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मनसेर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर: वित्तीय शासन सुदृढ़ करने पर जोर

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वित्त मंत्रालय के खर्च विभाग (DoE), मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय ने 28 से 30 नवंबर 2025 तक मनसेर, हरियाणा में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय के अधिकारी, हरियाणा राज्य सरकार के प्रतिनिधि तथा स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सार्वजनिक वित्तीय तंत्र से मूल्यवान अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए।

शिविर का उद्देश्य और उद्घाटन

शिविर का शुभारंभ पवन कुमार, मुख्य सलाहकार लागत, के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने समकालीन लोक प्रशासन में सतत सीखने और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके बाद डॉ. गौरी रंगड़ा (हार्टफुलनेस फाउंडेशन) द्वारा “हार्टफुलनेस कम्युनिकेशन” पर सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व और प्रभावी हितधारक संलग्नता को बढ़ावा देना था।

पहला दिन: महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श

पहले दिन मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:

  1. अंतरराष्ट्रीय ज्ञान निकाय (International Knowledge Body) का विकास

  2. नगरपालिका सेवाओं के लिए मानकीकृत लागत निर्धारण (Standardised Costing)

इसके बाद वी. वुअलनाम, सचिव, DoE को प्रमुख विचार और सुझाव प्रस्तुत किए गए। मुख्य सिफारिशों में शामिल थे:

  • DoE के तहत एक नोडल सेल की स्थापना, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत लागत ढांचे विकसित करे, जिसमें नगरपालिका निकायों के लिए भी स्थानीय और वैश्विक संस्थाओं के साथ सहयोग शामिल हो।

  • समयबद्ध रणनीतिक कदमों के माध्यम से मौजूदा चुनौतियों का समाधान और वित्तीय शासन को सुदृढ़ बनाना।

  • भविष्य के चिंतन शिविरों में युवाओं को केंद्रीय भूमिका देने का प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण दोहराया गया।

दूसरा दिन: योग और ज्ञान सत्र

दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद विशेषज्ञों और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से विभिन्न ज्ञान सत्र आयोजित किए गए:

  • राजीव शोरे, IIIT सूरत: AI/ML जैसे उभरते तकनीकी उपकरणों का प्रशासनिक दक्षता, विश्लेषणात्मक क्षमता और पारदर्शिता बढ़ाने में उपयोग।

  • प्रो. नवीन सिरोही, IICA: कॉर्पोरेट गवर्नेंस सिद्धांत और हितधारक सहभागिता रणनीतियाँ।

  • प्रो. संदीप गोयल, MDI गुड़गांव: फोरेंसिक अकाउंटिंग और वित्तीय निगरानी तंत्र का महत्व।

  • प्रो. ऋषभ अग्रवाल, ISB हैदराबाद: सार्वजनिक डेटा और AI के महत्व, और न्यायसंगत यूजर-चार्ज ढांचे का विकास।

इसके बाद राउंड-टेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिसमें यूजर-चार्ज ढांचे, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और ICoAS की भूमिका पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने विश्लेषण और थीम-वार सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

अंतिम दिन: पेशेवर विकास और नए अवसर

30 नवंबर को “Professional Evolution and New Growth Avenues” पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें उभरते क्षेत्रों और कार्यात्मक क्षेत्रों की चर्चा हुई, जहां ICoAS अधिकारी तकनीकी और आर्थिक विकास के संदर्भ में परिवर्तन ला सकते हैं।

शिविर के समापन में मुख्य सलाहकार लागत ने अधिकारियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, समर्पण और वित्तीय शासन सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का धन्यवाद मनमोहन सचदेवा, अतिरिक्त मुख्य सलाहकार लागत, ने किया और अधिकारियों को भविष्य के लिए तैयार रहने की प्रेरणा दी।


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