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केशव चंद्र ने खान मंत्रालय के सचिव का पदभार संभाला

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नई दिल्ली- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1995 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी केशव चंद्र ने आज भारत सरकार के खान मंत्रालय (Ministry of Mines) के सचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया।

पदभार संभालने के तुरंत बाद सचिव ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं एवं चल रही गतिविधियों की समीक्षा की।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने उन्हें खनिज अन्वेषण (Mineral Exploration), खनिज ब्लॉकों की नीलामी एवं संचालन, महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज (Critical & Strategic Minerals) तथा खनन एवं खनिज क्षेत्र से जुड़ी अन्य प्रमुख पहलों की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर सचिव, खान ने भारत के खनिज क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की बढ़ती औद्योगिक और आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में खनिज क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।

सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के विकास, पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में हासिल हुई एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

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सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू 

क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद,  तथा प्रबंध संचालक रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। 

एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।

एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 

कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

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बीते दो माह में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 1747 प्रकरण दर्ज 

6.49 करोड़ रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल

बलौदाबाजार में अवैध उत्खनन, जांजगीर-चांपा में अवैध परिवहन और रायपुर में अवैध भंडारण के सबसे ज्यादा मामले

अवैध खनन पर डबल वार, ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ जुर्माना भी कई गुना बढ़ा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है। 

अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। 

अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं। 

अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है। 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री साय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक में मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन क्षेत्र में सुधार एवं आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने 14 मई 2026 को रांची में सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस समीक्षा बैठक में सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक नीलेंदु कुमार सिंह, एमईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक आई. डी. नारायण, सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक तथा सीएमपीडीआई, सीसीएल और एमईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 में सीएमपीडीआई द्वारा अन्वेषण, प्रतिवेदन तैयार करना, पूंजीगत व्यय, अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल तथा सौर परियोजनाओं के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों पर भी चर्चा की गई।

मंत्री ने सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की सराहना करते हुए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक अन्वेषण के महत्व पर बल दिया, जो देश की भविष्य की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए बाजार पहुंच में सुधार करने और अधिक बोलीदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि खदान बंदी गतिविधियों को स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक अवसरों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने पुनः प्राप्त खनन क्षेत्रों में मखाना की खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इसे सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” पहल से जोड़ा जा सके। यह दूरदर्शी पहल परित्यक्त खनन क्षेत्रों को कृषि एवं जलीय कृषि परिसंपत्तियों में बदलकर स्थानीय लोगों को दीर्घकालिक और सतत आर्थिक सहायता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

बैठक के दौरान सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड तथा मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के बीच कोयला तथा ऊर्जा एवं गैर-ऊर्जा खनिजों के अन्वेषण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु 14 मई 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह संयुक्त अन्वेषण गतिविधियां देश में कोयला एवं अन्य खनिजों के राष्ट्रीय भंडार को बढ़ाने तथा नई खदानों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने, भारत की खनिज संपदा के विकास को गति देने तथा खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वित्त वर्ष 2025–26 में कोयला क्षेत्र ने रचा इतिहास, उत्पादन 200 मिलियन टन के पार

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से संयुक्त उत्पादन और आपूर्ति पहली बार 200 मिलियन टन (MT) के आंकड़े को पार कर गई है।

31 मार्च 2026 तक इन खदानों से कुल कोयला उत्पादन 210.46 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 190.95 मिलियन टन की तुलना में 10.22% अधिक है। वहीं, डिस्पैच (आपूर्ति) भी बढ़कर 204.61 मिलियन टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 190.42 मिलियन टन के मुकाबले 7.35% की वृद्धि दर्शाता है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • 200 MT का ऐतिहासिक आंकड़ा पार: पहली बार उत्पादन और डिस्पैच 200 मिलियन टन से अधिक हुआ।

  • नई खदानों की शुरुआत: इस वर्ष 12 नई कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों को संचालन की अनुमति (MOP) मिली, जिससे 86 मिलियन टन वार्षिक क्षमता बढ़ी।

  • तेज उत्पादन शुरुआत: 7 खदानों ने उसी वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू किया, जो तेज निष्पादन और बेहतर समन्वय को दर्शाता है।

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों से उत्पादन और आपूर्ति में लगातार वृद्धि का रुझान देखने को मिला है, जो बेहतर लॉजिस्टिक्स और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाता है।

यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की नीतियों, आसान अनुमोदन प्रक्रिया और क्षेत्र में सुधारों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह प्रगति ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में अहम योगदान देगी। आने वाले समय में दक्षता, विस्तार और जिम्मेदार खनन पर जोर देते हुए यह क्षेत्र देश की औद्योगिक और आर्थिक वृद्धि को गति देता रहेगा।

23 मार्च 2026 को क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी शुरू करेंगे केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी

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नई दिल्ली- केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे 23 मार्च 2026 को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 7वीं नीलामी (7th Tranche) की शुरुआत करेंगे।

देश के आर्थिक विकास और खनिज सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ते रुझान के कारण लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), टंगस्टन, वैनेडियम, टाइटेनियम जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ी है। इनकी सीमित उपलब्धता और कुछ क्षेत्रों में केंद्रित भंडार वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चुनौती बन रहे हैं।

इन खनिजों के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने 17 अगस्त 2023 को खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन किया, जिसके तहत 24 खनिजों को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित किया गया। इस संशोधन से केंद्र सरकार को इन खनिजों के लिए माइनिंग लीज और कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी करने का अधिकार मिला है। इन नीलामियों से होने वाली आय संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होती है।

अब तक खान मंत्रालय ने 6 चरणों में सफल नीलामी आयोजित की है, जिसमें 46 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी हो चुकी है। इससे उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी और भारत के खनिज क्षेत्र में बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 7वें चरण में विभिन्न राज्यों के 19 ब्लॉक्स नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे। इन ब्लॉक्स में ऐसे खनिज शामिल हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, उर्वरक और रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार किए हैं। मिनरल (ऑक्शन) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत नीलामी के बाद की प्रक्रियाओं जैसे परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, अग्रिम भुगतान और लेटर ऑफ इंटेंट को सरल बनाया गया है। वहीं मिनरल (ऑक्शन) अमेंडमेंट रूल्स, 2026 में बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड की सुविधा दी गई है, जिससे बोलीदाताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।

यह नीलामी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी दो-चरणीय आरोही बोली प्रक्रिया (two-stage ascending forward auction) के माध्यम से होगी, जिसमें सबसे अधिक प्रतिशत बोली लगाने वाले को विजेता चुना जाएगा।


जीएसआई की 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) बैठक 21 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित

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नई दिल्ली- खनिज मंत्रालय के अंतर्गत भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI) 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के ICAR, पुसा स्थित ए. पी. शिंदे सिम्पोजियम हॉल में 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) की बैठक का आयोजन करेगा। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और खनन क्षेत्रों के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर भूवैज्ञानिक प्रगति, खनिज अन्वेषण रणनीतियों और स्वच्छ ऊर्जा, भू-जोखिम तथा सतत विकास से संबंधित चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी।


CGPB का उद्देश्य और महत्व

केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (CGPB) भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण भारत (GSI), खनिज मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां GSI के वार्षिक फील्ड सीजन प्रोग्राम (FSP) पर चर्चा की जाती है और कार्यों के दोहराव को रोकने के उपाय किए जाते हैं। CGPB के सदस्य और अन्य हितधारक जैसे राज्य सरकारें, केंद्रीय/राज्य खनिज अन्वेषण एजेंसियां, PSU और निजी उद्यमी GSI के साथ सहयोगात्मक कार्यों के लिए प्रस्ताव रखते हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं और प्रस्तुत प्रस्तावों की महत्वता व तात्कालिकता के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए GSI के सर्वेक्षण, मानचित्रण, अन्वेषण, अनुसंधान एवं विकास, सामाजिक परियोजनाओं तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का वार्षिक कार्यक्रम अंतिम रूप दिया जाता है।

65वीं CGPB बैठक का नेतृत्व और सहभागिता

65वीं CGPB बैठक की अध्यक्षता खनिज मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल करेंगे, जबकि GSI के महानिदेशक असित साहा और खनिज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय लोइया की गरिमामयी उपस्थिति में बैठक आयोजित होगी। बैठक में खनिज मंत्रालय, GSI, राज्य भूवैज्ञानिक विभागों, PSU और निजी अन्वेषण/खनन कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।

बैठक में चर्चा के प्रमुख विषय

बैठक में देश के खनिज क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों पर विचार किया जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं:

  • लिथियम, REEs, ग्रेफाइट, PGE, वैनाडियम, स्कैंडियम, सीज़ियम आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण, जो ऊर्जा संक्रमण और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े हैं।

  • AI/ML आधारित डेटा एकीकरण, भू-भौतिक सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, डीप ड्रिलिंग और मिनरल सिस्टम अध्ययन जैसे आधुनिक अन्वेषण उपकरणों को अपनाना।

  • महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए प्री-प्रतिस्पर्धात्मक डेटा साझा करने और सहयोगात्मक अन्वेषण मॉडल, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो, कार्यों का दोहराव कम हो और अन्वेषण से नीलामी-योग्य ब्लॉक्स तक की प्रक्रिया तेज हो।

  • हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में भू-भूस्खलन खतरा जोनिंग और ढलान स्थिरता अध्ययन, ताकि आपदा जोखिम में कमी लाई जा सके।

बैठक में GSI का वार्षिक कार्यक्रम FS 2026-27 भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें पृथ्वी-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में 1,068 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें प्रमुख जोर खनिज अन्वेषण पर है। यह कार्यक्रम नवाचार और सततता पर केंद्रित है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन अध्ययन, अपतटीय अन्वेषण और सार्वजनिक भलाई से जुड़ी भू-विज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में GSI की प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन और रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में GSI की गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाली प्रदर्शनी भी आयोजित होगी।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ाव

CGPB बैठक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक प्राथमिकताओं को वैश्विक सततता लक्ष्यों के साथ संरेखित करने, नवाचार और संसाधन सुरक्षा के भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक और समन्वयात्मक मंच के रूप में कार्य करेगी।

राजस्व वृद्धि, रोजगार और तकनीक: छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति

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सचिव खनिज संसाधन पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाते है। इन खनिजों के लिए राज्य सरकार के द्वारा अन्वेषण एवं उत्खनन हेतु खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यम से खनन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। जिससे राज्य शासन को राजस्व की प्राप्ति में पिछले 02 वर्षों में उल्लेखनियवृद्धि हुई है।

सी.एम.डी.सी. भी इस राज्य में अन्वेषण एवं खनन से संबंधित कार्यांे के संपादनका सहभागी है। छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज के आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने तथा खनिज राजस्व मंे वृद्धि के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन (सी.एम.डी.सी.) का गठन 07 जून 2001 में किया गया। सी.एम.डी.सी. के कार्य संचालन का स्वरूप माईनिंग एण्ड मार्केटिंग ठेका,उत्खनन ठेका, मार्केटिंग ठेका, एमडीओ, अन्वेषण एवं संयुक्त उपक्रम के माध्यम सेअन्वेषण एवं खनन कार्य वर्तमान मंे कार्यरत् है। 

दयानन्द ने बताया कि वर्तमान में 09 खनिजों के खनन/मार्केटिंग एवं अन्वेषण का कार्य सी.एम.डी.सी. के द्वारा किया जा रहा है (टिन,बाक्साईट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैग्नीज, कोरण्डम, डोलोमाईट, कोयला)। (टिन) वर्तमान में सी.एम.डी.सी. के द्वारा बस्तर के अनुसूचित जनजातियों के जीविकोपार्जन के लिए विशेष रूप से टिन अयस्क की खरीदी का कार्य किया जा रहा है। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से खनन एवं टिन स्मेल्टर का भी संचालन किया जा रहा है। यह खनिज भी क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में आता हैं।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को टिन विक्रय करने का सही मूल्य सही वक्त में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप यह क्रय मूल्य बढ़कर वर्तमान में 1926.00 रूपये प्रति कि.ग्रा किया गया है। इस प्रकार लगभग 03 गुना अधिक राशि क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप टिन ओर की क्रय मात्रा में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है एवं ऑनलाईन क्रय एवं रियल टाईम भुगतान की कार्यवाही प्रचलन में है। इस हेतु TIN - Tribal Incentive for Natural Resources, Portal तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम सेऑनलाईन भुगतान हितग्राहियों को प्राप्त होगा।

दयानंद ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में अन्वेषण कार्य में सी.एम.डी.सी., मॉयल केसहयोग से बलरामपुर जिले में मैग्नीज एवं ग्रेफाईट का अन्वेषण का कार्य कर रही है जिसके उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे है। कोल इंडिया लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पाेरेशन के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन के संबंध में समझौता पत्र हस्ताक्षर किया जाचुका है। इसके क्रियान्वयन के लिए संयुक्त कार्यसमिति का गठन किया गया है। शीघ्र ही इसकी अपेक्षित परिणाम प्राप्त हांेगे एवं केन्द्र शासन के निर्देशानुसार क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की ओर सी.एम.डी.सी. की सहभागीता बढ़ रही है। यह समझौता केवल खनन तक सीमित नहीं है अपितु इसमें खनिज संवर्धन,प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और सबसे महत्वपूर्ण हमारे युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसर भी शामिल है। मुझे विश्वास है कि यह पहल रोजगार सृजन करेगी और हमारी युवा पीढ़ी को गरिमा और अवसर प्रदान करेगी।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पारदर्शी नीलामी - माननीय मुख्यमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने खनिज संसधान प्रबंधन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। सी.एम.डी.सी. ने MSTC के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक - सक्षम नीलामी प्रक्रिया द्वारा निविदा और खनिज बिक्री में नये मानक स्थापित किये है। उक्त पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी से, जहां एक ओर लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड उच्च बिक्री मूल्य प्राप्त हुए है, वही दूसरी ओर लौह अयस्क के उत्खनन में न्यूनतम दर प्राप्त हुआ है, जो प्रतिस्पर्धी पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से उत्पादित लौह अयस्क के विक्रय से राज्य शासन को लगभग 28.65 करोड़ रूपये का राजस्व साथ ही सी.एम.डी.सी. को शुद्ध लाभ लगभग 24 करोड़ रूपये प्राप्त हुआ। वर्ष 2021 से 2025 तक 1.10 करोड़रूपये सीएसआर में व्यय हो चुका है एवं 42 लाख रूपये की कार्यों की स्वीकृति प्रचलन में है। माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर एक पेड़ के नाम पर 14700 वृक्षांे कारोपड़ किया गया है एवं 29.77 लाख रूपये का व्यय की गई। चालू वित्तीय वर्ष में 60,000 टन लौह अयस्क की नीलामी की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से प्रचलन में है। इस खदान के संचालन से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। इसी अनुक्रम में आरीडोंगरी में उत्पादन क्षमता 05 लाख टन से 20 लाख टन प्रतिवर्ष किये जाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास किये जा रहे है। इस हेतु खनन योजना तैयार किया जा रहा है। सरगुजा जिले में सी.एम.डी.सी. की 05 खदानें संचालित है, जिससे वित्तिय वर्ष 2023-24 से दिसंबर 2025 तक में राज्य शासन को 11.28 करोड़ एवं सी.एम.डीसी. को 8.13 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है। वर्तमान में सी.एम.डी.सी. द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के अंतर्गत 05 बाक्साईट खदानों की नीलामी प्रगति पर है।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में सी.एम. डी.सी.- एन.एम.डी.सी. संयुक्त उपक्रम एनसीएल के द्वारा बैलाडिला डिपॉजिट 04 और डिपॉजिट 13 में खनन कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होंगे। इस हेतु डिपॉजिट 04 का रेजिंग कॉन्ट्रेक्टर की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 2026 में दोनों खदानों में उत्पादन प्रारंभ होने से एक ओर शासन और निगम को राजस्व की प्राप्ति होगी वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय उद्योगों को लौह अयस्क सुगमता से प्राप्त होगा। परिणामस्वरूप राज्य का समावेशी विकास होने में सी.एम.डी.सी. की सहभागीता चिन्हीत् होगी। सी.एम.डी.सी. को दोनों परियोजनाओं से अधिकतम उत्पादन की स्थिति में लगभग राज्य शासन को 7 हजार करोड रूपये राजस्व एवं सी.एम.डी.सी. को 3 हजार करोड़ रूपये राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही क्षेत्र में रोजगार एवं विकास के अवसर का मार्ग प्रशस्त होगा। बहुमूल्य खनिजों की श्रेणी में CMDC-NMDC के संयुक्त उपक्रम एनसीएल जिला महासमुंद के ग्राम बलौदा-बेलमंुडी में हीरा खनिज के क्षेत्र में हीरा धारित किम्बरलाईट की उपस्थिति के संकेत मिले है, इसकी पुष्टि हेतु ड्रिलिंग का कार्य प्रगति पर है।

माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल मार्ग निर्देशन में विगत वर्षों से लंबित केरवा कोल परियोजना के लिए अब सफलता प्राप्त हुई है। सटीक कार्ययोजना के माध्यम से पारदर्शी नीलामी से 15.85 प्रतिशत प्रिमियम में MDO का चयन हो चुका है। यह ब्लॉक MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से कोयला मंत्रालय भारत शासन द्वारा आबंटित है।

क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अधिकमत उत्पादन की स्थिति में राज्य शासन को लगभग 150 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी एवं MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से 53 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्त होगी। सी.एम.डी.सी. के द्वारा मुख्य खनिजों के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर खनन/व्यापार हेतु गौण खनिज को भी शामिल किया गया है। इस क्रम में जिला सक्ती के ग्राम छितापंडरिया में डोलोमाईट खनिज रकबा 326.167 हे. क्षेत्र को राज्य शासन द्वारा सी.एम.डी.सी. हेतु आरक्षित किया गया है। इसके अनुक्रम में सी.एम.डी.सी. द्वारा माईनिंग/मार्केटिंग के लिए MDO चयन की कार्यवाही पारदर्शी तरीके के MSTC के माध्यम से प्रचलन में है।

कोरण्डम खनिज के क्षेत्र में जिला बीजापुर के ग्राम कुचनुर में सी.एम.डी.सी. को उत्खनिपट्टा क्षेत्र में वर्षांे बाद उत्पादन प्रारंभ हो गया है, 1 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त है। उत्पादित कोरण्डम में आधारित स्थानीय लोगों को जीविकोपार्जन एवं समाजिक/आर्थिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए कोरण्डम कटिंग/पॉलिशिंग का प्रशिक्षण दिया जा कर जीविकोपार्जन की व्यवस्था की जा रही है। कॉपर की उपस्थिति की पुष्टि एवं भविष्य में खनन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम छत्तीसगढ़ कॉपर लिमिटेड का गठन किया जा चुका है। इस हेतु राष्ट्रीय खनिज एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के माध्यम से अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति हो चुकी है एवं अन्वेषण का कार्य प्रगति पर है। यह अन्वेषण क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा मोहला-मानपुर जिले में हिदर ब्लॉक 28.60 वर्ग कि.मी. एवं बोदल ब्लॉक में 21.75 वर्ग कि.मी. 03 वर्ष के लिए अधिसूचित किया गया है।

भविष्य की कार्ययोजना - पिछले 02 वर्षों में सी.एम.डी.सी. के द्वारा नवीन आयाम स्थापित किये है एवं भविष्य के परियोजनाओं को अपेक्षित गति प्रदान करने के लिए सटिक कार्ययोजना तैयार कर क्रमशः आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सी.एम.डी.सी. भी सहभागीता निभाने का प्रयास कर रही है।

टिन खनिज के लिए नॉन ऑपरेशन खदान को लैप्स घोषित किया गया एवं केन्द्र सरकार के माध्यम से नीलामी की कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी 2 से 3 वर्षों में खदान प्रारंभ होने से भविष्य में खनन एवं निकासी से राज्य शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। 

टिन स्लैग में अवस्थित टेंटलम, नियोबियम एवं अन्य को निष्कर्षण की कार्ययोजना तैयार कर पायलट परियोजना प्रारंभ की जा रही है। नवीन क्षेत्रों का चयन कर MSTC के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल के लिए अन्वेषण/खनन की कार्ययोजना पर आगे कार्यवाही की जाएगी।
लौह अयस्क में वर्तमान उत्पादन क्षमता 5 लाख मिट्रिक टन से 20 लाख मिट्रिक टन किया जा रहा है इससे राज्य शासन को राजस्व के रूप मंे लगभग 250 करोड़ रूपये एवं सी.एम.डी.सी. को 768.4 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी। 

बाक्साईट खनिज में पथरई खदान में उत्पादन क्षमता 2 लाख टन होने से एवं अन्य संचालित परियोजना में अधिकतम उत्पादन/निकासी की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को अतिरिक्त राजस्व में लगभग 10 करोड़ रूपये की वृद्धि होगी है।

क्रिटिकल मिनरल में भविष्य में कोल इण्डिया के साथ नये ग्रेफाईट युक्त क्षेत्र का चयन कर संयुक्त रूप से अन्वेषण/उत्खनन का कार्य किया जाएगा। टिनस्लैग/एल्यूमिनियम स्लैग से क्रिटिकल मिनरल का निष्कर्षण किया जाएगा। क्रिटिकल मिनरल का सेमिनार आयोजित एवं रिसर्च पेपर आमंत्रित किये जाएंगे। 

डोलोमाईट में 2 मिलियन टन उत्पादन क्षमता आगामी 03 वर्षों में प्राप्त करने की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को 20 करोड़ रूपये का लाभ होगा एवं राज्य शासन को 32 करोड़ प्राप्त होगा। 

हीरा क्षेत्र में प्रचलित पूर्वेक्षण से चिन्हित् हीरा धारित क्षेत्र में हीरा की उपस्थिति सुनिश्चित होने पर शासन को लाभ मिलेगा। 

सी.एम.डी.सी. द्वारा खनन से संबंधित सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सेवा दिया जाकर अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति का प्रयास किया जाएगा। जैसे - प्री एम्बेडेड क्लियरेन्स की कार्यवाही से नीलामी हेतु ब्लॉक जल्दी उपलब्ध हांगे, इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति एवं सी.एम.डी.सी. को सेवा शुल्क प्राप्त होगा। इसी तरह खनन योजना तैयार करने, अन्वेषण एजेंसी के रूप में कार्य करने एवं ड्रोन से संबंधित कार्य,चेक गेट, वेब्रिज सेवा, बंद पड़ी खदानों का पुर्नउद्धार एवं ग्रेनाईट माईनिंग एवं कटिंग/पॉलिशिंग उद्योग, सैण्ड माईनिंग पर भी कार्ययोजना तैयार किया गया है।

दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों के उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज

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वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों से कोयला उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कोयला उत्पादन 19.48 मिलियन टन (MT) रहा, जबकि कोयला प्रेषण 18.02 मिलियन टन दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान कैप्टिव एवं वाणिज्यिक खदानों से कुल कोयला उत्पादन 54.14 मिलियन टन रहा, जबकि प्रेषण 50.61 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तिमाही में उत्पादन में 5.35 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में निरंतर परिचालन गति को दर्शाती है।

समग्र रूप से, वित्त वर्ष 2025–26 में दिसंबर तक की अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कोयला उत्पादन में 9.72 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि प्रेषण में 6.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय है। ये उत्साहजनक रुझान बेहतर परिचालन दक्षता और खनन क्षमता के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

संलग्न ग्राफ उत्पादन और प्रेषण—दोनों में निरंतर सुधार और मजबूत वृद्धि को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय रणनीतिक नीतिगत उपायों, कठोर निगरानी और हितधारकों को निरंतर सहयोग को जाता है। इन प्रयासों से परिचालन अनुमोदनों में तेजी आई है और उत्पादन क्षमताओं का विस्तार हुआ है, जिससे कोयला उत्पादन और प्रेषण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कोयला मंत्रालय कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए एक स्थिर और प्रदर्शन-आधारित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरंतर नीतिगत सुविधा, निकट प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित सहभागिता के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य विश्वसनीय कोयला उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन को समर्थन देना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। ये प्रयास विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

NMDC और IIT कानपुर ने साइबर सुरक्षा तथा AI–ML तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए

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उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी NMDC ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहलों को बढ़ावा देना और NMDC के संचालन में आधुनिक डिजिटल तकनीकों—विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML)—को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।

यह MoU NMDC की ओर से कार्यकारी निदेशक (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) सत्येंद्र राय और IIT कानपुर की ओर से अनुसंधान एवं विकास डीन प्रो. अशोक डे द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, NMDC के वरिष्ठ अधिकारी और IIT कानपुर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस साझेदारी के माध्यम से NMDC और IIT कानपुर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • साइबर सुरक्षा जोखिम आकलन

  • नीति, शासन और अनुपालन समर्थन

  • AI और ML तकनीकों का एकीकरण और प्रगति

  • सुरक्षा संचालन और घटनाओं पर प्रतिक्रिया

  • क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण

  • संयुक्त शोध और नवाचार

इसके अलावा, दोनों संस्थान संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, शोध कार्य करेंगे, पायलट प्रोजेक्ट चलाएंगे और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट समाधान विकसित करेंगे।

सहयोग पर टिप्पणी करते हुए NMDC के CMD, अमिताभ मुखर्जी ने कहा,

“यह MoU IIT कानपुर की उन्नत शोध क्षमताओं को NMDC के व्यापक संचालन तंत्र से जोड़ता है। यह सहयोग हमें हमारी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने, संचालन संबंधी इंटेलिजेंस बढ़ाने और एक सुरक्षित व भविष्य-उन्मुख तकनीकी आधार बनाने में मदद करेगा।”

यह MoU दर्शाता है कि NMDC एक डिजिटल रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार खनन संगठन बनने के लिए प्रतिबद्ध है।


खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में संशोधन: इंटरमीडिएट टाइमलाइन के साथ खनिज ब्लॉकों के संचालन को तेज करने का कदम

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खनिज मंत्रालय ने खनिज (नीलामी) नियम, 2015 में संशोधन किया है, जिसमें लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) जारी होने के बाद से लेकर खनन पट्टे के निष्पादन तक विभिन्न गतिविधियों को पूरा करने के लिए अंतरिम समयसीमा निर्धारित की गई है। 2015 में नीलामी व्यवस्था के आरंभ से अब तक कुल 585 प्रमुख खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके हैं, जिसमें से 34 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक केंद्रीय सरकार द्वारा नीलाम किए गए हैं।

शुरुआत में नीलामी की गति धीमी थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों में औसतन 100 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा रही है। इस वर्ष के पहले सात महीनों में ही 112 खनिज ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किए जा चुके हैं।

नीलामी के बाद खनन संचालन को तेज करने के लिए कदम:

खनिज मंत्रालय ने सफल बोलीदाताओं, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ नियमित बैठकें की हैं। इसके अलावा, खनन संचालन की निगरानी के लिए PMU (Project Management Unit) भी स्थापित किया गया है। इस दिशा में नवीनतम कदम के रूप में मंत्रालय ने 17.10.2025 को नियमों में संशोधन किया है और Letter of Intent (LoI) से लेकर खनन पट्टा निष्पादन तक के लिए अंतरिम समयसीमा तय की है।

पहले नियमों के अनुसार, LoI जारी होने के बाद खनन पट्टा निष्पादित करने की विस्तृत समयसीमा तीन वर्ष (अतिरिक्त दो वर्ष तक बढ़ाने योग्य) थी। यदि यह समयसीमा पूरी नहीं होती थी, तो ब्लॉक की नीलामी रद्द कर दी जाती थी। लेकिन LoI जारी होने और पट्टा निष्पादन के बीच प्रगति की निगरानी का कोई तंत्र नहीं था, जिससे मध्य-मार्ग सुधार के अवसर सीमित थे।

संशोधित नियमों की मुख्य विशेषताएँ:

1. प्रारंभिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहन:

  • Mining Lease (ML) के लिए: LoI जारी होने की तारीख से 5 वर्ष से पहले खनिज की आपूर्ति पर केवल 50% नीलामी प्रीमियम देना होगा।

  • Composite Licence (CL) के लिए: LoI जारी होने की तारीख से 7 वर्ष से पहले खनिज की आपूर्ति पर प्रोत्साहन लागू होगा।

2. अंतरिम समयसीमा (Milestones):

  • ML के लिए तीन अंतरिम लक्ष्य:

    1. खनन योजना की स्वीकृति – 6 माह

    2. पर्यावरण मंजूरी – 18 माह

    3. खनन पट्टे का निष्पादन – 12 माह

  • CL के लिए दो अतिरिक्त लक्ष्य:

    1. CL का निष्पादन – 12 माह

    2. कम से कम G2 स्तर की खोज पूरी करना – 36 माह

3. विलंब पर दंड:

  • निर्धारित समयसीमा से विलंब होने पर, बैंक गारंटी से प्रति माह 1% की राशि काटी जाएगी।

  • ML के लिए कुल समयसीमा – 3 वर्ष, CL के लिए – 7 वर्ष।

  • दंड केवल बोलीदाता की गलती पर लागू होगा और राज्य सरकार की एक समिति द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

4. प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security):

  • पहले ML के लिए प्रदर्शन सुरक्षा खनन पट्टा मिलने से पहले जमा की जाती थी।

  • संशोधित नियमों के अनुसार, LoI जारी होने से पहले प्रदर्शन सुरक्षा जमा करना अनिवार्य है। बोलीदाता को 45 दिन का समय दिया जाएगा।

5. पहले से नीलाम किए गए खनिज ब्लॉक पर लागू:

  • बोलीदाता को संशोधन नियमों के लागू होने के 6 माह के भीतर प्रदर्शन सुरक्षा जमा करनी होगी।

  • शेष बचे अंतरिम लक्ष्य नए समयसीमा के अनुसार पूरे किए जाएंगे।

6. बोलीदाता की घोषणा:

  • अब नीलामी समाप्त होने के तुरंत बाद ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्लेटफ़ॉर्म द्वारा बोलीदाता घोषित होगा और सार्वजनिक रूप से देखा जा सकेगा।

7. LoI जारी करने में विलंब:

  • यदि राज्य सरकार प्रथम किस्त और प्रदर्शन सुरक्षा जमा होने के 30 दिनों के भीतर LoI नहीं जारी करती है, तो दूसरी किस्त का 5% प्रति माह की दर से कटौती की जाएगी।

यह संशोधन सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श के बाद किया गया है और इसका उद्देश्य खनिज ब्लॉक की समय पर संचालन सुनिश्चित करना, विलंब को रोकना और प्रारंभिक उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।

कोयला मंत्रालय ने जारी किए 5 कोयला खदानों के वेस्टिंग ऑर्डर, रोजगार और निवेश में होगी बड़ी बढ़ोतरी

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कोयला मंत्रालय ने अपने नामित प्राधिकरण (Nominated Authority) के माध्यम से आज 5 कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग ऑर्डर (Vesting Orders) जारी किए हैं। इन खदानों के लिए कोल माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट्स (CMDPA) 21 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित किए गए थे।

जिन कोयला खदानों के लिए वेस्टिंग ऑर्डर जारी किए गए हैं, वे हैं —

तांदसी-III और तांदसी-III एक्सटेंशन, सेंदुरी, वेस्ट ऑफ ट्यूब्ड, चितरपुर (संशोधित), और फुटामुरा।
इनमें से चार खदानें आंशिक रूप से अन्वेषित हैं, जबकि एक खदान पूर्ण रूप से अन्वेषित है। इनकी पीक रेटेड क्षमता (PRC) लगभग 3.45 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है तथा इनका भूवैज्ञानिक भंडार लगभग 1,556.31 मिलियन टन (MT) है।

इन खदानों से प्रति वर्ष लगभग ₹360 करोड़ का राजस्व उत्पन्न होने की संभावना है और लगभग ₹517 करोड़ का पूंजी निवेश आकर्षित होगा। इसके साथ ही, ये खदानें लगभग 4,664 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्रदान करेंगी।

इन वेस्टिंग ऑर्डर्स के जारी होने के साथ, अब तक 125 कोयला खदानें वाणिज्यिक कोयला नीलामी के तहत आवंटित या वेस्ट की जा चुकी हैं। सामूहिक रूप से, इन खदानों की कुल PRC लगभग 265.844 MTPA है, जिनसे प्रति वर्ष लगभग ₹37,463 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने और लगभग 3,59,400 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और निवेश आधारित कोयला क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की दिशा में कोयला मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। पारदर्शिता, सतत खनन और निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर मंत्रालय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और ‘विकसित भारत’ की राष्ट्रीय दृष्टि को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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