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महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

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नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


पंचायती राज मंत्रालय की पहल: महिला प्रतिनिधियों के लिए कानूनी सुरक्षा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 25 से 27 मई 2026 तक नई दिल्ली में तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ToT) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “हिंसा से मुक्ति: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण” विषय पर आधारित था।

यह कार्यक्रम मंत्रालय की निरभय रहो पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे निर्भया फंड के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा राष्ट्रीय विधि विद्यालय, भारत विश्वविद्यालय का सहयोग भी रहा।

कार्यक्रम का उद्देश्य

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता को मजबूत करना था, ताकि वे:

  • महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को बेहतर समझ सकें

  • लैंगिक संवेदनशीलता विकसित कर सकें

  • संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत कर सकें

  • ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा और सहयोग प्रणाली को बेहतर बना सकें

प्रमुख प्रतिभागी

इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे:

  • राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (SIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • पिरामल फाउंडेशन

  • ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF)

उद्घाटन सत्र को सचिव विवेक भारद्वाज और महानिदेशक सुरेंद्रकुमार बागड़े ने संबोधित किया।

‘निरभय रहो’ पहल

सचिव ने बताया कि इस पहल के तहत तीन प्रमुख घटक लागू किए जा रहे हैं:

  • निरभय नेत्री: महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और कानूनी जागरूकता

  • निरभय चेतना: पुरुष प्रतिनिधियों में लैंगिक समानता की जागरूकता

  • निरभय दृष्टि: ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी जैसे तकनीकी सुरक्षा उपाय

इस कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में लगभग 14.5 लाख महिला और 17.5 लाख पुरुष पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुंच बनाना है।

विशेषज्ञों के विचार

सायराम भट ने अपने संबोधन में कहा कि कानूनी साक्षरता और लैंगिक संवेदनशीलता को जमीनी स्तर पर मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि महिलाओं के लिए न्याय और सुरक्षा व्यवस्था को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रशिक्षण की विशेषताएँ

तीन दिवसीय कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे:

  • लैंगिक हिंसा और घरेलू हिंसा

  • बाल विवाह और साइबर सुरक्षा

  • पीड़ित सहायता प्रणाली और कानूनी उपचार

  • सामुदायिक भागीदारी और फर्स्ट रिस्पॉन्डर तंत्र

प्रशिक्षण में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह चर्चा, मूट कोर्ट और रोल प्ले जैसी गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।

निष्कर्ष

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया और इस पहल को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तार देने पर चर्चा हुई। यह पहल ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल

पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ - मुख्यमंत्री

रायपुर- डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 



मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है।मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

सम्मेलन को सांसदबृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया।

इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

ग्राम पंचायतों के लिए उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू

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नई दिल्ली:- उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) ने वर्ष 2024 और 2025 में आयोजित वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सफलता के बाद, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए अपने राष्ट्रीय वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू किया है। यह श्रृंखला 13 फरवरी 2026 को पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण तंत्र को मजबूत करना है।

इस पहल के तहत पहली बैठक बिहार, झारखंड और ओडिशा राज्यों के साथ आयोजित की गई, जिसमें 1,011 ऑनलाइन लिंक के माध्यम से हजारों पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को उपभोक्ता अधिकारों, उभरते उपभोक्ता मुद्दों और शिकायत निवारण की संस्थागत व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं पर सीधे सवाल पूछने और स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

पंचायतों की अहम भूमिका पर जोर

सत्र में पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा दें, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाएं और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे शिकायत मंचों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित कर सकें।

इससे पहले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उपभोक्ता अधिकारों, कर्तव्यों और शिकायत निवारण प्रणाली पर व्यापक जागरूकता सत्र आयोजित किए थे। यह अभियान 20 दिसंबर 2024 को शुरू होकर 22 अगस्त 2025 को समाप्त हुआ था और दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों को कवर किया गया था।

क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजन

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय भाषाओं में सत्रों का आयोजन रहा, जिससे प्रभावी संवाद, व्यापक भागीदारी और बेहतर समझ सुनिश्चित हुई। संबंधित राज्यों की भाषाओं में दक्ष अधिकारियों ने सत्रों की अध्यक्षता की, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद संभव हुआ।

ग्रामीण उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की पहल

इस पहल से पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता मजबूत हुई है, जिससे वे अपने समुदायों में उपभोक्ता संरक्षण के संवाहक बन सकें। स्थानीय संस्थाओं को उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत निवारण प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में मदद मिली है।

वर्चुअल कार्यक्रम के फायदे

वर्चुअल प्रारूप ने कम लागत, व्यापक पहुंच और तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित करने के लाभ दिखाए हैं। सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को जारी रखने और विस्तार करने का निर्णय लिया है।

निष्कर्ष

इस सतत प्रयास के माध्यम से उपभोक्ता मामलों का विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उपभोक्ता जागरूकता शासन के हर स्तर तक पहुंचे और विशेष रूप से ग्रामीण नागरिकों को जागरूक निर्णय लेने और समय पर शिकायत निवारण तक पहुंचने में सशक्त बनाया जा सके।


केंद्र सरकार ने असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग की अनबाधित अनुदान राशि 213.9 करोड़ रुपये जारी की

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गुवाहाटी/नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने असम के ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) के लिए XV वित्त आयोग (Finance Commission) की अनबाधित अनुदान राशि 213.9 करोड़ रुपये जारी की है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए पहली किस्त है। यह अनुदान असम के सभी 2,192 पात्र ग्राम पंचायतों, 182 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 27 पात्र जिला परिषदों को जारी किया गया है।

केंद्र सरकार के द्वारा, पंचायत राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पीने योग्य जल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश की जाती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में 2 किस्तों में जारी किया जाता है।

अनुदान का उपयोग

अनबाधित अनुदान (Untied Grants) का उपयोग पंचायत राज संस्थाएं/ग्रामीण स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र की स्थान-विशिष्ट प्राथमिक आवश्यकताओं के लिए कर सकती हैं। यह खर्च संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत किया जा सकता है, लेकिन इसमें वेतन और अन्य संस्थागत खर्च शामिल नहीं हैं।

बंधित अनुदान (Tied Grants)

बंधित अनुदान का उपयोग निम्नलिखित मूलभूत सेवाओं के लिए किया जा सकता है:

  • स्वच्छता और ODF स्थिति बनाए रखना, जिसमें विशेष रूप से घरेलू कचरा प्रबंधन, मानव मल/मल-जल प्रबंधन और फेकल स्लज प्रबंधन शामिल है।

  • पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

यह कदम ग्रामीण स्थानीय निकायों को उनकी स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू करने और विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

केन्द्रीय सरकार ने राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग अनुदान जारी किया

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में राजस्थान और झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) को सशक्त बनाने के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अनुदान जारी किए हैं।

राजस्थान में, FY 2025–26 के लिए पहली किस्त के बिना बंधन (Untied) अनुदान की राशि ₹303.0419 करोड़ जारी की गई है, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं। इसके अलावा, FY 2024–25 की पहली और दूसरी किस्तों के रोके गए हिस्से के ₹145.24 करोड़ अतिरिक्त पात्र ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी किए गए हैं।

झारखंड राज्य के लिए, Union Government ने FY 2025–26 की पहली किस्त के बिना बंधन अनुदान के रूप में ₹275.1253 करोड़ जारी किए हैं, जो राज्य के 24 जिला पंचायतों, 253 ब्लॉक पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों के लिए पात्र हैं।

भारत सरकार, मंत्रालय पंचायती राज और मंत्रालय जल शक्ति (पीने के पानी और स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में सिफारिश और जारी किए जाते हैं। बिना बंधन (Untied) अनुदान का उपयोग PRIs/ RLBs द्वारा स्थानीय स्तर की आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा, जो संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों में आता है, सिवाय वेतन और अन्य स्थायी खर्चों के।

बंधित (Tied) अनुदान का उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:
(a) स्वच्छता और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मानव मल और फेकल स्लज प्रबंधन विशेष रूप से शामिल है, और
(b) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव 2025: आदिवासी लोक संस्कृति और पंचायती राज का राष्ट्रीय उत्सव

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पंचायती राज मंत्रालय 23 एवं 24 दिसंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में “पेसा महोत्सव : उत्सव लोक संस्कृति का” नामक दो दिवसीय आयोजन कर रहा है। यह आयोजन पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के अधिनियमन को चिह्नित करने के लिए किया जा रहा है। पेसा दिवस अधिनियम की वर्षगांठ के अवसर पर 24 दिसंबर को मनाया जाएगा। महोत्सव का उद्घाटन आंध्र प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री तथा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री कोनिडाला पवन कल्याण द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज सहित केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

इस आयोजन में सभी 10 पेसा राज्यों से लगभग 2,000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है, जिनमें पंचायत प्रतिनिधि, खिलाड़ी, सांस्कृतिक कलाकार आदि शामिल होंगे। पेसा महोत्सव को पेसा क्षेत्रों से आने वाले आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को मनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है।

24 दिसंबर 2025 को पेसा से संबंधित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें पेसा के क्रियान्वयन की जानकारी के प्रसार और निगरानी के लिए पेसा पोर्टल, राज्यों में क्रियान्वयन की स्थिति के आकलन हेतु पेसा संकेतक, जनजातीय भाषाओं में पेसा पर प्रशिक्षण मॉड्यूल (जागरूकता और जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के लिए) तथा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले पर आधारित एक ई-बुक, जिसमें क्षेत्र के पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और विरासत का दस्तावेजीकरण किया गया है, शामिल हैं।

महोत्सव के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के पेसा ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें सहभागी राज्यों के निर्वाचित प्रतिनिधि पेसा के दस चिन्हित विषयों पर सहभागिता करेंगे। इसके अतिरिक्त, 24 दिसंबर 2025 को सभी 10 पेसा राज्यों में भी विशेष ग्राम सभाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनका उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, परंपरागत प्रथाओं का संरक्षण, आजीविका और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है।

महोत्सव के दौरान खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जो भारत की आदिवासी विरासत की विविधता और जीवंतता को प्रदर्शित करेगी। महोत्सव का मुख्य स्थल विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी परिसर होगा, जबकि गतिविधियाँ रामकृष्ण बीच, इंडोर स्टेडियम, क्रिकेट स्टेडियम और कलावाणी ऑडिटोरियम, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में आयोजित की जाएँगी।

पेसा अधिनियम, 1996 के बारे में

भारत के संविधान के अनुच्छेद 243M(4)(b) के अंतर्गत संसद ने “पंचायतों के उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996” अर्थात पेसा अधिनियम का अधिनियमन किया, जिसके माध्यम से संविधान के भाग-IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया।

अनुसूचित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जिन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 244(1) तथा पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित प्रावधानों से संबंधित है। चूँकि ये क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र कहा जाता है। वर्तमान में पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र 10 राज्यों—आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना—में घोषित हैं।

उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं के लिए XV वित्त आयोग अनुदान के रूप में ₹94.236 करोड़ जारी

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तराखंड में ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (RLBs/PRIs) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹94.236 करोड़ की राशि जारी की है। इस निर्गम में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनटाइड ग्रांट्स की दूसरी किस्त के रूप में ₹9,410.03 लाख शामिल हैं, जो राज्य के सभी पात्र 13 जिला पंचायतों, 95 क्षेत्र पंचायतों और 7,784 ग्राम पंचायतों को प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024-25 की अनटाइड ग्रांट्स की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में ₹13.60 लाख की राशि 15 अतिरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों को भी जारी की गई है।

पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं के लिए XV वित्त आयोग अनुदानों की अनुशंसा करते हैं, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी किया जाता है।

अनटाइड ग्रांट्स का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जाना है, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्ययों पर नहीं किया जा सकता।

वहीं टाइड ग्रांट्स का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें

(क) स्वच्छता और ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति का रखरखाव, घरेलू कचरे, मानव अपशिष्ट और फीकल स्लज का प्रबंधन एवं उपचार, तथा
(ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण से संबंधित कार्य शामिल हैं।

केरल के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग के तहत ₹260.20 करोड़ जारी

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए केरल की ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹260.20 करोड़ की राशि जारी की है। यह राशि अनटाइड ग्रांट की पहली किस्त है और राज्य के सभी 14 जिला पंचायतों, 152 ब्लॉक पंचायतों तथा 9,414 ग्राम पंचायतों को कवर करती है।

ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (RLBs/PRIs) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी करने की सिफारिश पंचायती राज मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) द्वारा की जाती है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय इसे एक वित्तीय वर्ष में दो किश्तों में जारी करता है।

अनटाइड ग्रांट का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकता है, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्यय के लिए नहीं किया जा सकता।

वहीं, टाइड ग्रांट का उपयोग मूलभूत सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—
(क) स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे, मानव अपशिष्ट तथा फीकल स्लज का प्रबंधन एवं उपचार शामिल है, तथा
(ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण से संबंधित कार्य।

महाराष्ट्र के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग के तहत ₹717.17 करोड़ की पहली किस्त जारी

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केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए XV वित्त आयोग के तहत ₹717.17 करोड़ की राशि जारी की है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहली किस्त के रूप में अनटाइड ग्रांट के रूप में जारी की गई है। यह धनराशि राज्य के विधिवत निर्वाचित और पात्र ग्रामीण स्थानीय निकायों को जारी की गई है, जिसमें 2 जिला परिषदें, 15 पंचायत समितियाँ और 26,544 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs)/ पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के लिए XV वित्त आयोग अनुदान की अनुशंसा करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। आवंटित अनुदान वित्त वर्ष में दो किस्तों में अनुशंसित और जारी किया जाता है।

अनटाइड ग्रांट्स का उपयोग RLBs/ PRIs द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु किया जाएगा, सिवाय वेतन और अन्य स्थापना व्यय के।

टाइड ग्रांट्स का उपयोग निम्नलिखित बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है:

(a) स्वच्छता और ODF (खुले में शौच मुक्त) स्थिति के रखरखाव के लिए, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन, मानव अपशिष्ट और फीकल स्लज प्रबंधन शामिल है, तथा
(b) पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।


देशभर की पंचायतों में संविधान दिवस 2025: प्रस्तावना वाचन, जन-जागरूकता कार्यक्रम और राष्ट्रीय ‘प्रीएंबल रिले’ का आयोजन

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केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय पूरे देश में 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस (संविधान दिवस/ Samvidhan Diwas) के अवसर पर व्यापक कार्यक्रमों का समन्वय कर रहा है। यह आयोजन तीन-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) में देशभर में मनाया जाएगा। इसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पंचायती राज विभाग, SIRD&PRs, PESA Mobilizers, Panchayati Raj Associates, NIRD&PR के SoEPR और अन्य साझेदार संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी शामिल है। व्यापक वर्चुअल परामर्शों के माध्यम से तैयारी को मजबूती दी गई है, ताकि जमीनी स्तर पर अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

मंत्रालय में संविधान दिवस का आयोजन

26 नवंबर को सुबह 11:00 बजे सचिव विवेक भारद्वाज वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में प्रीएंबल (संविधान की प्रस्तावना) का वाचन करेंगे। इसी अवसर पर कर्मचारियों के लिए ‘Know Your Constitution’ विषय पर निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।

देशभर की पंचायतों में समारोह

देश की सभी पंचायतें स्थानीय भाषाओं में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन करेंगी। साथ ही संविधान मूल्यों पर चर्चाएं, सेमिनार और क्विज प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी।
एक राष्ट्रव्यापी Constitution Connect – Preamble Reading Relay सुबह 10:00 बजे से शाम 6:45 बजे तक चलेगा, जिसमें प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 15 मिनट के स्लॉट में शामिल होगा। यह कार्यक्रम मंत्रालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया जाएगा।

जन भागीदारी को बढ़ावा

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे पंचायतों और ग्रामीण निकायों को Preamble Walls (समुदायिक कला के माध्यम से प्रस्तावना भित्ति) बनाने तथा "हमारा गांव, हमारा संविधान" कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रेरित करें। इन आयोजनों में युवाओं, स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups), और सामुदायिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर है।

विशेष रूप से PESA क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य-स्तरीय समन्वय प्रकोष्ठ बनाए गए हैं, जो सभी गतिविधियों को निरंतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

यह राष्ट्रव्यापी पहल संविधान के प्रति जन-जागरूकता, नागरिक मूल्यों के संवर्धन और लोकतांत्रिक भागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

असम की ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए केंद्र ने जारी किए पंचदश वित्त आयोग के अनुदान

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान पंचदश वित्त आयोग (XV FC) के तहत असम की ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए अनुदान जारी कर दिए हैं। इसमें वित्त वर्ष 2024–25 की दूसरी किस्त का अनटाइड ग्रांट शामिल है, जिसकी कुल राशि ₹219.24 करोड़ है। यह राशि राज्य के सभी पात्र 27 जिला पंचायतों (DPs), 182 ब्लॉक पंचायतों (BPs) और 2192 ग्राम पंचायतों (GPs) के लिए है।

इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2024–25 की पहली किस्त के अनटाइड ग्रांट के रोके गए हिस्से में से ₹4.698 करोड़ भी जारी किए गए हैं, जो 26 अतिरिक्त पात्र ब्लॉक पंचायतों के लिए हैं।

भारत सरकार, पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से राज्यों को XV-FC अनुदानों की सिफारिश करती है, जिन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा दो किस्तों में जारी किया जाता है।

अनुदानों का उपयोग

  • अनटाइड ग्रांट्स: पंचायतों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उपयोग किए जाएंगे।
    इनका उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में दिए गए 29 विषयों पर किया जा सकता है,
    सिवाय वेतन और संस्थागत खर्चों के।

  • टाइड ग्रांट्स: इनका उपयोग निम्न सेवाओं के लिए किया जाएगा—
    (a) स्वच्छता सेवाएँ और ODF स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरा प्रबंधन, मानव मल तथा फीकल स्लज मैनेजमेंट शामिल हैं।
    (b) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण।

यह वित्तीय सहायता असम में ग्रामीण शासन को सशक्त बनाने, बुनियादी सेवाओं में सुधार लाने और स्थानीय विकास को मजबूती प्रदान करने में सहायक होगी।

30 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ का राष्ट्रीय शुभारंभ: युवाओं में लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा

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पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय (स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 30 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा (Model Youth Gram Sabha - MYGS)’ नामक एक अनोखी पहल का राष्ट्रीय शुभारंभ करेगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय एवं मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

इस कार्यक्रम के दौरान मॉडल यूथ ग्राम सभा पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल और MYGS पोर्टल का भी शुभारंभ किया जाएगा। ये डिजिटल उपकरण इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और छात्रों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। यह पहल देशभर के 1,000 से अधिक विद्यालयों में लागू की जाएगी, जिनमें जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVs), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRSs) और राज्य सरकार के विद्यालय शामिल हैं।

कार्यक्रम में पंचायती राज, शिक्षा और जनजातीय कार्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, लगभग 650 प्रतिनिधि, जिनमें छात्र, शिक्षक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के पंचायती राज संस्थानों (PRIs) के निर्वाचित प्रतिनिधि और राज्य पंचायत राज विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, भाग लेंगे।

मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) एक अभिनव पहल है जिसका उद्देश्य जनभागीदारी को सशक्त बनाना और सहभागितापूर्ण स्थानीय शासन को बढ़ावा देना है। इसमें छात्रों को ग्राम सभा के मॉडल सत्रों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और इसका लक्ष्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्य, नागरिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है, ताकि वे पारदर्शिता, जवाबदेही और विकसित भारत (Viksit Bharat) के दृष्टिकोण के प्रति समर्पित नागरिक बन सकें।

देशभर के सिनेमा घरों में आज से दिखाई जाएगी “जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास” पर दो मिनट की जनजागरूकता फिल्म

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आज, 24 अक्टूबर 2025 से लेकर 6 नवंबर 2025 तक, देशभर के सिनेमा घरों में “जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास” पर आधारित दो मिनट की सार्वजनिक जागरूकता (PSA) फिल्म प्रदर्शित की जाएगी। यह पहल प्रधानमंत्री के जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इस अभियान का उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए पंचायत विकास योजनाओं के निर्माण में जन-जागरूकता और लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्रत्येक नागरिक स्थानीय स्तर पर विकास की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फिल्म सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले और इंटरवल के अंतिम पाँच मिनटों के दौरान प्रदर्शित की जाएगी। इसे सार्वजनिक सेवा जागरूकता फिल्मों के प्रदर्शन के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिखाया जाएगा, उन राज्यों को छोड़कर जहाँ वर्तमान में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है।

जन योजना अभियान (People’s Plan Campaign - PPC) 2025–26 को 2 अक्टूबर 2025 को देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया था। इस अभियान के माध्यम से पंचायतों को साक्ष्य-आधारित और समावेशी पंचायत विकास योजनाएँ (Panchayat Development Plans) तैयार करने में सक्षम बनाया जा रहा है, जो स्थानीय प्राथमिकताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी मेल खाती हैं। ये योजनाएँ विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से तैयार की जाती हैं।

2018 में शुरू हुआ जन योजना अभियान – सबकी योजना, सबका विकास, अब एक प्रमुख पहल (flagship initiative) के रूप में विकसित हो चुका है। इसने ग्राम स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त करने, भागीदारीपूर्ण योजना प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने, और स्वशासन की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के अनुसार, 2019–20 से अब तक 18.13 लाख से अधिक पंचायत विकास योजनाएँ — जिनमें ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDPs), ब्लॉक पंचायत विकास योजनाएँ (BPDPs) और जिला पंचायत विकास योजनाएँ (DPDPs) शामिल हैं — अपलोड की जा चुकी हैं। इनमें से 2.52 लाख योजनाएँ वर्तमान 2025–26 चक्र के अंतर्गत अपलोड की गई हैं।

इस सार्वजनिक जागरूकता फिल्म के माध्यम से, ग्रामीण विकास मंत्रालय का उद्देश्य नागरिकों की पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के साथ संलग्नता को और गहरा करना तथा उन्हें स्थानीय शासन और ग्रामीण विकास में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

🎥 लघु फिल्म देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

जन योजना अभियान 2025-26 : सबकी योजना, सबका विकास

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पंचायती राज मंत्रालय आगामी 2 अक्टूबर 2025 से देशभर के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में जन योजना अभियान (PPC) 2025-26 : “सबकी योजना, सबका विकास” अभियान प्रारंभ करेगा। इसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु पंचायत विकास योजनाओं (PDPs) की तैयारी की जाएगी।

वर्ष 2018 से आरंभ हुए इस अभियान ने पंचायतों को साक्ष्य-आधारित, अभिसरणीय और समावेशी विकास योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाया है, जो स्थानीय प्राथमिकताओं को दर्शाती हैं तथा राष्ट्रीय लक्ष्यों से सामंजस्य स्थापित करती हैं। विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से यह अभ्यास भागीदारीपूर्ण योजना प्रक्रिया को गहराई प्रदान करता है और जमीनी स्तर पर संस्थाओं को सशक्त बनाता है।

ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 से अब तक 18.13 लाख से अधिक पंचायत विकास योजनाएँ (ग्राम पंचायत विकास योजना - GPDPs, ब्लॉक पंचायत विकास योजना - BPDPs तथा जिला पंचायत विकास योजना - DPDPs) अपलोड की गई हैं। इनमें से 2.52 लाख से अधिक योजनाएँ वित्तीय वर्ष 2025-26 की चल रही प्रक्रिया से संबंधित हैं।

अभियान की तैयारियाँ

मंत्रालय ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और हितधारकों के साथ वर्चुअल संवाद प्रारंभ किए हैं। 26 सितंबर 2025 को मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राज्य संस्थानों (SIRD&PRs) के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और रणनीति साझा की।

अभिसरण और जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु मंत्रालय ने 20 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों से अनुरोध किया है कि वे अपने राज्य/केंद्रशासित प्रदेश विभागों को विशेष ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए निर्देशित करें। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को निगरानी तंत्र सक्रिय करने, नोडल अधिकारी नियुक्त करने, सुगमकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, ग्राम सभा कार्यक्रम तय करने तथा सितंबर अंत तक सार्वजनिक सूचना बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए कहा गया है। 2 अक्टूबर 2025 को आयोजित विशेष ग्राम सभाएँ इस अभियान की औपचारिक शुरुआत होंगी।

उद्देश्य और विशेष पहल

जन योजना अभियान 2025-26 का उद्देश्य भागीदारीपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह स्थानीय शासन को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत –

  • ग्राम सभाएँ पूर्ववर्ती GPDPs की डिजिटल प्लेटफॉर्म (ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत ऐप, पंचायत निर्णय) के माध्यम से समीक्षा करेंगी।

  • प्रगति का आकलन, लंबित कार्यों की पहचान तथा अप्रयुक्त केंद्रीय वित्त आयोग अनुदानों का उपयोग प्राथमिकता से किया जाएगा।

  • पंचायत प्रगति सूचकांक (PAI) के आधार पर योजना बनाई जाएगी।

  • सभा सार के प्रभावी उपयोग, स्वयं की आय (OSR) बढ़ाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाएगा।

  • आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आदिवासी सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस अभियान से ग्राम सभाएँ समावेशी विकास की निर्णायक इकाई बनेंगी। पंचायत प्रतिनिधियों, विभागों, समुदाय एवं अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से योजना प्रक्रिया में पारदर्शिता, अभिसरण और जवाबदेही और सुदृढ़ होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवाओं की आपूर्ति और विकासात्मक परिणाम सुनिश्चित होंगे।


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