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बिहार के लिए बड़ा पैकेज: 11.18 लाख पक्के आवास मंजूर, ₹13,427 करोड़ का आवंटन

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पटना- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में आयोजित प्रधानमंत्री आवास योजना के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने राज्य के गरीब परिवारों के लिए 11,18,937 पक्के मकानों को मंजूरी देने के साथ ₹13,427 करोड़ के आवंटन की घोषणा की। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे।

11.18 लाख परिवारों को मिलेगा पक्का घर

चौहान ने कहा कि पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट की संरचना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर गरीब परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को बिहार में बड़े स्तर पर साकार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में बिहार के लिए 24,30,327 मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर कुल ₹29,164 करोड़ का व्यय प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है।

बिहार के किसानों के लिए फसल बीमा योजना

केंद्रीय मंत्री ने बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बाढ़, सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में पात्र किसानों को बीमा के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं और उन्हें प्राकृतिक जोखिमों से सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही कृषि को अधिक लाभकारी और मजबूत बनाने के लिए खरीद व्यवस्था, तकनीक और अन्य सहायता प्रणालियों को भी मजबूत किया जा रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

चौहान ने बिहार में लखपति दीदी अभियान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और अपना व्यवसाय खड़ा कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आय बढ़ने से पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होती है। स्वयं रोजगार, समूह आधारित उद्यम, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

हर जिले में बनेंगे She-Marts

महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए हर जिले में She-Mart स्थापित करने की दिशा में काम करने की बात भी कही गई। इन बाजारों के माध्यम से जीविका दीदियों और महिला समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं के उत्पादों के लिए उचित बाजार, बेहतर पैकेजिंग, उत्पाद विकास और मार्केटिंग की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे महिलाओं की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।

53.83 लाख किसानों के Farmer ID बने

बिहार में 53,83,000 Farmer ID बनाए जाने पर चौहान ने राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि Farmer ID के माध्यम से किसानों की पहचान आसान होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जा सकेगा।

उन्होंने शेष किसानों के Farmer ID भी जल्द तैयार किए जाने की उम्मीद जताई।

सड़क, आवास और कृषि—ग्रामीण विकास के तीन आधार

चौहान ने ग्रामीण विकास के लिए सड़क, आवास और कृषि को तीन महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें गांवों को बाजार और सेवाओं से जोड़ेंगी, पक्के मकान परिवारों को सुरक्षा देंगे और मजबूत कृषि से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार के बीच बेहतर समन्वय को राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार बिहार के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और राज्य को देश की विकास यात्रा में और मजबूत भूमिका देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वंदे मातरम् को बताया राष्ट्रीय गौरव का विषय

कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम् को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान का उल्लेख करते हुए इसे राष्ट्रीय भावना से जुड़ा विषय बताया।

कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सहित कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, लाभार्थी, महिलाएं और अधिकारी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, बिहार के लिए घोषित आवास, कृषि, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण कनेक्टिविटी से जुड़े ये कदम राज्य के ग्रामीण परिवारों की आय, आवासीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 1.25 करोड़ से अधिक घर स्वीकृत, 1 करोड़ से ज्यादा मकान लाभार्थियों को सौंपे गए

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। योजना के तहत PMAY-U और PMAY-U 2.0 में 1.25 करोड़ से अधिक मकान स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 1 करोड़ से अधिक मकान बनकर तैयार होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। सरकार अब PMAY-U 2.0 के कार्यान्वयन को और तेज कर पात्र शहरी परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।

इसी क्रम में PMAY-U 2.0 के तहत केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) की 8वीं बैठक 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित संकल्प भवन में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह ने की। बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त अतिरिक्त आवास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों के लिए 2.09 लाख से अधिक मकानों को मंजूरी दी गई।

इनमें करीब 1.42 लाख मकान लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) श्रेणी के तहत स्वीकृत किए गए हैं। इस श्रेणी में लाभार्थियों को अपनी जमीन पर पक्का मकान बनाने के लिए ₹2.5 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 67,045 मकान किफायती आवास साझेदारी (AHP) श्रेणी के तहत स्वीकृत हुए हैं। इसके अंतर्गत सार्वजनिक और निजी एजेंसियां राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर किफायती आवास परियोजनाएं विकसित करती हैं।

नवीनतम स्वीकृतियों के साथ PMAY-U 2.0 के तहत स्वीकृत मकानों की कुल संख्या 18.38 लाख से अधिक हो गई है। इनमें 14.40 लाख BLC, 2.48 लाख AHP, 1.36 लाख ब्याज सब्सिडी योजना (ISS) के लाभार्थियों के लिए और 13,046 किफायती किराये के आवास (ARH) के तहत स्वीकृत किए गए हैं।

बैठक के दौरान आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने योजना की व्यापक समीक्षा की। इसमें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वयन की गति, स्वीकृत मकानों का समय पर निर्माण और पूर्णता, जियो-टैगिंग, धनराशि का उपयोग, लाभार्थियों का सत्यापन, मकानों की वास्तविक स्थिति तथा PMAY-U और PMAY-U 2.0 की समग्र प्रगति का आकलन किया गया।

सचिव ने योजना के तेजी से क्रियान्वयन, समय पर धनराशि जारी करने, प्रभावी निगरानी और सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समिति नियमित रूप से बैठक कर योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी, समय पर स्वीकृतियां सुनिश्चित करेगी और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेगी।

PMAY-U 2.0 केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी परिवारों के सामाजिक समावेशन, बेहतर जीवन स्तर और आर्थिक सुरक्षा को भी बढ़ावा दे रही है। योजना में महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यकों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और अन्य वंचित वर्गों की आवासीय जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

CSMC की 8वीं बैठक में स्वीकृत 2.09 लाख मकानों में से 2.03 लाख मकान महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा 16,662 मकान वरिष्ठ नागरिकों, 21,954 मकान SC लाभार्थियों, 14,252 मकान ST लाभार्थियों और 75,511 मकान OBC लाभार्थियों के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत अब तक स्वीकृत 1.25 करोड़ मकानों में से 1 करोड़ मकान महिलाओं के नाम यानी परिवार की महिला मुखिया के नाम या संयुक्त स्वामित्व में आवंटित किए गए हैं। यह प्रधानमंत्री के ‘नारी शक्ति’ पर जोर के अनुरूप महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

PMAY-U की शुरुआत जून 2015 में ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य के साथ की गई थी। अब PMAY-U 2.0 इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए शहरी भारत के अतिरिक्त 1 करोड़ पात्र EWS/LIG/MIG परिवारों की आवास जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है, जिनकी वार्षिक आय ₹9 लाख तक है।

PMAY-U 2.0 के विभिन्न घटकों के माध्यम से लाभार्थियों को अपना घर बनाने, किफायती आवास परियोजनाओं में घर प्राप्त करने, होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का लाभ लेने और गुणवत्तापूर्ण किराये का आवास प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हो रहा गरीब परिवारों के अपने घर का सपना

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंदों को मिल रहा सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन

जशपुर के सुनील पांडेय की बदली जिंदगी, कच्चे मकान से पक्के आशियाने तक का प्रेरक सफर

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप गरीब और आवासविहीन परिवारों का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। यह योजना केवल एक मकान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी प्रदान कर रही है।

जशपुर जिले के तपकरा निवासी सुनील पांडेय की कहानी इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल है। कभी उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के मौसम में टपकती छत, भीगता सामान और असुरक्षित वातावरण उनके लिए हर साल बड़ी परेशानी बन जाता था। परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का सपना आर्थिक अभाव के कारण अधूरा ही रह जाता था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सुनील पांडेय को पक्के आवास की स्वीकृति मिली। शासन से प्राप्त सहायता के माध्यम से उन्होंने अपना नया घर बनवाया। आज उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है।

सुनील पांडेय बताते हैं कि पक्का घर मिलने के बाद उनके परिवार की सबसे बड़ी चिंता समाप्त हो गई है। अब बरसात का मौसम डर नहीं, बल्कि सुकून लेकर आता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके परिवार को केवल एक घर ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और नए विश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर भी दिया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बनकर उभरी है। पक्के आवास के माध्यम से गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य का मजबूत आधार मिल रहा है, जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिल रही है।

बंदूक छोड़ी, सम्मान पाया : आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार

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 रायपुर- हिंसा की राह छोड़ जब कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो न सिर्फ एक जीवन सुधरता है बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा मिलती है। नारायणपुर जिला के ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी नक्सल संगठन की कड़ियों में उलझे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया। आज वे न केवल खुद एक सम्मानित जीवन जी रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

भटके हुओं को दिखाई राह, शासन ने दिया सहारा

आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को सर्वाेपरि माना। उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी सकारात्मक बदलाव और सामाजिक योगदान को देखते हुए राज्य शासन की पुनर्वास योजनाओं का सीधा लाभ उन तक पहुँचाया गया, जिससे उनके वर्षों पुराने पक्के घर का सपना साकार हो सका।

योजनाओं के समन्वय से तैयार हुआ सपनों का घर

कमलू राम को मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए गए। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत 'आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना' के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें 1.20 लाख रुपए की लागत से पक्का आवास प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना से स्वीकृत हुआ।आवास निर्माण के दौरान ही उन्हें मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के माध्यम से 23 हज़ार 490 रुपए की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिसने निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण आर्थिक संबल दिया। नए आशियाने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है। 

मिला सम्मानजनक जीवन

कमलू राम नुरेटी ने कहा कि पहले मैं परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था, जहाँ हर दिन नई कठिनाइयाँ सामने आती थीं। आज अपना पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार बेहद खुश है। हमें एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है।

पुनर्वास योजनाएं ला रही हैं क्षेत्र में बदलाव

जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर बेहद सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि शासन की नीतियां और समाज का सहयोग एक साथ मिले, तो किसी भी जीवन को संवारा जा सकता है। यह बदलाव बस्तर और आस-पास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और अटूट विश्वास को मजबूत कर रहा है।

नकटी में शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने से पहले सरकार ने प्रभावित परिवारों को दिया पक्का आवास

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अतिक्रमण हटाने से प्रभावित 65 परिवारों का नया रायपुर में होगा सम्मानजनक पुनर्वास

रायपुर- नया रायपुर के ग्राम नकटी की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास और मानवीय संवेदनशीलता का एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। शासन -प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित 65 परिवारों को बेघर छोड़ने के बजाय उन्हें नया रायपुर अटल नगर के सेक्टर-30 स्थित सर्वसुविधायुक्त ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित परिवारों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि बिजली, पेयजल, सड़क, सीवर, सामुदायिक भवन, उद्यान और अन्य शहरी सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो, इसके लिए आठ सदस्यीय समिति भी गठित कर दी गई है।

ग्राम नकटी की शासकीय भूमि पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा  लगभग 38 एकड़ भूमि में से करीब 12 एकड़ भूमि विशेष योजना के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष 26 एकड़ भूमि पर मंडल की स्ववित्तीय सामान्य आवास योजना विकसित की जाएगी।

भूमि पर अवैध रूप से निवासरत परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने 65 पात्र परिवारों की सूची गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को सौंपी है। इस सूची में शामिल परिवारों को 29 जून 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में निर्मित रिक्त ईडब्ल्यूएस आवासों का अस्थायी आवंटन कर दिया गया।

पुनर्वास को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए सरकार ने आवासों को रहने योग्य बनाने का काम भी तेज़ी से शुरू किया। आवासों में ट्यूबलाइट, पंखे और विद्युत व्यवस्था पूरी कर दी गई है।

सरकार ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्यालय के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में उपयुक्त, कार्यपालन अभियंता, संपदा अधिकारी और सहायक अभियंताओं सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र परिवार को निर्धारित आवास मिले और पुनर्वास पूरी तरह पारदर्शी एवं बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो।

सेक्टर-30 में कुल 1376 ईडब्ल्यूएस (जी+3) आवास निर्मित हैं। इनमें चतुर्थ तल पर उपलब्ध 109 रिक्त आवास पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए हैं। 31.45 वर्गमीटर (338.40 वर्गफीट) क्षेत्रफल वाले इन आवासों के परिसर में पक्की कंक्रीट सड़कें, वॉकिंग ट्रैक, सार्वजनिक उद्यान, सामुदायिक भवन, यूटिलिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीवर नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति जैसी सभी आवश्यक शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता केवल शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसी सोच के साथ आवासों के आवंटन से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक हर चरण की निगरानी की जा रही है ।

सुशासन तिहार में साकार हुआ पक्के घर का सपना

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हितग्राहियों को सौंपी प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

रायपुर- “अपना पक्का घर केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और नए जीवन की मजबूत नींव होता है।” धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार 2026 के दौरान यह भाव उस समय जीवंत हो उठा, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत हितग्राहियों को प्रतीकात्मक चाबी सौंपकर उनके वर्षों पुराने सपनों को साकार किया। सुशासन तिहार  में भाटगांव की हितग्राही कुमारी यादव एवं  लता साहू को मुख्यमंत्री साय के हाथों आवास की चाबी प्रदान की गई। वर्षों तक कच्चे मकान में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले इन परिवारों के लिए यह क्षण केवल एक सरकारी योजना का लाभ मिलने भर का नहीं था, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व से भरे नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक बन गया।

हितग्राही कुमारी यादव ने बताया कि बरसात के दिनों में उनका परिवार लगातार परेशानियों का सामना करता था। कच्चे घर की टपकती छत और कमजोर दीवारों के कारण बच्चों की पढ़ाई और परिवार की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित महसूस कर रहा है और बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।

इसी प्रकार  लता साहू ने कहा कि पहले हर मौसम चिंता लेकर आता था, लेकिन अब पक्का घर मिलने से उनके परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आत्मविश्वास मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ कार्य कर रही है और प्रत्येक पात्र एवं जरूरतमंद परिवार तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन में सुरक्षा, स्थायित्व और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाया जा रहा है तथा जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। यही कारण है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के साथ-साथ शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई दिशा दी है।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

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जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

बीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर

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दशकों से विकास से कटे इलाकों में पहुंचा रोजगार, राशन, शिक्षा और सुरक्षित आवास; 5 लाख मानव दिवस सृजित

वापस लौटे गांव, बदली जिंदगी: नक्सल इलाके में विकास की सशक्त कहानी

रायपुर- लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा

इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है।

पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।

आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया

नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही सहदेव कोरसा, लखु और सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है।

2977 परिवारों को मिला पक्का आवास

नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर

जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है।

ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं।

कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।

सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है।
पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है।

धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है।
ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है।

युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता

पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।

बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है - और हम इस बदलाव को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पीएम आवास योजना 2.0 में 28,461 घरों के लिए 435 करोड़ की स्वीकृति से 'सभी के लिए आवास’ के संकल्प को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री अरुण साव

छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम

रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवास

रायपुर- छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।

लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।

किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।

भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

रतनपुर में भारत सरकार का नवाचारी प्रोजेक्ट, पात्र लोगों को किराये पर देगा सूडा

केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।

प्रधानमंत्री आवास केवल मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नींव हैं – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना में रचा राष्ट्रीय कीर्तिमान: चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण

रायपुर- प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की पहली ही बैठक  में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।  निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी जिलों के सतत, संगठित एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है।चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिलों में स्थित आरसेटी के माध्यम से 6,000 से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 960 से अधिक महिलाएँ तथा 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं। यह पहल कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बन रही है।

आवास हितग्राहियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत वर्तमान में प्रदेश में 10,000 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण प्रगतिरत है। 

इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल आवासों का तीव्र गति से निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इनके साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं, जो राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहे हैं।

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चालू  वित्तीय वर्ष 2025 -26 में मात्र 10 माह की अवधि में छत्तीसगढ़ में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण होना, जो देश में सर्वाधिक है, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मैंने प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय इसलिए लिया, ताकि राज्य का कोई भी गरीब और जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मेरे लिए प्रधानमंत्री आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार हैं, और इनके माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर हम छत्तीसगढ़ को समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।"- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ द्वारा 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण करना राज्य की प्रशासनिक क्षमता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण को जोड़कर योजना को समग्र विकास का माध्यम बनाया गया है। यह राष्ट्रीय कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन पर आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है। - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

वर्ष 2025-26 में 26 हजार 400 पीएम आवास निर्माण स्वीकृत

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25 हजार 580 हितग्राहियों को पहली किश्त की राशि जारी

ग्राम पंचायतों में आवास चौपाल का आयोजन

रायपुर-प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों को पक्का मकान प्रदान करने का क्रांतिकारी कदम है जो ना केवल आवास की कमी को दूर करती है बल्कि ग्रामीण जीवन को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों को शीघ्र प्रारंभ कराने एवं समय-सीमा में पूर्ण कराने कलेक्टर बलौदाबाजार के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी  के मार्गदर्शन में सभी ग्राम पंचायतो में आवास चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 26 हजार 400 आवास निर्माण स्वीकृत

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2025-26 हेतु जिले में 26 हजार 400 आवास निर्माण को स्वीकृत किया गया, जिसमें से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्योत्सव के अवसर पर 25 हजार 580 हितग्राहियों के खाते में पहली किश्त की राशि जारी की गई। आवास चौपाल का आयोजन सभी ग्राम पंचायतों में तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमे, सभी नवीन स्वीकृति उपरांत राशि प्राप्त आवास के हितग्राही, पूर्व वर्षाे के स्वीकृति उपरांत अपूर्ण आवास के हितग्राही, राजमिस्त्री, निर्माण, सामाग्री सप्लायर, सरपंच, सचिव एवं अन्य संबंधित शामिल होते हैं। 

आवास चौपाल का उद्देश्य कनीकी जानकारी उपलब्ध कराना

आवास निर्माण की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना। रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराना।  सौर सुजला के तहत सौर पैनल लगवाने की जानकारी देना शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्रथम क़िस्त जारी 25 हजार 580 आवास के हितग्राहियों को क़िस्त जारी किए गए हैं। सभी आवासों का निर्माण कार्य प्रारंभ कराना। योजना के तहत कन्वर्जेन्स के माध्यम से मिलने वाले अन्य लाभ का जानकारी देना।  राजमिस्त्री एवं निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर पंचायतों में आवास चौपाल में चर्चा की जा रही है ।  अब तक बलौदाबाजार में 56, भाटापारा 34, कसडोल में 24 और पलारी 22 पंचायतों में आवास चौपाल करा किया गया है। इस चौपाल में पूर्व वर्षाे के आवासों को जल्दी पूर्ण कराना। 

योजना पूर्णतः निःशुल्क अनाधिकृत वसूली से सावधान

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण पारदर्शी और निःशुल्क योजना है जहां किसी भी स्तर पर कोई शुल्क नही लिया जाता। कलेक्टर बलौदाबाजार ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत वसूली, कमीशन या सुविधा शुल्क की मांग नहीं कर सकता। यदि कोई ब्यक्ति आवास पास करान,े क़िस्त जल्दी दिलाने या अन्य किसी बहाने से पैसा की मांग करता है, अनाधिकृत वसूली करने पर, तत्काल शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, सीईओ जिला पंचायत या कलेक्टर कार्यालय में दर्ज करायें। ऐसे मामलों का त्वरित जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।


प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) ने ग्रामीण भारत में गरीब और बेघर परिवारों को सुरक्षित एवं गरिमामय आवास उपलब्ध कराने में नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य था “सभी के लिए आवास”। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता, शौचालय, रसोई, पानी, बिजली और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

त्रिपुरा की गरीब आदिवासी महिला कक्रती देबबर्मा का जीवन इसका उदाहरण है। पहले वे कच्चे घर में असुरक्षित जीवन जी रही थीं, लेकिन PMAY-G के तहत ₹1.30 लाख की सहायता से उन्होंने पक्का घर बनाया। अब उनका परिवार तूफ़ान और बारिश से सुरक्षित, गरिमा और खुशी के साथ जीवन बिता रहा है।

सरकार ने 2016–24 के लिए 2.95 करोड़ घरों का लक्ष्य तय किया था, जिसे 2029 तक बढ़ाकर 4.95 करोड़ कर दिया गया है। 4 अगस्त 2025 तक 3.85 करोड़ घर स्वीकृत और 2.82 करोड़ घर पूरे हो चुके हैं। केवल पिछले चार वर्षों (2020–25) में ही 176 लाख से अधिक घर पूरे किए गए।

योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए AwaasSoft MIS और Awaas+ ऐप का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें e-KYC, जियो-टैगिंग और आधार-आधारित भुगतान जैसी तकनीक शामिल है।

PMAY-G न केवल आवासीय सुविधा देता है, बल्कि रोज़गार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का भी काम कर रहा है। अब तक 2.82 करोड़ घरों के निर्माण से लगभग 568 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार पैदा हुआ है।

योजना के अगले चरण (2024–29) में 2 करोड़ और घर बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक सुरक्षित, गरिमामय और सुविधायुक्त आवास मिले।


पक्के घर और नई उम्मीद: सेवा पखवाड़े में हितग्राहियों के चेहरे खिले

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सफलता की कहानी

पक्का आशियाना मिलने से खिले चेहरे, भवन अनुज्ञा और वय वंदन कार्ड सहित कई योजनाओं का लाभ

रायपुर-छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित सेवा पखवाड़े में हितग्राहियों को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है। अपनी जरूरतें पूरी होने और परेशानियों से मुक्ति मिलने से हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। बिलासपुर में हुए कार्यक्रम में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आशियाने की चाबी, भवन अनुज्ञा, पहले किश्त की राशि और वय वंदन कार्ड प्रदान किए गए। इसके साथ ही लखपति दीदियों को सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी से लाभान्वित कुदुदन निवासी ममता दुबे को आवास स्वीकृत हुआ और भवन का नक्शा मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें किराए के घर से निजात मिल गई है। इसी तरह हेमूनगर की गोटीवाड़ा विजया और बिजौर निवासी ओम साहू को घर की चाबी मिलने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विजय ने बताया कि पति ड्राइविंग का काम करते हैं, आमदनी इतनी नहीं कि खुद का घर बना सकें, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवास योजना से अब उनका पक्का घर का सपना साकार हो गया और कच्चे घर से निजात मिल गई।

इसी तरह अशोक नगर निवासी संतोषी श्रीवास और पूनम टंडन लिंगियाडीह निवासी को खमतराई और बहतराई में मकान आवंटित हुआ और उन्हें पहले किश्त का चेक प्राप्त हुआ। उन्होंने खुशी से बताया कि अब उनका अपने खुद के घर में रहने का सपना साकार होने जा रहा है। वहीं रानी यादव सरकंडा थाना के सामने बेजा कब्जा कर परिवार के साथ रह रही थी, जिसके कभी टूटने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि घर तोड़े जाने का नोटिस भी जारी किया गया था, पर अब आवास स्वीकृत होने से उनकी बड़ी चिंता दूर हो गई।

बहुत से हितग्राहियों को इस अवसर पर जहां गृह प्रवेश के लिए आवास की चाबी सौंपी गई, वहीं लखपति दीदियों का सम्मान भी किया गया। तालापारा, ख्वाजा नगर निवासी अब्दुल नईम को आवास स्वीकृत हुआ। मैकेनिक का कार्य करने वाले नईम ने बताया कि अब उनके परिवार को सुरक्षित छत मिल सकेगी।

बिलासपुर के ही हरनारायण पटेल, शांति देवी और विद्या परिहार को वय वंदन कार्ड के अंतर्गत पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य सहायता का लाभ मिला। सभी हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं से उनके जीवन को एक नई उम्मीद और संबल मिला है।


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