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कोरिया के जीराफूल चावल ने बनाई नई पहचान, एफपीओ मॉडल से किसानों को मिल रहा बेहतर बाजार

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832 किसान प्राकृतिक खेती से कर रहे जीराफूल धान का उत्पादन, एफपीओ के जरिए ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन को बढ़ावा


कोरिया/ कोरिया जिले का पारंपरिक और सुगंधित जीराफूल चावल प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के प्रभावी मॉडल से नई पहचान बना रहा है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा स्थानीय कृषि उत्पादों को प्रोत्साहित करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जीराफूल चावल की पहुंच स्थानीय बाजार से आगे व्यापक स्तर तक बढ़ रही है।

कृषि विभाग के उप संचालक श्री राजेश भारती ने बताया कि कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के मार्गदर्शन में कोरिया जिले में एफपीओ से जुड़े 832 किसान प्राकृतिक खेती पद्धति से जीराफूल धान का उत्पादन कर रहे हैं। किसान खेती में जीवामृत, बीजामृत जैसे जैव- आधारित इनपुट का उपयोग कर रहे हैं।प्राकृतिक खेती से उत्पादित जीराफूल धान को गुणवत्ता, प्रमाणन और बेहतर पैकेजिंग के माध्यम से बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

खेत से बाजार तक एफपीओ बना मजबूत कड़ी

किसानों की उपज को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे संगठित बाजार से जोड़ने में एफपीओ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सोनहत गौरव एग्रोफेड कृषक उत्पादक बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित के माध्यम से जीराफूल चावल के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे किसानों को सामूहिक रूप से बाजार तक पहुंच बनाने और अपनी उपज के बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं।

प्राकृतिक खेती से मूल्य संवर्धन तक तैयार हुई पूरी श्रृंखला

जीराफूल चावल की प्राकृतिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, प्रमाणन, आकर्षक पैकेजिंग और एफपीओ के माध्यम से विपणन ने 'उत्पादन से मूल्य संवर्धन और बाजार तक' की पूरी श्रृंखला तैयार की है। कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से कोरिया के जीराफूल धान की प्राकृतिक खेती और एफपीओ मॉडल से जुड़े प्रयासों को सराहा गया है।

प्राकृतिक खेती से तैयार जीराफूल चावल को पीजीएस-प्राकृतिक खेती प्रमाणन के साथ बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे कोरिया के पारंपरिक जीराफूल चावल को गुणवत्तापूर्ण और प्राकृतिक उत्पाद के रूप में नई पहचान मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने भी किसानों के प्रयासों की सराहना की

कोरिया के जीराफूल चावल को राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी जिले के किसानों के प्रयासों की सराहना की है। पारंपरिक कृषि उत्पाद को प्राकृतिक खेती, एफपीओ और बेहतर विपणन से जोड़ने की यह पहल किसानों के लिए नए बाजार और मूल्य संवर्धन के अवसर खोल रही है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक, जैव-इनपुट निर्माण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तथा एफपीओ के माध्यम से विपणन के संबंध में निरंतर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य कोरिया के स्थानीय एवं पारंपरिक कृषि उत्पादों को संगठित बाजार उपलब्ध कराकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाना है।

जीराफूल की पहचान अब खेत से बाजार तक पहुंच रही है और एफपीओ इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभर रहा है।

छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों की राष्ट्रीय मंच पर गूंज

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बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विष्णुभोग चावल और केवची के प्राकृतिक शहद ने बटोरी सराहना

स्वसहायता समूहों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, जैविक उत्पादों के लिए खुले देश-विदेश के नए बाजार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, महिला स्वसहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के महिला स्वसहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठन द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों ने देश के सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित जैविक उद्योग व्यापार मेला एवं सम्मेलन  ’बायोफैच इंडिया-2026’  में  अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला एवं सम्मेलन में जिले के प्रसिद्ध ’अरपा बिहान विष्णुभोग राइस’  तथा  ’केवची के जंगलों से संग्रहित प्राकृतिक शहद’ का राष्ट्रीय स्टॉल में आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों ने देश-विदेश से पहुंचे खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह उपलब्धि न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली साबित हुई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा महिला स्वसहायता समूहों की आर्थिक मजबूती को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच का परिणाम है कि बिहान से जुड़ी महिलाएं आज केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजनों में अपने उत्पादों का सफल प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

बायोफैच इंडिया-2026 प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों तथा मोटे अनाज आधारित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने वाला विश्वस्तरीय मंच है, जहां देश-विदेश के आयातक, निर्यातक, विपणन विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और व्यापारिक संस्थाएं एकत्रित होकर जैविक उत्पादों के व्यापार एवं निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रभावी उपस्थिति राज्य के किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।

जिला मिशन प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जैविक विष्णुभोग धान एवं प्राकृतिक शहद के साथ-साथ सूरन, कटहल तथा अन्य जैविक सब्जियों के उत्पादन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति तथा विशिष्ट स्वाद के कारण राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बनने के साथ लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्पादों की भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए बेहतर विपणन के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के प्रत्येक जिले की विशिष्ट कृषि एवं वन आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में सतत वृद्धि हो तथा स्थानीय उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित पहचान और मूल्य प्राप्त हो। बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जैविक उत्पादों की प्रभावशाली उपस्थिति इसी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

सम्मेलन में राज्य स्तर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राजन सोनी, जिले से जिला कार्यक्रम प्रबंधक अभिषेक जायसवाल तथा तिपान किसान उत्पादक संगठन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेन्द्र खैरवार ने सहभागिता कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जैविक उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों से जिले के उत्पादों को खरीदारों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच व्यापक सराहना प्राप्त हुई।

मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी: वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन से कृषि को मिल रही नई दिशा

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नई दिल्ली- भारत की कृषि व्यवस्था की नींव मानी जाने वाली मिट्टी को सुरक्षित और उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से देश में खेती को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।


देश के कुल 306.65 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 59 प्रतिशत भूमि कृषि के अंतर्गत आती है। ऐसे में मिट्टी की गुणवत्ता सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और देश की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। इसी उद्देश्य से सरकार मृदा संरक्षण और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दे रही है।

25.89 करोड़ से अधिक किसानों को मिला मृदा स्वास्थ्य कार्ड

किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक पोषक स्थिति की जानकारी देने के लिए चलाई जा रही मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 25.89 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना के माध्यम से किसानों को फसल के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी जा रही है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ लागत में भी कमी आ रही है।

प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत मार्च 2026 तक देशभर में 18,786 क्लस्टरों में 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया जा चुका है। इस अभियान से 18 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं। मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना है।

'खेत बचाओ अभियान' से बढ़ी किसानों की जागरूकता

संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत देशभर में हजारों प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर और खेत प्रदर्शन आयोजित किए गए। इस अभियान से करीब 1.07 करोड़ किसानों और अन्य हितधारकों तक सीधा संदेश पहुंचा, जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से लगभग 4.5 करोड़ लोगों को जोड़ा गया।

AI और डिजिटल तकनीक बदल रही खेती की तस्वीर

अब खेती केवल पारंपरिक अनुभव पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकों पर भी आधारित हो रही है। सरकार भू-स्थानिक (Geospatial) मैपिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से किसानों को मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार सटीक सलाह उपलब्ध करा रही है। इससे उर्वरकों और पानी का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है तथा खेती अधिक लाभदायक बन रही है।

किसानों को मिला सीधा लाभ

झारखंड के धनबाद के किसान निरापदो गोराई ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग किया, जिससे प्रति एकड़ उर्वरक लागत में लगभग 720 रुपये की बचत हुई और धान की पैदावार 1,000 किलोग्राम से बढ़कर 1,320 किलोग्राम प्रति एकड़ हो गई। यह उदाहरण बताता है कि वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ाने में कितनी प्रभावी साबित हो रही है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा तो कृषि उत्पादन, किसानों की आय और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से भारत टिकाऊ कृषि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

हरी खाद से संवर रही खेतों की सेहत, प्राकृतिक खेती की मिसाल बने किसान नरेंद्र सिंह

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ढैंचा की खेती से बढ़ रही मिट्टी की उर्वरता, घट रही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता

कृषि विभाग किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कर रहा प्रोत्साहित

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल का सकारात्मक परिणाम सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगंवा में देखने को मिला है, जहां प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह ने लगभग चार एकड़ भूमि में ढैंचा की फसल उगाकर उसे खेत में पलट दिया है। अब वे इसी खेत में धान की खेती करेंगे।

किसान नरेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की खेती अपनाई। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले ढैंचा को खेत में पलट देने पर यह कुछ ही दिनों में सड़कर प्राकृतिक जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा जैसी दलहनी हरी खाद वाली फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं। इसके साथ ही फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे आगामी फसल का विकास बेहतर होता है।

हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में उल्लेखनीय सुधार होता है। ढैंचा के अपघटन से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे उसमें हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और फसल अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनती है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। ढैंचा की सघन बढ़वार खरपतवारों की वृद्धि को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होगा, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल ला रही बदलाव, हरी खाद अपनाकर आत्मनिर्भर खेती की राह पर बढ़ रहे किसान

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महासमुंद के किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद से शुरू की जैविक खेती, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और लागत घटाने की दिशा में बना प्रेरक उदाहरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्राकृतिक, जैविक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। किसान आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहे हैं।

इसी कड़ी में महासमुंद जिले के विकासखंड बसना अंतर्गत ग्राम बड़ेसाजापाली के प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने जैविक खेती की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने 0.80 हेक्टेयर कृषि रकबे में ढैंचा की हरी खाद की फसल लगाई है। लगभग 30 दिन की हो चुकी इस फसल को निर्धारित समय पर खेत में पलटकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी तथा आगामी फसलों की उत्पादकता में सुधार होने की संभावना है।

हिमांशु बंजारे का कहना है कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से खेतों में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और उत्पादन अधिक टिकाऊ बनता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी इस पद्धति को अपनाकर पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की अपील की।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने बताया कि हरी खाद मिट्टी की उर्वरता और संरचना सुधारने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। ढैंचा, सन, लोबिया, उड़द, मूंग और ग्वार जैसी दलहनी फसलें कम समय में तैयार हो जाती हैं तथा कम लागत में अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती हैं। इन फसलों को फूल आने से पहले खेत में पलटने पर लगभग 50 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक नाइट्रोजन की आपूर्ति होती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है।

उन्होंने बताया कि हरी खाद के नियमित उपयोग से मिट्टी भुरभुरी बनती है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, वायु संचार बेहतर होता है तथा अम्लीय और क्षारीय भूमि के संतुलन में भी सुधार होता है। इसके साथ ही मृदा में सूक्ष्मजीवों की संख्या और सक्रियता बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उत्पादन क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होती है। हरी खाद मृदा क्षरण को रोकने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को टिकाऊ, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, जागरूकता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हिमांशु बंजारे जैसे प्रगतिशील किसानों की पहल इस बात का प्रमाण है कि सरकार की किसान-केंद्रित योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित कृषि व्यवस्था की दिशा में भी सार्थक परिणाम दे रही हैं।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी संरक्षण से ही समृद्ध किसान तथा विकसित भारत का सपना होगा साकार

रेवाड़ी (हरियाणा)- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह एवं हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन के शुभारंभ अवसर पर किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए।

किसान समृद्ध होंगे तभी बनेगा विकसित भारत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब देश का किसान समृद्ध और सशक्त होगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के लिए हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है, भावांतर भरपाई योजना लागू कर चुका है तथा बागवानी, सब्जियों और फलों पर भी मूल्य अंतर की भरपाई कर किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिला रहा है।

उन्होंने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ जैसी योजनाओं को कृषि प्रबंधन और जल संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।

किसानों ने भारत को बनाया खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक समय भारत को अपनी खाद्यान्न जरूरतों के लिए विदेशों से गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का विशेष योगदान रहा है।

उन्होंने हरियाणा को कृषि के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और खेलों में भी अग्रणी राज्य बताते हुए कहा कि यहां के किसानों और युवाओं की मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

अधिक रासायनिक उर्वरक मिट्टी को बना रहे हैं बीमार

चौहान ने कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से धरती मां बीमार हो रही है। उन्होंने किसानों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मिट्टी मानो स्वयं पुकार रही है कि उस पर जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का बोझ न डाला जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जिस प्रकार डॉक्टर की गलत या अधिक दवा मरीज के लिए नुकसानदायक होती है, उसी प्रकार आवश्यकता से अधिक यूरिया और डीएपी (DAP) का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करता है, अम्लीयता बढ़ाता है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ता है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इसका असर फसलों, खाद्य पदार्थों और अंततः मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादन क्षमता समाप्त हो सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

मोबाइल ऐप से मिलेगी मिट्टी की पूरी जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी। किसान खेत में खड़े-खड़े ही अपनी मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, उनकी कमी तथा आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान

चौहान ने कहा कि सही तरीके से अपनाई गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे शुरुआत में अपनी थोड़ी-सी भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाकर उसके परिणाम स्वयं देखें और बाद में उसका विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और केंचुए तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इसलिए जैविक संतुलन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर

जलवायु परिवर्तन और संभावित एल-नीनो प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने धान की खेती छोड़कर दलहन की खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के हरियाणा सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल एक अभियान नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर का दीर्घकालिक मिशन बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, "आज समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अभियान समाप्त हो सकता है, लेकिन मिशन आज से शुरू हो रहा है।"

उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन देश के विभिन्न राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़े कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेंगे।

किसानों को दिलाई शपथ

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने किसानों, महिलाओं और युवाओं को ‘खेत बचाओ, धरती बचाओ’ अभियान से जुड़ने, संतुलित उर्वरक उपयोग, स्वस्थ मिट्टी प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की सामूहिक शपथ दिलाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को सरकार और किसानों की साझेदारी से ही पूरा किया जा सकता है। केंद्र सरकार हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ मिलकर कृषि विकास की राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से समृद्ध किसान, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।

ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का संबोधन

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मध्य प्रदेश की स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध और व्यावसायिक राजधानी मानी जाने वाली इंदौर में ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में भारत के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित रहे। 

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और वैश्विक सहयोग पर जोर

चौहान ने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत की प्राचीन परंपरा ‘अतिथि देवो भवः’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत सदैव वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का समर्थक रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण “युद्ध नहीं, शांति; संघर्ष नहीं, समन्वय” पर आधारित है, जो भविष्य में वैश्विक कृषि सहयोग की मजबूत नींव बन सकता है।

छोटे किसानों के सशक्तिकरण की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों पर सामूहिक विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है। उनका मानना है कि यदि छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से मजबूत तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी अधिक मजबूत और टिकाऊ होगी।

भारत की कृषि उपलब्धियां

चौहान ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रही है। उन्होंने प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि—

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • गेहूं उत्पादन लगभग 118 मिलियन टन हो गया है।

  • बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

  • मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इन उपलब्धियों का श्रेय किसानों की मेहनत और किसान-हितैषी सरकारी नीतियों को जाता है।

कृषि का आर्थिक महत्व

उन्होंने बताया कि भारत के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल का संबंध कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों से है। कृषि केवल खाद्य सुरक्षा ही नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है।

छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान

चौहान ने कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। इसलिए उनका सशक्तिकरण ग्रामीण विकास की कुंजी है। उन्होंने निम्न योजनाओं का उल्लेख किया—

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता।

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए ऋण सुविधा।

  • फसल बीमा योजनाओं के माध्यम से जोखिम से सुरक्षा।

प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि

उन्होंने प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए आवश्यक है।

उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण और ‘ड्रोन दीदी’

चौहान ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी कृषि परिवर्तन का मजबूत आधार है। देशभर में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से करोड़ों महिलाएं कृषि और ग्रामीण विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ पहल को तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच मिल रही है।

युवाओं की बढ़ती भूमिका

उन्होंने कहा कि नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और कृषि उद्यमिता के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक, कुशल और आकर्षक बन रहा है।

ब्रिक्स देशों से सहयोग का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में चौहान ने ब्रिक्स देशों से छोटे किसानों के सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुभवों के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और नीति संवाद के माध्यम से यह सम्मेलन वैश्विक कृषि को नई दिशा देगा तथा अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और समावेशी कृषि भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन: किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्रीय कृषि विकास पर जोर

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लखनऊ में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में कृषि क्षेत्र के लिए नई दिशा, ठोस कार्ययोजना और किसान-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि विकास का अगला चरण तभी सफल होगा जब वैज्ञानिक शोध सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे और सरकारी योजनाओं का लाभ छोटे किसानों को प्रभावी ढंग से मिले। साथ ही, प्रत्येक राज्य को अपनी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार स्पष्ट कृषि रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता बताई गई।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब एक ही राष्ट्रीय बैठक के बजाय क्षेत्रीय (जोनल) सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय समस्याओं और संभावनाओं पर गहराई से चर्चा संभव हो रही है। उन्होंने उत्तर भारत के राज्यों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब और हरियाणा हरित क्रांति के अग्रणी रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पर्वतीय राज्यों में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने देश के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे—खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और पोषक आहार उपलब्ध कराना। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, उचित मूल्य दिलाने और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

सम्मेलन में उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए संतुलित खाद के प्रयोग, मिट्टी की सेहत सुधारने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की बात कही गई। साथ ही नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत पर भी बल दिया गया।

कृषि में गुणवत्ता वाले बीजों के महत्व को रेखांकित करते हुए बदलते मौसम और कम वर्षा की स्थिति के अनुसार खेती की योजना बनाने की आवश्यकता बताई गई। इसके अलावा किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और किसान आईडी को सुविधाजनक साधन बताते हुए इनके विस्तार पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों को व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी पहल बताया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद बढ़ा है, जिससे नई तकनीकों का बेहतर उपयोग हो रहा है। उन्होंने कृषि को उत्पादन तक सीमित न रखते हुए आय बढ़ाने, लागत घटाने और बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

सम्मेलन में एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को छोटे किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में विस्तार की सलाह दी गई। साथ ही कृषि को खाद्य प्रसंस्करण और बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

यह सम्मेलन खरीफ और रबी सीजन के लिए साझा रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने मिलकर कृषि विकास के लिए सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।

देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रसार हेतु दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (NCONF), गाजियाबाद द्वारा 24–25 मार्च 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य देशभर में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि अधिकारियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), बायो-इनपुट निर्माताओं, प्रगतिशील किसानों और छात्रों ने भाग लिया।

इस दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन नई दिल्ली में डॉ. एस.के. चौधरी, महानिदेशक, फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा किया गया। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये मृदा उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और खेती की लागत कम करने में सहायक हैं।

विशिष्ट अतिथियों में डॉ. जे.के. जेना, महानिदेशक, मत्स्य विभाग ने मत्स्य पालन में जैविक कृषि की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. वेलु मुरुगन ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को रेखांकित किया। पद्मश्री नेक राम शर्मा ने पिछले 30 वर्षों में प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव और सफलता की कहानी साझा की।

तकनीकी सत्र में डॉ. रवि शंकर ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में विज्ञान की भूमिका प्रस्तुत की। अन्य वक्ताओं, जिनमें प्रगतिशील किसान भी शामिल थे, ने अपने अनुभव साझा किए। सत्रों में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय पर जोर दिया गया, ताकि 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

कार्यक्रम में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं:

  • मृदा स्वास्थ्य और बायो-इनपुट

  • प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक तकनीकें

  • जैव विविधता आधारित कीट प्रबंधन

  • PGS-इंडिया प्रमाणन प्रणाली

  • जैविक उत्पादों का विपणन और मूल्य श्रृंखला

संगोष्ठी के साथ-साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें जैविक और प्राकृतिक खेती से जुड़े नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इसमें बायो-इनपुट केंद्रों, स्टार्टअप्स, एफपीओ और जैविक उत्पादों से जुड़ी कंपनियों ने भाग लिया।

यह संगोष्ठी टिकाऊ कृषि पद्धतियों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों, बाजार अवसरों और नीतिगत समर्थन पर व्यापक चर्चा के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का उद्देश्य रखती थी। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, गुणवत्ता सुधार और बाजार एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।

राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (NCONF)

राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, जिसे पहले राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था, देश में जैविक और प्राकृतिक खेती के विकास, प्रमाणन और क्षमता निर्माण के लिए एक प्रमुख संस्थान है। यह केंद्र PGS-इंडिया प्रमाणन प्रणाली का कार्यान्वयन, जैविक उर्वरकों की गुणवत्ता परीक्षण, किसानों और कृषि कर्मियों का प्रशिक्षण तथा सतत कृषि प्रथाओं के प्रसार जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है।

Kisaan School : देश के पहले किसान स्कूल बहेराडीह में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के अवसर पर ध्वजारोहण करेंगे सीताराम वैष्णव

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जांजगीर-चाम्पा- बहेराडीह में स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर सीताराम वैष्णव के द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा. वे कोटमीसोनार गांव में स्थित छग के एकमात्र क्रोकोडायल पार्क के केयरटेकर हैं. 

देश के पहले किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के अवसर पर हर साल की तरह ध्वज वंदन किया जाएगा. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीताराम वैष्णव होंगे, जो कोटमीसोनार क्रोकोडायल पार्क के केयरटेकर हैं और मगरमच्छों से अपने याराना को लेकर वे छग ही नहीं, देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं और उनकी एक आवाज पर क्रोकोडायल पार्क में मगरमच्छ दौड़े चले आते हैं.

Kisaan School : प्राकृतिक खेती का मॉडल देखने किसान स्कूल पहुंचे रायगढ़ जिले के किसान, अडानी फाउंडेशन तमनार ने 55 प्रगतिशील किसानों को कराया भ्रमण

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जांजगीर-चाम्पा- कृषि विज्ञान केंद्र के गोदग्राम बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल का अडानी फाउंडेशन तमनार ने रायगढ़ जिले के 55 प्रगतिशील किसानों को भ्रमण कराया, जहां किसानों ने प्राकृतिक खेती के मॉडल देखा और खूब प्रभावित हुए.

अडानी फाउंडेशन के कार्तिकेश्वर मालाकार और दिब्यानी लहरे ने बताया कि रायगढ़ जिले के 19 गांव के 55 प्रगतिशील किसानों को बहेराडीह के वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल का भ्रमण कराया गया, जहां पर प्राकृतिक खेती के मॉडल देखकर किसान खूब प्रभावित हुए. इसके साथ ही किसान स्कूल परिसर में विकसित समन्वित क़ृषि प्रणाली का किसानों ने बारीकी से अध्ययन किया.

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने किसानों को पुरानी विलुप्त चीजों का संग्रहालय समेत केले के रेशे से निकाले जाने वाले रेशपेडर मशीन, बड़ी बनाने का ड्रायर मशीन, जैविक पद्धति से ऊगाई गई 6 फिट ऊंचाई की धनिया, छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों के मॉडल के साथ ही 65 भाजियों की जानकारी, घर की छत पर बागवानी, डेयरी, गोमूत्र इकाई, गोबर गैस सयंत्र, अंजोला इकाई, नाडेप इकाई, केंचुआ पालन इकाई, केंचुआ खाद बनाने की इकाई, सब्जी उगाने की चार मंजिला पद्धति अक्षय चक्र क़ृषि मॉडल, क़ृषि अवशेष से रेशा निकालकर बनाई गई रंग बिरंगी राखियां और कपड़ा बनाने की तकनीकों को न सिर्फ दिखाया, बल्कि उनकी खूबियों के बारे में एक-एक बिंदुवार जानकारी दी. 

भ्रमण में रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक अंतर्गत पाता गांव के प्रगतिशील किसान राधेलाल यादव, रामलाल साय, बसंती यादव, उशीला चौहान, डोलेसरा से बनाऊ राम पैकरा, छवि शंकर गुप्ता, कुंजेमुरा से जयपाल मिंज, मोहनलाल निषाद, किशोर सिदार, फूलबाई निषाद, बसंती सिदार, ढोलनारा से मिनकेतन पटेल, महेश अगरिया, मिनकेतन भगत, सराईटोला से रवि राठिया, राजेंद्र राठिया, भालूमुड़ा से हमी लाल राठिया, घसिया राम मांझी, हुलसी राठिया, चितवाही से मिनकेतन अगरिया, टंकेश्वर सिदार, जरिडीह से गुप्तेश्वर गुप्ता,जनकराम कलंगा,रेवती गुप्ता, सोना कुमारी गुप्ता, बांधापाली से सुरेश राठिया, कमल सिंह राठिया, नंद कुमार राठिया, रोडोपाली से माधव राठिया, धर्मेंद्र राठिया, लक्ष्मी सिदार, पंकजनी राठिया, गुलापी राठिया, निल कुंवर राठिया, मिलुपारा से किरती राम कलंगा, रसिया राम कलंगा, चैतराम सिदार, दिनु सिदार, हरि कुमार सिदार, घुराऊ राम सिदार, खम्हरिया से गजपति राठिया, गोविन्द बेहरा, मुड़ागाँव से दर्शन सिदार, अमृत लाल राठिया, बजरमुड़ा से बाबुराम चौहान, पुनाऊ राम खड़िया, मड़वाडुमर से भनजिनि गुप्ता, कुंजलता गुप्ता, इंदुमती चौहान, उर्मिला चौहान, उरबा से संतोषी राठिया, कमला राठिया आदि प्रमुख रूप से शामिल थे.

पहली बार देखा भाजियों के रेशे से निर्मित कपड़ा

भ्रमण में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह पहुंचे रायगढ़ जिले के प्रगतिशील किसानों ने कहा कि हमने तो यहां पर आकर पहली बार छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों और अन्य भाजियो का इतना बड़ा संग्रह के साथ ही चेच भाजी, अमारी भाजी के डंठल के रेशो से निर्मित रंग बिरंगी राखियां, कपड़ा पहली बार देखा इसके साथ ही अलसी, केला, भिंडी और कमल के डंठल के रेशे से किसान स्कूल के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन, दीनदयाल यादव, पार्वती देवांगन, रेवती यादव, पुष्पा यादव, शोभाराम यादव, राजेश यादव,संतोषी बरेठ, सतरूपा यादव, संतोषी यादव, बेदिन कश्यप, निर्मला, पूरन देवांगन आदि की टीम द्वारा क़ृषि क्षेत्र में किए गए नवाचार की भूरी-भूरी प्रशंसा की. इस अवसर पर किसान स्कूल के बाबूलाल यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, उर्मिला यादव, साधना यादव समेत अन्य सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित थे.


किसान स्कूल बहेराडीह में 10 दिसंबर को राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव

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जांजगीर-चाम्पा- कृषि विज्ञान केंद्र भारत सरकार के प्राकृतिक क़ृषि गोद ग्राम बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष 10 दिसंबर बुधवार को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन को लेकर प्रदेश की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह का माहौल है. महोत्सव में जिले के कलेक्टर जन्मेजय महोबे समेत पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, जिला पंचायत की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता मिरी, सक्ती जिला पंचायत की अध्यक्ष द्रौपदी चंद्रा, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग की सदस्य ज्योति कश्यप, पामगढ की पूर्व विधायक इंदु बंजारे, जिला पंचायत के सीईओ गोकुल रावटे शामिल होंगे.

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष बुधवार 10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शनी लगाई जाएगी. महोत्सव को लेकर प्रदेश की महिलाओं और बिहान की दीदियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है.

भाजी दीदियों की होगा सम्मान

किसान स्कूल के संचालक ने बताया कि राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव में विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शन करने वाली अर्थात भाजी प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिलाओं, युवतियों को 'भाजी दीदी' के रूप में सम्मानित किया जाएगा, वहीं प्रतियोगिता में पहला, दूसरा, तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. साथ ही, 7 महिलाओं को सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा. महोत्सव में शामिल होने वाली प्रदेश की महिलाओं ने विविध प्रकार भाजियों के साथ शामिल होने की तैयारी में हैं. पिछले साल भाजी महोत्सव में जिले के अलावा छः जिले की महिलाएं शामिल हुई थीं.

भाजियों की माला और गुलदस्ता से होगा अतिथियों का स्वागत

किसान स्कूल के सदस्यों ने बताया कि इस बार की भाजी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथियों का स्वागत फूल माला या फूल से बने गुलदस्ता ने नहीं, बल्कि विविध प्रकार की भाजियों के बीजों, पत्तियों तथा तने से निर्मित माला और गुलदस्ता से स्वागत किया जाएगा, वहीं भाजियों से बनाए गए अनेक प्रकार की व्यंजन के स्वाद का आनंद भी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथि लेंगे. इसके साथ ही चेच भाजी और अमारी भाजी के रेशे से तैयार रंग बिरंगी राखियां और कपड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा. महोत्सव में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे.

छत्तीसगढ़ की 36 प्रमुख भाजियों की दिखेगी झलक

1, मेथी भाजी,

2, गोंदली भाजी,

3, मुराई भाजी,

4, चरौटा भाजी,

5, मुढ़ी भाजी,

6, अमारी भाजी,

7, नोनिया भाजी,

8, पीपर भाजी,

9, पोई भाजी,

10, कांदा भाजी,

11, गोभी भाजी,

12, पालक भाजी,

13, रोपा भाजी,

14, चना भाजी,

15, गाँव भाजी,

16, करेला भाजी,

17,करमता भाजी,

18, लाल भाजी,

19, कोइलार भाजी,

20, केना भाजी,

21, अकरी भाजी,

22, सुनसुनिया भाजी,

23, मखना भाजी,

24, भथुआ भाजी,

25, मुस्केनी भाजी,

26, बोहार भाजी,

27, चौलाई भाजी,

28, खेढ़ा भाजी,

29, कुरमा भाजी,

30, कोचाई भाजी,

31, गुर्रु भाजी,

32, सरसों भाजी,

33, तिवरा भाजी,

34, बर्रे भाजी,

35, चेच भाजी,

36, मुनगा भाजी

भाजियों के पेटेंट के लिए प्रयासरत हैं संचालक दीनदयाल यादव

पिछले दिसम्बर 2016 से किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों के साथ ही अन्य फल, फूल पौधों की पेटेंट कराने के लिए स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार के सहयोग से भारत सरकार के केंद्रीय क़ृषि कल्याण मंत्रालय दिल्ली को प्रस्तुत किया है, जिसमें जंगली पीला गेंदा समेत बेल और जामुन का वर्ष 2047 तक पेंटेंट मिल चुका है. शेष अन्य फल, फूल और पौधों के पेंटेंट प्रदान की प्रक्रिया निरंतर देश के अलग-अलग राज्यों के वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही है.

छग ही नहीं, देश भर में किसान स्कूल ने बनाई बड़ी पहचान 

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के नवाचार को सराहना मिल रही है. छग के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भ्रमण के लिए यहां पहुंच चुके हैं, वहीं 6 देशों से किसान यहां के नवाचार को देख चुके हैं. देश के पहले किसान स्कूल को अनोखे तरीके से किसानों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जहां 18 विषयों में किसानों को निःशुल्क जानकारी व ट्रेनिंग दी जाती है. किसान स्कूल में 'धरोहर' बनाया गया है, जो आकर्षण का केंद्र है, जहां पुरानी चीजों को संग्रहित कर संग्रहालय का रूप दिया जा रहा है. किसान स्कूल के इस अनोखे प्रयास को देखकर अब तक सभी लोगों ने तारीफ की है और स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए किसान स्कूल ने बड़ी पहचान बना ली है.

Kisaan School : भारत में प्राकृतिक खेती का मॉडल बना किसान स्कूल, शासकीय पूमावि अमरताल के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने किया शैक्षणिक भ्रमण

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जांजगीर-चाम्पा- शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमरताल के शिक्षकों ने स्कूली बच्चों को भारत के पहले किसान स्कूल बहेराडीह का भ्रमण कराया, जहां घर की छत के ऊपर कई किस्मों की बागवानी, फूल और छत्तीसगढ़ की 36 प्रकार की एक साथ भाजियों  से सुसज्जित मॉडल पहली बार देखा और बाड़ी में विभिन्न प्रकार के फलदार, फूलदार, जड़ वाले पौधे और बायोगैस का उत्पादन, जीवामृत का निर्माण, वर्मीवाश इकाई, अजोला इकाई, हाईटेक मिनी डेयरी का अवलोकन किया. 

स्कूल की प्रधान पाठक अरुणा ब्यास मिरी ने बताया कि प्राकृतिक प्रोटीन युक्त पौधा, जो गायों के लिए सबसे उपयोगी है. भारत का पहला किसान स्कूल एक छोटा सा गांव बहेराडीह में स्थित है, जो वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के नाम पर किसानों द्वारा किसानों के लिए संचालित है. यह स्कूल परिसर प्राकृतिक क़ृषि का आदर्श मॉडल है. अक्षय चक्र फसल का निर्माण, जो देखते ही बनता है. हर मौसम में हमेशा कुछ न कुछ उगता ही रहता है. मोती का पेड़ देखकर बच्चे बहुत आश्चर्यचकित हुए इस प्रकार रामफल, सीताफल नींबू आम मूनगा  नींबू घास को देखकर बच्चे बहुत आनंदित हुए और बहुत कुछ प्रेरणा मिली जिसकी चर्चा सभी अपने घरों में मजे से कर रहे हैं. सचमुच यह यात्रा हम सब के लिए बहुत ही प्रेरणादाई रहा. उन्होंने बताया कि यहां पर भ्रमण से हम सभी को यह सीख मिली कि एक घर और छोटे से जगह में कितना कुछ किया जा सकता है. भारत के एक मात्र किसान स्कूल का निर्माण घर देख कर सभी छात्र छात्राएं और शिक्षक अभिभूत हुए.

भ्रमण में विद्यालय की प्रधान पाठक अरुणा ब्यास मिरी, शिक्षक सूरज भान सिंह मरकाम समेत छात्रा कु संजना खूंटे, दीक्षा टंडन, वर्षा कुर्रे, पूनम जाटवर, भाग्य श्री पाटले, चिंकी यादव, आंचलडहरिया, भावना रात्रे, कल्पना कुर्रे, मनिता निराला, अमन मिरी, हिमेश डहरिया, भुनेश भारद्वाज, ऋतिक, रवि डहरिया, धनंजय, दिपेन्द्र, ब्रजेश कुर्रे, विकास, सागर, सूर्या डहरिया, डेनिश कुर्रे, मोनिका खूंटे आदि छात्र छात्राएं शामिल थे.



सतत् और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में कदम – शिवराज सिंह चौहान का ओडिशा दौरा कल

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आगामी 10 नवम्बर, 2025 (सोमवार) को ओडिशा के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य में किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी प्रमुख गतिविधियों में भाग लेंगे।

कार्यक्रम के अनुसार, मंत्री चौहान प्रातः पटना से रवाना होकर लगभग पूर्वाह्न 11:00 बजे भुवनेश्वर पहुँचेंगे। वहाँ वे ‘मंडिया दिवस (Millet Day)’ के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। यह आयोजन लोक सेवा भवन स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर वे ओडिशा सहित देशभर में मिलेट्स (श्री अन्न/मोटे अनाज) के उत्पादन, प्रसंस्करण और उपभोग को बढ़ावा देने हेतु केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालेंगे। कार्यक्रम में मिलेट्स को किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में रेखांकित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह के बाद, केंद्रीय मंत्री कटक जिले के सदर क्षेत्र का दौरा करेंगे, जहाँ वे किसानों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान वे किसानों के अनुभव जानेंगे, उनकी चुनौतियाँ सुनेंगे और कृषि नीतियों से जुड़ी उनके सुझाव प्राप्त करेंगे। साथ ही, वे केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि कार्यक्रमों की मैदान स्तर पर स्थिति और प्रभाव का भी आकलन करेंगे।

दोपहर में, मंत्री चौहान आईसीएआर – केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI), विद्याधरपुर, कटक में आयोजित संयुक्त रणनीतिक बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कृषि अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर के वैज्ञानिक तथा ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, सतत् और आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यवहारिक रणनीतियाँ तैयार करना होगा।

 मंत्री चौहान का यह दौरा ओडिशा में सतत् एवं आत्मनिर्भर कृषि को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वे बार-बार यह बात दोहराते रहे हैं कि —

“भारत का भविष्य उसके किसानों के खेतों में बसता है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम खेती को लाभकारी, पर्यावरण हितैषी और प्रौद्योगिकी-संचालित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

केंद्रीय मंत्री लगातार विभिन्न राज्यों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं ताकि नीति निर्माण और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप किया जा सके। उनका मानना है कि कृषि की सफलता दिल्ली के कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों में किसानों के साथ बातचीत से तय होती है।

मंत्री चौहान के इस दौरे का एक और प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र विशेष की कृषि चुनौतियों जैसे मिट्टी की सेहत, फसल विविधीकरण, जल दक्षता और सतत् खेती पद्धतियों को समझना है। इसके साथ ही, वे आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रीकरण और मूल्य संवर्धन से संबंधित सरकारी योजनाओं के प्रति किसानों में जागरूकता भी बढ़ाएँगे।

‘मंडिया दिवस’ का यह आयोजन ओडिशा द्वारा मिलेट्स को बढ़ावा देने में निभाई जा रही अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है। वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद से ओडिशा ने कोरापुट, रायगड़ा और कंधमाल जैसे जिलों में सामुदायिक स्तर पर मिलेट आधारित कृषि प्रणालियों को सफलतापूर्वक विकसित किया है।

केंद्र सरकार द्वारा लागू योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (उत्पादकता वृद्धि हेतु), दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (आयात निर्भरता कम करने हेतु), और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (रासायनिक-मुक्त खेती को बढ़ावा देने हेतु) — के एकीकरण के माध्यम से सतत् कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखी जा रही है।

दिनभर की गतिविधियों के उपरांत, मंत्री चौहान भुवनेश्वर से विजयवाड़ा के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे अगले दिन विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।


भारत और श्रीलंका के बीच कृषि पर पहली संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) बैठक नई दिल्ली में आयोजित

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भारत और श्रीलंका के बीच कृषि पर पहली संयुक्त कार्यकारी समूह (Joint Working Group – JWG) की बैठक आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी और श्रीलंका सरकार के कृषि, पशुधन, भूमि एवं सिंचाई मंत्रालय के सचिव डी. पी. विक्रमसिंघे ने की।

दोनों पक्षों ने कृषि सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की, जिनमें कृषि यंत्रीकरण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, बीज क्षेत्र का विकास, कृषि उद्यमिता, कृषि शिक्षा, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, बाजार तक पहुंच और जलवायु-संवेदनशील कृषि शामिल हैं। साथ ही, संयुक्त अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में डिजिटल कृषि, फसल बीमा और कृषि स्टार्टअप जैसी पहलों पर भी चर्चा की गई। श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा, नई दिल्ली का दौरा किया, जहां उन्होंने भारत के कृषि अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का अवलोकन किया।

चर्चाओं के दौरान भारत और श्रीलंका ने खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोग को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल में जी. जी. वी. श्यामली, अतिरिक्त महानिदेशक (विकास), कृषि विभाग; बी. एस. एस. परेरा, निदेशक (पशुधन विकास), कृषि, पशुधन, भूमि एवं सिंचाई मंत्रालय; और गेशन, काउंसलर, श्रीलंका उच्चायोग शामिल थे।

बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के संयुक्त सचिव, पीपीवीएफआरए के अध्यक्ष, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारी भी उपस्थित रहे।


शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित ICAR–कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया; “वन एग्रीकल्चर – वन नेशन – वन टीम” की भावना के तहत किसानों से किया संवाद

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया। यह दौरा “वन एग्रीकल्चर – वन नेशन – वन टीम” (One Agriculture – One Nation – One Team) की भावना के अंतर्गत भारत के कृषि क्षेत्र की एकता और समग्र प्रगति का प्रतीक रहा।


वेल्लोर में  शिवराज चौहान ने किसानों और ग्रामीण समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया और उनसे प्रधान मंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY), राष्ट्रीय दलहन मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन ऑन पल्सेस (CFLD on Pulses), फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM/LFOM) तथा अन्य KVK संबंधित योजनाओं पर चर्चा की।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रगतिशील किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) और ग्रामीण युवाओं से बातचीत की तथा क्षेत्र की कृषि उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने वेल्लोर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित जंगली सूअर भगाने वाले उपकरण (Wild Boar Repellent) जैसी नवाचार तकनीक की सराहना की, जिसने किसानों को जंगली सूअरों से फसलों की सुरक्षा का व्यावहारिक समाधान प्रदान किया है। सीड हब और पल्सेस मिशन के अंतर्गत उच्च उत्पादक किस्में (VBN-8, VBN-10, VBN-11) सफलतापूर्वक प्रसारित की गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने कृषि नवाचारों और मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी भी देखी।

शिवराज चौहान ने किसानों से कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं पर फीडबैक लिया और उन्हें बेहतर कृषि प्रथाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया। ‘चौपाल’ संवाद के दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं पर जमीनी स्तर की प्रतिक्रिया प्राप्त की और आसपास के जिलों के किसानों से भी बातचीत की।

पहली ‘चौपाल’ में शिवराज चौहान ने तमिलनाडु के विरुधुनगर, शिवगंगा, तूतीकोरिन और रामनाथपुरम जिलों के किसानों से बातचीत की, जो प्रधान मंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 11 केंद्रीय मंत्रालयों की 36 योजनाओं का एकीकरण किया जा रहा है, जिससे किसानों को समग्र लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने इन चार जिलों के KVK प्रमुखों के साथ योजना के अभिसरण की प्रगति की समीक्षा की। किसानों ने प्राकृतिक खेती, मुंडु मिर्च की खेती, दलहन एवं तिलहन CFLD और अन्य परियोजनाओं से संतुष्टि व्यक्त की।

दूसरी ‘चौपाल’ में शिवराज सिंह ने प्राकृतिक खेती और राष्ट्रीय दलहन मिशन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई यह अनोखी पहल देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्य इस मिशन से उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीक और सुनिश्चित विपणन के माध्यम से अत्यधिक लाभान्वित होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान केंद्र, वंबन (TNAU) द्वारा विकसित उन्नत दलहन किस्मों की भी सराहना की।

कृषि से संबंधित प्रमुख घोषणाएँ

केंद्रीय मंत्री ने धैर्यपूर्वक किसानों की समस्याएँ सुनीं और आश्वासन दिया कि नारियल फसलों को प्रभावित करने वाले कीट और रोगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आम उत्पादन में अधिकता से उत्पन्न मूल्य गिरावट की समस्या को दूर करने के लिए मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने आश्वासन दिया कि तमिलनाडु के सभी पात्र किसानों को प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) से जोड़ा जाएगा ताकि अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

तमिलनाडु के किसानों के प्रति प्रशंसा

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के मेहनती किसानों, उनकी संस्कृति और मूल्यों के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही फिर से तमिलनाडु आएंगे ताकि किसानों से सीधे संवाद कर सकें और प्राकृतिक खेती सहित अन्य योजनाओं पर चर्चा कर सकें।

कार्यक्रम में तमिलनाडु के कृषि, उद्यानिकी एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक; TNAU के कुलपति डॉ. आर. तमिऴवेंदान; ICAR-ATARI हैदराबाद के निदेशक डॉ. शेख एन. मीरा; कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की संयुक्त सचिव इनिथा; राज्य उद्यानिकी आयुक्त कुमारवेल पांडियन, TNAU और TANUVAS के वरिष्ठ अधिकारी, ICAR तथा कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
सैकड़ों किसान इस कार्यक्रम में शामिल हुए और केंद्र व राज्य स्तर पर कृषि विकास प्रयासों के प्रति उत्साह व्यक्त किया। ‘ड्रोन दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ जैसे स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ भी इस संवाद में शामिल हुईं।

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