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विशेष लेख-नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई दस्तक

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चार दशकों बाद फिर सजी पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली की साप्ताहिक बाजारें

बंद पड़े हाट-बाजारों में लौटी रौनक, आदिवासी अंचलों की अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

रायपुर- कभी माओवाद के आतंक और भय के कारण वीरान पड़े बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल अब विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की मिसाल बनते जा रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर लौट रहा है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण उसूर ब्लॉक के आवापल्ली क्षेत्र अंतर्गत पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार हैं, जहां लगभग चार दशकों बाद फिर से रौनक लौट आई है।

एक समय ऐसा था जब इन क्षेत्रों में भय और असुरक्षा के कारण ग्रामीणों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी थी। माओवाद के प्रभाव के चलते यहां के पारंपरिक साप्ताहिक बाजार पूरी तरह ठप पड़ गए थे। लेकिन अब नक्सल मुक्त वातावरण बनने के बाद बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। ग्रामीण, व्यापारी और आदिवासी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

बस्तर की पहचान हैं साप्ताहिक हाट-बाजार

बस्तर अंचल केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि वनोपज आधारित समृद्ध परंपराओं के लिए भी देशभर में जाना जाता है। यहां के साप्ताहिक हाट-बाजार स्थानीय संस्कृति, सामाजिक जीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

बीजापुर जिला चारों ओर से घने वनांचलों से घिरा हुआ है, जहां आदिवासी समुदाय का जीवन जंगल और वनोपज पर आधारित है। इमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, तेंदू जैसी बहुमूल्य वनोपज यहां के लोगों की आय का प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीण इन उत्पादों का संग्रहण कर साप्ताहिक बाजारों में विक्रय करते हैं तथा बदले में दैनिक जरूरत की वस्तुएं खरीदते हैं।

इन बाजारों का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक जीवन का भी केंद्र होते हैं।

चार दशकों तक सन्नाटा, अब लौट रही जीवन की रफ्तार

उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के साप्ताहिक बाजार कभी आसपास के अनेक गांवों की आर्थिक धुरी हुआ करते थे। लेकिन माओवादी गतिविधियों और असुरक्षा के माहौल ने इन बाजारों की रौनक छीन ली। धीरे-धीरे यहां व्यापार बंद हो गया और क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगा।

अब जब क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, तब वर्षों से बंद पड़े बाजारों में फिर से दुकानें सजने लगी हैं। ग्रामीण दूर-दराज के गांवों से बाजार पहुंच रहे हैं। महिलाएं वनोपज लेकर आ रही हैं तो छोटे व्यापारी दैनिक उपयोग की सामग्री बेचने पहुंच रहे हैं। बाजारों में फिर से स्थानीय बोली, पारंपरिक वेशभूषा और आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक दिखाई देने लगी है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनः प्रारंभ हुए ये साप्ताहिक बाजार स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए आर्थिक संबल बनकर उभर रहे हैं। ग्रामीणों को अब अपने उत्पाद बेचने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है तथा स्थानीय स्तर पर आय के नए अवसर भी बढ़ रहे हैं।

बाजारों के पुनर्जीवित होने से छोटे व्यापारियों, किसानों और वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही क्षेत्र में परिवहन, छोटे व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

शांति और विकास का नया प्रतीक बन रहा बीजापुर

बीजापुर में लौटती बाजार संस्कृति यह दर्शाती है कि शांति स्थापित होने पर विकास की संभावनाएं किस प्रकार तेजी से आकार लेती हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार से अब वनांचल के गांव भी मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

पुजारी कांकेर और कोण्डापल्ली के बाजारों में लौटती रौनक केवल व्यापार की वापसी नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और समृद्ध भविष्य की वापसी का प्रतीक है। यह बदलता हुआ बीजापुर अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है।

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘टाइमलेस विज़डम ऑफ भारत’ सम्मेलन को किया संबोधित

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 दिसंबर 2025) हैदराबाद में ब्रह्माकुमारीज़ शांति सरोवर द्वारा आयोजित ‘टाइमलेस विज़डम ऑफ भारत: शांति और प्रगति के मार्ग’ विषयक सम्मेलन को संबोधित किया। यह सम्मेलन ब्रह्माकुमारीज़ शांति सरोवर की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक समुदाय आज अनेक परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, सामाजिक संघर्ष, पारिस्थितिक असंतुलन और मानवीय मूल्यों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने हैं। ऐसे समय में इस सम्मेलन का विषय अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक विकास से सुख और शांति प्राप्त नहीं होती, बल्कि आंतरिक स्थिरता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण भी आवश्यक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा ने हमें सत्य, अहिंसा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। हमारी आध्यात्मिक विरासत विश्व की मानसिक, नैतिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। आधुनिकता और अध्यात्म का संगम हमारी सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’—संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना—आज वैश्विक शांति की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अध्यात्म सामाजिक एकता और राष्ट्रीय प्रगति की सशक्त नींव है। जब व्यक्ति मानसिक स्थिरता, नैतिक मूल्यों और आत्मसंयम का विकास करता है, तो उसका व्यवहार समाज में अनुशासन, सहिष्णुता और सहयोग को बढ़ावा देता है। आध्यात्मिक चेतना से प्रेरित लोग अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय योगदान देते हैं।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारीज़ संगठन दशकों से भारतीय सार्वभौमिक मूल्यों का प्रसार विभिन्न देशों में कर रहा है। यह संगठन लोगों के बीच शांति और सकारात्मकता का संचार कर समाज के नैतिक और भावनात्मक ताने-बाने को मजबूत कर रहा है। इस प्रकार यह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: 11 वर्षों में 126 से 11 जिलों तक सिमटा रेड कॉरिडोर

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 मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 से घटकर 2025 में केवल 11 रह गई है, जबकि सर्वाधिक प्रभावित जिले 36 से घटकर सिर्फ 3 रह गए हैं—यह रेड कॉरिडोर के लगभग पतन को दर्शाता है।

  • 12,000 किमी से अधिक सड़कें, 586 सुदृढ़ पुलिस थाने, 361 नए सुरक्षा कैंप, 8,500 से अधिक मोबाइल टावरों की स्थापना और ₹92 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्ती से नक्सलियों का भौगोलिक व आर्थिक वर्चस्व समाप्त हुआ है।

  • वर्ष 2025 में अब तक 317 नक्सली ढेर, 800 से अधिक गिरफ्तार और लगभग 2,000 ने आत्मसमर्पण किया—यह ऐतिहासिक क्षरण नक्सलमुक्त भारत की दिशा में मार्च 2026 तक अपरिवर्तनीय गति को दर्शाता है।

परिचय

वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) के विरुद्ध केंद्र सरकार की निर्णायक और एकीकृत रणनीति के चलते देशभर में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभूतपूर्व कमी आई है। 2014 में 36 सर्वाधिक प्रभावित जिले घटकर 2025 में केवल 3 रह गए हैं, जबकि कुल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 11 हो गई है। सरकार ने बिखरी हुई नीतियों के स्थान पर संवाद → सुरक्षा → समन्वय के स्पष्ट सिद्धांतों पर आधारित बहुआयामी रणनीति अपनाई है और मार्च 2026 तक हर नक्सल प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य तय किया है।

10 वर्षों में नक्सली हिंसा में बड़ी गिरावट

रेड कॉरिडोर के अंतर्गत छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश–तेलंगाना के कुछ हिस्से प्रभावित थे। सरकार की बहुस्तरीय रणनीति से हिंसा में तेज गिरावट आई है।

2004–2014 की तुलना में 2014–2024 के दौरान:

  • नक्सली हिंसक घटनाओं में 53% की कमी (16,463 से 7,744)।

  • सुरक्षा बलों की शहादत में 73% की गिरावट (1,851 से 509)।

  • नागरिक मौतों में 70% की कमी (4,766 से 1,495)।

2024–2025 की प्रमुख परिचालन उपलब्धियां

  • 2025 में अब तक 317 नक्सली ढेर, 862 गिरफ्तार और 1,973 ने आत्मसमर्पण किया।

  • 2024 में 290 ढेर, 1,090 गिरफ्तार और 881 आत्मसमर्पण।

  • कुल 28 शीर्ष नक्सली नेताओं का सफाया, जिनमें 2024 में 1 और 2025 में 5 केंद्रीय समिति सदस्य शामिल।

  • ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में 27 हार्डकोर नक्सली ढेर।

  • मई 2025 में बीजापुर में 24 का आत्मसमर्पण; अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ (197) और महाराष्ट्र (61) में कुल 258 आत्मसमर्पण, जिनमें 10 वरिष्ठ नक्सली शामिल।

सुरक्षा परिधि में मजबूती

  • 2014 में 36 के मुकाबले 2025 में केवल 3 सर्वाधिक प्रभावित जिले।

  • कुल प्रभावित जिले 126 से घटकर 11।

  • 2014 तक 66 के मुकाबले पिछले 10 वर्षों में 586 सुदृढ़ पुलिस थाने

  • नक्सली घटनाओं वाले पुलिस थानों की संख्या 2013 में 330 (76 जिलों) से घटकर जून 2025 तक 52 (22 जिलों) रह गई।

  • 361 नए सुरक्षा कैंप और 68 नाइट-लैंडिंग हेलिपैड का निर्माण।

नक्सलियों की फंडिंग पर निर्णायक प्रहार

  • NIA में विशेष वर्टिकल के जरिए ₹40 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त।

  • राज्यों द्वारा ₹40 करोड़ से अधिक और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा ₹12 करोड़ की कुर्की।

  • शहरी नक्सल नेटवर्क और सूचना युद्ध क्षमता को गंभीर क्षति।

राज्यों की क्षमता निर्माण में केंद्र की भूमिका

  • SRE योजना के तहत 11 वर्षों में ₹3,331 करोड़ (पिछले 10 वर्षों में 155% वृद्धि)।

  • विशेष अवसंरचना योजना (SIS) के तहत SF/SIB और पुलिस सुदृढ़ीकरण हेतु हजारों करोड़ की स्वीकृति।

  • 2017–18 से अब तक ₹1,757 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत, ₹445 करोड़ जारी।

  • 586 सुदृढ़ पुलिस थाने निर्मित।

  • SCA योजना के तहत ₹3,817.59 करोड़।

  • ACALWEMS के तहत कैंप अवसंरचना व अस्पताल उन्नयन के लिए सहायता।

अवसंरचना विकास

सड़क संपर्क:

  • मई 2014 से अगस्त 2025 तक 12,000 किमी सड़कें; 17,589 किमी परियोजनाएं ₹20,815 करोड़ की लागत से स्वीकृत।

मोबाइल कनेक्टिविटी:

  • 2G टावर: 2,343 (₹4,080 करोड़)।

  • चरण-2: 2,542 स्वीकृत (₹2,210 करोड़), 1,154 स्थापित।

  • 4G सैचुरेशन/आकांक्षी जिलों में 8,527 स्वीकृत; हजारों टावर कार्यरत।

वित्तीय समावेशन

  • 1,804 बैंक शाखाएं, 1,321 एटीएम, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट।

  • 90 जिलों में 5,899 डाकघर—हर 5 किमी पर सेवाएं।

शिक्षा एवं कौशल विकास (48 जिले)

  • 48 आईटीआई (₹495 करोड़) और 61 स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्वीकृत।

  • 46 आईटीआई और 49 एसडीसी कार्यरत—स्थानीय युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण।

NIA में अलग वर्टिकल व स्थानीय बलों का सशक्तिकरण

  • 108 मामलों की जांच, 87 में चार्जशीट—संगठनात्मक ढांचे को गहरी चोट।

  • 2018 में बस्तरिया बटालियन का गठन—स्थानीय युवाओं की भागीदारी से पूर्व गढ़ों में निर्णायक बढ़त।

3 दशकों बाद मुक्त हुए क्षेत्र (सफलता कथाएं)

  • ऑपरेशन ऑक्टोपस, डबल बुल, चकबंदा से बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ, बरामसिया, चक्रबंधा जैसे गढ़ मुक्त।

  • अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक स्थायी कैंप।

  • PLGA की मुख्य शक्ति का विघटन और 2024 की TCOC का पूर्ण विफल होना।

आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति

  • वरिष्ठ कैडर को ₹5 लाख, मध्यम/निम्न को ₹2.5 लाख।

  • 36 माह तक प्रशिक्षण हेतु ₹10,000 मासिक स्टाइपेंड।

  • इस वर्ष 521 आत्मसमर्पण; नई राज्य सरकार के बाद कुल 1,053—मुख्यधारा में सफल पुनर्वास।

निष्कर्ष

पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार की समन्वित, बहुआयामी रणनीति—सुरक्षा कार्रवाई, अवसंरचना विस्तार, वित्तीय नाकेबंदी, विकास संतृप्ति और आकर्षक आत्मसमर्पण नीति—ने नक्सलवाद को 2014 के 126 जिलों से घटाकर 2025 में केवल 11 जिलों तक सीमित कर दिया है। हिंसा में 70% से अधिक कमी, शीर्ष नेतृत्व का सफाया और हजारों कैडरों का पुनर्वास इस बात का प्रमाण है कि नक्सल आंदोलन की वैचारिक और क्षेत्रीय रीढ़ टूट चुकी है। मार्च 2026 तक लक्ष्य प्राप्ति के लिए सतत सतर्कता आवश्यक है, पर दिशा स्पष्ट है—शांति और विकास का नया अध्याय।

नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प तेजी से हो रहा साकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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सुकमा में 10 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास से पुनर्जीवन की नई शुरुआत

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सुकमा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत दरभा डिवीजन कमेटी सहित विभिन्न नक्सली संगठनों से जुड़े 10 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को ऐतिहासिक और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया। इनमें 6 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती वास्तविकता बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में अब हिंसा, भय और भटकाव की विचारधारा कमजोर पड़ रही है, जबकि विकास, विश्वास और संवाद की राह मजबूत हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हिंसा के रास्ते पर न वर्तमान सुरक्षित होता है और न ही भविष्य। छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पुनर्वास नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की ठोस गारंटी देती है। मुख्यधारा में लौटकर ये लोग अपने परिवारों के साथ एक स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है— छत्तीसगढ़ को पूर्णतः नक्सलवाद मुक्त बनाना और बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देना।

मुख्यमंत्री साय ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के निर्णय का स्वागत करते हुए अन्य भटके युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के समन्वित प्रयासों से सुरक्षा बलों की सशक्त कार्रवाई, विकास योजनाओं का विस्तार और पुनर्वास आधारित मानवीय दृष्टिकोण—तीनों मिलकर बस्तर में परिवर्तन की नई कहानी लिख रहे हैं।

https://x.com/i/status/1999458357623787920

समर्पित माओवादी : वर्दी की जगह अब होटल की यूनिफॉर्म पहन कर करेंगे जिंदगी की नई शुरुआत

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30 आत्मसमर्पित माओवादी सदस्यों को दिया जा रहा अतिथि सत्कार का प्रशिक्षण

रायपुर-छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के माओवादियों ने जब पुनर्वास किया, तब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील सरकार ने भी इन समर्पित माओवादियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाये जा रहे हैं, जिसके तहत जगदलपुर के निकट आड़ावाल में लाइवलीहुड कॉलेज में इन 30 आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास कार्ययोजना के अंतर्गत मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत गेस्ट सर्विस एसोसिएट का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल न केवल इन पूर्व माओवादी सदस्यों को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि बस्तर के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास भी कर रही है।

ग्राहक सेवा, सत्कार  तक प्रशिक्षण का सफर

ये सभी 30 पुनर्वासित माओवादी जो कभी घने जंगलों में हिंसा के रास्ते पर थे, आज लाइवलीहुड कॉलेज के कैंपस में ग्राहक संवाद, होटल मैनेजमेंट और सॉफ्ट स्किल्स सीख रहे हैं। करीब 3 महीने के इस कोर्स में उन्हें होटल इंडस्ट्रीज की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, ताकि वे बस्तर के होमस्टे, रिसॉर्ट्स और टूरिस्ट स्पॉट्स में आत्मविश्वास से काम कर सकें।

दर्द भरे जीवन से आजादी की ओर

एक पूर्व माओवादी रामू (परिवर्तित नाम) ने भावुक होकर कहा कि बस्तर के जंगल में हिंसा की जिंदगी ने सिर्फ दर्द दिया, अब लाइवलीहुड कॉलेज में सीखकर लगता है, असली आजादी यहीं है। अब स्वयं मेहनत कर घर-परिवार को खुशहाल बनाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि एवं मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अमल से अब तक हजारों युवा सशक्त हो चुके हैं। बीजापुर जैसे संवेदनशील इलाकों में सरकार की पुनर्वास नीति सुनहरा मॉडल साबित हो रहा है। नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा, यहां हिंसा की जगह विकास और रोजगार की नई कहानी लिखी जाएगी।

उपमुख्यमंत्री एवं राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बनी संवेदनशील पुनर्वास नीति का यह असर है कि मुख्यधारा में युवा लौट रहे हैं और शासन द्वारा इन पुनर्वासित युवाओं को रोजगार और कौशल सीखा कर इन्हें समाज के साथ पुनः जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। बस्तर अपने प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है ऐसे में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में युवा जुड़कर रोजगार पा सकते हैं और अपनी जीवन संवार सकते हैं l इससे बस्तर पर्यटन को भी नया आयाम प्राप्त होगा, पर्यटक बस्तर के पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित होंगे l


छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस: संस्कृति, संघर्ष और समृद्धि की गाथा

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“जय जोहार छत्तीसगढ़” — यह सिर्फ़ एक अभिवादन नहीं, बल्कि इस माटी की आत्मा की पहचान है।

1 नवम्बर 2000 — यह वह ऐतिहासिक दिन था जब भारत के नक्शे पर देश का 26वां राज्य छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। मध्यप्रदेश से अलग होकर बना यह राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोककला, और मेहनतकश जनता के लिए जाना जाता है। आज जब छत्तीसगढ़ अपना 25वां स्थापना दिवस मना रहा है, तो यह दिन न केवल उत्सव का, बल्कि आत्ममंथन और गर्व का भी प्रतीक है।

इतिहास और पहचान

“छत्तीसगढ़” नाम का उद्गम प्राचीन काल के 36 गढ़ों से माना जाता है। यह भूमि प्राचीन काल से ही जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और लोकजीवन की जीवंत मिसाल रही है। यहाँ की धरती ने संत गुरु घासीदास जी, पंडित सुन्दर लाल शर्मा, वीर नारायण सिंह, माता कर्मा जैसे संतों और स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया, जिन्होंने समाज को समानता, अहिंसा और न्याय का संदेश दिया।

प्राचीन काल में यह क्षेत्र दक्षिण कोशल के नाम से जाना जाता था और रामायण काल में भगवान श्रीराम के वनवास का अधिकांश समय इसी क्षेत्र में बीता। इसीलिए छत्तीसगढ़ की माटी को “श्रीराम की मातृभूमि” भी कहा जाता है।

संघर्ष से सृजन तक की यात्रा

लंबे समय तक इस क्षेत्र के लोगों की यह आकांक्षा रही कि यहाँ की विशिष्ट पहचान और समस्याओं को समझने वाला एक अलग राज्य हो। इस जनभावना को सम्मान देते हुए 1 नवम्बर 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ।

प्रारंभ में 16 जिलों से बना यह राज्य आज 33 जिलों तक विस्तारित हो चुका है। राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर, सरगुजा, कोरिया और जशपुर तक विकास की नई किरणें पहुँच चुकी हैं।

विकास की दिशा में अग्रसर

पिछले दो दशकों में छत्तीसगढ़ ने कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
राज्य आज देश के अग्रणी खनिज उत्पादक प्रदेशों में शामिल है और यहाँ की गोधन न्याय योजना, धान खरीदी नीति, जनकल्याणकारी योजनाएँ, तथा नवाचार आधारित शासन प्रणाली देशभर में मॉडल के रूप में सराही जा रही हैं।

वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा —

“छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कृति, सरलता और संकल्प का संगम है। हमारी प्राथमिकता है कि हर नागरिक को विकास का समान अवसर मिले और हमारा राज्य ‘शांति, समृद्धि और संस्कार’ का केंद्र बने।”

संस्कृति और लोकजीवन की आत्मा

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति से है। पंथी, सुआ, राऊत नाचा, करमा, डंडारी जैसे लोकनृत्य और खमरा, ढोलक, मृदंग, मांदर की थाप यहाँ के जीवन का हिस्सा हैं।
यहाँ की छत्तीसगढ़ी बोली, लोकगीत, और चित्रकूट, बारनवापारा, कांगेर घाटी जैसे प्राकृतिक स्थल पर्यटन को नई दिशा दे रहे हैं।

भविष्य की ओर – गढ़बो नवा छत्तीसगढ़

आज का छत्तीसगढ़ युवा, प्रगतिशील और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।
“गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” का अर्थ है — ऐसा राज्य जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, अवसर और सुरक्षा के साथ जी सके।
पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, जनजातीय उत्थान और डिजिटल शासन इस नए युग की पहचान बन रहे हैं।

जय जोहार छत्तीसगढ़!

यह भूमि केवल खनिजों से नहीं, संस्कारों और शौर्य से समृद्ध है। स्थापना दिवस के इस अवसर पर हर छत्तीसगढ़िया अपने अंदर यह संकल्प दोहराए — “हम मिलकर गढ़ेंगे नवा छत्तीसगढ़।”


बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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संवाद, संवेदना और विश्वास की नई धरती बन रहा है बस्तर - मुख्यमंत्री

रायपुर- राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने बस्तर अंचल में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप माओवाद की हिंसक विचारधारा में लिप्त युवाओं में विश्वास जागा है और वे मुख्यधारा में लौटकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीजापुर जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्ज़ीवन” अभियान के तहत आज सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से कुल ₹66 लाख के इनामी 51 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि बस्तर भय और हिंसा के अंधकार से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। शासन की संवेदनशील नीतियाँ और मानवीय दृष्टिकोण इस परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि संवाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में देश अब नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में सहभागी बनें, ताकि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक गाँव शांति, प्रगति और समरसता का प्रतीक बन सके।

प्रदेश से नक्सलवाद का खात्मा और विकास की नई राह: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम ने बढ़ाया लोगों का सरकार पर विश्वास | 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुदर्शन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में दिए गए साक्षात्कार के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करना, लोगों का विश्वास जीतना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना राज्य सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकार नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को सुधार रही है। अब तक कई गांव पुनः आबाद हो चुके हैं और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सरकार बनने के बाद ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ बस्तर के लोगों तक पहुँच रहा है। वनांचल में तेंदूपत्ता खरीदी सहकारी समितियों के माध्यम से की जा रही है। नक्सलवादी विचारधारा से लोगों को बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि बस्तरवासी विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

विदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान में 24 से 31 अगस्त तक आयोजित छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से राज्य की कला, संस्कृति और संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया। निवेशकों को नई उद्योग नीति से अवगत कराया गया, जिसमें रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग और निवेश की अपार संभावनाएँ हैं। राज्य की 44 प्रतिशत वन आच्छादित भूमि आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में विशाल अवसर प्रदान करती है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने बड़ी प्रगति की है—वर्तमान में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान कार्यरत हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि गायों को लावारिस न छोड़ा जाए, क्योंकि इससे सड़क दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि गौवंश की रक्षा सबकी जिम्मेदारी है और गोचर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है। इसी के अनुरूप अंजोर विजन-2047 (छत्तीसगढ़ विजन) तैयार किया गया है, जो राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में योगदान दें।


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