय सहयोग के बहुआयामी स्वरूप को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच व्यापार एवं निवेश, रक्षा, संस्कृति तथा जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ साझेदारी है, जो लोकतंत्र, विधि के शासन, वैश्विक शांति एवं समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

दोनों देशों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए हरिवंश ने कहा कि भारत और कोरिया गणराज्य के बीच अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना और गिम्हे के राजा किम सुरो के वैवाहिक संबंध के माध्यम से गहरे सभ्यतागत संबंध स्थापित हुए हैं, जो दोनों राष्ट्रों के बीच प्राचीन जुड़ाव को दर्शाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह गर्व का विषय है कि वर्ष 2011 में कोरिया गणराज्य की सरकार ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में सियोल में नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव टैगोर की प्रतिमा स्थापित की। श्री हरिवंश ने स्मरण कराया कि गुरुदेव टैगोर ने वर्ष 1929 में ‘लैम्प ऑफ द ईस्ट’ कविता की रचना की थी, जिसमें उन्होंने कोरिया के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की प्रशंसा की थी, जिसे आज भी कोरियाई जनता स्नेहपूर्वक याद करती है।

हरिवंश ने द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश में निरंतर वृद्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 27 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हुंडई, सैमसंग और एलजी भारत में घरेलू नाम बन चुके हैं।

साझा दृष्टिकोण को ठोस कार्यरूप देने में सांसदों की भूमिका को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने संसदीय सहयोग को और सुदृढ़ करने के लिए आगंतुक प्रतिनिधिमंडल को अपने पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सतत संवाद और आदान-प्रदान से भारत और कोरिया गणराज्य के संबंधों की पूर्ण क्षमता साकार होगी तथा प्रतिनिधिमंडल को भारत में सुखद एवं फलदायी प्रवास की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर राज्यसभा की सदस्य रेखा शर्मा, मुजीबुल्ला खान, डॉ. परमार जशवंतसिंह सलामसिंह, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी, राज्यसभा सचिवालय एवं विदेश मंत्रालय (एमईए) के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


बिहार में सहकार से समृद्धि: पैक्स सशक्तिकरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती

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सरकार ने सहकारी समितियों को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए देशभर में, विशेषकर बिहार में, अनेक कदम उठाए हैं। किसानों को ऋण, भंडारण और विपणन की सुविधाएं सुगम बनाने के उद्देश्य से 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (एम-पैक्स), डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना को स्वीकृति दी गई है। 15 नवंबर 2025 तक बिहार में 4,518 नई सहकारी समितियों का गठन हो चुका है।

बिहार, केंद्र प्रायोजित पैक्स कंप्यूटरीकरण परियोजना में भी सक्रिय भागीदारी कर रहा है। राज्य की 4,495 पैक्स में से 4,460 पैक्स को ईआरपी आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा चुका है, जिससे कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जिला एवं राज्य सहकारी बैंकों के साथ समन्वय में सुधार हुआ है। पैक्स के लिए मॉडल उपविधियों को अपनाया गया है, जिससे वे कृषि इनपुट आपूर्ति, भंडारण, खरीद, डेयरी, मत्स्य और अन्य ग्रामीण सेवाओं सहित 25 से अधिक विविध व्यावसायिक गतिविधियां कर सकती हैं।

पैक्स को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, ब्याज अनुदान, उर्वरक-बीज वितरण, पीडीएस, एलपीजी/पेट्रोल/डीजल डीलरशिप, कस्टम हायरिंग, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर आदि योजनाओं के लाभ वितरण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बिहार में पैक्स को बहु-सेवा केंद्रों में बदलने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

राज्य योजना के तहत बिहार में 7,221 गोदामों का निर्माण कर 17.14 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता सृजित की गई है। वर्ष 2025-26 में 278 गोदामों (2.49 लाख मीट्रिक टन क्षमता) को स्वीकृति दी गई है। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत 36 पैक्स (1.33 लाख मीट्रिक टन क्षमता) चिन्हित की गई हैं। 5,256 पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में कार्य कर रही हैं। 2,271 पैक्स के पास उर्वरक लाइसेंस है, जिनमें से 1,681 को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में उन्नत किया गया है।

वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड और बिहार राज्य सहकारी बैंक द्वारा माइक्रो-एटीएम और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों हेतु अनुदान स्वीकृत किए गए हैं। राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस के अनुसार, देश में कस्टम हायरिंग सेंटर के रूप में कार्यरत 7,398 पैक्स में से 2,661 बिहार में हैं।

राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT) के माध्यम से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बिहार में आरआईसीएम, पटना द्वारा अब तक 43,290 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है। पैक्स सचिवों को सीएससी पोर्टल के माध्यम से 300 ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करने हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

कृषि अवसंरचना निधि, कृषि विपणन अवसंरचना और कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन जैसी योजनाओं के तहत दी जा रही सब्सिडी से पैक्स स्तर पर गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्रसंस्करण इकाइयों का विकास हो रहा है, जिससे अनाज की बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।

सहकारिता मंत्रालय द्वारा ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के तहत राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 लागू की गई है, जिसमें अगले दस वर्षों के लिए वित्तीय पहुंच, बहु-क्षेत्रीय विस्तार और तकनीक आधारित पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। कर रियायतें, पैक्स के लिए लेन-देन सीमाओं में वृद्धि, कंप्यूटरीकरण के लिए 2,925.39 करोड़ रुपये का प्रावधान और एनसीडीसी के माध्यम से वित्तीय सहायता जैसे उपाय किए गए हैं।

इन सभी कदमों से सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिरता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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